शिक्षकों की रैंकिंग आईएएस की तरह, खत्म होगा प्रभार का झगड़ा

Mar 2, 2026 - 09:18
 0  0
शिक्षकों की रैंकिंग आईएएस की तरह, खत्म होगा प्रभार का झगड़ा
बिहार के 5.85 लाख सरकारी शिक्षकों की वरिष्ठता अब आईएएस की तर्ज पर तय की जाएगी। इससे स्कूलों में प्रभार को लेकर होने वाले विवाद समाप्त होंगे। शिक्षा विभाग ने अनुभव और योग्यता के आधार पर रैंकिंग प्रणाली लागू की है, जिसके तहत वरिष्ठ शिक्षकों को बड़े और कनिष्ठ शिक्षकों को छोटे स्कूलों की जिम्मेदारी दी जाएगी। शिक्षा विभाग के अनुसार, हर वर्ष मुख्यालय ही प्रभार को लेकर 7 हजार से अधिक शिकायत आती है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के रैकिंग, वरियता निर्धारित करने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के मुताबिक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के बीच प्रभार को लेकर विवाद, गाली-गलौज और मारपीट होता है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि बिहार के सरकारी स्कूलों में प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। ऐसे में जिन स्कूलों प्रधानाध्यापक नियुक्त नहीं किए गए है, वहां पर नियमानुसार सीनियर शिक्षकों को प्रभार दिया जाएगा। प्रमंडल स्तर पर क्या? बिहार के जिन स्कूलों में प्रधानाध्यापक नियुक्त नहीं हैं, वहां प्रमंडल स्तर पर नियुक्त शिक्षक सबसे सीनियर माने जाएंगे। जहां प्रमंडल स्तर पर नियुक्त शिक्षक नहीं होंगे, वहां अनुभव आधार बनेगा। कक्षा 9-10 पढ़ाने के लिए 8 वर्ष का अनुभव जरूरी होगा। कक्षा 11-12 के लिए 4 वर्ष का अनुभव निर्धारित है। जिम्मेदारी कैसे तय होगी? स्कूलों की जिम्मेदारी देने के दौरान शिक्षकों के अनुभव को विशेष ध्यान में रखा जा रहा है। बड़े स्कूलों की जिम्मेदारी ऐसे प्रधानाध्यापक को दी जाएगी, जिसके पास अधिक शैक्षिक योग्यता के साथ ही अधिक अनुभव होगा। इसके साथ ही कम योग्यता और कम अनुभव वाले प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षकों को छोटे यानि कम संख्या वाले छात्रों के स्कूल की जिम्मेदारी दी जाएगी। शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी कैसे होगी रैकिंग? शिक्षक की रैंकिंग जिला स्तर पर तय की जाएगी। इस दौरान इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपा जाएगा। ये रैंकिंग 1 से 5वीं कक्षा, 6 से 8वीं, 9 से 10वीं और 11 से 12वीं कक्षा के लिए होगी। इसके लिए पहले शिक्षकों की शिकायत दूर की जाएगी। विभाग इसके लिए जिला स्तर पर कैंप लगा रहा है। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है शिक्षा विभाग का फैसला }5.85 लाख गुरुजी की बनेगी सीनियरिटी लिस्ट इस समय स्कूलों में प्रभार को लेकर होने वाले विवाद, गाली-गलौज और मारपीट न केवल शिक्षकों की छवि खराब करते हैं, बल्कि छात्रों के मानस पटल पर भी बुरा असर डालते हैं। इस कदम से स्कूलों में ‘चेन ऑफ कमांड’ स्पष्ट होगी, जिससे शिक्षकों के बीच का अहंकार और टकराव खत्म होगा। शिक्षकों की व्यक्तिगत रैंकिंग को स्कूल की रैंकिंग के साथ जोड़ा जा सकता है। सीनियर और बेहतर रैंकिंग वाले शिक्षकों को बड़े और बेहतर संसाधनों वाले स्कूल मिलना एक प्रकार का ‘रिवॉर्ड सिस्टम’ होगा। शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी। मॉडल स्कूल में क्या?... 534 प्रखंड में मॉडल स्कूल खुलेंगे। यहां ऐसे शिक्षकों की तैनाती होगी जिनमें अनुभव, जानकारी, स्मार्टनेस होना जरूरी है। हिंदी, अंग्रेजी के साथ अन्य भाषा को बोलने वाले, स्मार्ट, एमएड, पीएचडी के साथ ही कई विषयों में योग्य शिक्षकों को सीनियारिटी लिस्ट में पहली रैंकिंग मिलेगी। इसके बाद अंग्रेजी, हिंदी के जानकार के साथ ही एमएड, पीजी करने वाले शिक्षकों को दूसरी रैंकिंग मिलेगी।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला