सरकार की नीतियों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन:प्रखंड मुख्यालयों पर दिया धरना, माले नेता बोले- किसानों के अस्तित्व पर संकट

Feb 9, 2026 - 17:34
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सरकार की नीतियों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन:प्रखंड मुख्यालयों पर दिया धरना, माले नेता बोले- किसानों के अस्तित्व पर संकट
अखिल भारतीय किसान महासभा के आह्वान पर राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत सोमवार को प्रखंड मुख्यालयों पर किसानों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस क्रम में जेपी स्मारक के पास किसानों का विरोध मार्च निकालकर धरना दिया। धरने के दौरान किसानों ने भारत सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उसके बाद आरा सदर अनुमंडल कार्यालय में किसानों ने प्रदर्शन कर अपनी 13 सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपा। किसान बदहाली की कगार पर पहुंच चुका है माले नेता राजू यादव ने कहा कि वे देश के अन्नदाता हैं, लेकिन केंद्र व राज्य सरकारों की जनविरोधी और कॉरपोरेट पक्षधर नीतियों के कारण आज किसान बदहाली की कगार पर पहुंच चुका है। यदि किसानों की अनदेखी जारी रही तो देश में खाद्यान्न संकट के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ सकता है। राजू ने कहा कि कृषि को बाजार और मुनाफे के हवाले करने की नीतियां किसानों के अस्तित्व पर सीधा हमला हैं। भारत-अमेरिका कृषि समझौते को रद्द करने की मांग करते हुए किसानों ने इसे घरेलू कृषि के लिए घातक बताया। सिंचाई को कृषि जीवन का मूल आधार बताते हुए इंद्रपुरी जलाशय (कदवन डैम) के शीघ्र निर्माण, उत्तर कोयल नहर परियोजना को अविलंब पूरा करने और बंद पड़े सरकारी नलकूपों को चालू करने की मांग की गई। कागजात मुहैया कराए जाए वहीं, दिलराज प्रीतम ने विशेष भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि कृषि और भूमि का भौतिक सत्यापन कर वास्तविक किसानों और गरीबों को कागजात मुहैया कराए जाए। साथ ही बटाईदार किसानों समेत खेती करने वाले सभी किसानों का पंजीकरण कर किसान सम्मान निधि सहित सभी सरकारी सुविधाएं दी जाए। एमएसपी की कानूनी गारंटी, सभी फसलों की सरकारी खरीद, एपीएमसी एक्ट की पुनर्बहाली और कृषि मंडियों को चालू करने की मांग भी प्रमुख रही। समुचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग उठाई बिजली के निजीकरण, स्मार्ट मीटर और कृषि भूमि के जबरन अधिग्रहण का विरोध करते हुए किसानों ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के पालन, समुचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग उठाई। चार श्रम संहिताओं, प्रस्तावित विद्युत विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और नए कृषि विपणन प्रस्ताव को वापस लेने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। इसके अलावा मनरेगा की पुनर्बहाली, सभी फसलों का सार्वजनिक बीमा, विभिन्न कृषि उत्पादों पर सी2 प्लस 50 प्रतिशत एमएसपी और 60 वर्ष से ऊपर के किसानों को 10 हजार रुपए मासिक पेंशन की मांग की गई। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला