आज सुबह का राशिफल और पंचांग शास्त्र अनुसंधान केन्द्र
ब्रेकिंग... इंदौर के एयरपोर्ट रोड स्थित शिक्षक नगर पर बड़ा हादसा। एक ट्रक ने 10-15 राहगीरों को कुचला। कई की हुई मौत।
TRNDKBJITENDRAKUMAR
: *🕉️🟢 ॐ गं 🟢🕉️*
*🌞पञ्चाङ्ग 16 _ सितंबर_ 2025 🌞*
⛅ *दिन _ मंगलवार*
⛅ *विक्रम संवत _ 2082 सिद्धार्थी*
⛅ *शाक संवत _ 1947*
⛅ *सूर्यायन _ दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु _ शरद*
⛅ *मास _ आश्विन*
🌑 *पक्ष _ कृष्ण*
⛅ *तिथि _ दशमी रात्रि 12:22 तक तत्पश्चात एकादशी*
🌟 *नक्षत्र _ आद्रा 06:46 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
⛅ *योग _ वरियान रात्रि 12:33 तक तत्पश्चात परिध*
⛅ *करण _ वणिज 12:53 तक तत्पश्चात विष्टि*
🌒 *राहुकाल _ दोप. 03:18 से शाम 04:49:49 तक*
🌜 *चंद्र राशि _ मिथुन*
🌞 *सूर्य राशि _सिंह /कन्या*
🌞 *सूर्योदय _ 06:13*
🌒 *सूर्यास्त _ 06:24*
💫 *दिशाशूल _ उत्तर दिशा में*
🦜 *व्रत_पर्व_विवरण _ दशमी का श्राद्ध ,सूर्य कन्या में ,भद्रा*
1️⃣ *मंगलवार🔺के #शुभाशुभ_मुहूर्त*
राहुकाल दोप. 03:18 - 04:49
यम गण्ड 09:13 - 10:44
गुलिक काल 12:15 - 13:47
*अभिजित 12:01 -12:40*
दूर मुहूर्त 22:37 - 22:39
दूर मुहूर्त 32:49 -34:27
2️⃣🌞 *#दिन_का_चौघड़िया*
रोग 06:13 - 07:40 अशुभ
उद्वेग 07:40 - 09:12 अशुभ
*चर 09:12 - 10:44 शुभ*
*लाभ 10:44 - 12:14 शुभ*
*अमृत 12:14 - 01:46 शुभ*
काल 01:46 - 03:17 अशुभ
*शुभ 03:17 - 04:48 शुभ*
रोग 04:48 - 06:20 अशुभ
3️⃣🌒 *रात_का_चौघड़िया*
काल 06:20 - 07:48 अशुभ
*लाभ 07:48 - 09:17 शुभ*
उद्वेग 09:17 - 10:46 अशुभ
*शुभ 10:46 - 12:15 शुभ*
*अमृत 12:15 - 01:43 शुभ*
*चर 01:43 - 03:12 शुभ*
रोग 03:12 - 04:41 अशुभ
काल 04:41 - 06:13 अशुभ
4️⃣🌞 *दिन_का_होरा*
मंगल 06:13 - 07:13
सूर्य 07:13 - 08:13
शुक्र 08:13 - 09:13
बुध 09:13 - 10:13
चन्द्र 10:13 - 11:13
शनि 11:13 - 12:13
गुरु 12:13- 13:13
मंगल 13:13 - 14:13
सूर्य 14:13 - 15:13
शुक्र 15:13 - 16:13
बुध 16:13 - 17:13
चन्द्र 17:13 - 18:13
5️⃣🌒 *रात_का_होरा*
शनि 18:13 -- 19:13
गुरु 19:13 - 20:13
मंगल 20:13 - 21:13
सूर्य 21:13 - 22:13
शुक्र 22:13 - 23:13
बुध 23:13 - 24:13
चन्द्र 24:13 - 01:13
शनि 01:13 - 02:13
गुरु 02:13 - 03:13
मंगल 03:13 - 04:13
सूर्य 04:13 - 05:13
शुक्र 05:13 - 06:13
*🚩 जय हो मात श्री धोली सती दादीजी की🚩*
TRNDKB: *_🕉️✡️श्री गणेशाय नम:✡️🕉️_*
*_⚜️🌞दैनिक पंचांग🌙⚜️_*
*_✡️⚡16 - Sep - 2025⚡✡️_*
*_🔱💥New Delhi, India💥🔱_*
*_⚜️🌞पंचांग🌙⚜️_*
*_🔅 तिथि दशमी अगले दिन के +00:24 AM तक✳️_*
*_🔅 नक्षत्र आर्द्रा 06:46 AM तक✳️ उसके बाद शुभ नक्षत्र पुनर्वसु नक्षत्र🔥_*
🔅 करण :-वणिज 12:55 PM तक,
*_विष्टि👉भद्रा है 12:55 PM से✳️ अगले दिन के 00:24 AM तक🔥_*
*_🔅 पक्ष कृष्ण✳️_*
🔅 योग वरियान +00:33 AM
*_🔅 वार मंगलवार✳️_*
*_🌞सूर्य व🌙चन्द्र से संबंधित गणनाएँ👇_*
🔅 सूर्योदय 06:06 AM
🔅 चन्द्रोदय +01:26 AM
*_🌙चन्द्र राशि मिथुन🔥_*
🔅 सूर्यास्त 06:25 PM
🔅 चन्द्रास्त 03:05 PM
🔅 ऋतु शरद
*_☀ हिन्दू मास एवं वर्ष👇_*
🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु
🔅 कलि सम्वत 5127
🔅 दिन काल 12:19 PM
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत भाद्रपद
🔅 मास पूर्णिमांत आश्विन
*_✡️शुभ और🔥अशुभ समय👇_*
*_✡️शुभ समय👇_*
🔅 अभिजित 11:51:15 - 12:40:32
*_🔥अशुभ समय👇_*
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:34 AM - 09:23 AM
🔅 कंटक 06:55 AM - 07:44 AM
🔅 यमघण्ट 10:12 AM - 11:01 AM
*_🔅 राहु काल 03:20 PM - 04:53 PM🔥_*
🔅 कुलिक 01:29 PM - 02:19 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 08:34 AM - 09:23 AM
🔅 यमगण्ड 09:11 AM - 10:43 AM
🔅 गुलिक काल 12:15 PM - 01:48 PM
*_☀ दिशा शूल👇_*
🔅 दिशा शूल उत्तर
*_🌙चन्द्रबल और✨ताराबल👇_*
*_✨ताराबल👇_*
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
*_🌙चन्द्रबल👇_*
🔅 मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर
*_💫🪴 सितम्बर महीने 2025 के इन👇तारीखों में शुभाशुभ मुहुर्त🌹🥀_*
🔅 विवाह मुहूर्त
नहीं है,हरिशयन दोष है।इसलिए इस समय विवाह जैसे मांगलिक कार्य बन्द रहेंगे। विवाह के कोई मुहूर्त नहीं है।हरि शयन दोष जो लगभग दो मास तक विवाह मुहूर्त नहीं है।
🔅 मुंडन मुहूर्त
कोई मुहूर्त नहीं है
🔅 गृह प्रवेश मुहूर्त
कोई मुहूर्त नहीं है
🔅 नामकरण मुहूर्त
17th, 22nd, 24th
🔅 अन्नप्राशन मुहूर्त
24th
🔅 कर्णवेध मुहूर्त
22nd, 24th, 27th
🔅 विद्यारम्भ मुहूर्त
23rd
🔅 उपनयन/जनेऊ मुहूर्त
24th, 27th
🔅 वाहन खरीद मुहूर्त
17th, 22nd, 24th
🔅 प्रॉपर्टी खरीद मुहूर्त
16th, 26th, 27th
🔅 सर्वार्थ सिद्धि योग
15th, 18th, 21st, 26th, 28th
🔅 अमृत सिद्धि योग
15th, 18th
🔅 पंचक
नहीं है।
🔅 भद्रा
16th, 19th, 25th, 29th
*_⚜️लगन👇तालिका⚜️_*
सूर्योदय का समय: 06:06:11
सूर्योदय के समय लग्न सिंह स्थिर
148°29′49″
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 03:55 AM समाप्त: 06:13 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 06:13 AM समाप्त: 08:29 AM
🔅 तुला चर
शुरू: 08:29 AM समाप्त: 10:49 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:49 AM समाप्त: 01:08 PM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 01:08 PM समाप्त: 03:12 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 03:12 PM समाप्त: 04:55 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 04:55 PM समाप्त: 06:23 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:23 PM समाप्त: 07:48 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 07:48 PM समाप्त: 09:23 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 09:23 PM समाप्त: 11:19 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:19 PM समाप्त: अगले दिन 01:34 AM
🔅 कर्क चर
शुरू: अगले दिन 01:34 AM समाप्त: अगले दिन 03:55 AM
*_⚜️6 बजे प्रातः👇ग्रह स्पष्ट🪷_*
निरायण, Sidereal
ग्रह राशि
निरायण नक्षत्र, पद
निरायण
लग्न सिंह 27°6' उत्तर फाल्गुनी1 टे
सूर्य सिंह29°12' उत्तर फाल्गुनी1 टे
चन्द्र मिथुन19°34' आद्रा4 छ
बुध ^ कन्या1°28' उत्तर फाल्गुनी2 टो
शुक्र सिंह1°31' मघा1 मा
मंगल तुला1°35' चित्रा3 रा
बृहस्पति मिथुन26°11' पुनर्वसु2 को
शनि * मीन4°47' उत्तरभाद्रपदा1 दू
राहू * कुम्भ23°42' पूर्वभाद्रपदा2 सो
केतु * सिंह23°42' पूर्व फाल्गुनी4 टू
यूरेनस वृषभ7°13' कृत्तिका4 ए
नेपच्यून * मीन6°44' उत्तरभाद्रपदा2 थ
प्लूटो मकर7°19' उत्तराषाढा4 जी
सायन, Tropical
ग्रह Tropical Position
सायन
लग्न 171°19'
सूर्य 173°25'
चन्द्र 103°47'
बुध ^ 175°41'
शुक्र 145°44'
मंगल 205°48'
बृहस्पति 110°24'
शनि * 359°0'
राहू * 347°55'
केतु * 167°55'
यूरेनस 61°26'
नेपच्यून * 0°57'
प्लूटो 301°33'
अयनांश लाहिरी / चित्रपक्ष = 24°13'
*_आज के लिए खास_*
*_यहां जो लेख दिये जा रहे हैं यह पूरी तरह जानकारी और अनुभव आधारित है, इसके प्रयोग के लाभ हानि के जिम्मेदार आप स्वयं होंगे इसमें लेखक एवं प्रसारणकर्ता की किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं होगी_*
जीवन
१. जीवन का अर्थ-जीवन की परिभाषा करना बहुत कठिन है। मनुष्य को तब तक जीवित मानते हैं, जब तक उसकी सांस चलती है। किन्तु मरने के बाद भी कहते हैं कि मस्तिष्क के सेल (कलिल) बहुत समय तक जीवित रहते हैं। सभी पशु पक्षी भी जीवित रहते हैं। वे भी सांस लेते हैं। अन्य लक्षण है कि मनुष्य सहित सभी पशु-पक्षी चिन्तन कर सकते हैं तथा उसके अनुरूप कार्य कर सकते हैं। मनुष्य के अतिरिक्त अन्य प्राणियों में मनुष्य जैसी चेतना या उसके अनुसार काम करने की क्षमता नहीं है। इस विषय में वेदान्त दर्शन की चर्चा में एक श्लोक कहा जाता है-
कुरङ्ग मातङ्ग पतङ्ग भृङ्गाः मीनाः हताः पञ्चभिरेव पञ्च।
एकः प्रमादी स कथं न हन्यते, यः सेवते पञ्चभिरेव पञ्च॥
इसका आशय है कि अन्य जीवों में १-१ ही ज्ञान मुख्य है-हरिण, हाथी, पतङ्ग, भ्रमर, मत्स्य-ये शब्द, स्पर्श, रूप रस, गन्ध द्वारा आकर्षित होते हैं। मनुष्य सभी ५ से आकर्षित होता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उन जीवों में अन्य ज्ञानेन्द्रिय नहीं है, बल्कि अन्य गौण हैं।
वृक्षों में केवल अनुभव करने की क्षमता है, वे व्यक्त नहीं कर सकते हैं। उनको अन्तःसंज्ञ कहा गया है।
चेतना के अतिरिक्त जीवन का एक अन्य गुण है कि वह अपने जैसे अन्य सन्तान को जन्म दे सकता है। पशु या वृक्षों में भी यह क्षमता युवावस्था में ही है, पूर्ण विकास के कुछ समय बाद तक जब उनमें क्षय का आरम्भ नहीं होता है। कुछ पुरुष या स्त्री जीवन के किसी काल में सन्तान उत्पत्ति नहीं कर सकते, या सक्षम होने पर भी सन्तान नहीं उत्पन्न होती है। किन्तु उनको जीवित ही मानते हैं।
सूक्ष्म जीवाणु भी एक प्रकार के जीव हैं। ये भी अपने जैसे जीव उत्पन्न कर सकते हैं, बाह्य प्रभाव के अनुसार अपनी क्रिया बदल सकते हैं। इनको भी वेद में या आधुनिक विज्ञान में जीवित मानते हैं।
२. भौतिक विज्ञान-भौतिक विज्ञान में परोक्ष रूप में जीवन की परिभाषा है। उष्मा-गतिकी के द्वितीय नियम के अनुसार कोई भी जीवन हीन पदार्थ द्वारा ताप को निम्न तापक्रम से उच्च तापक्रम तक नहीं ले जा सकते।
(Lord Kelvin expressed the second law in several wordings.
It is impossible for a self-acting machine, unaided by any external agency, to convey heat from one body to another at a higher temperature.
It is impossible, by means of inanimate material agency, to derive mechanical effect from any portion of matter by cooling it below the temperature of the coldest of the surrounding objects.)
उच्च ताप पर अणुओं में कम्पन अधिक होता है, और वे अव्यवस्थित हो जाते हैं। केवल जीवित व्यक्ति ही व्यवस्था कर सकता है। निर्माण जीवित व्यक्ति ही कर सकता है। आन्धी से वृक्ष टूट सकते हैं, नये पत्ते या शाखा उत्पन्न नहीं हो सकती है।
समय के साथ हर पदार्थ में क्षय होता है, जिसे क्षर पुरुष कहआ है। यहां पुरुष का अर्थ कोई भी सजीव या निर्जीव वस्तु या विश्व रचना है।
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्, प्रवृद्धो (गीता, १०/३२)
काल बढ़ने के साथ लोकों में क्षय होता है।
Encyclopedia Britannica-
Life is defined as any system capable of performing functions such as eating, metabolizing, excreting, breathing, moving, growing, reproducing, and responding to external stimuli.
Wikipedia definition-
The definition of life has long been a challenge for scientists and philosophers. This is partially because life is a process, not a substance. This is complicated by a lack of knowledge of the characteristics of living entities, if any, that may have developed outside of Earth. Philosophical definitions of life have also been put forward, with similar difficulties on how to distinguish living things from the non-living. Legal definitions of life have also been described and debated, though these generally focus on the decision to declare a human dead, and the legal ramifications of this decision. As many as 123 definitions of life have been compiled. One definition seems to be favored by NASA: "a self-sustaining chemical system capable of Darwinian evolution". More simply, life is, "matter that can reproduce itself and evolve as survival dictates."
३. जैव रसायन-जीव विज्ञान में जीवन का अर्थ है कोषों द्वारा अपने जैसे कोषों का निर्माण। उनके समूह रूप में जीव का अर्थ है कि वह भी अपने जैसे जीवों का निर्माण कर सकता है। इस अर्थ में मनुष्य की मृत्यु के बाद भी उसके कुछ अंग या सेल जीवित रह सकते हैं। जैसे मृत्यु के कुछ समय बाद भी किडनी, आंख का अन्य शरीर में प्रत्यारोपण किया जा सकता है।
सेल के जीवन का अर्थ है कि उसका रचना सूत्र (डीएनए) यदि सुरक्षित है तो उससे पुनः सेल बन सकता है। अभी डीएनए बनाने की क्षमता नहीं है।
रसायन विज्ञान के अनुसार जीव जगत के सेल तथा अणु कार्बन परमाणुओं से ही बने हैं। इसका कारण है कि ४ दिशाओं में अन्य परमाणुओं से संयोग करने वाला सबसे छोटा परमाणु कार्बन का है। इसी प्रकार का सिलिकन परमाणु भी है जिसका ऑक्साइड पृथ्वी सतह पर बिखरा बालू है। किन्तु वह भारी होने से उसके लम्बे चेन नहीं बन सकते। जैव रसायनों का विज्ञान ही कार्बनिक रसायन कहा जाता है। अन्य ग्रहों पर जीवन खोजने के लिए कार्बन से बने यौगिक ही खोजे जाते हैं।
४. अन्य जीवन-अपनी तरह का निर्माण करने वाले क्रिस्टल (मणि, या मणिभ) भी हैं। क्या उनमें जीवन मान सकते हैं? यह सन्दिग्ध है।
एक दार्शनिक पक्ष है कि क्या पृथ्वी, तारा, या ब्रह्माण्ड (गैलेक्सी) में जीवन है? फ्रेड होयल ने एक पुस्तक लिखी थी-ब्लैक क्लाउड। आकाश के एक विशाल गैस पिण्ड में भी उन्होंने एक अन्य प्रकार के जीवन की कल्पना की थी जो सम्पूर्ण मानव जाति से अधिक मानसिक शक्ति वाला था तथा अपने विद्युत् चुम्बकीय प्रभाव से किसी पिण्ड को इच्छानुसार चलाने या रोकने में सक्षम था।
इन विवादों तथा सन्देहों के कारण नासा द्वारा आयोजित समिति जीवन की सटीक परिभाषा निर्धारित नहीं कर सकी।
५. वैदिक परिभाषा-वेद में जीवन युक्त पदार्थ को पुरुष कहा है। सम्पूर्ण विश्व या उसके विभिन्न स्तरों के पिण्ड भी पुरुष हैं। इसके विभिन्न स्तरों तथा कार्यों का वर्णन पुरुष सूक्त में है, जो कुछ पाठ-भेदों के साथ प्रायः सभी वेद संहिताओं में है।
सांख्य दर्शन के अनुसार विश्व का चेतन तत्त्व पुरुष है। निर्माण सामग्री प्रकृति है, जिसके ३ गुणों के समन्वय से ८ भेद हैं। ८ प्रकृतियों से सत्त्व और रजः गुणों के अनुसार पुनः ८-८ तत्त्व होते हैं। तमोगुण से कुछ नहीं बनता, अतः कुल ८ + ८ + ८ = २४ तत्त्व हुए। २४ तत्त्वों का मिलन भूमि है, भ = २४वां व्यञ्जन।
पुरुष सूक्त में मूल स्रोत रूपी पूरुष, उसके १/४ भाग से बने पूर्ण जगत्, दृश्य पिण्ड रूपी विराट् पुरुष, उसका अधिष्ठान या चेतन रूप अधि-पूरुष, पृथ्वी पर उसके विभिन्न ग्राम्य (उपयोगी, उत्पादक) और आरण्य (निष्क्रिय द्रष्टा) पशु, विभिन्न स्तर के यज्ञ तथा उनसे उन्नति का वर्णन है।
६. पुरुष-जो पुर में रहता है, वही पुरुष है। जो रचना एक सतह से घिरी है, अपने आप में पूर्ण है, वह पुर है। पूर्णता अर्थ में वह विश्व है, जिसके १३ स्तर हैं। अतः ज्योतिष में १३ को विश्व कहते हैं। एक मत था कि पाणिनि व्याकरण के गणपाठ में विश्व के लिए १३ शब्द हैं, पर मुझे यह ठीक नहीं लगा। मनुष्य से बड़े ५ विश्व हैं-स्वयम्भू मण्डल (दृश्य भाग या तपः लोक में १०० अरब ब्रह्माण्ड), ब्रह्माण्ड या परमेष्ठी मण्डल (सबसे बडी ईंट), सौर मण्डल, चान्द्र मण्डल (जीवन योग्य ग्रह क्षेत्र), भूमण्डल। मनुष्य शरीर षष्ठ विश्व है और आकाश के विश्वों की प्रतिमा है। शतपथ ब्राह्मण (१२/३/२/५, १०/४/४/२) के अनुसार १०० अरब ब्रह्माण्ड हैं, हमारे ब्रह्माण्ड में १०० अरब तारा हैं, तथा उनकी प्रतिमा रूप मनुष्य के मस्तिष्क में १०० अरब कलिल (न्यूरोन, सेल) हैं। कण या चूर्ण रूप में इतने का ही संघ बन सकता है, अतः १०० अरब को खर्व (चूर्ण) कहते हैं।
मनुष्य से छोटे ७ विश्व क्रमशः १-१ लाख भाग छोटे हैं-कलिल, परमाणु (जीव), कुण्डलिनी (परमाणु की नाभि), जगत् कण (चर-लेप्टान, स्थाणु= बेरियोन, अनुपूर्वशः = मेसान), देव-दानव, पितर, ऋषि।
बालाग्रशत साहस्रं तस्य भागस्य भागिनः। तस्य भागस्य भागार्धं तत्क्षये तु निरञ्जनम् ॥ (ध्यानविन्दु उपनिषद् , ४)
ऋषिभ्यः पितरो जाताः पितॄभ्यो देव दानवाः। देवेभ्यश्च जगत्सर्वं चरं स्थाण्वनुपूर्वशः॥ (मनुस्मृति, ३/२०१)
वालाग्र शत भागस्य शतधा कल्पितस्य च ॥
भागो जीवः स विज्ञेयः स चानन्त्याय कल्पते ॥ (श्वेताश्वतर उपनिषद्, ५/९)
षट्चक्र निरूपण, ७-एतस्या मध्यदेशे विलसति परमाऽपूर्वा निर्वाण शक्तिः कोट्यादित्य प्रकाशां त्रिभुवन-जननी
कोटिभागैकरूपा । केशाग्रातिगुह्या निरवधि विलसत .. ।९। अत्रास्ते शिशु-सूर्यकला चन्द्रस्य षोडशी शुद्धा नीरज सूक्ष्म-तन्तु शतधा भागैक रूपा परा ।७।
सूक्ष्मतम ऋषि कण (आकार मीटर का १० घात ३५ भाग= आधुनिक विज्ञान में प्लांक दूरी) में जीव है, अतः उससे बनी क्रमशः बड़ी रचनाओं में भी जीवन है।
(७) बीजी पुरुष-मूल परम पुरुष ने आकाश गर्भ में बीज डाला था जिससे सृष्टि का आरम्भ हुआ।
सोऽकामयत बहुस्यां प्रजाजेयेति (तैत्तिरीय उपनिषद्, २/६)
स इदं सर्वं भवति (बृहदारण्यक उपनिषद्, १/४/१०)
स ईक्षत लोकान्नु सृजा इति, -- स ईक्षतेमे नु लोका लोकपालान्नु सृजा इति, --- स ईक्षतेमे नु लोकाश्च लोकपालाश्चान्नमेभ्यः सृजा इति (ऐतरेय ब्राह्मण, १/१, ३)
जीवन उत्पत्ति का क्रम-सबसे ऊर्ध्व या मूल परब्रह्म अव्यक्त ४ पाद का पूरुष, व्यक्त १ पाद का विश्व पुरुष, उसके बाद स्वयम्भू, परमेष्ठी, सौर, चान्द्र, भूमण्डल-उसके बाद वृक्ष, जीव और मनुष्य। यह विपरीत वृक्ष है, जिसके हर स्तर पर पुरुष ही शुक्र या बीज है।
ऊर्ध्वमूलोऽवाक्शाख एषोऽश्वत्थः सनातनः।
तदेव शुक्रं तद् ब्रह्म तदेवामृतमुच्यते।
तस्मिँल्लोकाः श्रिताः सर्वे तदु नात्येति कश्चन॥
एतद्वै तत्॥ (कठोपनिषद्, २/३/१)
गीता (१५/१) प्रायः यही है, पर उसमें बीज या शुक्र का उल्लेख नहीं है। उसके अनुसार निर्माण का यह क्रम शाश्वत है, किन्तु वृक्ष के पत्र रूप रचनायें जो छन्द या सीमा से घिरी हैं, अपेक्षाकृत नश्वर हैं।
ऊर्ध्वमूलमधः शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्।
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्॥ (गीता, १५/१)
मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम्।
सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत॥३॥
सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः।
तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिताः॥४॥ (गीता, १४/३-४)
तस्माद् वा एतस्माद् आत्मन आकाशः सम्भूतः। आकाशाद् वायुः। वायोरग्निः। अग्नेरापः। अद्भ्यः पृथिवि। पृथिव्या ओषधयः। ओषधीभ्योऽन्नम्। अन्नात् पुरुषः। (तैत्तिरीय उपनिषद्, २/१/३)
सबसे बड़ी रचना ब्रह्माण्ड को भी विराट् बालक कहा गया है जिसका गर्भ गोलोक है। वेद में इसे कूर्म चक्र कहा है, क्यों कि यह निर्माण करता है। यह ब्रह्माण्ड का प्रायः १० गुणा बड़ा है। इसे आजकल गैलेक्सी का कोरोना (आभामण्डल) कहते हैं, जिसमें प्रायः न्यूट्रिनो कण हैं। केवल प्रकाश रूप होने के कारण यह गोलोक है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खण्ड, अध्याय ३-अथाण्डं तु जलेऽतिष्टद्यावद्वै ब्रह्मणो वयः॥१॥
तन्मध्ये शिशुरेकश्च शतकोटिरविप्रभः॥२॥ स्थूलात्स्थूलतमः सोऽपि नाम्ना देवो महाविराट्॥४॥
तत ऊर्ध्वे च वैकुण्ठो ब्रह्माण्डाद् बहिरेव सः॥९॥
तदूर्ध्वे गोलकश्चैव पञ्चाशत् कोटियोजनात्॥१०॥नित्यौ गोलोक वैकुण्ठौसत्यौ शश्वदकृत्रिमौ॥१६॥
स यत्कूर्मो नामा एतद्वै रूपं कृत्वा प्रजापतिः प्रजा असृजत, यदसृजत अकरोत्-तद् यद् अकरोत् तस्मात् कूर्मः॥-शतपथ ब्राह्मण (७/५/१/५)
नरपति जयचर्या, स्वरोदय (कूर्म-चक्र)-मानेन तस्य कूर्मस्य कथयामि प्रयत्नतः।
शङ्कोः शतसहस्राणि योजनानि वपुः स्थितम्॥
ताण्ड्य महाब्राह्मण(११/१०) शङ्कुभवत्यह्नो धृत्यै यद्वा अधृतं शङ्कुना तद्दाधार॥११॥
तद् (शङ्कु साम) उसीदन्ति इयमित्यमाहुः॥१२॥
ऐतरेय ब्राह्मण (५/७)-यदिमान् लोकान् प्रजापतिः सृष्ट्वेदं सर्वमशक्नोद् तद् शक्वरीणां शक्वरीत्वम्॥
शङ्कु = १० घात १३। शतसहस्र शङ्कु (१० घात १८ योजन) कूर्म या गोलोक का आकार है। ब्रह्माण्ड का आकार (व्यास) १० घात १७ योजन है। छन्द रूप में यह शक्वरी (१४ x ४ = ५६ अक्षर) अर्थात् पृथ्वी व्यास x २ घात (५६-३) है, जो रात्रि जैसा अन्धकार है (शक्वरी = रात्रि)।
ब्रह्माण्ड का आकाश (ताराओं के बीच प्रायः खाली स्थान) भी मद्य से भरा है जो कार्बन अणु का यौगिक है।
यस्य त्री पूर्णा मधुना पदान्यक्षीयमाणा स्वधया मदन्ति।
य उ त्रिधातु पृथिवीमुतद्यामेको दाधार भुवनानि विश्वा॥४॥
तदस्य प्रियमसि पाथो अश्यां नरो यत्र देव यवो मदन्ति।
उरुक्रमस्य स हि बन्धुरित्था विष्णोः पदे परमे मध्व उत्सः॥५॥
(ऋक्, १/१५४/४-५)
इसका पता श्रीलंका के वैज्ञानिक विक्रमसिंघे ने १९७५ में लगाया था।(1) F H C Crick, Simon & Schuster, New Yorka, 1982.
(2) Evolution From Space-F Hoyle and Chandra Wickramasinghe.
(3) Intelligent Universe-F. Hoyle, Michael Joseph, London 1983.
(4) Astronomical Journal-1975 (196-99).
(८) चेतना-इसका आरम्भ चित् से होता है जो शून्य या विन्दुमात्र आकाश है (चिदाकाश)। चित् विन्दुओं का विन्यास या क्रम में व्यवस्था चिति है। जो चिति कर सके वह चेतना है। चेतना का निवास चित्त है। मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त-ये अन्तःकरण चतुष्टय हैं। मनोबुद्धिरहङ्कारश्चित्तमित्यन्तःकरणचतुष्टयम्। (शारीरकोपनिषद् २)
मनोबुद्धिरहङ्कारश्चित्त चेति चतुष्टयम्। (वराहोपनिषद् १/४)
मनोबुद्ध्योश्चित्ताहङ्कारौ चान्तर्भूतौ।(त्रिशिखब्राह्मणोपनिषद् १/४)
मस्तिष्क कणों में अनियमित कम्पन मन है, या इसे मस्तिष्क आकाश तथा उसके द्रव में तरंग कह सकते हैं। ब्रह्माण्ड ता तारा समूह या आकाश के ब्रह्माण्ड समूह का कम्पन भी विराट् मन है।मनः सम्पद्यते लोलं कलनाऽऽकलनोन्मुखम्।कलयन्ती मनःशक्तिरादौ भावयतिक्षणात्॥ (महोपनिषद्, ५/१४६)
इन कम्पनों का व्यवस्थित क्रम बुद्धि है, जिसे वाक्य द्वारा प्रकट किया जा सकता है। बुद्धयो वै धियस्ता योऽस्माकंप्रचोदयादित्याहुर्मनीषिणः। (मैत्रायणी उपनिषद् ६/७)
बुद्धिकर्मेन्द्रियप्राणपञ्चकैर्मनसाधिया। शरीरं सप्तदशभिः सुसूक्ष्मं लिङ्गमुच्यते। (शारीरकोपनिषद् ११)
व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन। बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्॥ (गीता, २/४१)
अपरिमिततरमिव हि मनः परिमिततरमेव हि वाक्। (शतपथ ब्राह्मण १/४/४/७)
वाक् के भी ४ स्तर कहे हैं। मूल विन्दु स्रोत परा वाक् है। स्पष्ट विचार रूप में अनुभूति पश्यन्ती है। वाक्य रूप में व्यवस्था मध्यमा है। ध्वनि, लिपि आदि द्वारा उसे शब्दों में प्रकट करना वैखरी है। चत्वारि वाक् परिमिता पदानि तानि विदुर्ब्राह्मणा ये मनीषिणः।
गुहा त्रीणि निहिता नेङ्गयन्ति तुरीयं वाचो मनुष्या वदन्ति॥ (ऋग्वेद १/१६४/४५)
परायामङ्कुरीभूय पश्यन्त्यां द्विदलीकृता॥१८॥
मध्यमायां मुकुलिता वैखर्या विकसीकृता॥ (योगकुण्डली उपनिषद् ३/१८, १९)
किसी शरीर या पिण्ड के जितने कण हैं, उनका एक समूह होने का भाव अहंकार है। शरीर के सभी कण या कलिल यह जानते हैं कि यह अपने ही शरीर के हैं। वे अन्य को भी पहचानते हैं और बाहरी वायरस आदि शत्रुओं, रक्त आदि को घुसने नहीं देते।
विचार का केन्द्र विन्दु चित्त है।
चितिरूपेण याकृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। (चण्डी पाठ, ५/७८-८०)
(९) यज्ञ-चेतना का कोई लाभ नहीं यदि उससे निर्माण नहीं हो सके। गीता अध्याय ८ के आरम्भ में विश्व के ३ स्तरों का वर्णन है-आधिदैविक = आकाश की सृष्टि, आधिभौतिक = पृथ्वी का विश्व, आध्यात्मिक = दोनों की प्रतिमा मनुष्य शरीर। इन सभी विश्वों में ३ प्रकार के वर्णन हैं-ब्रह्म = हर प्रकार का पुर, कर्म = आन्तरिक तथा बाह्य कण या पिण्ड गति। आन्तरिक गति कृष्ण तथा बाह्य गति शुक्ल है। जिस कर्म से उपयोगी वस्तु का उत्पादन हो वह यज्ञ है।
सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरो वाच प्रजापतिः।
अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक्॥ (गीता, ३/१०)
यज्ञ कर्म सदा चक्र में होता है, जिसके पालन से जीवन चलता है-
एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः।
अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति॥ (गीता, ३/१६)
जीवन तथा प्राण का सबसे प्रसिद्ध लक्षण है कि श्वास चक्र चल रहा है। इससे सम्बन्धित ५ यज्ञ हैं-
श्रोत्रादीनिन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति।
शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति॥२६॥
सर्वाणीन्द्रियकर्माणि प्राणकर्माणि चापरे।
आत्मसंयमयोगाग्नौ जुह्वति ज्ञानदीपिते॥२७॥
द्रव्ययज्ञास्तपोयज्ञा योगयज्ञास्तथापरे।
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः॥२९॥
अपरे नियताहाराः प्राणान्प्राणेषु जुह्वति।
सर्वेऽप्येते यज्ञविदो यज्ञक्षपित कल्मषाः॥३०॥ (गीता, ४/२६-३०)
(१) संयम यज्ञ-विषयों से आकर्षित होकर मनुष्य अपने मार्ग से भटक जाता है। बेकार कामों से अपनी शक्ति हटाना प्रत्याहार है। उसे मुख्य कार्य में लगाना धारणा है। धारणा लगातार बनाये रखना ध्यान है। मस्तिष्क को शान्त रखना समाधि है। इन तीनों-धारणा, ध्यान, समाधि-का संयोग कर कार्य करना संयम है।
पातञ्जल योग सूत्र-स्वविषयसम्प्रयोगे चित्तस्वरूपानुकार इवेन्द्रियाणां प्रत्याहारः। (२/५४)
देशबन्धश्चित्तस्य धारणा। (३/१) तत्र प्रत्यैकतानता ध्यानम्। (३/२) तदेवार्थमात्रनिर्भासं स्वरूपशुन्यमिव समाधिः। (३/३)। त्रयमेकत्र संयमः। (३/४)
योग सूत्र के अध्याय ३ में विभिन्न प्रकार के संयमों द्वारा ५२ प्रकार की सिद्धि का वर्णन है। ये सभी संयम यज्ञ हैं-
श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति। आत्मसंयमयोगाग्नौ जुह्वति ज्ञानदीपिते॥ (गीता २/२७)
(२) इन्द्रिय यज्ञ- यह संयम यज्ञ से सम्बन्धित है। उसका एक साधन होने पर भी यह अपने आप में यज्ञ है जिससे शरीर स्वस्थ, कारुअक्षम बनता है तथा सभी प्रकार के यज्ञ पूरे किये जा सकते हैं। इसके लिये ज्ञानेन्द्रियों के ५ गुणों को अपने विषयों से दूर करते हैं- शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध।
(३) प्राण-कर्म यज्ञ-५ प्राण और ५ उप-प्राण हैं, जो शरीर अंगों की क्रियाओं से सम्बन्धित हैं। प्राणों का कर्म जानने पर उनको आत्म-संयम की अग्नि में जलाते हैं। इन्द्रियों और उनके प्राणों में समन्वय रख कर उनका अधिकतम उपयोग हो सकता है।
(४) तपो-यज्ञ-तप का अर्थ श्रम है। इससे ताप (गर्मी) होती है अतह् यह तप है। दृश्य जगत् को भी तपो-लोक कहा गया क्योंकि इसके एक भाग का तेज अन्य भागों तक पहुंच सकता है। सिद्धान्ततः तपो लोक से बाहर से कोई प्रकाश हम तक नहीं पहुंच सकता। देश में उर्जा के साधनों का संरक्षण और उपयोग ही तपो यज्ञ है-बिजली उत्पादन, कोयला, पेट्रोल आदि का भन्डार सुरक्षित रखना। इसी तप से असुरों ने देवताओं को कई बार पराजित किया था। व्यक्तिगत रूप से दैनिक व्यायाम, भोजन और व्यवहार में संयम और कुछ कष्ट सहन क्षमता रखना तपो यज्ञ है। ऐसा नहीं है कि केवल ऋषि ही तप करते थे। असुरों ने बहुत कठोर तप किया। उनकी तुलना में देवता विलासी होने के कारण हार गये।
(५) योग यज्ञ-योग का अर्थ है जोड़ना। शरीर में श्वास और क्रिया को जोड़ना योग है। इसके ८ स्तरों के बाद अन्ततः आत्मा और परमात्मा का योग होता है-(१) यम, (२) नियम, (३) आसन, (४) प्राणायाम, (५) प्रत्याहार, (६) धारणा, (७) ध्यान, (८) समाधि।
(६) प्राणायाम यज्ञ-श्वास नियन्त्रण के रूप में यह योग यज्ञ का चतुर्थ अंग है। यहां इसका अर्थ है कि कम से कम साधन द्वारा शरीर को शक्तिशाली और उपयोगी बनाया जाय। शरीर में शक्ति के लिये भोजन लेना और उसका पाचन जरूरी है। यह प्राण का अपान में हवन है। अपान वायु से पाचन होकर मल निष्कासन होता है। किन्तु शरीर में भोजन सञ्चित करने से ही कोई लाभ नहीं है। जैसे नियमित भोजन जरूरी है, नियमित रूप से कुछ शक्ति खर्च कर काम करना भी जरूरी है। यह अपान का प्राण में हवन है। भौतिक स्तर पर शुद्ध भोजन लेकर उसे पचाना और दैनिक कार्य या व्यायाम करना ही प्राणायाम यज्ञ है। सूक्ष्म स्तरों पर श्वास और मन का नियन्त्रण भी होता है।
(७) प्राण यज्ञ- यह प्राण का अपान में तथा अपान का प्राण में हवन है तथा नियत आहार द्वारा प्राण का प्राण में हवन है-
शरीर में भोजन का ग्रहण प्राण का ग्रहण है, जिसका अपान में हवन होता है। काम में उसका खर्च होना अपान का प्राण में हवन है। अन्न के पाचन से आरम्भ कर ७ स्तरों पर प्राण का उत्थान प्राण-यज्ञ है। बृहदारण्यक उपनिषद् (१/५/१) के अनुसार हम ७ प्रकार का अन्न लेते हैं-(१) मन या ज्ञान, (२) प्राण, (३) पृथिवी (ठोस पदार्थ), (४) जल, (५) तेज, (६) वायु (श्वास), (७) आकाश। वैशेषिक दर्शन में ९ द्रव्य हैं इनमें काल और आत्मा को भी गिना गया है।
छान्दोग्य उपनिषद् (६/५/१) में कहा गया है कि अन्न का ३ भाग में पाचन होता है-ठोस पदार्थ मल रूप में निकल जाता है, मध्यम का उपयोग शरीर को पुष्ट करने में होता है तथा सूक्ष्म भाग मन हो जाता है-अन्नमशितं त्रेधा विधीयते, तस्य यः स्थविष्टो धातुस्तत्पुरीषं भवति, यो मध्यस्तन्मांसं, योऽणिष्टस्तन्मनः।(छान्दोग्य ६/५/१)।
आयुर्वेद के अनुसार स्थूल भोजन ७ स्तरों में पचता है-
(१) रस (द्रव)-शरीर की पुष्टि। इसका मल भोजन का अवशेष है जो शरीर से बाहर निकलता है।
(२) असृक् (द्रव में ठोस कण)-रक्त। यह जीवन देता है (वाजीकरण या शक्ति)। इसका मल पित्त है।
(३) मांस-इसमें मांसपेशी तथा चर्म भी है। यह शरीर का लेपन करता है (आवरण, भरना)। इसका मल कान के मल आदि हैं।
(४) मेद (चर्बी, वसा) शरीर की क्रिया को चिकना करती है (स्नेहन)। इसका मल स्वेद (पसीना) है।
(५) अस्थि (हड्डी)-यह शरीर का ढांचा है, धारण करता है। इसका मल नख और केश हैं।
(६) मज्जा-हड्डी के भीतर का भीतरी भाग, मस्तिष्क, सुषुम्ना तन्त्र। यह भरता है (पूरण)। इसका मल ग्रन्थियों का स्राव है।
(७) अन्य............।
*_हर हर महादेव🙏_*
👉 *मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है।।*
🪷🪴 *विशेष आग्रह* 🪴🪷
👉 *अपने घर में बच्चों के साथ दैनिक पूजन ,भगवान की आरती, माता, पिता व गुरुजनों को प्रणाम करना व मस्तक पर तिलक एवं शिखा (चोटी) अवश्य धारण करायें व हिन्दू धर्म के संस्कार बच्चों को दें एवं शंखनाद करें और अपने पडोसी को व मित्रों को उपरोक्त संस्कार करने के लिए प्रेरित करें इसके दूरगामी लाभ मिलेंगे ।*
🙏🪴 *आज का दिन आपके लिए मंगलमय हो।*🪴🙏
*_अस्वीकरण(Disclaimer)दैनिक पंचांग, धर्म, ज्योतिष,राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर यहाँ प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं।ज्योतिष एक अत्यंत जटिल विषय है, यहां पूरी सतर्कता के उपरांत भी मानवीय त्रुटि संभव है, अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले अपने स्वविवेक के साथ किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें..._*
*_🪴🪷💫 दैनिक राशिफल💫🪷🪴_*
🐑 *_मेष राशि :चू, चे, चो, ल, ली, लू, ले, लो,अ।आज आप ख़ुद को सुकून में और ज़िंदगी का लुत्फ़ उठाने के लिए सही मनोदशा में पाएंगे। अपने निवेश और भविष्य की योजनाओं को गुप्त रखें। दोपहर के बाद किसी पुराने दोस्त से मुलाक़ात दिन को ख़ूबसूरत बना देगी। आप अपने सुनहरे दिनों को याद करके पुरानी यादों में डूब जाएंगे। आपके ज़हन में काम का दबाव होने के बावजूद आपका प्रिय आपके लिए ख़ुशी के पलों को लाएगा। नौकरों और सहकर्मियों से परेशानी होने की संभावना को ख़ारिज नहीं किया जा सकता है। बिना किसी पूर्व सूचना के आज आपका कोई रिश्तेदार आपके घर पधार सकता है जिसकी वजह से आपका कीमती समय उनकी खातिरदारी में जाया हो सकता है। यह दिन आपके जीवनसाथी का बेहतरीन पहलू आपको दिखाने वाला है।_*
*_उपाय :- चाँदी का कड़ा धारण करना आर्थिक स्थिति को बेहतर करेगा।_*
🐂 *_वृषभ राशि :इ, उ, ए, ओ, ब, बी ,बू, बे ,बो।जब आप कोई फ़ैसला लें, तो दूसरों की भावनाओं का ख़ास ख़याल रखें। आपका कोई भी ग़लत निर्णय न केवल उनपर ख़राब असर डालेगा, बल्कि आपको भी मानसिक तनाव देगा। आज के दिन आप धन से जुड़ी समस्या के कारण परेशान रह सकते हैं। इसके लिए आपको अपने किसी विश्वास पात्र से सलाह लेनी चाहिए। प्रभावशाली और महत्वपूर्ण लोगों से परिचय बढ़ाने के लिए सामाजिक गतिविधियाँ अच्छा मौक़ा साबित होंगी। प्यार का बुख़ार आपके सर पर चढ़ने के लिए तैयार है। इसका अनुभव कीजिए। दफ़्तर में अपनी ग़लती स्वीकार करना आपके पक्ष में जाएगा। लेकिन आपको इसे सुधारने के लिए विश्लेषण की ज़रूरत है। आपकी वजह से जिसे नुक़सान हुआ हो, उससे माफ़ी मांगने की ज़रूरत है। याद रखिए कि हर कोई ग़लती करता है, लेकिन केवल बेवकूफ़ ही उन्हें दोहराते हैं। आपका प्रेमी आपको पर्याप्त समय नहीं देता यह शिकायत आज आप खुलकर उनके सामने कर सकते हैं। यूँ तो जीवन हमेशा कुछ नया और चौंकाने वाली चीज़ आपके सामने लाता है। लेकिन आज आप अपने जीवनसाथी का एक अनोखा पहलू देखकर ख़ुशी से चौंक जाएंगे।_*
*_उपाय :- अच्छी सेहत के लिए सूर्योदय के समय सूर्य नमस्कार करें।_*
👩❤️👨 *_मिथुन राशि :का,की , कु, घ, ङ ,छ, के, को, ह।सामाजिक मेलजोल से ज़्यादा सेहत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जो लोग दुग्ध उद्योग से जुड़े हैं उन्हें आज आर्थिक लाभ होने की प्रबल संभावना है। किसी बुज़ुर्ग रिश्तेदार की निजी समस्याओं में मदद करके आप उनका आशीर्वाद पा सकते हैं। आज आप अपने दोस्त की महक उसकी अनुपस्थिति में महसूस करेंगे। नौकरी में बदलाव मानसिक संतोष देगा। आप खुद को समय देना जानते हैं और आज तो आपको काफी खाली समय मिलने की संभावना है। खाली समय में आज आप कोई खेल-खेल सकते हैं या जिम जा सकते हैं। आज के दिन जीवन साथी पर किया गया संदेह आने वाले दिनों में आपके वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।_*
*_उपाय :- अच्छे स्वास्थ्य के लिए जेब में लाल रंग का रुमाल रखें।_*
🦀 *_कर्क राशि :ही, हू, हे, हो, डा, डी ,डू, डे,डो।ऊर्जा और उत्साह का अतिरेक आपको घेर लेगा और आप सामने आने वाले सभी मौक़ों का भरपूर फ़ायदा उठाएंगे। अपनेे लिए पैसा बचाने का आपका ख्याल आज पूरा हो सकता है। आज आप उचित बचत कर पाने में सक्षम होंगे। आपकी ज्ञान की प्यास आपको नए दोस्त बनाने में मददगार साबित होगी। अचानक हुई रोमांटिक मुलाक़ात आपके लिए उलझन पैदा कर सकती है। आज आप एक ऐसी परियोजना पूरी कर राहत की सांस लेंगे, जिसे आपके बहुत पहले शुरू किया था। जब आपको लगता है कि आपके पास घर वालों या अपने दोस्तों के लिए टाइम नहीं है तो आपका मन खराब हो जाता है। आज भी आपकी मन स्थिति ऐसी ही रह सकती है। आपके जीवनसाथी के लबों की मुस्कान पल भर में आपका सारा दर्द ग़ायब करने की क़ाबिलियत रखती है।_*
*_उपाय :- खाने में पीली वस्तुओं का प्रयोग अधिक करने से लव लाइफ अच्छी रहेगी।_*
🦁 *_सिंह राशि :मा, मी, मू, में, म़ो, ट, टी, टू, टे।अपने काम के लिए दूसरों पर दबाव न डालें। दूसरे लोगों की इच्छाओं और दिलचस्पियों पर भी ग़ौर करें, इससे आपको दिली ख़ुशी हासिल होगी। भविष्य में अगर आपको आर्थिक रुप से मजबूत बनना है तो आज से ही धन की बचत करें। हालात को क़ाबू में रखने के लिए अपने भाई की मदद लें। विवाद को ज़्यादा तूल देने की बजाय उसे दोस्ताना तरीक़े से हल करने की कोशिश करें। आप अपने प्रिय की बांहों में आराम महसूस करेंगे। नौकरी पेेशा से जुड़े लोगों को आज कार्यक्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आज आप न चाहते हुए भी कोई गलती कर बैठेंगे जिसकी वजह से आपको अपने सीनियर्स की डांट सहनी पड़ सकती है। कारोबारियों के लिए दिन सामान्य रहने की उम्मीद है। सामाजिक और धार्मिक समारोह के लिए बेहतरीन दिन है। कोई पुराना दोस्त अपने साथ आपके जीवनसाथी के पुराने यादगार क़िस्से लेकर आ सकता है।_*
*_उपाय :- स्वास्थ्य बना रहे इसके लिए गुरुवार को तेल न लगाएं।_*
👰🏻♀ *_कन्या राशि :टो,पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, प़ो।आज आपकी सेहत पूरी तरह अच्छी रहेगी। आप अच्छा पैसा बना सकते हैं, बशर्ते आप पारंपरिक तौर पर निवेश करें। ऐसे कामों में सहभागिता करने के लिए अच्छा समय है, जिसमें युवा लोग जुड़े हों। आप अनुभव करेंगे कि आपके प्रिय का आपके प्रति प्यार वाक़ई बहुत गहरा है। आपके अंदर नेतृत्व का गुण और लोगों की ज़रूरतों को समझने की संवेदनशीलता है। अगर आप ख़ुद को अभिव्यक्त करने पर ज़ोर देंगे, तो सफलता आपके क़दम चूमेगी। जो चीजें आपके लिए आवश्यक नहीं हैं उनपर आज अपना अधिकतर समय आप जाया कर सकते हैं। आज आप महसूस करेंगे कि शादी का बंधन वाक़ई स्वर्ग में बनाया जाता है।_*
*_उपाय :- काले ऊनी कंबल का दान किसी गरीब व्यक्ति को करने से आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी।_*
⚖️ *_तुला राशि :रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते।जो समस्याएँ आपको परेशान कर रही हैं, उन्हें हल करने के लिए होशियारी, चतुरता और कूटनीति के दाव-पेंचों की ज़रूरत है। धन से जुड़ा कोई मसला आज हल हो सकता है और आपको धन लाभ हो सकता है। आज आपको दूसरों की ज़रूरतों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। हालाँकि बच्चों को ज़्यादा छूट देना आपके लिए समस्या खड़ी कर सकता है। आसमान ज़्यादा उजला नज़र आएगा, फूलों में ज़्यादा रंग दिखेंगे और आपके आस-पास सब कुछ चमक उठेगा - क्योंकि आप इश्क़ का सुरूर महसूस कर रहे हैं! आपको पता लग सकता है कि आपके बॉस आपसे इतने रूखेपन से क्यों बात करते हैं। वजह जानकर आपको वाक़ई तसल्ली होगी। आज आप व्यस्त दिनचर्या के बावजूद भी अपने लिए समय निकाल पाने में समर्थ होंगे और इस खाली समय में अपने परिवार वालों के साथ गुफ्तगू कर सकते हैं। बढ़िया खाना, रोमानी पल और जीवनसाथी का साथ - यही ख़ास है आज।_*
*_उपाय :- पारिवारिक जीवन की खुशियों हेतु दूध, मिश्री, सफेद गुलाब के पुष्प किसी भी धर्म स्थान में चढ़ाएं।_*
🦂 *_वृश्चिक राशि :तो,न, नी, नू, ने, नो, या, यी , यु।आपको काफ़ी समय से चल रही बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। रात के समय आप आज आपको धन लाभ होने की पूरी संभावना है क्योंकि आपके द्वारा दिया गया धन आज आपको वापस मिल सकता है। अगर आप हर किसी की मांग पूरी करने की कोशिश करेंगे, तो सिर्फ़ नाकामी आपके हाथ लगेगी। सच्चे और पवित्र प्रेम का अनुभव करें। सहकर्मी आपको काफ़ी सहयोग देंगे और कार्यक्षेत्र में विश्वास की नींव पर नए रिश्तों की शुरुआत होगी। आपके घर का कोई सदस्य आज आपके साथ वक्त बिताने की जिद्द कर सकता है जिसके कारण आपका कुछ समय खराब हो जाएगा। आज आप अपने जीवनसाथी के साथ कुछ बेहतरीन पल गुज़ार सकेंगे।_*
*_उपाय :- केसर की पुड़िया पीले रंग के कपड़े में बांधकर अपने पास रखने से पारिवारिक जीवन अच्छा चलता है।_*
🏹 *_धनु राशि :ये,यो, भा, भी,, भू, ध,फ, ढ़, भे।नफ़रत को दूर करने के लिए संवेदना का स्वभाव अपनाएँ, क्योंकि नफ़रत की आग बहुत ज़्यादा ताक़तवर है और मन के साथ शरीर पर भी बुरा असर डालती है। याद रखें कि बुराई अच्छाई से ज़्यादा आकर्षक ज़रूर दिखाई देती है, लेकिन उसका असर ख़राब ही होता है। आपके पिता की कोई सलाह आज कार्यक्षेत्र में आपको धन लाभ करा सकती है. शाम का वक़्त दोस्तों के साथ बिताना दिलचस्प तो रहेगा ही, साथ ही छुट्टी साथ बिताने की योजनाओं पर भी चर्चा हो सकेगी। सावधान रहें, कोई आपसे दिल्लगी या फ़्लर्ट करके अपना उल्लू सीधा कर सकता है। दफ़्तर में अपनी ग़लती स्वीकार करना आपके पक्ष में जाएगा। लेकिन आपको इसे सुधारने के लिए विश्लेषण की ज़रूरत है। आपकी वजह से जिसे नुक़सान हुआ हो, उससे माफ़ी मांगने की ज़रूरत है। याद रखिए कि हर कोई ग़लती करता है, लेकिन केवल बेवकूफ़ ही उन्हें दोहराते हैं। इस राशि के छात्र आज मोबाइल पर सारा दिन बर्बाद कर सकते हैं। जीवनसाथी के ख़राब स्वास्थ्य की वजह से आपका कामकाज प्रभावित हो सकता है।_*
*_उपाय :- प्रेमी/प्रेमिका को काले व सफेद गुलाब गिफ्ट करने से प्रेम सम्बन्ध अच्छे रहेंगे।_*
🐊 *_मकर राशि :भो,ज, जी,जू,जे जो, खी,खू, खे, खो, गा, गी।दोस्त आपका परिचय किसी ख़ास इंसान से कराएंगे, जो आपकी सोच पर गहरा प्रभाव डालेगा। अगर सफर कर रहे हैं तो अपने कीमती सामान का विशेष ध्यान रखें अगर आप ऐसा नहीं करते तो सामान के चोरी होने की संभावना है। पारिवारिक उत्तरदायित्व में वृद्धि होगी, जो आपको मानसिक तनाव दे सकती है। आज अपने ख़ूबसूरत कामों को दिखाने के लिए आपका प्रेम पूरी तरह खिलेगा। कार्यक्षेत्र के नज़रिए से आज का दिन आपका है। इसका भरपूर फ़ायदा उठाएँ। आपको याद रखने की ज़रूरत है कि भगवान उसी की मदद करता है, जो ख़ुद अपनी मदद करता है। अगर आप अपने जीवनसाथी से स्नेह की आशा रखते हैं, तो यह दिन आपकी आशाओं को पूरा कर सकता है।_*
*_उपाय :- आर्थिक स्थिति को अच्छा रखने के लिए हाथ में सोने सोने की अंगूठी ज़रुर पहनें।_*
⚱️ *_कुम्भ राशि :गू, गे, गो, सा, सि, सू, से, सो, द।सिर्फ़ आप जानते हैं कि आपके लिए क्या बेहतर है, इसलिए मज़बूत और स्पष्टवादी बनें तथा फ़ैसले तुरन्त लें और उनके परिणामों का सामना करने के लिए तैयार रहें। आज आप अपने घर केे सदस्यों को कहीं घुमाने ले जा सकते हैं और आपका काफी धन खर्च हो सकता है। आप मानें या न मानें, आपके आस-पास को बड़े ग़ौर से आपको देख रहा है और आपको एक आदर्श मानता है। इसलिए ऐसे काम करें, जो क़ाबिले-तारीफ़ हों और आपकी प्रतिष्ठा को बढ़ाएँ। प्यार एक ऐसा जज़्बा है जिसे न सिर्फ़ महसूस किया जाना चाहिए, बल्कि अपने प्रिय के साथ बांटना भी चाहिए। आपमें बहुत-कुछ हासिल करने की क्षमता है- इसलिए अपने रास्ते में आने वाले सभी मौक़ों को झट-से दबोच लें। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद भी आज आप अपने लिए समय निकालपाने में सक्षम होंगे। खाली वक्त में आज कुछ रचनात्मक कर सकते हैं। यह दिन शादीशुदा ज़िन्दगी के सबसे ख़ास दिनों में से एक रहेगा।_*
*_उपाय :- काँसे का कड़ा पहना सेहत के लिए लाभदायक रहेगा।_*
🐬 *_मीन राशि:दी, दु, थ, झ, ञ, दे, दो, च, ची।आपके हँसी-मज़ाक़ का लहज़ा किसी दूसरे को आपकी तरह इस क्षमता को विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकता है। आपसे उसे यह सबक़ मिलेगा कि ज़िंदगी की ख़ुशी बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि ख़ुद के ही भीतर है। अगर आपका धन से जुड़ा कोई मामला कोर्ट-कचहरी में अटका था तो आज उसमें आपको विजय मिल सकती है और आपको धन लाभ हो सकता है। रिश्तेदारों से सहयोग मिलेगा और दिमाग़ी बोझ से छुटकारा मिलेगा। आप जहाँ हैं वहीं रहेंगे, बावजूद इसके प्यार आपको एक नए और अनोखे लोक में ले जाएगा। साथ ही आज आप रोमानी सफ़र पर भी जा सकते हैं। दिवास्वप्नों में समय खपाना नुक़सानदेह रहेगा, इस मुग़ालते में न रहें कि दूसरे आपका काम करेंगे। खाली समय का पुरा आनंद उठाने के लिए आपको लोगों से दूर होकर अपने पसंदीदा काम करने चाहिए। ऐसा करके आपमें सकारात्मक बदलाव भी आएंगे। अपने जीवनसाथी के साथ आप आज एक शानदार शाम गुज़ार सकते हैं।_*
*_उपाय :- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। इस मंत्र को 28 या 108 बार जपना नौकरी/बिज़नेस के लिए अच्छा है।_*
*_🪴🪷⭐जय श्री राम⭐🪷🪴_*
: *🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 16 सितम्बर 2025*
*⛅दिन - मंगलवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - दक्षिणायण*
*⛅ऋतु - शरद*
*⛅मास - आश्विन*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - दशमी रात्रि 12:21 सितम्बर 17 तक तत्पश्चात् एकादशी*
*⛅नक्षत्र - आद्रा प्रातः 06:46 तक तत्पश्चात् पुनर्वसु*
*⛅योग - वरीयान् रात्रि 12:34 सितम्बर 17 तक तत्पश्चात् परिघ*
*⛅राहुकाल - दोपहर 03:25 से शाम 04:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:14*
*⛅सूर्यास्त - 06:29 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:40 से प्रातः 05:27 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:57 से दोपहर 12:46 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:58 से रात्रि 12:45 सितम्बर 17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - दशमी का श्राद्ध*
*🌥️ विशेष - दशमी को कलंबी शाक खाना त्याज्य है।*
*🔹सरल औषधि प्रयोग🔹*
*1. खासी में तुरन्त लाभ हेतु - (क) कच्ची हल्दी का रस पियें । (बच्चों के लिए पाव से आधा चम्मच, बड़ों के लिए 1 चम्मच) ।*
*(ख) अदरक का छोटा सा टुकड़ा चूसें ।*
*(ग) 2-3 काली मिर्च चूसें । अथवा काली मिर्च चबाकर गुनगुना पानी पियें ।*
*(घ) अत्यधिक खाँसी में 1-1 चम्मच अदरक व पान के पत्तों के रस में थोड़ा - सा पुराना गुड़ या शहद मिलाकर पीना उत्तम है ।*
*2. मोटापा व पुराना कब्ज - एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस एवं दो चम्मच शहद डालकर पीने से शरीर की अनावश्यक चर्बी कम होती है व पुराना कब्ज मिटता है ।*
*3. प्रदर रोग - आँवला चूर्ण को मिश्री के साथ लेने से स्त्रियों के अधिक मासिक स्राव व श्वेतप्रदर रोगों में लाभ होता है । धोये हुए चावल का पानी मिलाकर पीनें से पेचिश, अतिसार व प्रदर रोगों में लाभ होता है ।*
*4. मासिक सम्बंधी समस्याएँ*
*(क) सुबह खाली पेट 2-4 गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव ठीक होता है ।*
*(ख) मासिक धर्म में पीड़ा होती हो तो 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ एक चुटकी अजवायन फांक लें ।*
*(ग) सुबह-शाम 1-1 चुटकी हींग गुनगुनें पानी में घोल के लेने से बिना कष्ट के खुलकर मासिक आता है । अधिक रक्तस्राव में अंतिम दो प्रयोग न करें ।*
*🌞मेरे श्रीराम आए है तो द्वारिकाधीश भी आयेंगे🌞*
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0

