आज सुबह के मुख्य समाचार पत्र ✉ और आज के राशिफल और पंचांग संपादक जितेंद्र कुमार

*🛑प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल के लिए सिक्का और डाक टिकट जारी किया...प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती की पूर्व संध्या पर केवड़िया में 1219 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया*

Nov 1, 2025 - 06:38
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आज सुबह के मुख्य समाचार पत्र ✉ और आज के राशिफल और पंचांग संपादक जितेंद्र कुमार

TRNDKBJITENDRAKUMAR: 52 वर्षीय राजू पटेल ने रात में “बिल्ली” समझकर असली बाघ के सिर पर हाथ फेर दिया! ठर्रे के नशे में बोले – “हट न बे किटी.”

बाघ ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप खड़ा रहा.

वन विभाग ने बाद में टाइगर को जंगल भेजा, पर अब राजू को पुलिस सुरक्षा दी गई है, क्योंकि इलाके के शादीशुदा पुरुष उनके घर के बाहर जुटे हैं, सबको चाहिए “वो वाला ठर्रा” जो बाघ का डर मिटा दे. 🐯🥴

TRNDKB देश राज्यों से बड़ी खबरें*

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*1* PM बोले- पटेल चाहते थे पूरा कश्मीर हमारा हो, नेहरू ने बांटा; जो अंग्रेज नहीं कर पाए कांग्रेस ने किया, वंदे मातरम् का हिस्सा काटा

*2* उन्होंने देश के भाग्य को आकार दिया', सरदार पटेल की जयंती पर PM मोदी की श्रद्धांजलि,हमने मुलायम और प्रणब दा का किया सम्मान, कांग्रेस तो आंबेडकर का भी करती रही अपमान: PM मोदी

*3* राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम में दिए अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि 'एक बार सरदार पटेल ने कहा था कि देश सेवा से बड़ा कोई सुख नहीं है। मैं भी मानता हूं कि खुद को देशसेवा के लिए समर्पित करने से बड़ा सुख नहीं है।'

*4* पीएम मोदी ने कहा कि सरदार साहब चाहते थे कि जैसे उन्होंने बाकी रियासतों का विलय किया, वैसे ही ओर कश्मीर का विलय हो, लेकिन, पंडित नेहरू ने उनकी वो इच्छा पूरी नहीं होने दी। कश्मीर को अलग संविधान और अलग निशान से बांट दिया गया। कश्मीर पर कांग्रेस ने जो गलती की थी, उसकी आग में देश दशकों तक जलता रहा।

*5* पीएम मोदी ने कहा कि 'आज हमारे देश की एकता और अंदरूनी सुरक्षा को घुसपैठियों से गंभीर खतरा है। दशकों से, विदेशी घुसपैठिए हमारे देश में घुस रहे हैं, इसके संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, और इसका जनसांख्यिकी का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। दुर्भाग्य से, पिछली सरकारों ने इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज किया और इस समस्या से आंखें मूंद लीं। वोट-बैंक की राजनीति के चक्कर में, उन्होंने जानबूझकर देश की सुरक्षा से समझौता किया

*6* राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'आज का दिन हमारे लिए विशेष दिन है। हर 31 अक्टूबर को हम एकता दौड़ सरदार पटेल साहब के सम्मान में आयोजित करते हैं। आज सरदार पटेल साहब की 150वीं जयंती है और इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी ने तय किया है कि इसको एक विशेष आयोजन के रूप में देशभर में मनाया जाएगा

*7* कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर शक्ति स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

*8* कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उनकी निजी राय में आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश की ज्यादातर कानून-व्यवस्था की समस्याएं भाजपा और आरएसएस से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि खुद सरदार पटेल ने महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस की आलोचना की थी

*9* खरगे ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कांग्रेस पर किए गए हमलों पर पलटवार किया। उन्होंने सरदार पटेल के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या (1948) के बाद आरएसएस की आलोचना की थी

*10* सैन्य ताकत के साथ-साथ बौद्धिक क्षमता भी जरूरी...', युद्ध की बदलती प्रकृति पर बोले थल सेना प्रमुख

*11* आधार कार्ड को लेकर हाई कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, बताया मूल अधिकार; UIDAI को नसीहत

*12* बिहार चुनाव- NDA का संकल्प पत्र, KG-PG तक मुफ्त शिक्षा, 1 करोड़ नौकरी का वादा; कांग्रेस बोली- 26 सेकेंड में मेनिफेस्टो जारी किया, इनके वादे झूठे

*13* राजद काल में बिहार में उद्योग बन गया था अपराध-अपहरण, सिवान में महागठबंधन पर जमकर बरसे CM योगी

*14* आवारा कुत्तों पर SC ने सरकारों से फिर मांगा जवाब, कहा- सभी मुख्य सचिव सो रहे; हमारे आदेश का सम्मान नहीं, आने दीजिए, हम निपटेंगे

*15* कर्नाटक में भाजपा नेता के बेटे ने टोलकर्मी को पीटा, बोला- तुम जानते नहीं मैं कौन हूं; स्टाफ ने फ्री में जाने से रोका था

*16* दूसरा टी-20, भारत के 5 बैटर्स आउट, स्कोर 83 रन, अक्षर रनआउट, हेजलवुड ने पावरप्ले में 3 विकेट झटके; अभिषेक फिफ्टी के करीब

*17* दिन के ऊपरी स्तर से 600 अंक गिरा बाजार, सेंसेक्स 300 अंक नीचे 84,000 पर आया; ऑटो, बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में खरीदारी

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TRNDKB: लखीमपुर- जाम के चलते शहर बेहाल विलोबी हाल के पास काफी देर से लगा हुआ है जाम 

ना तो कोई ट्रैफिक पुलिस कर्मी वहां मौजूद है और ना ही किसी और संबंधित विभाग का कोई कर्मी वहां उपस्थित है

जबकि यही आसपास कलेक्ट्रेट सहित कई अन्य सरकारी महत्वपूर्ण विभाग हेड पोस्ट ऑफिस और बच्चों के कई स्कूल मौजूद हैं

TRNDKB: प्राकृतिक रौद्र रूप, पापियों का पाप से अब पृथ्वी माता जी नाराज है। 50 50 किलोग्राम का ओला फेंक रहे हैं भगवान।

हर जगह आपदाओं का संकेत है। एक ओला तो एक सौ किलो का था।

TRNDKB: *_🛑गुजरात के केवड़िया में आयोजित एक समारोह में, प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर उनकी विरासत को सम्मानित किया।_*

*🔳ऑल इंडिया न्यूज़पेपर.✍*

_इस कार्यक्रम में राष्ट्र के प्रति सरदार पटेल के उल्लेखनीय योगदान का स्मरण किया गया और उनकी अमिट भावना और दूरदर्शिता को दर्शाया गया जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।_ *Pm*

TRNDKB: *🛑महिला वर्ल्डकप के इतिहास की सेमीफाइनल की अब तक की सबसे महान पारियों में से एक पारी खेलने वाली 127 रन(134 बाल) भारत की जेमिमा रोड्रिग्स प्लेयर ऑफ द मैच चुनी गईं....*

खास बात ये थी कि स्टेज पर पुरुस्कार वितरण के दौरान वो लगातार खुशी के आंसुओं से रो कर अपनी बात कहती नजर आईं.....🥲🇮🇳🇮🇳

वेलडन जेमिमा.....आप आज हीरो हो (हीरोइन नही) पूरे भारत की😊🇮🇳😊🇮🇳🇮🇳❣️❣️❣️😍

TRNDKB: 🛑महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में सोशल मीडिया पर रील बनाने की सनक ने एक युवक की जान ले ली और उसके दोस्त को गंभीर रूप से घायल कर दिया. यह दर्दनाक हादसा शेगांव तालुका के आलसना गांव के पास हुआ. दोनों युवक चलती ट्रेन के सामने खतरनाक अंदाज में वीडियो शूट कर रहे थे, तभी तेज रफ्तार ट्रेन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. मृतक की पहचान मोहम्मद नदीम मोहम्मद रफिक (उम्र- 28 वर्ष) के रूप में हुई है. उसका साथी, जो गंभीर रूप से घायल हुआ है, को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत शेगांव के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने बताया कि घायल युवक की हालत नाजुक बनी हुई है.

 पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों युवक आलसना गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने आए थे. उसी दौरान उन्होंने रेलवे ट्रैक के पास वीडियो शूट करने की योजना बनाई थी. हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और ट्रेन कुछ देर के लिए रोक दी गई. स्थानीय ग्रामीणों ने इस घटना को 'सोशल मीडिया की लत का खतरनाक परिणाम' बताया है. उनका कहना है कि युवा आजकल बिना सोचे-समझे जान जोखिम में डालकर रील बनाने की कोशिश करते हैं. कई बार ये वीडियो वायरल हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है.

TRNDKB: *तरंगा गाँव का युवक लापता, परिजनों ने लगाई मदद की गुहार*

*चान्हो :* थाना क्षेत्र के तरंगा गाँव निवासी असगर खान का पुत्र खालिद बीते आज दिनाक 31अक्टूबर 2025 से लापता है। परिजनों के अनुसार खालिद मुंह से गूंगा है और आखिरी बार शुक्रवार दोपहर लगभग एक बजे घर से निकला था। तब से उसका कोई पता नहीं चल पाया है।

बताया गया कि उसके पास एक मोबाइल फोन भी था, जो अब स्विच ऑफ है। परिजन काफी चिंतित हैं और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश कर रहे हैं।

जिस किसी को भी खालिद के बारे में जानकारी मिले, कृपया नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क करें —

📞 8210867063

: आज का राशिफल व पंचांग

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01 नवंबर 2025, शनिवार

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आज और कल का दिन खास

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01 नवम्बर 2025 : आंध्रप्रदेश - छत्तीसगढ़ - हरियाणा - झारखंड - मध्यप्रदेश - पंजाब - उतराखंड राज्य का स्थापना दिवस आज। 

02 नवम्बर 2025 : देवउठनी एकादशी व्रत कल।

02 नवम्बर 2025 : तुलसी विवाह कल।

02 नवम्बर 2025 : प्रबोधिनी एकादशी व्रत कल।

02 नवम्बर 2025 : पुष्करराज स्नान पर्व कल से प्रारम्भ।

02 नवम्बर 2025 : गरुड़ द्वादशी कल।

राजेन्द्र गुप्ता,

ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

मो. 9116089175

नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें।

आज का राशिफल

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01 नवंबर 2025, शनिवार

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मेष राशि : आप महत्वाकांक्षी उद्यम में प्रवेश कर सकते हैं। यह आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होगा। यदि आप उच्च अध्ययन, नौकरी या व्यावसाय के लिए विदेश जाना चाहते हैं तो आपको स्वयं के प्रयासों से सफलता मिलेगी। व्यापार में शामिल लोग किसी पुराने मित्र की मदद ले सकते हैं। राजनीति या सामाजिक कार्यों से जुड़े लोग खुद को दृढ़ता से स्थापित करेंगे। धन संबंधी मामले आसानी से आगे बढ़ेंगे और आप अच्छा मुनाफा भी कमाएंगे। पारिवारिक संदर्भ में आप अपने परिवार के सुखमय जीवन के लिए भौतिक वस्तुओं पर भी खर्च करेंगे।

वृषभ राशि : छात्रों को सामान्य से अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, फिर भी वे अपने निरंतर प्रयासों से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आपको अध्ययन के प्रति अपने दृष्टिकोण में अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा। यदि आप नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो आपके रास्ते में बहुत सारे अवसर आ सकते हैं और यहां तक कि चुनने के लिए विकल्प भी हो सकते हैं। महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना आपको परेशानी में ड़ाल सकता है। परिवार की महिला सदस्य आपकी समस्याओं को कुछ हद तक सुलझाने में आपकी मदद कर सकती है।

मिथुन राशि : किसी संदेहजनक कार्य में हाथ ना डालें, वरना आप कानूनी कार्यवाही में फंस सकते हैं। अपने सामाजिक संपर्कों को मजबूत करने के लिए अपने आकर्षण और शिष्टता का उपयोग करें। आपकी आर्थिक और व्यावसायिक स्थिति में सुधार होगा। पैतृक संपत्ति की प्राप्ति आपके सुख में इजाफा करेगी। पारिवारिक सदस्यों से असहमति के कारण मन तनाव से भरा रहेगा। मां की सेहत का ख्याल रखें और नियमित जांच के लिए उन्हें ले जाना न भूलें।

कर्क राशि : प्रियजनों के साथ समय बिताना आनंददायक रहेगा। व्यावसायी संदर्भ में आज आप महसूस कर सकते हैं कि आपके पास बहुत अधिक काम है, किंतु उसे पूरा करने के लिए समय बहुत कम है। व्यावसायिक, आर्थिक और सामाजिक प्रतिबद्धता का आपके आदेशों पर एक मजबूत प्रभाव पड़ेगा। आगे बढ़ने की संभावनाएं और बढ़ेंगी। भाई-बहनों की सामाजिक स्थिति में वृद्धि होगी। प्रेमी युगलों के लिए आज का दिन शुभ नहीं है।

सिंह राशि : कामों में सफलता मिलेगी, लेकिन क्रोध करने से बचना जरूरी होगा। आपको अपनी वाणी पर संयम रखना होगा। आमदनी निरंतर बनी हुई है, किंतु व्यय आशा के विपरीत अधिक हो सकता है। खर्चों पर अंकुश लगाना जरूरी होगा। अपने स्वास्थ्य का खयाल रखें। पारिवारिक सदस्यों के साथ मनोरंजन के लिए आप कहीं घूमने जा सकते हैं।

कन्या राशि : व्यावसायिक संदर्भ में नए व्यापार संबंधों और सौदों को अंतिम रूप देने के लिए के लिए यह एक अनुकूल अवधि है। कार्य संबंधी यात्राएं और सहयोग आने वाले महीनों में सकारात्मक परिणाम देंगे। आप कुछ महत्वपूर्ण लोगों से संपर्क स्थापित कर अधिक प्रभावशाली बन जाएंगे। प्रेम संबंधों के मामले में आप भाग्यशाली रहेंगे। जीवनसाथी के साथ अनबन हो सकती है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा।

तुला राशि : किसी पुरानी बात को लेकर सहयोगियों से बहस हो सकती है, अत: सावधानी से काम लेकर विवादों को टालें। निजी जीवन में कुछ परेशानियां रह सकती हैं। बेहतर होगा आप अपने जीवनसाथी की सोच को समझने का प्रयास करें और बात का बतंगड़ न बनाएं। खान पान पर भी संयम रखें। प्रेम संबंधों के संदर्भ में आज का दिन अनुकूल है, लेकिन आप अपनी या संतान की शिक्षा को लेकर चिंतित रह सकते हैं।

वृश्चिक राशि : आज आपके पास अपने निकट और प्रिय लोगों के साथ अपनी मानसिकता साझा करने का समय होगा। प्रेम संबंधों में लिप्त जातक अपने साथी के साथ भावनात्मक परिवेश में एक नया समीकरण विकसित कर पाएंगे, इससे आपका रिश्ता पहले की तुलना में अधिक सुखद होगा। आज व्यावसायिक और व्यापारी सभी गतिविधियों में काफी प्रगति होने की संभावना है। जो लोग प्रौद्योगिकी क्षेत्र में काम कर रहे हैं वे अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद कर सकते हैं। आर्थिक रूप से भी यह उत्कृष्ट समय है।

धनु राशि : जहां तक आपके करियर की बात है, तो परिणाम हासिल करने के लिए आपको कड़ी मेहनत करनी होगी। आपके बॉस और उच्च अधिकारी आप को भ्रमित कर सकते हैं। यह आपके काम में कुछ नकारात्मक प्रभाव पैदा करेगा। धैर्य रखें और समय को अपना काम करने दें। रचनात्मक ऊर्जाएं आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएंगी और उनमें वृद्धि करेंगी। पारिवारिक जीवन सामान्य रहेगा। प्रेमी अपने साथी के प्रति अत्यधिक भावुक हो सकते हैं। आप कई नए संपर्क बनाएंगे और दोस्ती करेंगे जो आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

मकर राशि : प्रतियोगिता के माध्यम से उच्च अध्ययन के लिए प्रवेश पाने वाले सफल होंगे। व्यवसायी लंबे समय से चली आ रही,जटिल समस्याओं का समाधान पाएंगे। आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा, लेकिन आपको अपने खर्चों पर संयम रखने की भी आवश्यकता है। बेकार की गतिविधियों पर समय और ऊर्जा खर्च न करें। अगर आप अविवाहित हैं, तो आपको शादी के अच्छे प्रस्ताव मिल सकते हैं। आप अच्छे स्वास्थ्य में रहेंगे, लेकिन कुछ को बुखार परेशान कर सकता है। आप अपने शुभचिंतकों के सहयोग का आनंद लेंगे।

कुम्भ राशि : आज आपकी लोकप्रियता में वृद्धि संभव है। इस अवधि के दौरान व्यावसायिक संदर्भ में कुछ छोटी दूरी की यात्राएं हो सकती हैं। आपके द्वारा अपनी पूरी कार्यक्षमता का प्रयोग आपको हर हाल में सफल बनाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में रहने वाले जातक सफलता पाएंगे। प्रेम संबंधों के लिए समय शुभ नहीं है। आपको अपने जीवनसाथी का ख्याल रखने की जरुरत है। भाई-बहनों के साथ कुछ मतभेद हो सकते हैं। आप में से कुछ को ह्रदय की समस्या परेशान कर सकती है।

मीन राशि : आपकी लोकप्रियता अपने चरम पर होगी और आप बहुत महत्वपूर्ण लोगों के साथ संपर्क स्थापित कर सकते हैं। आपके दुश्मन आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। व्यावसायिक क्षेत्र में आप प्रमुख स्थिति में रहेंगे। सामाजिक लोकप्रियता के चलते आप आकर्षण का केंद्र बनेंगे। आर्थिक पक्ष यथावत रहेगा। आपका पारिवारिक जीवन शांतिपूर्ण और खुशहाल रहेगा। आपका जीवनसाथी और बच्चे आपके प्रति बहुत स्नेही होंगे। परिवार में कुछ शुभ समारोह हो सकते हैं।

राजेन्द्र गुप्ता,

ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

मो. 911608917

आज का पंचांग

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01 नवंबर 2025, शनिवार  

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तिथि दशमी 09:13 AM

नक्षत्र शतभिषा 06:21 PM

करण गर, 09:13 AM,

          वणिज 08:29 PM

पक्ष शुक्ल

                       अगले दिन

योग ध्रुव 02:09 AM

वार शनिवार   

सूर्योदय 06:32 AM 

सूर्यास्त 05:36 PM

चन्द्रमा कुम्भ

राहुकाल 09:18 - 10:41 AM 

विक्रमी संवत्  2082

शक सम्वत 1947 ( विश्वावसु )

मास अमांत कार्तिक

मास पूर्णिमांत कार्तिक

शुभ मुहूर्त 

अभीजित 11:42 - 12:26 PM

राजेन्द्र गुप्ता,

ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

मो. 9116089175

नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें।

विक्की प्रजापत की पोस्ट.?

TRNDKB: *_🕉️✡️श्री गणेशाय नम:✡️🕉️_*

 

   *_⚜️🌞दैनिक पंचांग🌙⚜️_*

*_✡️⚡01 - Nov - 2025⚡✡️_*

*_🔱💥New Delhi, India💥🔱_*

           *_⚜️🌞पंचांग🌙⚜️_*

    

*_🔅 तिथि दशमी 09:13 AM तक✳️उसके बाद एकादशी🔥_*

*_🔅 नक्षत्र शतभिषा 06:21 PM तक✳️उसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र 🔥_*

🔅 करण :-गर 09:13 AM तक,

 *_वणिज 08:29 PM तक✳️उसके बाद संपूर्ण रात्रि भद्रा व्याप्त🔥_*

*_🔅 पक्ष शुक्ल✳️_*  

🔅 योग घ्रुव +02:09 AM

*_🔅 वार शनिवार✳️_*  

*_🌞सूर्य व 🌙चन्द्र से संबंधित गणनाएँ👇_*    

🔅 सूर्योदय 06:32 AM  

🔅 चन्द्रोदय 02:48 PM  

*_🌙चन्द्र राशि कुम्भ🔥_*  

🔅 सूर्यास्त 05:36 PM  

🔅 चन्द्रास्त +02:44 AM  

🔅 ऋतु हेमंत  

*_☀ हिन्दू मास एवं वर्ष👇_*    

🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु

🔅 कलि सम्वत 5127  

🔅 दिन काल 11:03 AM  

🔅 विक्रम सम्वत 2082  

🔅 मास अमांत कार्तिक  

🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक  

*_✡️शुभ और 🔥अशुभ समय👇_*    

*_✡️शुभ समय👇_*    

🔅 अभिजित 11:42:26 - 12:26:40

*_🔥अशुभ समय👇_*    

🔅 दुष्टमुहूर्त 06:32 AM - 07:16 AM

🔅 कंटक 11:42 AM - 12:26 PM

🔅 यमघण्ट 02:39 PM - 03:23 PM

*_🔅 राहु काल 09:18 AM - 10:41 AM🔥_*

🔅 कुलिक 07:16 AM - 08:01 AM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:10 PM - 01:55 PM

🔅 यमगण्ड 01:27 PM - 02:50 PM

🔅 गुलिक काल 06:32 AM - 07:55 AM

*_☀ दिशा शूल👇_*    

🔅 दिशा शूल पूर्व  

*_🌙चन्द्रबल और ✨ताराबल👇_*    

*_✨ताराबल👇_*  

🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद  

*_🌙चन्द्रबल👇_*  

🔅 मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ

*_💫🪴 नवम्बर महीने 2025 के इन👇तारीखों में शुभाशुभ मुहुर्त🌹🥀_*

🔅 विवाह मुहूर्त

"श्री हृषीकेश काशी-विश्वनाथ पंचांग" में इस समय विवाह जैसे मांगलिक कार्य जो 15 नवम्बर तक मुहूर्त नहीं है। 16 नवम्बर से विवाह मुहूर्त मिल रहा है,और कम्प्यूटर ऑनलाइन सोशल साईट पर 👇नीचे वाला मुहूर्त उपलब्ध है।

🔅 विवाह मुहूर्त

2nd, 3rd, 6th, 8th, 12th, 13th, 15th, 16th, 17th, 18th, 21st, 22nd, 23rd, 25th, 30th

*_विस्तार से👇_*

दिनांक एवं दिन

नक्षत्र

तिथि

मुहूर्त का समय

02 नवंबर 2025, रविवार

उत्तराभाद्रपद

द्वादशी, त्रयोदशी

रात 11 बजकर 10 मिनट से सुबह 06 बजकर 36 मिनट तक

03 नवंबर 2025, सोमवार

उत्तराभाद्रपद, रेवती

त्रयोदशी, चतुर्दशी

सुबह 06 बजकर 36 मिनट से अगली सुबह 06 बजकर 37 मिनट तक

06 नवंबर 2025, गुरुवार 

रोहिणी

द्वितीया

सुबह 03 बजकर 28 मिनट से अगली सुबह 06 बजकर 40 मिनट तक 

08 नवंबर 2025, शनिवार

मृगशीर्ष

चतुर्थी 

सुबह 07 बजकर 31 मिनट से रात 10 बजकर 01 मिनट तक

12 नवंबर 2025, बुधवार

माघ

नवमी

रात 12 बजकर 50 मिनट से सुबह 06 बजकर 43 मिनट तक

13 नवंबर 2025, गुरुवार 

मघा

नवमी

सुबह 06 बजकर 45 मिनट से शाम 07 बजकर 38 मिनट तक 

15 नवंबर 2025, शनिवार

उत्तराफाल्गुनी, हस्त

एकादशी, द्वादशी

सुबह 06 बजकर 44 मिनट से अगली सुबह 06 बजकर 45 मिनट तक

16 नवंबर 2025, रविवार

हस्त

द्वादशी

सुबह 06 बजकर 45 मिनट से रात 02 बजकर 10 मिनट तक

17 नवंबर 2025, सोमवार

स्वाति

त्रयोदशी

सुबह 05 बजकर 01 मिनट से अगली सुबह 06 बजकर 49 मिनट तक

18 नवंबर 2025, मंगलवार

स्वाति 

चतुर्दशी, त्रयोदशी

सुबह 06 बजकर 49 मिनट से सुबह 07 बजकर 12 मिनट तक 

21 नवंबर 2025, शुक्रवार

अनुराधा

प्रतिपदा

सुबह 10 बजकर 44 मिनट से दोपहर 01 बजकर 56 मिनट तक 

22 नवंबर 2025, शनिवार

मूल

तृतीया 

रात 11 बजकर 26 मिनट से सुबह 06 बजकर 49 मिनट तक

23 नवंबर 2025, रविवार

मूल

तृतीया

सुबह 06 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 08 मिनट तक

25 नवंबर 2025, मंगलवार

उत्तराषाढ़ा 

पंचमी, षष्ठी

दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से रात 11 बजकर 57 मिनट तक

30 नवंबर 2025, रविवार

उत्तराभाद्रपद, रेवती

दशमी, एकादशी

सुबह 07 बजकर 12 मिनट से अगली सुबह 07 बजे तक

🔅 मुंडन मुहूर्त

कोई मुहूर्त नहीं है

🔅 गृह प्रवेश मुहूर्त

3rd, 7th, 14th, 15th, 17th, 20th, 21st

🔅 नामकरण मुहूर्त

2nd, 3rd, 7th, 10th, 14th, 16th, 17th, 20th, 21st, 26th, 27th, 28th, 30th

🔅 अन्नप्राशन मुहूर्त

3rd, 7th, 17th, 27th

🔅 कर्णवेध मुहूर्त

3rd, 10th, 16th, 17th, 20th, 21st, 26th, 27th

🔅 विद्यारम्भ मुहूर्त

21st

🔅 उपनयन/जनेऊ मुहूर्त

1st, 2nd, 7th, 9th, 23rd, 30th

🔅 वाहन खरीद मुहूर्त

3rd, 7th, 9th, 10th, 17th, 20th, 21st, 26th, 28th, 30th

🔅 प्रॉपर्टी खरीद मुहूर्त

1st, 9th, 10th, 14th, 19th, 20th, 21st, 30th

🔅 सर्वार्थ सिद्धि योग

2nd, 4th, 5th, 10th, 11th, 16th, 20th, 21st, 23rd, 30th

🔅 अमृत सिद्धि योग

4th, 16th

🔅 पंचक

1st, 2nd, 3rd, 4th, 27th, 28th, 29th, 30th

🔅 भद्रा

1st, 4th, 7th, 11th, 14th, 18th, 24th, 28th

*_⚜️लगन👇तालिका⚜️_*

    सूर्योदय का समय: 06:32:43

सूर्योदय के समय लग्न तुला चर

193°54′10″

🔅 तुला चर

शुरू: 05:28 AM समाप्त: 07:48 AM

 

🔅 वृश्चिक स्थिर

शुरू: 07:48 AM समाप्त: 10:07 AM

 

🔅 धनु द्विस्वाभाव

शुरू: 10:07 AM समाप्त: 12:11 PM

 

🔅 मकर चर

शुरू: 12:11 PM समाप्त: 01:54 PM

 

🔅 कुम्भ स्थिर

शुरू: 01:54 PM समाप्त: 03:21 PM

 

🔅 मीन द्विस्वाभाव

शुरू: 03:21 PM समाप्त: 04:46 PM

 

🔅 मेष चर

शुरू: 04:46 PM समाप्त: 06:22 PM

 

🔅 वृषभ स्थिर

शुरू: 06:22 PM समाप्त: 08:18 PM

 

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव

शुरू: 08:18 PM समाप्त: 10:33 PM

 

🔅 कर्क चर

शुरू: 10:33 PM समाप्त: अगले दिन 00:53 AM

 

🔅 सिंह स्थिर

शुरू: अगले दिन 00:53 AM समाप्त: अगले दिन 03:11 AM

 

🔅 कन्या द्विस्वाभाव

शुरू: अगले दिन 03:11 AM समाप्त: अगले दिन 05:28 AM

*_⚜️6 बजे प्रातः👇 ग्रह स्पष्ट🪷_*

निरायण, Sidereal

ग्रह राशि

निरायण नक्षत्र, पद

निरायण

लग्न तुला 6°50' स्वाति1 रू

 सूर्य तुला14°37' स्वाति3 रो

 चन्द्र कुम्भ12°57' शतभिष2 सा

 बुध वृश्चिक8°14' अनुराधा2 नी

 शुक्र कन्या28°23' चित्रा2 पो

 मंगल वृश्चिक3°17' विशाखा4 तो

 बृहस्पति कर्क0°45' पुनर्वसु4 ही

 शनि * मीन1°40' पूर्वभाद्रपदा4 दी

 राहू * कुम्भ21°15' पूर्वभाद्रपदा1 से

 केतु * सिंह21°15' पूर्व फाल्गुनी3 टी

 यूरेनस * वृषभ6°4' कृत्तिका3 उ

 नेपच्यून * मीन5°34' उत्तरभाद्रपदा1 दू

 प्लूटो मकर7°13' उत्तराषाढा4 जी

सायन, Tropical

ग्रह Tropical Position

सायन

लग्न 211°3'

 सूर्य 218°51'

 चन्द्र 337°10'

 बुध 242°27'

 शुक्र 202°36'

 मंगल 237°30'

 बृहस्पति 114°58'

 शनि * 355°53'

 राहू * 345°29'

 केतु * 165°29'

 यूरेनस * 60°17'

 नेपच्यून * 359°47'

 प्लूटो 301°27'

अयनांश लाहिरी / चित्रपक्ष = 24°13'

*_आज के लिए खास_*

*_यहां जो लेख दिये जा रहे हैं यह पूरी तरह जानकारी और अनुभव आधारित है, इसके प्रयोग के लाभ हानि के जिम्मेदार आप स्वयं होंगे इसमें लेखक एवं प्रसारणकर्ता की किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं होगी_*

जगन्नाथ

१. जगत् और विश्व-लोकभाषा में दोनों एक ही हैं। किन्तु पुराण-वेद की विज्ञान भाषा में दोनों के अर्थ कुछ भिन्न हैं। विश्वनाथ शिव को कहते हैं, जगन्नाथ विष्णु को। 

विश्व वह रचना है जो एक सीमा के भीतर प्रायः पूर्ण है तथा हृदय केन्द्र से संचालित है। 

वालाग्रमात्रं हृदयस्य मध्ये विश्वं देवं जातरूपं वरेण्यं (अथर्वशिर उपनिषद्, ५)

अनाद्यनन्तं कलिलस्य मध्ये विश्वस्य स्रष्टारमनेकरूपम् । 

विश्वस्यैकं परिवेष्टितारं ज्ञात्वा देवं मुच्यते सर्व पाशैः ॥ (श्वेताश्वतर उपनिषद्, ५/१३)

मनुष्य शरीर एक विश्व है। उससे बड़े विश्व के ५ स्तर हैं, जो क्रमशः मनुष्य आकार से कोटि-कोटि गुणा बड़े हैं। ३ प्रकार की पृथ्वी कही गयी है, जो सूर्य-चन्द्र से प्रकाशित है-पृथ्वी ग्रह, सूर्य प्रकाश क्षेत्र सौर मण्डल, सूर्य प्रकाश की अन्तिम सीमा सूर्यों का समूह या ब्रह्माण्ड। तीनों पृथ्वी से उनके आकाश उतने ही बड़े हैं, जितना मनुष्य तुलना में पृथ्वी। 

रवि चन्द्रमसोर्यावन्मयूखैरवभास्यते । स समुद्र सरिच्छैला पृथिवी तावती स्मृता ॥

यावत्प्रमाणा पृथिवी विस्तार परिमण्डलात् । 

नभस्तावत्प्रमाणं वै व्यास मण्डलतो द्विज ॥ (विष्णु पुराण, २/७/३-४)

तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः। (ऋक्, १/२२/२०) 

अन्य प्रकार से कहा है कि पृथ्वी के बाहर वायु के ७ स्तर क्रमशः १०-१० गुणा बड़े हैं। (नारद पुराण, १/६०, ब्रह्माण्ड पुराण, १/२/२२ अध्याय) कोटि का अर्थ सीमा है। हमारे लिए विश्व की सीमा पृथ्वी है जिसका व्यास हमारी ऊचाई चौड़ाई के औसत (१.२८ मीटर) का १०० लाख गुणा है। अतः १०० लाख को कोटि (सीमा) कहते हैं। इसी प्रकार पृथ्वी से कोटि-कोटि गुणा बड़े सौर मण्डल (उसका आकर्षण क्षेत्र जिसमें कोई पिण्ड उसकी कक्षा में रह सकता है), ब्रह्माण्ड, तथा दृश्य जगत्। चेतन रूप में दृश्य विश्व को पुरुष सूक्त में पुरुष कहा गया है, जो पूर्ण विश्व रूपी पूरुष का १/४ भाग है। पूरुष पूरे विश्व का १० गुणा है। 

स भूमिं विश्वतो वृत्त्वा अत्यत् तिष्ठत् दशाङ्गुलम्।

पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि। एतावान् अस्य महिमा अतो ज्यायांश्च पूरुषः। (पुरुष सूक्त, १, ३,४) 

आज की भाषा में कहते हैं कि प्रायः ९ अरब प्रकाशवर्ष व्यास का दृश्य विश्व ९ अरब वर्ष पूर्व का है। क्रमशः विस्तार के कारण यह १० गुणा फैल चुका है। जीव जगत् के लिये चन्द्र कक्षा का गोल भी विश्व है। अतः मनुष्य तथा उससे बड़े विश्व के ६ स्तर हैं। मनुष्य से छोटे विश्व के ७ स्तर हैं, जो क्रमशः १-१ लाख भाग छोटे हैं। 

वालाग्र शत साहस्रं तस्य भागस्य भागिनः। तस्य भागस्य भागार्धं तत्क्षये तु निरञ्जनम् ॥ (ध्यानविन्दु उपनिषद् , ४) 

ऋषिभ्यः पितरो जाताः पितॄभ्यो देव दानवाः। देवेभ्यश्च जगत्सर्वं चरं स्थाण्वनुपूर्वशः॥ (मनुस्मृति, ३/२०१)

आज की भाषा में इनका नाम इस प्रकार है-कलिल (Cell), परमाणु (atom), कुण्डलिनी (nucleus), जगत् कण (चर = lepton, स्थाणु = baryon, अनुपूर्व = meson), देव-दानव (क्रियाशील तथा निष्क्रिय ऊर्जा), पितर (prototype, quark?), ऋषि (रस्सी, string). मनुष्य आकार को ७ बार १-१ लाख भाग छोटा करने पर १.३ मीटर का १० घात ३५ भाग होगा जो आज के क्वाण्टम मेकानिक्स में सबसे छोटी प्लांक दूरी है। अतः विश्व के १३ स्तर हुए और गणित ज्योतिष में विश्व का अर्थ १३ अंक होता है।

जगत् क्रियाशील वस्तु है, जो दीखता नहीं है। 

जगदव्यक्तमूर्तिना (गीता, ९/४) जगज्जीवनं जीवनाधारभूतं (नारद परिव्राजक उपनिषद्,४/५०)

जगत् या चेतना के १४ स्तर हैं, जिनको १४ भुवन कहते हैं। आकाश में ८ दिव्य सृष्टि है, ब्रह्म मूल रूप है, उससे ७ लोकों के चेतना या प्राण के ७ स्तर दिव्य सृष्टि हैं। पृथ्वी पर ६ प्रकार की सृष्टि है, ब्रह्म का प्रतिरूप मनुष्य, जल, स्थल, वायु के जीव, अर्ध संज्ञक वृक्ष, सुप्त संज्ञक मिट्टी (मृत या मृदा)। 

चतुर्दश विधो भूत सर्गः (सांख्य तत्त्व समास, १८)

अष्ट विकल्पो देवः, तैर्यक् योनयश्च पञ्चधा भवति। मानुष्यः च एकविधः, समासतो भौतिक सर्गः। (सांख्य कारिका, ५३)

= ८ देव योनि, मनुष्य, ५ तिर्यक् योनि।

२. ब्रह्म रूप- (१) निर्विशेष ब्रह्म- इसका वर्णन नहीं हो सकता है क्योंकि इसका कोई रूप, रंग, भेद नहीं है। इसे नेति नेति कहा गया है, अर्थात् कोई भी वर्णन पूर्ण नहीं है, नेति = न + इति = पूरा नहीं हुआ। तुलसीदास ने नेति शब्द का प्रयोग किया ह-निगम नेति शिव अन्त न पावा, ताहि धरहिं जननी हठि धावा (रामचरितमानस, १/२०२/८)। किन्तु यह अर्थ वेद में नहीं है, भागवत पुराण में गजेन्द्र स्तुति में है। 

स वै न देवासुर मर्त्य तिर्यङ् न स्त्री न षण्ढो न पुमान् न जन्तुः।

नायं गुणं कर्म न सन्न चासन्, निषेधशेषो जयतादशेषः॥ (भागवत पुराण, ८/३/२४)

निर्विशेष का वर्णन नहीं होता, केवल उपवर्णन होता है। यजुर्वेद में इसे पर्यगात् कहा है। जिनका स्वरूप या लिङ्ग है, उसी का वर्णन या सम्बोधन हो सकता है।

एवं गजेन्द्रमुपवर्णित निर्विशेषं, ब्रह्मादयो विविधलिङ्गभिधाभिमानाः।

नैते यदोपससृपुः निखिलात्मकत्वात्--॥३०॥

छन्दोमयेन गरुडेन समुह्यमानः, चकायुधोभ्यगमदाशु यतो गजेन्द्रः॥३१॥ (भागवत पुराण, ८/३)

जिसका शरीर है, वह सर्प की तरह क्रमशः आगे बढ़ेगा। इसे संसर्प गति कहा है। अव्यक्त ब्रह्म सबकी आत्मा है, वह तत्क्षण कहीं भी प्रकट हो सकता है। इसे अभिगमन कहा है। ईशावास्योपनिषद् में भी (वाज. यजु, अध्याय ४०)-स पर्यगात्, शुक्रं अकायं अव्रणं, अपापविद्धम् (८)-अकाय का पर्यगात्, शब्दों से घेर कर ही वर्णन हो सकता है।

वह बिना चले देवों से पहले पहुंचता है-अनेजदेकं मनसो जवीयो नैनद्देवा आप्नुवन् पूर्वमर्षत्।

तद्धावतोऽन्यानत्येति तिष्ठत्, तस्मिन् अपो मातरिश्वा दधाति॥ (४)

छन्द रूपी गरुड से गति-गरुड को पक्षी कहा गया है। जगन्नाथ मन्दिर के बाहर गरुड़ स्तम्भ भी है। जो स्वयं सर्वत्र व्याप्त है उसका वाहन कैसे? निर्विशेष ब्रह्म के भीतर अप् जैसे पदार्थ में आन्तरिक गति हो रही है जिससे सृष्टि होती है। इस आन्तरिक गति को मातरिश्वन् कहा गया है। जैसे कई चीजों को मिला कर जल में पकाते हैं, तो सभी मिलकर भोजन बनाते हैं।

एकः सुपर्णः स समुद्रमाविवेश स इदं भुवनं वि चष्टे ।

तं पाकेन मनसापश्यमन्तितस्तं, माता रेऴ्हि स उ रेऴ्हि मातरम् ॥ (ऋक्, १०/११४/४)

इस आन्तरिक गति को सुपर्ण, गरुत्मान्, मातरिश्वन् कहा गया है जो गरुड के कई रूप हैं।

इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निरथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान्।

एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः॥ (ऋक्, १/१६४/४६, अथर्व, ९/१०/२८)

सुपर्ण पक्षी की तरह ७ ऋषियों (रस्सी = आकर्षण) का मिलन है। ४ आकर्षण बल पक्षी का चौकोर शरीर बनाते हैं। २ पक्ष समरूपता हैं। पुच्छ निर्माण है, मुख स्रोत है। एक निर्माण अगले चक्र में स्रोत होता है। इस मिलन को सुपर्ण चिति कहते हैं (शतपथ ब्राह्मण, ६/१/१/२-६)।

ब्रह्म या व्यक्ति रूप में सुपर्ण के २ रूप हैं, एक साक्षी (निर्विशेष ब्रह्म), दूसरा भोक्ता (विशिष्ट ब्रह्म) है। मनुष्य मस्तिष्क में इनको आत्मा तथा जीव कहा गया है जिनको बाइबिल में आदम और ईव कहा है।

द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया, समानं वृक्षं परिषस्वजाते। 

तयोरन्यः पिप्पलं स्वाद्वत्ति, अनश्नन्नन्यो अभिचाकषीति॥

(मुण्डक उप. ३/१/१, श्वेताश्वतर उप. ४/६, ऋक्, १/१६४/२०, अथर्व, ९/९/२०)

पिप्पल को बाइबिल में ऐप्पल लिखा है जिसमें मन लगा रहता है। (applying mind)

स्तम्भ के २ अर्थ हैं-स्थिर केन्द्र, मापदण्ड। यज्ञ स्तम्भ अर्यमा का रूप है जो मूल आदित्य (आदि रूप, अभी अन्तरिक्ष में दृश्य) है। ब्रह्माण्ड का आदित्य वरुण, सौरमण्डल का आदित्य मित्र है। इन ३ आदित्यों से ३ धामों की सृष्टि हुई।

तिस्रो भूमीर्धारयन् त्रीरुत द्यून्त्रीणि व्रता विदथे अन्तरेषाम् ।

ऋतेनादित्या महि वो महित्वं तदर्यमन् वरुण मित्र चारु ॥ (ऋक्, २/२७/८)

माप छन्द से होती है। सुपर्ण की गति मातरिश्वा से मिश्रण हो रहा है, इसलिये इनको वयः छन्द कहते हैं। वयन = बुनना, वयस = आयु, पक्षी। मुख्य १९ प्रकार के वयः छन्द है, जिनको मूर्धावयः कहा गया है (वाज. यजु, १४/९-१०)। इनकी व्याख्या करना कठिन है, अभी तक सृष्टि विज्ञान रूप में किसी ने अर्थ नहीं किया है।

(२) विष्णु रूप-गायत्री मन्त्र के ३ पाद ब्रह्म के सृष्टि, कर्ता, ज्ञान रूप का वर्णन करते हैं, जिनको ब्रह्मा, विष्णु, शिव कहते हैं। ये आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक विश्वों का भी वर्णन करते हैं, जो परस्पर की प्रतिमा हैं। इनकी सूर्य केन्द्रित व्याख्या की जाती है। सूर्य से पृथ्वी तथा उस पर जीवन का निर्माण हुआ है, अतः उसे सविता कहते हैं। किन्तु वह मूल स्रष्टा नहीं है, जिसे तत् सविता कहते हैं। वह परब्रह्म है, जिससे दृश्य जगत्, ब्रह्माण्ड, और उसके भीतर सूर्य बने। सूर्य रूपी विष्णु को ही प्रायः ब्रह्म या पुरुष रूप कहते हैं। सूर्य से जो तेज निकलता है, वह इन्द्र है, जो खाली स्थान में भी भरा हुआ है। 

नेन्द्रात् ऋते पवते धाम किञ्चन । (ऋक्, ९/६९/६)  

(देवस्य त्वा सवितुः प्रसवे) इन्द्रियस्य इन्द्रियेण। (तैत्तिरीय ब्राह्मण, २/६/५/३)

सूर्य के आकर्षण से पृथ्वी उसकी कक्षा में स्थित है, यह विष्णु रूप है-

पृथिवी त्वया धृता लोकाः, देवि त्वं विष्णुना धृता (भूमि पूजन मन्त्र)। 

उभा जिग्यथुर्न पराजयेथे, न पराजिज्ञे कतरश्च नैनोः।

इन्द्रश्च विष्णू यदपस्पृधेथां त्रेधा सहस्रं वि तदैरयेथाम्॥ (ऋक्, ६/६९/८)

किं तत् सहस्रमिति? इमे लोकाः, इमे वेदाः, अथो वागिति ब्रूयात्। (ऐतरेय ब्राह्मण, ६/१४)

सूर्य से हमारा जीवन चल रहा है, यह जगन्नाथ रूप है। इसे ज्योतिष में आत्मा कारक कहा है-

सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च (ऋक्, १/११५/१, अथर्व, १३/२/३५, २०/१०७/१४, वाज. यजु, ७/४२, १३/४६ आदि)।

हमारी चेतना ब्रह्म रन्ध्र से हो कर सूर्य तक प्रकाश गति से जाती है तथा १ मुहूर्त में ३ बार जा कर लौट आती है। ३ लाख किमी प्रति सेकण्ड की गति से सूर्य तक प्रायः १५ करोड़ किमी जाने में प्रायः ८ मिनट लगता है। हृदय से ब्रह्मरन्ध्र तक अणु पथ (हर व्यक्ति के लिए भिन्न) तथा वहां से सूर्य तक महापथ (सबके लिए एक) है।

अथ या एता हृदयस्य नाड्यस्ताः पिङ्गलाणिम्नस्तिष्ठन्ति शुक्लस्य नीलस्य पीतस्य लोहितस्येत्यसौ वा आदित्यः पिङ्गल एष शुक्ल एष नील एष लोहितः॥१॥ तद्यथा महापथ आतत उभौ ग्रामौ गच्छन्तीमं चामुं चामुष्मादित्यात्प्रतायन्ते ता आसु नाडीषु सृप्ता आभ्यो नाडीभ्यः प्रतायन्ते तेऽमुष्मिन्नादित्ये सृप्ताः॥२॥ ..... अथ यत्रैतदस्माच्छरीरादुत्क्रामति अथैतैरेव रश्मिभिरूर्ध्वमाक्रामते स ओमिति वा होद्वामीयते स यावत्क्षिप्येन्मनस्तावदादित्यं गच्छत्यतद्वै खलु लोकद्वारं विदुषा प्रपदनं निरोधोऽवदुषाम् ॥५॥ (छान्दोग्य उपनिषद्, ८/६/१,२,५) बृहदारण्यक उपनिषद् (४/४/८-९) भी।

रूपं रूपं मघवाबोभवीति मायाः कृण्वानस्तन्वं परि स्वाम्। 

त्रिर्यद्दिवः परिमुहूर्त्तमागात् स्वैर्मन्त्रैरनृतुपा ऋतावा॥(ऋक्, ३/५३/८)

त्रिर्ह वा एष (मघवा=इन्द्रः, आदित्यः = सौर प्राणः) एतस्या मुहूर्त्तस्येमां पृथिवीं समन्तः पर्य्येति। (जैमिनीय ब्राह्मण उपनिषद् १/४४/९)

चण्डी पाठ, प्रथम अध्याय में सुप्त रूप को विष्णु तथा जाग्रत रूप को जगन्नाथ कहा गया है। यह काली चरित्र है, जगन्नाथ को दक्षिणाकाली भी कहते हैं। दक्षिणा का अर्थ है देना जिससे दक्षता हो। दक्षिणा काली रूपी अव्यक्त विश्व से विश्व का जन्म होता है, महाकाली में पुनः लय होता है। यह ब्रह्म की परिभाषा है कि उससे जगत् की उत्पत्ति, विकास, लय आदि होता है-जन्माद्यस्य यतः (ब्रह्म सूत्र, १/१/२) शिव भी रुद्र रूप में वामदेव, गुरु रूप में दक्षिणामूर्ति हैं। दुर्गा सप्तशती, अध्याय, १-

विष्णुकर्णमलोद्भूतौ हन्तुं ब्रह्माणमुद्यतौ। स नाभिकमले विष्णोः स्थितो ब्रह्मा प्रजापतिः॥६८॥

निद्रां भगवतीं विष्णोरतुलां तेजसः प्रभुः॥७१॥ विष्णुः शरीरग्रहणमहमीशान एव च॥८४॥

विष्णोः प्रबोधनार्थाय निहन्तुं मधुकैटभौ॥९०॥ जाग्रत होने के बाद-उत्तस्थौ च जगन्नाथस्तत्या मुक्तो जनार्दनः॥९१॥

प्रबोधं च जगत्स्वामी नीयतामच्युतो लघु॥८६॥

३. दारु ब्रह्म- जगन्नाथ या ब्रह्म के विविध रूपों की उपमा दारु से दी जाती है।

(१) सृष्टि निर्माण की सामग्री, उसका आधार, निर्मित पदार्थ आदि सभी ब्रह्म है, जैसे वृक्ष वन में है, उससे काट छांट कर घर, सामग्री आदि बनते हैं।

किं स्विद् वनं क उ स वृक्ष आस यतो द्यावा पृथिवी निष्टतक्षुः।

मनीषिणो मनसा पृचतेदु तत् यदध्यतिष्ठद् भुवनानि धारयन्॥ 

(ऋक्, १०/८१/४, तैत्तिरीय ब्राह्मण, २/८/९/१५, तैत्तिरीय संहिता, ४/६/२/१२) 

ब्रह्म वनं ब्रह्म स वृक्ष आसीत् यतो द्यावा पृथिवी निष्टतक्षुः।

मनीषिणो मनसा विब्रवीमि वो ब्रह्माध्यतिष्ठद् भुवनानि धारयन्॥ (तैत्तिरीय ब्राह्मण, २/८/९/१६) 

इस अर्थ में ब्रह्म को सुकृत् कहा गया है, जो कर्ता, कर्म, सामग्री, निर्माण आदि सब कुछ है।

असद्वा इदमग्र आसीत्। ततो वै सदजायत। तदात्मानँ स्वयमकुरुत तस्मात्तत्सुकृतम् उच्यत इति। (तैत्तिरीय उपनिषद्, २/७/१) = स्वयं ही निर्माण किया अतः सुकृत् कहते हैं।

ताभ्यः पुरुषम् आनयत् ता अब्रुवन्-सुकृतं बत इति। पुरुषो वाव सुकृतम्। ता अब्रवीत्-यथा आयतनं प्रविशत इति। (ऐतरेय उपनिषद्, १/२/३) = उससे पुरुष लाये और कहा कि यही सुकृत् है। यह सभी में प्रवेश करता है।

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् । ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥ (गीता, ४/२४)

= ब्रह्म ही अर्पण, हवि, अग्नि, हवन करने वाला, कर्म, तथा अन्तिम क्रिया है और अन्त में सभी ब्रह्म में ही मिलते हैं।

(२) वृक्ष का वन रूप-एक वृक्ष का जन्म मरण आदि होता है। किन्तु वन में कुल वृक्ष संख्या समान रहती है। इसी प्रकार जगत् में सदा पूरुष का १/४ भाग विश्व बना रहता है।

(३) जीवन का स्रोत-वृक्षों से उत्पन्न अन्न द्वारा ही जीवों का निर्माण तथा पालन होता है। उसी प्रकार जगन्नाथ जीवन के मूल स्रोत हैं।

तपसा चीयते ब्रह्म ततोऽन्नं अभिजायते।

अन्नात् प्राणो मनः सत्यं लोकाः कर्मसु चामृतम्॥ (मुण्डक उपनिषद्, १/१/८)

आकाशाद् वायुः, वायोः अग्निः, अग्नेः आपः, अद्भ्यः पृथिवी, पृथिव्या ओषधयः, ओषधीभ्यो अन्नः, अन्नात् पुरुषः। (तैत्तिरीय उपनिषद्, २/१/१)

(४) निरपेक्ष द्रष्टा-निर्विशेष ब्रह्म रूप में जगन्नाथ कुछ करते नहीं हैं, केवल देख रहे हैं, जिस रूप को साक्षी सुपर्ण भी कहा है। इसी प्रकार मार्ग पर स्थित वृक्ष लोगों को चलते हे देखता है।

यस्मात् परं नापरमस्ति किञ्चित्, यस्मान्नाणीयो न ज्यायोऽस्ति कश्चित्।

वृक्ष इव स्तब्धो दिवि तिष्ठत्येनेदं पूर्णं पुरुषेण सर्वम्॥ (श्वेताश्वतर उपनिषद्, ३/९) 

(५) सृष्टि निर्माण का क्रम-मूल को ऊर्ध्व तथा उससे विभिन्न प्रकार की निर्माण दिशाओं को शाखा कहा है। यह अविनाशी अश्वत्थ है, अर्थात् क्रिया चलती रहती है। कोई एक वस्तु या पिण्ड वृक्ष के पत्ते की तरह झड़ जाता है, वृक्ष बना रहता है।

ऊर्ध्वमूलमधः शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्। छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्। (गीता, १५/१)

(६) कर्म वासना-वृक्ष में बीज, अंकुर, वृक्ष, फल आदि का क्रम शाश्वत है। इसी प्रकार मनुष्य का कर्म और वासना चक्र शाश्वत है-संकल्प, क्रिया, फल, उसमें वासना। मुक्ति के लिए इस वृक्ष को काटना पड़ता है।

 वासना वशतः प्राणस्पन्दस्तेन च वासना। क्रियते चित्तबीजस्य तेन बीजाङ्कुरक्रमः॥२६॥

द्वे बीजे चित्तवृक्षस्य प्राणस्पन्दनवासने। एकस्मिँश्च तयोः क्षीणे क्षिप्रं द्वे अपि नश्यतः॥२७॥

द्वे बीजे चित्तवृक्षस्य वृत्तिव्रततिधारिणः। एक प्राण परिस्पन्दो द्वितीयं दृढ़भावना॥४८॥ (मुक्तिकोपनिषद्, अध्याय २)

अधश्चोर्ध्वं प्रसृतास्तस्य शाखा गुणप्रवृद्धा विषयप्रवालाः। अधश्च मूलान्यनुसन्ततानि कर्मानुबन्धीनि मनुष्यलोके॥२॥

न रूपमस्येह तथोपलभ्यते, नान्तो न चादिर्न च सम्प्रतिष्ठा। अश्वत्थमेनं सुविरूढ़मूलमसङ्गशस्त्रेण दृढ़ेन छित्वा॥३॥ (गीता, अध्याय १५)  

४. जगन्नाथ के अन्य रूप-इनका निर्देश भागवत पुराण में है जो विस्तार से वेदों में भी वर्णित है-

तत्र गत्वा जगन्नाथं वासुदेवं वृषाकपि। पुरुषं पुरुषसूक्तेन उपतस्थे समाहिताः॥ (भागवत पुराण, १०/१/२०) 

पृथ्वी पर असुरों का अत्याचार बढ़ गया तो पृथ्वी रूपी गौ ब्रह्मा जी के साथ, जगन्नाथ के पास गयी जो वासुदेव, वृषाकपि, तथा पुरुष भी हैं। गौ का अर्थ ३ तत्त्व युक्त हैं-(क) इन्द्रिय-कर्म, ज्ञान, मन, (ख) किरण-तेज, गति, ज्ञान, (ग) यज्ञ-वेदी, कर्ता, पदार्थ। (घ) पृथ्वी-यज्ञ अर्थात् उत्पादन, स्थान, चक्रीय गति (दिन, मास. वर्ष आदि)।

अथैष गोसवः स्वाराजो यज्ञः। (ताण्ड्य महाब्राह्मण, १९/१३/१)

इमे वै लोका गौः यद् हि किं अ गच्छति इमान् तत् लोकान् गच्छति। (शतपथ ब्राह्मण, ६/१/२/३४)

इमे लोका गौः। (शतपथ ब्राह्मण, ६/५/२/१७) 

धेनुरिव वाऽइयं (पृथिवी) मनुष्येभ्यः सर्वान् कामान् दुहे माता धेनुर्मातेव वाऽइयं (पृथिवी) मनुष्यान् बिभर्त्ति। (शतपथ ब्राह्मण, २/२/१/२१) 

पिण्ड रूप में पृथ्वी पर ७ समुद्र हैं। गो रूप में उत्पादन के ४ स्रोत ४ समुद्र हैं-(क) स्थल मण्डल, (ख) जल मण्डल, (ग) वायु मण्डल. (घ) जीव मण्डल (जीव, वृक्ष)। (वायु पुराण, 

विक्की प्रजापत की पोस्ट.?

TRNDKB: *🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*

*⛅दिनांक - 01 नवम्बर 2025*

*⛅दिन - शनिवार*

*⛅विक्रम संवत् - 2082*

*⛅अयन - दक्षिणायण*

*⛅ऋतु - हेमंत*

*⛅मास - कार्तिक*

*⛅पक्ष - शुक्ल*

*⛅तिथि - दशमी सुबह 09:11 तक तत्पश्चात् एकादशी*

*⛅नक्षत्र - शतभिषा शाम 06:20 तक तत्पश्चात् पूर्व भाद्रपद*

*⛅योग - ध्रुव रात्रि 02:10 नवम्बर 02 तक तत्पश्चात् व्याघात*

*⛅राहुकाल - सुबह 09:21 से सुबह 10:46 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* 

*⛅सूर्योदय - 06:32*

*⛅सूर्यास्त - 05:49 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*

*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*

*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:50 से प्रातः 05:41 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*

*⛅अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 (उज्जैन मानक समयानुसार)*

*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:45 से रात्रि 12:36 नवम्बर 02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*

*⛅️व्रत पर्व विवरण - देवउठी एकादशी, भीष्म पञ्चक व्रत (नवंबर 01 से नवंबर 05 तक), कंस वध* 

*🌥️विशेष - एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹सरल औषधि प्रयोग🔹*

*1. खासी में तुरन्त लाभ हेतु - (क) कच्ची हल्दी का रस पियें । (बच्चों के लिए पाव से आधा चम्मच, बड़ों के लिए 1 चम्मच) ।*

*(ख) अदरक का छोटा सा टुकड़ा चूसें ।*

*(ग) 2-3 काली मिर्च चूसें । अथवा काली मिर्च चबाकर गुनगुना पानी पियें ।*

*(घ) अत्यधिक खाँसी में 1-1 चम्मच अदरक व पान के पत्तों के रस में थोड़ा - सा पुराना गुड़ या शहद मिलाकर पीना उत्तम है ।*

*2. मोटापा व पुराना कब्ज - एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस एवं दो चम्मच शहद डालकर पीने से शरीर की अनावश्यक चर्बी कम होती है व पुराना कब्ज मिटता है ।*

*3. प्रदर रोग - आँवला चूर्ण को मिश्री के साथ लेने से स्त्रियों के अधिक मासिक स्राव व श्वेतप्रदर रोगों में लाभ होता है । धोये हुए चावल का पानी मिलाकर पीनें से पेचिश, अतिसार व प्रदर रोगों में लाभ होता है ।*

*4. मासिक सम्बंधी समस्याएँ*

*(क) सुबह खाली पेट 2-4 गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव ठीक होता है ।*

*(ख) मासिक धर्म में पीड़ा होती हो तो 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ एक चुटकी अजवायन फांक लें ।*

*(ग) सुबह-शाम 1-1 चुटकी हींग गुनगुनें पानी में घोल के लेने से बिना कष्ट के खुलकर मासिक आता है । अधिक रक्तस्राव में अंतिम दो प्रयोग न करें ।*

*🌞मेरे श्रीराम आए है तो द्वारिकाधीश भी आयेंगे🌞*

TRNDKBJITENDRAKUMAR: वाराणसी ब्रेकिंग

उपराष्ट्रपति व मुख्यमंत्री के वाराणसी आगमन के दौरान सुरक्षा पुख्ता

सुरक्षा के मद्देनजर सर्किट हॉउस के समीप सड़क पर खड़ी गाड़ियों को उठाया गया

ट्रैफीक पुलिस द्वारा सड़क पर बेतरतीब तरीके से खड़ी गाड़ियों को ट्रैफ़िक पुलिस ने उठाया

TRNDKB: अचलगंज थाना क्षेत्र के बदरका चौकी अंतर्गत लोचा मोड़ के पास दो पक्षों में जमकर चले लाठी डंडे 

लाठी डंडे से लैस युवक ने महिला को किया लहूलुहान

लहूलुहान हालत में अचलगंज थाने पहुंची महिला 

युवक के वार से महिला की हालत हुई नाजुक

अचलगंज थाना का है पूरा मामला

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