बिहार को सबसे ज्यादा डॉक्टर और डिग्री कॉलेज चाहिए:नीतीश नहीं बनवा पाए हर गांव में सड़क, 200 सड़कें और चाहिए; जानिए 243 विधायकों की डिमांड
बिहार में लोगों को तीन चीजें चाहिए पानी, डॉक्टर और डिग्री कॉलेज। सबसे गंभीर समस्या डॉक्टर और पानी की है। बिहार के कई प्रखंडों में स्थिति ये है कि हॉस्पिटल से लेकर PHC-CHC तक बन गए हैं, लेकिन बिल्डिंग डॉक्टर की राह देख रही हैं। स्थिति यह है कि बिहार के अलग-अलग इलाकों के अस्पतालों में न बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टर हैं, न महिला रोग विशेषज्ञ हैं। एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की मशीनें तो लगा दी गई हैं, लेकिन इसे चलाने वाले टेक्निशियन की नियुक्ति नहीं हुई है। लगभग 24 हजार गांवों में जल के लिए नल तो पहुंचा, लेकिन नल तक पानी सप्लाई अब तक नहीं हुई है। ये खुलासा हुआ है विधानसभा में पूछे गए सवालों से। भास्कर ने विधानसभा के बजट सत्र में 49 विभाग से पूछे गए 3800 से ज्यादा सवालों की स्टडी की, जिसमें कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। इस बार मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए विधानसभा में किस विभाग से सबसे ज्यादा सवाल पूछे गए। किस विभाग के लिए विधायकों के पास कोई सवाल नहीं बचा। किन सवालों पर सदन के भीतर सबसे ज्यादा हंगामा हुआ…। 19 दिन में 49 विभागों से 3808 सवाल पूछे गए 18वीं विधानसभा में यह पहला मौका था, जब बजट सत्र के दौरान प्रश्न काल हुआ। विपक्ष के कमजोर होने का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि इस बार 19 दिन में 18 दिन तक प्रश्नकाल बिना किसी हंगामे के चला। हर दिन एक घंटे तक सरकार ने सत्तापक्ष और विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। इस दौरान लगभग 3605 तारांकित और 203 अल्पसूचित प्रश्र्नों के जवाब मिले। 70 विधायकों ने 32 जिलों में 80 डिग्री कॉलेज खोलने की डिमांड की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हर प्रखंड में एक डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा की है। इसकी वजह से विधानसभा के बजट सत्र में डिग्री कॉलेज खोलने को लेकर सबसे ज्यादा सवाल पूछे गए। हर रोज औसतन दो से तीन सवाल इस संबंध में पूछे गए। ओवरऑल नंबर को देखें तो सीएम की बस एक घोषणा के बाद 32 जिलों में 80 नए डिग्री कॉलेज खोलने की डिमांड की गई। बजट सत्र के दौरान उच्च शिक्षा विभाग से कुल 134 सवाल पूछे गए। इनमें से 60 फीसदी यानि 80 सवाल नए डिग्री कॉलेज खोलने को लेकर पूछे गए। हैरानी इस बात की है कि बाढ़ विधायक सियाराम सिंह ने सबसे ज्यादा पटना के तीन प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोलने की मांग की है। 213 प्रखंड में सबसे पहले डिग्री कॉलेज खुलेंगे वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से जारी आकड़ों की मानें तो बिहार के कुल 534 प्रखंडों में से 213 प्रखंड ऐसे हैं जहां फिलहाल कोई अंगीभूत (Constituent) या संबद्ध (Affiliated) डिग्री कॉलेज नहीं है। पहले चरण में इन्हीं प्रखंडों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही, राज्य के 55 पुराने और प्रतिष्ठित कॉलेजों को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। नए भवनों के निर्माण में समय लगेगा, इसलिए सरकार ने तय किया है कि शुरुआती दौर में इन कॉलेजों की कक्षाएं स्थानीय प्लस-टू (+2) स्कूलों के नए भवनों में चलेंगी। सरकार ने निर्देश दिया है कि पहले चरण में चिह्नित किए गए प्रखंडों में जुलाई 2026 से शैक्षणिक सत्र शुरू कर दिया जाए। इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग के सवाल में 18 नए आंगनवाड़ी केंद्र खोलने की मांग की गई है। 2000 डॉक्टर और 41 नए हेल्थ सेंटर की दरकार सवालों की संख्या के लिहाज से देखें तो स्वास्थ्य विभाग दूसरे नंबर पर है। हेल्थ डिपार्टमेंट से 387 सवाल पूछे गए। हमने जब इन सवालों को लेकर स्टडी किया तो दो तरह की डिमांड सवाल के तौर पर समझ आती है। पहला- हेल्थ सब सेंटर या नए हॉस्पिटल की डिमांड। दूसरा- डॉक्टर की कमी को दूर करने की मांग। कुल सवालों का 38 फीसदी, यानि 148 सवालों में डॉक्टर और स्पेशलिस्ट की नियुक्ति की डिमांड की गई है। 85-90 विधायकों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके यहां हॉस्पिटल की बिल्डिंग बनकर जर्जर हो चुकी हैं, लेकिन डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है। 65 फीसदी स्पेशलिस्ट डॉक्टर की मांग विधायकों की डिमांड को नंबर्स में कन्वर्ट करें तो तकरीबन 2000 से ज्यादा डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की डिमांड की गई है। इनमें 65 फीसदी स्पेशलिस्ट की मांग की गई है। 50 से ज्यादा विधायकों ने बच्चों के डॉक्टर की डिमांड की है। इनके अलावा हड्डी रोग विशेषज्ञ और मेडिसिन विभाग के डॉक्टर की डिमांड की गई है। डॉक्टर की डिमांड के संबंध में सबसे ज्यादा सवाल मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा, भागलपुर और गया जी के विधायकों ने की है। नए हेल्थ सब सेंटर खोलने को लेकर पूछे गए 34 सवाल 387 में से 34 यानि 10 फीसदी सवाल नए हेल्थ सब सेंटर खोलने को लेकर हैं। इन 34 सवालों में से 41 नए हेल्थ सब सेंटर खोलने की बात की गई है। इनकी सबसे ज्यादा डिमांड मोतिहारी, बेतिया और अररिया जिले के विधायकों की ओर से की गई। नल जल योजना पर सदन में हंगामा, स्पीकर चैंबर तक पहुंचा मुद्दा नल-जल योजना की आपूर्ति और खराबी को लेकर इस बार विधानसभा में खूब हंगामा हुआ। 50 से ज्यादा विधायकों ने इस मामले पर सवाल पूछे। सबकी शिकायत लगभग एक ही तरह की थी। गांव में योजना पहुंची, लेकिन आपूर्ति बंद है। नल-जल योजना अधूरी है या पाइपलाइन खराब है, मोटर/टंकी जर्जर है, रखरखाव नहीं हो रहा या पानी नहीं आ रहा है। मामला इतना बढ़ा कि स्पीकर को अपने चैंबर में इस विभाग के अधिकारियों के साथ अलग से बैठक करनी पड़ी। इस बैठक में विधायकों ने बताया कि बिहार में नल-जल योजना की स्थिति बहुत खराब है। हालात ये हैं कि न तो इनका मेंटेनेस किया जा रहा और न ही शिकायतों का सही से समाधान हो पा रहा है। 23 हजार से ज्यादा योजनाएं बंद हैं। इसके कारण गर्मी शुरू होते ही लगभग 45 हजार गांवों में पानी का संकट मंडराने लगता है। स्पीकर ने पीएचईडी मंत्री को निर्देश दिया है कि वे हर जिले में जाकर इस योजना की समीक्षा करें। 8 अनुमंडल और 10 नए प्रखंड बनाने की डिमांड सामान्य प्रशासन विभाग से कुल 34 सवाल पूछे गए हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा नए अनुमंडल बनाने की मांग को लेकर है। कुल 8 नए अनुमंडल बनाने की मांग विधायकों की तरफ से की गई है। मुख्य रूप से देखें सरैया, जोकिहाट, सकरा, घोसी, बरबीघा, डेहरी, पकरीवरावां, इस्लामापुर को अनुमंडल बनाने की मांग की है। सरकार की तरफ से लगभग सभी विधायकों के इस डिमांड को अलग-अलग तरीके से खारिज कर दिया गया है। फिलहाल सरकार नया अनुमंडल बनाने का कोई विचार नहीं रखती है। अनुमंडल के अलावा 10 नए प्रखंड बनाने की डिमांड भी सदन में उठी है। इनमें मुख्य तौर पर माधोपुर, आधारा, खुदागंज, जैतीपुर, फुलकाहा, नयागांव, धमौल, साठी, कर्मनाशा और डेंगा को नया प्रखंड बनाने की मांग की गई है। बिहार में बड़ी इंडस्ट्री नहीं, फूड प्रोसेसिंग प्लांट की जरूरत 2025 का चुनाव जीतने के बाद NDA सरकार का पूरा फोकस राज्य में इंडस्ट्री लगाने को लेकर है। गन्ना उद्योग से लेकर फिनटेक सिटी बनाने, रक्षा उपकरण बनाने तक की यूनिट लगाने की पहल की जा रही है। लेकिन विधानसभा में जनता के प्रतिनिधियों की तरफ से हर तरह की इंडस्ट्री को लेकर दिलचस्पी कम ही दिखी। उद्योग विभाग से इस बार कुल 38 सवाल पूछे गए। इनमें से 13 यानि 34 फीसदी सवाल फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने को लेकर है। सवालों की स्टडी से पता चलता है कि यहां लोग सबसे ज्यादा फल, सब्जी, अनाज जैसे मक्का, लीची, केला और आम के लिए फुड पार्क और फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की मांग कर रहे हैं। इनके अलावा 15-17 जिलों में सीमेंट प्लांट लगाने और नए सिरे से औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की मांग की गई है। विधायकों ने ग्रामीण इलाकों में 200 नई सड़कें बनाने की मांग सबसे ज्यादा सवाल जिन विभागों से पूछे गए हैं, ग्रामीण कार्य विभाग उनमें तीसरे नंबर पर है। इस विभाग से कुल 507 सवाल पूछे गए हैं। इनमें 200 से ज्यादा नए सड़क बनाने और उनकी मरम्मति को लेकर डिमांड की गई है। इसके अलावा 130 नए पुल बनाने की मांग की गई है। वहीं 45 नया बायपास और 35 संपर्क पथ बनाने की मांग की गई है। अतिक्रमण से मुक्ति और कब्रिस्तान की घेराबंदी की मांग भूमि राजस्व और गृह विभाग के सवालों के अध्ययन से दो बातें समझ में आती हैं। लोग जमीन को कब्जामुक्त कराने और कब्रिस्तान की घेराबंदी के लिए भी परेशान हैं। भूमि व राजस्व विभाग में पूछे गए सवालों में सबसे ज्यादा 62 सवाल यानि 43 फीसदी सवाल जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने, अवैध कब्जा हटाने से संबंधित है। इसके बाद 34 सवाल यानि 23 फीसदी सवाल भू-माफिया और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने से संबंधित है। दाखिल-खारिज जमाबंदी, रसीद परिमार्जनन की त्रुटि को सही करने से संबंधित 18 सवाल यानि कि 12 फीसदी सवाल पूछे गए हैं। गृह विभाग से विधायकों ने 180 सवाल पूछे हैं। इनमें 45 फीसदी यानि कि तकरीबन 70 सवाल नया थाना, ओपी या पुलिस चौकी बनाने को लेकर है। वहीं, 40-45 सवाल राज्य भर के कब्रिस्तानों की घेराबंदी को लेकर पूछे गए हैं।
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