आज सुबह 4 -मार्च माह पूर्व मुख्य न्यायाधीश मुख्य समाचार पत्र ✉ ꧁𝒬☞︎︎︎♔︎♔︎♔︎☜︎︎︎𝒬꧂ *𝐇𝐀𝐏𝐏𝐘 𝐇𝐎𝐋𝐈* *आपको और आपके परिवार को होली के पावन पर्व पर हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाये!* ☜︎︎︎𝒬꧂ ꧁𝒬☞︎︎︎ *होली के रंगो की तरह आपकी जिंदगी भी, खुशियों के रंगो से भरी हो, मेरी यही कामना है....* ☜︎︎︎𝒬 ꧁𝒬☞︎︎︎हैप्पी होली ☜︎︎︎𝒬꧂ ꧁𝒬☞ *🙏🙏 *☜︎︎︎𝒬꧂
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TRN LIVE: , : *🙏श्री गणेशाय नम:🙏* :
‼️ *जय माता दी* ‼️
,,*ॐ नमो कुलदेवत*,,
*रात्रि ■ कथा*
*!!पाप का धन!!*
एक बार एक गुरु और उनका शिष्य कहीं जा रहे थे रास्ते में उन्हें सोने के सिक्कों से भरा एक थैला मिला
शिष्य जैसे ही उसे उठाने लगा, गुरुजी ने रोकते हुए कहा,
"इसे मत छुओ यह पाप का धन है, यह विनाश का कारण बनेगा।"
शिष्य ने आश्चर्य से पूछा, "गुरुजी, ऐसा कैसे?" गुरुजी बोले, "आओ, छिपकर देखते हैं।"
दोनों पास ही छिपकर बैठ गए थोड़ी देर बाद वहाँ चार सैनिक आए।
उन्होंने जैसे ही सोने से भरा थैला देखा, वे खुशी से झूम उठे
एक सैनिक बोला, "चलो, धन का बँटवारा कर लेते हैं।"
दूसरे सैनिक ने कहा, "पहले भोजन कर लेते हैं.
हममें से दो लोग कुछ सिक्के लेकर शहर जाएँ और खाना ले आएँ।"
दो सैनिक भोजन लाने शहर चले गए पीछे बचे दोनों सैनिकों के मन में लालच आ गया.
उन्होंने योजना बनाई कि जैसे ही वे दोनों लौटेंगे, उन्हें मार देंगे, ताकि धन सिर्फ दो लोगों में बँटे..
उधर शहर गए सैनिकों के मन में भी लालच आ गया..
उन्होंने सोचा कि वे भोजन में ज़हर मिला देंगे, ताकि बाकी दोनों मर जाएँ और सारा धन उन्हीं को मिल जाए.
जब दोनों सैनिक भोजन लेकर लौटे, तो छिपे हुए सैनिकों ने उन्हें मार दिया
फिर वे खुशी-खुशी भोजन करने बैठे लेकिन जैसे ही उन्होंने भोजन किया, ज़हर के
कारण तड़प-तड़प कर मर गए।
इस तरह लालच के कारण चारों सैनिक मारे गए और धन किसी को नहीं मिला यह देखकर गुरुजी ने शिष्य से कहा, "देखा, यही पाप के धन का परिणाम होता है चलो, यहाँ से चलें।"
*तात्पर्य:*
लालच और पाप से कमाया गया धन अंततः विनाश ही लाता है ईमानदा और संतोष ही जीवन में सच्चा सुख देते हैं.
*`पुण्य लाभ के लिए इस पोस्ट को कृपया औरो को भी अवश्य भेजिए`*
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,, *`पंडित.संजय शास्त्री`* ,,
*सम्पर्क = 9860298094 /8790466194*
*कुंडली विश्लेषण, हस्तरेखाविद*
*ASTROLOGY*
*नाम*
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*एक बार सेवा का मोका दे*
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TRN LIVE: 🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक - 04 मार्च 2026*
🌤️ *दिन - बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत - 2082*
🌤️ *शक संवत - 1947*
🌤️ *अयन - उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु - वसंत ऋतु*
🌤️ *मास - चैत्र ( गुजरात-महाराष्ट्र-फाल्गुन)*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - प्रतिपदा शाम 04:48 तक तत्पश्चात द्वितीया*
🌤️ *नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी सुबह 07:39 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी*
🌤️ *योग - धृति सुबह 08:52 तक तत्पश्चात शूल*
🌤️*राहुकाल - दोपहर 12:51 से दोपहर 02:19 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:58*
🌤️ *सूर्यास्त - 06:42*
👉 *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण - होली*
💥 *विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *चैत्र मास* 🌷
🙏🏻 *होली के तुरंत बाद चैत्र मास का प्रारंभ हो जाता है। चैत्र हिन्दू धर्म का प्रथम महीना है।*
👉🏻 *चित्रा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम चैत्र पड़ा (चित्रानक्षत्रयुक्ता पौर्णमासी यत्र सः)।*
➡ *इस वर्ष 04 मार्च 2026 (उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार) चैत्र का आरम्भ होगा और गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार 19 मार्च से चैत्र मास प्रारंभ होगा । चैत्र मास को मधु मास के नाम से जाना जाता है।*
👉🏻 *इस मास में बसंत ऋतु का यौवन पृथ्वी पर देखने को मिलता है।*
👉🏻 *चैत्र में रोहिणी और अश्विनी शून्य नक्षत्र हैं इनमें कार्य करने से धन का नाश होता है।*
🙏🏻 *महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार*
*“चैत्रं तु नियतो मासमेकभक्तेन यः क्षिपेत्। सुवर्णमणिमुक्ताढ्ये कुले महति जायते।।”*
➡ *जो नियम पूर्वक रहकर चैत्रमास को एक समय भोजन करते बिताता है, वह सुवर्ण, मणि और मोतियों से सम्पन्न महान कुल में जन्म लेता है ।*
👉🏻 *चैत्र में गुड़ खाना मना बताया गया है। चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है मलेरिया नहीं होता है।*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार चैत्र में गौ का दान करने से कायिक, वाचिक तथा मानसिक पापों का निवारण होता है .*
👉🏻 *देव प्रतिष्ठा के लिये चैत्र मास शुभ है।*
➡ *चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष का शुभारम्भ होता है। हिन्दू नववर्ष के चैत्र मास से ही शुरू होने के पीछे पौराणिक मान्यता है कि भगवान ब्रह्मदेव ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी।*
*ताकि सृष्टि निरंतर प्रकाश की ओर बढ़े।*
*चैत्रमासि जगद् ब्रह्मा स सर्वा प्रथमेऽवानि ।*
*शुक्ल पक्षे समग्रं तत - तदा सूर्योदय सति ।। (ब्रह्मपुराण)*
🙏🏻 *नारद पुराण में भी कहा गया है की चैत्रमास के शुक्लपक्ष में प्रथमदिं सूर्योदय काल में ब्रह्माजी ने सम्पूर्ण जगत की सृष्टि की थी।*
*चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससज प्रथमेऽहनि ।।*
*शुक्लपक्षे समग्रं वै तदा सूर्योदये सति ।।*
🙏🏻 *इसलिए खास है चैत्र*
*चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र में विष्कुम्भ योग में दिन के समय भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। “कृते च प्रभवे चैत्रे प्रतिपच्छुक्लपक्षगा ।* *रेवत्यां योग-विष्कुम्भे दिवा द्वादश-नाड़िका: ।।* *मत्स्यरूपकुमार्यांच अवतीर्णो हरि: स्वयम् ।।”*
🙏🏻 *चैत्र शुक्ल तृतीया तथा चैत्र पूर्णिमा मन्वरादि तिथियाँ हैं। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है।*
➡ *भविष्यपुराण में चैत्र शुक्ल से विशेष सरस्वती व्रत का विधान वर्णित है ।*
➡ *चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्र मनाये जाते हैं जिसमें व्रत रखने के साथ माँ जगतजननी की पूजा का विशेष विधान है।*
➡ *चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है।*
➡ *युगों में प्रथम सत्ययुग का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से माना जाता है।*
➡ *मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को हुआ था।*
➡ *युगाब्द (युधिष्ठिर संवत) का आरम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को माना जाता है।*
➡ *उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् का प्रारम्भ भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को किया गया था।*
👉🏻 *चैत्र मास में ऋतु परिवर्तन होता है और हमारे आयुर्वेदाचार्यों ने इस मास को स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना है।*
🌷 *पारिभद्रस्य पत्राणि कोमलानि विशेषत:। सुपुष्पाणि समानीय चूर्णंकृत्वा विधानत: ।*
*मरीचिं लवणं हिंगु जीरणेण संयुतम्। अजमोदयुतं कुत्वा भक्षयेद्रोगशान्तये ।*
📖 *सनातन पंचांग संपादक ~ अंजनी निलेश ठक्कर*
📒 *सनातन पंचांग प्रकाशित स्थल ~ सुरत शहर (गुजरात)*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🌷🙏🏻
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*⚜️ आज का राशिफल ⚜️*
*दिनांक : 04 मार्च 2026*
🐐🐂💏💮🐅👩
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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन वृद्धिकारक रहेगा। जिस कार्य से कोई आशा नही रहेगी वहां से भी कुछ ना कुछ लाभ ही होगा। अकस्मात लघु यात्रा आने से दैनिक कार्यो में फेरबदल करना पड़ेगा। आलस्य से आज बचें एक बार किसी कार्य मे विलम्ब हुआ तो रात्रि तक यही क्रम जारी रहेगा। मध्यान बाद व्यस्तता बढ़ेगी व्यवसाय में अकस्मात उछाल आएगा लेकिन इसके अनुरूप आपकी तैयारी नही होने पर खासी मशक्कत करनी पडेगी फिर भी धन की आमद एक से अधिक मार्ग से होगी आर्थिक दृष्टिकोण से भविष्य के प्रति आज निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर मे किसी ना किसी से कलह होकर ही रहेगी। स्वास्थ्य मानसिक दुविधा के कारण सर दर्द अथवा अन्य छोटी मोटी परेशानी आ सकती है।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज आप स्वभाव से विवेक का परिचय देंगे इसके विपरीत घर का वातावरण बेवजह के झमेलों में डालेगा जिस कारण बाहर समय बिताना अच्छा लगेगा। दैनिक कार्य आज व्यवस्थित रहेंगे अधिक से अधिक धन कमाने की मानसिकता चैन से बैठने नही देगी। कार्य क्षेत्र पर अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा व्यस्त रहेंगे फिर भी इसका लाभ आशाजनक नही मिलेगा। आज आप अनैतिक कार्यो से स्वयं ही दूरी बनाकर रहेंगे फिर भी प्रलोभन से स्वयं को बचाना बड़ी चुनौती रहेगी। धन की आमद अन्य दिनों की अपेक्षा सुधरेगी लेकिन घर मे फरमाइशें की सूची भी लंबी रहने के कारण तुरंत निकल जायेगा। सामाजिक कार्यो के प्रति उदासीनता व्यवहारिक जगत से दूरी बढ़ाएगी। स्वयं अथवा परिजन के स्वास्थ्य के ऊपर भी खर्च करना पड़ेगा।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन अशुभ फलदायी रहेगा। घर एवं बाहर की परिस्थितियां पल पल पर क्रोध दिलाएंगी इसलिये आज आपको अधिक से अधिक मौन रहने की सलाह है। कार्य क्षेत्र पर भी सहकर्मी अथवा किसी बाहरी व्यक्ति से तालमेल बिगड़ेगा आपको उनका एवं उनको आपका व्यवहार उद्दंड लगेगा जिससे कलह बढ़ेगी। गलती करने पर मान लें अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। आर्थिक रूप से भी दिन उतार चढ़ाव वाला रहेगा जिस लाभ के आप अधिकारी है उसे कोई अन्य ले जाएगा अथवा बहुत कम होने पर निराश होंगे। व्यवसायी वर्ग तगादा करते समय विनम्र रहें अन्यथा गरमा गर्मी में धन डूब सकता है। मन आज वर्जित और असंवैधानिक कार्यो में शीघ्र आकर्षित होगा। महिलाए घर का वातावरण जितना सुधारने का प्रयास करेंगी उतना अधिक बिगड़ेगा। सेहत में नई समस्या बनेगी।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन पिछले दिन की तुलना में बेहतर रहेगा लेकिन फिर भी आज दिमाग से सभी प्रकार के डर को दूर करके ही लाभ पाया जा सकता है। दिन के आरंभ से मानसिक रूप से हल्कापन अनुभव करेंगे मन मे विचित्र ख्याल चलते रहेंगे। व्यवसायी वर्ग आज जल्दी ही अपने कामो में जुट जाएंगे इसके विपरीत नौकरी वाले लोग पहले विलम्ब करेंगे बाद में कार्य खत्म करने की जल्दी रहेगी। काम-धंधा मध्यान बाद से गति पकड़ेगा आज कोई बड़ा निर्णय ना ही ले तो बेहतर रहेगा। बचकानी हरकतों से आस-पास का माहौल हास्यप्रद बनाएंगे परिवार में धन अथवा अन्य कारण चिता का विषय रहेंगे। संध्या बाद यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी। सेहत में सुधार अनुभव होगा।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन परिस्थिति कुछ एक बातो को छोड़ आपके अनुकूल रहेगी। दिन के आरंभिक भाग में थोड़ी उलझनों का सामना करना पड़ेगा लेकिन इसके बाद अपने कार्यो पर गंभीर होकर ध्यान देंगे। धन लाभ की संभावना दिन भर लगी रहेगी बीच बीच मे पूर्ण होते रहने से मानसिक रूप से संतोष होगा। आज जबरदस्ती किसी के ऊपर कार्य ना थोपे अन्यथा बिगड़ने की संभावना अधिक है। महिलाए घरेलू आवश्यकता में विलंब होने पर नाराज रहेंगी आज मनाना मुश्किल ही रहेगा। सहकर्मी अथवा कोई अन्य आज अंत समय मे अपनी बात से पलटेगा इसलिये परिस्थिति अनुसार पहके से ही तैयार रहें। लंबी यात्रा आज ना करें हानि हो सकती है।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज दिन के आरंभ से जिस कामना से कार्य करेंगे उसके मध्यान तक पूर्ण होने की संभावना है। कार्य व्यवसाय में आज अन्य दिनों की तुलना में कम परिश्रम से अधिक लाभ कमा सकेंगे। घर के सदस्य अथवा सहकर्मी अपनी बात मनवाने के लिये जिद पर अडंगे पूरी ना होने पर जानबूझकर किसी कार्य मे विलम्ब अथवा बिगाड़ भी सकते है। धन की आमद निश्चित होगी समय से थोड़ा आगे पीछे ही सही। नौकरी वाले लोग आज आलस्य में रहेंगे कार्यो को मजबूरी में सर पर आने पर ही करेंगे। दफ्तर अथवा कार्य क्षेत्र पर व्यवसाय की तुलना में व्यवस्था कम रहेगी जिससे लाभ की मात्रा घटेगी। अपनी कमिया को अनदेखा कर अन्य लोगो मे त्रुटियां निकालेंगे। घर की स्थिति कभी सामान्य कभी उग्र रहेगी। शारीरिक दुर्बलता अनुभव करेंगे।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन परिस्थितियां विपरीत बनेगी पूर्व में बनाई योजना परिस्थिति वश अंत समय मे बदलनी पड़ेगी। जिस कार्य ने लाभ देख रहे थे वहां से लाभ तो होगा लेकिन आशा से बहुत कम। व्यवसायी वर्ग धन अथवा महंगी वस्तुओ संबंधित कार्य विचार कर ही करें हानि की संभावना आज अधिक है। धन के फंसने पर आगे के कार्य प्रभावित होंगे। नौकरी वाले जातक विषम परिस्थितियों में भी निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर के वातावरण में कुछ ना कुछ उथल-पुथल लगी रहेगी। धन की आमद प्रयास करने पर हो जाएगी लेकिन आवश्यकता की तुलना में कम रहेगी। महिला वर्ग भावुक कर खर्चा करवाएगी कर्ज बढ़ने के आसार है खर्च आज सोच समझ कर ही करे। सेहत में नया विकार आएगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन सामाजिक एवं राजकीय कार्य के लिये अनुकूल है धन के साथ पद प्रतिष्ठा का भी लाभ मिलेगा। समाज के उच्चवर्गीय लोगो से जान पहचान होगी परन्तु इनसे तुरंत लाभ उठाने का प्रयास ना करें अन्यथा संबंधों में तुरंत खटास भी आ सकती है। सार्वजिक क्षेत्र पर आवश्यकता पड़ने पर ही बोले जल्दबाजी में कुछ अप्रिय बयानबाजी कर देंगे जिससे व्यक्तित्व में कमी आ सकती है। व्यवसायी वर्ग धन कमाने के चक्कर मे जल्दबाजी करेंगे परन्तु ध्यान रहे प्रतिस्पर्धा होने के बाद भी आज धैर्य रखने का परिणाम बाद में अवश्य ही लाभ दिलाएगा। धन की आमद संतोषजनक रहेगी खर्च करने में पीछे नही हटेंगे। घर का वातावरण गलतफहमी के कारण कुछ समय के लिये अशान्त बनेगा। जोड़ो अथवा मासपेशी संबंधित समस्या बन सकती है। यात्रा लाभदायक रहेगी।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन कार्य सिद्धि वाला रहेगा जिस भी कार्य को करेंगे उसमे परिस्थितियां स्वतः ही अनुकूल बनने लगेंगी आवश्यकता के समय सहयोग भी आसानी से मिल जाएगा। अधिकांश कार्य सही दिशा और भाग्य का साथ मिलने से समय पर पूर्ण होंगे। कारोबारी लोग आज किया निवेश का लाभ निकट भविष्य में उठाएंगे फिर भी ज्यादा जोखिम ना लें। नौकरी वाले जातक आज अतिरिक्त कार्य आने पर असहज अनुभव करेंगे सहयोग भी कम मिलेगा फिर भी अपने पराक्रम से थोडे विलम्ब से विजय पा लेंगे। धन की आमद दोपहर बाद निश्चित होगी अतिरिक्त खर्च भी होंगे। गृहस्थ का माहौल पल-पल में बदलने से तालमेल बैठाने में परेशानी होगी। परिजनों के लिये समय निकालें अन्यथा मतभेद हो सकते है। सेहत लगभग सामान्य ही रहेगी।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन दैनिक कार्यो के अलावा धार्मिक कार्यो के लिये भी समय निकालेंगे परोपकार की भावना दिखावे की रहेगी दान पुण्य मतलब के लिये ही करेंगे। व्यवहारिक जगत के लिये आज आप नकारा ही सिद्ध होंगे। अपना कार्य साधने के लिये मीठे बनेंगे परन्तु किसी और का कार्य करने में क्रोध आएगा। कार्य-व्यवसाय से आज लाभ की उम्मीद अधिक रहेगी धन लाभ होगा भी आशाजनक लेकिन असमय होने उत्साहित नही करेगा। नौकरी वाले लोग जदबाजी में कुछ ना कुछ गड़बड़ करेंगे जिसके उजागर होने पर आलोचना होगी। पारिवारिक वातावरण गरिमामय रहेगा लेकिन परिजनों मन ही मन कुछ ना कुछ उधेड़ बुन में रहेंगे। घरेलू कार्यो की टालमटोल से बचे कलह हो सकती है। सेहत थकान को छोड़ सामान्य रहेगी।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। दिन के आरंभ से ही शारीरिक शिथिलता सभी कार्यो में बाधा डालेगी फिर भी जबरदस्ती करना बाद में महंगा पड़ेगा। शारीरिक रूप से आज कुछ ना कुछ परेशानी लगी रहेगी मन अनर्गल प्रवृतियों में भटकेगा। घर अथवा व्यावसायिक कार्यो के प्रति लापरवाही करेंगे लेकिन फिर भी मनोरंजन की योजना बनायेगें। कार्य व्यवसाय से लाभ निश्चित होगा लेकिन किसी के सहयोग से ही। महिलाये भी आरोग्य में कमी रहने के कारण धीमी गति से कार्य करेंगी घर का वातावरण अस्त-व्यस्त रहेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन आशाजनक नही रहेगा फिर भी कर्म की तुलना में अधिक ही होगा। परिवार के सदस्य झुंझलाहट में बेवजह ही एक दूसरे से उलझेंगे। यात्रा टालें।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन यादगार रहेगा। कई दिनों से मन में चल रही कामना की पूर्ति आज होने से अकस्मात खुशी मिलेगी। कार्य व्यवसाय में भी उन्नति के योग है जिस किसी कार्य को करेंगे उसमें स्वयं के बल पर ही सफलता पा लेंगे भागीदारी के कार्यो में बड़े निर्णय लेने से आज बचें अन्यथा तालमेल की कमी के कारण आपस मे फुट पड़ सकती है। महिलाए भ्रामक खबरों पर यकीन ना करें वरना घर का सुरम्य वातावरण छोटी सी गलतफहमी के कारण लंबे समय के लिये अशान्त बनेगा। धन की आमद सही समय पर होगी फिर भी आज संतोष की कमी रहने पर कुछ ना कुछ अभाव अनुभव करेंगे। व्यवहारिक संबंधों को छोड़ अन्य सभी कार्य में विजय मिलेगी। सेहत उत्तम रहेगी।
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TRN LIVE: *📜 04 मार्च 📜*
*🌹 स्वतंत्रता सेनानी लाला हरदयाल // पुण्यतिथि 🌹*
जन्म : 14 अक्टूबर 1884
मृत्यु : 04 मार्च 1939
देश को स्वतंत्र कराने की धुन में जिन्होंने अपनी और अपने परिवार की खुशियों को बलिदान कर दिया, ऐसे ही एक क्रान्तिकारी थे 14 अक्तूबर, 1884 को दिल्ली में जन्मे लाला हरदयाल। इनके पिता श्री गौरादयाल तथा माता श्रीमती भोलीरानी थीं। इन्होंने अपनी सभी परीक्षाएँ सदा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। बी.ए में तो उन्होंने पूरे प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया था।
1905 में शासकीय छात्रवृत्ति पाकर ये ऑक्सफोर्ड जाकर पढ़ने लगे। उन दिनों लन्दन में श्यामजी कृष्ण वर्मा का ‘इंडिया हाउस’ भारतीय छात्रों का मिलन केन्द्र था। बंग-भंग के विरोध में हुए आन्दोलन के समय अंग्रेजों ने जो अत्याचार किये, उन्हें सुनकर हरदयाल जी बेचैन हो उठे। उन्होंने पढ़ाई अधूरी छोड़ दी और लन्दन आकर वर्मा जी के ‘सोशियोलोजिस्ट’ नामक मासिक पत्र में स्वतन्त्रता के पक्ष में लेख लिखने लगे।
पर उनका मन तो भारत आने को छटपटा रहा था। वे विवाहित थे और उनकी पत्नी सुन्दररानी भी उनके साथ विदेश गयी थी। भारत लौटकर 23 वर्षीय हरदयाल जी ने अपनी गर्भवती पत्नी से सदा के लिए विदा ले ली और अपना पूरा समय स्वतन्त्रता प्राप्ति के प्रयास में लगाने लगे। वे सरकारी विद्यालयों एवं न्यायालयों के बहिष्कार तथा स्वभाषा और स्वदेशी के प्रचार पर जोर देते थे। इससे पुलिस एवं प्रशासन उन्हें अपनी आँख का काँटा समझने लगे।
जिन दिनों वे पंजाब के अकाल पीडि़तों की सेवा में लगे थे, तब शासन ने उनके विरुद्ध वारण्ट जारी कर दिया। जब लाला लाजपतराय जी को यह पता लगा, तो उन्होंने हरदयाल जी को भारत छोड़ने का आदेश दिया। अतः वे फ्रान्स चले आये।
फ्रान्स में उन दिनों मादाम कामा, श्यामजी कृष्ण वर्मा तथा सरदार सिंह राणा भारत की क्रान्तिकारी गतिविधियों को हर प्रकार से सहयोग देते थे। उन्होंने हरदयाल जी को सम्पादक बनाकर इटली के जेनेवा शहर से ‘वन्देमातरम्’ नामक अखबार निकाला। इसने विदेशों में बसे भारतीयों के बीच स्वतन्त्रता की अलख जगाने में बड़ी भूमिका निभायी।
1910 में वे सेनफ्रान्सिस्को (कैलिफोर्निया) में अध्यापक बन गये। दो साल बाद वे स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में संस्कृत तथा हिन्दू दर्शन के प्राध्यापक नियुक्त हुए; पर उनका मुख्य ध्येय क्रान्तिकारियों के लिए धन एवं शस्त्र की व्यवस्था करना था।
23 दिसम्बर, 1912 को लार्ड हार्डिंग पर दिल्ली में बम फेंका गया। उस काण्ड में हरदयाल जी को भी पकड़ लिया गया; पर वे जमानत देकर स्विटजरलैंड, जर्मनी और फिर स्वीडर चले गये। 1927 में लन्दन आकर उन्होंने हिन्दुत्व पर एक ग्रन्थ की रचना की।
अंग्रेज जानते थे कि भारत की अनेक क्रान्तिकारी घटनाओं के सूत्र उनसे जुड़ते हैं; पर वे उनके हाथ नहीं आ रहे थे। 1938 में शासन ने उन्हें भारत आने की अनुमति दी; पर हरदयाल जी इस षड्यन्त्र को समझ गये और वापस नहीं आये। अतः अंग्रेजों ने उन्हें वहीं धोखे से जहर दिलवा दिया, जिससे 4 मार्च, 1939 को फिलाडेल्फिया में उनका देहान्त हो गया।
इस प्रकार मातृभूमि को स्वतन्त्र देखने की अधूरी अभिलाषा लिये इस क्रान्तिवीर ने विदेश में ही प्राण त्याग दिये। वे अपनी उस प्रिय पुत्री का मुँह कभी नहीं देख पाये, जिसका जन्म उनके घर छोड़ने के कुछ समय बाद हुआ था।
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TRN LIVE: *📜 04 मार्च 📜*
*🌹 क्रान्तिकारी की मानव कवच 'तोसिको बोस' // पुण्यतिथि 🌹*
जन्म : 1897
मृत्यु : 04 मार्च 1925
तोसिको बोस का नाम भारतीय क्रान्तिकारी इतिहास में अल्पज्ञात है। अपनी जन्मभूमि जापान में वे केवल 28 वर्ष तक ही जीवित रहीं। फिर भी सावित्री तुल्य इस सती नारी का भारतीय स्वाधीनता संग्राम को आगे बढ़ाने में अनुपम योगदान रहा।
रासबिहारी बोस महान क्रान्तिकारी थे। 23 दिसम्बर, 1912 को दिल्ली में तत्कालीन वायसराय के जुलूस पर बम फेंक कर उसे यमलोक पहुँचाने का प्रयास तो हुआ; पर वह पूर्णतः सफल नहीं हो पाया। उस योजना में रासबिहारी बोस की बड़ी भूमिका थी।
अतः अंग्रेज शासन ने उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दूर-दूर तक जाल बिछा दिया। उन्हें पकड़वाने वाले के लिए एक लाख रु. का पुरस्कार भी घोषित किया गया। यदि वे पकड़े जाते, तो मृत्युदण्ड मिलना निश्चित था। अतः सब साथियों के परामर्श से वे 1915 के मई मास में नाम और वेष बदलकर जापान चले गये।
उन दिनों जापान और ब्रिटेन में एक सन्धि थी, जिसके अन्तर्गत भारत का कोई अपराधी यदि जापान में छिपा हो, तो उसे लाकर भारत में मुकदमा चलाया जा सकता है; पर यदि वह जापान का नागरिक है, तो उसे नहीं लाया जा सकता था।
एक अन्य कानून के अनुसार पति-पत्नी में से कोई एक यदि जापानी है, तो दूसरे को स्वतः नागरिकता मिल जाती थी। इसलिए रासबिहारी के मित्रों ने विचार किया कि यदि उनका विवाह किसी जापानी कन्या से करा दिया जाये, तो प्रत्यार्पण का यह संकट टल जाएगा।
रासबिहारी बोस के एक जापानी मित्र आइजो सोमा और उनकी पत्नी कोक्को सोमा ने उन्हें अपने होटल से लगे घर में छिपाकर रखा। इस दौरान उनका परिचय सोमा दम्पति की 20 वर्षीय बेटी तोसिको से हुआ। उसे जब भारतीयों पर ब्रिटिष शासन द्वारा किये जा रहे अत्याचारों का पता लगा, तो उसका हृदय आन्दोलित हो उठा।
रासबिहारी ने उसे क्रान्तिकारियों द्वारा जान पर खेलकर किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। इससे उसके मन में आजादी के इन दीवानों के प्रति प्रेम जाग्रत हो गया। अन्ततः उसने स्वयं ही रासबिहारी बोस से विवाह कर उनकी मानव कवच बनने का निर्णय ले लिया। इतना ही नहीं, उसने अज्ञातवास में भी रासबिहारी का साथ देने का वचन दिया।
तोसिको के माता-पिता के लिए यह निर्णय स्तब्धकारी था, फिर भी उन्होंने बेटी की इच्छा का सम्मान किया। नौ जुलाई, 1918 को रासबिहारी बोस एवं तोसिको का विवाह गुपचुप रूप से सम्पन्न हो गया। इससे रासबिहारी को जापान की नागरिकता मिल गयी। अब वे खुलकर काम कर सकते थे।
उन्होंने इस अवसर का लाभ उठाकर दक्षिण पूर्व एषिया में रह रहे भारतीयों को संगठित किया और वहाँ से साधन जुटाकर भारत में क्रान्तिकारियों के पास भेजे। उन्होंने आसन्न द्वितीय विष्व युद्ध के वातावरण का लाभ उठाकर आजाद हिन्द फौज के गठन में बड़ी भूमिका निभायी।
दो जुलाई, 1923 को रासबिहारी को जापान में रहते हुए सात वर्ष पूरे हो गये। इससे उन्हें स्वतन्त्र रूप से वहाँ की नागरिकता मिल गयी; पर इस गुप्त और अज्ञातवास के कष्टपूर्ण जीवन ने तोसिको को तपेदिक (टी.बी) का रोगी बना दिया। उन दिनों यह असाध्य रोग था। तोसिको मुक्त वातावरण में दो साल भी पति के साथ ठीक से नहीं बिता सकी। 04 मार्च, 1925 को मात्र 28 वर्ष की अल्पायु में वे इस संसार से विदा हो गयीं।
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TRN LIVE: *📜 04 मार्च 📜*
*❄️ राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस ❄️*
4 मार्च को देश में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारतीय सुरक्षा बलों के काम का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। इसमें सभी सुरक्षाकर्मी, पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल, गार्ड, कमांडो, सेना के अधिकारी आदि शामिल हैं।
>> मुख्य बिंदु <<
राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस को सुरक्षा बलों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिवस के द्वारा नागरिकों को देश के प्रति उनके मौलिक कर्तव्यों के बारे में स्मरण करवाया जाता है। इस दिवस पर देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले सुरक्षा जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
सुरक्षा कर्मचारी विभिन्न प्रकार की सुरक्षा जैसे कि राजनीतिक, पारिस्थितिक, आर्थिक, कंप्यूटर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जिम्मेदार हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस हर साल 4 मार्च को मनाया जाता है क्योंकि, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की स्थापना इसी दिन की गई थी।
>> राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद <<
सुरक्षा परिषद भारत की आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक सुरक्षा चिंताओं पर विश्लेषण करती है। इसकी स्थापना 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी।
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TRN LIVE: *📜 04 मार्च 📜*
*📝 राष्ट्रीय व्याकरण दिवस (National Grammar Day) 📝*
राष्ट्रीय व्याकरण दिवस हर साल 4 मार्च को संयुक्त राज्य भर में मनाया जाता है। यह अनुष्ठान मौखिक और लिखित दोनों भाषाओं में सही व्याकरण के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
>> राष्ट्रीय व्याकरण दिवस का महत्व <<
ग्रामर को अंग्रेजी भाषा का बैकबोन कहा जाता है। अंग्रेजी भाषा में वाक्य की संरचना, शब्दों का लहजा और चीजों को कैसे संप्रेषित किया जाना है, यह तय करता है। किसी भी लैंग्वेज के ग्रामर में मामूली अंतर वाक्यों के पूरे अर्थ को बदल सकता है। वस्तुतः किसी भी भाषा में ग्रामर उस भाषा की संरचना का निर्माण करता है। ग्रामर के एक्सपर्ट्स को कभी-कभी ग्रामर संबंधी त्रुटियों के माध्यम से नेविगेट करने में कठिनाई होती है और उन चीज़ों को समझना मुश्किल हो सकता है जिन्हें संप्रेषित किया जाना चाहिए। ऐसे में जबकि भाषा संचार का एक माध्यम है, व्याकरण भाषा के नियम और विनियम बनाता है जिनका हमें पालन करना चाहिए।
>> राष्ट्रीय व्याकरण दिवस का इतिहास <<
पांचवीं शताब्दी ईपू में संस्कृत भाषा में व्याकरण का प्रयोग किए जाने के साक्ष्य मिलते हैं। हालांकि, परंपरागत व्याकरण और अक्षरों की प्रणाली को बाद में ग्रीक के विद्वानों द्वारा विकसित की गई थी। ग्रीक व्याकरणविद् आयोनिसियस थ्रैक्स ने व्याकरण को उस विधा के रूप में परिभाषित किया है जो किसी व्यक्ति को एक भाषा और उसके घटकों को एक दूसरे के संबंध में बोलने और व्यक्त करने की अनुमति देता है। नोम चॉम्स्की, अमेरिकी प्रोफेसर और सार्वजनिक बुद्धिजीवी, जो भाषाविज्ञान के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं, ने अंग्रेजी भाषा के व्याकरण में भारी योगदान दिया, जिससे इसमें नाटकीय परिवर्तन हुए। वर्ष 2008 में, सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ गुड ग्रामर की संस्थापक मार्था ब्रोकेनब्रू ने हर साल 4 मार्च को मनाए जाने वाले ‘नेशनल ग्रामर डे’ की घोषणा की।
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TRN LIVE: *🌹 होली (होलिका दहन) 🌹*
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होलिका हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप नामक दैत्य की बहन और प्रह्लाद नामक विष्णु भक्त की बुआ थी। जिसका जन्म जनपद- कासगंज के सोरों शूकरक्षेत्र नामक पवित्र स्थान पर हुआ था। उसको यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। इस वरदान का लाभ उठाने के लिए विष्णु-विरोधी हिरण्यकश्यप ने उसे आज्ञा दी कि वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में प्रवेश कर जाए, जिससे प्रह्लाद की मृत्यु हो जाए। होलिका ने प्रह्लाद को लेकर अग्नि में प्रवेश किया। ईश्वर कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। होलिका के अंत की खुशी में होली का उत्सव मनाया जाता है।
❊ !! होली की कहानियाँ !!❊
होली भारत के सबसे पुराने पर्वों में से है। यह कितना पुराना है इसके विषय में ठीक जानकारी नहीं है लेकिन इसके विषय में इतिहास पुराण व साहित्य में अनेक कथाएँ मिलती है। इस कथाओं पर आधारित साहित्य और फ़िल्मों में अनेक दृष्टिकोणों से बहुत कुछ कहने के प्रयत्न किए गए हैं लेकिन हर कथा में एक समानता है कि असत्य पर सत्य की विजय और दुराचार पर सदाचार की विजय और विजय को उत्सव मनाने की बात कही गई है।
❉ !! राधा और कृष्ण की कथा !!❉
होली का त्योहार राधा और कृष्ण की पावन प्रेम कहानी से भी जुडा हुआ है। वसंत के सुंदर मौसम में एक दूसरे पर रंग डालना उनकी लीला का एक अंग माना गया है। मथुरा और वृन्दावन की होली राधा और कृष्ण के इसी रंग में डूबी हुई होती है। बरसाने और नंदगाँव की लठमार होली तो प्रसिद्ध है ही देश विदेश में श्रीकृष्ण के अन्य स्थलों पर भी होली की परंपरा है। यह भी माना गया है कि भक्ति में डूबे जिज्ञासुओं का रंग बाह्य रंगों से नहीं खेला जाता, रंग खेला जाता है भगवान्नाम का, रंग खेला जाता है सद्भावना बढ़ाने के लिए, रंग होता है प्रेम का, रंग होता है भाव का, भक्ति का, विश्वास का। होली उत्सव पर होली जलाई जाती है अंहकार की, अहम् की, वैर द्वेष की, ईर्ष्या मत्सर की, संशय की और पाया जाता है विशुद्ध प्रेम अपने आराध्य का, पाई जाती है कृपा अपने ठाकुर की।
✵❉✵!! शिव पार्वती और कामदेव की कथा !!✵❉✵
शिव और पार्वती से संबंधित एक कथा के अनुसार हिमालय पुत्री पार्वती चाहती थीं कि उनका विवाह भगवान शिव से हो जाये पर शिवजी अपनी तपस्या में लीन थे। कामदेव पार्वती की सहायता को आए। उन्होंने पुष्प बाण चलाया और भगवान शिव की तपस्या भंग हो गयी। शिवजी को बड़ा क्रोध आया और उन्होंने अपनी तीसरी आँख खोल दी। उनके क्रोध की ज्वाला में कामदेव का शरीर भस्म हो गया। फिर शिवजी ने पार्वती को देखा। पार्वती की आराधना सफल हुई और शिवजी ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। इस कथा के आधार पर होली की आग में वासनात्मक आकर्षण को प्रतीकत्मक रूप से जला कर सच्चे प्रेम की विजय का उत्सव मनाया जाता है। एक अन्य कथा के अनुसार कामदेव के भस्म हो जाने पर उनकी पत्नी रति ने विलाप किया और शंकर भगवान से कामदेव को जीवित करने की गुहार की। ईश्वर प्रसन्न हुए और उन्होने कामदेव को पुनर्जीवित कर दिया। यह दिन होली का दिन होता है। आज भी रति के विलाप को लोक संगीत के रूप मे गाया जाता है और चंदन की लकड़ी को अग्निदान किया जाता है ताकि कामदेव को भस्म होने मे पीड़ा ना हो। साथ ही बाद मे कामदेव के जीवित होने की खुशी मे रंगो का त्योहार मनाया जाता है।
✵❉✵!! प्रह्लाद और होलिका की कथा !!✵❉✵
होली का त्यौहार प्रह्लाद और होलिका की कथा से भी जुडा हुआ है। विष्णु पुराण की एक कथा के अनुसार प्रह्लाद के पिता दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने तपस्या कर देवताओं से यह वरदान प्राप्त कर लिया कि वह न तो पृथ्वी पर मरेगा न आकाश में, न दिन में मरेगा न रात में, न घर में मरेगा न बाहर, न अस्त्र से मरेगा न शस्त्र से, न मानव से मारेगा न पशु से। इस वरदान को प्राप्त करने के बाद वह स्वयं को अमर समझ कर नास्तिक और निरंकुश हो गया। वह चाहता था कि उनका पुत्र भगवान नारायण की आराधना छोड़ दे, परन्तु प्रह्लाद इस बात के लिये तैयार नहीं था। हिरण्यकश्यपु ने उसेबहुत सी प्राणांतक यातनाएँ दीं लेकिन वह हर बार बच निकला। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। अतः उसने होलिका को आदेश दिया के वह प्रह्लाद को लेकर आग में प्रवेश कर जाए जिससे प्रह्लाद जलकर मर जाए। परन्तु होलिका का यह वरदान उस समय समाप्त हो गया जब उसने भगवान भक्त प्रह्लाद का वध करने का प्रयत्न किया। होलिका अग्नि में जल गई परन्तु नारायण की कृपा से प्रह्लाद का बाल भी बाँका नहीं हुआ। इस घटना की याद में लोग होलिका जलाते हैं और उसके अंत की खुशी में होली का पर्व मनाते हैं।
✵❉✵!! कंस और पूतना की कथा !!✵❉✵
कंस ने मथुरा के राजा वसुदेव से उनका राज्य छीनकर अपने अधीन कर लिया स्वयं शासक बनकर आत्याचार करने लगा। एक भविष्यवाणी द्वारा उसे पता चला कि वसुदेव और देवकी का आठवाँ पुत्र उसके विनाश का कारण होगा। यह जानकर कंस व्याकुल हो उठा और उसने वसुदेव तथा देवकी को कारागार में डाल दिया। कारागार में जन्म लेने वाले देवकी के सात पुत्रों को कंस ने मौत के घाट उतार दिया। आठवें पुत्र के रूप में कृष्ण का जन्म हुआ और उनके प्रताप से कारागार के द्वार खुल गए। वसुदेव रातों रात कृष्ण को गोकुल में नंद और यशोदा के घर पर रखकर उनकी नवजात कन्या को अपने साथ लेते आए। कंस ने जब इस कन्या को मारना चाहा तो वह अदृश्य हो गई और आकाशवाणी हुई कि कंस को मारने वाले तो गोकुल में जन्म ले चुका है। कंस यह सुनकर डर गया और उसने उस दिन गोकुल में जन्म लेने वाले हर शिशु की हत्या कर देने की योजना बनाई। इसके लिए उसने अपने आधीन काम करने वाली पूतना नामक राक्षसी का सहारा लिया। वह सुंदर रूप बना सकती थी और महिलाओं में आसानी से घुलमिल जाती थी। उसका कार्य स्तनपान के बहाने शिशुओं को विषपान कराना था। अनेक शिशु उसका शिकार हुए लेकिन कृष्ण उसकी सच्चाई को समझ गए और उन्होंने पूतना का वध कर दिया। यह फाल्गुन पूर्णिमा का दिन था अतः पूतनावध की खुशी में होली मनाई जाने लगी।
✵❉✵!! राक्षसी ढुंढी की कथा !!✵❉✵
राजा पृथु के समय के समय में ढुंढी नामक एक कुटिल राक्षसी थी। वह अबोध बालकों को खा जाती थी। अनेक प्रकार के जप-तप से उसने बहुत से देवताओं को प्रसन्न कर के उसने वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसे कोई भी देवता, मानव, अस्त्र या शस्त्र नहीं मार सकेगा, ना ही उस पर सर्दी, गर्मी और वर्षा का कोई असर होगा। इस वरदान के बाद उसका अत्याचार बढ़ गया क्यों कि उसको मारना असंभव था। लेकिन शिव के एक शाप के कारण बच्चों की शरारतों से वह मुक्त नहीं थी। राजा पृथु ने ढुंढी के अत्याचारों से तंग आकर राजपुरोहित से उससे छुटकारा पाने का उपाय पूछा। पुरोहित ने कहा कि यदि फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन जब न अधिक सर्दी होगी और न गर्मी सब बच्चे एक एक लकड़ी लेकर अपने घर से निकलें। उसे एक जगह पर रखें और घास-फूस रखकर जला दें। ऊँचे स्वर में तालियाँ बजाते हुए मंत्र पढ़ें और अग्नि की प्रदक्षिणा करें। ज़ोर ज़ोर से हँसें, गाएँ, चिल्लाएँ और शोर करें। तो राक्षसी मर जाएगी। पुरोहित की सलाह का पालन किया गया और जब ढुंढी इतने सारे बच्चों को देखकर अग्नि के समीप आई तो बच्चों ने एक समूह बनाकर नगाड़े बजाते हुए ढुंढी को घेरा, धूल और कीचड़ फेंकते हुए उसको शोरगुल करते हुए नगर के बाहर खदेड़ दिया। कहते हैं कि इसी परंपरा का पालन करते हुए आज भी होली पर बच्चे शोरगुल और गाना बजाना करते हैं।
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TRN LIVE उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में उत्कर्षा से फातिमा बनी युवती का घर में शव मिलने से हड़कंप मच गया है. सूचना पाते ही तहसीलदार और सीओ ने मौके पर पहुंचकर घटना की जांच की. पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है. युवती महाराष्ट्र के रत्नागिरि की रहने वाली थी, जिसे हमीरपुर में धर्मांतरण कराकर मुस्लिम युवक ने अपनी बीबी बनाया था. पुलिस ने परिजनों को सूचना देने के बाद पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है.
दरअसल, बिंवार थाना क्षेत्र के बिगहना गांव निवासी मुर्तजा उर्फ तज्जू पुत्र मुस्ताक अहमद महाराष्ट्र के रत्नागिरि में काम करने गया था. ये पास में सकपाल होटल में काम करने वाली उत्कर्षा (18) को प्रेम जाल में फंसाकर दो साल पहले हमीरपुर ले आया था. बताते है कि मुर्तजा ने अपने घर में उत्कर्षा से शादी करने का फैसला किया.. शादी से पहले उसका धर्मांतरण कराया गया. फिर जबरदस्ती उससे निकाह कर उत्कर्षा को फातिमा बना दिया. निकाह के बाद मुर्तजा ने महाराष्ट्र न जाकर गांव में चिकन की दुकान खोली थी. लेकिन इन दोनों की प्रेम कहानी का खूनी अंत हो गया.
TRN LIVE: ■ _*ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत पर काँग्रेस ने तुरन्त निंदा प्रस्ताव जारी कर दिया ! और इस हमले को पूरे विश्व के शिया मुस्लिम से जोड़ दिया ! काँग्रेस के नेता और पूरा ईको सिस्टम इसके लिए भारत सरकार को कोसने लगे ! ताकि भारत के मुसलमानों को संदेश दे सके कि मोदी सरकार मुस्लिम विरोधी है, खामनेई की हत्या में भारत सरकार का हाथ है!!*_ 🤨
■ *जबकि वांशिगटन पोस्ट खुलेआम इसमें सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का हाथ बता रहा है! दूसरी तरफ जब विश्व युद्ध की आहट सामने दिख रही हो तब कांग्रेस की ये मूर्खता बचकानी हरकत सी ही लगेगी !* 🤨
■ _*ईरान से हमारे सम्बन्धो की दुहाई देने वाली काँग्रेस को ये क्यो नही दिखता कि ईरान ने जिन 8 देशों पर हमले किये उनसे भारत के सम्बंध क्या है ? ईरान ने जिन देशों पर हमला किया वो भी तो गल्फ कंट्री है ? उनमें भी 7 देश इस्लामिक है! जब टेंशन कई देशो के बीच हो तो कोई भी देश अपना स्टैंड अपने हितो के अनुसार लेता है यही समझदारी है!!*_ 🤷🏻♂️
■ *PM मोदी ने UAE के राष्ट्रपति से फोन पर बात की और वहाँ ईरान वके बेवजह हुए हमले से हुई जन धन हानि पर दुःख प्रकट किया ! यहाँ कांग्रेस ईरान के समर्थन में ऐसे आंशू बहा रही जैसे खामनेई पप्पू का अब्बू हो !* 🤨
■ _*कांग्रेस का स्टैंड हमेशा वोट बैंक आधारित रहा और आज भी वही है चाहें उसके लिए देश का नुकसान हो! यही वजह है कि काँग्रेस ने कभी आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नही उठाये !*_🤔
■ *गाजा पर इजराइल के हमला हुआ तब कांग्रेस का लिखित निंदा प्रस्ताव आया, लेकिन इजराइल के मासूम लोगो पर जब गाजा के आतंकियो ने हमला किया कांग्रेस को नही दिखा था ! प्रियंका वाड्रा गाजा समर्थन में बैग टांगकर संसद पंहुचती है, लेकिन पाकिस्तान बांग्लादेश और मुर्शिदाबाद में हिन्दुओ को हत्या पर काँग्रेस चुप रहती है !* 🤨
■ _*कांग्रेस के आंशू हमेशा वोट बैंक पर ही आधारित क्यो होते है? कांग्रेस अपने स्वार्थ के लिए अनचाहे युद्ध मे बेवजह भारत को घसीटकर देश का नुकसान क्यो करना चाहती है ?*_ 🤔
TRN LIVE: *दिल दहला देने वाला हिन्दू विरोधी कांग्रेस का एक और घिनौना सच: केदार नाथ आपदा.*
*जून 2013 उत्तराखंड की जल प्रलय में 6000 अज्ञात लोग मारे गए, 4800 आज तक लापता हैं, कुल 11000 मौतें हुईं।*
*कांग्रेस सरकार को इतनी बड़ी त्रासदी के बारे में तीन दिन बाद चला .....*
*जब एक हेलीकाप्टर पायलट ने देखा कि 'रामबाड़ा' तो गायब है और भागीरथी अपनी जगह से आधा किलोमीटर दूर बह रही है।*
*मरने वालों में हज़ारों हिंदु तीर्थयात्रियों के अलावा...... सैकड़ों राज्य सरकार ,बैंक कर्मी और सैकड़ों घोड़े वाले भी थे, .....*
*मगर तत्कालीन सोनिया-राहुल-बहुगुणा सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी रहीं , .....*
*हज़ारों करोड़ का नुकसान हुआ मगर मनमोहन सिंह ने सिर्फ सौ करोड़ दिये, और पहुँचे बमुश्किल 20-25 करोड़ !!*
*शेष दलालों ने उड़ा लिए!*
*'राहुल' विदेश दौरे पर था तो राहत कार्य का उद्घाटन कौन करता ?*
*ट्रकों को हरी झंडी कौन दिखाता, फोटो किसका खिंचता ?*
*सो जब राहुल बाबा थाईलैंड से लौटे, तब राहुल और सोनिया के फोटो वाली राहत पेटियां तैयार हुईं, और पेटियों में पारले-G के बिस्कुट रखकर राहत सामग्री का नाम दे दिया गया।*
*ट्रक दिल्ली से चले और डीजल खत्म हो जाने के नाम पर रुड़की में खड़े हो गए, आटा और बिस्कुट की पेटियां, जिस पर राजमाता और राहुल बाबा का फोटो छपा हुआ था, अधिकांश, कभी केदारनाथ या अन्य आपदा पीड़ित इलाकों में पहुचे हीं नहीं !*
*रुड़की और हरिद्वार के बाज़ारों में पहुच गईं .....!*
*हज़ारों शव तक नहीं ढूंढे गए।*
*आज भी नरकंकाल भारी मात्रा में बरामद हो रहे हैं ! सैकड़ों तीर्थयात्री तो भूख और ठण्ड से तड़प-तड़प के मर गए, कोई कांग्रेसी सुध लेने वाला नहीं था !*
*मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे जिन्होंने शवों को ढूंढने हेलीकॉप्टर भेजे, जिन्हें राज्य की कांग्रेस सरकार ने उतरने ही नहीं दिया!*
*शवों को चील कौएं और कुत्ते खाते रहे, कांग्रेस और सोनिया की दया नहीं जागी !*
*कितना लिखे, व्यथा लिखते आँखे भीग जाती हैं !*
*वही कांग्रेसी और सेक्युलर गिद्ध ममता और केजरीवाल जैसे लोग एटीएम और बैंक के बाहर लंबी लाइनों के ऊपर झूठा मातम मनाते हुए 15 दिन से संसद को बंधक बनाए हुए थे !*
*केदारनाथ आपदा में मरनेवाले क्या इस देश के नागरिक नहीं थे?*
*दरअसल वह 11000 अभागे तब तुम्हारे वोट बैंक नहीं रहे थे..*
*बस उनके घरवालों की हाय तुम्हें ले डूबी…जो आज वो कुर्सी तुमसे दूर चली गई।*
*बहुत ही हृदय विदारक हादसा था ये जल प्रलह, हमारे सहारनपुर, शामली, मुज़फ्फरनगर, मेरठ तक लाशें नदी नहरों तक में बह रही थीं, इसलिए प्राकृतिक आपदा में कांग्रेस का बड़ा ही शर्मनाक रवैया सामने आया था, और उस वक्त कठपुतली प्रधानमंत्री की औकात नहीं थीं कुछ मदद पहुंचाने की, वहाँ भी वाड्रा ने सकैम किया था..*
*उस वक्त तो ख़ुद देखा है हमने ये सब तो - ऋषिकेश में खड़े उन ट्रकों में डीजल नहीं था , इसके लिए उन्हें पैसे भी नहीं दिए गए थे.*
*ड्राइवरों ने राहत सामग्री बेच कर अपना गुजारा करना भी स्वीकार किया था ,*
*उनका कहना था कि ट्रक मालिक ने डीजल डलवा दिया था अब आगे जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर रहा है.*
*और इसमें सारी गलतियां उन दोगले हिंदुओ की ही है जो आज भी इन जैसी देशद्रोही पार्टी को वोट देकर समर्थन दे रहे है । और एक दिन इन्ही दोगलो की वजह से हिंदुस्थान से हिंदू नदारद हो जायेगा।* *(PC- CA Rajiv Chandak 9881098027)*
TRN LIVE: ये तस्वीर ईरान और उसके भारत में पल रहे पिल्लों के मुंह पर तमाचा है, चित्र मे मौजूद ये दोनों पारसी जन गण नहीं बल्कि भारत भाग्य विधाता है।
एक जे आर डी टाटा और दूसरे हमारे परमाणु प्रोग्राम के जनक होमी जहांगीर भाभा।
यदि ये दो पारसी ना होते तो शायद भारत के पास परमाणु बम ही ना होता। मै पारसी शब्द बार बार प्रयोग कर रहा हूँ, नस्लीयता के लिए नहीं बल्कि आपको ये बताने के लिए कि ये वे ही पारसी है जिन्हे ईरान से भगाया गया था। ज़ब इस्लाम ईरान पहुंचा तो वहाँ के स्थानीय पारसियों पर कहर ढाया और पारसी भागकर भारत की शरण मे आये।
गुजरात के राजा ने पारसियों के सरदार से कहा कि आप गिलास भरे दूध की तरह हो गए हो और अब हम शरण नहीं दे सकते तब उस सरदार ने कहा था कि हम पारसी आपके लिए दूध नहीं शक़्कर का काम करेंगे।
पारसी समुदाय एक एक अक्षर पर खड़ा उतरा, पारसियों ने भारत भूमि के लिए जो योगदान दिया उसके लिए उनका हदय से आभार। इसी पारसी समुदाय मे होमी जहाँगीर भाभा जन्मे, जिन्होंने भारत को परमाणु शक्ति बनाया। वह कष्ट समय था, भाभा परमाणु संयंत्र को लेकर रिसर्च करना चाहते थे।
भाभा की आर्थिक सहायता मैसूर के महाराज ने की, बाद मे देश आजाद हो गया। भाभा जानते थे गाँधीमयी कांग्रेस परमाणु बम के लिए नहीं मानेगी, इसलिए उन्होंने परमाणु बम की जगह साधारण संयंत्र का आइडिया पीच किया। नेहरू सहमत थे मगर आर्थिक रूप से विवश, तब देश के काम आया एक दूसरा पारसी।
टाटा ग्रुप के चेयरमेन जे आर डी टाटा आगे आये और संयंत्र स्थापित करने मे भाभा को सहयोग दिया। उन्ही संयंत्रो के दम पर कालांतर मे भारत परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बना और आज जो कहर ईरान पर ढाया जा रहा है उस कहर को इन्ही पारसियों की सूझ बूझ ने रोका हुआ है।
ईरान वो देश जिसने भाभा और टाटा के पुरखो को धर्म देखकर भगाया था आज इसी परमाणु शक्ति के लिए दर दर भटक रहा है और अमेरिका के हाथो पीट रहा है। इसके विपरीत भारत जिसने बिना धर्म देखे पारसियों को शरण दी, उस भारत को पारसियों ने भारत माता का सपूत होने का परिचय दिया।
मैं ये नहीं कहता कि हिन्दू परमाणु बम नहीं बना सकते थे, बात किसी संप्रदाय की है ही नहीं। मुद्दा सिर्फ मजहबी नफरत का है, हम भी कोई सेक्युलर नहीं है लेकिन ईश्वर ना करें हम यदि साम्राज्यवादी बन गए और किसी पराये देश को जीत ले तो हमारे अंदर इतनी परिपक्वता है कि संस्कृति के आधार पर उस देश के निर्दोष नागरिको का संहार नहीं करेंगे।
यदि ईरान भी नहीं करता तो आज भाभा और टाटा जैसे लोग उनके पास होते और शायद वे परमाणु शस्त्र सम्पन्न होते। जे आर डी टाटा और एच जे भाभा जैसे भारत मणियों के लिए तो पूरा हिन्दू समाज आभारी है, अन्य समुदाय विशेषकर मुसलमान इनसे कुछ सीखे। देश आपके लिए क्या करता है ये जरुरी नहीं है जरुरी है आप देश के कितना काम आते है।
जय हिंद जय भारत 🇮🇳🚩
Happy Holi 🔥
TRN LIVE: *धन गया तो कमा लेंगे, लेकिन धर्म गया तो अधर्मी जीने नहीं देंगे।"*
*राष्ट्र प्रथम, धर्म सर्वोपरि: क्यों मोदी जी ही हैं देश की पहली पसंद?*
आज सोशल मीडिया पर यह बात केवल एक नारा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिल की आवाज बन चुकी है। जैसा कि इस तस्वीर में स्पष्ट संदेश दिया गया है—"धन गया तो कमा लेंगे, लेकिन धर्म गया तो अधर्मी जीने नहीं देंगे।" यह पंक्तियाँ हमारी संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
हमें मोदी जी और भाजपा पर गर्व क्यों है?
धर्म और संस्कृति का पुनरुत्थान: दशकों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर हो या काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प, मोदी सरकार ने दिखा दिया है कि विकास और विरासत साथ-साथ चल सकते हैं।
अखंड भारत का संकल्प: धारा 370 को हटाकर कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ना और देश की सीमाओं को सुरक्षित करना केवल भाजपा के साहसी नेतृत्व में ही संभव हो पाया
गरीब कल्याण और अंत्योदय: बिना किसी भेदभाव के हर घर तक राशन, पानी और बिजली पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता रही है।
वैश्विक मंच पर भारत का डंका: आज भारत की बात दुनिया सुनती है। हमारी अर्थव्यवस्था और सामरिक शक्ति ने विश्व में अपना लोहा मनवाया है।
हमें यह समझना होगा कि धन और भौतिक सुख दोबारा हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन यदि हमने अपनी जड़ों, अपने संस्कारों और अपने धर्म को खो दिया, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ नहीं करेंगी। मोदी जी के नेतृत्व में आज हिंदू समाज और पूरा भारतवर्ष गौरव के साथ सिर उठाकर चल रहा है।
यह केवल एक वोट की बात नहीं है, यह हमारे अस्तित्व और आने वाले कल की सुरक्षा की बात है। आइए, कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें और 'फिर एक बार, मोदी सरकार' के
TRN LIVE: *सलीम वास्तिक पर जानलेवा हमले का दूसरा आरोपी गुलफाम भी एनकाउंटर में ढेर*
गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में हुआ एनकाउंटर
सलीम वास्तिक की गर्दन काटने वाला जो एक पहले 72 हूर के पास गया था, अब दूसरा भी 72 हूरों के पास चला गया है, सारे खुशी मनाएं और जोरदार तरीके से होली मनाएं और मिठाई बांटे जय श्री राम, हर हर महादेव।
TRN LIVE: ये तस्वीर ईरान के मुंह पर तमाचा है, चित्र मे मौजूद ये दोनों पारसी जन गण नहीं बल्कि भारत भाग्य विधाता है। एक जे आर डी टाटा और दूसरे हमारे परमाणु प्रोग्राम के जनक होमी जहांगीर भाभा।
यदि ये दो पारसी ना होते तो शायद भारत के पास परमाणु बम ही ना होता। मै पारसी शब्द बार बार प्रयोग कर रहा हूँ, नस्लीयता के लिए नहीं बल्कि आपको ये बताने के लिए कि ये वे ही पारसी है जिन्हे ईरान से भगाया गया था। ज़ब इस्लाम ईरान पहुंचा तो वहाँ के स्थानीय पारसियों पर कहर ढाया और पारसी भागकर भारत की शरण मे आये।
गुजरात के राजा ने पारसियों के सरदार से कहा कि आप गिलास भरे दूध की तरह हो गए हो और अब हम शरण नहीं दे सकते तब उस सरदार ने कहा था कि हम पारसी आपके लिए दूध नहीं शक़्कर का काम करेंगे।
पारसी समुदाय एक एक अक्षर पर खड़ा उतरा, पारसियों ने भारत भूमि के लिए जो योगदान दिया उसके लिए उनका हदय से आभार। इसी पारसी समुदाय मे होमी जहाँगीर भाभा जन्मे, जिन्होंने भारत को परमाणु शक्ति बनाया। वह कष्ट समय था, भाभा परमाणु संयंत्र को लेकर रिसर्च करना चाहते थे।
भाभा की आर्थिक सहायता मैसूर के महाराज ने की, बाद मे देश आजाद हो गया। भाभा जानते थे गाँधीमयी कांग्रेस परमाणु बम के लिए नहीं मानेगी, इसलिए उन्होंने परमाणु बम की जगह साधारण संयंत्र का आइडिया पीच किया। नेहरू सहमत थे मगर आर्थिक रूप से विवश, तब देश के काम आया एक दूसरा पारसी।
टाटा ग्रुप के चेयरमेन जे आर डी टाटा आगे आये और संयंत्र स्थापित करने मे भाभा को सहयोग दिया। उन्ही संयंत्रो के दम पर कालांतर मे भारत परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बना और आज जो कहर ईरान पर ढाया जा रहा है उस कहर को इन्ही पारसियों की सूझ बूझ ने रोका हुआ है।
ईरान वो देश जिसने भाभा और टाटा के पुरखो को धर्म देखकर भगाया था आज इसी परमाणु शक्ति के लिए दर दर भटक रहा है और अमेरिका के हाथो पीट रहा है। इसके विपरीत भारत जिसने बिना धर्म देखे पारसियों को शरण दी, उस भारत को पारसियों ने भारत माता का सपूत होने का परिचय दिया।
मैं ये नहीं कहता कि हिन्दू परमाणु बम नहीं बना सकते थे, बात किसी संप्रदाय की है ही नहीं। मुद्दा सिर्फ मजहबी नफरत का है, हम भी कोई सेक्युलर नहीं है लेकिन ईश्वर ना करें हम यदि साम्राज्यवादी बन गए और किसी पराये देश को जीत ले तो हमारे अंदर इतनी परिपक्वता है कि संस्कृति के आधार पर उस देश के निर्दोष नागरिको का संहार नहीं करेंगे।
यदि ईरान भी नहीं करता तो आज भाभा और टाटा जैसे लोग उनके पास होते और शायद वे परमाणु शस्त्र सम्पन्न होते। जे आर डी टाटा और एच जे भाभा जैसे भारत मणियों के लिए तो पूरा हिन्दू समाज आभारी है, अन्य समुदाय विशेषकर मुसलमान इनसे कुछ सीखे। देश आपके लिए क्या करता है ये जरुरी नहीं है जरुरी है आप देश के कितना काम आते है।
TRN LIVE: *मुक्ति मार्ग पञ्चाङ्ग*
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*आज का पञ्चाङ्ग एवम् राशिफल*
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*बुधवार, ०४ मार्च २०२६*
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*सूर्योदय: - ०६:५२*
*सूर्यास्त: - ०६:२६*
*चन्द्रोदय: - १९:१६*
*चन्द्रास्त: - ०७:००*
*अयन - उत्तरायणे (दक्षिण गोले)*
*ऋतु: 🌳 बसन्त*
*शक सम्वत: - १९४७ (विश्वावसु)*
*विक्रम सम्वत: - २०८२ (सिद्धार्थी)*
*युगाब्द (कलि संवत)-५१२७*
*मास - चैत्र*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - प्रतिपदा (१६:४८ से द्वितीया)*
*नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी (०७:३९ से उत्तराफाल्गुनी)*
*योग - धृति (०८:५२ से शूल)*
*प्रथम करण - कौलव (१६:४८ तक)*
*द्वितीय करण - तैतिल (२८:५१ तक)*
*॥गोचर ग्रहा:॥*
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*सूर्य - कुम्भ*
*चंद्र - कन्या (१३:४५ से)*
*मंगल - कुम्भ (अस्त, पश्चिम , मार्गी)*
*बुध - कुम्भ (अस्त, पश्चिम, वक्री)*
*गुरु - मिथुन (उदित, पूर्व, वक्री)*
*शुक्र - मीन (उदित, पश्चिम, मार्गी)*
*शनि - मीन (उदय, पूर्व, मार्गी)*
*राहु - कुम्भ*
*केतु - सिंह*
*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*
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*अभिजित मुहूर्त*
*अमृत काल - २४:५४+ से २६:३२+*
*विजय मुहूर्त - १४:२५ से १५:१२*
*गोधूलि मुहूर्त - १८:१५ से १८:४०*
*सायाह्न सन्ध्या - १८:१८ से १९:३२*
*निशिता मुहूर्त - २४:०३+ से २४:५३+*
*राहुकाल - १२:२९ से १३:५६*
*राहुवास - दक्षिण-पश्चिम*
*यमगण्ड - ०८:०७ से ०९:३४*
*दुर्मुहूर्त - १२:०५ से १२:५२*
*होमाहुति - चन्द्र (०७:३९ से मंगल)*
*दिशा शूल - उत्तर*
*नक्षत्र शूल - उत्तर (०७:३९ से)*
*अग्निवास - आकाश*
*चन्द्र वास - पूर्व (दक्षिण १३:४५ से)*
*शिववास - गौरी के साथ (१६:४८ से सभा में)*
*चौघड़िया विचार*
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*॥दिन का चौघड़िया॥*
*१ - लाभ २ - अमृत*
*३ - काल ४ - शुभ*
*५ - रोग ६ - उद्वेग*
*७ - चर ८ - लाभ*
*॥रात्रि का चौघड़िया॥*
*१ - उद्वेग २ - शुभ*
*३ - अमृत ४ - चर*
*५ - रोग ६ - काल*
*७ - लाभ ८ - उद्वेग*
*नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।*
*शुभ यात्रा दिशा*
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*दक्षिण-पूर्व (गुड़ अथवा दूध का सेवन कर यात्रा करें)*
*तिथि विशेष*
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*चैत्र कृष्ण पक्ष आरम्भ,धुलण्डी बसन्तोत्सव, गणगौर पूजा आरम्भ, शुद्ध विवाह मुहूर्त धनु-मकर ल० (मध्यरात्रि ०२:०५ से अंतरात्रि ०५:५५ तक), व्यवसाय आरम्भ मुहूर्त प्रातः ०७:३९ से ०९:४४ तक आदि।*
*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*
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*आज ०७:३९ तक जन्मे शिशुओ का नाम पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (टू) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार (टे, टो, प, पी) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।*
*उदय-लग्न मुहूर्त*
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*कुम्भ - ०५:४७ से ०७:१३*
*मीन - ०७:१३ से ०८:३६*
*मेष - ०८:३६ से १०:१०*
*वृषभ - १०:१० से १२:०५*
*मिथुन - १२:०५ से १४:२०*
*कर्क - १४:२० से १६:४१*
*सिंह - १६:४१ से १९:००*
*कन्या - १९:०० से २१:१८*
*तुला - २१:१८ से २३:३९*
*वृश्चिक - २३:३९ से २५:५८+*
*धनु - २५:५८+ से २८:०२+*
*मकर - २८:०२+ से २९:४३+*
*पञ्चक रहित मुहूर्त*
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*चोर पञ्चक - ०६:४० से ०७:१३*
*शुभ मुहूर्त - ०७:१३ से ०७:३९*
*रोग पञ्चक - ०७:३९ से ०८:३६*
*चोर पञ्चक - ०८:३६ से १०:१०*
*शुभ मुहूर्त - १०:१० से १२:०५*
*रोग पञ्चक - १२:०५ से १४:२०*
*शुभ मुहूर्त - १४:२० से १६:४१*
*मृत्यु पञ्चक - १६:४१ से १६:४८*
*अग्नि पञ्चक - १६:४८ से १९:००*
*शुभ मुहूर्त - १९:०० से २१:१८*
*रज पञ्चक - २१:१८ से २३:३९*
*शुभ मुहूर्त - २३:३९ से २५:५८+*
*चोर पञ्चक - २५:५८+ से २८:०२+*
*शुभ मुहूर्त - २८:०२+ से २९:४३+*
*रोग पञ्चक - २९:४३+ से ३०:३९+*
*नोट- पंचांग में जहां कहीं भी समय के साथ उपर्युक्त - (➕) चिन्ह का प्रयोग किया जा रहा है वहां उसका आशय अगले दिवस के समय के लिये समझा जाये॥*
*आज का सुविचार*
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*ज्ञान अर्जन कभी किसी का समय नष्ट नहीं करता, बल्कि भविष्य को उज्ज्वल करता है॥*
*आज का राशिफल*
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*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)*
*आज का दिन वृद्धिकारक रहेगा। जिस कार्य से कोई आशा नही रहेगी वहां से भी कुछ ना कुछ लाभ ही होगा। अकस्मात लघु यात्रा आने से दैनिक कार्यो में फेरबदल करना पड़ेगा। आलस्य से आज बचें एक बार किसी कार्य मे विलम्ब हुआ तो रात्रि तक यही क्रम जारी रहेगा। मध्यान बाद व्यस्तता बढ़ेगी व्यवसाय में अकस्मात उछाल आएगा लेकिन इसके अनुरूप आपकी तैयारी नही होने पर खासी मशक्कत करनी पडेगी फिर भी धन की आमद एक से अधिक मार्ग से होगी आर्थिक दृष्टिकोण से भविष्य के प्रति आज निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर मे किसी ना किसी से कलह होकर ही रहेगी। स्वास्थ्य मानसिक दुविधा के कारण सर दर्द अथवा अन्य छोटी मोटी परेशानी आ सकती है।*
*वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
*आज आप स्वभाव से विवेक का परिचय देंगे इसके विपरीत घर का वातावरण बेवजह के झमेलों में डालेगा जिस कारण बाहर समय बिताना अच्छा लगेगा। दैनिक कार्य आज व्यवस्थित रहेंगे अधिक से अधिक धन कमाने की मानसिकता चैन से बैठने नही देगी। कार्य क्षेत्र पर अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा व्यस्त रहेंगे फिर भी इसका लाभ आशाजनक नही मिलेगा। आज आप अनैतिक कार्यो से स्वयं ही दूरी बनाकर रहेंगे फिर भी प्रलोभन से स्वयं को बचाना बड़ी चुनौती रहेगी। धन की आमद अन्य दिनों की अपेक्षा सुधरेगी लेकिन घर मे फरमाइशें की सूची भी लंबी रहने के कारण तुरंत निकल जायेगा। सामाजिक कार्यो के प्रति उदासीनता व्यवहारिक जगत से दूरी बढ़ाएगी। स्वयं अथवा परिजन के स्वास्थ्य के ऊपर भी खर्च करना पड़ेगा।*
*मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)*
*आज का दिन अशुभ फलदायी रहेगा। घर एवं बाहर की परिस्थितियां पल पल पर क्रोध दिलाएंगी इसलिये आज आपको अधिक से अधिक मौन रहने की सलाह है। कार्य क्षेत्र पर भी सहकर्मी अथवा किसी बाहरी व्यक्ति से तालमेल बिगड़ेगा आपको उनका एवं उनको आपका व्यवहार उद्दंड लगेगा जिससे कलह बढ़ेगी। गलती करने पर मान लें अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। आर्थिक रूप से भी दिन उतार चढ़ाव वाला रहेगा जिस लाभ के आप अधिकारी है उसे कोई अन्य ले जाएगा अथवा बहुत कम होने पर निराश होंगे। व्यवसायी वर्ग तगादा करते समय विनम्र रहें अन्यथा गरमा गर्मी में धन डूब सकता है। मन आज वर्जित और असंवैधानिक कार्यो में शीघ्र आकर्षित होगा। महिलाए घर का वातावरण जितना सुधारने का प्रयास करेंगी उतना अधिक बिगड़ेगा। सेहत में नई समस्या बनेगी।*
*कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
*आज का दिन पिछले दिन की तुलना में बेहतर रहेगा लेकिन फिर भी आज दिमाग से सभी प्रकार के डर को दूर करके ही लाभ पाया जा सकता है। दिन के आरंभ से मानसिक रूप से हल्कापन अनुभव करेंगे मन मे विचित्र ख्याल चलते रहेंगे। व्यवसायी वर्ग आज जल्दी ही अपने कामो में जुट जाएंगे इसके विपरीत नौकरी वाले लोग पहले विलम्ब करेंगे बाद में कार्य खत्म करने की जल्दी रहेगी। काम-धंधा मध्यान बाद से गति पकड़ेगा आज कोई बड़ा निर्णय ना ही ले तो बेहतर रहेगा। बचकानी हरकतों से आस-पास का माहौल हास्यप्रद बनाएंगे परिवार में धन अथवा अन्य कारण चिता का विषय रहेंगे। संध्या बाद यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी। सेहत में सुधार अनुभव होगा।*
*सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
*आज के दिन परिस्थिति कुछ एक बातो को छोड़ आपके अनुकूल रहेगी। दिन के आरंभिक भाग में थोड़ी उलझनों का सामना करना पड़ेगा लेकिन इसके बाद अपने कार्यो पर गंभीर होकर ध्यान देंगे। धन लाभ की संभावना दिन भर लगी रहेगी बीच बीच मे पूर्ण होते रहने से मानसिक रूप से संतोष होगा। आज जबरदस्ती किसी के ऊपर कार्य ना थोपे अन्यथा बिगड़ने की संभावना अधिक है। महिलाए घरेलू आवश्यकता में विलंब होने पर नाराज रहेंगी आज मनाना मुश्किल ही रहेगा। सहकर्मी अथवा कोई अन्य आज अंत समय मे अपनी बात से पलटेगा इसलिये परिस्थिति अनुसार पहके से ही तैयार रहें। लंबी यात्रा आज ना करें हानि हो सकती है।*
*कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
*आज दिन के आरंभ से जिस कामना से कार्य करेंगे उसके मध्यान तक पूर्ण होने की संभावना है। कार्य व्यवसाय में आज अन्य दिनों की तुलना में कम परिश्रम से अधिक लाभ कमा सकेंगे। घर के सदस्य अथवा सहकर्मी अपनी बात मनवाने के लिये जिद पर अडंगे पूरी ना होने पर जानबूझकर किसी कार्य मे विलम्ब अथवा बिगाड़ भी सकते है। धन की आमद निश्चित होगी समय से थोड़ा आगे पीछे ही सही। नौकरी वाले लोग आज आलस्य में रहेंगे कार्यो को मजबूरी में सर पर आने पर ही करेंगे। दफ्तर अथवा कार्य क्षेत्र पर व्यवसाय की तुलना में व्यवस्था कम रहेगी जिससे लाभ की मात्रा घटेगी। अपनी कमिया को अनदेखा कर अन्य लोगो मे त्रुटियां निकालेंगे। घर की स्थिति कभी सामान्य कभी उग्र रहेगी। शारीरिक दुर्बलता अनुभव करेंगे।*
*तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
*आज के दिन परिस्थितियां विपरीत बनेगी पूर्व में बनाई योजना परिस्थिति वश अंत समय मे बदलनी पड़ेगी। जिस कार्य ने लाभ देख रहे थे वहां से लाभ तो होगा लेकिन आशा से बहुत कम। व्यवसायी वर्ग धन अथवा महंगी वस्तुओ संबंधित कार्य विचार कर ही करें हानि की संभावना आज अधिक है। धन के फंसने पर आगे के कार्य प्रभावित होंगे। नौकरी वाले जातक विषम परिस्थितियों में भी निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर के वातावरण में कुछ ना कुछ उथल-पुथल लगी रहेगी। धन की आमद प्रयास करने पर हो जाएगी लेकिन आवश्यकता की तुलना में कम रहेगी। महिला वर्ग भावुक कर खर्चा करवाएगी कर्ज बढ़ने के आसार है खर्च आज सोच समझ कर ही करे। सेहत में नया विकार आएगा।*
*वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
*आज का दिन सामाजिक एवं राजकीय कार्य के लिये अनुकूल है धन के साथ पद प्रतिष्ठा का भी लाभ मिलेगा। समाज के उच्चवर्गीय लोगो से जान पहचान होगी परन्तु इनसे तुरंत लाभ उठाने का प्रयास ना करें अन्यथा संबंधों में तुरंत खटास भी आ सकती है। सार्वजिक क्षेत्र पर आवश्यकता पड़ने पर ही बोले जल्दबाजी में कुछ अप्रिय बयानबाजी कर देंगे जिससे व्यक्तित्व में कमी आ सकती है। व्यवसायी वर्ग धन कमाने के चक्कर मे जल्दबाजी करेंगे परन्तु ध्यान रहे प्रतिस्पर्धा होने के बाद भी आज धैर्य रखने का परिणाम बाद में अवश्य ही लाभ दिलाएगा। धन की आमद संतोषजनक रहेगी खर्च करने में पीछे नही हटेंगे। घर का वातावरण गलतफहमी के कारण कुछ समय के लिये अशान्त बनेगा। जोड़ो अथवा मासपेशी संबंधित समस्या बन सकती है। यात्रा लाभदायक रहेगी।*
*धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)*
*आज का दिन कार्य सिद्धि वाला रहेगा जिस भी कार्य को करेंगे उसमे परिस्थितियां स्वतः ही अनुकूल बनने लगेंगी आवश्यकता के समय सहयोग भी आसानी से मिल जाएगा। अधिकांश कार्य सही दिशा और भाग्य का साथ मिलने से समय पर पूर्ण होंगे। कारोबारी लोग आज किया निवेश का लाभ निकट भविष्य में उठाएंगे फिर भी ज्यादा जोखिम ना लें। नौकरी वाले जातक आज अतिरिक्त कार्य आने पर असहज अनुभव करेंगे सहयोग भी कम मिलेगा फिर भी अपने पराक्रम से थोडे विलम्ब से विजय पा लेंगे। धन की आमद दोपहर बाद निश्चित होगी अतिरिक्त खर्च भी होंगे। गृहस्थ का माहौल पल-पल में बदलने से तालमेल बैठाने में परेशानी होगी। परिजनों के लिये समय निकालें अन्यथा मतभेद हो सकते है। सेहत लगभग सामान्य ही रहेगी।*
*मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)*
*आज के दिन दैनिक कार्यो के अलावा धार्मिक कार्यो के लिये भी समय निकालेंगे परोपकार की भावना दिखावे की रहेगी दान पुण्य मतलब के लिये ही करेंगे। व्यवहारिक जगत के लिये आज आप नकारा ही सिद्ध होंगे। अपना कार्य साधने के लिये मीठे बनेंगे परन्तु किसी और का कार्य करने में क्रोध आएगा। कार्य-व्यवसाय से आज लाभ की उम्मीद अधिक रहेगी धन लाभ होगा भी आशाजनक लेकिन असमय होने उत्साहित नही करेगा। नौकरी वाले लोग जदबाजी में कुछ ना कुछ गड़बड़ करेंगे जिसके उजागर होने पर आलोचना होगी। पारिवारिक वातावरण गरिमामय रहेगा लेकिन परिजनों मन ही मन कुछ ना कुछ उधेड़ बुन में रहेंगे। घरेलू कार्यो की टालमटोल से बचे कलह हो सकती है। सेहत थकान को छोड़ सामान्य रहेगी।*
*कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
*आज का दिन उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। दिन के आरंभ से ही शारीरिक शिथिलता सभी कार्यो में बाधा डालेगी फिर भी जबरदस्ती करना बाद में महंगा पड़ेगा। शारीरिक रूप से आज कुछ ना कुछ परेशानी लगी रहेगी मन अनर्गल प्रवृतियों में भटकेगा। घर अथवा व्यावसायिक कार्यो के प्रति लापरवाही करेंगे लेकिन फिर भी मनोरंजन की योजना बनायेगें। कार्य व्यवसाय से लाभ निश्चित होगा लेकिन किसी के सहयोग से ही। महिलाये भी आरोग्य में कमी रहने के कारण धीमी गति से कार्य करेंगी घर का वातावरण अस्त-व्यस्त रहेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन आशाजनक नही रहेगा फिर भी कर्म की तुलना में अधिक ही होगा। परिवार के सदस्य झुंझलाहट में बेवजह ही एक दूसरे से उलझेंगे। यात्रा टालें।*
*मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
*आज का दिन यादगार रहेगा। कई दिनों से मन में चल रही कामना की पूर्ति आज होने से अकस्मात खुशी मिलेगी। कार्य व्यवसाय में भी उन्नति के योग है जिस किसी कार्य को करेंगे उसमें स्वयं के बल पर ही सफलता पा लेंगे भागीदारी के कार्यो में बड़े निर्णय लेने से आज बचें अन्यथा तालमेल की कमी के कारण आपस मे फुट पड़ सकती है। महिलाए भ्रामक खबरों पर यकीन ना करें वरना घर का सुरम्य वातावरण छोटी सी गलतफहमी के कारण लंबे समय के लिये अशान्त बनेगा। धन की आमद सही समय पर होगी फिर भी आज संतोष की कमी रहने पर कुछ ना कुछ अभाव अनुभव करेंगे। व्यवहारिक संबंधों को छोड़ अन्य सभी कार्य में विजय मिलेगी। सेहत उत्तम रहेगी।*
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स्वभावो नोपदेशेन
शक्यते कर्तुमन्यथा। सुतप्तमपि पानीयं
पुनर्गच्छति शीतताम्॥
*गणेश भगवान जी की जय।*
TRN LIVE: कौशाम्बी जनपद में शांति एवं कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी के निर्देशन में थाना कोखराज पुलिस टीम द्वारा भीड़भाड़ एवं मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में पैदल गश्त की गई।गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों ने बाजार, मुख्य मार्गों और संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण किया। साथ ही आमजनमानस से संवाद कर उन्हें भयमुक्त वातावरण का आश्वासन दिया गया।पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शांति भंग करने या अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। नागरिकों से कानून का पालन करते हुए सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील की गई है।
TRN LIVE: _इस दौर की कड़वाहटों को भुलाकर, आइए एक-दूसरे को इंसानियत के रंग में रंगते हैं। होली का यह त्यौहार हमें सिखाता है कि रंग अलग-अलग होकर भी जब मिलते हैं, तो एक_ खूबसूरत मंजर पेश करते हैं।
_*"मज़हब तो सिखाता है बस आपस में मुहब्बत,*_
_*इंसान वही है जिसे इंसान से प्यार हो।"*_
_हमारी दुआ है कि इस होली पर नफरतों का 'होली-दहन' हो और हर दिल में रवादारी, इत्तेहाद और खुलूस के रंग खिलें। सेहत सिर्फ जिस्म की नहीं, बल्कि ख्यालों की भी दुरुस्त होनी चाहिए।_
_*अमीरी हैल्थकेयर सेन्टर & मैडिकल स्टोर*_
_"जहाँ सेहत और इंसानियत का साथ है"_
_*तबरेज आलम अमीरी*_
_*हिन्दुस्तान लाइव टीवी*_
TRN LIVE *थैंक्यू मोदी जी, नेतन्याहू ने पक्के मित्र का जताया आभार, किया साथ खड़े रहने का शुक्रिया*
* इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल के साथ खड़ा होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद कहा है।
* उन्होंने इजरायल के साथ खड़े रहने, सच्चाई का साथ देने और भारत के लोगों की गहरी दोस्ती के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
* नेतन्याहू ने एक दिन पहले पीएम मोदी के साथ बातचीत का भी जिक्र किया।
* उन्होंने आगे कहा कि इजरायल में पीएम मोदी की बहुत तारीफ की जाती है और उन्हें प्यार किया जाता है।
*कड़ी सुरक्षा के बीच नेतन्याहू ने इजरायल के बेत शेमेश में ईरानी हमले से तबाह जगहों का दौरा किया। इस दौरान नेतन्याहू एक एक यहूदी प्रार्थना स्थल सिनेगाग भी गए, जहां ईरानी हमले में नौ इजरायली लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान बातचीत में नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हाल की अपनी टेलीफोन पर हुई बातचीत का जिक्र किया।*
TRN LIVE: *PM मोदी का अब यूट्यूब पर बजा डंका, बने 3 करोड़ सब्सक्राइबर्स वाले पहले नेता, ट्रंप तो आगे-पीछे भी नहीं*
*पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल के 3 करोड़ सब्सक्राइबर हुए, ट्रंप के मुकाबले 7 गुना अधिक सब्सक्राइबर*
* प्रधानमंत्री का यूट्यूब चैनल तीन करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स के साथ सबसे अधिक सब्सक्राइब किए जाने वाला चैनल है।
*पिछले महीने, मोदी ने इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ फॉलोअर्स का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया और इस मंच पर यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले विश्व नेता बन गए।*
* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूट्यूब चैनल ने तीन करोड़ सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे इस सोशल मीडिया मंच पर सबसे अधिक फॉलोअर्स वाले विश्व नेता के रूप में उनकी स्थिति और अधिक मजबूत हो गई है।
*दूसरे सबसे अधिक फॉलोअर्स वाले ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो के फॉलोअर्स की संख्या मोदी की तुलना में लगभग एक-चौथाई ही है।*
* प्रधानमंत्री मोदी के पास अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुलना में सात गुना से अधिक सब्सक्राइबर हैं, जो वैश्विक स्तर पर उनकी डिजिटल पहुंच और सहभागिता के व्यापक दायरे को रेखांकित करता है।
* प्रधानमंत्री 2014 में इंस्टाग्राम से जुड़े थे और पिछले एक दशक में उनका यह सोशल मीडिया खाता वैश्विक नेताओं के बीच सबसे अधिक सक्रिय डिजिटल मंच में से एक बन गया है।
*सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके फॉलोअर्स की संख्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दोगुनी से भी अधिक है।*
TRNLIVE: विपिन रावत की मृत्यु पर रोना नहीं आया,
मेजर मोहित शर्मा के बलिदान पर रोना नहीं आया,
पहलगाम नरसंहार पर रोना नहीं आया,
कश्मीर नरसंहार पर रोना नहीं आया,
संभल दंगों में जिंदा जलाए गए बेगुनाहों पर रोना नहीं आया,
पुलवामा पर रोना नहीं आया,
दंतेवाड़ा पर रोना नहीं आया,
अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर रोना नहीं आया,
कश्मीर में देश के लिए तमाम सैनिकों के बलिदान पर रोना नहीं आया
और तो और अब्दुल कलाम तो मुस्लिम थे उनकी मृत्यु पर भी रोना नहीं आया लेकिन... विदेश में बैठे एक नेता जिसे युद्ध में मारा गया है उसके लिए ऐसा करुणा क्रंदन ऐसा बेवा विलाप जैसे पता नहीं क्या हो गया।
सड़कों पे प्रदर्शन, बाजार बंद, नारेबाजी, आंसुओं का सैलाब, आंखों में गुस्सा, ट्रंप और नेतन्याहू की कबर खोदने को तैयार भीड़... ऐसे छाती पीट रहे हैं जैसे खामनेई ने इनके घर के कितने चिराग रौशन कर दिए थे।
TRN LIVE: यह पीओके के एक्टिविस्ट हैं। इन्होंने बड़ी मजेदार बात कही।
इनका कहना है कि अमेरिका को कैसे एक्यूरेट पता लगा कि ईरान का राष्ट्रपति खोमेनेई इस वक्त कहां उपस्थित है और वही मिसाइल मारकर उसकी हत्या कर दी जाए।
इन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति शहबाज़ शरीफ ईरान गए थे। वहां उन्होंने अमेरिका के इशारे पर खोमेनेई को एक घड़ी भेंट की थी। उसे घड़ी में एक माइक्रोचिप लगी हुई थी जिससे अमेरिका को पता लग पाया कि इस पल ईरान का राष्ट्रपति कहां है और उसने भाई मिसाइल मारकर उसकी हत्या कर दी।
ईरान के राष्ट्रपति #खोमेनेई की हत्या का असली जिम्मेदार #पाकिस्तान है!
