अडाणी एंटरप्राइजेज को चौथी तिमाही ₹221 करोड़ का घाटा:सालाना रेवेन्यू 20% बढ़ा; कंपनी हर शेयर पर ₹1.30 डिविडेंड देगी

May 1, 2026 - 14:10
 0  0
अडाणी एंटरप्राइजेज को चौथी तिमाही ₹221 करोड़ का घाटा:सालाना रेवेन्यू 20% बढ़ा; कंपनी हर शेयर पर ₹1.30 डिविडेंड देगी
अडाणी एंटरप्राइजेज ने 30 अप्रैल को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए। इस तिमाही में कंपनी को ₹221 करोड़ का नेट लॉस हुआ है। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को ₹3,845 करोड़ का नेट प्रॉफिट हुआ था। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 20% बढ़ा है और यह ₹32,439 करोड़ पर पहुंच गया है जो पिछले साल की तिमाही में ₹26,965 करोड़ था। नतीजों के साथ ही अडाणी एंटरप्राइजेज के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹1.30 प्रति शेयर के डिविडेंड की सिफारिश की है। पूरे साल का मुनाफा 31% बढ़ा, रेवेन्यू ₹1.02 लाख करोड़ पार पूरे वित्त वर्ष (FY26) में अडाणी एंटरप्राइजेज का नेट प्रॉफिट 31% बढ़कर ₹9,339 करोड़ रहा है। इस दौरान कंपनी की कुल आय में 3% की मामूली बढ़त हुई और यह ₹1.02 लाख करोड़ के पार पहुंच गई। पूरे साल के लिए कंपनी का EBITDA ₹16,464 करोड़ दर्ज किया गया है। नए प्रोजेक्ट्स में निवेश के कारण मुनाफे पर असर पड़ा कंपनी ने बताया कि मुनाफे (PAT) में कमी आने की मुख्य वजह हाल ही में शुरू हुए नवी मुंबई एयरपोर्ट और कॉपर प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स हैं। इन नए कमीशन किए गए एसेट्स पर डेप्रिसिएशन बढ़ने के कारण बॉटमलाइन प्रभावित हुई है। हालांकि, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस स्थिर बनी हुई है। कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 3% बढ़कर ₹4,479 करोड़ रहा है, जो पिछले साल ₹4,346 करोड़ था। इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी बिजनेस से हो रही 80% कमाई कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अब उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा कोर इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी पोर्टफोलियो से आ रहा है। कुल EBITDA में इस सेगमेंट का योगदान करीब 80% हो गया है। इससे कंपनी के कैश फ्लो में मजबूती और स्थिरता आई है। कुछ सेगमेंट्स में उतार-चढ़ाव के बावजूद इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस ने कंपनी की स्थिति को मजबूत बनाए रखा है। मैच्योर बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ रही कंपनी: गौतम अडाणी अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने नतीजों पर कहा, "कंपनी अब एक अधिक स्थिर और इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित मॉडल की ओर बढ़ चुकी है। हमारी कमाई (EBITDA) का बड़ा हिस्सा अब उन बिजनेस से आ रहा है जो मैच्योर हो चुके हैं और जिनके पास लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स हैं। यह स्थिति ग्रुप को भविष्य में बेहतर वैल्यू क्रिएशन और लगातार कैश जनरेशन के लिए तैयार करती है।" नॉलेज पार्ट: क्या होता है डेप्रिसिएशन? जब कोई कंपनी बड़ी मशीनरी, बिल्डिंग या एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स शुरू करती है, तो समय के साथ उनकी वैल्यू कम होती जाती है। इसे ही 'डेप्रिसिएशन' कहते हैं। अकाउंटिंग में इसे खर्च के रूप में दिखाया जाता है, जिससे उस तिमाही या साल के शुद्ध मुनाफे (PAT) में कमी दिखती है, भले ही कंपनी का बिजनेस अच्छा चल रहा हो। 1988 में अडाणी एंटरप्राइजेज की स्थापना हुई थी अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड अडाणी ग्रुप की कंपनियों का एक हिस्सा है। 1988 में गौतम अडाणी ने एंटरप्राइजेज की स्थापना की थी। कंपनी के चेयरमैन गौतम अडाणी, मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश अडाणी और CEO विनय प्रकाश हैं। कंपनी एनर्जी और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। अडाणी एंटरप्राइजेज देश का सबसे बड़ बिजनेस इनक्यूबेटर है। यह कंपनी एनर्जी एंड यूटिलिटी, ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स, कंज्यूमर गुड्स और प्राइमरी इंडस्ट्री के क्षेत्र में काम करती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला