बाब-अल-मंदेब क्या है? होर्मुज के बाद बंद करने जा रहा ईरान, बूंद-बूंद तेल को तरस जाएगी दुनिया

Mar 10, 2026 - 13:02
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बाब-अल-मंदेब क्या है? होर्मुज के बाद बंद करने जा रहा ईरान, बूंद-बूंद तेल को तरस जाएगी दुनिया

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच अब तेल की सप्लाई को लेकर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ती जा रही है. खबरें सामने आ रही हैं कि ईरान अब दुनिया को तेल की बूंद बूंद के लिए तरसाने की तैयारी कर रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद होने के बाद दुनिया में ईंधन संकट गहराने लगा है. इसी बीच खबर है कि ईरान अब तेल सप्लाई के एक और अहम रास्ते को बंद करने पर विचार कर रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक तेहरान का युद्ध कक्ष अरब प्रायद्वीप के पास मौजूद बाब-अल-मंदेब नाम के एक अहम समुद्री रास्ते को बंद करने की योजना बना सकता है.

हमले जारी रहे तो जहाजों का रास्ता रोकेंगे
एक रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका और इजरायल उस पर हमले जारी रखते हैं और युद्ध को लंबा खींचते हैं तो ईरान बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों का रास्ता रोक सकता है. रिपोर्ट में ईरान की सेना पर नजर रखने वाले सूत्रों का हवाला दिया गया है. बताया गया है कि अगर अमेरिका ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता या दूसरे बड़े नेताओं को निशाना बनाया तो तेहरान इस विकल्प को लागू कर सकता है.

ईरान की कड़ी चेतावनी
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान में चल रहा युद्ध लगभग खत्म हो चुका है. ट्रंप के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कड़ा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, यह फैसला ईरान करेगा. अगर अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहे तो ईरान अपने इलाके से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा.

बेहद अहम समुद्री रास्ता है बाब-अल-मंदेब
बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट एक संकरा लेकिन बहुत अहम समुद्री रास्ता है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. यह रास्ता स्वेज नहर के जरिये भूमध्य सागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाला एक बड़ा समुद्री मार्ग भी है. बाब-अल-मंदेब अरब प्रायद्वीप के यमन और अफ्रीका के जिबूती के बीच स्थित है. दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में इसकी गिनती होती है.

होर्मुज के बाद संकट और गहराया
यह खबर ऐसे समय आई है जब युद्ध के कारण खाड़ी इलाके का एक और अहम रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद हो चुका है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इस रास्ते को बंद करने का ऐलान कर दिया था. इतना ही नहीं, इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करने वाले कुछ जहाजों को भी निशाना बनाया गया था.

एक स्वतंत्र शोध संस्था के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते हर दिन करीब एक करोड़ पचास लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जाता है. यह दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब बीस प्रतिशत है. ऐसे में इस रास्ते के बंद होने से ईंधन की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है.

तेल की कीमतों में भारी उछाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर दुनिया के तेल बाजार पर साफ दिख रहा है. सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया. कच्चे तेल की कीमत करीब एक सौ बीस डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी नरमी भी देखी गई. अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल करीब एक सौ उन्नीस डॉलर पचास सेंट प्रति बैरल तक पहुंच गया.

जंग के असर से उत्पादन और सप्लाई प्रभावित
जंग अब दूसरे हफ्ते में पहुंच चुकी है और इसका असर फारस की खाड़ी के तेल और गैस उत्पादन वाले इलाकों पर भी पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

कई देशों का तेल निर्यात प्रभावित
इस रास्ते से सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान से तेल और गैस का निर्यात होता है. लेकिन निर्यात रुकने से इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात को अपना तेल उत्पादन कम करना पड़ा है. ऊर्जा की कीमतों में आई इस तेजी का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. ऊर्जा महंगी होने से महंगाई बढ़ने और लोगों के खर्च पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला