'1KM दूर गिर रही मिसाइलें, मुझे घर बुला लो':मोतिहारी, सहरसा के लोग दोहा में फंसे, बेतिया का कैप्टन आशीष ओमान की खाड़ी में लापता
'अब्बा, मिसाइल हमारे आसपास ही गिर रही है। धमाके पर दिल ऐसे कांप जाता है, जैसे सब खत्म हो जाएगा। जहां हम काम करते हैं, वहां से महज 1KM दूर मिसाइलें फट रही हैं। हमलोग पूरी रात सो नहीं पाते हैं। तेज आवाज सुनकर लगता है अब नहीं बचेंगे। अब्बा, मुझे जल्दी से घर आना है। किसी भी तरह से घर बुला लो।' ये कहना है पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि प्रखंड के पठानपट्टी गांव के रहने वाले रफीउल्लाह खान और सरवर अली खान का। रफीउल्लाह खान और सरवर अली खान दोनों पिछले 2 साल से दुबई में रहकर ड्राइवर का काम करते हैं। दरअसल, मध्य-पूर्व देशों में छिड़े युद्ध का आज 5वां दिन है। इस जंग के बीच बिहार के कई लोग वहां फंसे हैं। ऐसी स्थिति में ये सभी अपने परिवार से लगातार संपर्क में हैं, लेकिन घरवालों की चिंता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस जंग का असर अब भारतीयों पर पड़ने लगा है। कुछ लोग मिडिल ईस्ट के दोनों में फंसे हैं तो कुछ लोग लापता भी हो गए हैं। 1 मार्च को बेतिया के कैप्टन आशीष कुमार लापता हैं। एजेंसी ने कैप्टन की पत्नी को फोन कर घटना की जानकारी दी है। ओमान की खाड़ी में तेल टैंकर ‘Skylight’ पर 1 मार्च की शाम मिसाइल हमला हुआ था। दैनिक भास्कर की टीम ने बिहार के मोतिहारी से रफीउल्लाह खान, सहरसा के केशव, अमित और बेतिया के आशीष के घरवालों से बात की। चारों परिवार ने वहां के हालातों के बारे में हमें बताया है। आखिर कैसे हर दिन वहां काट रहे हैं? उनकी मजबूरियां क्या हैं? डर और जंग के बीच की पूरी हकीकत इस ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए… पहले जंग से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखिए… सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए विदेश में फंसे बिहारी का डर हर आवाज पर उड़ जाती है नींद बिहार के पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि प्रखंड के पठानपट्टी गांव में होली-रमजान के मौके पर भी सन्नाटा पसरा है। लोग अपने घरों में सिर्फ टीवी पर न्यूज देख रहे हैं। वहीं, बेटे की कॉल के आस में बार-बार फोन चेक कर रहे हैं। गांव के वसीर आलम खान कहते हैं, ‘मेरे दो बेटे फीउल्लाह खान और सरवर अली खान हैं। दोनों दुबई में पिछले 2 सालों से ड्राइवर का काम करते हैं। दोनों बच्चे हर दिन रोते हुए मुझे फोन करते हैं। वो कॉल पर बोलते हैं, अब्बा, मिसाइल हमारे आसपास ही गिर रही है। बमबारी वाली जगह से सिर्फ 1 किलोमीटर दूर ही हमलोग काम करते हैं। रात भर सो नहीं पाते हैं। बाहर निकलने में भी डर लगता है।’ उन्होंने आगे बताया, ‘दुबई की हालात देख और सुनकर घर में कोई ठीक से खा भी नहीं पा रहा है। जब भी टीवी पर मिसाइल की खबर आती है, दिल बैठ जाता है। भारत सरकार से अपील करते हैं कि हमारे बच्चों को वापस बुला लें। होली पर घर आने वाले थे बेटा-बहू सहरसा नगर निगम के पॉलिटेक्निक ढाला के पास के रहने वाले शैलेंद्र कुमार और उनकी पत्नी सुलोचना सिंह पिछले तीन दिनों से सो नहीं पाए हैं। कृषि विभाग में सहायक निदेशक रहे शैलेंद्र कुमार रिटायर हो चुके हैं। उनकी उम्र भले ही 70 पार हो चुकी हो, लेकिन आंखों में आज भी अपने बेटे पर वही भरोसा है। कहते हैं अमित संभल जाएगा, उसे कुछ नहीं होगा। 46 साल के अमित कुमार चौहान अपनी पत्नी प्रियंका सिंह, बेटा शिवांश(12) और बेटी मैथली (5) के साथ 2 साल से दोहा में रह रहे हैं। वह एक IT इंजीनियर हैं। इससे पहले वह दिल्ली में एक इंग्लिश कंपनी में काम करते थे, फिर 15 साल बहरीन में रहे और अब दोहा में नौकरी कर रहे हैं। मां, मैं ठीक हूं… आप लोग टेंशन मत लीजिए सुलोचना देवी बेटे की तस्वीर गोद में रखकर रोते हुए बताती हैं, बेटा व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल करता है। हर बार कहता है, मां, मैं ठीक हूं। यहां कुछ नहीं होगा। आप लोग टेंशन मत लीजिए, लेकिन मैं उसकी आवाज में डर पहचानती हूं। मेरा बेटा नॉर्मल दिखने की एक्टिंग करता है, ताकि हम घबराएं नहीं। 5 साल की छोटी मैथली और 12 साल के शिवांश की तस्वीरें उनके बिस्तर के आसपास फैली हैं। वह फोटो को सीने से लगाकर कहती हैं, अब बच्चों के बिना कैसी होली? ये पहला मौका है कि उनका घर आने का प्लान था। पूरा घर सजाया था, लेकिन भगवान ने परीक्षा ली है। PM मोदी मेरे बेटे को वापस भारत लाएं सुलोचना देवी बताती हैं, 'हम भारत सरकार से यही गुहार लगाते हैं कि वो मेरे बेटे को सही सलामत घर वापस ला दें। प्रधानमंत्री मोदी से भी विन्नती करते हैं, मेरे इकलौते बेटे को घर लाया जाए। उसे कुछ नहीं होना चाहिए। मुझे इन्हीं से सिर्फ आशा है।' 28 फरवरी को खबर मिली फ्लाइट्स बंद, हालात खराब शैलेंद्र कुमार कहते हैं, 28 फरवरी की सुबह तक सब सामान्य था। अमित 2 मार्च को दोहा से पटना आने वाला था। हमने बच्चों के लिए गुजिया से लेकर कपड़े तक सब तैयार कर लिए थे, लेकिन 28 फरवरी की दोपहर सूचना मिली कि दोहा से भारत आने वाली सभी फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं। युद्ध का खतरा बढ़ गया है। शैलेंद्र कुमार आगे बताते हैं, अमित हमारा इकलौता बेटा है। हमारी उम्र हो गई है। अगर उसे कुछ हो गया तो हम दोनों क्या करेंगे? वो हमारे बुढ़ापे का सहारा है। दुबई में जब बमबारी हुआ, मेरा बेटा ऑफिस में था सहरसा नगर निगम के सत्यानगर प्रोफेसर कॉलोनी, वार्ड नंबर 19 में रहने वाले दिनेश प्रसाद सिंह भी अपने बेटे की याद में कुर्सी पर बैठे हैं। उन्होंने बताया, 31 साल का बेटा केशव कुमार दो साल से कतर एयरवेज में एयरोनॉटिकल इंजीनियर है। उससे पहले एयर इंडिया और इंडिगो में था। मेहनत कर मेरा बेटा इतना आगे पहुंचा है। दिनेश प्रसाद ने बताया, 2025 के जून में केशव की शादी हुई थी। दिसंबर में वह अपनी पत्नी ज्योति को साथ लेकर दोहा चला गया था। अभी तक एक बार भी वो घर वापस नहीं आया है। 28 फरवरी की शाम 5 बजे अचानक न्यूज आई कि कतर में एयरबेस के पास बमबारी हुई है। हमने तुरंत बेटे को फोन किया, लेकिन फोन नहीं लगा। 3-4 बार फिर मिलाया, तब जाकर कुछ देर बाद उसका रिटर्न कॉल आया। केशव ने मुझे वहां के हालातों के बारे में बताया। उसने कहा, विस्फोट वाले दिन मैं ऑफिस में था। तभी अचानक हमें धमाके की खबर मिली। इसके बाद कंपनी ने सभी लोगों के लिए तुरंत कैब दिया और हम सबको घर भेज दिया गया। किसी को भी ऑफिस में रुकने नहीं दिया। केशव ने अपने पापा से कहा, ‘यहां सब नॉर्मल नहीं है, लेकिन हमलोग घर में सेफ हैं। आपलोग टेंशन मत लीजिए।’ 1 मार्च को ट्रेनिंग थी, लेकिन घर भेज दिया गया दिनेश बताते हैं, 1 मार्च को उसकी ट्रेनिंग थी। जब वो ऑफिस पहुंचा तो बाहर लिखा था हालात सामान्य नहीं है, सभी कर्मचारी घर लौटें। अब उसका ऑफिस बंद पड़ा है। कंपनी ने कहा है घर में सेफ रहें। मां की आंख पूरी तरह सूज गई है गुंजन देवी लगातार रो-रोकर थक चुकी हैं। बेटा दिन में कई बार फोन करता है, मां चिंता मत करो मैं ठीक हूं। लेकिन क्या एक मां का दिल मान जाता है? मुझे मेरा बेटा सामने चाहिए, बस। उसके बिना नींद नहीं आती। जब मिसाइलें गिरीं तो दोहा में कैसा था माहौल? अमित ने अपने पिता को बताया पापा, अचानक बाहर सायरन बजने लगे। हमें तुरंत कहा गया घर से बाहर न निकलें। बच्चे डर गए थे। मैंने उन्हें बहलाया, लेकिन खुद भी कांप रहा था। केशव ने पिता से कहा, जब धमाका हुआ, लोग ऑफिस में चीख पड़े। कुछ देर बाद कंपनी की टीम आई और सबको तुरन्त घर भेजा गया। हालत अच्छे नहीं हैं, इसलिए कोई बाहर नहीं निकल रहा। बेतिया के कैप्टन आशीष ओमान की खाड़ी में लापता बेतिया के कैप्टन आशीष कुमार लापता हैं। एजेंसी ने कैप्टन की पत्नी को फोन कर घटना की जानकारी दी है। ओमान की खाड़ी में तेल टैंकर ‘Skylight’ पर 1 मार्च को मिसाइल हमला हुआ था। हमले के समय जहाज खासब तट के पास एंकर पर खड़ा था। अधिकांश क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन कैप्टन आशीष समेत 2 अन्य लोग अब भी लापता हैं। परिजनों ने ओमान स्थित भारतीय दूतावास और शिपिंग कंपनी से संपर्क किया है, मगर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। परिवार ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर जल्द खोजबीन और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है। आशीष को 16 साल का एक्सपीरियंस है। वे 6 महीने से घर पर थे। 22 जनवरी 2026 में उन्होंने दुबई की कंपनी जॉइन की थी। आशीष का 4 साल के बेटा है। उन्होंने मां से होली पर आने का वादा किया था। पत्नी बोली- 28 फरवरी को आखिरी बात हुई थी आशीष की पत्नी ने बताया, 'एजेंसी के अधिकारियों के पास वहां काम करने वाले लोगों के परिवार वालों के नंबर रहते हैं। मैं आशीष की पत्नी हूं, इसलिए हमारा नंबर उनके पास था। 2 मार्च को हमें एजेंसी की तरफ से कॉल आया था। उन्होंने हमसे कहा, आशीष की शिप पर अटैक हो गया है। वो अभी तक मिसिंग बताए जा रहे हैं। 22 जनवरी को उन्होंने जॉइन किया था। अभी एक महीने ही काम किए हुए हुआ था। हमलोगों की हर शनिवार को बात होती थी। 28 फरवरी की रात हमारी आखिरी बार बात हुई थी।'
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