Charak Review: The Kerala Story के Director फिल्म बनाने में हो गए Fail, Extremely Dissapointing
Film 'Charak' को लेकर उम्मीदें काफी थीं। Trailer देखने के बाद कई दर्शकों को लगा कि यह Film Kantara जैसी प्रभावशाली लोककथा-आधारित कहानी पश कर सकती है, लेकिन Film देखने के बाद यह उम्मीद पूरी होती नजर नहीं आती।
Film में Charak महोत्सव को केंद्र में रखा गया है, लेकिन कहानी उस विषय को प्रभावी ढंग से explore नहीं कर पाती। Plot कई दिशाओं में भटकता हुआ नजर आता है कहीं यह murder mystery बनने की कोशिश करता है, तो कहीं documentary जैसा टोन ले लेता है। इन सबके बीच Film अपनी स्पष्ट पहचान बनाने में असफल रहती है।
Film से Sudipto Sen Indian filmmaker का नाम जुड़ा है, जिन्होंने पहले The Kerala Story बनाई थी। हालांकि उस Film को लेकर अलग-अलग राय रही, लेकिन बतौर Film वह एक मजबूत Project माना गया था। इसके मुकाबले “Charak” दर्शकों को निराश करती हुई दिखाई देती है।
Film की production value भी काफी कमजोर लगती है। यदि इसे documentary शैली में बनाया जाता तो भी शायद बेहतर प्रभाव पड़ सकता था, लेकिन Film उस स्तर तक भी नहीं पहुंच पाती। चरक परंपरा या उससे जुड़े सांस्कृतिक पहलुओं के बारे में भी Film कोई ठोस जानकारी या गहराई नहीं दे पाती।
सबसे बड़ी समस्या इसकी slow pacing और engaging narrative की कमी है, जिसके कारण कई दर्शकों को फिल्म बीच में ही छोड़ देने का मन हो सकता है।
कुल मिलाकर, rooted या Folktale based Cinema बनाना केवल विषय चुन लेने से संभव नहीं होता। Rishab Shetty की “Kantara” के पीछे मजबूत vision और मेहनत थी, जबकि “Charak” उस स्तर का प्रभाव पैदा करने में नाकाम रहती है।
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