TRN LIVE: *🕉️श्रीमद्भगवद्गीता*
*श्लोक १६-७ पर विशेष बात - ३*
प्रवृत्ति (झुकाव) और निवृत्ति (मुक्त) को न जाननेसे उन आसुर स्वभाववालोंमें शुद्धि-अशुद्धिका खयाल नहीं रहता। उनको सांसारिक बर्तावका, व्यवहारका भी खयाल नहीं होता अर्थात् माता-पिता आदि बड़े-बूढ़ोंके साथ तथा अन्य मनुष्योंके साथ कैसा बर्ताव करना चाहिये और कैसा नहीं करना चाहिये—इस बातको वे जानते ही नहीं। उनमें सत्य नहीं होता अर्थात् वे असत्य बोलते हैं और आचरण भी असत्य ही करते हैं। इन सबका तात्पर्य यह है कि वे पुरुष असुर हैं। खाना-पीना, आरामसे रहना तथा ‘मैं जीता रहूँ, संसारका सुख भोगता रहूँ और संग्रह करता रहूँ‘ आदि उद्देश्य होनेसे उनकी शौचाचार और सदाचारकी तरफ दृष्टि ही नहीं जाती।
भगवान् ने दूसरे अध्यायके चौवालीसवें श्लोकमें बताया है कि वैदिक प्रक्रियाके अनुसार सांसारिक भोग और संग्रहमें लगे हुए पुरुषोंमें भी परमात्माकी प्राप्तिका एक निश्चय नहीं होता। भाव यह है कि आसुरी-सम्पदाका अंश रहनेके कारण जब ऐसे शास्त्र-विधिसे यज्ञादि कर्मोंमें लगे हुए पुरुष भी परमात्माका एक निश्चय नहीं कर पाते, तब जिन पुरुषोंमें आसुरी-सम्पदा विशेष बढ़ी हुई है अर्थात् जो अन्यायपूर्वक भोग और संग्रहमें लगे हुए हैं, उनकी बुद्धिमें परमात्माका एक निश्चय होना कितना कठिन है!
*स्त्रोत - साधक संजीवनी*, श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज द्वारा रचित
*जय श्रीकृष्ण*
TRN LIVE: *🕉️रामायण के सात काण्ड मानव की उन्नति के सात सोपान*
*1* *बालकाण्ड –*
बालक प्रभु को प्रिय है क्योकि उसमेँ छल , कपट , नही होता विद्या , धन एवं प्रतिष्ठा बढने पर भी जो अपना हृदय निर्दोष निर्विकारी बनाये रखता है ,उसी को भगवान प्राप्त होते है। बालक
जैसा निर्दोष निर्विकारी दृष्टि रखने
पर ही राम के स्वरुप को पहचान सकते है। जीवन मेँ सरलता का आगमन संयम एवं ब्रह्मचर्य से होता है।बालक की भाँति अपने
मान अपमान को भूलने से
जीवन मेँ सरलता आती है बालक के समान निर्मोही एवं निर्विकारी बनने पर शरीर अयोध्या बनेगा ।जहाँ युद्ध,वैर ,ईर्ष्या नहीँ है ,वही अयोध्या है
*2* *अयोध्याकाण्ड –*
यह काण्ड मनुष्य
को निर्विकार बनाता है।जब जीव भक्ति रुपी सरयू नदी के तट पर हमेशा निवास करता है,तभी मनुष्य निर्विकारी बनता है।भक्ति अर्थात् प्रेम ,अयोध्याकाण्ड प्रेम प्रदान करता है । रामका भरत प्रेम , राम का सौतेली माता से प्रेम
आदि ,सब इसी काण्ड मेँ है।राम
की निर्विकारिता इसी मेँ दिखाई देती है ।अयोध्याकाण्ड का पाठ
करने से परिवार मेँ प्रेम बढता है ।उसके घर मेँ लडाई झगडे नहीँ होते ।उसका घर अयोध्या बनता है ।कलह का मूल कारण धन एवं
प्रतिष्ठा है ।अयोध्याकाण्ड का फल निर्वैरता है ।सबसे पहले
अपने घर की ही सभी प्राणियोँ मेँभगवद् भाव रखना चाहिए।
*3.* *अरण्यकाण्ड –*
यह निर्वासन प्रदान
करता है ।इसका मनन करने से वासना नष्ट होगी ।बिना अरण्यवास(जंगल) के जीवन मेँ
दिव्यता नहीँ आती ।रामचन्द्र राजा होकर भी सीता के साथ वनवास किया ।वनवास मनुष्य
हृदय को कोमल बनाता है।तप द्वारा ही कामरुपी रावण का बध
होगा । इसमेँ सूपर्णखा(मोह )एवं
शबरी (भक्ति)दोनो ही है।भगवान राम सन्देश देते हैँ कि मोह को त्यागकर भक्ति को अपनाओ ।
*किष्किन्धाकाण्ड –*
जब मनुष्य निर्विकार एवं निर्वैर होगा तभी जीव की ईश्वर से मैत्री होगी ।इसमे सुग्रीव और राम अर्थात् जीव और ईश्वर की मैत्री का वर्णन है।जब जीव सुग्रीव की भाँति हनुमान अर्थात् ब्रह्मचर्य का आश्रय लेगा तभी उसे राम मिलेँगे। जिसका कण्ठ सुन्दर है वही सुग्रीव है।कण्ठ की शोभा आभूषण से नही बल्कि राम नाम का जप करने से है।जिसका कण्ठ सुन्दर है ,उसी की मित्रता राम से होती है किन्तु उसे हनुमान यानी ब्रह्मचर्य की सहायता लेनी पडेगी
*5.* *सुन्दरकाण्ड –*
जब जीव की मैत्री राम से
हो जाती है तो वह सुन्दर हो जाता है ।इस काण्ड मेँ हनुमान को सीता के दर्शन होते है।सीताजी पराभक्ति है ,जिसका जीवन सुन्दर होता है उसे ही पराभक्ति के दर्शन होते है ।संसार समुद्र पार करने वाले को पराभक्ति सीता के दर्शन होते है ।ब्रह्मचर्य एवं रामनाम का आश्रय लेने वाला संसार सागर को पार करता है ।संसार सागर को पार करते समय
मार्ग मेँ सुरसा बाधा डालने आ जाती है , अच्छे रस ही सुरसा है , नये नये रस की वासना रखने वाली जीभ ही सुरसा है। संसार सागर पार करने की कामना रखने वाले को जीभ को वश मे
रखना होगा ।जहाँ पराभक्ति सीता है वहाँ शोक नही रहता ,जहाँ सीता है वहाँ अशोकवन है।
*6.* *लंकाकाण्ड –*
जीवन भक्तिपूर्ण होने पर राक्षसो का संहार होता है काम क्रोधादि ही राक्षस हैँ ।जो इन्हेँ मार
सकता है ,वही काल को भी मार सकता है ।जिसे काम मारता है उसे काल भी मारता है ,लंका शब्द के अक्षरो को इधर उधर करने पर होगा कालं ।काल सभी को मारता है किन्तु हनुमान जी काल को भी मार देते हैँ ।क्योँकि वे ब्रह्मचर्य का पालन करते हैँ पराभक्ति का दर्शन करते है ।
*7* *उत्तरकाण्ड –*
इस काण्ड मेँ काकभुसुण्डि एवं गरुड संवाद को बार बार पढना चाहिए । इसमेँ सब कुछ है ।जब तक राक्षस ,काल का विनाश
नहीँ होगा तब तक उत्तरकाण्ड मे प्रवेश नही मिलेगा ।इसमेँ भक्ति की कथा है । भक्त कौन है ? जो भगवान से एक क्षण भी अलग नही हो सकता वही भक्त है पूर्वार्ध मे जो काम रुपी रावण को मारता है उसी का उत्तरकाण्ड
सुन्दर बनता है ,वृद्धावस्था मे
राज्य करता है ।जब जीवन के पूर्वार्ध मे युवावस्था मे काम
को मारने का प्रयत्न होगा तभी उत्तरार्ध –उत्तरकाण्ड सुधर पायेगा । अतः जीवन को सुधारने का प्रयत्न युवावस्था से ही करना चाहिए ।
*भावार्थ रामायण से*
TRN LIVE: ।।🕉️ महादेव के पिनाक धनुष की कथा ।।
भगवान श्री राम ने सीता जी के स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र जी की आज्ञा से शिवजी का कठोर धनुष तोड़ कर सीता जी से विवाह किया था। लेकिन शिवजी का वह धनुष किसने और किससे बनाया था तथा वह शिव धनुष महाराज जनक जी के पास कैसे पहुंचा, इस रहस्य को बहुत कम लोग जानते हैं।
पिनाक धनुष की बड़ी विचित्र कथा है। कहते हैं एक बार घोर कानन के अंदर कण्व मुनि बड़ी भारी तपस्या कर रहे थे। तपस्या करते करते समाधिस्थ होने के कारण उन्हें भान ही नहीं रहा कि उनका शरीर दीमक के द्वारा बाँबी बना दिया गया। उस मिट्टी के ढ़ेर पर ही एक सुंदर बाँस उग आया। कण्व जी की तपस्या जब पूर्ण हुई, तब ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उन्होंने अपने अमोघ जल के द्वारा कण्व जी की काया को सुंदर बना दिया।
ब्रह्मा जी ने उन्हें अनेक वरदान प्रदान किए और जब ब्रह्मा जी जाने लगे, तब उन्हें ध्यान आया कि कण्व की मूर्धा पर उगी हुई बाँस कोई साधारण नहीं हो सकती। इसलिए इसका सद्उपयोग किया जाना चाहिए। यह विचारकर ब्रह्मा जी ने वह बाँस काटकर विश्वकर्मा जी को दे दिया। विश्वकर्मा जी ने उससे दो दिव्य धनुष बनाये, जिनमें एक जिसका नाम सारंग था, उन्होंने भगवान विष्णुजी को और एक जिसका नाम पिनाक था, शिव जी को समर्पित कर दिया।
पिनाक धनुष धारण करने के कारण ही शिवजी को पिनाकी कहा जाता है। शिवजी ने जिस पिनाक धनुष को धारण किया था, उसकी एक टंकार से बादल फट जाते थे और पृथ्वी डगमगा जाती थी। ऐसा लगता था मानों कोई भयंकर भूकंप आ गया हो। यह असाधारण धनुष अत्यंत ही शक्तिशाली था। इसी के मात्र एक ही तीर से भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया था। देवी और देवताओं के काल की समाप्ति के बाद यह धनुष देवताओं को सौंप दिया। देवताओं ने इस धनुष को महाराजा जनक जी के पूर्वज देवरात को दे दिया।
महाराजा जनक जी के पूर्वजों में निमि के ज्येष्ठ पुत्र देवरात थे। शिवजी का वह धनुष उन्हीं की धरोहर स्वरूप जनक जी के पास सुरक्षित था। इस शिव-धनुष को उठाने की क्षमता कोई नहीं रखता था। एक बार देवी सीता जी ने इस धनुष को उठा दिया था, जिससे प्रभावित हो कर जनक जी ने सोचा कि यह कोई साधारण कन्या नहीं है। अत: जो भी इससे विवाह करेगा, वह भी साधारण पुरुष नहीं होना चाहिए। इसीलिए ही जनक जी ने सीता जी के स्वयंवर का आयोजन किया था और यह शर्त रखी थी कि जो कोई भी इस शिव-धनुष को उठाकर, तोड़ेंगा, सीता जी उसी से विवाह करेंगीं । उस सभा में भगवान श्री राम ने शिव-धनुष तोड़ कर सीता जी से विवाह किया था। जब शिवजी का वह कठोर धनुष टूटा तो उसकी ध्वनि सुनकर परशुराम जी इसलिए क्रोधित होकर जनक जी की सभा में आए थे क्योंकि भगवान शंकर, परशुराम जी के आराध्य देव हैं।
– डॉ0 विजय शंकर मिश्र:।
TRN LIVE: 🕉️ध्यान की विधियाँ
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ध्यान की विधियाँ कौन-कौन सी हैं? ध्यान की अनेकानेक एवं अनंत विधियाँ संसार में प्रचलित हैं. साधकों की सुविधा के लिए विभिन्न शास्त्रों व ग्रंथों से प्रमाण लेकर ध्यान की विधियाँ बताते हैं जिनका अभ्यास करके साधक शीघ्रातिशीघ्र ईश्वर साक्षात्कार को प्राप्त कर सकता है.
ध्यान की विधियाँ :
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१. श्री कृष्ण अर्जुन संवाद
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भगवन श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा: शुद्ध एवं एकांत स्थान पर कुशा आदि का आसन बिछाकर सुखासन में बैठें. अपने मन को एकाग्र करें. मन व इन्द्रियों की क्रियाओं को अपने वश में करें, जिससे अंतःकरण शुद्ध हो. इसके लिए शारीर, सर व गर्दन को सीधा रखें और हिलाएं-दुलायें नहीं. आँखें बंद रखें व साथ ही जीभ को भी न हिलाएं. अब अपनी आँख की पुतलियों को भी इधर-उधर नहीं हिलने दें और उन्हें एकदम सामने देखता हुआ रखें. एकमात्र ईश्वर का स्मरण करते रहें. ऐसा करने से कुछ ही देर में मन शांत हो जाता है और ध्यान आज्ञा चक्र पर स्थित हो जाता है और परम ज्योति स्वरुप परमात्मा के दर्शन होते हैं.
विशेष :- ध्यान दें जब तक मन में विचार चलते हैं तभी तक आँख की पुतलियाँ इधर-उधर चलती रहती हैं. और जब तक आँख की पुतलियाँ इधर-उधर चलती हैं तब तक हमारे मन में विचार उत्पन्न होते रहते हैं. जैसे ही हम मन में चल रहे समस्त विचारों को रोक लेते हैं तो आँख की पुतलियाँ रुक जाती हैं. इसी प्रकार यदि आँख की पुतलियों को रोक लें तो मन के विचार पूरी तरह रुक जाते हैं. और मन व आँख की पुतलियों के रुकते ही आत्मा का प्रभाव ज्योति के रूप में दीख पड़ता है.
- गीतोपदेश अ. ६ श्लोक १२ से 15
२. शिव-पार्वती संवाद
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भगवन शिव ने पार्वतीजी से कहा :- "एकांत स्थान पर सुखासन में बैठ जाएँ. मन में ईश्वर का स्मरण करते रहें. अब तेजी से सांस अन्दर खींचकर फिर तेजी से पूरी सांस बाहर छोड़कर रोक लें. श्वास इतनी जोर से बाहर छोड़ें कि इसकी आवाज पास बैठे व्यक्ति को भी सुनाई दे. इस प्रकार सांस बाहर छोड़ने से वह बहुत देर तक बाहर रुकी रहती है. उस समय श्वास रुकने से मन भी रुक जाता है और आँखों की पुतलियाँ भी रुक जाती हैं. साथ ही आज्ञा चक्र पर दबाव पड़ता है और वह खुल जाता है. श्वास व मन के रुकने से अपने आप ही ध्यान होने लगता है और आत्मा का प्रकाश दिखाई देने लगता है. यह विधि शीघ्र ही आज्ञा चक्र को जाग्रत कर देती है.
नेत्र तंत्र
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३. शिवजी ने पार्वतीजी से कहा
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रात्रि में एकांत में बैठ जाएँ. आंकें बंद करें. हाथों की अँगुलियों से आँखों की पुतलियों को दबाएँ. इस प्रकार दबाने से तारे-सितारे दिखाई देंगे. कुछ देर दबाये रखें फिर धीरे-धीरे अँगुलियों का दबाव कम करते हुए छोड़ दें तो आपको सूर्य के सामान तेजस्वी गोला दिखाई देगा. इसे तैजस ब्रह्म कहते हैं. इसे देखते रहने का अभ्यास करें. कुछ समय के अभ्यास के बाद आप इसे खुली आँखों से भी आकाश में देख सकते हैं. इसके अभ्यास से समस्त विकार नष्ट होते हैं, मन शांत होता है और परमात्मा का बोध होता है.
४.शिवजी ने पार्वतीजी से कहा
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रात्रि में ध्वनिरहित, अंधकारयुक्त, एकांत स्थान पर बैठें. तर्जनी अंगुली से दोनों कानों को बंद करें. आँखें बंद रखें. कुछ ही समय के अभ्यास से अग्नि प्रेरित शब्द सुनाई देगा. इसे शब्द-ब्रह्म कहते हैं. यह शब्द या ध्वनि नौ प्रकार की होती है. इसको सुनने का अभ्यास करना शब्द-ब्रह्म का ध्यान करना है. इससे संध्या के बाद खाया हुआ अन्न क्षण भर में ही पाच जाता है और संपूर्ण रोगों तथा ज्वर आदि बहुत से उपद्रवों का शीघ्र ही नाश करता है. यह शब्द ब्रह्म न ॐकार है, न मंत्र है, न बीज है, न अक्षर है. यह अनाहत नाद है (अनाहत अर्थात बिना आघात के या बिना बजाये उत्पन्न होने वाला शब्द). इसका उच्चारण किये बिना ही चिंतन होता है. यह नौ प्रकार का होता है :-
१. घोष नाद :-👉 यह आत्मशुद्धि करता है, सब रोगों का नाश करता है व मन को वशीभूत करके अपनी और खींचता है.
२. कांस्य नाद :-👉 यह प्राणियों की गति को स्तंभित कर देता है. यह विष, भूत, ग्रह आदि सबको बांधता है.
३. श्रृंग नाद :-👉 यह अभिचार से सम्बन्ध रखने वाला है.
४. घंट नाद :- 👉 इसका उच्चारण साक्षात् शिव करते हैं. यह संपूर्ण देवताओं को आकर्षित कर लेता है, महासिद्धियाँ देता है और कामनाएं पूर्ण करता है.
५. वीणा नाद :-👉 इससे दूर दर्शन की शक्ति प्राप्त होती है.
६. वंशी नाद :- 👉 इसके ध्यान से सम्पूर्ण तत्त्व प्राप्त हो जाते हैं.
७. दुन्दुभी नाद :-👉 इसके ध्यान से साधक जरा व मृत्यु के कष्ट से छूट जाता है.
८. शंख नाद :-👉 इसके ध्यान व अभ्यास से इच्छानुसार रूप धारण करने की शक्ति प्राप्त होती है.
९. मेघनाद :-👉 इसके चिंतन से कभी विपत्तियों का सामना नहीं करना पड़ता.
इन सबको छोड़कर जो अन्य शब्द सुनाई देता है वह तुंकार कहलाता है. तुंकार का ध्यान करने से साक्षात् शिवत्व की प्राप्ति होती है.
🌟संकलन शिव पुराण, उमा संहिता🌟
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TRN LIVE: *॥🕉️ गणपति माला मन्त्राः॥*
*ॐ क्लीं ह्रीं श्रीं ऐं ग्लौं ॐ ह्रीं क्रौं गं ॐ नमो भगवते*
*महागणपतये स्मरणमात्रसन्तुष्टाय सर्वविद्याप्रकाशाय*
*सर्वकामप्रदाय भवबन्धविमोचनाय ह्रीं सर्वभूतबन्धनाय*
*क्रों साध्याकर्षणाय क्लीं जगत्त्रय वशीकरणाय सौः*
*सर्वमनःक्षोभणाय श्रीं महासम्पत्प्रदाय ग्लौं*
*भूमण्डलाधिपत्यप्रदाय महाज्ञानप्रदाय चिदानन्दात्मने*
*गौरीनन्दनाय महायोगिने* *शिवप्रियाय सर्वानन्दवर्धनाय*
*सर्वविद्याप्रकाशनप्रदाय द्रां* *चिरञ्जीविने ब्लूं सम्मोहनाय*
*ॐ मोक्षप्रदाय, फट् वशीकुरु* *वशीकुरु, वौषडाकर्षणाय*
*हुं विद्वेषणाय विद्वेषय विद्वेषय,* *फट् उच्चाटयोच्चाटय, ठः ठः*
*स्तम्भय स्तम्भय, खें खें मारय* *मारय, शोषय शोषय,परमन्त्र*
*यन्त्रतन्त्राणि छेदय छेदय,* *दुष्टग्रहान्निवारय निवारय, दुःखं हर*
*हर, व्याधिं नाशय नाशय, नमः* *सम्पन्नाय सम्पन्नाय स्वाहा,*
*सर्वपल्लवस्वरुपाय महाविद्याय गं* *गणपतये स्वाहा,यन्मन्त्रे*
*क्षितलाञ्छिताभमनघं मृत्युश्च* *वज्राशिषो भूतप्रेतपिशाचकाः*
*प्रतिहता निर्घातपातादिव, उत्पन्नं च* *समस्तदुःखदुरितं*
*ह्युच्चाटनोत्पादकं* *वन्देऽभीष्टगणाधिपं भयहरं* *विघ्नौघनाशं परम्,*
*ॐ गं गणपतये नमः । ॐ नमो* *महागणपतये, महावीराय,*
*दशभुजाय, मदनकालविनाशन,* *मृत्युं हन हन, यम यम,*
*मद मद, कालं संहर संहर,* *सर्वग्रहान् चूर्णय चूर्णय, नागान्*
*मूढय मूढय, रुद्ररूप, त्रिभुवनेश्वर,* *सर्वतोमुख हुं फट् स्वाहा ।*
*ॐ नमो गणपतये, श्वेतार्कगणपतये,* *श्वेतार्कमूलनिवासाय,*
*वासुदेवप्रियाय,* *दक्षप्रजापतिरक्षकाय, सूर्यवरदाय, कुमारगुरवे,*
*ब्रह्मादिसुरासुरवन्दिताय,* *सर्पभूषणाय, शशाङ्कशेखराय,*
*सर्पमालाऽलङ्कृतदेहाय, धर्मध्वजाय, धर्मवाहनाय, त्राहि त्राहि,*
*देहि देहि, अवतर अवतर, गं* *गणपतये, वक्रतुण्डगणपतये,*
*वरवरद, सर्वपुरुषवशङ्कर,* *सर्वदुष्टमृगवशङ्कर, सर्वस्ववशङ्कर,*
*वशीकुरु वशीकुरु, सर्वदोषान्* *बन्धय बन्धय, सर्वव्याधीन्*
*निकृन्तय निकृन्तय, सर्वविषाणी* *संहर संहर, सर्वदारिद्र्यं*
*मोचय मोचय, सर्वविघ्नान् छिन्धि छिन्धि, सर्व वज्राणि*
*स्फोटय स्फोटय, सर्वशत्रून्* *उच्चाटय उच्चाटय, सर्वसिद्धिं कुरु*
*कुरु, सर्वकार्याणि साधय साधय,*
*गां गीं गूं गैं गौं गं*
*गणपतये हुं फट् स्वाहा ।*
*ॐ नमो गणपते महावीर दशभुज मदनकालविनाशन मृत्युं*
*हन हन, कालं संहर संहर, धम धम, मथ मथ, त्रैलोक्यं*
*मोहय मोहय, ब्रह्मविष्णुरूद्रान् मोहय मोहय, अचिन्त्य बल*
*पराक्रम, सर्वव्याधीन् विनाशाय, सर्वग्रहान् चूर्णय चूर्णय,*
*नागान् मोटय मोटय, त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख हुं फट् स्वाहा ।*
*ॐ नमो गणपते महावीर दशभुज मदनकालविनाशन मृत्युं*
*हन हन, धम धम, मथ मथ, कालं संहर संहर, सर्वग्रहान्*
*चूर्णय चूर्णय, नागान् मोटय मोटय, रुद्ररूप, त्रिभुवनेश्वर,*
*सर्वतोमुख हुं फट् स्वाहा ।*
*(भूतविषादि दमनोऽयम्)*
*॥ इति गणपति माला मन्त्राः॥*
TRN LIVE: 🕉️श्रीनाथजी अपने अंतरंग सखाओं के माध्यम से समय-समय पर अपनी लीलाएँ प्रकट करते रहे हैं। कुंभनदासजी का यह प्रसंग सूरदासजी की लीलाओं से अलग होते हुए भी उन्हीं के समान दिव्य है।
एक दोपहर, कुंभनदासजी अपने खेत की झोपड़ी के बाहर शांति से बैठे थे। श्रीनाथजी राजभोग के बाद उनके साथ खेलने के लिए पधारे। प्रभु अभी कुछ कहना ही चाह रहे थे कि अचानक राजा मानसिंह वहाँ आ पहुँचे। प्रभु की लीला में विघ्न पड़ा और श्रीनाथजी तुरंत पास के एक पेड़ के पीछे छिप गए।
राजा की उपस्थिति कुंभनदासजी को बहुत अखरने लगी। राजा उनके कीर्तनों से मंत्रमुग्ध होकर उन्हें कुछ धन-संपत्ति भेंट करना चाहते थे, लेकिन विरक्त कुंभनदासजी उन्हें टालने की कोशिश कर रहे थे। काफी देर के प्रयास के बाद, जब राजा को लगा कि कुंभनदासजी कुछ स्वीकार नहीं करेंगे, तो वे निराश होकर लौट गए। कुंभनदासजी ने राहत की सांस ली। आखिर जिसे स्वयं साक्षात् 'ब्रह्म' का सान्निध्य प्राप्त हो, उसे सांसारिक धन की क्या चाह?
यह प्रसंग एक भक्त की परीक्षा मात्र था, जिसमें श्रीनाथजी ने यह गहरा संदेश दिया:
"यदि एक बार मेरा आश्रय ले लिया, तो फिर मन से भी किसी दूसरे का सहारा मत ढूँढना। तभी मैं पूर्णतः तुम्हारा होकर रहूँगा। मुझे चाहने वाले तो बहुत हैं, लेकिन जिसे 'मैं' चाहूँ, ऐसा अनन्य भक्त करोड़ों में कोई एक कुंभनदास जैसा ही होता है।"
जैसे ही राजा की पीठ फिरी, श्रीनाथजी पेड़ के पीछे से दौड़कर आए और कुंभनदासजी की गोद में जा बैठे।
श्रीनाथजी: "कुंभना! तू अचानक इतना बेचैन क्यों हो गया था? तेरे मन में क्या चल रहा है, मुझे बता?"
कुंभनदासजी: "लाला, मेरी आँखों से तू कभी ओझल मत होना। तेरे बिना एक पल भी युगों जैसा लगता है। मैं चाहता हूँ कि जब तक मेरे प्राण हैं, मेरी दृष्टि सिर्फ तुझ पर रहे। मैं किसी दूसरे का विचार तक न करूँ, बस तेरे सुख का ही चिंतन करूँ। तू ही मेरा सर्वस्व है। ये राजा-महाराजा मुझे अपने दरबारों में क्यों बुलाते हैं? मुझे उनकी कोई आवश्यकता नहीं है।"
यह सुनकर भावविभोर होकर श्रीनाथजी ने कुंभनदासजी को गले लगा लिया। जिनके चरणों की धूल के लिए ऋषि-मुनि तरसते हैं, वे स्वयं अपने भक्त की गोद में समा गए।
श्रीनाथजी: "कुंभना, जैसा तू चाहता है वैसा ही होगा। तेरी इच्छा ही मेरी इच्छा है।
TRN LIVE: *🕉️कर्म की कहानी में आपका स्वागत है।*
*कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है,* यह बात भीष्म पितामह के जीवन से स्पष्ट होती है, जो माँ गंगा के पुत्र थे, फिर भी उन्हें अपने कर्मों का फल भोगना पड़ा था। लोग अक्सर सोचते हैं कि सिर्फ गंगा में नहा लेने से उनके पाप धुल जाएंगे, लेकिन सच्चाई यह है कि *कर्म का थप्पड़ बहुत भारी होता है।*
कर्म का न्याय निश्चित है जिन्होंने सूर्य को उगने से रोक दिया , वो महाभारत भी रोक सकते थे। प्रार्थना ऐसे करिए जैसे सब कुछ ईश्वर पर निर्भर करता है !
*कर्म का सीधा नियम है:* अपने काम को पूजा समझकर, पूरी निष्ठा से करें, तो भाग्य भी बदल जाता है। *कर्म के बिना भाग्य अर्थहीन है।* कर्म वह पत्र है जो गलत पते पर नहीं जाता, जिसने भेजा है उसी के पास लौटता है... कर्म एक रेस्टॉरेंट है जहाँ ऑर्डर की जरूरत नहीं, हमें वही मिलता है जो हमने पकाया है।
गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं, *"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" - कर्म में अधिकार है, फल की चिंता नहीं।* जैसा बोओगे, वैसा काटोगे। इसलिए, अपने कर्मों को सच्चाई और निष्ठा से करें और अच्छे फल की आशा रखें।
*परमात्मा कहते हैं,* शरीर को मत चमकाओ, इसे तो मिट्टी में मिल जाना है, चमकाना है तो आत्मा को चमकाओ, क्योंकि इसे ही सतलोक जाना है। ये शरीर वो लिफाफा है जिसे यहीं फाड़ कर फेंक दिया जाएगा, असली खत तो आत्मा है जिसे परमात्मा पढ़ेगा। उस मकान को इतना क्यों सजाना जो किराए का है? तैयारी उस घर की करो जहाँ हमेशा रहना है।
यह संदेश आत्मा की महत्ता और शरीर की अनित्यता को दर्शाता है, और हमें अपने आध्यात्मिक विकास पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करता है। 🙏🪷✨
🪷 *जय श्री राधे* 🪷
🙏 *श्री राधा कृष्ण: शरणं मम:* 🙏
⭕🟩 *जय जय श्री राधे* 🟨⭕
🚩 *राधावल्लभ श्री हरिवंश* 🚩 🌟
TRN LIVE: 🕉️इस संसारमें प्रत्येक जीव सुखकी ही खोजमें लगा हुआ है लेकिन सुख द्वैतके रहते हुए हो ही नहीं सकता है; क्योंकि इस द्वैत और कामनाओंकी उत्पत्ति हमारे ही अज्ञानसे ही होती है। इसलिये ही हम स्वयं ही अपने-अपने सुखों-दुःखोंके कारण होते हैं -
काहु न कोउ सुख दुख कर दाता। निज कृत करम भोग सबु भ्राता।।
करम प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा।।
द्वैत और कामनाके रहते हुए निर्भयता नहीं आ सकती है; और भय एवं कामनाओंके रहते हुए स्वप्नमें भी सुख नहीं हो सकता है -
बिनु संतोष न काम नसाहीं। काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं।।
अद्वैत सिद्ध होनेसे ही भय नहीं रहता है और भय न रहनेसे ही परमशान्ति एवं परमानन्दकी प्राप्ति होती है -
बिनु बिग्यान कि समता आवइ। कोउ अवकास कि नभ बिनु पावइ।।
निज सुख बिनु मन होइ कि थीरा। परस कि होइ बिहीन समीरा।।
कवनिउ सिद्धि कि बिनु बिस्वासा। बिनु हरि भजन न भव भय नासा।।
निज-सुख (आत्मानन्द) के बिना क्या मन स्थिर हो सकता है? वायु-तत्त्वके बिना क्या स्पर्श हो सकता है? क्या विश्वासके बिना कोई भी सिद्धि हो सकती है? इसी प्रकार श्रीहरिके भजन बिना जन्म-मृत्युके भयका नाश नहीं होता।।
श्रीहरिका भजन करना भी तो ज्ञानमें ही स्थित रहना है और ज्ञान यह है कि एक परम आत्माके सिवाय दूसरा और कुछ भी नहीं है अर्थात् 'वासुदेवः सर्वम्'; क्योंकि भगवान् श्रीकृष्णजी ने कहा है -
बहिरन्तश्च भूतानामचरं चरमेव च।
सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत्।।
वह चराचर सब भूतोंके बाहर-भीतर परिपूर्ण है और चर-अचर भी वही है। और वह सूक्ष्म होनेसे अविज्ञेय है तथा अति समीपमें और दूरमें भी स्थित वही है।।१५।।
(गीता अ० १३)
श्री राम जय राम जय जय राम
TRN LIVE: 🕉️कोई मूर्ति हो अथवा शरीर, इनमें प्राण-प्रतिष्ठा और प्राण-विसर्जन होता ही है; और जो होता है, वह रहता नहीं है।
ये सब अर्थात् प्राण-प्रतिष्ठा और प्राण-विसर्जन इसी मूर्ति अथवा शरीर की ही अवस्थायें अर्थात् क्रियाएं हैं। हमारी नहीं हैं, हम न तो कभी हुए हैं और न होते ही हैं।
हम तो अजन्मा, नित्य, सनातन और पुरातन हैं; हमारा तो किसी भी काल में अभाव तो हो ही नहीं सकता है। हम तो इस शरीर के मारे जानेपर भी नहीं मारे जाते हैं।
भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं -
मर्मको न जानकर किये हुए अभ्याससे ज्ञान श्रेष्ठ है; ज्ञानसे मुझ परमेश्वरके स्वरूपका ध्यान श्रेष्ठ है और ध्यानसे भी सब कर्मोंके फलका त्याग (केवल भगवदर्थ कर्म करनेवाले पुरुषका भगवान् में प्रेम और श्रद्धा तथा भगवान् का चिन्तन भी बना रहता है, इसलिये ध्यानसे "कर्मफलका त्याग" श्रेष्ठ कहा है।) श्रेष्ठ है; क्योंकि त्यागसे तत्काल ही परम शान्ति होती है।। गीता १२/१२।।
शिव आत्माका एवं दुर्गा देवी शक्तिका ही प्रतीक है और शक्तिको ही प्रकृति, स्वभाव अथवा लीला, माया आदि आदि कहते हैं। लेकिन अन्धविश्वासी लोग ऐसा मान ही नहीं सकते हैं।।
आहुति देते समय जो यह "स्वाहा" शब्दका उच्चारण किया जाता है, इसका आशय भी अपने अहंकारकी ही आहुति देना ही होता है; क्योंकि वास्तवमें सम्पूर्ण कर्म सब प्रकारसे प्रकृतिके गुणोंद्वारा किये जाते हैं।
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TRN LIVE: 🕉️राधा नाम का अर्थ क्या है?
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
आज कल बहुत लोग कहते हैं राधा राधा और यह वास्तव में बहुत ही सुंदर है राधा नाम लेकिन क्या हमने कभी सोचा है राधा नाम का अर्थ क्या है ?
ब्रह्मवैवर्त पुराण में
जब माता पार्वती महादेव से पूछती है राधा कोन हैं ?
तो शिव जी पहले ध्यान में जाते हैं और फिर कृष्ण से प्रार्थना करते हैं
भगवान कृष्ण शिव जी को शक्ति
देते हैं और शिवजी राधा के दो अर्थ बताते हैं
रा- जो मोक्ष प्रदान करें.
.और
धा-जो मोक्ष प्रदान करें
जो मोक्ष दे वही राधा है
और दूसरा अर्थ
"धावति इति राधा"
जो हर क्षण कृष्ण की सेवा के लिए तत्पर रहें हैं वही राधा हैं ।
इसीलिए राधे-राधे कहना सिर्फ़ शब्द नहीं है, यह अपने भीतर कृष्ण सेवा की तत्परता बढ़ाने का स्मरण है
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
TRN LIVE: *🕉️ओम् श्री हरिःशरणम्*
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“दिव्य सन्तवाणी”
{श्रद्धेय स्वामी रामसुखदासजी महाराज}
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मनुष्योंकी सामर्थ्य दूसरोंका नाश करनेके लिये नहीं मिली है | आप छोटोंपर दया नहीं करोगे तो आप भगवान् की दया माँगनेके अधिकारी नहीं हैं |
* हमें गुरुसे सीखनेकी आवश्यकता नहीं है | शरीर मिला ही है भगवत्प्राप्तिके लिये | जैसे ‘प्रारब्ध पहले रचा, पीछे रचा शरीर’, ऐसे ही जिस परमात्माने माँके स्तनोंमें रक्तका भी दूध बना दिया, उस परमात्माने क्या भगवत्प्राप्तिकी सामग्री नहीं दी? अगर मनुष्य अपने अनुभवका आदर करे तो उससे उद्धार हो जाय |
* जबतक अभिमान है, तबतक कर्मयोगी, ज्ञानयोगी तथा भक्तियोगी है | साधनकी सिद्धि होनेपर न कोई कर्मयोगी है, न ज्ञानयोगी है, न भक्तियोगी है |
* सीताजीकी खोज करते समय हनुमान्जीके मनमें आया कि मेरेमें कोई विकार नहीं आया; क्योंकि मैं स्त्रीको नहीं खोजता हूँ, प्रत्युत माँको खोजता हूँ | यह अहंताका परिवर्तन है |
* लंकामें एक विभीषण ही जीता था, बाक़ी सब मुर्दे थे | इसलिये उनको आग लगा दी!
* भक्तकी दृष्टि भगवान् के जिस अंगपर जाती है, वह उसी भावका अधिकारी होता है | भक्त दास्यमें चरणोंको देखेगा, माधुर्य और सख्यमें नेत्रोंको देखेगा | वात्सल्यमें मुखको देखेगा | शबरीने भगवान् के चरणों को देखा | विभीषणने भगवान् की भुजाओंको देखा |
{प्रवचन-३०.५.१९७९, प्रातः ८.१५, गीताभवन, ऋषिकेश}
नारायण! नारायण! नारायण! नारायण!
::xxx :: xxx :: xxx : :
{गीता प्रकाशन गोरखपुरसे प्रकाशित पुस्तक ‘’दिव्य सन्तवाणी-संग्रह” से पृष्ठ क्रमांक-१२}
TRN LIVE: 🕉️अहमस्य अपराधानाम् आलयः अकिंचनोगतिः ।
त्वमेव उपाय भूतो मे भव इति प्रार्थनामतिः शरणागतिः ।।
व्याख्या:~
अहमस्य अपराधानाम् आलयः :~ मैं (अहम) पापों/
अपराधों का घर (आलयः) हूँ। भक्त स्वीकार करता है कि वह अनेक भूलों और कर्मों से घिरा हुआ है।
अकिंचनोगतिः :~ मैं असहाय हूँ, मेरे पास न ज्ञान है, न तप है, न ही भगवान को पाने का कोई अन्य साधन है (अकिंचन)। मेरी एकमात्र गति (सहारा) केवल आप हैं।
त्वमेव उपाय भूतो मे भवः :~ हे प्रभु! अब आप ही
(त्वमेव) मेरे उद्धार का उपाय (साधन) बन जाइए।
इति प्रार्थनामतिः शरणागतिः :~ मन की इसी स्थिति को
- "मैं पूर्णतः असहाय हूँ और केवल आप ही मुझे बचा सकते हैं" - उसे ही सच्चा शरणागति कहते हैं।
TRN LIVE: ..........................🍁🕉️।।राम।।🍁......................
🍁 *विचार संजीवनी* 🍁
*..दूसरी सब मान्यताएँ झूठी हैं..*
हम जैसे हैं, भगवान् के हैं। अच्छे हैं तो भगवान् के हैं, बुरे हैं तो भगवान् के हैं। जैसे विवाहित स्त्री भीतर से अपने को कुँआरी नहीं मान सकती, इसी तरह भक्त भगवान् के सिवाय दूसरे को अपना मान सकता ही नहीं। झूठी बात कैसे माने ?
भगवान् को हर एक आदमी अपना मान सकता है। पापी-से-पापी, दुष्ट-से-दुष्ट आदमी भी भगवान् को अपना मान सकता है। कारण कि यह मान्यता सच्ची है, दूसरी सब मान्यताएँ झूठी हैं।
आपको हजारों आदमी कह दें कि तुम भगवान् के नहीं हो तो उनसे यही कहें कि आपको पता नहीं है। भगवान् भी कह दें कि तुम हमारे नहीं हो तो उनसे कहें कि आपको भूल हो सकती है पर मेरे को भूल नहीं हो सकती ! इतना पक्का विचार होना चाहिये !
अस अभिमान जाइ जनि भोरे।
मैं सेवक रघुपति पति मोरे।।
इस तरह दृढ़ता से भगवान् में अपनापन हो जाय तो फिर परमात्मप्राप्ति में देरी नहीं लगेगी।
*राम ! राम !! राम!!!*
-परम श्रद्धेय स्वामीजी
श्रीरामसुखदास जी महाराज
*साधन-सुधा-निधि* (पृष्ठ -२०५)
TRN LIVE: 🕉️श्रीहरिः
स्वाद और शौकिनी में लगोगे तो भगवान् में रस
पैदा नहीं होगा। जिस चीज का सेवन करो, निर्वाह
बुद्धि से करो। जितनी सादगी रखोगे, उतना बढ़िया है।
जितनी शौकिनी करोगे उतना पतन है। जितनी सादगी
रखोगे, उतना खर्चा कम होगा, उतनी वृत्तियाँ ठीक रहेंगी,
उतनी शांति रहेगी। जैसे बुखार कोई नहीं चाहता, फिर
भी बुखार आ जाता है, ऐसे ही मिलने वाली चीज अपने-
आप मिलती है।
जब बुखार बिना चाहे आ जाता है तो क्या पदार्थ बिना
चाहे नहीं आयेंगे?
-
• स्वामी रामसुखदास जी महाराज
TRN LIVE: इजराइल का हमेशा से एक नियम रहा है
"जंग में कोई नियम न मानना"
इजराइल ने लगभग एक "शांतिपूर्ण सहअस्तित्व" की नीति अपना ली थी अरब जगत के साथ.... धीरे धीरे वो फिलिस्तीन के साथ भी यथास्थिति बनाये रखने की नीति पर था.... गाज़ा उसके लिए सस्ती लेबर की बस्ती थी...
ये झगड़ा काफ़ी हद तक खात्मे पर था
हाल ये था कि इजराइल में तमाम यहूदी अरब के साथ हिमायत रखने लगे थे...
फिर 7 अक्टूबर 2023 ने सब बदल डाला...
इजराइल पहले दिन ही समझ गया ये किया जरूर हमास ने है पर इसके पीछे ईरान है
इजराइल को ये भी पता है कि पूरे अफ्रीका-एशिया में उसके पास मित्र के नाम पर सिर्फ भारत है जिसपर उसे यक़ीन करने में कोई दिक्क़त नहीं...
उधर यूरोप की खुद की फटी पड़ी है....
सो बड़ी सीधी रणनीति अपनाई इजराइल ने
आतंक के झाड़ के कांटों... टहनियों... और अब जड़ पर प्रहार...
और भारत से अधिकतम मज़बूत साझेदारी
जिससे पाकिस्तान उसके मामले से दूर रहे.... चीन को खुजली न उठे.... और रूस को शांत रखा जा सके...
इजराइल के पास दुनियाँ की श्रेष्ठतम बौद्धिक क्षमता है.... पर जनसंख्या और जमीन नहीं यहूदियों ने वास्तव में अमेरिका को आज का सुपर पॉवर बनाने में सबसे ज्यादा मेहनत की
मदद की...
इजराइल वैसा ही गठजोड़ भारत के साथ चाहता है..... उसके दुश्मनों के सर पर बैठा एक ताक़तवर दोस्त...
आज भी ईरान पर बरस रहे बारूद का काफ़ी हिस्सा भारत में ही बना हुआ है
और जल्द सीधे बरसाने वाले हाथ भी भारतीय हो सकते हैं
ईरान ख़त्म होना ही था... पूर्व तय था
अगला नंबर पाकिस्तान का होगा या तुर्की का ये देखना होगा
बलोचिस्तान... कुर्दीस्तान और कई अन्य देश अस्तित्व पाएंगे जल्द.... जो अगले 40-50 साल अपनी वफ़ादारी दीन से ज्यादा.... रोटी पर रखेंगे
दुनियाँ तेज़ी से बदल रही है👍
TRN LIVE: ख़ौफ़नाक।
रोहिणी में सनसनीखेज मर्डर।
रमजान के पावन महीने में दो रोजेदारों ने 50 साल के हिंदू अजय की हत्या कर दी।
50 साल के अजय कुमार ने मुश्किल समय में महबूब अली को 4 लाख रुपये उधार दिए थे।
जब अजय कुमार को ब्याज और पैसे वापस करने की बारी आई तो महबूब अली और उसके भाई ने पैसे देने के बहाने घर बुलाया और हत्या कर दी।
बाईट:डीसीपी रोहिणी,राजीव रंजन।
TRN LIVE: 45 साल तक, दुनिया ने उन्हें एक जीती-जागती संत कहा।
मदर टेरेसा। नोबेल शांति पुरस्कार। 3 पोप का आशीर्वाद। अरबों लोग पूजते हैं।
**वह इतिहास की सबसे बड़ी चाइल्ड ट्रैफिकिंग पाइपलाइन चला रही थीं।**
और वेटिकन को पता था।
⚡ **कलकत्ता ऑपरेशन**
1962 और 1997 के बीच, टेरेसा की मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने 100+ देशों में 517 घरों के ज़रिए **3 मिलियन से ज़्यादा अनाथ बच्चों** को प्रोसेस किया।
सामने आए रिकॉर्ड दिखाते हैं:
— उन मांओं से बच्चे ले लिए गए जिन्हें बताया गया था कि उनके बच्चे **जन्म के समय मर गए**।
— गोद लेने के कागज़ात जिन पर नन ने साइन किए थे और **सरकार की कोई निगरानी नहीं थी।**।
— यूरोप और अमेरिका के अमीर परिवारों को बच्चे भेजे गए **$15,000–$50,000 प्रति बच्चे।**।
— अनुमानित सालाना कमाई: **$50 से $100 मिलियन।** टैक्स-फ्री। बिना ऑडिट के। पता नहीं।
उसने उन बच्चों को नहीं बचाया। **उसने उन्हें बेच दिया।**।
🔻 **उन्होंने जो कनेक्शन छिपाए**।
**बेबी डॉक्टर डुवेलियर** — हैती का तानाशाह। टेरेसा को हैती भर के अनाथालयों में जाने का मौका दिया। वही हैती जो आज बच्चों को एपस्टीन पाइपलाइन में डालता है।
**चार्ल्स कीटिंग** — क्रिमिनल बैंकर। टेरेसा को **$1.25 मिलियन** डोनेट किए। उसने जज को एक पर्सनल लेटर लिखकर उसकी रिहाई की गुहार लगाई। यह पैसा 23,000 अमेरिकियों की चोरी हुई सेविंग्स से आया था।
**रॉबर्ट मैक्सवेल** — **घिसलेन मैक्सवेल** के पिता। मीडिया मुगल। वेटिकन के फंडरेज़िंग चैनल्स के ज़रिए टेरेसा से जुड़े। उनकी बेटी एपस्टीन की चीफ रिक्रूटर बनी।
**हिलेरी क्लिंटन** — 1995 में टेरेसा के साथ वाशिंगटन DC में एक टॉडलर होम शुरू किया। होम को **2012 में चुपचाप बंद कर दिया गया।** बच्चे कहाँ गए, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
⚡ **द वेटिकन वॉल्ट**
2017 में, इंडियन पुलिस ने रांची में मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी के एक होम पर छापा मारा।
उन्हें नन मिलीं जो **हर एक बच्चे को $1,800 में बेच रही थीं।**
वेटिकन का जवाब? चुप्पी।
पोप फ्रांसिस ने 2016 में टेरेसा को संत बनाने की प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाया — छापे से एक साल पहले। उन्होंने उन्हें अछूत बनाने के लिए संत घोषित कर दिया।
वेटिकन बैंक ने 1970 और 1997 के बीच टेरेसा के नेटवर्क के ज़रिए **$8 बिलियन के गुमनाम डोनेशन** प्रोसेस किए। कोई रसीद नहीं। कोई रिकॉर्ड नहीं। कोई सवाल नहीं।
पैसा कहाँ गया?
बच्चे कहाँ गए?
**वही जवाब। वही नेटवर्क। वही लोग।**
🔻 **एपस्टीन कनेक्शन**
हैती → डोमिनिकन रिपब्लिक → वर्जिन आइलैंड्स।
यह एपस्टीन का रास्ता था। लेकिन यह टेरेसा का रास्ता **30 साल पहले** था।
उसने जो अनाथालय बनाए, वे बाद में आने वाली चीज़ों के लिए **सप्लाई चेन** बन गए।
ब्रूनेल ने उसकी एजेंसियों का इस्तेमाल किया। मैक्सवेल ने उसके कॉन्टैक्ट्स का इस्तेमाल किया। एपस्टीन ने उसके इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया।
**उसने मशीन बनाई। उन्होंने बस उसे चालू कर दिया।**
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नोबेल प्राइज़। संत का दर्जा। उसके नाम पर बने हॉस्पिटल।
यह सब — अब तक के सबसे बड़े चाइल्ड ट्रैफिकिंग ऑपरेशन को छिपाने के लिए।
**3 मिलियन अनाथ। ज़ीरो अकाउंटेबिलिटी। एक "संत।"**
⟁ सच को आपकी भावनाओं की परवाह नहीं होती।
TRN LIVE: हिंदू घृणा में चूर मृणाल पांडे की ‘द्रौपदी’ की छवि बिगाड़ने की कोशिश, पोल खुलने पर सनातनी विद्वान को किया ब्लॉक: वामपंथी मानसिकता की असलियत आई सामने
मृणाल पांडे द्रौपदी महाभारत विजय रश्मिका शादी
कॉन्ग्रेसी 'नेशनल हेराल्ड' की पत्रकार मृणाल पांडे (फोटो साभार: Purple Pencil Project)
कॉन्ग्रेसी नेशनल हेराल्ड की पत्रकार मृणाल पांडे की हिंदू घृणा छिपाए नहीं छिपती, वह बार-बार सामने आ ही जाती है। ताजा मामले में उन्होंने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करते हुए महाभारत की ‘द्रौपदी’ की छवि बिगाड़ने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर जैसे ही उनकी टिप्पणी वायरल हुई, लोगों ने उनके दावे पर सवाल उठाने शुरू कर दिए और पुराणों व महाभारत के संदर्भों के साथ तथ्य सामने रखे।
लेकिन जैसे ही मृणाल पांडे एक्सपोज होने लगी, तो उन्होंने सवाल पूछने वालों को ही ब्लॉक करना शुरू कर दिया। यह वही वामपंथी सोच है जिसमें पहले एकतरफा नैरेटिव गढ़ा जाता है, फिर जब सच सामने आता है तो असहमति की आवाज दबाने की कोशिश की जाती है।
पहले मृणाल पांडे ने रश्मिका के संदर्भ में ‘द्रौपदी’ पर कसा तंज
दरअसल, साउथ एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना और एक्टर विजय देवरकोंडा की शादी की फोटो पर एक यूजर ने लिखा था कि यह जोड़ी ‘महाभारत के द्रौपदी और अर्जुन’ जैसी वाइब्स दे रहा है। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मृणाल पांडे ने एक तरफ से महाभारत की सभी स्त्रियों को निशाना बनाते हुए कहा, “उम्मीद है कि दुल्हन की किस्मत द्रौपदी, कुंती, गांधारी, तारा, मंदोदरी, अहिल्या से बहुत अलग होगी।”
मृणाल की बात का जवाब देते हुए ‘एक्स’ यूजर नमिता बाल्यान ने महाभारत की इन सभी स्त्रियों के प्रभावशाली व्यक्तित्व की जानकारी दी। नमिता ने कहा, “द्रौपदी, कुंती, गाँधारी, तारा, मंदोदरी और अहिल्या सभी बेहद शक्तिशाली, साहसी, धैर्यवान और अपने समय की बहुत महत्वपूर्ण महिलाएँ थीं। उनका योगदान सिर्फ उनके विवाह या वैवाहिक जीवन तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी मजबूती और समझदारी का परिचय दिया।”
मृणाल को जवाब देते हुए नमिता कहती हैं, “ऐसी महान महिलाओं को केवल उनकी ‘शादी’ के आधार पर आँकना न सिर्फ अधूरी जानकारी दिखाता है, बल्कि उनकी भूमिका को छोटा करने जैसा है। यह सोच खुद में पिछड़ी हुई है, जबकि पोस्ट करने वाला व्यक्ति खुद को प्रगतिशील बताने की कोशिश कर रहा था।”
अहंकारी मृणाल ने द्रौपदी को गलत रूप में किया पेश
मृणाल पांडे का अहंकार ‘द्रौपदी’ का नाम गलत संदर्भ में पेश करने तक भी शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने गलत धारणाएँ बनाकर महाभारत और द्रौपदी की छवि को तोड़-मरोड़कर पेश करना शुरू कर दिया है। मृणाल ने द्रौपदी को ‘चिदग्निकुंड सम भूता’ कहा, यानी उनके अनुसार ‘द्रौपदी’ भीतर की प्रचंड अग्नि से उत्पन्न हुई थीं।
नमिता के कमेंट पर जवाब देते हुए मृणाल लिखती हैं, “इसने उनके कीमती और युवा वर्षों को जरूर प्रभावित किया होगा। इतना बड़ा आघात मन पर गहरी छाप छोड़ गया होगा। उदाहरण के तौर पर द्रौपदी को चिदग्निकुंड सम भूता कहा गया है, यानी वह भीतर की प्रचंड अग्नि से उत्पन्न हुई थीं। इसका मतलब है कि उनके व्यक्तित्व में अंदर की आग, आक्रोश और आत्मसम्मान की तीव्र शक्ति दिखाई देती है।”
मृणाल की गलत धारणाओं का सामने आया सच
मृणाल पांडे की महाभारत और द्रौपदी को लेकर तोड़-मरोड़कर पेश किए गए तथ्यों पर जब हिंदू संस्कृत स्कॉलर नित्यानंद मिश्रा ने सच्चाई सामने रखी तो यह उन्हें रास नहीं आया। उन्होंने विस्तार से बताया कि द्रौपदी के बारे में जो दावा किा गया, वह न तो महाभारत के मूल पाठ में मिलता है और न ही उसके प्रामाणिक संस्करणों में।
मिश्रा ने साफ कहा कि महाभारत के क्रिटिकल एडिशन में कहीं भी द्रौपदी को ‘चिदग्निकुण्डसम्भूता’ नहीं कहा गया है। यह शब्द महाभारत का नहीं है। उन्होंने समझाया कि ‘चिदग्निकुण्डसम्भूता’ शब्द दरअसल ‘देवी ललिता’ के लिए आता है, जिसका उल्लेख ललिता सहस्ननाम में मिलता है और जिसे ब्राह्माण्ड पुराण से जोड़ा जाता है। यानी जिस शब्द को द्रौपदी से जोड़कर पेश किया गया, उसका महाभारत से कोई संबंध ही नहीं है।
नित्यानमंद मिश्रा ने यह भी बताया कि इस शब्द का अर्थ भी गलत बताया गया। चित या चिद का अर्थ ‘चेतना’ होता है, न कि भीतर का क्रोध। ‘चिदग्निकुण्डसम्भूता’ का सही अर्थ है चेतना की अग्नि की वेदी से उत्पन्न। इसे भीतर की प्रचंड आक्रोश की आग से जन्मी बताया संस्कृत के मूल अर्थ को बदल देना है।
उन्होंने विद्वानों के अनुवाद और पारंपरिक व्याख्याओं को हवाला देते हुए कहा कि संस्कृत ग्रंथों के शब्दों का अर्थ संदर्भ और परंपरा के आदार पर समझना चाहिए, मनमाने ढंग से नहीं।
यह सच सामने आने के बाद मृणाल पांडे का हिंदुओं और उनके इतिहास को गलत तरीके से पेश करने वाला नैरेटिव नही ढहता नजर आया। इसके बाद अपनी टिप्पणी को सुधारने, माफी माँगने या पोस्ट डिलीट करने के बजाए उन्होंने नित्यानंद मिश्रा को ही ब्लॉक कर दिया।
कंगना से कफील खान तक: मृणाल पांडे की हिंदू-घृणा की लिस्ट
ये वही मृणाल पांडे हैं, जो एक महिला के चुनावी मैदान में उतरने पर गाली देती हैं। जब कंगना रनौत को बीजेपी ने मंडी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, तो यही पांडे ने ‘मंडी में सही रेट मिलता है?’ जैसा आपत्तिजनक इशारा कर दिया। खुद को नारीवादी बताने वाली पांडे का नारीवाद बीजेपी को निशाना बनाने के सामने गिर गया और उन्होंने महिला को निशाना बनाना चुना, जो बीजेपी का चेहरा है।
दूसरी तरफ जब गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज कांड के आरोपित रहे कफील खान जेल से बाहर आए, तो मृणाल पांडे की खुशी छिपाए नहीं छिपी। उन्होंने खान की तुलना भगवान श्रीकृष्ण से कर डाली। जिस मामले में मासूम बच्चों की मौत हुई, उसमें आरोपी रहे व्यक्ति को भगवान से जोड़ना लोगों को बेहद आपत्तिजनक लगा। तब भी पांडे नहीं हिचकिचाई।
उनकी हिंदू-घृणा यहीं खत्म नहीं होती। कोलकाता पोर्ट का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखे जाने के बाद भी पांडे ने जहर उगला था। पांडे ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम ‘बंदर‘ से जोड़ा। इतना ही नहीं एक बार महाकाल के दर्शन करने वाले सिख नेता का मजाक उड़ाते हुए पांडे ने कहा कि स्वर्ण मंदिर कब जाओगे?
झूठ फैलाओ, सवाल उठे तो ब्लॉक करो: वामपंथियों का तय पैटर्न
मृणाल पांडे का ताजा मामला केवल एक बयान का विवाद नहीं है, बल्कि उस सोच की झलक है जो लंबे समय से वामपंथी इकोसिस्टम में देखने को मिलती रही है। पहले आधी अधूरी जानकारी के आधार पर नैरेटिव बनाया जाता है, हिंदू धर्म और परंपराओं पर सवाल खड़े किए जाते हैं और उसे प्रगतिशील बहस का नाम दिया जाता है। लेकिन जैसे ही कोई तथ्य और ग्रंथों के संदर्भ के साथ जवाब देता है, वही लोग असहज हो जाते हैं। बहस करने का दावा करने वाले अचानक संवाद से पीछे हटते नजर आते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में भी यही देखने को मिला। जब तक उनकी बात पर सवाल नहीं उठे, तब तक सोशल मीडिया पर बयान जारी रहे। लेकिन जैसे ही संस्कृत विद्वानों और आम लोगों ने प्रमाणों के साथ गलतियाँ बताई, जवाब देने के बजाए ब्लॉक करने का रास्ता चुना गया। यह वामपंथी विमर्श का पुराना तरीका है। पहले आरोप लगाओ, फिर विरोध होने पर खुद को पीड़ित दिखाओ और आखिर में असहमति की आवाज ही बंद कर दो।
यही वजह है कि इसे प्रतिशोध की राजनीति कहा जाता है। जब तर्क खत्म हो जाते हैं तो बहस भी खत्म कर दी जाती है और सामने को ही गायब कर दिया जाता है। गलत सूचना फैलाने के लिए कोई माफी नहीं, कोई पछतावा नहीं। मृणाल पांडे का मामला भी उसी पैटर्न की एक और मिसाल बन गया, जहाँ सवालों का जवाब देने के बजाए सवाल पूछने वालों को ब्लॉक कर दिया गया। यह दिखाता है कि झूठ फैलाने वाले वामपंथी, असलियत सामने आते ही कितनी आसानी से पीछे हट जाते हैं।
TRN LIVE: , : *🙏श्री गणेशाय नम:🙏* :
‼️ *जय माता दी* ‼️
,,*ॐ नमो कुलदेवत*,,
*रात्रि ■ कथा*
*!!पाप का धन!!*
एक बार एक गुरु और उनका शिष्य कहीं जा रहे थे रास्ते में उन्हें सोने के सिक्कों से भरा एक थैला मिला
शिष्य जैसे ही उसे उठाने लगा, गुरुजी ने रोकते हुए कहा,
"इसे मत छुओ यह पाप का धन है, यह विनाश का कारण बनेगा।"
शिष्य ने आश्चर्य से पूछा, "गुरुजी, ऐसा कैसे?" गुरुजी बोले, "आओ, छिपकर देखते हैं।"
दोनों पास ही छिपकर बैठ गए थोड़ी देर बाद वहाँ चार सैनिक आए।
उन्होंने जैसे ही सोने से भरा थैला देखा, वे खुशी से झूम उठे
एक सैनिक बोला, "चलो, धन का बँटवारा कर लेते हैं।"
दूसरे सैनिक ने कहा, "पहले भोजन कर लेते हैं.
हममें से दो लोग कुछ सिक्के लेकर शहर जाएँ और खाना ले आएँ।"
दो सैनिक भोजन लाने शहर चले गए पीछे बचे दोनों सैनिकों के मन में लालच आ गया.
उन्होंने योजना बनाई कि जैसे ही वे दोनों लौटेंगे, उन्हें मार देंगे, ताकि धन सिर्फ दो लोगों में बँटे..
उधर शहर गए सैनिकों के मन में भी लालच आ गया..
उन्होंने सोचा कि वे भोजन में ज़हर मिला देंगे, ताकि बाकी दोनों मर जाएँ और सारा धन उन्हीं को मिल जाए.
जब दोनों सैनिक भोजन लेकर लौटे, तो छिपे हुए सैनिकों ने उन्हें मार दिया
फिर वे खुशी-खुशी भोजन करने बैठे लेकिन जैसे ही उन्होंने भोजन किया, ज़हर के
कारण तड़प-तड़प कर मर गए।
इस तरह लालच के कारण चारों सैनिक मारे गए और धन किसी को नहीं मिला यह देखकर गुरुजी ने शिष्य से कहा, "देखा, यही पाप के धन का परिणाम होता है चलो, यहाँ से चलें।"
*तात्पर्य:*
लालच और पाप से कमाया गया धन अंततः विनाश ही लाता है ईमानदा और संतोष ही जीवन में सच्चा सुख देते हैं.
*`पुण्य लाभ के लिए इस पोस्ट को कृपया औरो को भी अवश्य भेजिए`*
, ▬▬▬▬▬⁂⧱⁂▬▬▬▬▬
,, *`पंडित.संजय शास्त्री`* ,,
TRN LIVE*
*कुंडली विश्लेषण, हस्तरेखाविद*
*ASTROLOGY*
*नाम*
*जन्म तिथि*
*जन्म स्थान*
*जन्म का समय*
*Google,phone pay,No.- 8790466194*
*एक बार सेवा का मोका दे*
🌞🌝🌞🌝🌞🌞🌝🌞
*ज्योतिष से संबंधित एवं कुंडली, हस्तरेखा से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए संपर्क करें.*
TRN LIVE: *डीपीसी न्यूज़ नेटवर्क...*
*सहारनपुर: देवबंद पुलिस मुठभेड़ में वांछित गौकश गिरफ्तार.... जनपद सहारनपुर में अपराध नियंत्रण अभियान के तहत थाना देवबंद पुलिस ने 03 मार्च 2026 की रात अकबरपुर गढ़ी रजवाहे पुलिया के पास मुठभेड़ के दौरान एक वांछित गौकश को घायल अवस्था में गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभियुक्त आशु उर्फ आश मोहम्मद पुत्र ताहसीन निवासी फुलास अकबरपुर, थाना देवबंद है, जो मु0अ0सं0 154/2026 धारा 3/5/8 सीएस एक्ट में वांछित था। कब्जे से 01 तमंचा .315 बोर, 02 खोखा, 01 जिंदा कारतूस व 01 मोटरसाइकिल बरामद। एक अन्य आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार, जिसकी तलाश जारी है। घायल बदमाश को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आगे की विधिक कार्रवाई प्रचलित....*
TRN LIVE: *मुक्ति मार्ग पञ्चाङ्ग*
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*आज का पञ्चाङ्ग एवम् राशिफल*
=====================
*बुधवार, ०४ मार्च २०२६*
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*सूर्योदय: - ०६:५२*
*सूर्यास्त: - ०६:२६*
*चन्द्रोदय: - १९:१६*
*चन्द्रास्त: - ०७:००*
*अयन - उत्तरायणे (दक्षिण गोले)*
*ऋतु: 🌳 बसन्त*
*शक सम्वत: - १९४७ (विश्वावसु)*
*विक्रम सम्वत: - २०८२ (सिद्धार्थी)*
*युगाब्द (कलि संवत)-५१२७*
*मास - चैत्र*
*पक्ष - कृष्ण*
*तिथि - प्रतिपदा (१६:४८ से द्वितीया)*
*नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी (०७:३९ से उत्तराफाल्गुनी)*
*योग - धृति (०८:५२ से शूल)*
*प्रथम करण - कौलव (१६:४८ तक)*
*द्वितीय करण - तैतिल (२८:५१ तक)*
*॥गोचर ग्रहा:॥*
============
*सूर्य - कुम्भ*
*चंद्र - कन्या (१३:४५ से)*
*मंगल - कुम्भ (अस्त, पश्चिम , मार्गी)*
*बुध - कुम्भ (अस्त, पश्चिम, वक्री)*
*गुरु - मिथुन (उदित, पूर्व, वक्री)*
*शुक्र - मीन (उदित, पश्चिम, मार्गी)*
*शनि - मीन (उदय, पूर्व, मार्गी)*
*राहु - कुम्भ*
*केतु - सिंह*
*शुभाशुभ मुहूर्त विचार*
==================
*अभिजित मुहूर्त*
*अमृत काल - २४:५४+ से २६:३२+*
*विजय मुहूर्त - १४:२५ से १५:१२*
*गोधूलि मुहूर्त - १८:१५ से १८:४०*
*सायाह्न सन्ध्या - १८:१८ से १९:३२*
*निशिता मुहूर्त - २४:०३+ से २४:५३+*
*राहुकाल - १२:२९ से १३:५६*
*राहुवास - दक्षिण-पश्चिम*
*यमगण्ड - ०८:०७ से ०९:३४*
*दुर्मुहूर्त - १२:०५ से १२:५२*
*होमाहुति - चन्द्र (०७:३९ से मंगल)*
*दिशा शूल - उत्तर*
*नक्षत्र शूल - उत्तर (०७:३९ से)*
*अग्निवास - आकाश*
*चन्द्र वास - पूर्व (दक्षिण १३:४५ से)*
*शिववास - गौरी के साथ (१६:४८ से सभा में)*
*चौघड़िया विचार*
=============
*॥दिन का चौघड़िया॥*
*१ - लाभ २ - अमृत*
*३ - काल ४ - शुभ*
*५ - रोग ६ - उद्वेग*
*७ - चर ८ - लाभ*
*॥रात्रि का चौघड़िया॥*
*१ - उद्वेग २ - शुभ*
*३ - अमृत ४ - चर*
*५ - रोग ६ - काल*
*७ - लाभ ८ - उद्वेग*
*नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।*
*शुभ यात्रा दिशा*
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*दक्षिण-पूर्व (गुड़ अथवा दूध का सेवन कर यात्रा करें)*
*तिथि विशेष*
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*चैत्र कृष्ण पक्ष आरम्भ,धुलण्डी बसन्तोत्सव, गणगौर पूजा आरम्भ, शुद्ध विवाह मुहूर्त धनु-मकर ल० (मध्यरात्रि ०२:०५ से अंतरात्रि ०५:५५ तक), व्यवसाय आरम्भ मुहूर्त प्रातः ०७:३९ से ०९:४४ तक आदि।*
*आज जन्मे शिशुओं का नामकरण*
=====================
*आज ०७:३९ तक जन्मे शिशुओ का नाम पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (टू) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार (टे, टो, प, पी) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।*
*उदय-लग्न मुहूर्त*
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*कुम्भ - ०५:४७ से ०७:१३*
*मीन - ०७:१३ से ०८:३६*
*मेष - ०८:३६ से १०:१०*
*वृषभ - १०:१० से १२:०५*
*मिथुन - १२:०५ से १४:२०*
*कर्क - १४:२० से १६:४१*
*सिंह - १६:४१ से १९:००*
*कन्या - १९:०० से २१:१८*
*तुला - २१:१८ से २३:३९*
*वृश्चिक - २३:३९ से २५:५८+*
*धनु - २५:५८+ से २८:०२+*
*मकर - २८:०२+ से २९:४३+*
*पञ्चक रहित मुहूर्त*
==============
*चोर पञ्चक - ०६:४० से ०७:१३*
*शुभ मुहूर्त - ०७:१३ से ०७:३९*
*रोग पञ्चक - ०७:३९ से ०८:३६*
*चोर पञ्चक - ०८:३६ से १०:१०*
*शुभ मुहूर्त - १०:१० से १२:०५*
*रोग पञ्चक - १२:०५ से १४:२०*
*शुभ मुहूर्त - १४:२० से १६:४१*
*मृत्यु पञ्चक - १६:४१ से १६:४८*
*अग्नि पञ्चक - १६:४८ से १९:००*
*शुभ मुहूर्त - १९:०० से २१:१८*
*रज पञ्चक - २१:१८ से २३:३९*
*शुभ मुहूर्त - २३:३९ से २५:५८+*
*चोर पञ्चक - २५:५८+ से २८:०२+*
*शुभ मुहूर्त - २८:०२+ से २९:४३+*
*रोग पञ्चक - २९:४३+ से ३०:३९+*
*नोट- पंचांग में जहां कहीं भी समय के साथ उपर्युक्त - (➕) चिन्ह का प्रयोग किया जा रहा है वहां उसका आशय अगले दिवस के समय के लिये समझा जाये॥*
*आज का सुविचार*
==============
*ज्ञान अर्जन कभी किसी का समय नष्ट नहीं करता, बल्कि भविष्य को उज्ज्वल करता है॥*
*आज का राशिफल*
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*मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)*
*आज का दिन वृद्धिकारक रहेगा। जिस कार्य से कोई आशा नही रहेगी वहां से भी कुछ ना कुछ लाभ ही होगा। अकस्मात लघु यात्रा आने से दैनिक कार्यो में फेरबदल करना पड़ेगा। आलस्य से आज बचें एक बार किसी कार्य मे विलम्ब हुआ तो रात्रि तक यही क्रम जारी रहेगा। मध्यान बाद व्यस्तता बढ़ेगी व्यवसाय में अकस्मात उछाल आएगा लेकिन इसके अनुरूप आपकी तैयारी नही होने पर खासी मशक्कत करनी पडेगी फिर भी धन की आमद एक से अधिक मार्ग से होगी आर्थिक दृष्टिकोण से भविष्य के प्रति आज निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर मे किसी ना किसी से कलह होकर ही रहेगी। स्वास्थ्य मानसिक दुविधा के कारण सर दर्द अथवा अन्य छोटी मोटी परेशानी आ सकती है।*
*वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
*आज आप स्वभाव से विवेक का परिचय देंगे इसके विपरीत घर का वातावरण बेवजह के झमेलों में डालेगा जिस कारण बाहर समय बिताना अच्छा लगेगा। दैनिक कार्य आज व्यवस्थित रहेंगे अधिक से अधिक धन कमाने की मानसिकता चैन से बैठने नही देगी। कार्य क्षेत्र पर अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा व्यस्त रहेंगे फिर भी इसका लाभ आशाजनक नही मिलेगा। आज आप अनैतिक कार्यो से स्वयं ही दूरी बनाकर रहेंगे फिर भी प्रलोभन से स्वयं को बचाना बड़ी चुनौती रहेगी। धन की आमद अन्य दिनों की अपेक्षा सुधरेगी लेकिन घर मे फरमाइशें की सूची भी लंबी रहने के कारण तुरंत निकल जायेगा। सामाजिक कार्यो के प्रति उदासीनता व्यवहारिक जगत से दूरी बढ़ाएगी। स्वयं अथवा परिजन के स्वास्थ्य के ऊपर भी खर्च करना पड़ेगा।*
*मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)*
*आज का दिन अशुभ फलदायी रहेगा। घर एवं बाहर की परिस्थितियां पल पल पर क्रोध दिलाएंगी इसलिये आज आपको अधिक से अधिक मौन रहने की सलाह है। कार्य क्षेत्र पर भी सहकर्मी अथवा किसी बाहरी व्यक्ति से तालमेल बिगड़ेगा आपको उनका एवं उनको आपका व्यवहार उद्दंड लगेगा जिससे कलह बढ़ेगी। गलती करने पर मान लें अन्यथा परेशानी बढ़ सकती है। आर्थिक रूप से भी दिन उतार चढ़ाव वाला रहेगा जिस लाभ के आप अधिकारी है उसे कोई अन्य ले जाएगा अथवा बहुत कम होने पर निराश होंगे। व्यवसायी वर्ग तगादा करते समय विनम्र रहें अन्यथा गरमा गर्मी में धन डूब सकता है। मन आज वर्जित और असंवैधानिक कार्यो में शीघ्र आकर्षित होगा। महिलाए घर का वातावरण जितना सुधारने का प्रयास करेंगी उतना अधिक बिगड़ेगा। सेहत में नई समस्या बनेगी।*
*कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
*आज का दिन पिछले दिन की तुलना में बेहतर रहेगा लेकिन फिर भी आज दिमाग से सभी प्रकार के डर को दूर करके ही लाभ पाया जा सकता है। दिन के आरंभ से मानसिक रूप से हल्कापन अनुभव करेंगे मन मे विचित्र ख्याल चलते रहेंगे। व्यवसायी वर्ग आज जल्दी ही अपने कामो में जुट जाएंगे इसके विपरीत नौकरी वाले लोग पहले विलम्ब करेंगे बाद में कार्य खत्म करने की जल्दी रहेगी। काम-धंधा मध्यान बाद से गति पकड़ेगा आज कोई बड़ा निर्णय ना ही ले तो बेहतर रहेगा। बचकानी हरकतों से आस-पास का माहौल हास्यप्रद बनाएंगे परिवार में धन अथवा अन्य कारण चिता का विषय रहेंगे। संध्या बाद यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी। सेहत में सुधार अनुभव होगा।*
*सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
*आज के दिन परिस्थिति कुछ एक बातो को छोड़ आपके अनुकूल रहेगी। दिन के आरंभिक भाग में थोड़ी उलझनों का सामना करना पड़ेगा लेकिन इसके बाद अपने कार्यो पर गंभीर होकर ध्यान देंगे। धन लाभ की संभावना दिन भर लगी रहेगी बीच बीच मे पूर्ण होते रहने से मानसिक रूप से संतोष होगा। आज जबरदस्ती किसी के ऊपर कार्य ना थोपे अन्यथा बिगड़ने की संभावना अधिक है। महिलाए घरेलू आवश्यकता में विलंब होने पर नाराज रहेंगी आज मनाना मुश्किल ही रहेगा। सहकर्मी अथवा कोई अन्य आज अंत समय मे अपनी बात से पलटेगा इसलिये परिस्थिति अनुसार पहके से ही तैयार रहें। लंबी यात्रा आज ना करें हानि हो सकती है।*
*कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
*आज दिन के आरंभ से जिस कामना से कार्य करेंगे उसके मध्यान तक पूर्ण होने की संभावना है। कार्य व्यवसाय में आज अन्य दिनों की तुलना में कम परिश्रम से अधिक लाभ कमा सकेंगे। घर के सदस्य अथवा सहकर्मी अपनी बात मनवाने के लिये जिद पर अडंगे पूरी ना होने पर जानबूझकर किसी कार्य मे विलम्ब अथवा बिगाड़ भी सकते है। धन की आमद निश्चित होगी समय से थोड़ा आगे पीछे ही सही। नौकरी वाले लोग आज आलस्य में रहेंगे कार्यो को मजबूरी में सर पर आने पर ही करेंगे। दफ्तर अथवा कार्य क्षेत्र पर व्यवसाय की तुलना में व्यवस्था कम रहेगी जिससे लाभ की मात्रा घटेगी। अपनी कमिया को अनदेखा कर अन्य लोगो मे त्रुटियां निकालेंगे। घर की स्थिति कभी सामान्य कभी उग्र रहेगी। शारीरिक दुर्बलता अनुभव करेंगे।*
*तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
*आज के दिन परिस्थितियां विपरीत बनेगी पूर्व में बनाई योजना परिस्थिति वश अंत समय मे बदलनी पड़ेगी। जिस कार्य ने लाभ देख रहे थे वहां से लाभ तो होगा लेकिन आशा से बहुत कम। व्यवसायी वर्ग धन अथवा महंगी वस्तुओ संबंधित कार्य विचार कर ही करें हानि की संभावना आज अधिक है। धन के फंसने पर आगे के कार्य प्रभावित होंगे। नौकरी वाले जातक विषम परिस्थितियों में भी निश्चिन्त रहेंगे लेकिन घर के वातावरण में कुछ ना कुछ उथल-पुथल लगी रहेगी। धन की आमद प्रयास करने पर हो जाएगी लेकिन आवश्यकता की तुलना में कम रहेगी। महिला वर्ग भावुक कर खर्चा करवाएगी कर्ज बढ़ने के आसार है खर्च आज सोच समझ कर ही करे। सेहत में नया विकार आएगा।*
*वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
*आज का दिन सामाजिक एवं राजकीय कार्य के लिये अनुकूल है धन के साथ पद प्रतिष्ठा का भी लाभ मिलेगा। समाज के उच्चवर्गीय लोगो से जान पहचान होगी परन्तु इनसे तुरंत लाभ उठाने का प्रयास ना करें अन्यथा संबंधों में तुरंत खटास भी आ सकती है। सार्वजिक क्षेत्र पर आवश्यकता पड़ने पर ही बोले जल्दबाजी में कुछ अप्रिय बयानबाजी कर देंगे जिससे व्यक्तित्व में कमी आ सकती है। व्यवसायी वर्ग धन कमाने के चक्कर मे जल्दबाजी करेंगे परन्तु ध्यान रहे प्रतिस्पर्धा होने के बाद भी आज धैर्य रखने का परिणाम बाद में अवश्य ही लाभ दिलाएगा। धन की आमद संतोषजनक रहेगी खर्च करने में पीछे नही हटेंगे। घर का वातावरण गलतफहमी के कारण कुछ समय के लिये अशान्त बनेगा। जोड़ो अथवा मासपेशी संबंधित समस्या बन सकती है। यात्रा लाभदायक रहेगी।*
*धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)*
*आज का दिन कार्य सिद्धि वाला रहेगा जिस भी कार्य को करेंगे उसमे परिस्थितियां स्वतः ही अनुकूल बनने लगेंगी आवश्यकता के समय सहयोग भी आसानी से मिल जाएगा। अधिकांश कार्य सही दिशा और भाग्य का साथ मिलने से समय पर पूर्ण होंगे। कारोबारी लोग आज किया निवेश का लाभ निकट भविष्य में उठाएंगे फिर भी ज्यादा जोखिम ना लें। नौकरी वाले जातक आज अतिरिक्त कार्य आने पर असहज अनुभव करेंगे सहयोग भी कम मिलेगा फिर भी अपने पराक्रम से थोडे विलम्ब से विजय पा लेंगे। धन की आमद दोपहर बाद निश्चित होगी अतिरिक्त खर्च भी होंगे। गृहस्थ का माहौल पल-पल में बदलने से तालमेल बैठाने में परेशानी होगी। परिजनों के लिये समय निकालें अन्यथा मतभेद हो सकते है। सेहत लगभग सामान्य ही रहेगी।*
*मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)*
*आज के दिन दैनिक कार्यो के अलावा धार्मिक कार्यो के लिये भी समय निकालेंगे परोपकार की भावना दिखावे की रहेगी दान पुण्य मतलब के लिये ही करेंगे। व्यवहारिक जगत के लिये आज आप नकारा ही सिद्ध होंगे। अपना कार्य साधने के लिये मीठे बनेंगे परन्तु किसी और का कार्य करने में क्रोध आएगा। कार्य-व्यवसाय से आज लाभ की उम्मीद अधिक रहेगी धन लाभ होगा भी आशाजनक लेकिन असमय होने उत्साहित नही करेगा। नौकरी वाले लोग जदबाजी में कुछ ना कुछ गड़बड़ करेंगे जिसके उजागर होने पर आलोचना होगी। पारिवारिक वातावरण गरिमामय रहेगा लेकिन परिजनों मन ही मन कुछ ना कुछ उधेड़ बुन में रहेंगे। घरेलू कार्यो की टालमटोल से बचे कलह हो सकती है। सेहत थकान को छोड़ सामान्य रहेगी।*
*कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
*आज का दिन उतार-चढ़ाव वाला रहेगा। दिन के आरंभ से ही शारीरिक शिथिलता सभी कार्यो में बाधा डालेगी फिर भी जबरदस्ती करना बाद में महंगा पड़ेगा। शारीरिक रूप से आज कुछ ना कुछ परेशानी लगी रहेगी मन अनर्गल प्रवृतियों में भटकेगा। घर अथवा व्यावसायिक कार्यो के प्रति लापरवाही करेंगे लेकिन फिर भी मनोरंजन की योजना बनायेगें। कार्य व्यवसाय से लाभ निश्चित होगा लेकिन किसी के सहयोग से ही। महिलाये भी आरोग्य में कमी रहने के कारण धीमी गति से कार्य करेंगी घर का वातावरण अस्त-व्यस्त रहेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन आशाजनक नही रहेगा फिर भी कर्म की तुलना में अधिक ही होगा। परिवार के सदस्य झुंझलाहट में बेवजह ही एक दूसरे से उलझेंगे। यात्रा टालें।*
*मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
*आज का दिन यादगार रहेगा। कई दिनों से मन में चल रही कामना की पूर्ति आज होने से अकस्मात खुशी मिलेगी। कार्य व्यवसाय में भी उन्नति के योग है जिस किसी कार्य को करेंगे उसमें स्वयं के बल पर ही सफलता पा लेंगे भागीदारी के कार्यो में बड़े निर्णय लेने से आज बचें अन्यथा तालमेल की कमी के कारण आपस मे फुट पड़ सकती है। महिलाए भ्रामक खबरों पर यकीन ना करें वरना घर का सुरम्य वातावरण छोटी सी गलतफहमी के कारण लंबे समय के लिये अशान्त बनेगा। धन की आमद सही समय पर होगी फिर भी आज संतोष की कमी रहने पर कुछ ना कुछ अभाव अनुभव करेंगे। व्यवहारिक संबंधों को छोड़ अन्य सभी कार्य में विजय मिलेगी। सेहत उत्तम रहेगी।*
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स्वभावो नोपदेशेन
शक्यते कर्तुमन्यथा। सुतप्तमपि पानीयं
पुनर्गच्छति शीतताम्॥
गणेश भगवान जी की जय।
TRN LIVE: *ना मुझे अमेरिका, इजरायल से मतलब है और नहीं खाड़ी के किसी दुबई, कतर, बहरीन, अबूधाबी या सऊदी जैसे देश से और ना ईरान से,
मुझे अपना भारत सुरक्षित चाहिए!*
*#कश्मीर में नरसंहार हुआ तो तुमने कोई विरोध नहीं किया..*
*कारगिल में सैकड़ों भारतीय सैनिक शहीद हुए तुमने कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया,* मजहब की चादर ओढ़ के मौन थे,
*26/11 #मुम्बई मैं आतंकवादी हमला हुआ तुमने कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया।*
*#अयोध्या से लौट रहे #कारसेवको को #गोधरा में #साबरमती ट्रेन में जिंदा जलाया गया तुमने कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया..*
*#संसद पर हमला हुआ तुम मौन रहे।*
*#पहलगाम #पुलवामा और #उरी में हमला हुआ, धर्म पूछ कर मारा गया तुमने कोई विरुद्ध प्रदर्शन नहीं किया..*
*आज तुम्हारे मजहब के विदेशी धरती में आग लगी हुई है तो अब भारत में सीना पीट रहे हो..*
और कहते हो कि तुम्हारा भी खून शामिल है यहां की मिट्टी में.. तुम्हारी गद्दारी शामिल है!
*परायों के लिए तुम्हारी आंखों में आंसू आ जाते हैं और अपने देश में आतंकवादी हमले में मारे जाने वाले आम भारतीयों के लिए क्यों नहीं?*
*गद्दारों अब तुम्हारे आकाओं और तुम्हारा नरेटिव देश समझ गया है!* 😡😡😡
TRN LIVE: नेहरु खानदान का घिनौना चरित्र
मोहम्मद युनूस जिसका जिक्र स्व. सुषमाजी ने संसद मैं किया था, जो नेहरू को शराब और सुन्दरिया सप्लाई करता था।
के एन राव की पुस्तक "नेहरू राजवंश" (10: 8186092005 ISBN) में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है...
संजय गांधी फ़िरोज़ गांधी का पुत्र नहीं था, जिसकी पुष्टि के लिए उस पुस्तक में अनेक तथ्यों को सामने रखा गया है। उसमे यह साफ़ तौर पे लिखा हुआ है की संजय गाँधी एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नामक सज्जन का बेटा था।
दिलचस्प बात यह है की एक सिख लड़की मेनका का विवाह भी संजय गाँधी के साथ मोहम्मद यूनुस के घर में ही हुआ था। मोहम्मद यूनुस ही वह व्यक्ति था, जो संजय गाँधी की विमान दुर्घटना के बाद सबसे ज्यादा रोया था।
यूनुस की पुस्तक "व्यक्ति जुनून और राजनीति" (Persons passions and politics) (ISBN-10: 0706910176) में साफ़ लिखा हुआ है की संजय गाँधी के जन्म के बाद उनका खतना पूरे मुस्लिम रीति रिवाज़ के साथ किया गया था। आदिल शहरयार मोहम्मद युनुस (राजीव की माँ मैमुना उर्फ़ इंदिरा के बेटे संजय का असली बाप) का बेटा था। आदिल शहरयार इंदिरा गांधी के निजी सहायक रहे मोहम्मद युनुस का बेटा था। उसका लालन पालन इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे की तरह ही हुआ था। शहरयार अमेरिका गया लेकिन वहां जाकर वह अपराध जगत का हिस्सा बन गया।
30 अगस्त 1981 को आदिल मियामी के एक होटल में पकड़ा गया था। उसके ऊपर आगजनी में शामिल होने का आरोप था। पकड़े जाने पर जब अमेरिकी प्रशासन ने आदिल के बारे में छानबीन शुरू की, तो पता चला कि वह ड्रग रैकेट का हिस्सा है।
उसके कई और अपराध सामने आये और अमेरिका के न्यायालय ने उसे 'खतरनाक मुजरिम' की श्रेणी में रखा और 35 साल की सजा सुनाई गयी।
आदिल शहरयार को 1981 में अमरीकी अदालतों ने जलयान में फायरबोम्ब लगाने के अपराध में 35 वर्ष कैद की सजा सुनाई थी... जिसमें 10 वर्ष की कैद भुगतने से पहले पैरोल मिलने की भी सुविधा नही थी।
1985 में अपनी अमरीका यात्रा में राष्ट्रपति रोनाल्ड रिगन से भेंट के दौरान राजीव गांधी ने आदिल शहरयार (सच्चाई में सगे धर्मभाई) की रिहाई के बदले... एंडरसन (भोपाल गैस कांड के समय यूनियन कार्बाइड का अध्यक्ष) को सेफ पैसेज देने की अनैतिक डील की थी...
इसके बाद तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति ने आदिल शहरयार की 35 साल की सज़ा को माफ़ कर दिया था।
CIA की एक रिपोर्ट से उजागर हुआ है कि... भारत सरकार ने एंडरसन के बदले में आदिल शहरयार को वापस मांगा था। यह रिपोर्ट 2002 में डिक्लासीफाईड की जा चुकी है। CIA की ही रिपोर्ट में यह खुलासा भी होता है कि मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह दिल्ली के आदेशों का पालन कर रहे थे!
कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक "The life of Indira Nehru Gandhi (ISBN : 9780007259304) में इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डाला है!
यह लिखा है कि इंदिरा का पहला प्यार शान्तिनिकेतन में जर्मन शिक्षक के साथ था! बाद में वह एम ओ मथाई, (पिता के सचिव) धीरेंद्र ब्रह्मचारी (उनके योग शिक्षक) के साथ और दिनेश सिंह (विदेश मंत्री) के साथ भी अपने प्रेम संबंधो के लिए प्रसिद्द हुई। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंदिरा गांधी के मुगलों के लिए संबंध के बारे में एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन किया।
अपनी पुस्तक "Profiles and letters" (ISBN: 8129102358 ) में ये कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान की सरकारी यात्रा पर गयी थी। नटवर सिंह एक आईएफएस अधिकारी के रूप में इस दौरे पे गए थे। दिन भर के कार्यक्रमों के होने के बाद...
इंदिरा गांधी को शाम मे सैर के लिए बाहर जाना था।
कार मे एक लंबी दूरी जाने के बाद, इंदिरा गांधी बाबर की कब्रगाह के दर्शन करना चाहती थी, हालांकि यह इस यात्रा कार्यक्रम मे शामिल नही किया गया था।अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने उनकी इस इच्छा पर आपत्ति जताई पर इंदिरा अपनी जिद पर अड़ी रही। अंत में वह उस कब्रगाह पर गयी।
यह एक सुनसान जगह थी। वह बाबर की कब्र पर सर झुका कर आँखें बंद करके खड़ी रही और नटवर सिंह उसके पीछे खड़े थे! जब इंदिरा ने उसकी प्रार्थना समाप्त कर ली, तब वह मुड़कर नटवर से बोली... "आज मैने अपने इतिहास को ताज़ा कर लिया
यहाँ आपको यह बता दे की बाबर मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक था, और नेहरु खानदान इसी मुग़ल साम्राज्य से उत्पन्न हुआ! इतने साल जनता इसी धोखे मे है की नेहरु एक कश्मीरी पंडित था। जो कि सरासर गलत है
TRN LIVE: पहली बार एक ऐसी मूवी देखी जिसके आर्टिस्ट से ले कर सारे सहायक स्टाफ के नाम जो फिल्म खत्म होने पर दिखाए जाते हैं , उनमें कोई मुस्लिम नाम नहीं दिखा.....
इस तरह की मूवी अभी तक बॉलीवुड में क्यों नहीं बन सकती थीं , उसका कारण यह इस्लामी इकोसिस्टम था जिसमें स्पॉट ब्वॉय से ले कर कैमरा मैन, एडिटर और जो भी एक फिल्म बनाने में चाहिए , वह मुस्लिम ही मिलेगा...
इसीलिए मुस्लिमों की सामाजिक बुराइयों पर कोई फिल्म कभी नहीं बनती , सारा समाज सुधार , सेकुलरियत, नास्तिकवाद हिंदुओं को ही फिल्मों से परोसा जाता रहा .....
धीरे धीरे ही सही , चार साल पहले कश्मीर फाइल आई , फिर केरला स्टोरीज , बंगाल फाइल्स आदि आनी शुरू हुईं। अब केरला स्टोरीज का दूसरा पार्ट आया है जिसमें यह जताने की कोशिश की गई कि -----मामला सिर्फ केरल , बंगाल, कश्मीर तक ही सीमित नहीं है बल्कि राजस्थान , उत्तर प्रदेश, राजस्थान , मध्यप्रदेश जैसे राज्यों तक भी फैल चुका है जहां कहने को बीजेपी दशकों से सत्तासीन है .....
पीएफआई और छांगुर बाबा किस तरह से पूरे भारत को 2047 तक गज़वा ए हिंद बनाने के मिशन में जुटे हुए हैं यह इस मूवी में विस्तार से बताया गया है ......
मूवी में एक व्हाइट कॉलर मोमिन आdतंकी जो दिखावटी सेकुलर, नास्तिक पत्रकार बना हुआ है , वह पीएफआई का मिशन चलाता है और कहता है ------
"जो काम मुहब्बत के नाम से आसानी से , कानूनी तरीके से किया जा सकता है , उसके लिए गोली बारूद क्यों खर्च करना ..."
फिल्म में डायलॉग है कि-----
"हिंदुओं की आठ करोड़ लड़कियों को स्कूलों , कालेजों से उठाना है लव जिहाद करके और बीस साल में उनसे पांच दस बच्चे पैदा कर के 2047 तक इस्लामी भारत तैयार हो जाएगा , बुढ़ाते , मरते, घटते, अविवाहित हिंदू क्या उखाड़ लेंगे ...?"
एक और डायलॉग है -----
"नास्तिक हिंदू होते हैं , मुस्लिम कभी नास्तिक नहीं होता है । वह तो काफिरों को सही राह पर लाने के लिए कुछ टाइम अल तकिया करता है , नाम बदलता है , अपने को नास्तिक बताता है जब तक शिकार फंस ना जाए..."
फिल्म में एक जगह इनकी शिकार हिंदू लड़की कहती है कि ---- "मैं तो फिल्मों , क्रिकेट राजनीति में हिंदू लड़कियों को मुस्लिम आदमियों से शादी कर के आराम से रहते देखती थी , एपीजे अब्दुल कलाम, परमवीर अब्दुल हमीद, बिस्मिल्लाह खान, शाहरुख , सलमान , आमिर खान को ही असली मुस्लिम मानती थी, वही देख कर तुमसे शादी की अब तुम कैसे बदल गए ..?"
इस पर जेहादी शौहर जवाब देता है कि ---
"बीस साल रुको, उसके बाद असली हीरो हमारे जैसे लोग माने जाएंगे जिन्होंने गज़वा ए हिंद कर के इस्लामी हिंद बनाया और जिनका नाम तुम ले रही हो उनका कोई नाम नहीं लेगा..."
फिल्म में दिखाया जा रहा है कि हिंदू लड़कियां आज माता पिता द्वारा लड़कों से भी ज्यादा पैंपर्ड की जा रही हैं । उनको फिल्म , रील , ब्वॉयफ्रेंड , सेक्स सबकी छूट चाहिए , उसके बाद भी शादी में मां बाप से पूछने ले जरूरत नहीं है , माय लाइफ माय चॉइस इंटरनेट से सीख कर नारा लगाया जा रहा है ।
फिल्म में ऐसी ही तीन आसमान में उड़ने वाली लड़कियों को जेहादी मक्कार बड़ी आसानी से फंसाते हैं क्योंकि इनको असली दुनियां से ज्यादा रील की दुनियां से मतलब रहता है ......
उसके बाद जो यह इस्लामी गटर में गिरती हैं तो कहीं की नहीं रहती हैं...... या तो जीते जी नर्क भोगती हैं और असली इस्लाम का मजा लेती हैं या सीधे कट पिट कर जहन्नुम जाती हैं .....
इसकी कहानी रोज मीडिया में छपती असली घटनाओं से ली गई है................ इसलिए कोर्ट से रोक लगवाने की कोशिश मोमिनों ने की थी, पर असफल रहे ।
यह सब बड़े पैमाने पर चल रहा है ।
जरूरत है इसको हर हिंदू परिवार में हर स्त्री को दिखाया जाए । सरकार , कानून कुछ नहीं करेंगे । जब तक शठे शाठ्यम समाचरेत यानी पीड़ित व्यक्ति खुद अपना हिसाब इनसे सीधे सीधे करेगा , तब तक इनका एजेंडा चलता रहेगा । फिल्में सिर्फ सचेत कर सकती हैं लेकिन जो आंख होते हुए भी अंधा बने रहना चाहता है , उसका मिटना तय है ।
जिनका 24 घंटे सिर्फ एक ही काम है गज़वा ए हिंद , फिर चाहे वह डॉक्टर, इंजीनियर, क्रिकेटर, कोच , टीचर, एक्टर कोई भी सफेदपोश ही क्यों ना हो , उनसे सावधानी हटते ही दुर्घटना घटने की संभावना पूरी है ।
अभी लेटेस्ट न्यूज उत्तर प्रदेश,मेरठ से आ रही है ।
इसके पहले छांगुर बाबा लखनऊ में एजेंडा चला रहे थे ।
ताज़ा मामला मेरठ की CCS यूनिवर्सिटी का है, जहाँ दो जाहिल जिहादी मुसलमान दो अलग-अलग बड़े चैनलों के रिपोर्टर और रिपोर्टर बनकर हिंदू छात्राओं को बहला-फुसला रहे थे......
मामला तब सामने आया जब एक लव जिहादी युवक कॉलेज यूनिवर्सिटी कैंपस में स्वामी विवेकानंद पार्क के पास एक छात्रा को बहला-फुसलाकर ज़बरदस्ती उसका मोबाइल नंबर माँग रहा था।
लेकिन संस्कारी हिंदू छात्रा ने अपना नंबर देने से साफ़ मना कर दिया, तो जाहिल लव जिहादी ने सारी हदें पार कर दीं और उसके कपड़े खींचने की कोशिश की...
संस्कारी छात्रा की चीखें सुनकर उसी कॉलेज/यूनिवर्सिटी के दूसरे छात्र और VHP-बजरंग दल के कार्यकर्ता बुलाए गए और इस लव जिहादी को पकड़कर पहले बुरी तरह पीटा गया और फिर उससे कड़ी पूछताछ की गई।
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TRN LIVE: स्वामी जी आप सलीम की मानसिकता को जाने बिना
मोदी जी
योगी जी
और अपने ही हिंदू भाइयों के विरोध में खड़े हो गए
काश आपने सलीम वास्तिक के मन में सनातन के प्रति इस जहर को समजने का प्रयास किया होता जिस सलीम वास्तिक के लिए आप अपने ही समाज के विरोध में खड़े हो गए सुनिए इस सलीम वास्तिक के विचार सनातन के प्रति क्या है सलीम वास्तिक का कहना है सनातन इस्लाम से खतरनाक है
सभी सनातनी बंधुओ को जानना चाहिए इस सलीम वास्तिक के मन में सनातन के प्रति कितनी नफ़रत है
🚩जय माँ भवानी 🚩
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$1 की वास्तविक कीमत ₹10 से लेकर अधिकतम ₹20 के बीच है
₹20 भी नहीं है लगभग ₹10 से लेकर ₹15 के बीच में है
और
हम चुका रहे हैं उसके निब्बे रुपए
यह देश का आम आदमी चुका रहा है
क्योंकि सारे एक्सपोर्टर जो डॉलर में जिनके पास पैसा आता है वह तो निब्बे रुपए ले लेते हैं
लेकिन यहां जो एक्सपोर्टर है उसमें भी कई प्रकार के एक्सपोर्टर है
एक तो उत्पादक
दूसरा सेवा देने वाला आईटी सेक्टर
उत्पादक के पास तो कच्चा माल भी दूसरे देशों से आता है तो वहां तो वह अपने हिसाब से चलता है
👉लेकिन सेवा देने वाले व्यक्ति आईटी सेक्टर में जो ऊंची सैलरी है वह इसी लूट के कारण है
और यह लूट भारत के गरीब लोगों को ही लूट कर लूटी जा रही है ??
बताएं कोई
भारत सरकार के पास
नरेंद्र मोदी के पास
मनमोहन सिंह के पास कोई नोट छापने की मशीन तो है नहीं कि वह₹10 की जगह निब्बे रुपए दे देंगे
या कोई पेड़ लगा हुआ नहीं
क्योंकि मनमोहन सिंह ने साफ मना कर दिया कि हमारे पास कोई पेड़ लगा हुआ नहीं है कि हम नोट बरसा सके
इस लूट कीमत चुका रही है प्रकृति
कीट पतंगे
नदिया जल वायु पेड़ पौधे जंगली जीव घरेलू जीव और
फिर मनुष्य में गरीब सबसे गरीब आदमी
मेरे देश के लोगों
आईटी सेक्टर में जो ऊंची सैलरी है जिनके कारण सरकारी कर्मचारी ऊंची सैलरी ले रहे हैं
यह भारत के गरीबों से लूट है??
इस पर विचार विमर्श करो
भारतीय बर्बाद हो रहे हैं भारत तरक्की कर रहा है??
👉जिस देश के सुप्रीम कोर्ट को यही पता नहीं कि भारत के अधिकांश जनता ₹10000 महीने में कार्य कर रही है उस देश को गुलाम बनने से कोई नहीं रोक सकता
यहां अभी राजस्थान हाई कोर्ट शायद यही खबर थी में एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी
कई सालों से वह बहुत कम लगभग 7000- 8000 रुपए महीने में कार्य कर रहा था
उसके करने के बाद में भजनलाल सरकार ने 12 या 13000 रुपए महीना सैलरी करी है
जागो मेरे देशवासियों
हिंदू मुसलमान करने से यह प्रदूषित नदियां वायु अनाज दूध सही नहीं होगा या दलित यूजीसी ऊंची जाति नीची जाति करने से भी कुछ नहीं होगा
यह तो समस्याओं का ध्यान भटकाने की साजिश होती है
😢😢
TRN LIVE: पर्शिया से ईरान एक महान सभ्यता के 'मिटने' की दास्तान!
क्या आप जानते हैं कि जिसे आज हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान कहते हैं, वह कभी 'पर्शिया' (पारस) था? एक ऐसा देश जहाँ की हवाओं में वेदों जैसी पवित्र ऋचाएं गूँजती थीं और जहाँ अग्नि (Fire Temple) की पूजा होती थी।
क्या हुआ था पारस के साथ
इतिहास गवाह है कि 7वीं शताब्दी में अरब के रेगिस्तान से उठी एक लहर ने 3000 साल पुरानी महान पारसी सभ्यता को निगल लिया। शुरुआत छोटे स्तर पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे राजनीतिक और सैन्य ताकत के बल पर पूरे साम्राज्य पर कब्जा कर लिया गया। पारसियों के सामने तीन रास्ते रखे गए धर्म परिवर्तन, मौत, या अपमानजनक 'जिज़िया' कर।
देखते ही देखते वहां की हज़ारों साल पुरानी संस्कृति, भाषा और परंपराएं मरुस्थल की धूल में मिल गईं। आज वहां पारसी 'अल्पसंख्यक' भी नहीं बचे।
हिंदुओं के लिए बड़े सबक....
