आज सुबह के मुख्य समाचार पत्र ✉ *अंततः चंबा नेटवर्क से कनेक्ट हो गया।लेकिन जो नुकसान हुआ है उसको भरपाई 5 साल तक नहीं हो पाएगी।*

Aug 29, 2025 - 07:25
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आज सुबह के मुख्य समाचार पत्र ✉ *अंततः चंबा नेटवर्क से कनेक्ट हो गया।लेकिन जो नुकसान हुआ है उसको भरपाई 5 साल तक नहीं हो पाएगी।*

: *हिमाचल में बारिश से तबाही जारी; अब जान लेने पर उतारू मानसून, अब तक 306 लोगों की मौ*त* 

हिमाचल प्रदेश में बारिश का कहर जारी है। शनिवार से प्रदेश भर में लगातार बारिश हो रही है। इससे कई जगहों पर भारी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर भू-स्खलन होने से घरों के साथ दुकानें और गाडिय़ां क्षतिग्रस्त हुई है। इसके अलावा सडक़ें और पुल जर्जर होने से सैकड़ों सडक़ों पर यातायात बाधित है…

743 सडक़ें बंद

शनिवार से लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त

चीफ रिपोर्टर-शिमला

राज्य में बारिश से नुकसान नहीं थम रहा है। लगातार मानसून कहर जारी है। सोमवार को राज्य में दो नेशनल हाई-वे सहित 743 सडक़ें यातायात के लिए बंद पड़ी है। प्रदेश के मंडी, चंबा व कुल्लू के साथ राज्य के अन्य जिलों में भी जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चंबा में 214 सडक़ें वाहनों की आवाजाही के लिए बंद पड़ी हुई है। इसके अलावा बिलासपुर में 26, हमीरपुर में पांच, कांगड़ा में 33, किन्नौर में दो, कुल्लू में एनएच 305 के साथ 131 सडक़ें बाधित चल रही है। लाहुल-स्पीति में एक सडक़ बाधित है। जिला शिमला में 15, सिरमौर में 41, सोलन में 23, ऊना में 13 और मंडी में एनएच-03 के साथ 288 सडक़ों पर वाहनों की आवाजाही थमी हुई है। इसके अलावा प्रदेश में 956 डीटीआर और 517 पेयजल परियोजनाएं भी प्रभावित चल रही है।

मानसून में अब तक 306 लोगों की मौत

राज्य में मौजूदा मानसून सीजन के दौरान 306 लोग मौत का ग्रास बन चुके है, जबकि 38 लोग अभी भी लापता है। इसमें बिलासपुर में 15, चंबा में 36, हमीरपुर में 16, कांगड़ा में 48, किन्नौर में 26, कुल्लू में 26, लाहुल-स्पीति में 8, शिमला में 28, सिरमौर में 14, सोलन में 20, ऊना में 18 और मंडी में 51 लोगों की मौतें हो चुकी है।

अब तक 41 बार बादल फटे

अब तक 77 बार फ्लैश फ्लड, 81 बार भूस्खलन और 41 बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। लाहुल-स्पीति में सबसे ज्यादा 42 बार फ्लैश फ्लड आया। कुल्लू में 15, शिमला में 14, लाहुल-स्पीति व मंडी में 12-12 और चंबा में 11 बार भूस्खलन हुआ। बादल फटने की 18 घटनाएं मंडी में, दस कुल्लू में, पांच चंबा में, शिमला व लाहुल-स्पीति में तीन-तीन और किन्नौर में एक बार दर्ज हुई हैं। बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर में ऐसी कोई घटना नहीं हुई।

2394 करोड़ की चपत

राज्य में नुकसान का आंकड़ा 2394 करोड़ से पार हो चुका है। राज्य में अभी तक हुए नुकसान का आंकलन 2394.28 करोड़ लगाया जा रहा है। प्रदेश में मंडी मे सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इसके अलावा कांगड़ा, शिमला, चंबा में भी बारिश ने जमकर नुकसान किया है।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने बताया कि धुंधी के पास भूस्खलन होने से सडक़ बंद हो गई थी, जिसे बहाल कर लिया गया है। पुलिस जवान ट्रैफिक सुचारू रखने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं। केलंग डीएसपी रश्मि शर्मा ने बताया कि लाहुल के तेलिंग नाले में बाढ़ आने से सडक़ बंद है, जिसे बीआरओ बहाल कर रहा है। शिंकुला, बारालाचा व खरदूंगला सहित समस्त ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी हुई है।

बिलासपुर में 100 करोड़ बहा ले गई बरसात

बिलासपुर। जिला बिलासपुर में बरसात का मौसम 100 करोड़ से अधिक का नुकसान लील गया है। बारिश का कहर लगातार बरप रहा है। बरसात के मौसम में लोक निर्माण विभाग को अब तक 75 करोड़ और जल शक्ति विभाग को 23 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। विद्युत बोर्ड के अधिकारी नुकसान का आकंलन करने में जुटे हुए हैं।

कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर थमे पहिए

कीरतपुर-मनाली फोरलेन सोमवार सुबह समलेटू के पास भूस्खलन होने से फिर से बंद हो गया। पुराने चंडीगढ़-मनाली हाई-वे पर भी रविवार रात को फिर से भूस्खलन हुआ है।

कालका-शिमला एनएच पर मलबे के ढेर

कालका-शिमला नेशनल हाई-वे पर सनवारा के समीप पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरे।इसके अलावा चंडी-बढ़लग-पट्टा महलोग में सडक़ों भी पानी भर गया। सडक़ों ने नालों का रूप धारण कर दिया। चंडी-बढलग सडक़ पर डाकरा के समीप सडक़ पर पानी भर जाने के कारण बंद हो गई।

शिमला-मटौर एनएच एक घंटा बंद

डंगार चौक। राष्ट्रीय उच्च मार्ग 103 शिमला-मटौर लगभग एक घंटे तक बंद रहा। राष्ट्रीय उच्च मार्ग शिमला-मटौर 103 डंगार चौक से एक किलोमीटर आगे गांव हरित्लयांगर में पहाड़ी से चीड़ के पेड़ गिरने के कारण दोपहर के समय बजे बंद हुआ और एक घंटा बंद रहा।

नालागढ़ में जमीन धंसने से हडक़ंप

नालागढ़। मूसलाधार बारिश ने पूरे इलाके को डर का माहौल है। सबसे गंभीर स्थिति इस बार गुज्जरहट्टी गांव में सामने आई है, जहां जमीन धंसने से कई घरों और दुकानों को खतरा पैदा हो गया है। गांव के प्राथमिक स्कूल के पीछे और बगल की पहाड़ी से लगातार मिट्टी खिसक रही थी। रविवार देर रात तक स्कूल परिसर की ज़मीन धंसने लगी और दीवारों में दरारें आ गईं। इस खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने सोमवार सुबह स्कूल को एहतियातन खाली करवा दिया।

: *हिमाचल पर भारी अगले 24 घंटे और बिगड़ेंगे हालात; हो जाएं सावधान, रेड अलर्ट जारी* 

चारों तरफ नजर आ रही तबाही

न घर बचे, न खेत, न सडक़ें

हिमाचल में बारिश अब सिर्फ बूंदों की नहीं रही यह डर, बेबसी और आंसूओं का सैलाब बन चुकी है। हिमाचल इन दिनों कुदरत का वो प्रकोप झेल रहा है, जिसनें सबको डरा दिया है। आसमान से लगातार बरसाती आफत ने न केवल पहाड़ों की खूबसूरती को ढक दिया है, बल्कि लोगों के दिलों में डर और असुरक्षा भी भर दी है। हिमाचल में आज दिन भर बारिश होती रही। आज हिमाचल के 3 जिले रेड अलर्ट पर थे, जिसका खूब असर देखा। कहीं घर गिरे, तो कहीं सडक़ें टूटी, लेकिन ये आफत अभी थमेंगी नहीं क्योंकि हिमाचल पर अगले 24 घंटे बहुत भारी है, 26 अगस्त के लिए हिमाचल के चंबा और कांगड़ा के लिए रेड अलर्ट जारी हुआ है, तो वहीं मंडी और कुल्लू में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट दिया गया है,जबकि ऊना, विलासपुर, हमीरपुर और लाहौल-स्पीति जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।

जाहिर है हिमाचल में यह बारिश तबाही लेकर आई है। प्रदेश में सोमवार सुबह तक तीन नेशनल हाईवे सहित 628 सडक़ें बंद रहीं। इसके अतिरिक्त 1500 से ज्यादा बिजली ट्रांसफार्मर व 150 से ज्यादा जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हैं। मंडी, कुल्लू व चंबा जिले में सबसे अधिक सडक़ें प्रभावित हंै। प्रदेश में इस मानसून सीजन में नुकसान का कुल आंकड़ा 2,34,862.66 लाख रुपए पहुंच गया है। वहीं सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है। 20 जून से 24 अगस्त तक 303 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 360 लोग घायल हुए हैं। 37 लोग अभी भी लापता हैं। इस दौरान 148 लोगों की सडक़ हादसों में मौत हुई है। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ से अब तक 3,556 कच्चे-पक्के घरों, दुकानों को क्षति हुई है। 2,766 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,833 पालतु पशुओं की मौत हुई है।

हिमाचल में लगातार हो रही बारिश से नदी नाले उफान पर हैं। कुल्लू में व्यास और पार्वती नदी में पानी का जलस्तर बढ़ गया है। लोगो को चिंता सताने लगी है ऐसे में जिला प्रशासन ने नदी नाले से दूर रहने के लिए एडवायजरी जारी की है लगातार बढ़ रहे व्यास नदी के जलस्तर स्तानीय लोगों में डर सताने लगा है। दूसरी और हमीरपुर में नादौन शहर के साथ सटी बेला पंचायत में वर्षा के कहर के कारण करीब आधे गांव में जल भराव हो जाने से दर्जनों घरों के पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने का खतरा मंडरा रहा है। लगातार हो रही वर्षा के कारण आधकांश लोगों ने रविवार की रात बैठ कर काटी है। क्रिकेट स्टेडियम के निकट घरों में इतने इतना पानी आ गया कि फायर ब्रिगेड को बुलाना पड़ा। कई जगह भारी नुकसान हुआ. सडक़े जलमग्न हो गई, आज भी इस गांव के लोग खौफ में हैं।

वहीं उपमंडल स्वारघाट की ग्राम पंचायत मझेड़ के गांव मझेड़ में दो दिन से लगातार बारिश से रणजीत सिंह शर्मा का मकान गिरने से लाखों रुपए का नुकसान हो गया है। रणजीत सिंह खेती बाड़ी का काम करता है। इसने बड़ी मुश्किल से पैसा पैसा इकठ्ठा कर मकान बनाया था। उन्होंने आठ कमरे और एक बरामदा बना रखा था। जो भारी बारिश की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया है। कहा जा रहा है कि मकान के ऊपर लोक निर्माण विभाग की सडक़ जाती हैं। इस सडक़ का सारा पानी उसके घर ऊपर आने से भूस्खलन होने की वजह से ये सारा नुकसान हुआ है।

इसी तरह प्रदेश में कई और गरीब परिवार हैं…कई गांव हैं जिनपर खतरा मंडरा रहा है। कई जगह सेब के बाग़ानों को तेज बारिश ने तहस-नहस कर दिया। किसानों की आंखों में आंसू हैं। पूरे साल की मेहनत कुछ ही घंटों में बह गई।

चंडीगढ़- मनाली नेशनल हाईवे समेत कई महत्वपूर्ण मार्ग भूस्खलन के कारण ठप पड़े हैं। जगह-जगह गाडिय़ां घंटों जाम में फंसी हैं। भारी बारिश ने प्रयटन कारोबार को पूरी तरह से ठप कर दिया है। सैलानी तो दूर हम हिमाचल के स्थानीय लोग भी कह रहे हैं कि बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही और पहाड़ खिसकते देख डर लग रहा है।

सरकार और प्रशासन हालात पर लगातार नजऱ बनाए हुए हैं… प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है और उन्हें भोजन व आवश्यक सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन फिर भी ये जाता हुआ हिमाचल कई परिवारों को जख्म दे गया है, इस वक्त सिर्फ एक ही अपील की जा रही है सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें।

मौसम विभाग ने साफ कहा है कि हिमाचल में 31 अगस्त तक इसी तरह से बारिश रहने के आसार हैं। भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जाहिर है हिमाचल के पहाड़ इस वक्त दर्द में हैं.. यह मुश्किल घड़ी सिर्फ हिमाचल की नहीं, बल्कि हर उस दिल की है जो इन पहाड़ों से जुड़ा है। जब घर उजड़ते हैं और फसलें बहती हैं, तो सिर्फ मिट्टी नहीं, लोगों के सपने भी टूटते हैं। इस वक्त ज़रूरत है कि सावधान रहने की। कुदरत को कोसने की बजाय गलतियों से सीख लेने की और पर्यावरण को बचाने की क्योंकि पहाड़ तभी मुस्कुराते हैं जब यहां के लोग सुरक्षित हों। और ये तभी होगा जब हम यहां के प्रकृति को बचा कर रखेंगे। विकास के नाम पर विनाश को रोकेंगे।

: *सोलन के जेबीटी टीचर शशि पॉल को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड, हिमाचल के एकमात्र अध्यापक का चयन* 

 पांच सितंबर को दिल्ली में राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी सम्मानित

जब एक शिक्षक निष्काम भाव से अपने विद्यार्थियों के शैक्षणिक व सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्प होता है, तो उसे इन कर्मों का प्रतिफल भी अवश्य मिलता है। कुछ ऐसा ही प्रतिफल प्राप्त हुआ है जिला सोलन की राजकीय केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला शमरोड़ के जेबीटी शिक्षक शशि पॉल को। शशि पॉल को पांच सितंबर को दिल्ली में शिक्षक दिवस पर आयोजित किए जाने वाले समारोह में राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। वह पूरे हिमाचल प्रदेश से अकेले शिक्षक हैं, जिनका चयन इस अवार्ड के लिए हुआ है।

यह अवार्ड महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रदान करेंगी। उनके चयन से पूरे सोलन जिला में खुशी की लहर है। उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया है। सोलन जिला की रामशहर तहसील के गांव भिनी जोरी में पिता राम लाल व माता कौशल्या देवी के घर जन्मे शशि पॉल ने अपने शिक्षण करियर की शुरुआत 11 अगस्त, 2011 को प्राथमिक विद्यालय नियारी से बतौर जेबीटी शिक्षक शुरू की। शिक्षा के क्षेत्र में आने के साथ ही उन्होंने यह प्रण लिया कि वह अपने अध्यापन क्षेत्र में यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि कोई भी बच्चा, चाहे किसी भी पृष्ठभूमि का हो, पीछे न छूटे। सीमिति संसाधनों या फिर आर्थिक तंगी के चलते कोई भी होनहार अपनी जिंदगी में आगे बढऩे से रुक न जाए। शशि पॉल ने अपने 14 वर्ष के अध्यापन काल में यह सुनिश्चित बनाया कि सीमित संसाधनों के बीच बच्चों को परिवर्तनकारी शिक्षा मिल पाए। उन्होंने व्यक्तिगत अधिगत स्तरों के लिए बहुस्तरीय शिक्षण रणनीतियों को लागू किया।

सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए टीम वर्क पर फोकस किया। उन्होंने आनंददायक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कम लागत वाली शिक्षण सामग्री और संसाधनों का उपयोग किया। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने बच्चों को खेलों के प्रति रूझान बढ़ाने के लिए प्रेरित किया और कुठाड़ प्राथमिक स्कूल में शतरंज और बैडमिंटन का प्रशिक्षण भी बच्चों को दिया। नतीजा यह रहा कि उनका प्रशिक्षण प्राप्त कर बच्चे न केवल जिला, बल्कि राज्यस्तर पर भी पहुंचे। वर्तमान में राजकीय केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला शमरोड़ में सेवाएं दे रहे शशि पॉल ने स्कूल में बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने और अनुभावात्क शिक्षण को पहल देते हुए स्कूल में 10 कम्प्यूटरों वाली एक आधुनिक आईसीटी लैब स्थापित करने में मदद की। उन्होंने सिंगापुर के शिक्षा मॉडल से प्रेरित होकर मूल्य आधारित और वास्तविक जीवन की शिक्षा को बढ़ावा दिया। राष्ट्रीय शिक्षा अवार्ड के लिए चयनित होने पर शशि पॉल ने कहा कि यह अवार्ड परिवार सहित उन सभी के लिए है, जिन्होंने इस पूरे सफर में मेरा सहयोग किया। उनके बिना यह संभव नहीं था। विशेष सहयोग शिक्षा विभाग का है, जिन्होंने मेरी सोच को समर्थन दिया। इसके अतिरिक्त एनसीईआरटी, एससीईआरटी में लगने वाली कार्यशालाओं व वर्ष 2024 में सिंगापुर विजिट से भी बहुत कुछ सीखने को मिला है।

डिजिटल लर्निंग व ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से जगाई लौ

शशि पॉल का विजन कुछ अलग करने का था। जब मार्च 2020 में लॉकडाऊन लगा, तो उन्होंने पांच अप्रैल से ही व्हाट्सऐप व गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कीं। उन्होंने देखा कि प्राथमिक स्तर के कई बच्चे जवाहर नवोदय विद्यालय सहित अन्य प्रतियोगी व छात्रवृत्ति परीक्षाओं को पास करने में असहज महसूस करते हैं। इसको देखते हुए उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रदीप कुमार के साथ मिलकर निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग शुरू की। इसके दीर्घकालिक परिणाम सामने आए और वर्ष 2021 से 2025 तक उनके 211 छात्रों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए हुुआ है। वहीं 24 छात्रों को कुल एक लाख 80 हजार की छात्रवृत्तियां प्राप्त हुई हैं।

: *बारिश का कहर जारी, मंडी-कांगड़ा समेत आधे से ज्यादा हिमाचल में आज भी शिक्षण संस्थान बंद* 

सीएम की अपील, जिला प्रशासनके निर्देशों की पालना करें लोग

भारी वर्षा की चेतावनी के मद्देनजर मंगलवार को बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, मंडी, ऊना, सोलन और कांगड़ा जिला के समस्त शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। इसके अलावा कुल्लू में कुल्लू उपमंडल, मनाली व बंजार में भी अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए अपने जिला में प्रशासन द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने जिला के उपायुक्त को भी निर्देश दिए हैं कि यदि स्थितियां ठीक न हों, तो शिक्षण संस्थानों में बच्चों को न बुलाया जाए। मुख्यमंत्री ने लोगों से किसी भी आपातकालीन स्थिति से बचने के लिए नदियों और नालों के पास न जाने का आग्रह किया है। मौसम विभाग द्वारा राज्य में आगामी 24 घंटों के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का लोगों को पालन करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिला प्रशासन को भू-स्खलन, सडक़ अवरोध और अचानक बाढ़ की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि लोगों को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े और आवश्यक सेवाओं का सुचारू संचालन भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चंबा की मणिमहेश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के निधन पर शोक व्यक्त किया है। शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिवारजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। खराब मौसम के कारण मणिमहेश यात्रा को अस्थाई तौर पर स्थगित किया गया है। इसके अतिरिक्त पठानकोट और जम्मू-कश्मीर के डोडा के जिला उपायुक्तों से अनुरोध किया गया है कि मौसम की स्थिति सामान्य होने तक तीर्थयात्रियों को संबंधित जिलों में ही रोककर रखें।

