IPS Ajay Pal Sharma: बंगाल चुनाव में पर्यवेक्षक बनाए गए IPS अजय पाल शर्मा, क्या इन्हें अलग से सैलरी देगा चुनाव आयोग?
IPS Ajay Pal Sharma: आज यानि 29 अप्रैल में बंगाल में दूसरे चरण का चुनाव हो रहा है. पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में सुरक्षा और निष्पक्षता को चाक-चौबंद करने के लिए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) बनाकर बंगाल भेजा गया है. इस नियुक्ति के साथ ही प्रशासनिक गलियारों और सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या चुनाव आयोग इन अधिकारियों को इस विशेष ड्यूटी के लिए अलग से मोटी सैलरी या अतिरिक्त वेतन देता है. आइए समझ लेते हैं.
बंगाल के चुनावी रण में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की एंट्री
पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान हो सके इसके लिए भारतीय निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों की तैनाती की है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के तेजतर्रार आईपीएस अजय पाल शर्मा को चुनावी पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया है. अजय पाल शर्मा की गिनती उन अधिकारियों में होती है जो कानून-व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त माने जाते हैं. बंगाल जैसे संवेदनशील राज्य में उनकी तैनाती को आयोग के एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, ताकि मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा को रोका जा सके.
क्या चुनाव आयोग देगा अलग से सैलरी?
अजय पाल शर्मा की नियुक्ति के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या उन्हें इस काम के लिए अलग से वेतन मिलेगा. तकनीकी रूप से, किसी भी अधिकारी को चुनाव ड्यूटी के दौरान उनके मूल विभाग (जैसे यूपी पुलिस) से मिलने वाली नियमित सैलरी मिलती रहती है. हालांकि, चुनाव आयोग मानदेय और विशेष भत्तों के रूप में अतिरिक्त भुगतान जरूर करता है. यह राशि उनके कठिन परिश्रम और अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले दी जाती है, जिसे सैलरी का हिस्सा नहीं बल्कि एक विशेष प्रोत्साहन माना जाता है.
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भत्तों और सुविधाओं का गणित
निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, चुनाव पर्यवेक्षकों को ड्यूटी के दौरान कई तरह की वित्तीय सुविधाएं मिलती हैं. राजपत्रित अधिकारियों के लिए आयोग ने हाल ही में मानदेय की दरों में बढ़ोतरी की है. अगर ड्यूटी 15 दिनों से कम की है, तो उन्हें एकमुश्त राशि दी जाती है, जबकि लंबे समय तक तैनात रहने वाले अधिकारियों को साप्ताहिक आधार पर भुगतान किया जाता है. इसके अलावा, प्रतिदिन के हिसाब से भोजन और जलपान भत्ता भी दिया जाता है, जो लगभग 500 रुपये प्रतिदिन तक हो सकता है.
पैरेंट विभाग और टीए-डीए के नियम
चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को उनके मूल विभाग यानी पैरेंट डिपार्टमेंट के नियमों के अनुसार यात्रा भत्ता (TA) और महंगाई भत्ता (DA) भी मिलता है. अजय पाल शर्मा क्योंकि यूपी कैडर के अधिकारी हैं, इसलिए उनकी यात्रा और रहने के खर्चों का समायोजन नियमानुसार किया जाएगा. चुनाव आयोग इन अधिकारियों के रहने, परिवहन और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था करता है ताकि वे बिना किसी बाहरी दबाव के अपना काम कर सकें.
नियुक्ति पर क्यों मचा है सियासी घमासान?
जब से अजय पाल शर्मा की बंगाल में एंट्री हुई है, तब से वहां राजनीति तेज हो गई है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं. टीएमसी का तर्क है कि उत्तर प्रदेश के अधिकारी को बंगाल भेजने की क्या जरूरत थी? वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अक्सर दूसरे राज्यों के अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया जाता है. अजय पाल शर्मा ने पद संभालते ही अपनी कार्यशैली दिखा दी है और कथित तौर पर डराने-धमकाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है.
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