इतिहास खुद को दोहराता है यदि हम उससे सीखते नहीं। पर्शिया का पतन आज के हिंदुओं के लिए एक गंभीर चेतावनी है पारसी अपनी आंतरिक गुटबाजी और उदारता के कारण संगठित शत्रु को नहीं पहचान सके। हिंदुओं को जाति-पाति से ऊपर उठकर 'एक राष्ट्र, एक धर्म' के भाव से जुड़ना होगा।
शास्त्र के साथ 'शस्त्र' का महत्व: शांति केवल तभी सुरक्षित रहती है जब आपके पास उसे बचाए रखने की शक्ति हो। केवल सहिष्णुता से अस्तित्व नहीं बचता, सामर्थ्य भी जरूरी है।
अपनी जड़ों, वेदों और परंपराओं का सम्मान करें। जो समाज अपनी संस्कृति को 'पुराना' कहकर त्याग देता है, उसे दूसरी संस्कृतियां कुचल देती हैं।
इतिहास बताता है कि किसी भी क्षेत्र का भूगोल वहां की जनसंख्या के अनुपात से बदल जाता है। सतर्कता ही एकमात्र सुरक्षा है।
उदारता की आड़ में छिपे कट्टरवाद को पहचानना सीखें। पर्शिया की गलती यह थी कि उन्होंने 'अतिथि' और 'आक्रांता' के बीच का फर्क देर से समझा।
मुट्ठी भर पारसी अपनी आस्था बचाने के लिए भारत आए, जहाँ हिंदुओं ने उन्हें सीने से लगाया। आज भारत में पारसी फल-फूल रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी मातृभूमि (ईरान) आज उनकी नहीं रही।
"जो समाज अपने इतिहास को भूल जाता है, वह इतिहास के पन्नों से मिटा दिया जाता है।"
जागिए, संगठित होइए और अपनी विरासत को बचाइए…
#राष्ट्रभक्ति
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हिंदू घृणा में चूर मृणाल पांडे की ‘द्रौपदी’ की छवि बिगाड़ने की कोशिश, पोल खुलने पर सनातनी विद्वान को किया ब्लॉक: वामपंथी मानसिकता की असलियत आई सामने
मृणाल पांडे द्रौपदी महाभारत विजय रश्मिका शादी
कॉन्ग्रेसी 'नेशनल हेराल्ड' की पत्रकार मृणाल पांडे (फोटो साभार: Purple Pencil Project)
कॉन्ग्रेसी नेशनल हेराल्ड की पत्रकार मृणाल पांडे की हिंदू घृणा छिपाए नहीं छिपती, वह बार-बार सामने आ ही जाती है। ताजा मामले में उन्होंने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करते हुए महाभारत की ‘द्रौपदी’ की छवि बिगाड़ने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर जैसे ही उनकी टिप्पणी वायरल हुई, लोगों ने उनके दावे पर सवाल उठाने शुरू कर दिए और पुराणों व महाभारत के संदर्भों के साथ तथ्य सामने रखे।
लेकिन जैसे ही मृणाल पांडे एक्सपोज होने लगी, तो उन्होंने सवाल पूछने वालों को ही ब्लॉक करना शुरू कर दिया। यह वही वामपंथी सोच है जिसमें पहले एकतरफा नैरेटिव गढ़ा जाता है, फिर जब सच सामने आता है तो असहमति की आवाज दबाने की कोशिश की जाती है।
पहले मृणाल पांडे ने रश्मिका के संदर्भ में ‘द्रौपदी’ पर कसा तंज
दरअसल, साउथ एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना और एक्टर विजय देवरकोंडा की शादी की फोटो पर एक यूजर ने लिखा था कि यह जोड़ी ‘महाभारत के द्रौपदी और अर्जुन’ जैसी वाइब्स दे रहा है। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मृणाल पांडे ने एक तरफ से महाभारत की सभी स्त्रियों को निशाना बनाते हुए कहा, “उम्मीद है कि दुल्हन की किस्मत द्रौपदी, कुंती, गांधारी, तारा, मंदोदरी, अहिल्या से बहुत अलग होगी।”
मृणाल की बात का जवाब देते हुए ‘एक्स’ यूजर नमिता बाल्यान ने महाभारत की इन सभी स्त्रियों के प्रभावशाली व्यक्तित्व की जानकारी दी। नमिता ने कहा, “द्रौपदी, कुंती, गाँधारी, तारा, मंदोदरी और अहिल्या सभी बेहद शक्तिशाली, साहसी, धैर्यवान और अपने समय की बहुत महत्वपूर्ण महिलाएँ थीं। उनका योगदान सिर्फ उनके विवाह या वैवाहिक जीवन तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी मजबूती और समझदारी का परिचय दिया।”
मृणाल को जवाब देते हुए नमिता कहती हैं, “ऐसी महान महिलाओं को केवल उनकी ‘शादी’ के आधार पर आँकना न सिर्फ अधूरी जानकारी दिखाता है, बल्कि उनकी भूमिका को छोटा करने जैसा है। यह सोच खुद में पिछड़ी हुई है, जबकि पोस्ट करने वाला व्यक्ति खुद को प्रगतिशील बताने की कोशिश कर रहा था।”
अहंकारी मृणाल ने द्रौपदी को गलत रूप में किया पेश
मृणाल पांडे का अहंकार ‘द्रौपदी’ का नाम गलत संदर्भ में पेश करने तक भी शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने गलत धारणाएँ बनाकर महाभारत और द्रौपदी की छवि को तोड़-मरोड़कर पेश करना शुरू कर दिया है। मृणाल ने द्रौपदी को ‘चिदग्निकुंड सम भूता’ कहा, यानी उनके अनुसार ‘द्रौपदी’ भीतर की प्रचंड अग्नि से उत्पन्न हुई थीं।
नमिता के कमेंट पर जवाब देते हुए मृणाल लिखती हैं, “इसने उनके कीमती और युवा वर्षों को जरूर प्रभावित किया होगा। इतना बड़ा आघात मन पर गहरी छाप छोड़ गया होगा। उदाहरण के तौर पर द्रौपदी को चिदग्निकुंड सम भूता कहा गया है, यानी वह भीतर की प्रचंड अग्नि से उत्पन्न हुई थीं। इसका मतलब है कि उनके व्यक्तित्व में अंदर की आग, आक्रोश और आत्मसम्मान की तीव्र शक्ति दिखाई देती है।”
मृणाल की गलत धारणाओं का सामने आया सच
मृणाल पांडे की महाभारत और द्रौपदी को लेकर तोड़-मरोड़कर पेश किए गए तथ्यों पर जब हिंदू संस्कृत स्कॉलर नित्यानंद मिश्रा ने सच्चाई सामने रखी तो यह उन्हें रास नहीं आया। उन्होंने विस्तार से बताया कि द्रौपदी के बारे में जो दावा किा गया, वह न तो महाभारत के मूल पाठ में मिलता है और न ही उसके प्रामाणिक संस्करणों में।
मिश्रा ने साफ कहा कि महाभारत के क्रिटिकल एडिशन में कहीं भी द्रौपदी को ‘चिदग्निकुण्डसम्भूता’ नहीं कहा गया है। यह शब्द महाभारत का नहीं है। उन्होंने समझाया कि ‘चिदग्निकुण्डसम्भूता’ शब्द दरअसल ‘देवी ललिता’ के लिए आता है, जिसका उल्लेख ललिता सहस्ननाम में मिलता है और जिसे ब्राह्माण्ड पुराण से जोड़ा जाता है। यानी जिस शब्द को द्रौपदी से जोड़कर पेश किया गया, उसका महाभारत से कोई संबंध ही नहीं है।
नित्यानमंद मिश्रा ने यह भी बताया कि इस शब्द का अर्थ भी गलत बताया गया। चित या चिद का अर्थ ‘चेतना’ होता है, न कि भीतर का क्रोध। ‘चिदग्निकुण्डसम्भूता’ का सही अर्थ है चेतना की अग्नि की वेदी से उत्पन्न। इसे भीतर की प्रचंड आक्रोश की आग से जन्मी बताया संस्कृत के मूल अर्थ को बदल देना है।
उन्होंने विद्वानों के अनुवाद और पारंपरिक व्याख्याओं को हवाला देते हुए कहा कि संस्कृत ग्रंथों के शब्दों का अर्थ संदर्भ और परंपरा के आदार पर समझना चाहिए, मनमाने ढंग से नहीं।
यह सच सामने आने के बाद मृणाल पांडे का हिंदुओं और उनके इतिहास को गलत तरीके से पेश करने वाला नैरेटिव नही ढहता नजर आया। इसके बाद अपनी टिप्पणी को सुधारने, माफी माँगने या पोस्ट डिलीट करने के बजाए उन्होंने नित्यानंद मिश्रा को ही ब्लॉक कर दिया।
कंगना से कफील खान तक: मृणाल पांडे की हिंदू-घृणा की लिस्ट
ये वही मृणाल पांडे हैं, जो एक महिला के चुनावी मैदान में उतरने पर गाली देती हैं। जब कंगना रनौत को बीजेपी ने मंडी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, तो यही पांडे ने ‘मंडी में सही रेट मिलता है?’ जैसा आपत्तिजनक इशारा कर दिया। खुद को नारीवादी बताने वाली पांडे का नारीवाद बीजेपी को निशाना बनाने के सामने गिर गया और उन्होंने महिला को निशाना बनाना चुना, जो बीजेपी का चेहरा है।
दूसरी तरफ जब गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज कांड के आरोपित रहे कफील खान जेल से बाहर आए, तो मृणाल पांडे की खुशी छिपाए नहीं छिपी। उन्होंने खान की तुलना भगवान श्रीकृष्ण से कर डाली। जिस मामले में मासूम बच्चों की मौत हुई, उसमें आरोपी रहे व्यक्ति को भगवान से जोड़ना लोगों को बेहद आपत्तिजनक लगा। तब भी पांडे नहीं हिचकिचाई।
उनकी हिंदू-घृणा यहीं खत्म नहीं होती। कोलकाता पोर्ट का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखे जाने के बाद भी पांडे ने जहर उगला था। पांडे ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम ‘बंदर‘ से जोड़ा। इतना ही नहीं एक बार महाकाल के दर्शन करने वाले सिख नेता का मजाक उड़ाते हुए पांडे ने कहा कि स्वर्ण मंदिर कब जाओगे?
झूठ फैलाओ, सवाल उठे तो ब्लॉक करो: वामपंथियों का तय पैटर्न
मृणाल पांडे का ताजा मामला केवल एक बयान का विवाद नहीं है, बल्कि उस सोच की झलक है जो लंबे समय से वामपंथी इकोसिस्टम में देखने को मिलती रही है। पहले आधी अधूरी जानकारी के आधार पर नैरेटिव बनाया जाता है, हिंदू धर्म और परंपराओं पर सवाल खड़े किए जाते हैं और उसे प्रगतिशील बहस का नाम दिया जाता है। लेकिन जैसे ही कोई तथ्य और ग्रंथों के संदर्भ के साथ जवाब देता है, वही लोग असहज हो जाते हैं। बहस करने का दावा करने वाले अचानक संवाद से पीछे हटते नजर आते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में भी यही देखने को मिला। जब तक उनकी बात पर सवाल नहीं उठे, तब तक सोशल मीडिया पर बयान जारी रहे। लेकिन जैसे ही संस्कृत विद्वानों और आम लोगों ने प्रमाणों के साथ गलतियाँ बताई, जवाब देने के बजाए ब्लॉक करने का रास्ता चुना गया। यह वामपंथी विमर्श का पुराना तरीका है। पहले आरोप लगाओ, फिर विरोध होने पर खुद को पीड़ित दिखाओ और आखिर में असहमति की आवाज ही बंद कर दो।
यही वजह है कि इसे प्रतिशोध की राजनीति कहा जाता है। जब तर्क खत्म हो जाते हैं तो बहस भी खत्म कर दी जाती है और सामने को ही गायब कर दिया जाता है। गलत सूचना फैलाने के लिए कोई माफी नहीं, कोई पछतावा नहीं। मृणाल पांडे का मामला भी उसी पैटर्न की एक और मिसाल बन गया, जहाँ सवालों का जवाब देने के बजाए सवाल पूछने वालों को ब्लॉक कर दिया गया। यह दिखाता है कि झूठ फैलाने वाले वामपंथी, असलियत सामने आते ही कितनी आसानी से पीछे हट जाते हैं।
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*कुछ राज्यों में भाजपा को वोट न देकर हमने #मोदी का अहंकार तोड़ दिया था ।*
यह हमने कोई पहली बार नहीं किया है, इसी तरह पहले भी हमने साथ न देकर बड़ों-बड़ों का अहंकार तोड़ा है।
बहुत पहले सिंध के हिन्दू राजा #दाहिर का अहंकार तत्कालीन अफगानिस्तान और राजस्थान के हिन्दू राजाओं ने खत्म किया था। दाहिर ने सहायता के लिये पत्र लिखा, पर कोई भी नहीं आया। बहुत अहंकार था दाहिर को अपने पराक्रम का, मारा गया। अब ये अलग बात है कि उसके बाद सिंध में हिन्दुओं का निरंतर पतन ही होता रहा और आज अफगानिस्तान पूर्णतः इस्लामिक राष्ट्र है।
इसी तरह हमने मुहम्मद गौरी के आक्रमण के समय #पृथ्वीराज चौहान का साथ न देकर उनके अहंकार को तोड़ा था। अब अलग बात है कि बाद में गोरी ने जयचंद को भी कुत्ते की मौत मारा।
मेवाड़ वालों को भी अपनी बहादुरी का बड़ा अहंकार था। जब खिलजी ने मेवाड़ घेर लिया तब पूरे राजपूताने से किसी ने भी साथ नहीं दिया, रावल रतन धोखे से मारे गये और पद्मावती को 16000 औरतों के साथ जौहर करना पड़ा। #पद्मावती को भी अपनी सुंदरता पर बड़ा अहंकार था, तोड़ दिया।
राणा सांगा ने जब लोधी को कैद किया था, तब उनके अहंकार को तोड़ने के लिये डाकू बाबर को बुलाया गया। युद्ध में किसी ने राणा सांगा का साथ नहीं दिया, उनका सेनापति तीस हजार सैनिकों के साथ मारा गया, सांगा का अहंकार टूट गया। लेकिन लोधियों को भी मुगलों की गुलामी करनी पड़ी, मन्दिर तोड़े गए, स्त्रियां लूटी मुगलों ने, पर #सांगा का अहंकार तो टूट ही गया था न।
#मराठे बड़े प्रतापी थे, मुगलों की वाट लगा दी थी उन्होंने। उनको भी बहुत अहंकार था। मुगल हार गये तो काफिरों को रोकने के लिए अफगानिस्तान से अब्दाली बुलाया गया, पानीपत के मैदान में सेनाएं सज गयीं। अब्दाली की सेना को तो रसद मिलती रही पर मराठों को किसी ने भी रसद नहीं भेजी, क्योंकि अहंकार जो तोड़ना था मराठों का। भूखे पेट मराठे लड़ते रहे, मरते रहे हार गये। महाराष्ट्र का कोई ऐसा घर नहीं जिसका कोई बेटा शहीद न हुआ हो, लेकिन अहंकार तो टूट गया न।
न जाने कितनी बार हमने समय पर साथ न देकर अपनों के अहंकार को तोड़ा है, तो हम मोदी को भी सत्ता से हटा कर रहेंगे। भले ही हमें इसके लिये गौरियों, मुगलों, अब्दालियों या फिर इटली, पाकिस्तान की मदद लेनी पड़े और देश को उनके हाथों गिरवी रखना पड़े।
पर हम मोदी का अहंकार तोड़ कर ही रहेंगे।
क्यों कि?
हमें ग़ुलामी में ही जीने की आदत जो है।
हम हिन्दुओं से बड़ा बेवकूफ
ना कोई था।
ना है।
और ना होगा।
याद रखना यदि हम नहीं सुधरे
नहीं जागे।
तो फिर वही होगा।
भाग मिल्खा भाग।
🙏
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रिमजान का महीन्ना चल रिया है। रिमजान इस्लाम का सबसे पाक महीना है जो सब्र, इबादत और भाईचारे का प्रतीक है। इस महीने में पैगंबर मुहम्मद पर कुरान नाज़िल हुई थी।
1. *इसमें इबादत और दुआओं का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।*
2. _रमजान को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहले दस दिन मुसलमानों पर अल्लाह की रहमत (दया) बरसती है।_
3. *अगले दस दिनों तक अल्लाह की तरफ से मुसलमानों पर मगफिरत (माफी) बरसती है* और
4. _आखिर के दस दिन जहन्नम की आग से आज़ादी का अशरा होता है।_
5. *लैलतुल कद्र : रमजान की आखिरी 10 रातों (विषम रातों) में से एक जिसे 'हज़ार महीनों से बेहतर' माना जाता है।*
अभी रमजान के पहले 10 दिन भी पूरे नहीं हुए ... मुसलमानो पर अल्लाह त्आला की रहमत बरसने के दौरान काफिरों के हाथों
1. *अली खुमैनी इंतकाल फरमा गए*
2. _सुना है कि उनके बेटे मोजतबा खुमैनी उनके जानशीन (उत्तराधिकारी) डिक्लेर होने के दो घंटे के अंदर ही इंतकाल फरमा गए_
3. *मुर्तद (एक्स-मुस्लिम) ओ काफिर सलीम पर जानलेवा हमला करने वाला बेकसूर और मासूम ... जीशान* (तस्वीर में) *भी इंतकाल फरमा गए।*
4. _कराची में अमरीकी कन्सूलेट पर हमला करने वाले 50 बेकसूर मुसलमान इंतकाल फरमा गए_
5. *मगर नामाकूल सलीम बच निकला*
समझ नहीं आ रहा कि *_मुसलमानो पर ये अल्लाह की रहमत बरस रही है या काफिरों का कहर?_*
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रिमजान का महीन्ना चल रिया है। रिमजान इस्लाम का सबसे पाक महीना है जो सब्र, इबादत और भाईचारे का प्रतीक है। इस महीने में पैगंबर मुहम्मद पर कुरान नाज़िल हुई थी।
1. *इसमें इबादत और दुआओं का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।*
2. _रमजान को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहले दस दिन मुसलमानों पर अल्लाह की रहमत (दया) बरसती है।_
3. *अगले दस दिनों तक अल्लाह की तरफ से मुसलमानों पर मगफिरत (माफी) बरसती है* और
4. _आखिर के दस दिन जहन्नम की आग से आज़ादी का अशरा होता है।_
5. *लैलतुल कद्र : रमजान की आखिरी 10 रातों (विषम रातों) में से एक जिसे 'हज़ार महीनों से बेहतर' माना जाता है।*
अभी रमजान के पहले 10 दिन भी पूरे नहीं हुए ... मुसलमानो पर अल्लाह त्आला की रहमत बरसने के दौरान काफिरों के हाथों
1. *अली खुमैनी इंतकाल फरमा गए*
2. _सुना है कि उनके बेटे मोजतबा खुमैनी उनके जानशीन (उत्तराधिकारी) डिक्लेर होने के दो घंटे के अंदर ही इंतकाल फरमा गए_
3. *मुर्तद (एक्स-मुस्लिम) ओ काफिर सलीम पर जानलेवा हमला करने वाला बेकसूर और मासूम ... जीशान* (तस्वीर में) *भी इंतकाल फरमा गए।*
4. _कराची में अमरीकी कन्सूलेट पर हमला करने वाले 50 बेकसूर मुसलमान इंतकाल फरमा गए_
5. *मगर नामाकूल सलीम बच निकला*
समझ नहीं आ रहा कि *_मुसलमानो पर ये अल्लाह की रहमत बरस रही है या काफिरों का कहर?_*
TRN LIVE: UAE में 44 लाख भारतीय रहते हैं,
सऊदी अरब में 27.5 लाख भारतीय हैं। कुवैत में 10 लाख, कतर में 8.5 लाख, ओमान में 6.5 लाख, बहरीन में साढ़े 3 लाख भारतीय हैं।
ये वो देश हैं, जिनपर ईरान मिसाइलें मार रहा है।
अगर भारत के साथ व्यापार की भी बात करें तो ईरान के साथ हमारा व्यापार $1.68 billion है।
वहीं,
सऊदी अरब: $ 41.88 billion
UAE: $ 100 billion
कुवैत: $ 10.22 billion
क़तर : $ 19 billion
ओमान: $ 10.61 billion
बहरीन : $ 1.64 billion
अगर कूटनीति का मतलब अपने देश के interest को सबसे आगे रखना है तो हमें किसका साथ देना चाहिए?
एक ओर अमेरिका, इजराइल और 56 मुस्लिम देश हैं, दूसरी ओर ईरान। इस युद्ध में ईरान की हार निश्चित है। भारत को क्या करना चाहिए।
सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे मुस्लिमों के अनुसार ईरान के पक्ष में आ जाएं या भारत को जिसमें फायदा हो, वो करें?
किसी मुस्लिम देश ने ईरान के पक्ष में एक शब्द नहीं बोला, ईरान के दोस्त चीन ने कुछ नहीं कहा, ऐसे में अपने देश के ज़हिलों के कहने से भारत वो बेवकूफी कर दे?
राष्ट्र प्रथम, राष्ट्र का हित सर्वप्रथम...
बाकी हिंदू-मुस्लिम, कांग्रेस-भाजपा आदि सब बाद में
TRN LIVE: इनको ये नही दिख रहा है की जब phelgam में पाकिस्तान ने कइयों के घर उजाड़े उसके बाद भारत और पाकिस्तान से लड़ाई भी शुरू हुआ जिसमे पाकिस्तान को ईरान मिशाइल और अन्य लड़ाकू हथियार दे रहा था
और भारत को इजराइल उन हथियारों को नस्तानाबूत करने तथा भारत के साथ खड़ा था ।।
और ये आज उसी ईरानी तानाशाह के मरने पर आंसू बहा रहे है जहा उसके मरने पर वहा के नागरिक खुश है
जिसने महिलाओं के ऊपर अनेकों अत्याचार रूपी कायदे कानून बना दिया था ।।
अगर वही इजराइल भारत के साथ खड़ा nhi रहता तो आज भारत में भी हजारों मौते हो चुकी होती
अब ऐसे लोगो को क्या कहा जाए 😢😢😢😢😢😢😢
TRN LIVE: द केरला स्टोरी फिल्म के एक सीन में पीड़ित लड़की आखिर में अपने पिता से पूछती है - "आपने हमें कभी अपने कल्चर के बारे में क्यों नहीं बताया?"
ऐसा ही सवाल केरला स्टोरी 2 में भी एक लड़की अपने सेकुलर बाप से पूछती है कि मुझे हिन्दू धर्म के संस्कारों में क्यूँ नहीं पाला?
शायद कोई बच्ची आपसे भी ये पूछ सकती है कि "आपने हमें क्यों नहीं बताया कि अपनी "हिंदू आइडेंटिटी" को खोकर मैं क्या खो दूंगी?
प्रेमचंद की एक बड़ी मशहूर कहानी है 'जिहाद'। उसमें एक हिन्दू लड़की है 'श्यामा'। जिसे शायद उसे उसके मां बाप ने इन प्रश्नों का उत्तर दिया होगा, उसे अपने "हिंदू कल्चर" के बारे में बताया होगा, उसे बताया होगा कि हिंदू का होना और बचना क्यूं जरूरी है तभी उसका उल्लेख आज करने की जरूरत आ पड़ी है।
मैं ऐसा किसलिए कह रहा हूं इसको समझने के लिए आपको थोड़ा इस कहानी में उतरना होगा और मुझे उन पंक्तियों का अक्षरशः उल्लेख करना होगा जो उस युवती श्यामा ने हिन्दू धर्म छोड़ कर विधर्मी बने युवक धर्मदास से कही थी। ये वो धर्मदास था जो धनी भी था और सुदर्शन भी और जिस पर श्यामा कभी जान छिड़कती थी।
हिंदू धर्म छोड़ने वाले धर्मदास से श्यामा पूछती है :- इस्लाम कबूलने के बदले में हासिल तो तुमने जो भी किया सो किया पर कीमत क्या दी?
हतप्रभ धर्मदास पूछता है- मैंने तो कोई कीमत नहीं दी। मेरे पास था ही क्या ?
जबाब में श्यामा उससे जो कहती है, मुझे लगता है "हिंदू कल्चर" को उससे बेहतर शायद ही कोई डिफाइन करे। श्यामा उससे कहती है :-
"तुम्हारे पास वह ख़ज़ाना था, जो तुम्हें आज से कई लाख वर्ष पहले हुए ऋषियों ने प्रदान किया था। जिसकी रक्षा रघु और मनु, राम और कृष्ण, बुद्ध और शंकर, शिवाजी और गोविंदसिंह ने की थी। उस अमूल्य भंडार को आज तुमने तुच्छ प्राणों के लिए खो दिया।"
ऐसे उच्च संस्कारों से बड़ी हुई श्यामा धर्म छोड़ने वाले उस सुदर्शन लेकिन धर्महीन युवक धर्मदास को छोड़कर एक सामान्य सा दिखने वाले युवक खजानचंद की "विधवा ब्याहता" बनती है जो अब जीवित भी नहीं है क्योंकि उसने अपने महान हिंदू धर्म को त्यागने की जगह मृत्यु का वरण किया था।
इसलिए अपनी श्यामाओं के प्रश्न कि "अपनी 'हिंदुत्व आइडेंटिटी' को खोकर मैं क्या खो दूंगी?' पर उससे कहिए कि तुम खो दोगी अपना स्वतंत्र अस्तित्व, तुम खो दोगी अपना सम्मान, तुम खो दोगी अपना चैतन्य, तुम खो दोगी बौद्धिक स्वातंत्र्य और जब तुम्हारी तरह बाकी सब भी इस identity को खोने लगे तो दुनिया से आदर्श और जीवन मूल्य खत्म हो जाएंगे, हर जड़ और चेतन में ब्रह्म देखने का संस्कार खत्म हो जायेगा, प्रकृति में मां नहीं दिखेगी, विश्व में बंधुत्व नहीं दिखेगा, विश्व को एक परिवार और 'सबको जीने का अधिकार' की बात करने वाला दर्शन जीवित नहीं रहेगा, टॉलरेंस नहीं एक्सेप्टेंस का सुंदर चिंतन खत्म हो जायेगा, उपासना के वैविध्य की मिली स्वीकृति खत्म हो जायेगी, नास्तिकों के लिए ये दुनिया कत्लगाह बन जायेगी, चिंतन की स्वतंत्रता छीन जायेगी, दुनिया की तमाम आतंकित और पीड़ित जातियां अनाथ हो जाएंगी जो हिंदुत्व के उदार और विशाल हृदय में स्थान पाकर भारत भूमि पर उन्नति करती हैं।
ये सवाल कल को आपसे न पूछा जाए इसकी कोई तैयारी है? अगर नहीं है तो इसकी तैयारी कर लीजिए।
#अमृत_कुंभ हिंदुत्व के इन्हीं बिंदुओं पर भी केंद्रित है। बच्चियों के प्रबोधन के लिए ये एक उपयोगी पुस्तक होगी।
Abhijeet Singh
TRN LIVE: *यूजीसी बिल को लेकर सर्व सवर्ण समाज को मोदी अमित शाह धर्मेंद्र प्रधान और भाजपा से दिल से नाराजगी और शिकायतें है जो मुनासिफ भी है क्योंकि सवर्ण समाज हमेशा भाजपा को एकतरफा वोट किया है पर इसके ड्राफ्ट में जो गद्दार मक्कार बुढ़िया इंदिरा जयसिंह जो है उसको भी जानना आपको सख्त जरूरी है सवर्ण समाज 👆,,ये हरामी बुढ़िया हमेशा देश विरोधी धर्म विरोधी कार्यों में लिप्त रही जिसमें इसका साथ दिग्विजय सिंह जैसे दोगले लोग भी दिए 👆😡,,इंदिरा जयसिंह कौन है क्या है और उसके कुकर्म इस वीडियो से जानो सवर्ण समाज और जातिगत आरक्षण के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाते रहो..*👆✊
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