: *प्रदेश में अगस्त में सामान्य से 44 प्रतिशत अधिक बरसा अंबर, इन दो जिलों में दोगुना झमाझम* 

300 एमएम के पार हुआ बारिश का आंकड़ा, तीन जिला में औसत से दोगुना झमाझम

प्रदेश में अगस्त माह में बारिश का ग्राफ 300 एमएम के आंकड़े को पार कर गया है। अगस्त में अब तक प्रदेश में बारिश का औसत आंकड़ा 220.9 एमएम रहता है, जबकि इस बार 317.6 एमएम बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि सामान्य से 44 प्रतिशत अधिक है। ऊना और कांगड़ा जिला में बारिश का 600 एमएम से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि अन्य तीन जिलों में भी बारिश का ग्राफ 500 एमएम को पार गया है। सिर्फ लाहुल-स्पीति जिला को छोड़ बाकि प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश हो रही है। तीन जिलों में बारिश का ग्राफ औसत से दोगुना से भी ज्यादा दर्ज किया जा चुका है। सबसे अधिक 693 एमएम बारिश जिला ऊना में दर्ज की गई है, जो कि औसत 319 एमएम की तुलना में 117 प्रतिशत अधिक है। जिला कांगड़ा में 629.8 एमएम बारिश हुई है, जो औसत 549.5 एमएम से 15 फीसदी अधिक है।

जिला सोलन में बारिश का ग्राफ 525.7 एमएम पहुंच चुका है जो कि सामान्य 245.4 एमएम से 114 प्रतिशत अधिक है। जिला कुल्लू में 332.3 एमएम बारिश दर्ज की जा चुकी है और यह आंकड़ा औसत 156.6 एमएम से 112 फीसदी ज्यादा है। जिला मंडी में बरसात का कहर लगातार जारी है और अब तक यहां 555.5 एमएम मेघ बरस चुके हैं जो कि सामान्य 345.8 एमएम से 61 प्रतिशत अधिक हैं। जिला हमीरपुर में बारिश का ग्राफ 525.7 एमएम पहुंच गया है, जो कि औसत 342.9 एमएम की तुलना में 52 प्रतिशत अधिक है। जिला बिलासपुर में 485.1 एमएम बारिश् हुई है जो कि औसत 263.6 मिमी की तुलना में 84 प्रतिषत अधिक है। जिला चंबा में बारिश का आंकड़ा 362.6 एमएम रहा है जो कि औसत 254.7 मिमी से 42 प्रतिशत ज्यादा है। जिला किन्नौर में 104 एमएम बारिश हुई है जो कि औसत 65.5 एमएम से 59 फीसदी अधिक है। अगस्त माह में जिला शिमला में बारिश का आंकड़ा 333.1 एमएम रहा है जो कि औसत 169 एमएम की तुलना में 97 प्रतिषत ज्यादा है। जिला सिरमौर में 414.2 एमएम बारिश दर्ज की गई है, जो कि सामान्य 341.3 मिमी से 21 फीसदी अधिक है। सिर्फ लाहुल-स्पीति में बारिश का ग्राफ सामान्य से कम रहा है। यहां अब तक 64.7 एमएम बारिश हुई है, जो औसत 97.1 मिमी से 33 प्रतिशत कम है।

: *Manimahesh Yatra 2025 : फिलहाल अस्थायी तौर पर रोक, ये रहा कारण* …

बारिश से चंबा-भरमौर सडक़ पर जगह-जगह भूस्खलन से आवाजाही ठप

प्रशासन ने जारी किए आदेश, जिला मुख्यालय से आगे न आएं

जिला प्रशासन की ओर से बारिश के कारण बिगड़े हालातों के मद्देनजर मणिमहेश यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। साथ ही श्रद्धालुओं से बारिश के चलते मौसम के साफ न होने तक अपनी यात्रा को स्थगित करने का आह्वान किया है। यह जानकारी उपायुक्त चंबा मुकेश रेप्सवाल ने दी। बारिश के कारण चंबा-भरमौर मार्ग के विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन एवं पत्थर गिरने की संभावनाओं के चलते श्रद्धालु तथा आमजन सुरक्षा के लिहाज से जिला चंबा मुख्यालय से आगे यात्रा न करें।

मणिमहेश यात्रा के पैदल आवाजाही वाले रास्ते पर भी बारिश के कारण फिसलन बढ़ गई है। उन्होंने तमाम एसडीएम को मौसम से बिगड़े हालातों पर निगाह रखने के साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कदम उठाने को कहा है। उन्होंने एसपी चंबा को कानून व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कारगर कदम उठाने को कहा है। उपायुक्त ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के टोल फ्री नंबर 9816698166 तथा 1077 पर भी संपर्क किया जा सकता है। उपायुक्त लाहुल-स्पीति किरण भडाना ने जोबरंग गांव से मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अपनी यात्रा योजनाओं को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दें। चंबा जिला प्रशासन के आगामी आदेश आने के बाद ही लोगों को जाने की परमिशन दी जाएगी।

: *Monsoon Session : सदन में बोले सीएम सुक्खू; टाइम पास सरकार नहीं, फैसले लेने की ताकत होनी चाहिए* 

 हाथ बांधने से नहीं रुकेंगे, जारी रहेगा विकास

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रस्ताव पर सीएम का जवाब

राजीव गांधी प्राकृतिक खेती होगा योजना का नाम

मुख्यमंत्री बोले, तीन साल का हिसाब देगी प्रदेश सरकार

हम सत्ता सुख के लिए नहीं सिस्टम बदलने के लिए आए

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार में फैसले लेने की ताकत होनी चाहिए, न कि टाइम पास सरकार हो। उन्होंने कहा कि उनके हाथ बांधने की बहुत कोशिश की गई, लेकिन वह रुकेंगे नहीं, क्योंकि हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार फैसले लेती है, फिर चाहे कोई भी क्षेत्र हो। सरकार का हरेक मंत्री व्यवस्था परिवर्तन का हिस्सा है और सभी मंत्रियों के विभागों में व्यवस्था परिवर्तन हुआ है। सदन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गए प्रस्ताव का जवाब आने के बाद हस्तक्षेप करते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि प्राकृतिक खेती को चलाने के लिए एडिशनल डायरेक्टर स्तर का अधिकारी लगाया जाएगा, वहीं इस योजना का नाम राजीव गांधी प्राकृतिक खेती योजना होगा। उन्होंने कहा कि अगले साल इस योजना का स्वरूप और ज्यादा बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पूर्व सरकार नहीं जो फैसले नहीं ले पाती थी। वर्तमाान सरकार तीन साल का हिसाब भी देगी और यह भी बताएगी कि उसके लिए फैसलों से हिमाचल कैसे बदला है। सीएम ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं, जिसमें हिमाचल तीसरे स्थान पर पहुंच गया हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स स्तर की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिसके लिए बड़ा अभियान चल रहा है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे सिस्टम को बदलने के लिए आए हैं, सत्ता सुख के लिए नहीं। हमारे हाथ जितने बांध दें, फिर भी कर्मचारियों को वित्तीय लाभ दे रहे। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का कंसेप्ट हिमाचल की तकदीर बदल देगा। उन्होंने बताया कि पूर्व राज्यपाल आचार्य देवव्रत का उन्हें फोन आया, जिन्होंने कहा कि जिस सोच व लगन के साथ आपने इस खेती को बढ़ावा दिया है, उससे हिमाचल पूरे देश को रास्ता दिखाएगा। उन्होंने सदन में ऐलान किया कि तीन हजार टैक्सियों को ई-टैक्सी में बदलने जा रहे हैं, जिसमें युवाओं को 40 फीसदी सबसिडी दी जाएगी। जल्दी ही ये टैक्सियां युवाओं को सौंपी जाएंगी। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक हिमाचल को ग्रीन राज्य के रूप में विकसित करेंगे। सीएम ने कहा कि शिक्षा व स्वास्थ्य के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था हमारा तीसरा केंद्र बिंदू है। दो साल में सरकार ने कई प्रयास किए हैं, जिनके नतीजे आने शुरू हो चुके हैं। 

चार साल बाद आई कैंपा फंड पर कैग रिपोर्ट

हिमाचल विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री ने वन विभाग में प्रतिपूरक वनीकरण यानि कैंपा फंड के इस्तेमाल पर कैग की रिपोर्ट को रखा। कैग ने यह रिपोर्ट वर्ष 2016 से 2021 के बीच में बनाई है लेकिन चार साल के बाद 2025 में इसे सदन में रखा गया है। इसमें इस फंड के इस्तेमाल में बरती जा रही अनियमितताओं को उजागर किया गया है। रिपोर्ट को सदन में रखने में हो रही देरी पर कैग़ ने भी राज्य सरकार से मसला उठाया था।

: *लंबी-चौड़ी फौज में बाहर रह गए पुराने ‘सैनिक’ भाजपा की नई कार्यकारिणी में कई दिग्गजों को जगह नहीं* 

दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के समर्थकों को नहीं मिली जगह

‘थी खबर गर्म के $गालिब के उड़ेंगे पुर्जे, देखने हम भी गए पर तमाशा न हुआ’। मिर्जा $गालिब का यह शेअर हाल ही में घोषित भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी पर सटीक बैठता है। दरअसल जिस तरीके से पार्टी कार्यकारिणी की लंबी-चौड़ी फौज का गठन हुआ और प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों से संबंधित विशेष लोगों को खामोश बिठा दिया गया, उसका रतिभर भी इल्म किसी को नहीं था। सबको साथ लेकर चलने वाली और अनुशासनात्मक मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी जिस लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है, उसमें कार्यकारिणी का यह गठन कहीं न कहीं लीकेज का काम भी नजर आ रहा है, जबकि जिस तरीके से पिछले कुछ समय से भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार होल्ड हो रहा था, तो माना जा रहा था कि बीजेपी इस बार ऐसी जंबो टीम तैयार करेगी जो अगले कई वर्षों तक विरोधियों को किनारे लगा देगी।

सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों हमीरपुर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की समीरपुर में पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. धूमल से इसके बारे में मंत्रणा भी हुई है। दरअसल जयराम सरकार में हमीरपुर जिला के अलावा अन्य जगहों से भी जो भी वरिष्ठ नेता बोर्डों निगमों में रहे थे, उनमें एकाध को छोडक़र किसी को स्थान नहीं मिला। यही नहीं, पूर्व भाजपा सरकार में मंत्री रहे पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा कार्यकारिणी में उनके परिवार से किसी को भी स्थान न मिल पाने पर अपने चिरपरिचित अंदाज में संगठन के शीर्ष नेता को डेमो देने की भी खबर है। उधर, 2017 के बाद से खुद को घोर विपक्ष में देखते आए पार्टी के पुराने और कर्मठ कार्यकर्ता कब तक अनदेखी को झेलेंगे, यह तो अभी कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन मौजूदा हालात यह इशारा जरूर कर रहे हैं कि वर्ष 2027 के चुनाव से पूर्व कार्यकर्ताओं में धधकता लावा ज्वालामुखी बनकर फूटेगा जरूर। —एचडीएम

समीरपुर को लेकर दोहरा मापदंड

चौंकाने वाली और दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ तो पार्टी संगठन को माइनस धूमल आगे बढ़ाने में लगी हुई है, जबकि दूसरी ओर पिछले कुछ महीनों से समीरपुर को लगातार तवज्जो दी जा रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रदेश के शीर्ष नेताओं की लगातार समीरपुर में हाजिरियां यह बताने और दर्शाने के लिए काफी हैं कि प्रो. धूमल के बिना पार्टी के लिए सियासत का यह भवसागर पार करना आसान नहीं है। स्वास्थ्य कारणों के चलते भले ही धूमल फील्ड में ज्यादा सक्रिय नहीं हैं, लेकिन प्रदेश भर में बैठे उनके समर्थक आज भी हर मसले पर उनकी राय लेते हैं।

कांग्रेस पद्धति की झलक

भाजपा में पिछले कुछ समय से जो चला है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि पार्टी अब कांग्रेस संगठनात्मक पद्धति को अपना रही है। यानी जो भी दूसरी ओर से हताश-निराश आए, उसे सीधे शिखर की ओर ले चलो। हालांकि पिछली बार कांग्रेस ने प्रदेश में जो चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का मॉडल अपनाया, उसके पीछे हर धड़े को साथ लेकर चलाने की रणनीति थी और वो चुनावों में सफल भी रहा, लेकिन भाजपा इस मॉडल को अपने तरीके से इस्तेमाल करती हुई नजर आ रही है, जोकि केवल एक ही गुट को मजबूती देता हुआ नजर आ रहा है।

: *भारी बारिश से मरुभूमि राजस्थान जलमग्न, इन राज्योंं की हालत भी चिंताजनक* 

बाढ़ में घर-दुकानें डूबीं

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अगले सात दिनों के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। मॉनसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति के पास है। राजस्थान के कई इलाकों में पिछले दो दिन से भारी बारिश का दौर जारी है। प्रदेश में जयपुर, सीकर के कई इलाकों में पानी भर गया है। सीकर रेलवे स्टेशन पर ट्रैक डूब गया। उदयपुर में घर-दुकान बाढ़ के पानी में डूब गए हैं।

जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर 23 अगस्त से पानी भरा हुआ है। उत्तर प्रदेश में बारिश से चंदौली में घाघरा नदी पर बना मुसाहिबपुर बांध अचानक टूट गया। बांध का पानी पांच गांवों में घुस गया है। फर्रुखाबाद का भुडिय़ा भेड़ा गांव गंगा नदी की बाढ़ से टापू बन गया है। इसके चलते लोग नाव से आ-जा रहे हैं। उधर, उत्तराखंड में यमुनोत्री नेशनल हाईवे लैंडस्लाइड की वजह से बंद हो गया है। यह भूस्खलन बाणस के पास हुआ, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। वहीं, बिहार के पटना में सोमवार सुबह मूसलाधार बारिश हुई। इससे कई इलाकों में दो से तीन फुट तक पानी भर गया है। पश्चिम बंगाल की खाड़ी में ऊपरी हवाओं का चक्रवाती सर्कुलेशन बना हुआ है।

: *डीएलएड के लिए अभ्यर्थियों को एक और मौका, शिक्षा बोर्ड में इस डेट से होगी काउंसलिंग* 

दूसरे राउंड को 1046 सीटों के लिए 1825 उम्मीदवार शार्टलिस्ट, चार दिन चलेगा दौर

दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन (डीएलएड) 2025-27 के लिए सरकारी और निजी डाइट संस्थानों में रिक्त कुल 1046 सीटें भरने के लिए दूसरे चरण की काउंसिलिंग 28 अगस्त से शुरू होगी। बोर्ड मुख्यालय में सुबह 10 बजे से शुरू होने वाली यह चार दिवसीय काउंसिलिंग पहली सितंबर तक चलेगी। इस दौरान शिक्षा बोर्ड ने 45 फीसदी तक अंक हासिल करने वाले 1825 के करीब अभ्यर्थियों को शार्टलिस्ट किया है। इसमें सरकारी डीएलएड संस्थानों में 161, निजी नॉन सबसिडाइज्ड में 629 व निजी में सबसिडाइज्ड 356 रिक्त सीटों पर दूसरे चरण की काउंसिलिंग प्रक्रिया करवाई जा रही है। बोर्ड सचिव डा. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि दूसरे चरण की काउंसिलिंग के पहले दिन 28 अगस्त को 350, 29 अगस्त को 500, 30 अगस्त को 600 और पहली सितंबर को 375 अभ्यर्थियों को बुलाया गया है।

उन्होंने काउंसिलिंग में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को निर्देश दिए हैं कि वे बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध मेरिट लिस्ट एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित तिथि पर ही काउंसिलिंग के लिए बोर्ड मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस दौरान अभ्यर्थियों को अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्रों, हिमाचल मूल निवास प्रमाण पत्र तथा आरक्षित श्रेणी-उपश्रेणी से संबंधित प्रमाण पत्रों एवं आवश्यक शपथ पत्रों की मूल प्रति व सत्यापित छायाप्रतियों के साथ बोर्ड वेबसाइट पर उपलब्ध बायोडाटा फॉर्म की प्रति को भरकर लाना होगा। उन्होंने बताया कि सीट आबंटन के समय अभ्यर्थी के वांछित संस्थान में सीट उपलब्ध होने पर ही मेरिट के आधार पर अभ्यर्थी को केवल एक बार सीट आबंटित की जाएगी। इसलिए अभ्यर्थियों को वांछित संस्थान का चुनाव सीट की मांग करने के पूर्व सुनिश्चित करना होगा।

काउंसिलिंग शेड्यूल

तारीख सीटें

28 अगस्त 350

29 अगस्त 500

30 अगस्त 600

पहली सितंबर 375

: *कुल्लू में भारी बारिश से सडक़ेें बंद, बस पर गिरी चट्टान* 

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश को देखते हुए जिला कुल्लू के सभी शिक्षण संस्थानों को सोमवार 25 अगस्त को बंद रखने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जिला कुल्लू में भारी बारिश के चलते विभिन्न इलाकों में सडक़े बंद पड़ी हुई हैं और जगह-जगह भूस्खलन का भी खतरा बना हुआ है। बीती शाम के समय भुंतर-मणिकर्ण सडक़ मार्ग में भूस्खलन के चलते एक बड़ी चट्टान बस पर आ गिरी, जिस कारण बस में सवार एक व्यक्ति को चोट आई है, जिसका अब ढालपुर अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।

इसके अलावा बंजार में भी पहाड़ी से पत्थर गिरने के चलते एक कार बुरी तरह से एक क्षतिग्रस्त हुई है। भूस्खलन के चलते ओट-बंजार सडक़ वाहनों की आवाजाही के लिए बंद है। लग घाटी की पांच पंचायत को जोडऩे वाला सडक़ मार्ग भी अभी तक बहाल नहीं हो पाया है। ऐसे में सोमवार को भी खराब मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा सभी शिक्षण संस्थानों को एक दिन के लिए बंद किया गया है। डीसी कुल्लू तोरुल एस रवीश ने बताया कि सभी उपमंडल से एसडीएम से मिली रिपोर्ट के अनुसार भारी बारिश के चलते यहां पर सडक़े बंद पड़ी हुई है और नदी नाले भी उफान पर हैं। ऐसे में लोग नदी-नालों के किनारो का रुख बिल्कुल भी ना करें।

: *विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष को लॉबिंग, प्रबोध सक्सेना, रामसुभग, संजय गुप्ता आवेदन के इच्छुक* 

तीन बड़े अफसरों में मुकाबला; प्रबोध सक्सेना, रामसुभग, संजय गुप्ता आवेदन के इच्छुक

