'सम्राट चौधरी जनता को बसाएं, उजाड़े नहीं':पटना में 40 लोगों के आशियाने पर बुलडोजर कार्रवाई का नोटिस, परिवार बोला- जुर्माना लगाएं, घर नहीं तोड़ें
‘15 साल से इस घर में हम रह रहे हैं। टैक्नोस भी दे रहे हैं। अब तक सब ठीक था, लेकिन अचानक घर तोड़ने का नोटिस दिया है। नोटिस मिलने के बाद से कुछ समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। सराकर चाहें तो जुर्माना लगा दें, हमारा मेहनत से बना घर न तोड़ें।’ यह दर्द है पटना के राजपुर पुल इलाके में रह रहे दो परिवारों का। पटना नगर निगम से मिले नेटिस के बाद से परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। निगम ने दो मकानों पर ‘कंप्लीट बिल्डिंग टू बी डेमोलाइज्ड’ का नोटिस चस्पा किया है। इन मकानों में करीब 40 लोग रहते हैं। नोटिस के मुताबिक, 5 दिन के भीतर बिजली-पानी काटने और 30 दिन के अंदर मकान तोड़ने की चेतावनी दी गई है। नोटिस मिलते ही परिवारों में डर का माहौल है। लोग रात भर सो नहीं पा रहे, खाने-पीने तक में दिक्कत हो रही है। सबसे ज्यादा चिंता घर की बेटियों के भविष्य को लेकर जताई जा रही है। पटना नगर निगम की नोटिस के बाद भास्कर ने ग्राउंड पर जाकर उन परिवारों से बात किया। इस दौरान परिवारवाले हाथ जोड़कर सीएम सम्राट चौधरी से राहत की गुहार लगाने लगे। परिजनों ने क्या कहा, जानिए… सम्राट सरकार से इंसाफ की गुहार लगा रही महिलाएं परिवारवालों ने बताया कि यह जमीन उन्होंने साल 2008 जमीन खरीदी थी। 2012 में घर बना और तब से टैक्स भी दे रहे हैं। फिर भी अचानक इस तरह की कार्रवाई ने उन्हें सकते में डाल दिया है। महिलाएं घर बचाने के लिए धरने पर बैठ गई हैं और हाथ जोड़कर सम्राट सरकार से इंसाफ की गुहार लगा रही हैं कि उनके आशियाने को उजाड़ने से पहले उनकी मजबूरी और दर्द को समझा जाए। पहले देखिए विवादित मकान की तस्वीर फाइन लगाने की मांग, मकान तोड़ने का विरोध रवि शंकर ने कहा कि, ‘नगर निगम से नोटिस आया है कि आपके घर का 5 दिन के भीतर बिजली पानी काटा जाएगा। फिर 30 दिन के भीतर मकान तोड़ा जाएगा। पटना नगर निगम से नक्शा पास नहीं है। इसलिए पूरा बिल्डिंग तोड़ा जाएगा।’ उनका कहना है कि, ‘हम लोग पटना नगर निगम से 2009 में NOC भी लिए हैं। हम लोग नक्शा बनाए हैं, लेकिन उस वक्त पास नहीं करवाए थे।’ रवि शंकर ने आगे बताया कि, 'हम 2013 से पटना नगर निगम का टैक्स भी दे रहे हैं। साल 2012 में हम घर बना, तब से बिजली का कनेक्शन भी लिया है। उस वक्त किसी ने नहीं रोका। सरकार को हमारे ही 8 धुर जमीन से ही क्या करना है। अगर रोड पर गाड़ी पकड़ते हैं तो फाइन लगाते हैं ना कि जब्त करते हैं। मेरे बिल्डिंग का फाइन किया जाए, लेकिन वह सीधा कह रहे हैं कि घर टूटेगा नक्शा पास नहीं है।' हमारा अपना घर, फिर भी उजाड़ने का नोटिस- अजय कुमार मकान मालिक अजय कुमार ने कहा कि, 'यह 564 स्क्वायर फीट में बना पूरा मकान हमारा अपना है। सिर्फ हमारा परिवार ही यहां रहता है। मैं साल 2008 में जमीन को खरीदा था। जमीन का दाखिल खारिज भी मेरे नाम से हैं। घर का जो टैक्स लगता है, उसे नगर निगम ने ही निर्धारित किया है। नाला का निकासी भी नगर निगम के परमिशन से ही हुआ है। जंगलराज शाम में शुरू होता था, इनका सुबह से शुरू है- मकान मालिक अजय कुमार ने आगे कहा कि, ‘भाजपा के लोग कहते हैं कि राजद के सरकार में जंगल राज था। उनका जंगल राज 6:00 बजे शाम से शुरू होता था, लेकिन इनके राज में क्राइम सुबह से शुरू हो जाता है।' अजय कुमार ने आगे कहा कि, ‘शहर का आधा से ज्यादा बिल्डिंग बिना नक्शा का ही बनाया हुआ है तो क्या वह गैरकानूनी नहीं है। सिर्फ हमें दो आदमी गैरकानूनी क्यों हैं। यह कैसा कानून का डंडा चलाया जा रहा है। कानून तो सबके लिए एक बराबर होती है।’ तीन बेटियों के सिर से छिन जाएगा छत- अजय कुमार परिवार के मुखिया अजय ने भावुक होकर कहा, 'मेरी सिर्फ तीन बच्चियां हैं, पुत्र भी नहीं है, क्या इन लोगों को रोड पर लाना चाहते हैं? मेरी ऐसी अवस्था हो गई है कि मैं रात भर सो नहीं पाता हूं। खाना नहीं खा पाता हूं। मेरी उम्र हो गई है। अगर मुझे कुछ हो जाता है तो मेरे बाल बच्चे को कौन देखेगा। क्या सरकार हमारी बेटियों की जिम्मेदारी उठाएगी।' अगर घर अवैध था, तो सुविधाएं कैसे मिलीं?- मोहनी देवी धरने पर बैठी मोहनी देवी नेनगर निगम के नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि, ‘यह हमारी निजी जमीन है। अगर घर तोड़ना है तो पहले हम महिलाओं पर बुलडोजर चलाइए।’ पीड़िता सरोजनी देवी ने बताया कि, मेरा भतीजा मिट्टी में काम कर साइकिल चलाकर इस घर को मुश्किल से बनाया है। आज घर तोड़ने की बात कह रहे हैं तो क्या सभी परिवार सड़क पर आ जाएं। अगर सरकार तोड़ेगी तो हम लोग यहीं पर धरना देंगे। इसके लिए हम लोग कोर्ट से न्याय लेंगे। हाथ जोड़कर लगाई गुहार- घर पर बुलडोजर मत चलाइए कुसुम कुमारी ने हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गुहार लगाते हुए कहा कि, ‘हम सरकार से प्रार्थना करते हैं कि हमारे पापा ने इस घर को मेहनत कर बनाया है, उस पर बुलडोजर ना चलाएं। जब से ये सुने है हमारा भूख प्यास सब खत्म हो गया है।’ कोर्ट जाने की तैयारी में परिवार परिवारों ने साफ किया है कि अगर कार्रवाई नहीं रुकी तो वे अदालत का रुख करेंगे। फिलहाल उनकी एक ही मांग है उनकी बात सुने बिना घर न तोड़ा जाए। निगम का पक्ष- नक्शा पास नहीं तो कार्रवाई संभव पटना नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ होल्डिंग टैक्स भरने से निर्माण वैध नहीं हो जाता। घर 15 साल पहले बना है और आपने उसका नक्शा पास नहीं कराया है। नियम के मुताबिक, सिर्फ होल्डिंग टैक्स भरने से वह घर कानूनी नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में नगर निगम नोटिस दे सकता है। अगर जानकारी छिपाई गई है या कम टैक्स भरा गया है तो बाकी रकम पर 100% तक जुर्माना भी लग सकता है। इसके अलावा 1 लाख से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर घर सरकारी जमीन पर बना है या नियमों का ज्यादा उल्लंघन करता है तो उसे तोड़ा भी जा सकता है।
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