हिमाचल सरकार ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन पद को भरने के लिए आवेदन मांगे हैं और 30 अगस्त तक ये आवेदन हो सकते हैं, लेकिन इस बार परिस्थितियों इस कद्र बदली हुई हैं कि अफसरशाही के टॉप थ्री ब्यूरोक्रेट्स में इस पद की लड़ाई होने वाली है। सब अपनी अपनी तरह से लॉबिंग कर रहे हैं और अब फैसला मुख्यमंत्री को करना है। इस पद पर इससे पहले बीबीएमबी से आए डीके शर्मा तैनात थे। पूर्व सरकार में जब उनकी नियुक्ति हुई, तब उनके साथ पूर्व मुख्य सचिव विनीत चौधरी भी पैनल में शामिल थे, लेकिन उनका चयन नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार पूर्व मुख्य सचिव रामसुभग सिंह, वर्तमान मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और बिजली बोर्ड के अध्यक्ष संजय गुप्ता, ये तीनों ही इस पद के दावेदार हैं। लॉबिंग की इसी लड़ाई में बिजली बोर्ड अध्यक्ष संजय गुप्ता ने राज्य सरकार को एक शिकायत पत्र भी दे दिया है। यह शिकायत इस पद को भरने के लिए निकाले गए विज्ञापन को लेकर है।

संजय गुप्ता ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 84 और 85 का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि जिस तरह से बिना सेलेक्शन कमेटी बनाए आवेदन निकल गया है, यह नियमों के अनुसार नहीं है। इस पद के लिए सिलेक्शन कमेटी में हाई कोर्ट के सीटिंग या रिटायर जज के अलावा मुख्य सचिव और सीईआरसी के अध्यक्ष या उनके नॉमिनी हो सकते हैं। हालांकि संजय गुप्ता की ओर से यह रिप्रेजेंटेशन मिलने के बाद ऊर्जा विभाग के सचिव ने इसे विधि विभाग की सलाह के लिए भेज दिया है। इन तीनों में सबसे सीनियर रामसुभग सिंह हैं, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार हैं। इसके बाद 1988 बैच के संजय गुप्ता आते हैं, जो वर्तमान में राज्य बिजली बोर्ड के अध्यक्ष हैं। फिर वर्तमान मुख्य सचिव और 1990 बैच के आईएएस प्रबोध सक्सेना हैं, जिन्हें मुख्य सचिव के पद पर छह माह की एक्सटेंशन मिल चुकी है, जो सितंबर में खत्म हो रही है।

: *एचआरटीसी को झटका…बीच राह फंसी 14 बसें* 

बारिश के कहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त, रोड बंद होने से निगम को एक दिन में लाखों का घाटा

कार्यालय संवाददाता-कुल्लू

बारिश का कहर सोमवार को जहां आम जनजीवन पर पड़ा। वहीं, प्राकृतिक आपदा के तांडव ने हिमाचल पथ परिवहन निगम प्रबंधन कुल्लू को भी भारी झटका दिया है। बस रूट्स प्रभावित होने पर एचआरटीसी को एक दिन में लाखों रुपए का नुकसान हो गया है। हालांकि सोमवार को कुछ बस रूट्स बहाल हो गए थे, लेकिन फिर झमाझम बारिश ने सडक़ों को बाधित किया और बस रूट्स फिर से बंद हो गए हैं। रूट्स प्रभावित होने से हर दिन एचआरटीसी कुल्लू को भारी घाटा हो रहा है। जहां सोमवार को ग्रामीण रूटों पर बस सेवाएं प्रभावित रही। वहीं, लंबे रूटों पर पर्यटन नगरी मनाली और कुल्लू से भी कोई बस सेवा नहीं चल पाई।

मंडी की तरफ जो लंबे रूटों पर चलने वाली बसें फंसी हैं, उन्हें मंडी बस स्टेंड से ही दिल्ली, चंडीगढ़, हरिद्वार, शिमला के लिए चलाया गया। बारिश से सडक़ें बंद होने पर एचआरटीसी निगम को भी बसों का संचालन करना मुश्किल हो गया है। यही नहीं कई बसें ग्रामीण रूटों पर फंसी हुई है। हिमाचल पथ परिवहन निगम कुल्लू डिपो प्रबंधन की जानकारी के अनुसार लोकल और लंबे रूट्स कुल 223 हैं। सोमवार को इनमें से 112 रूट्स अफेक्टेड रहे। जबकि 61 रूटों पर बस सेवाएं पूरी तरह से बंद रही। इसके अलावा 14 एचआरटीसी की बसें ग्रामीणों रूटों पर ही बारिश के कारण फंसी हुई हैं। जबकि 37 रूटों पर चलने वाली बसों को आधा रूट तक ही चलाया है। जहां तक सडक़ ठीक है वहीं तक चलाया गया। उधर, एचआरटीसी के उपमंडलीय प्रबंधक डीके नारंग का कहना है कि एचआरटीसी कुल्लू के काफी रूट्स प्रभावित हुए हैं। जिससे एक दिन में एचआरटीसी को लाखों का घाटा हुआ है।

भारी बारिश से थमे बसों के पहिए

बता दें, एचआरटीसी कुल्लू के पास कुल 187 बसें हैं। यह बसें 223 रूटों पर चलती हैं। लेकिन बरसात के कारण बस रूट्स प्रभावित हो गए हैं। ऐसे में एचआरटीसी को भारी घाटा हो रहा है। जानकारी के अनुसार सोमवार को एचआरटीसी कुल्लू को बस रूट्स सस्पेंड और अफेक्टेड होने पर लगभग छह लाख 89528 रुपए का घाटा पड़ रहा है। पिछले कई दिनों से एचआरटीसी को लाखों रुपए का नुकसान बरसात के कारण हो रहा है। मनाली से लंबे रूटों पर चलने वाली वोल्वो बसों से ही एचआरटीसी कुल्लू की अच्छी कमाई होती थी, लेकिन इस बरसात ने एचआरटीसी की कमाई में कटौती कर दी है।

: *भारी बारिश से सहमा हमीरपुर; मकान गिरे, स्कूल बंद* 

आईपीएच के 20 करोड़ बहे, पीडब्ल्यूडी के 8 करोड़ गर्क, विद्युत बोर्ड को 25 लाख का झटका, दो मकान, 10 गोशालाएं ध्वस्त, 12 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त

नीलकांत भारद्वाज-हमीरपुर

जिला हमीरपुर में रविवार दोपहर से जारी बारिश के क्रम से जहां करोड़ों का नुकसान 24 घंटों में हुआ है वहीं जनजीवन पूरी तरह से अस्तव्यस्त हो गया है। हमीपुर शहर में बारिश के चलते कई दुकानें बंद वरहीं। जिले में ऐसा कोई भाग नहीं है जो बारिश के कारण प्रभावित न हुआ हो लेकिन कुछ स्थान ऐसे हैं जहां अत्याधिक नुकसान आंका गया है। वहीं भारी बारिश के चलते जिलाधीश अमरजीत सिंह ने सरकारी स्कूल आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य संस्थानों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। बारिश के कारण जलशक्ति विभाग का सबसे अधिक 20 करोड़ का नुकसान आंका गया है। इसके अलावा जिले की 191 पेयजल स्कीमें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

बताया जा रहा है कि मात्र दर्जनभर पेयजल स्कीमें ही वर्किंग में हैं बाकियों को बहाल करने में विभाग के मुलाजिम लगे हुए थे। लोक निर्माण विभाग की बात करें तो करीब आठ करोड़ के नुकसान की बात कही जा रही है। जिला के कई हिस्सों में सडक़ें अवरुद्ध हो गई हैं प्रयास किए जा रहे हैं। विद्युत बोर्ड को बारिश के कारण 25 लाख का नुकसान हुआ है। जिलाभर में लगभग 40 बिजली के पोल क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। उधर, नादौन की बेला पंचायत में गांव के जलमग्न होने की सूचना है। नादौन में ही जलशक्ति विभाग की 40 पेयजल योजनाएं ठप हो गई हैं। उधर, बड़सर में शुक्करखड्ड के तेज बहाव में प्रवासी मजदूर फंस गया था जिसे कड़ी मशक्कत से रेस्क्यू किया गया। -एचडीएम

: *HP WEATHER : रेड अलर्ट के बीच हिमाचल में मानसून का कहर जारी, सात और मौतें* 

कुल्लू-मनाली में सबसे ज्यादा तबाही; 28 से ज्यादा घर, दुकानें और रेस्टोरेंट ब्यास में समाए, चंबा में सडक़ और मोबाइल-इंटरनेट सेवाएं ठप

ब्यास ने कई जगह निगली सडक़, जिला मुख्यालय से कटा मनाली मंडी के बालीचौकी में जमीन धंसने से गिरीं दो इमारतें सिल्ट ने रोकी डैहर पावर हाउस की टरबाइन, प्रोजेक्ट बंद पंडोह डैम के पांचों गेट खोलने से ब्यास नदी उफान पर राज्य में तीन एनएच के साथ बंद पड़ी हैं 677 सडक़ें अब तक 310 लोगों की मौत, 2454 करोड़ का नुकसान चंबा में सडक़ें बंद होने से मणिमहेश यात्री जगह-जगह फंसे

हिमाचल प्रदेश में मानसून ने रेड अलर्ट के बीच भारी तबाही मची है। इस बार कुल्लू और मनाली में बड़ा नुकसान हुआ है, जिससे लोग सहमे हुए हैं। पिछले 24 घंटों में प्रदेश में बरसात के चलते सात और लोगों की जान चली गई है। इसमें बिलासपुर में एक, कांगड़ा में एक, किन्नौर में दो और सोलन में तीन मौतें दर्ज की गई हैं। प्रदेश में बरसात के कारण मौतों का कुल आंकड़ा 310 तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए मंडी और शिमला जिला के कुछ स्थानों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है, जबकि दूसरे जिलों में भी हलकी और मध्यम बारिश होने की आशंका है। फिलहाल प्रदेश में तीन एनएच सहित कुल 677 सडक़ों पर आवाजाही पूरी तरह से बाधित है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार रात से मची तबाही के कारण कुल्लू व मनाली में 28 से ज्यादा घर, दुकानें और रेस्टोरेंट ब्यास नदी व दूसरे नालों में समा गए। 40 से अधिक घरों पर अभी भी खतरा मंडरा रहा है। कुल्लू के अखाड़ा बाजार में दो घर, ओल्ड मनाली में छह ढाबे व तीन घर, रामशीला में तीन मकान, बाहंग में दो रेस्टोरेंट और चार दुकानें पानी में बह गए हैं। कुल्लू में ब्यास का पानी डोहलू टोल प्लाजा तक पहुंच गया। कुल्लू और मनाली के बीच सडक़ जगह-जगह ब्यास नदी में समा गई है। इससे मनाली का कुल्लू जिला मुख्यालय से पूरी तरह संपर्क कट चुका है। मनाली में बेली ब्रिज के साथ लेफ्ट बैंक ब्रिज बह गया और ओल्ड मनाली को जोडऩे वाला पुल भी बह गया है। ब्यास के तेज बहाव से ग्रीन टैक्स बैरियर के पास सडक़ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है, जबकि बिंदु ढांक के पास मनाली-लेह मार्ग का एक हिस्सा नदी में समा गया।

कुल्लू की तरह मंडी में भी ब्यास नदी भारी नुकसान कर रही है। ब्यास का पानी पंचवक्त्र मंदिर के प्रांगण तक पहुंच गया। यहां पर भयूली कॉलोनी से लगभग 40 लोगों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। मंडी के बालीचौकी में सोमवार देर रात जमीन धंसने के बाद दो बिल्डिंग गिर गईं। इन बिल्डिंगों में 40 से ज्यादा दुकानें चल रही थीं। हादसे की आशंका को देखते हुए दोनों बिल्डिंगों को पांच दिन पहले ही खाली करवा लिया गया था। मंडी में दवाड़ा पुल भी नदी में समा चुका है। मंडी में डैहर पावर हाउस की टरबाइन सिल्ट ने रोक दी है और 990 मेगावाट का यह पावर प्रोजेक्ट बंद हो गया है। इसके साथ ही सिल्ट ने पंडोह-बग्गी टनल को भी जाम कर दिया है। पंडोह डैम में ज्यादा पानी आने के बाद पांचों गेट एक साथ खोल दिए गए हैं। इसके चलते ब्यास उफान पर आ गई है। तेज बारिश के कारण ब्यास की साहयक नदियां तीर्थन, लारजी, ऊहल, पार्वती और सैंज भी उफान पर चल रही हैं। ब्यास का रौद्र रूप देखकर मंडी प्रशासन अलर्ट हो गया है। उधर, चंबा जिला में सडक़ सेवाएं पूरी तरह से ठप पड़ी हुई हैं। मंगलवार को जिला मुख्यालय में मोबाइल व इंटरनेट सेवाएं बंद रहने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सिहुंता-चुवाड़ी, लाहुल-चुवाड़ी के अलावा जोत मार्ग तथा बनीखेत-चंबा और चंबा-तीसा मार्ग भी बंद पड़े हुए हैं। रास्ते बंद होने से मणिमहेश यात्री जगह-जगह फंसे हुए हैं। उधर, लाहुल-स्पीति की चंद्रताल में बर्फबारी का समाचार है। शिंकुला दर्रे पर भी हिमपात का क्रम जारी है। राज्य की 677 सडक़ें यातायात के लिए पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं। इनके साथ नेशनल हाइवे नंबर 03, 05 और 305 भी बंद हैं। राज्य में 1413 बिजली ट्रंासफार्मर बंद हो चुके हैं, वहीं 420 पेयजल योजनाएं बाधित हैं। राज्य में बरसात के चलते नुकसान का आंकड़ा 2454 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके साथ ही प्रदेश में बरसात से होने वाली कुल मौतों का आंकड़ा 310 तक पहुंच गया है। इनमें से बिलासपुर में 15, चंबा में 36, हमीरपुर में 16, कांगड़ा में 49, किन्नौर में 28, कुल्लू में 26, लाहुल-स्पीति में आठ, मंडी में 51, शिमला में 28, सिरमौर में 14, सोलन में 21 व ऊना में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सडक़ हादसों के शिकार लोग भी शामिल हैं।

: *देवता-डायनों के युद्ध का आ गया फैसला जानिए, इस बार किसके हिस्से आई जीत* 

देवता- डायनों के युद्ध का हो गया फैसला

जानिए इस बार किसके हिस्से में आई जीत

युद्ध में देवताओं को आई कई चोटें

उपचार करवाकर इंद्रुनाग पहुंचे अपने स्थान

इंद्रुनाग ने दिया भक्तों को बड़ा आशीर्वाद

क्षेत्र में सुख- शांति और खुशहाली का आशीर्वाद

हिमाचल प्रदेश में अलग अलग स्थानों पर बीते दिनों देवताओ और डायनों में एक के बाद एक कई युद्ध हुए.. और अब युद्ध का परिणाम सामने आ गया है..परिणाम क्या रहा है ये भी हम आपको बताएंगे लेकिन पहले आप ये जान लें कि युद्ध में कई देवताओं को चोटें आई हैं। युद्ध के बात धर्मशाला स्थित देवता इंद्रूनाग अपने स्थान पर वापस लौट आए हैं.. इंद्रूनाग के खनियारा पहुंचने पर विशेष पूजा-पाठ व खेलपात्र का भी आयोजन किया गया। खनियारा में ही अघंजर महादेव मंदिर के ठीक सामने स्थित बहन कोटसनी के घर में पहुंचकर प्राथमिक उपचार करवाकर इंद्रूनाग देवता छड़ी यात्रा व सैंकड़ों लोगों के जयकारे के साथ खनियारा स्थित अपने मंदिर में पहुंचे। धर्मशाला से हमारे संवाददाता नरेन और विनोद कुमार ने ग्राउंड जीरों से इस अदभुत द्रश्य को कैद किया है। देखिए ये खास रिपोर्ट

 विपिन, इंद्रूनाग मंदिर खनियारा के पुजारी

खैर दिन भर इंद्रुनाग के घर पर आज भीड़ लगी रही। भक्त गड़ बेसबरी से इंतजार करते रहे कि आखिर युद्ध का फैसला क्या होगा। ये साल आम लोगों के लिए कैसा रहने वाला है. आपको बता दे कि विधिवत पूजा अर्चना के बाद गुर के माध्यम से देवता ने इस बात का खुलासा कर दिया है कि इस बार के युद्ध में कौन जीता है. बता दें कि इस बार के युद्ध में देवभूमि में डायनों की जीत हुई है, यानि की डायनों से देवता हार गए हैं.. कई स्थानों पर मान्यता है कि डायनों का जीतना फसलों के लिए काफी अच्छा रहता हैं. मगर कई जगह काफी जान माल का नुकसान हो सकता हैं. हालांकि इंद्रुनाग ने गुर के माध्यम से ये आश्वासन लोगों को दिया है कि क्षेत्र में सुख-शांति व खुशहाली रहेगी। इंद्रूनाग ने अपने गुर के माध्यम से क्षेत्र में बारिश होने से नुक्सान न होने की बात कही है, और रक्षा करने का भी आशिवार्द भक्तों को दिया है।

यहीं नहीं इंद्रूनाग के गुर ने खेल पात्र के दौरान बताया कि डायनों से युद्ध के दौरान इंद्रूनाग देवता व उनके भाईयों को कितनी चोट आई थी. उन्होनें बताया कि तोरल नाग, मतड़ानाग को तीन-तीन व बुडू नाग को दो घाव लगे हैं, जबकि आधा दर्जन के करीब बरछे यानी भाले की मार भी लगी है। अब गुर के बताए अनुसार आगामी पांच दिनों तक मक्खन-चंदन लेप से इंद्रूनाग देवता का उपचार किया जाएगा। इसके बाद राधाष्टमी के पवित्र पर्व पर देवता मणिमहेश में स्नान करने जाएंगे। इसके साथ ही धौलाधार पर्वत श्रखंला में स्थित नागडल में भी स्नान करेंगे, इसके बाद थातरी के रास्ते सम्ब्रलाहड़ स्थित उखाड़ा मंदिर से चार सितंबर गुरूवार को भव्य खेल पात्र व पूजा पाठ के साथ खनियारा स्थित मंदिर में लाया जाएगा। जिसके बाद गुर ने तीन वर्ष में होने वाली इंद्रूनाग देवता की विशेष पूजा-पाठ करने की तैयारी करने के भी संकेत दे दिए हैं। जिसके बारे में अब गुरूवार को होने वाले खेल पात्र में ही स्पष्ट रूप से बताया जाएगा।. तब तक इंतजार करना होगा देवता के अगले संकते के बारे में. खैर फिलाहाल राहत यही हैं कि देवता इंद्रुनाग ने इलाके में सुख शांति की बात कही हैं।

: *आउटसोर्सिंग व्यवस्था से बेरोजगारों का शोषण गलत, जानिए क्या कहा सुप्रीमकोर्ट ने* …

सुप्रीम कोर्ट ने कहा; सरकार संवैधानिक नियोक्ता, न कि मार्केट प्लेयर

सरकार संवैधानिक नियोक्ता है और वह आउटसोर्सिंग पर लोगों को नौकरी पर रखकर शोषण नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय तक एडहॉक पर रखने के बाद कर्मचारियों को नियमित रोजगार न देने और आर्थिक तंगी का हवाला देने पर यह बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संस्थान वित्तीय तंगी या रिक्तियों की कमी जैसे बहाने बनाकर लंबे समय से काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों को नियमितीकरण और वेतन में समानता से वंचित नहीं कर सकते। यह फैसला जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा आयोग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों द्वारा दायर अपील पर सुनाया। इन कर्मचारियों का कहना था कि वे सालों से काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित करने से सरकार ने इनकार कर दिया है।

इसके अलावा वेतन भी उन्हें बहुत कम मिल रहा है, जबकि इसी पद के नियमित कर्मचारियों का वेतन कहीं ज्यादा है। बैंच ने कहा कि आउटसोर्सिंग एक ढाल नहीं बन सकती, जिसका इस्तेमाल करते हुए स्थायी कार्यों में लगे कर्मचारियों को उचित वेतन और नौकरी से वंचित रखा जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य (संघ और राज्य सरकारें)कोई प्राइवेट कंपनियों की तरह मार्केट प्लेयर नहीं हैं, बल्कि संवैधानिक नियोक्ता हैं। उन्हें फंड की कमी जैसी बात उन लोगों के लिए नहीं करनी चाहिए, जो सरकार के बुनियादी और जरूरी कामों को अंजाम दे रहे हैं। बैंच ने कहा कि यदि कोई काम लगातार चल रहा है, तो फिर संस्थान को उसके संबंध में पद भी निकालने चाहिए और लोगों को नियमित भर्ती देनी चाहिए। जस्टिस नाथ ने अपने फैसले में लिखा कि यदि लंबे समय तक चलने वाले नियमित कामों में अस्थायी कर्मचारियों को रखा जाता है, तो इससे लोक प्रशासन में भरोसा भी कम होता है। इसके अलावा समानता के अधिकार और उसके संरक्षण के वादे का भी हनन होता है। बैंच ने कहा कि संस्थानों को यह भी बताना चाहिए कि नियमित कामों के लिए भी वे पद मंजूर न करते हुए क्यों अस्थायी कर्मचारी रख रहे हैं। बैंच ने कहा कि असुरक्षा के दायरे में रहते हुए आखिर कोई कब तक नौकरी कर सकता है। अदालत ने कहा कि एडहॉक व्यवस्था तब चलती है, जब पारदर्शिता की कमी हो जाती है।

: *आज रात संभल कर, कांगड़ा सहित 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, 30 तक राहत नहीं* 

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून जमकर बरस रहा है और कहर भी खूब बरपा रहा है। मंगलवार को भी प्रदेश के कुछ स्थानों पर जमकर हुई बारिश ने खूब तांडव मचाया। खासकर कुल्लू जिला में बारिश ने बड़ा नुकसान किया है। अभी भी मौसम विभाग ने राज्य में 30 अगस्त तक जोरदार बारिश होने का अलर्ट दिया है। मंगलवार के दिन तीन जिलों कांगड़ा, चंबा और मंडी में रेड अलर्ट था और यहां कुछ क्षेत्रों में रात को अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। इन तीनों जिलों पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे यहां के लोग भी डरे हुए हैं। मंगलवार सुबह जिस तरह की तस्वीरें कुल्लू और मनाली से आई वह सचमुच डराने वाली थीं, जहां पर कुदरत ने बड़ा कहर बरपाया है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखें तो कई जिलों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट आया है, जिसमें अत्यधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है, वहीं कुछ जिलों के लिए येलो अलर्ट दिया है। बुधवार को अगस्त को मंडी और शिमला जिला के कुछ स्थानों पर भारी वर्षा का यलो अलर्ट आया है। शेष दूसरे जिलों में भी हल्की और मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। 28 अगस्त को ऊना और कांगड़ा जिला में भारी बारिश का येलो अलर्ट है, जबकि 29 अगस्त को प्रदेश के ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा में भारी बारिश होगी जबकि मंडी, शिमला, सोलन व सिरमौर जिलों में कई स्थानों पर अत्यधिक बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। 30 अगस्त को भी ऑरेंज अलर्ट के साथ अत्यधिक बारिश की चेतावनी दी गई है। यह चेतावनी कांगड़ा, कुल्लू, मंडी व शिमला जिलों के लिए है, जबकि शेष जिलों ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और चंबा में भारी बारिश होने का यलो अलर्ट दिया गया है। प्रदेश में पहली सितंबर तक मौसम यूं ही खराब रहेगा और अगले महीने की शुरूआत भी झमाझम बारिश से ही होगी।

यहां हुई सबसे ज्यादा बारिश

पिछले 24 घंटों की बात करें तो श्रीनयनादेवी में सबसे अधिक 160.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा भटियात में 125, मनाली में 102, धर्मशाला में 102,भुंतर में 77, चंबा में 74, गुलेर में 71.8, करसोग में 65.2,सुजानपुर टिहरा में 60,रोहडू में 60, जोगिन्द्रनगर में 59, नादौन में 58.2, देहरा गोपीपुर में 57, बंजार में 57, सुन्दरनगर में 51.3 मिलीमीटर बारिश सुबह तक रिकॉर्ड की गई है। इनमें से कुछ स्थानों पर दोपहर में भी बारिश हुई। इसमें नैणादेवी, चुवाड़ी, मनाली, धर्मशाला, घमरूर, कांगड़ा, नगरोटा सूरियां, पालमपुर, कोठी, भरवाईं, भुंतर, सुजानपुर, नादौन, बंजार, सुन्नी भज्जी, कंडाघाट, हंसा, रामपुर, सांगला व शिमला में भी बारिश रिकॉर्ड की गई है। सबसे अधिक तापमान पांवटा साहिब में 31.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।

77 बार फ्लैश फ्लड

इस मानसून में अब तक 77 बार फ्लैश फ्लड, 81 बार भूस्खलन और 41 बार बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। लाहुल-स्पीति में सबसे ज्यादा 42 बार फ्लैश फ्लड आया। कुल्लू में 15, शिमला में 14, लाहौल.स्पीति व मंडी में 12-12 और चंबा में 11 बार भूस्खलन हुआ। बादल फटने की 18 घटनाएं मंडी में, 10 कुल्लू में, 5 चंबा में, शिमला व लाहुल-स्पीति में 3-3 और किन्नौर में एक बार दर्ज हुई हैं। बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। इस बीच लगातार हो रही बारिश से कांगड़ा जिले में पौंग बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। बीती रात बांध का स्तर 1385.21 फुट तक पहुंच गया था, जिसके चलते बीबीएमबी और प्रशासन अलर्ट पर है। आउट फ्लो को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 59,539 क्यूसिक कर दिया गया है, जिसे आगे बढ़ाकर 75,000 क्यूसिक किया जाएगा। प्रशासन ने लोगों को खड्डों और नालों से दूर रहने की अपील की है।

शिंकुला में आधा फुट हिमपात

लाहुल-स्पीति के शिंकुला में सोमवार को रात के समय भी बारिश का क्रम जारी रहा। यहां पर आधा फुट तक हिमपात भी दर्ज किया गया है, जिससे समूचे लाहुल-स्पीति में लोगों को अभी से ही ठंड का सामना करना पड़ रहा है।

: *गुस्से में ब्यास; हर तरफ विनाश ही विनाश, मंडी-कुल्लू-कांगड़ा में तबाही का मंजर* 

 घरों-दुकानों में घुसा पानी

मंडी में 30 घरों में घुसा पानी

मनाली-चंडीगढ़ एचएच बंद, तीन दिन तक नहीं खुलने के आसार नहीं

मंडी से बहती ब्यास की लहरें 30 घरों में घुस गई हैं। इससे कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन पानी घुसने से लोगों का सामान जरूर बर्बाद हुआ है। सौली खड्ड में पांच घर खाली करवाए गए हैं। इसके अलावा इंदिरा आवास कालोनी में दस घर, भ्यूली में 15 और कमांद में दस घर खतरे की जद में होने के कारण खाली करवा लिए गए हैं। चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाई-वे के तीन दिनों तक खुलने के आसार नहीं है।

एनएच में डयोड, दवाडा और झलोगी के पास सडक़ धंसने के साथ-साथ भारी लैंडस्लाइड हो रहा है। सैकड़ों वाहनों के पहिए थम गए हैं। कुछ वाहनों को वापस रवाना कर दिया है। कुल्लू-मनाली जाने के लिए वाया क मांद सडक़ मार्ग भी बंद है। यहां कन्नौज के पास लगभग पांच दिनों से सडक़ बंद है। दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण कुल्लू मनाली बाया कंमाद सडक़ पर तीन अन्य स्थानों राला, रोपा और कांडी में दरारें पड़ गई हैं, जिस कारण इस सडक़ पर वाहनों की आवाजाही पूर्ण रूप से बंद है। एनएच-21 पर लगभग 3000 गाडिय़ां फंसी हुई हैं। पंडोह के कैंची मोड़ में लगभग 1000 गाडिय़ों को रोका गया है। औट थाना क्षेत्र में लगभग 1,200 गाडिय़ों के पहिए जाम हैं।

कुल्लू में 28 घर ब्यास में समाए

कुल्लू-मनाली में चंद घंटों में तबाही

नदी के रोंद्र रूप ने छीने आशियानें

दिव्या हिमाचल ब्यूरो-कुल्लू

हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रखा है। ऐसे में मंगलवार का जिला कुल्लू में भारी बारिश ने इस कद्र से अपना कहर बरपाया कि देखते ही देखते चंद घंटों में जिलाभर के करीब 28 घर, रेस्तरां, दुकानें, खोखेे, गोशाला ब्यास नदी में समा गए। वहीं, जगह-जगह हो रहे भूस्खलन के चलते करीब 40 से अधिक घरों पर खतरा मंडरा रहा है। अखाड़ा बाजार में कुल्लू में तीन दुकानें, दो निर्माधीन घर, सुरक्षा दीवार दो, गोशाला दो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त, आशिंक रूप से दो घर, ओल्ड मनाली में दस ढाबे और तीन मकान, वहीं बाढ़ में बाहंग के दो रेस्टोरेंट और चार दुकानें बह गई। ब्यास नदी का पानी कुल्लू के डोहलु टोल प्लाजा तक पहुंच गया।

बालीचौकी में दो मकान, 22 दुकानें जमींदोज

बालीचौकी में बारिश के कारण चार मंजिला दो मकान गिर गए हैं। साथ 22 दुकानें धराशाही हुई हैं। बालीचौकी में लैंडस्लाइड होने से धंसे इन मकानों के कारण एक करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

सडक़ें बंद होने से रिलीफ कैंप में ठहराए 600 यात्री

मार्ग बंद होने से लगभग 600 पर्यटक और स्थानीय लोग फंसे हुए हैं। लंबा जाम लगने से लोगों को खाने-पीने और ठहरने दिक्कतें न झेलनी पड़ी इसलिए प्रशासन द्वारा रिलीफ कैंप बनाए गए हैं। मंडी और पंडोह के बीच नवोदय विद्यालय में ठहरने की व्यवस्था की गई है। यहां 300 यात्रियों को खाने-पीने का प्रबंध भी किया गया है। पंडोह से औट थाना क्षेत्र के बीच फंसे यात्रियों को समसंग भवन नगवाईं में रहने और खाने पीने की व्यवस्था की गई है। यहां भी लगभग 300 लोग ठहर रहे हैं।

एचआरटीसी के 291 रूट ठप

एचआरटीसी के 291 रूट ठप हो गए हैं। मंडी डिवीजन में सबसे अधिक रूट कुल्लू में बंद हुए हैं। यहां 135 रूटों पर बसें नहीं चल पा रही हैं। केलांग डिपो के 54 व मंडी 40 रूट ठप हैं। डीएम एचआरटीसी उत्तम चंद के मुताबिक बारिश और लैंडस्लाइडिंग के कारण सडक़ें बंद होने से 251 रूट प्रभावित हुए हैं। इससे एचआरटी से एक ही दिन में 14 लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

मनाली का कुल्लू से कटा संपर्क

मनाली का कुल्लू जिला मुख्यालय से सडक़ संपर्क टूट चुका है। जगह-जगह सडक़ें ब्यास नदी में समा गई हैं। मनाली का वैली ब्रिज, लेफ्ट बैंक ब्रिज और ओल्ड मनाली को जोडऩे वाला पुल बह गया। ग्रीन टैक्स बैरियर के पास सडक़ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि बिंदु ढांक के पास मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा नदी में बह गया।

मनाली-लेह सडक़ 15 दिन बंद

दिव्य हिमाचल ब्यूूरो-कुल्लू

मनाली-लेह मार्ग पर अब लगभग 15 दिनों तक वाहनों की आवाजाही बंद रह सकती है। बता दें कि मंगलवार को कुल्लू-मनाली में भारी बारिश होने से ब्यास नदी का जलस्तर ब्यास कुंड से ही बढ़ता रहा। ऐसे में नेहरू कुंड के पास जो सिंगल लेन रोड वाहनों की आवाजाही के लिए बीते दिनों बच गया था। अब वह भी भूस्खलन की भेंट चढ़ गया है। ऐसे में मनाली लह-मार्ग की कनेक्टीविटी भी टूट गई है। नेहरू कुंड के साथ साथ सोलंगनाला के आसपास भी बाढ़ आने से एनएच क्षतिग्रस्त हो गया है। मनाली से लेह जाने वाली गाडिय़ां भी मनाली की तरफ फंसी हुई है। नेहरूकुंड के बीच की बात करे तो एनएच 03 शिरड़ रिजोर्ट के पास क्षतिग्रस्त हुआ है। पर्यटन नगरी मनाली की बात करे तो बोल्वो बस स्टैंड और भूतनाथ मंदिर के बीच भी काफी सारा हिस्सा ब्यास नदी में तबाह हो गया है।

310 मौतें, 2454 करोड़ का नुकसान

राज्य में बरसात के चलते जो नुकसान हुआ है उसका आंकड़ा 2454 करोड़ तक पहुंच गया है। मंगलवार की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार सात और लोगों की जान गई है। इसमें बिलासपुर में एक, कांगड़ा में एक, किन्नौर में दो और सोलन में तीन मौतें बढ़ी हैं। कुल मौतों की बात करें तो बिलासपुर में 15, चंबा में 36, हमीरपुर में 16, कांगड़ा में 49, किन्नौर में 28, कुल्लू में 26, लाहुल-स्पीति में 8, मंडी में 51, शिमला में 28, सिरमौर में 14,सोलन में 21 व ऊना में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सडक़ हादसों के शिकार लोग भी शामिल हैं।

श्रीनयनादेवी में सबसे ज्यादा बारिश

पिछले 24 घंटों की बात करें तो श्रीनयनादेवी में सबसे अधिक 160.8 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है। इसके अलावा भटियात में 125, मनाली में 102, धर्मशाला में 102,भुंतर में 77, चंबा में 74, गुलेर में 71.8, करसोग में 65.2, सुजानपुर टिहरा में 60,रोहडू में 60, जोगिंद्रनगर में 59, नादौन में 58.2, देहरा गोपीपुर में 57, बंजार में 57, सुंदरनगर में 51.3 एमएम बारिश सुबह तक रिकॉर्ड की गई है। इनमें से कुछ स्थानों पर दोपहर में भी बारिश हुई। इसमें श्रीनयनादेवी, चुवाड़ी, मनाली, धर्मशाला, घमरूर, कांगड़ा, नगरोटा सूरियां, पालमपुर, कोठी, भरवाईं, भुंतर, सुजानपुर व शिमला में भी बारिश रिकार्ड की गई है।

शिंकुला में आधा फुट हिमपात

लाहुल-स्पीति के शिंकुला में सोमवार को रात के समय भी बारिश का क्रम जारी रहा। यहां पर आधा फुट तक हिमपात भी दर्ज किया गया है, जिससे समूचे लाहुल-स्पीति में लोगों को अभी से ही ठंड का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश से तबाही पर प्रतिभा सिंह चिंतित

शिमला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने प्रदेश में बादल फटने व भारी बारिश से हो रहें जानमाल के नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से पूरी तरह सुरक्षित व सतर्क रहने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि भारी बारिश की बजह से हो रहें भूस्खलन से प्रदेश के जनजीवन पर व्यापक असर पड़ा है। लाखों करोड़ों की सरकारी और गैर सरकारी निजी संपत्ति पूरी तरह ध्वस्त हो गई है, जिसके पुनर्निर्माण की प्रदेश सरकार के समुख बहुत बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से हम सबको एकजुटता के साथ निपटना होगा। प्रतिभा सिंह ने कहा है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार सीमित संसाधनों के बाबजूद पूरी तत्परता से राहत कार्यो में जुटी है। प्रतिभा सिंह ने पार्टी के सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं से भी राहत कार्यों में प्रशासन का सहयोग करने व प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद करने का आह्वान किया हैं।

: *सिल्ट ने रोकी डैहर पावर हाउस की टर्बाइन, 990 मेगावाट के पावर प्रोजेक्ट बिजली में उत्पादन ठप* 

बग्गी टनल जाम, पंडोह डैम के पांचों गेट खोलने से ब्यास उफान पर

पार्वती-उहल-लारजी-तीर्थन-सैंज नदियां भी उफान पर

डैहर पावर हाउस की टर्बाइन सिल्ट ने रोक दी हैं। 990 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट बंद हो गया है। यह पावर प्रोजेक्ट बीते 24 घंटों से बंद चल रहा है। इसके साथ ही सिल्ट ने पंडोह-बग्गी टनल को भी जाम कर दिया है। सिल्ट के चलते ही इस टनल को भी अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है। पंडोह डैम में ज्यादा पानी आने के बाद पांचों गेट एक साथ खोल दिए गए हैं। इसके चलते ब्यास नदी उफान पर आ गई है। कुल्लू और मंडी के इलाकों में तेज बारिश के कारण ब्यास नदी की साहयक नदियां तीर्थन, लारजी, ऊहल, पार्वती और सैंज नदियां उफान पर चल रही हैं। पंडोह डैम पानी से लबालब भरा हुआ है और सिल्ट का लेवल भी उच्चतम स्तर पर चल रहा है। पंडोह डैम में पंहुच रहे पानी में सिल्ट का लेवल 80 हजार पीपीएम तक दर्ज किया गया है। सिल्ट की मात्रा ज्यादा होने के कारण ही डैहर पावर हाउस बंद किया गया है। पंडोह डैम से कुल डेढ़ लाख क्यूसिक पानी ब्यास में छोड़ा गया है, जिस कारण नदी ने नीचले क्षेत्रों में कहर बरपा दिया है। बीबीएमबी के अधीक्षण अभियंता अजय पाल ने बताया कि पानी में सिल्ट की मात्रा अधिक होने पर डैहर पावर हाउस को बंद कर दिया है। पंडोह डैम के पांचों गेट खोल दिए हैं। मंडी पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने की कोई जानकारी नहीं है।

पानी छोडऩे से पहले करें अलर्ट

ब्यास का रौद्र रूप देखकर मंडी खौफ ज्यादा है। पंडोह डैम से पानी छोडऩे के बाद मंडी डीसी अपूर्व देवगन और एडीएम मदनलाल ने बीबीएमबी प्रबंधन के साथ मंगलवार को तीन मर्तबा चर्चा की है। इसके बीच पानी का फ्लो कम करने और चेतावनी सिस्टम से लोगों को आगाह करने के तरीकों पर भी बात हुई है।

ब्यास का रौद्र रूप से प्रशासन अलर्ट

मंडी में भी ब्यास का उफान रिकार्ड स्तर पर पंहुच रहा है। ब्यास का रौद्र रूप देख कर मंडी प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। पंडोह डैम से डेढ़ लाख क्यूसिक पानी छोड़े जाने के बाद मंडी एडीसी गुरसिमर सिंह ने स्थिति का जायजा लिया है। बताया जा रहा है कि ब्यास में पानी का जलस्तर ज्यादा होने पर कुछ देर के लिए डैम के गेट भी बंद करवाए गए हैं हालांकि इसकी कोई भी अधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहा है।

सिल्ट से डैम के गेट जाम होने का खतरा

पानी में सिल्ट की मात्रा अधिक होने के चलते डैम प्रबंधन को पांचों गेट खोलने पड़े हैं। ब्यास में हालांकि अभी डेढ़ लाख क्यूसिक पानी ही बह रहा है और दो लाख क्यूसिक तक की क्षमता तक पानी को होल्ड किया जा सकता है। पंडोह डैम प्रबंधक सिल्ट ज्यादा होने के कारण डरा हुआ है कि अगर पानी रोका गया, तो सिल्ट के दबाव में गेट जाम हो सकते हैं। ऐसे में पांचों गेट एक साथ खोल दिए गए हैं।

बीबीएमबी के खिलाफ एफआईआर

मंडी में बीबीएमबी की मनमर्जी के खिलाफ पावर कारपोरेशन के डायरेक्टर ने एफआईआर दर्ज करवाई है। यह एफआईआर किसी व्यक्ति विशेष या फिर अधिकारी के खिलाफ नहीं है, बल्कि पंडोह डैम प्रबंधन के खिलाफ करवाई गई है। इस एफआईआर में सीधे तौर पर डैम प्रबंधन द्वारा चेतावनी सिस्टम को नजर अंदाज कर पानी छोडने सहित पुराने नुकसान को आधार बनाया गया है। मंडी एसपी साक्षी बर्मा ने कहा है कि मंडी सदर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

: *आप नेता सौरभ भारद्वाज के घर रेड, क्या है वह मामला जिस पर ED ने लिया एक्शन* 

5590 करोड़ के कथित अस्पताल निर्माण घोटाले में शिकंजा

अरविंद केजरीवाल बोले, आप के पीछे पड़ गई है मोदी सरकार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में 24 अस्पतालों के निर्माण से जुड़े 5,590 करोड़ रुपए के धनशोधन मामले में आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज के घर समेत 13 स्थानों पर छापामारी की। धन शोधन निवारण मामला 2018-19 में हुए कथित दिल्ली अस्पताल निर्माण से जुड़ा हुआ है। उल्लेखनीय है कि निर्माण में देरी होने के कारण अस्पतालों की लागत बढ़ गई। 2018-19 में आप सरकार ने अस्पतालों के निर्माण को मंजूरी प्रदान की थी, हालाकि परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापामारी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी पर आधारित है। उधर, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस कार्रवाई को मोदी सरकार का एजेंसियों का दुरुपयोग बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार आप के पीछे पड़ गई है। आप को इसलिए टारगेट किया जा रहा है, क्योंकि हम गलत नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे मुखर आवाज हैं। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी इन रेड्स से हमें डरा नहीं सकती।

: *राहुल गांधी बोले- मुख्य चुनाव आयोग के चयन में विपक्ष के नेता की बात नहीं सुनते प्रधानमंत्री* 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांघी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वोट चोरी उनकी सुनियोजित योजना का हिस्सा है इसलिए मुख्य चुनाव आयोग की नियुक्ति की समय मनमानी करते हैं और विपक्ष के नेता की बात नहीं सुनी जाती है।

राहुल गांधी ने कहा “प्रधानमंत्री तय करते हैं कि इलेक्शन कमिश्नर कौन बनेगा। वहां विपक्ष के नेता की एक नहीं सुनी जाती। साल 2023 में भाजपा ने नया कानून बनाया कि इलेक्शन कमिश्नर पर कोई मामला नहीं किया जा सकता।” उन्होंने इस कानून को लेकर सवाल करते हुए कहा कि आखिर ऐसा कानून क्यों बनाया गया। उन्होंने कहा कि इसका सीधा और सरल जवाब है कि ‘वोट चोरी’ करवाने के लिए ऐसा किया जाता है।

उन्होंने कहा “मेरी ‘वोट चोरी’ से जुड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने कुछ नहीं कहा। ऐसा इसलिए क्योंकि जब चोर पकड़ा जाता है तो वह बिल्कुल चुप हो जाता है। उसे पता चल जाता है कि मैं तो फंस गया, अब पकड़ लिया गया हूं।”

: *वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भूस्खलन, 5 श्रद्धालुओं की मौत, 14 अन्य घायल, यात्रा पर अस्थाई रोक* 

 जम्मू में जारी भारी बारिश के बीच मंगलवार को वैष्णो देवी यात्रा मार्ग अर्धकुवारी के पास भूस्खनल हो गया है। यहां मंगलवार को जोरदार धमाके के साथ पहाड़ी से मलबा और पत्थर ट्रैक पर आ गिरे। इस घटना में 5 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है जबकि 14 अन्य घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। वहीं, हादसे के बाद श्राइन बोर्ड और सुरक्षाबलों ने राहत बचाव कार्य शुरू कर दिया है। लोगों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए यात्रा पर अस्थाई तौर से रोक लगा दी गई है। अर्धकुवारी से भवन तक का मार्ग बंद कर दिया गया है। जो भी श्रद्धालु यात्रा पर गए हैं उन्हें सुरक्षित स्थलों पर ठहराया जा रहा है।

: *24 घंटे में बिलासपुर जिला के करोड़ों निगल गई आफत की बरसात* 

चार पक्के, 8 कच्चे मकान, 30 पशुशालाएं, चार रसोईघर और एक दुकान क्षतिग्रस्त, लोक निर्माण विभाग को छह करोड़ 86 लाख 45 हजार का नुकसान

पिछले तीन दिन से निरंतर जारी आफत की बरसात ने जिला बिलासपुर में बड़े पैमाने पर नुक्सान किया है। जहां जन जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त होकर रह गया है तो वहीं सडक़ों के अलावा कच्चे व पक्के मकान, रसोईघर और गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। गोबिंदसागर झील भी पानी से लबालब भर चुकी है और पानी वाटर स्पोर्ट्स कांपलेक्स की दीवार को छू रहा है। बीते 24 घंटे के दौरान 4 पक्के, 8 कच्चे, 30 पशुशालाएं, 4 रसोईघर और एक दुकान क्षतिग्रस्त हो गई। लोक निर्माण विभाग को 6 करोड़ 86 लाख 45 हजार, जल शक्ति विभाग को एक करोड़ 21 लाख 45 हजार और विद्युत बोर्ड को 2.70 लाख रूपए के नुक्सान का आकलन किया गया है। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन मैहला व पनोह के पास भूस्खलन की वजह से एक तरफा यानी वन-वे किया गया है। वहीं लोक निर्माण विभाग की घुमारवीं-बरठीं वाया सुन्हाणी, शहतलाई-थापना वाया मरोतन, नयनादेवी और शाहतलाई-झंडूता वाया मांडवां सडक़ें पूरी तरह बंद हो गई हैं जिस कारण संबंधित क्षेत्र के लोगों को आवागमन प्रभावित हो रहा है। कई ग्रामीण सडक़ें भी बंद पड़ी हैं। इसके अतिरिक्त जल शक्ति विभाग की 33 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं जिस कारण संबंधित क्षेत्र के लोगों को पानी की आपूर्ति बाधित रही।

वहीं, विद्युत बोर्ड के 32 खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं जिसकी वजह से कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। शिक्षा विभाग की बात करें तो 18 लाख रुपए के नुकसान का अनुमान है। भारी बारिश के कारण नगर परिषद बिलासपुर को एक ही दिन में 2 करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। बिलासपुर शहर की सडकों क किनारे बनी निकासी नालियां व डंगे और रास्ते टूट गए हैं। सडक़ों की हालत खराब हो गई है। बारिश की वजह से रणजीत सिंह निवासी मंझेड़ का पक्का घर क्षतिग्रस्त होने से 12 लाख, सुरेश कुमार निवासी डूहक के पक्का मकान के क्षतिग्रस्त होने से 30 हजार, उर्मिला देवी निवासी सुन्हाणी के पक्के मकान के क्षतिग्रस्त होने से 10 हजार, विधि सिंह निवासी ज्वाह-बलोह के पकके मकान के क्षतिग्रस्त होने से 2 लाख का नुकसान हुआ है। इसके अतिरिक्त विधि चंद निवासी करलोटी को कच्चा मकान गिरने से 50 हजार, हंसराज निवासी मरहाना को 50 हजार, संजय निवासी बम को 65 हजार, विनोद निवासी कोठी को ढाई लाख का नुकसान हुआ है। (एचडीएम)

उपायुक्त ने सडक़ को बहाल करने के दिए निर्देश

मंगलवार को उपायुक्त राहुल कुमार ने मल्यावर में बंद सडक़ का निरीक्षण किया तथा लोक निर्माण विभाग को संबंधित सडक़ को बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर नुकसान का आकलन कर लिया गया है तथा राहत कार्य जारी हैं।

: *भूस्खलन से सडक़ें बंद, प्रशासन अलर्ट* 

कुल्लू में उपायुक्त ने आपदा प्रभावित इलाकों का किया दौरा, नुकसान का जायजा लेकर जरूरी दिशा निर्देश दिए

उपायुक्त तोरूल एस रवीश ने भारी वर्षा के चलते प्रभावित वैली ब्रिज अखाड़ा बाजार, लेफ्ट बैंक के छरुडू, रामशिला तथा गेमन पुल के साथ लगते क्षेत्रों का जायजा लिया तथा खतरे वाले स्थानों को शीघ्र खाली करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला में सभी लोगों से अपील की है कि वे भारी बारिश के मद्देनजर आवाजाही में एहतियात बरतें तथा बेवजह आवाजाही से परहेज करें। नदी नालों के आसपास न जाएं। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस आपदा में राहत एवं बचाव कार्यों में मुस्तैदी से काम कर रहा है। हर जगह पर प्रशासन के फील्ड स्तर के अधिकारी लोगों की हर संभव मदद करने के लिए तैनात हैं। उन्होंने कहा यदि किसी को किसी भी प्रकार की आपात सहायता अथवा राहत संबंधी आवश्यकता है तो वह फील्ड स्तर पर अधिकारियों से संपर्क करें। उन्होंने जानकारी दी कि भारी बारिश के कारण कुल्लू-मनाली के बीच में कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है तथा कई स्थानों को एहतियात के तौर पर खाली किया गया है, जिनमें की मनाली के बहांग को पहले ही खाली कर दिया गया था तथा आज बाजार के कुछ क्षेत्रों तथा दुकानों को भी खाली कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि भारी बारिश के कारण बयास नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है तथा नदी में मिलने वाले सभी नालों का भी जलस्तर बढ़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पतलीकूहल में नदी का पानी वैली ब्रिज के ऊपर से पानी बह रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि मनाली में ओल्ड मनाली का पुल तथा कुछ अन्य स्थानों में फुटब्रिज भी बाढ़ में बह गए हैं। कुल्लू-मनाली सडक़ बिंदुढांक तथा शिरड रिजॉर्ट के पास आवाजाही के लिए बंद हुई है। परंतु आवाजाही के लिए कुल्लू-मनाली मार्ग को को वाया लेफ्ट बैंक रायसन से सुचारू रूप से बहाल किया गया है।

: *ब्यास का कहर… बाहंग में रेस्तरां डूबा, सडक़ें बही* 

कुल्लू-मनाली में बारिश ने मचाई तबाही; एपीएमसी बिल्डिंग में घुसा पानी, भवन में फंसे कर्मचारी को निकाला बाहर

जिला कुल्लू में हो रही भारी बारिश के चलते अब ब्यास नदी भी उफान पर आ गई है। ब्यास नदी में आई बाढ़ के चलते मनाली के बिंदु ढांक के समीप सडक़ पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। ऐसे में पतलीकूहल से मनाली सडक़ वाहनों के लिए बंद हो गई है। इसके अलावा बाहंग में भी एक रेस्टोरेंट व होटल बाढ़ की चपेट में आ गया। गनीमत यह रही कि रेस्टोरेंट को समय रहते ही खाली कर दिया गया था। वहीं देर रात आलू ग्राउंड के समय पर ब्यास नदी का पानी एपीएमसी की बिल्डिंग में घुस गया और ग्रीन टैक्स बैरियर के पास भी सडक़ पर बहने लगा। ऐसे में एपीएमसी का एक कर्मचारी भी बिल्डिंग में फंस गया था।

सूचना मिलते ही अग्नि शमन विभाग की टीम और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची रात को ही कर्मचारी को रैस्क्यू किया गया तथा हाइड्रा क्रेन के माध्यम से एपीएमसी के कर्मचारी को बिल्डिंग से बाहर निकाला गया। वही भूस्खलन के चलते ओट से आनी सडक़ एक बार फिर से बंद हुई है। बंजार में भी रात के समय बस स्टैंड के समय पहाड़ी से भूस्खलन हुआ। जिससे एक एचआरटीसी की बस को भी नुकसान हुआ है। मणिकर्ण घाटी में भी मलाणा डैम के समीप पहाड़ी से भूस्खलन हुआ। जिससे मलाणा पावर प्रोजेक्ट की मशीनरी को नुकसान पहुंचा है। लोग भारी कठनाईयों का सामना कर रहे है, सडक़ें बंद है और सेब की फसल तुड़ान के लिए तैयार है। एचडीएम

देखते ही देखते ढह गए मकान, गाडिय़ां दबी

मंगलवार सुबह से जारी भारी बारिश के चलते जैसे ही ब्यास नदी का पानी का भाव बढ़ा तो यहां देखते ही देखते लोगों की आंखों सामने उनके आशियानें ताश के पत्तों की तरह ढह गए। जगह-जगह सडक़ टूट जाने के चलते लोगों का संपर्क एक दूसरे से पूरी तरह सेे कट गया है। हालांकि किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन व्यास नदी में बड़े पाने के भाव के चलते लोगों की दुकानों व घरों को नुकसान जरूर पहुंचा है। यहां मनाली में करीब तीन ले अधिक वाहन भी सडक़ के किनारे पार्क होने पर पानी की चपेट में आए है।

: *अर्थी लेकर जा रहे लोगों पर गिर गई गोशाला, चार गंभीर रूप से घायल, हमीरपुर में पेश आया हादसा* 

हमीरपुर जिला में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सबको झकझोर दिया है। हमीरपुर जिला के ख्याह गांव में अर्थी लेकर जा रहे लोगों पर गोशाला के गिरने से 5 लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंगलवार सुबह 10 बजे जब गांव के लोग मृतक वीरेंद्र कुमार की अर्थी को लेकर श्मशानघाट जा रहे थे। इस दौरान गांव में जर्जर हो चुकी गौशाला अचानक गिर गई और अर्थी सहित 5 लोग मलबे में फंस गए। वहीं बीच बचाव में लोगों ने फंसे हुए लोगों और अर्थी को मलवे में से बाहर निकाला है।

इस घटना के दौरान जो लोग घायल हुए हैं, उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज हमीरपुर पहुंचाया गया। जहां पर उनका इलाज चल रहा है। वहीं हादसे के चश्मदीद अशोक कुमार ने बताया कि गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी, जिनके अंतिम संस्कार के लिए लोग अर्थी को उठाकर जा रहे थे। तब यह हादसा पेश आया। अर्थी समेत लोग मलबे में फंस गए। जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकल गया। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों का हमीरपुर के मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। हादसे में घायल हुए व्यक्ति मनीष ने बताया उनके चाचा के बेटे की डेथ हुई थी और उनके अंतिम संस्कार के लिए अर्थी उठाकर जा रहे थे, तो अचानक से जर्जर गौशाला की दीवार गिर गई, जिसके चलते उन्हें टांग में चोट पहुंची है। हादसे में घायल हुए व्यक्ति मुकेश शर्मा ने बताया कि अर्थी ले जाते समय यह हादसा पेश आया है। जिसके चलते वह इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि हादसे में करीब चार से पांच लोग घायल हुए हैं।

चार गंभीर रूप से घायल

उपायुक्त हमीरपुर अमरजीत सिंह ने कहा कि आज सुबह सूचना प्राप्त हुई थी कि अर्थी को अंतिम संस्कार के लिये शमशान घाट ले जा रहे थे। इस दौरान गांव में जर्जर हो चुकी गोशाला अचानक गिर गई और अर्थी सहित 5 लोग मलबे में फंस गए, जिन्हें बाहर निकल गया इसके बाद मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में लाया गया। और पांच लोग इस दौरान घायल हुए हैं, जिनमें से एक को हल्की चोटें और चार गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

: *हिमाचल में जल्द भर्ती होगे 200 डॉक्टर, सदन में मुख्यमंत्री ने किया ऐलान* 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि सरकार जल्दी ही स्वास्थ्य क्षेत्र में 200 डॉक्टरों की भर्ती करने जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र पर सरकार का पूरा फोकस है और आने वाले समय में तीन हजार करोड़ रूपए इस क्षेत्र में खर्च किए जाएंगे। यहां के मेडिकल कॉलेजों में एम्स स्तर की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

सदन में मंगलवार को भाजपा के विधायक डॉ जनक राज ने नियम 62 के तहत आईसीएमआर के द्वारा दिए गए एक प्रोजेक्ट का मामला उठाया था जिसपर सीएम ने सदन में जवाब दिया। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के तहत आईजीएमसी को स्टेमी प्रोजेक्ट में 71 लाख रूपए प्राप्त हुए थे जबकि विधायक 26 लाख बता रहे। इस राशि में से 43 लाख रूपए हार्ट अटैक से बचाने वाले इंजेक्शन की खरीद पर खर्च किए गए हैं। सीएचसी व पीएचसी नोटिफाई की गई थी शिमला जिला में ताकि वहां पर इंजेक्शन लगाया जाए ह्रदयरोगियों के लिए। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर ने जो पैसा दिया वो उसी प्रोजेक्ट पर खर्च करना होता है।

नवम्बर 2024 तक इंजेक्शन की उपलब्धता पूरी थी इस वजह से नए नहीं खरीदे गए। इस इंजेक्शन की एक्सपायरी शॉर्ट टाइम की है लिहाजा ज्यादा नहीं खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर ने बची हुई शेष राशि को वापस मांग लिया था जिस राशि का इस्तेमाल नहीं किया गया। यह राशि उनको ब्याज के साथ वापस भेज दी गई है। सीएम ने कहा कि केन्द्र सरकार ने तय कर रखा है कि किसी काम के लिए आया पैसा जो बैंक में होता है उसका इस्तेमाल नहीं होने पर ब्याज सहित वो राशि वापस देनी पड़ती है। भारत सरकार जिस प्रोजेक्ट के लिए पैसा देगी वो उसी पर खर्च होगा और इसका यूसी भी देना पड़ता है। स्पर्श प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार ने शर्तें लगा रखी हैं कि पैसा उसी प्रोजेक्ट पर खर्च होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का पहला केन्द्र बिंदू शिक्षा है और दूसरा स्वास्थ्य क्षेत्र है। एक साल के अंदर एम्स जैसी सुविधाएं यहां के मैडिकल कॉलेजों में प्रदान की जाएगी। पहले चरण में इन मैडिकल कॉलेजों के लिए 3 हजार करोड़ का टैक्नोलॉजी बेस्ड प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है। सरकार ने 200 डॉक्टर भर्ती किए है और 200 डॉक्टर जल्दी ही भर्ती किए जाएंगे।

ंइससे पूर्व डॉ जनक राज ने कहा कि प्रोजेक्ट में 26 लाख रूपए खर्च नहीं किए गए। आईसीएमआर ने प्रदेश में एक प्रतिष्ठित संस्थान को स्टेमी प्रोजेक्ट के तहत राशि दी थी। केन्द्र सरकार के सौजन्य से 26 लाख रूपए की राशि इंजेक्शन खरीदने को दिया था जोकि 55 हजार का होता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में हार्ट अटैक से 14.29 फीसदी मौतें होती हैं। 6 घंटे के भीतर यह इंजेक्शन लगाया जाए तो व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। 2013 में 22 फीसदी लोग ही 6 घंटे के समय में पहुंचे थे जिनको बचाया जा सका। पिछले दो साल में प्रदेश सरकार ने किसी भी चिकित्सा शोध के लिए कोई धनराशि जारी नहीं की और जो राशि केन्द्र से आई उसका भी उपयोग नहीं कर सके हैं। जनक राज ने कहा कि ह्रदय रोगियों के प्रति सरकार गंभीर नहीं है।

: *लोकल को देंगे मिल्क कूलर चलाने का काम* 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश में स्थानीय दूध उत्पादकों को बल्क मिल्क कूलर चलाने का काम सौंपा जाएगा। वह खुद इनकी देखरेख करें ताकि दूध खराब न हो जिसके लिए सरकार उन्हें कमीशन देगी। आनी क्षेत्र में पिछले दिनों हजारों लीटर दूध नाले में फेंक दिए जाने का मामला सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए विधायक लोकेन्द्र कुमार ने उठाया। इसके जवाब में हस्तक्षेप करते हुए सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि आनी दूध उत्पादन में तेजी से आगे बढ रहा हैं। बल्क मिल्क कूलर के लिए वहां के लिए विशेष योजना लाएंगे ताकि स्थानीय लोग ही ऐसे कूलर लगाएं जिसकी एवज में उन्हे कमीशन दी जाएगी।

क्वालिटी मिल्क के लिए सरकार विशेष रूप से प्रयास करेगी। इससे पूर्व कृषि मंत्री चन्द्र कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि सहकारी संस्थाओं के माध्यम से शिमला जिला से 1 लाख 3 हजार लीटर दूध एकत्रीकरण किया जा रहा है। दूध को मिल्क कूलर से ठंडा रखा जाता है ताकि ज्यादा चले। आनी के कराडा में मिल्क कूलर लगाया गया है जोकि एक सहकारी समिति के माध्यम से चल रहा है। इस सहकारी समिति को कमीशन दी जाती है। मिल्क कूलर की अचानक तकनीकी खराबी की जानकारी मिली जिस मशीन को ठीक नहीं किया जा सका था। बाद में पता चला कि बल्क मिल्क कूलर में खराबी नहीं थी लेकिन बिजली बोर्ड की सिंगल लाइन की वजह से वोल्टेज नहीं थी; उस वजह से वह काम नहीं कर पा रहा था। इस दौरान दूध खराब हो गया था तथा दूध की गुणवत्ता खराब थी। सहकारी समिति के सचिव ने बिना इजाजत दूध को नाले में गिरा दिया जिसपर उसे नोटिस दिया गया है। उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों के पदाधिकारियों को कहा गया है कि कूलर आदि का रखरखाव सही तरह से करें ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो। सभी प्लांट प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वो सही तरह से काम करें। उन्होंंने बताया कि नाले में दूध फेंके जाने से 221 उत्पादकों को 77 हजार रूपए का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि आनी विधानसभा क्षेत्र में भविष्य में बल्क मिल्क कूलर की केपेस्टी बढ़ाने को लेकर भी काम किया जाएगा।

वहीं विधायक लोकेन्द्र कुमार ने सदन में दूध चिलिंग प्लांट में हजारों लीटर दूध के खराब होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि आनी के आउटर सराज क्षेत्र में सबसे अधिक दूध का उत्पादन किया जाता है। महिलाएं इस काम में सबसे आगे है। कराडा में एक चिलिंग प्लांट बनाया गया है जहां पर नाले में हजारों लीटर दूध फेंक दिया गया। बल्क मिल्क कूलर की केपेस्टी 10 हजार लीटर की है। यहां पर 22 हजार लीटर दूध आता है। केपेस्टी कम है दूध ज्यादा आता है। ऐसे में इनकी केपेस्टी बढाई जाए। अधिक दूध आने पर उसे वापस भेजा जाता है जिससे लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने दत्तनगर में प्लांट शुरू किया था। निरमण्ड के तहत बल्क मिल्क कूलर की केपेस्टी 5 हजार लीटर की है। आनी में 15 हजार लीटर का मिल्क कूलर प्लांट चाहिए बल्क मिल्क कूलरों की केपेस्टी को बढ़ाया जाए ताकि किसानों को लाभ हो।

: *रावी की लहरों में समाया चंबा का सलून गांव, शेष दुनिया से पूरी तरह से कटे चंबा-कुल्लू* 

कांगड़ा-बिलासपुर में भी एक-एक घर जमींदोज; कुल्लू-मनाली-मंडी में घरों और दुकानों को बड़ा नुकसान

मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी ठप

दोनों जिलों में दूध और सब्जियों की सप्लाई भी नहीं हो रही दूभर हुआ लोगों का जीना

हिमाचल में नुकसान का आंकड़ा 2623 करोड़ पहुंचा, दो एनएच समेत 582 सडक़ें बंद

हिमाचल प्रदेश में हालांकि बुधवार को उतनी अधिक बारिश नहीं हुई, मगर बारिश से पिछले तीन दिनों में मिले जख्म अब दिखने शुरू हुए हैं। राज्य के चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मनाली, मंडी व बिलासपुर में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के होली उपमंडल के सलूण गांव में सात घर रावी नदी में समा गए हैं। कई अन्य घरों पर खतरा मंडरा रहा है। सलूण गांव में रावी नदी के तेज बहाव से भूमि कटाव तेजी के साथ हो रहा है, जिससे नदी किनारे बसा आधा गांव खत्म हो गया है। इसी तरह से कांगड़ा के देहरा की ध्वाला पंचायत और बिलासपुर की मंझेड़ पंचायत में भी बुधवार को एक-एक घर जमींदोज होने की सूचना है। मंगलवार को कुल्लू-मनाली और मंडी में रेस्टोरेंट और 28 से ज्यादा घर-दुकानें ब्यास नदी में समा गए थे, जिसका आंकड़ा बुधवार को साफ हो सका। सडक़ों को नुकसान पहुंचने की वजह से कुल्लू का दूसरे जिलों से संपर्क कट गया है, वहीं चंबा के भी कुछ ऐसी ही हालात हैं, जहां पर मोबाइल नेटवर्क तक नहीं चल रहा है। चंबा मुख्यालय को शेष दुनिया से जोडऩे वाले दोनों मुख्य मार्गों जोत और बनीखेत पर यातायात ठप पड़ा हुआ है, जिससे वहां सब्जी, दूध और अन्य सप्लाई भी नहीं हो पा रही है। जिला में बिजली और पानी की सप्लाई भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है।

इसी बीच कुल्लू की डीसी ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को एमरजेंसी के लिए पेट्रोल-डीजल रिजर्व रखने और जमाखोरी नहीं करने के आदेश जारी किए हैं। कुल्लू के बंजार और मनाली उपमंडल में गुरुवार को भी स्कूल बंद रहेंगे। चंबा की बात करें तो मुख्य सचिव ने बताया है कि मणिमहेश में फंसे सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, परंतु मणिमहेश यात्रा के लिए जा रहे सैकड़ों लोग अभी भी अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं। उधर, ब्यास नदी ने चंडीगढ़-मनाली फोरलेन को आठ जगह पर तहस-नहस किया है। इसे बहाल होने में दो दिन लग सकते हैं। चंडीगढ़ और मनाली के बीच काफी संख्या में टूरिस्ट फंसे हुए हैं। स्थानीय लोग उनके लिए खाने का प्रबंध कर रहे हैं, वहीं प्रशासन भी राहत कार्यों में जुटा हुआ है। हिमाचल प्रदेश को अब तक बरसात से 2623 करोड़ रुपए तक का नुकसान आंका जा चुका है। 310 लोगों की मौत इस मानसून सीजन में हुई है, जिसमें सडक़ हादसों के शिकार भी शामिल हैं, वहीं 369 लोग इस प्राकृतिक आपदा के कारण घायल हुए हैं। प्रदेश में 582 सडक़ें शाम तक भी बाधित हैं, जिनके अलावा दो एनएच नंबर 03 व 305 यातायात के लिए बाधित चल रहे हैं। प्रदेश में 1155 बिजली के ट्रांसफार्मर बंद पड़े हुए हैं, वहीं 346 पेयजल की स्कीमें भी पूरी तरह से बाधित हैं।

बड़ा भंगाल में सभी सरकारी भवन धराशायी

बैजनाथ। रावी नदी में आई भयानक बाढ़ से बैजनाथ उपमंडल की दुर्गम पंचायत बड़ा भंगाल के सभी सरकारी भवन, पंचायत घर, स्वास्थ्य केंद्र भवन, दोनों स्कूल और सिविल सोसायटी का स्टोर के साथ रावी व काली हानी नदी पर बने पुल बह गए हैं।

: *सरदार पटेल विश्वविद्यालय के पर और कतरे, जानिए क्या है हाईकोर्ट का फैसला* …

हाई कोर्ट के फैसले के बाद एसपीयू नहीं कराएगा बीएड प्रवेश प्रक्रिया, अब एचपीयू ही करवाएगा परीक्षा

स्थापना के समय कुल 115 डिग्री कालेज जोड़े गए थे

अब सिर्फ 26 बचे

दो जिलों तक सिमटा दायरा तीन कालेजों पर भी लटकी बंद होने की तलवार

मंडी में संचालित की जा रही सरदार पटेल यूनिवर्सिटी का अस्तित्व अधर में लटक गया है। बीएड प्रवेश परीक्षा के मसले पर हिमाचल हाई कोर्ट के एक फैसले ने सरदार पटेल यूनिवर्सिटी को संकट में डाल दिया है। इस फैसले के बीच हिमाचल विश्वविद्यालय को ही प्रवेश परीक्षा करवाने के लिए अधिकृत किया गया है। सरदार पटेल यूनिवर्सिटी के अधीन 18 बीएड कालेज आते हैं। ऐसे में हिमाचल हाई कोर्ट के ताजा फैसले से इन कालेजों की संबंद्धता भी सरदार पटेल से छिन गई है। इतना ही नहीं, इस फैसले से यूनिवर्सिटी को करीब दो करोड़ का नुकसान भी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। सरदार पटेल विश्वविद्यालय की स्थापना के दौरान कांगड़ा, चंबा, लाहुल सहित मंडी और कुल्लू में संचालित डिग्री कालेजों को इससे जोड़ा गया था, लेकिन अब आलम यह है कि यूनिवर्सिटी का दायरा मंडी और कुल्लू जिला में संचालित कालेजों तक सिमट गया है। इनमें से भी मंडी के कोटली, गाडाधुशैणी और थाची कालेज पर ताला लटकने की नौबत आ गई है। ये तीनों ही कालेज कम छात्र होने के कारण बंद होने के भंवर में फंसे हुए हैं। सरदार पटेल यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने की थी।

इसके साथ कुल 115 डिग्री कालेज जोड़े गए थे, लेकिन सत्ता परिवर्तन के अढ़ाई साल के भीतर ही इससे जुड़े कालेजों की संख्या 26 रह गई है। 18 बीएड कालेज भी अब एसपीयू से बाहर हो जाने के बाद इसके अस्तित्व पर ही सवाल पैदा हो गया है। अटकलें यह भी लगाई जा रही हैं कि आगामी शैक्षणिक सत्र में एसपीयू को बंद किया जा सकता है। इन अटकलों को हवा इस कारण भी मिल रही है, क्योंकि एसपीयू के पर पूरी तरह से काट दिए गए हैं। कर्मचारियों की भर्ती सहित अन्य कई कामों को करने पर रोक लगा दी गई है। नए कोर्सेज चलने को अनुमति तक नहीं दी गई है। स्टेनो और क्लर्क भर्ती के लिखित परीक्षा का परिणाम आज तक नहीं निकल गया है।

यहां तक सरदार पटेल विश्वविद्यालय को मिलने वाली ग्रांट भी साढ़े दस करोड़ से घटा कर नौ करोड़ कर दी गई है। इसके अलावा सुंदरनगर में स्थित 15 करोड़ रुपए के भवन को भी एमएलएसएम कालेज के हवाले कर दिया गया है। एसपीयू में दूसरे विभागों से डेपुटेशन पर भेजे गए कर्मचारियों को भी वापस बुला लिया गया है।

वीसी अवस्थी बोले, अभी बंद नहीं होगी यूनिवर्सिटी

सरदार पटेल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ललित अवस्थी की मानें, तो फिलहाल विश्वविद्यालय को बंद नहीं किया जा रहा है। बीएड कालेजों की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के मसले पर आए फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। इस फैसले पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है।

एसपीयू कर रही काम, बंद करने का सवाल ही नहीं

विश्वविद्यालय के रजिस्टार सुनील वर्मा ने कहा कि मंडी में संचालित एसपीयू अपना काम कर रही है। अभी ऐसा कोई आदेश या फिर फैसला नहीं हुआ है कि यूनिवर्सिटी को बंद किया जा रहा है। अटकलों पर कुछ नहीं कह सकते।

संकेतों से लग रहा, अगले सत्र से बंद हो जाएगी

एसपीयू की प्रो वीसी रहीं अनुपमा कहती हैं कि जिस अंदाज में एसपीयू को कमजोर किया जा रहा है, उससे यही संकेत मिल रहे हैं कि इसको आगामी शैक्षणिक सत्र से बंद किया जा सकता है। बीएड कालेजों को एसपीयू से छीनना इसका ताजा उदाहरण है।

: *पंजाब के सात जिलों में बाढ़, जम्मू में बारिश ने तोड़ा 115 साल का रिकार्ड* 

मूसलाधार बारिश और बांधों से लगातार पानी छोड़े जाने से पंजाब में हालात बदतर हो गए हैं। हजारों एकड़ भूमि, फसलें, नदियों के किनारे बसे गांव डूब चुके हैं। सडक़ें बह जाने की वजह से कई गांवों का संपर्क कट चुका है। बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित सात जिलों में पठानकोट, होशियारपुर, गुरदासपुर, कपूरथला, तरनतारन, फाजिल्का और फिरोजपुर शामिल हैं। इसके अलावा जालंधर और अमृतसर में भी हालात खराब होते जा रहे हैं। बीते 24 घंटे में पौंग बांध और रणजीत सागर बांध का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। गुरदासपुर के दबुरी स्थित नवोदय विद्यालय में 400 से ज्यादा छात्र और टीचर्स बाढ़ में फंस गए, जिन्हें निकालने के लिए सीआरपीएफ और सेना की सेवाएं लेनी पड़ीं।

वहीं, रावी नदी में बाढ़ के चलते करतारपुर साहिब कॉरिडोर में भी सात फुट तक पानी भर गया है। इसके कारण पाकिस्तान का श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा भी डूब गया है। उधर, जम्मू में बारिश का 115 साल का रिकार्ड टूट गया। मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटों में जम्मू में 296 मिलीमीटर बारिश हुई। इससे पहले 52 साल पहले यानी 1973 में नौ अगस्त को 272.6 मिमी बारिश हुई थी। जम्मू में 1910 में रिसर्च ऑब्जरवेटरी बनाई गई थी। इसके बाद से इतनी बारिश दर्ज नहीं की गई। इस तरह यह भी कहा जा सकता है कि 115 साल में यह पहला मौका है, जब इतनी बारिश हुई है।

वैष्णोदेवी में लैंडस्लाइड से मौत का आंकड़ा 34 तक पहुंचा

जम्मू। कटड़ा स्थित वैष्णोदेवी धाम के अर्धकुंवारी में हुए लैंडस्लाइड में मरने वालों का आंकड़ा बढक़र बुधवार को 34 हो गया। हादसा मंगलवार दोपहर तीन बजे इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास हुआ था। प्रशासन का कहना है कि 23 से ज्यादा लोग जख्मी हैं। कई लापता हैं। मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। फिलहाल, इस इलाके में भारी बारिश की वजह से वैष्णो देवी यात्रा स्थगित कर दी गई है।

: *ट्रंप के वार को कुंद करेगा भारत; प्‍लान 40 बनेगा टैरिफ का तोड़, मोदी सरकार ने बनाया प्लान* 

शीर्ष 40 देशों में निर्यात बढ़ाने की कोशिशें तेज

अमरीका की ओर से भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद भारत सरकार ने इससे निपटने के लिए कमर कस ली है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वार के जवाब में भारत ने प्लान 40 बनाया है, जिसके अंतर्गत दुनिया के शीर्ष 40 देशों में निर्यात बढ़ाने के लिए कोशिशें तेज कर दी गई हैं। इन देशों में यूके, स्पेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली का नाम शामिल है। ये देश मिलकर सालाना 590 अरब डालर से ज्यादा के टेक्सटाइल और कपड़े का आयात करते हैं। भारत की बाजार हिस्सेदारी अभी केवल पांच से छह फीसदी है।

इसे बढ़ाने की बहुत संभावना है। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से दी गई। उन्होंने कहा कि भारत ने टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए इन देशों में खास कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना का लक्ष्य भारत को क्वालिटी, टिकाऊ और नए टेक्सटाइल प्रोडक्ट के सप्लायर के रूप में स्थापित करना है। इन प्रयासों में ट्रेड फेयर, वायर-सेलर मीट्स और सेक्टर-विशेष प्रोमोशन कैंपेन शामिल हैं।

: *HP WEATHER : प्रदेश में दो सितंबर तक बारिश का येलो अलर्ट, जानिए अपने जिले का हाल* 

ऊना-हमीरपुर-मंडी शिमला-कांगड़ा-कुल्लू सिरमौर जिला में चेतावनी

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का दौर लगातार जारी रहेगा और अगले महीने की शुरुआत भी भारी बारिश से होगी। मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए दो सितंबर तक येलो अलर्ट जारी किया है, जहां पर कई क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। बुधवार को राजधानी शिमला में दोपहर तक मौसम खुला रहा, जिसके बाद हल्की बारिश हुई है।

मौसम विभाग ने जो पूर्वानुमान दिया है उसके अनुसार गुरुवार को ऊना, हमीरपुर, मंडी, शिमला व सिरमौर में बारिश का यलो अलर्ट आया है। 29 अगस्त को ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला व सिरमौर जिलों में यलो अलर्ट रहेगा जहां पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 30 व 31 अगस्त को भी चंबा, कांगड़ा व मंडी जिलों में यलो अलर्ट रहेगा जहां के लिए भारी बारिश की चेतावनी आई है।

: *न धन बचेगा; न अन्न, नहीं थमेगी प्रलय, छोटी काशी के देवी-देवता नाराज पढि़ए क्या कहा गूरों ने* …

देवताओं के गूरों ने आग के दहकते अंगारों के बीच की भविष्यवाणी

त्रासदी काल में लोगों के पास न धन बचेगा और न ही अन्न बचेगा। मंडी में प्रलय आने का सिलसिला भी नहीं थमेगा और न ही लोगों को दरकते पहाड़ों से कोई राहत मिलेगी। नदी-नाले अभी उफ ान पर ही रहेंगे और ब्यास कहर बरपाती ही रहेगी। मंडी में यह किसी डरावनी कल्पना की पटकथा का हिस्सा नहीं है, बल्कि देव समाज से की गई भविष्यवाणी है और यह वाणी देवताओं के गुरों ने आग के दहकते अंगारों पर अग्नि परीक्षा देते हुए की है। मंडी के स्कूल बाजार में माता काली के दरबार में रात के 12 बजे सैकडों लोगों के समक्ष प्रत्यक्ष रूप से गुरों ने कहा है कि देवी-देवता मानव समाज से रूष्ठ हैं और यह त्रासदी काल उसी का परिणाम है। गुरों ने साफ शब्दों में कहा है कि मानव ने मंदिरों को दूषित कर दिया।

देवी-देवताओं के जंगल काट दिए। गुरों के माध्यम से देवताओं ने कहा है कि मनुष्य इस प्रलय को अब रोक कर बताए। वहीं मंडी को आपदाओं से छुटकारा मिल पाएगा या नहीं, इसका निर्धारण सत देव श्रीबालाकामेश्वर के दरबार में होगा। देव माहूनाग टारना के गुर रमेश कुमार ने बताया कि माता चामुंडा के दरबार में हुए होम के दौरान देवी देवताओं ने कहा है कि अभी आपदाओं से छुटकारा नहीं मिलेगा। देव पराशर मंदिर कमेटी के प्रधान बीरबल शर्मा ने बताया कि कुछ लोगों की आस्था मंदिरों में सैर स्पाटे तक सिमट गई है। इस व्यवहार से देव भी नाराज हैं। इसके चलते पराशर के आसपास पहाडिय़ां दरक रही हैं। लोग आस्था के वशीभूत होकर मंदिर आएं।

: *इन चार विभागों में बीच सत्र रिटायर नहीं होंगे टीचर, अधिसूचना जारी* …

शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, आयुर्वेद, मेडिकल एजुकेशन के लिए अधिसूचना जारी

सामान्य कार्यकाल पूरा करने के बाद री एंप्लॉयमेंट पर माने जाएंगे कर्मचारी

मुख्यमंत्री सुक्खू ने 15 अगस्त को सरकाघाट से की थी संबंधित घोषणा

हिमाचल सरकार ने शैक्षणिक कार्य वाले चार विभागों में परोक्ष तरीके से रिटायरमेंट आगे बढ़ा दी है। हालांकि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के बजाय पुन: रोजगार का विकल्प दिया गया है। वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार की ओर से यह अधिसूचना जारी कर दी गई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 15 अगस्त के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सरकाघाट से यह घोषणा की थी। जारी अधिसूचना में शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, आयुष विभाग और मेडिकल एजुकेशन विभाग में वर्तमान शिक्षा सत्र के दौरान सत्र पूरा होने तक रिटायरमेंट नहीं होगी। इसके लिए कर्मचारियों को विकल्प देना होगा। री-इंप्लॉयमेंट के लिए भी और यह विकल्प न लेने के लिए भी।

जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों, कालेज, विश्वविद्यालय, मेडिकल कालेज, आयुर्वेद कालेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेज में भी शिक्षा सत्र के हिसाब से ही अब रिटायरमेंट होगी। सत्र के बीच रिटायर होने वाले कर्मचारी या अधिकारी को इस अवधि से पुनर्नियुक्त कर दिया जाएगा। इस अवधि में इन्हें अंतिम वेतन और फुल पेंशन के अंतर के बराबर वेतन मिलेगा। इस योजना को स्वीकार करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, कम्यूटेशन, जीपीएफ इत्यादि का लाभ तभी मिलेगा, जब ये इस री-इंप्लॉयमेंट से बाहर आएंगे। यदि किसी कर्मचारी को यह विकल्प नहीं लेना है, तो भी उसे रिटायरमेंट के 60 दिन से पहले फार्म भर कर देना होगा। जिन कर्मचारियों को रिटायर होने को 60 दिन से कम समय बचा है, वे इस अधिसूचना के बाद गुरुवार से ही विकल्प दे सकते हैं। राज्य सरकार ने इस आदेश के जरिए एक तरह से शैक्षणिक सत्र में पद खाली होने के कारण हो रहे नुकसान को बचाया है। दूसरा लाभ यह है कि मुश्किल आर्थिक हालत में पेंशन से संबंधित देनदारी को भी अगले वित्त वर्ष या अगले सत्र के लिए टाला जा रहा है।

यह है एकेडमिक सेशन

स्कूल एजुकेशन 31 मार्च 2026

मेडिकल एजुकेशन 31 मार्च 2026

आयुष एजुकेशन 30 अप्रैल 2026

आईटीआई संस्थान 31 जुलाई 2026

बहुतकनीकी कालेज 30 जून 2026

इंजीनियरिंग कालेज 30 जून 2026

फार्मेसी कालेज 30 जून 2026

: *NH-03 : मंडी-कुल्लू वाहनों की आवाजाही शुरू, उपायुक्त ने किया प्रभावित क्षेत्रों का दौरा* 

 वाया कमांद भी भेजे जा रहे छोटे वाहन

एनएचएआई को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

म मंडी से कुल्लू (वाया पंडोह, औट) राष्ट्रीय राजमार्ग-03 को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। बुधवार देर सायं राष्ट्रीय राजमार्ग के इस हिस्से में फंसे वाहनों को सुरक्षित गंतव्य की ओर भेजने का कार्य शुरू हो गया। इससे हजारों यात्रियों सहित स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने आज स्वयं मनाली-चंडीगढ़ फोरलेन के इस हिस्से का निरीक्षण किया। उन्होंने ब्यास नदी का जल स्तर बढ़ने तथा भूस्खलन व फ्लैश फ्लड से इस फोरलेन को हुए नुकसान के बारे में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। उपायुक्त ने सबसे अधिक प्रभावित द्वाडा, झलोगी सहित अन्य स्थलों पर पहुंचकर स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने एनएचएआई तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से इस मार्ग को समुचित ढंग से बहाल करने पर भी चर्चा की और मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। अपूर्व देवगन ने कहा कि इस फोरलेन मार्ग की मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। यहां पिछली कुछ अवधि से लगातार भूस्खलन, भूधंसाव व ब्यास नदी के जल स्तर में अप्रत्याशित बढ़ोतरी से सड़कमार्ग को नुकसान की घटनाएं सामने आई हैं। इस कारण यहां फंसे वाहनों को सुरक्षित निकालना प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। उन्होंने बताया कि एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग, स्थानीय प्रशासन व संबंधित एजेंसियों के सहयोग से आज इस मार्ग को आवागमन के लिए खोल दिया गया है। पुलिस प्रशासन की मदद से 8 मील, कैंची मोड़ (पंडोह डैम), जोगणी माता मंदिर, झलोगी, ड्योढ़ (औट) के पास फिलहाल एकतरफा यातायात की सुविधा प्रदान की जा रही है।

उपायुक्त ने बताया कि छोटे वाहनों को मंडी से कुल्लू की ओर वाया कमांद भी भेजने की व्यवस्था की गई है। मंडी से कुल्लू के बीच फंसे भारी मालवाहक वाहनों को निकालने के लिए भी समुचित प्रबंध किए जा रहे हैं। इसके लिए एनएचआई के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है। आगामी एक-दो दिनों में इन्हें सुरक्षित निकालने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस सड़क मार्ग में फंसे वाहन चालकों की सुविधा के लिए एसडीएम बालीचौकी तथा एसडीएम सदर मंडी के माध्यम से जरूरतमंदों के ठहरने, भोजन-पानी इत्यादि की समुचित व्यवस्था की गई है, जो आगे भी जारी रखी गई है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सचिन हीरेमठ, उपमंडलाधिकारी (ना.) मंडी रुपिंदर कौर, उपमंडलाधिकारी (ना.) बालीचौकी देवीराम, एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी, परियोजना निदेशक सहित संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी भी उपस्थित थे।

: *एयरपोर्ट के लिए मांझी खड्ड सबसे बड़ी दिक्कत, जानिए क्या है पूरा मामला* 

गगल हवाई अड्डे के विस्तारीकरण के लिए भू-अधिग्रहण के साथ दरिया को कवर करना चुनौती

कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए भू-अधिग्रहण के साथ मांझी खड्ड को कवर करना भी राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। हालांकि इसके तकनीकी पहलुओं को पूरा करने के लिए प्रक्रिया चल रही है और चैनेलाइजेशन सहित पुल के डिजाइन की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। खड्ड को तकनीकी एक्सपर्ट और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नियमानुसार कवर किया जाना है, लेकिन इसके लिए बड़े बजट की आवश्यकता रहेगी। कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ मांझी खड्ड पर पुल बनाना किसी चुनौती से कम नहीं है।

कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए करीब 4500 करोड़ का मुआवजा विस्थापित परिवारों को दिया जाना है, जिसके लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। अभी तक करीब साढ़े 500 करोड़ का मुआवजा जारी भी किया जा चुका है। मांझी खड्ड पर पुल बनाने की शर्त प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। यह ब्रिज मांझी खड्ड को पूरी तरह से कवर कर देगा। इसके लिए न केवल पुल बनाना पड़ेगा, वल्कि खड्ड के ऊपरी हिस्से में छोटे-छोटे चेकडैम भी बनाने पड़ेंगे।

केंद्र की एक्सपर्ट एजेंसी करे पुल का निर्माण

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया व केंद्रीय मंत्रालय में मामला उठाया है। उन्होंने मांझी खड्ड पर बनाए जाने वाले पुल को केंद्र द्वारा अपनी एक्सपर्ट एजेंसी से बनवाने कहा है। इस बारे में अभी तक केंद्र से हिमाचल सरकार को फिलहाल कोई राहत भरे संकेत नहीं मिले हैं। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक विनय धीमान का कहना है कि सरकार ने एयरपोर्ट अॅथारिटी ऑफ इंडिया के साथ मिलकर इसके तकनीकी पहलुओं पर काम कर लिया है और डिजाइन व चैनेलाइजेशन संबंधी फाइनल रिपोर्ट आना बाकी है।

: *नीतीश के मंत्री-विधायक ग्रामीणों ने एक किलोमीटर तक खदेड़े, जानिए किसलिए भडक़े लोग* 

बिहार के नालंदा में बुधवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और हिलसा विधायक कृष्ण मुरारी उर्फ प्रेम मुखिया पर लोगों ने हमला कर दिया। ग्रामीणों दोनों के पीछे लाठी-डंडे लेकर दौड़े। जान बचाने के लिए दोनों नेता एक किलोमीटर भागे और तीन गाडिय़ां बदलीं। नालंदा सीएम नीतीश कुमार का गृह जिला है। बिहार में तीन दिन में दूसरे मंत्री पर हमला हुआ है।

25 अगस्त को पटना के अटल पथ पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे की गाड़ी पर पथराव हुआ था। बता दें कि 23 अगस्त को पटना के फतुहा में हिलसा के नौ लोगों की सडक़ हादसे में मौत हुई थी। विधायक और मंत्री मलामा गांव में पीडि़त परिवार से मिलने पहुंचे थे। थोड़ी देर मिलने और फोटो इत्यादि खिंचवाने के बाद जब वे लौटने लगे, तो गांव वालों ने उन्हें कुछ देर और रुकने को कहा। भीड़ ने पहले स्थानीय पत्रकार और विधायक कृष्ण मुरारी को घेर लिया। लाठी-डंडे निकालकर ले आए। गांववालों का कहना था कि विधायक के कहने पर ही घटना के दिन किए गए जाम को हटाया था, आज तक सही मुआवजा नहीं मिला। यह कहते हुए ग्रामीण उग्र हो गए और मंत्री और विधायक के पीछे दौड़ पड़े।

: *भारत करेगा 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की दावेदारी, यह शहर होगा चेहरा* 

कैबिनेट ने दी मंजूरी; 31 अगस्त डेडलाइन, फैसला नवंबर में

भारत 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी अहमदाबाद में करने के लिए दावा पेश करेगा। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने बिडिंग प्रोपोजल को मंजूरी दे दी है। इससे पहले 14 अगस्त को भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन ने इसे मंजूरी दी थी। अब भारत को 31 अगस्त तक फाइनल बिडिंग प्रोपोजल देना होगा। नवंबर के आखिर में यह फैसला होगा कि मेजबानी मिलेगी या नहीं।

कनाडा के रेस से बाहर हो जाने के बाद भारत के लिए 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी पाने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। पिछले महीने कॉमनवेल्थ स्पोर्ट के डायरेक्टर डैरेन हॉल की लीडरशिप में एक टीम ने अहमदाबाद में मौजूद आयोजन स्थलों का दौरा किया था और उससे संतुष्ट दिखे थे।

: *माधोपुर हेडवर्क्स का फ्लड गेट टूटा, एक कर्मचारी बहा, रावी नदी का जलस्तर बढ़ा* 

पठानकोट जिले के माधोपुर हेडवर्क्स का फ्लड गेट टूट गया है, जिससे पानी तेजी से रावी नदी में जा रहा है। बताया जा रहा है उसमें गेट टूटने के कारण कर्मचारी पानी में बह गया है। गेट टूटने से रावी नदी में जलस्तर बढ़ गया है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। जानकारी के अनुसार कुछ लोग फंसे भी हैं, जिनके बचाव के लिए वायुसेना की भी मदद ली जाएगी। डिप्टी कमिश्नर पठानकोट अदिते उप्पल, एडीसी पठानकोट और सिंचाई विभाग के अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।

आपको बता दें कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और फ्लड गेट टूटने से रावी नदी के किनारे बसे गांव ज्यादा प्रभावित होंगे। देखिए घटना की तस्वीरें। हालांकि कुछ देर पहले डीसी पठानकोट ने माधोपुर का दौरा किया था और स्थिति नियंत्रण में बताई गई थी, लेकिन कुछ देर बाद ही तीन से चार फ्लड गेट टूटने से स्थिति साफ तौर पर गंभीर होती जा रही है।

: *ट्रंप ने फिर किया भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा* 

 अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद इस साल मई में भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने का श्रेय उन्हें जाता है और उन्होंने ऊंचे आयात शुल्क की धमकी देकर संघर्ष विराम कराया था। ट्रंप ने मंगलवार को वाशिंगटन में मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान कहा कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूछा कि भारत और पाकिस्तान के बीच क्या हो रहा है। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान से भी पूछा कि क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच जबरदस्त नफरत है।

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि वह हस्तक्षेप नहीं करते तो दोनों देश परमाणु युद्ध की तरफ बढ़ रहे थे। भारत ने बार-बार किसी बाहरी दबाव में सैन्य कार्रवाई रोकने की बात से इनकार किया है। उसने कहा कि यह फैसला पाकिस्तानी सेना के अनुरोध पर किया गया था। ट्रंप ने कैबिनेट की बैठक में दावा किया कि उन्होंने पीएम मोदी से पूछा, “आप व्यापार करना चाहते हैं? यदि आप लड़ाई जारी रखेंगे तो हम आपके साथ कोई व्यापार नहीं करेंगे।”

अमरीकी राष्ट्रपति के अनुसार, उन्होंने पीएम मोदी से 24 घंटे के भीतर लड़ाई रोकने को कहते हुए ऐसा नहीं करने पर भारी-भरकम आयात शुल्क लगाने की धमकी दी। अमरीकी राष्ट्रपति पिछले तीन महीने से अधिक समय में कई बार दावा कर चुके हैं कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने के लिए उन्होंने मध्यस्थता की थी।

: *नाबार्ड में सालाना 30 लाख सैलरी वाली नौकरी पाने का सुनहरा मौका, इस डेट तक करें आवेदन* 

युवाओं के लिए नाबार्ड में मोटी सैलरी वाली नौकरी पाने का शानदार मौका है। यहां स्पेशलिस्ट की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए हैं। योग्य उम्मीदवार 31 अगस्त तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। बता दें कि नाबार्ड-राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक प्रमुख रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े ऋण और अन्य वित्तीय गतिविधियों को देखने, सहायता देने का काम करता है। जिसे लीगल ऑफिसर, सॉफ्टवेयर डिवेलपर और रीमोट सेंसिंग और सीआईएस एनालिस्ट की जरूरत है।

योग्यता: नाबार्ड में लीगल ऑफिसर बनने के लिए उम्मीदवारों का बार काउंसिल में बतौर एडवोकेट रजिस्टर होना चाहिए। इसके आलावा पद से संबंधित 10 साल का अनुभव होना जरूरी है। रीमोट सेंसिंग और जीआईएस एनालिस्ट के लिए बीटेक/ रीमोट सेंसिंग और जीआईएस बीई/ जियोइनफॉर्मेटेक्स/जियोमेटेक्स में न्यूनतम 60 प्रतिशत या एमएससी/ एमटेक/मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग) आदि में 55 प्रतिशत की डिग्री होनी चाहिए। साथ ही 2 साल पद का अनुभव हो। सॉफ्टवेयर डिवेलपर के लिए बीटेक/ बीई कम्प्यूटर साइंस/ कम्प्यूटर इंजीनियरिंग/ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ होना चाहिए।

आयुसीमा: न्यूनतम 21- 65 वर्ष पदानुसार अलग-अलग

चयन प्रक्रिया: साक्षात्कार के जरिए चयन होगा यानी अभ्यर्थियों को किसी तरह की लिखित परीक्षा नहीं देनी होगी।

आवेदन शुल्क: एससी/एसटी/ पीडब्ल्यूबीडी उम्मीदवारों को

150 रुपए आवेदन शुल्क देना होगा। वहीं अन्य सभी वर्गों के अभ्यर्थियों 850 रुपए एप्लीकेशन फीस देनी होगी।

: *चहेतों के लिए सरकार ने APMC को लगाया करोड़ों का चूना, 4800 में नीलाम कर दी दुकानें: जयराम* 

 पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार और लूट की हद मचा रखी है। जिस पराला मंडी में 10 साल पहले 50 से 83 हजार रुपए में दुकानें नीलाम हुई थी। उसी जगह बनी नई दुकानें आज 4800 में ही नीलाम हुई हैं। अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए नियम कानून के साथ जितना खेला जा सकता था उतना खेला गया। इस सरकार में लूट की खुली छूट दी गई है। दुकानों के बेस प्राइस बहुत कम रखे गए। ज्यादातर लोगों की एप्लीकेशन रिजेक्ट की गई जिससे अपनी मनमर्जी चलाई जा सके।

अपने चहेतों को लाभ देने के लिए प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। किसानों और बागवानों के हितों की रखवाली करने वाली एपीएमसी सरकार के चहेतों के हितों की रखवाली करने में व्यस्त है। जिस कारण से किसान और बागबान परेशान हो रहे हैं। सरकार के इस कदम से प्रदेश को मिलने वाले राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। यह संगठित लूट है जो सरकार द्वारा संरक्षित है। इस विषय पर जब भारतीय जनता पार्टी के विधायक रणधीर शर्मा द्वारा प्रश्न किया गया तो सरकार सही जवाब देने की बजाय इधर-उधर की बात करने लगी। भ्रष्टाचार हुआ है, यह सरकार की जानकारी में है इसके बाद भी भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई करने की बजाय सरकार उनका बचाव कर रही थी। भ्रष्टाचार से हुई दुकानों के आवंटन को रद्द करने का आश्वासन सरकार द्वारा नहीं दिया गया।विधानसभा के अंदर सरकार द्वारा दिए गए जवाब से असंतुष्ट होकर भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल ने सदन से वॉक आउट किया।

जयराम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार हर दिन प्रदेश को लूटने में लगी है। किसानों-बागवानों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्हें लूटने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। सरकार का ध्यान प्रदेश के जरूरतमंद लोगों की बजाय चुनिंदा मित्रों पर है और उन्हीं के विकास के लिए सरकार नियम कानून ताक पर रखकर काम कर रही है। सरकार के इस खेल में जो करोड़ों रुपए की लूट हो रही है, यदि उसका लाभ एपीएमसी को मिलता तो किसानों-बागवानों का भी भला होता। अफसोस की बात यह है कि प्रदेश के हित सरकार की प्राथमिकता में है ही नहीं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्तमान की व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार प्रदेश में घोटाले के रिकॉर्ड तोड़ रही है और भ्रष्टाचार के नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है। भ्रष्टाचार करने के लिए सरकार ने कोई भी जगह नहीं छोड़ी। एपीएमसी की तीन मंडियों पराला, टूटू और शिलारू में कुल 70 दुकानों के लिए आने वाले 133 आवेदनों में से 63 आवेदन रद्द कर दिए गए। सरकार द्वारा 70 दुकानों के लिए 70 आवेदन स्वीकार किए गए। बाकी आवेदनों को रिजेक्ट करके बेस प्राइस से चंद रुपए अधिक में दुकानें सरकार के चहेतों को आवंटित कर दी गई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि 10 साल पहले जहां पर 50 हजार से लेकर 83 हजार तक दुकानों की बोली लगी थी। आज वहां 4800 में ही दुकान क्यों बेची गई? भारतीय जनता पार्टी सभी दुकानों के आवंटन को रद्द करके फिर से उनके टेंडर कराए जाने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग करती है।

: *30 तोले चांदी, 3 तोले सोना चोरी, जवाली में घर से 50 हजार की नकदी भी साफ* 

पुलिस थाना जवाली के अधीन पंचायत हरनोटा में मंगलवार रात चोरों न हरनोटा पंचायत के ज्योर निवासी बंसी लाल के घर से 30 तोले चांदी, तीन तोले सोना और 50 हजार की नकदी पर हाथ साफ कर दिया। चोर घर के पीछे की दीवार फांदकर भीतर दाखिल हुए और ट्रंक, अलमारी में रखे जेबर व नकदी चोरी कर ले गए। सुबह जब परिवार ने देखा तो घर के दरवाजे और ताले टूटे हुए थे।

इसकी सूचना पंचायत प्रधान को दी गई तथा प्रधान ने इस बाबत पुलिस थाना जवाली में सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौका पर पहुंची तथा तफ्तीश जारी कर दी। पुलिस ने घर के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला है, एजिसमें तीन चोर सामान उठाकर ले जाते हुए कैद हुए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डीएसपी जवाली वीरी सिंह ने खबर की पुष्टि की है।

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: भारी बारिश और भूस्खलन के कारण भरमौर में 3000+ लोग फंसे हैं, इलाका वर्तमान में विद्युत और नेटवर्क से असमर्थ है।

🚨 पुलिस और SDRF लगातार मदद कर रहे हैं। कृपया घबराएं नहीं।

📞 मोबाइल नेटवर्क की विफलता के कारण, अपने परिचितों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्न नंबरों पर टेलीफोनिक रूप से संपर्क करें: 0177-2621796 / 0177-2621714

: चंबा. हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में तीन दिन में बड़ी तबाही हुई है. यहां पर बीते दो दिन से मोबाइल नेटवर्क गायब हैं और कुछ इलाकों में अब एयरटेल का सिग्नल बहाल हो पाया है. सबसे ज्यादा परेशानी का सबब मणिमहेश में देखने को मिल रहा है. यहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु भरमौर, हंडसर, और मणिमहेश के रास्ते पर फंसे हुए हैं. यात्रा को फिलहाल, स्थगित कर दिया गया है. वहीं, अब एनडीआरएफ की टीम ने मोर्चा संभाला है औऱ मणिमहेश यात्रा में बड़ा रेस्क्यू अभियान शुरू किया है.

मणिमहेश में हजारों श्रद्धालु फंसे, धन्छो से 280 बच्चों सहित 3269 लोग निकाले

मणिमहेश यात्रा में बड़ा रेस्क्यू अभियान शुरू किया है.

एनडीआरफ से मिली जानकारी के अनुसार, 14वीं बटालियन एनडीआरएफ की टीम ने चंबा जिले के भरमौर के हंडरस के ऊपर मणिमहेश के रास्ते पर धन्छो में अस्थायी फुटब्रिज और रस्सियों की मदद से सुरक्षित मार्ग तैयार किया. टीम ने पर्वतारोहण उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए कठिन हालात में फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकाला. एनडीआरफ ने बताया कि कुल 3,269 श्रद्धालुओं को सुरक्षित रूप से हड़सर (चंबा) की ओर निकाला गया. इनमें 1,730 पुरुष, 1,259 महिलाएं और 280 बच्चे शामिल थे.

जानकारी के अनुसार, मणिमहेश यात्रा के दौरान जगह-जगह भूस्खलन रास्ते पूरी तरह से टूट चुके हैं. फिलहाल, चंबा में मणिमहेश के लिए हवाई सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं. कंपनी ने अपने हेलीकॉप्टर वापस भेज दिए हैं. केवल एक हेलीकॉप्टर रुका हुआ है. सुंदरसी सहित कई स्थानों पर भूस्खलन से रास्ते बंद हैं. पिछले चार दिनों से चंबा जिला के सभी कंपनियों के मोबाइल सिग्नल पूरी तरह से बंद हो चुके हैं और अफरातफरी का माहौल है. डीसी चंबा मुकेश रेपस्वाल ने बताया कि भारी बारिश की वजह से रास्ते बाधित हुए है, इसलिए लोग अपनी यात्रा स्थगित करें. भरमौर के होली के सलून गांव में भूमि कटाव से करीब 9 घर रावी नदी में गिरे हैं औऱ पूरा गांव खत्म होने की कगार पर है.

ली के सलून गांव में भूमि कटाव से करीब 9 घर रावी नदी में गिरे हैं औऱ पूरा गांव खत्म होने की कगार पर है.

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चंबा के विधायक ने क्या बताया

चंबा के कांग्रेस विधायक नीरज नैय्यर ने बताया कि मणिमहेश यात्रा के दौरान हड़सर से ऊपर दोनाली के पास पहाड़ी से भूस्खलन के बाद पत्थर गिरने से घायल हुए छह श्रद्धालुओं को बुधवार को हेली टैक्सी से भरमौर से चंबा मेडिकल कॉलेज लाया गया. ये सभी श्रद्धालु पहले भरमौर अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनकी स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट किया गया. घायलों में से दो की टांगें टूटी हैं, जबकि चार अन्य को चोटें आई हैं. इनमें धर्मजीत सिंह निवासी हमीरपुर, और अमृत कुमार निवासी अमृतसर भी शामिल हैं. इनके पांव की हड्डी टूटी है और उन पर प्लास्टर लगाया है. दोनों अपने दोस्तों के साथ यात्रा पर निकले थे. प्रशासन ने दोनों के परिजनों को सूचित कर दिया है और उनके आने के बाद इन दोनों का ऑपरेशन किया जाएगा.

मणिमहेश यात्रा में बड़ा रेस्क्यू अभियान शुरू किया है.

कब तक आएगा सिग्नल

विधायक ने बताया कि बुधवार रात को सिग्नल आने के बाद सुबह फिर नहीं है और अब दोपहर ग्यारह और बारह बजे के बीच फिर से सिग्नल बहाल हो सकता है. भारी बारिश और भूस्खलन के कारण प्रभावित चंबा जिले में मोबाइल नेटवर्क बहाल करने के लिए कांगड़ा से जियो की ओर से विशेषज्ञ टीम रवाना हो गई है. टीम फाइबर केबल की जगह-जगह मरम्मत के बाद गाड़ियों की अदला-बदली कर टीम जोत होकर चंबा पहुंचने का प्रयास कर रही है. टीम बुधवार को जोत पहुंच गई और अब गुरुवार को चंबा शहर पहुंचने की उम्मीद है. गौरतलब है कि चंबा में बिजली भी गायब है.

विधायक ने बताया कि मणिमहेश में सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं.

मणिमहेश में सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित

विधायक ने बताया कि मणिमहेश में सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और चंबा से भरमौर तक मार्ग बहाल करने में लगभग चार से पांच दिन लग सकते हैं. वह बताते हैं कि बनीखेत चम्बा रोड, चेहली तक खुला है और उम्मीद है कि आज रात तक चम्बा तक खुल जाएगा. उधऱ, भरमौर से भाजपा विधायक जनक राज ने विधानसभा सत्र के दौरान मणिमहेश यात्रा श्रद्धालुओं और भरमौर विधानसभा में स्थानीय लोगों को राहत प्रदान करने के लिए सरकार से की हेलीकॉप्टर सेवाओं की माँग की है. News:हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, चंबा और कांगड़ा में भारी बारिश से 582 रोड बंद, मनाली कटा, मणिमहेश यात्रा में हजारों लोग फंसे, बिजली पानी और नेटवर्क बाधित हैं.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से 4 जिलों में हालात खराब हैं. मंडी, कुल्ल, चंबा और कांगड़ा के कई इलाकों में लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है. आलम यह है कि प्रदेशभर में बीती शाम छह बजे तक दो नेशनल हाईवे सहित 582 रोड बंद थे.

मनाली से पहले रायसन में हाईवे टूटा है.

जानकारी के अनुसार, बुधवार रात को भी मंडी और कुल्लू के कई इलाकों में भारी बारिश होती रही है. हालांकि, गुरुवार को धूप खिली है. लेकिन हालात बेहद खराब हो गए हैं. मनाली देश दुनिया से कट गई है. कांगड़ा में पौंग बांध से एक लाख से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है. चंबा में मणिमहेश यात्रा पर गए हजारों लोग फंसे हुए हैं और यहां पर मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से गायब है.

कुल्लू जिले का हाल

भारी बारिश के कारण कुल्लू के बंजार और मनाली उपमंडल में गुरुवार को भी सभी शिक्षण संस्थान बंद रखे गए हैं, जबकि कुल्लू उपमंडल में 4 स्कूल बंद किए गए. प्रशासन की विभागीय टीमें मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने में लगातार जुटी हुई है. सैंज और बंजार लगघाटी के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, पेयजल और मोबाइल कनेक्टिविटी बाधित है. संपर्क मार्ग बाधित होने और नदी-नालों पर बने कई पुल बह जाने से अधिकांश ग्रामीण इलाकों तक पहुंच मुश्किल हो गई है.40 घंटे बीत जाने के बावजूद राजस्व विभाग की टीमें कई जगहों पर नुकसान का आकलन नहीं कर पाई हैं. जिले के अधिकांश क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति ठप है और कई गांवों में लोगों को पिछले चार दिनों से पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है.

मंडी जिले में कुल्लू सीमा तक नेशनल हाईवे का हाल खराब है. लगातार हाईवे पर लैंडस्लाइड हो रही है. बुधवार को कुछ देर के लिए हाईवे खुला और फिर रात को फिर से बंद हो गया. मंडी के पंडोग डैम के गेट खोल दिए गए हैं औऱ अब पानी नहीं रोका जा रहा है कि क्योंकि यहां पर काफी गाद भर गई है.

चंबा और कांगड़ा के हाल

चंबा में भरमौर में मणिमहेश यात्रा में गए श्रद्धालु फंसे हुए हैं. यहां पर पूरे जिले में कई इलाकों में नेटवर्क गायब है. वहीं, होली के सलून गांव में भूमिक कटाव के चलते 9 घर रावी नदी में समा गए हैं. फिलहाल, भरमौर से एनडीआरएफ की टीमें श्रद्धालुओं को धन्छो से रेस्क्यू कर रही हैं.

: *बिहार में होते हुए भी सीएम को हिमाचल की फिक्र, मुख्य सचिव से ली सारी रिपोर्ट, दिए ये निर्देश* 

मुख्यमंत्री ने दरभंगा पहुंचते ही मुख्य सचिव से ली सारी रिपोर्ट, चंबा में राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश

राहुल गांधी की ‘अधिकार यात्रा’ में शामिल होने के लिए बिहार पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू लगातार हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से बने हालात की जानकारी लेते रहे। दिल्ली से हवाईयात्रा कर दरभंगा पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने सबसे पहले मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना से फ़ोन पर संपर्क कर ताज़ा स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि वरिष्ठ अधिकारी तुरंत बैठक कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करें और उसमें गति लाएं। उन्होंने आपदा से प्रभावित बिजली-पानी की योजनाओं को शीघ्र बहाल करने तथा सभी आवश्यक सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने विभिन्न जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों से भी अपडेट लिया।

लाहुल से बीमार लोगों के फंसे होने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने तुरंत उनके एयर लिफ़्ट के आदेश दिए और उन्हें कुल्लू पहुंचाने का प्रबंध किया। साथ ही उपायुक्त को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि मरीजों को तत्काल और उचित चिकित्सा सुविधा मिले। बिहार प्रवास के दौरान भी मुख्यमंत्री लगातार हिमाचल की स्थिति पर नजऱ बनाकर हरसंभव मदद सुनिश्चित करने के लिए तत्पर हैं। वह प्रदेश में जारी राहत एंव बचाव कार्यों का लगातार अपडेट ले रहे हैं। बिहार में राहुल गांधी की अधिकार यात्रा के दौरान सीएम सुक्खू उनकी ओपन जीप में उनके साथ थे।

सडक़-बिजली-पानी बहाल करने के आदेश

मुख्यमंत्री सुक्खू ने लगातार बारिश के कारण पिछले 72 घंटों के दौरान चंबा जिला में हुई जन हानि पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ है और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिवारजनों को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। सीएम सुक्खू ने चंबा जिला प्रशासन को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सडक़ मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति योजनाओं की तत्काल मरम्मत के भी निर्देश दिए हैं।

: *Manimahesh Yatra : मणिमहेश यात्रा पर पूरी तरह रोक, चंबा प्रशासन ने लिया यह फैसला* 

चंबा के भरमौर स्थित मणिमहेश झील हिंदुओं और शिव भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है

खराब मौसम के चलते चंबा प्रशासन का फैसला, तीन दिन में 11 श्रद्धालुओं की हो चुकी है मौत

विश्व प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा पर मौसम के बिगड़े हालातों के चलते पूरी तरह रोक लगा दी गई हैं। हड़सर-डल झील पैदल मार्ग से श्रद्धालुओं को सुरक्षित रेस्क्यू कर भरमौर पहुंचा दिया गया है। पिछले तीन दिनों के दौरान यहां 11 श्रद्धालुओं की मौत हुई है। इनमें से दो शवों को हेलिकॉप्टर से चंबा पहुंचा दिया गया है। साथ ही जम्मू-कश्मीर के डोडा के भद्रवाह व रामबन सहित विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं को वापस भेज दिया गया है। जिला प्रशासन ने साथ ही लोगों से मणिमहेश यात्रा को लेकर फैल रही विभिन्न अफवाहों से बचने का आह्वान भी किया। उपायुक्त चंबा मुकेश रेप्सवाल ने खबर की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि पिछले चार दिनों से जिला में मोबाइल व इंटरनेट सेवाएं बाधित होने के चलते मणिमहेश यात्रा को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल रही थीं। इसके बावजूद जिला प्रशासन पूरी तरह सजगता से काम कर रहा था। गुरुवार को जिला चंबा की लाइफलाइन चंबा-पठानकोट सडक़ को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। इसके अलावा चंबा-भरमौर मार्ग कलसुईं तक खुला है।

भरमौर मार्ग को बारिश के कारण काफी नुकसान हुआ है, जिसे खोलने का काम जारी है। चंबा-सलूणी मार्ग धारगला और चंबा-तीसा बडोह तक खुला है। चंबा-जोत मार्ग पर यातायात बहाली को लेकर काम जारी है। बारिश के कारण जिला में बिगड़े हालातों को पटरी पर लाने का काम जारी है। शहर में पेयजल आपूर्ति ठप होने के चलते मणिमहेश श्रद्धालुओं को टैंकरों के माध्यम से पानी मुहैया करवाया गया है। उधर, उपायुक्त मुकेश रेप्सवाल ने बताया कि बारिश के कारण बिगड़े हालातों को देखते हुए मणिमहेश यात्रा पर पूर्णतया रोक लगा दी गई है। मणिमहेश यात्रा को लेकर चंबा पहुंचे श्रद्धालुओं को घर वापसी करने को कह दिया गया है। हड़सर-मणिमहेश मार्ग को खाली कर सभी श्रद्धालुओं को भरमौर पहुंचा दिया गया है।

हेलिकॉप्टर से भरमौर पहुंचे डीसी-एसपी

चंबा। उपायुक्त मुकेश रेप्सवाल और पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव गुरुवार दोपहर बाद हेलिकाप्टर के माध्यम से भरमौर पहुंचे। उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक ने भरमौर में फंसे श्रद्धालुओं से बातचीत करने के साथ ही व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला