असम के 50 वोटर्स नहीं कर पाएंगे वोटिंग:बोले- बच्चियों से गंदा काम हुआ, हमें ही पुलिस के पहरे में रखा; असम से बिहार तक पड़ताल

Apr 9, 2026 - 16:19
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असम के 50 वोटर्स नहीं कर पाएंगे वोटिंग:बोले- बच्चियों से गंदा काम हुआ, हमें ही पुलिस के पहरे में रखा; असम से बिहार तक पड़ताल
“आज असम में चुनाव है। हम 50 से ज्यादा वोटर्स बिहार में फंसे हैं। पुलिस जाने नहीं दे रही है। वह अधिकारी के आदेश का इंतजार कर रही है। हम वोट नहीं दे पाए तो हमारे ऊपर बंग्लादेशी होने का ठप्पा लग जाएगा। हम असम से भी बाहर कर दिए जाएंगे। असम में रहना है तो वोट देना जरूरी है। अब समझ में नहीं आ रहा है क्या करें। कई बार पुलिस वालों से रिक्वेस्ट कर चुके हैं। हमें वोट करने से रोका क्यों जा रहा है। हम तो कहीं के नहीं रहे, बिहार में बेटियों पर खतरा है, असम में वोट नहीं किया तो वहां रहने की मुश्किल है।” यह बिहार के सहरसा में डर्टी फार्म हाउस कांड में फंसे 50 से अधिक असम के वोटर्स का दर्द है। फार्म हाउस पर पुलिस का ऐसा पहरा है कि वोटर्स वोट के लिए अपने प्रदेश नहीं जा पा रहे हैं। 29 मार्च को पुलिस ने सहरसा से JDU नेता ओवैस करनी उर्फ चुन्ना मियां के ईंट भट्‌ठे से 70 मजदूरों को रेस्क्यू किया था। इनमें 7 नाबालिगों ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। आरोपी JDU नेता पुलिस गिरफ्तर में है, लेकिन पुलिस ने जांच के नाम पर पीड़ित परिवारों को भी बिहार में रोक रखा है। उन पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए बिहार पुलिस के पहरे में कैद असम के वोटर्स की कहानी.. डर्टी फार्म हाउस के खुलासे के बाद पुलिस का पहरा 29 मार्च को सहरसा के नया टोला में डर्टी फार्म हाउस का खुलासा हुआ। यह फार्म हाउस JDU नेता ओवैस करनी का है। यहां से 14 से 16 साल की 7 लड़कियों को रेस्क्यू किया गया। जांच के दौरान लड़कियों ने JDU नेता पर यौन शोषण से लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। पुलिस ने आरोपी JDU नेता ओवैस के साथ उसके सहयोगी मुंशी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद फार्म हाउस में पुलिस की तैनाती कर दी गई। पुलिस असम के परिवारों पर नजर रख रही है, ताकि कोई बिहार से बाहर नहीं जा पाए। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सबसे पहली कड़ी ठेकेदार नजरुल का पता चला, जो असम से मजदूरों को फार्म हाउस पर लाया था। हमने वोटर्स से लेकर ठेकेदार और फार्म हाउस में पुलिस के पहरे तक की पड़ताल की है। असम के लोगों को बिहार में छोड़कर फरार होने वाले ठेकेदार को भी ढूंढ निकाला। बिहार से असम तक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बिहार से लेकर असम तक पड़ताल की। हमें पता चला कि असम के धुबरी/गोलक गंज और गौरीपुर विधानसभा क्षेत्र के 50 से अधिक वोटर्स इस बार वोट नहीं कर पांएगे। विधानसभा 23 और 24 के इन वोटर्स के लिए वोट नहीं डालना बड़ी मुश्किल होगी। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम सबसे पहले असम के वोटर मोहम्मद अली से मिली। वह JDU नेता ओवैस करनी के फार्म हाउस और ईंट भट्‌ठे पर काम करता था। मोहम्मद अली की जुबानी वोट नहीं देने की पूरी कहानी जानिए। मोहम्मद अली ने बताया, “हम लोगों को ठेकेदार नजरुल पैसे का लालच देकर बिहार लाया था। शुरुआत में लगभग 60 लोग आए थे। अब लगभग 50 लोग बचे हैं, क्योंकि 10 लोग यहां से भागकर निकल गए हैं। अब काम बंद हो जाने के बाद भी कहा जा रहा है कि हम घर नहीं जा सकते हैं, नहीं तो समस्या हो जाएगी। हम भी जाना चाहते हैं, लेकिन हम लोगों को रोका जा रहा है। अगर हम वोट नहीं देंगे तो हमें डी-वोटर बना दिया जाएगा, यहां तक कि हमें बांग्लादेशी तक कह दिया जाता है। इसलिए वोट देना बहुत जरूरी है। अगर हम जिंदा हैं तो वोट देना ही होगा। हम लोग कलेक्टर के पास गए थे, उन्होंने कहा ठीक है, हम देख रहे हैं। इसके बाद एक अधिकारी आए और बोले कि आज गाड़ी लगवा देंगे। पिछले 12 दिनों से यही कहा जा रहा है। लेकिन वोटिंग है, तो हम शायद वोट नहीं दे पाएंगे। अगर देर रात पहुंचेंगे तो वोट कैसे दे पाएंगे।” JDU नेता जेल गया, पैसे कौन देगा भास्कर की पड़ताल में असम के वोटर्स ने बताया कि कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है कि हमारा वोट कैसे पड़ेगा। ठेकेदार ने JDU नेता को असम से लाकर आदमियों को सौंप दिया था। अब नेता जेल चला गया है। पैसे कौन देगा, इसका कोई जवाब नहीं दे रहा है। प्रशासन कोई जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। मोहम्मद अली ने अपना दर्द बताया, “हम लोग लगातार कह रहे हैं कि वोटिंग से पहले हमें भेज दिया जाए। हमें ईंट और मिट्टी का काम दिया गया था। 1000 ईंट पर खाने के लिए 120 से 130 रुपए मिलते थे। बाकी पैसा जमा रखा जाता था, जिसे आखिर में देने की बात कही गई थी। नजरुल नाम का आदमी, जो असम का रहने वाला है, वह अब भाग गया है। उस पर भी दबाव था और उसे मारा-पीटा जाता था। डर के कारण वह यहां से चला गया है। अब उसका कोई पता नहीं है। हम लोग किसी तरह घर जाना चाहते हैं। अगर गाड़ी मिल जाए तो हम तुरंत निकल जाएंगे, लेकिन अधिकारियों के चक्कर में ही हम लोग यहां फंस गए हैं।" भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने वोटर्स की पूरी जानकारी निकालने के लिए असम तक अपना नेटवर्क एक्टिव किया। काफी पड़ताल और खोजबीन के बाद कई ऐसे कॉन्टेक्ट मिले जिन्होंने हमें बिहार में फंसे वोटर्स के परिवार वालों के मोबाइल नंबर मुहैया कराए। भास्कर रिपोर्टर ने बिहार में फंसे असम के वोटर्स के परिवार वालों से वीडियो कॉल पर बात की। रिपोर्टर - आपके कितने लोग फंसे हैं, जिन्हें वोट देना है? रिजवान - यहां से हमारे 72 परिवार बिहार में काम के लिए गए थे। रिपोर्टर - यहां पर आप लोगों को कौन लाया? रिजवान - कंपनी के आदमी ने ठेकेदार को फोन किया था, उसी से बात हुई, जिसके बाद हमारे लोग वहां गए। रिपोर्टर - चुनाव में उन्हें नहीं जाने दिया जा रहा है क्या? रिजवान - उन्हें आने नहीं दिया जा रहा है, सब लोग परिवार के साथ फंस गए हैं। रिपोर्टर - अब कैसे वोट कर पाएंगे? रिजवान - वही तो चिंता है, अगर वोट नहीं दिया तो डी-वोटर कहे जाएंगे। रिपोर्टर - आप लोगों ने अपने यहां प्रशासन से मांग नहीं की? रिजवान - सब तरह से कोशिश की है, कोई हल नहीं निकला। रिपोर्टर - वहां के जनप्रतिनिधि से बात नहीं की क्या आप लोगों ने? रिजवान - बात तो हुई है सबसे, लेकिन वहां हमारे लोग पुलिस के पहरे में फंसे हैं। JDU नेता ने ठेकेदार को बांधकर पीटा, बिजली का झटका दिया भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि JDU नेता ने असम से 70 से अधिक परिवारों को लाने वाले ठेकेदार को JCB से बांधकर पीटा था। बिजली का करंट भी लगाया था। इसकी वजह पता चली कि ठेकेदार नजरुल ने लड़कियों के लिए पैसे लिए थे, लेकिन वो JDU नेता की पसंद की लड़कियां नहीं लाया था। पता चला कि ठेकेदार असम का ही रहने वाला था, इसलिए वोटर्स के लिए परिवार वालों से हमारी टीम ने इसकी भी जानकारी ली। परिवार वालो ने भी इस घटना को सही बताया। रिजवान ने बताया ठेकेदार लड़कियों को नहीं ले गया थाा, इसलिए उसे बांधकर पीटा गया। इसके बाद ठेकेदार भागकर असम आ गया। रिपोर्टर - इस बार वोट नहीं देंगे तो अगली बार दे देंगे। रिजवान - नहीं-नहीं, वोट देना पड़ेगा, यहां सब लोग यही कह रहे हैं। रिपोर्टर - वहां आपके कौन लोग फंसे हैं? रिजवान - वहां मेरे परिवार के लोग हैं, मां-बाबा सब फंसे हैं। बहुत चिंता हो रही है। रिपोर्टर - उनके साथ और भी वोटर हैं? रिजवान - मोटा-मोटी मेरे गांव के 62 वोटर बिहार में फंसे हुए हैं। रिपोर्टर - अगर वो लोग वोट नहीं देंगे तो क्या होगा? रिजवान - असम में बहुत सख्ती है, सब डेटा ऊपर तक जाता है। रिपोर्टर - मतलब, वोट नहीं देगा तो नाम कट जाता है क्या? रिजवान - हां, डी-वोटर हो जाता है, फिर उसका सुधार कराने में परेशानी होती है। रिपोर्टर - मतलब 63 लोग अभी तक नहीं पहुंचे हैं? रिजवान - हां, मेरे भी परिवार के लोग उधर हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम की पड़ताल के दौरान असम के धूमरी विधानसभा के वोटर्स से बात हुई। इसमें वोट को लेकर मोहम्मद हसन काफी जागरुक दिखे। उन्हें वोट नहीं देने की बहुत तकलीफ है। उनका कहना है कि असम में बिहार जैसी स्थिति नहीं है। हमने वोट नहीं दिया तो हमारा नाम ही कट जाएगा। फिर असम में बोला जाएगा कि हम बांग्लादेशी हैं। जानिए वोटर मोहम्मद हसन ने क्या कहा। “एक अधिकारी आए और कहा कि आज गाड़ी लगवा देंगे। पिछले 12 दिनों से यही कहा जा रहा है। हमारे साथ तो धोखा ही हुआ है। ठेकेदार नजरुल लेकर आया और फंसाकर चला गया। हम सभी वोट देने के लिए जाना चाहते हैं, लेकिन यहां का प्रशासन हमारे साथ धोखा कर रहा है। अगर हम वोट नहीं देंगे तो हमारी सभी सुविधाएं खत्म हो जाएंगी। हमें डी-वोटर बना दिया जाएगा, यहां तक कि हमें बांग्लादेशी तक कहा जाएगा। हम लोग कलेक्टर के पास गए थे। उन्होंने कहा कि ठीक है, हम देख रहे हैं। इसके बाद एक अधिकारी आए और कहा कि आज गाड़ी लगवा देंगे। पिछले 12 दिनों से यही कहा जा रहा है, लेकिन अब तक कोई जिम्मेदारी से काम नहीं किया है। अब हम शायद वोट नहीं दे पाएंगे। हम लोग लगातार कह रहे हैं कि वोट से पहले हमें भेज दिया जाए। ठेकेदार नजरुल असम का है, लेकिन उसका भी कोई पता नहीं चल रहा है। वह अब भाग गया है, उस पर भी दबाव था और उसे मारा-पीटा जाता था। डर के कारण वह भाग गया। अगर गाड़ी मिल गई होती तो हम वोट देने घर जा सकते थे। अब तो पैसा भी नहीं है कि यहां से असम तक पहुंच पाएं।” भास्कर की पड़ताल में असम के विधानसभा नंबर 24 के वोटर्स से भी बात हुई। इसमें नसीमुद्दीन भी शामिल हैं, नसीमुद्दीन ने कहा हमारे पीछे पुलिस लगा दी गई है। फार्म हाउस से कहीं बाहर नहीं जाने दिया जाता है। ऐसे में हम असम कैसे जा सकते हैं। पढ़िए नसीमुद्दीन की जुबानी वोट नहीं देने का दर्द। “यहां हर तरफ से पुलिस लगी है, बोल रही है कि साहब का आदेश होगा तब ही जाना होगा। ऐसा लग रहा है कि हम लोग ही अपराधी हैं। हम वोट नहीं दे पाएंगे तो इनका क्या फायदा होगा। हम तो वोट के लिए पहले से ही काफी तैयारी किए थे। इस बीच कांड हो गया जिसके बाद पूरा मामला बिगड़ गया है। हमें यहां आए सात महीने हो गए हैं। आने से पहले कहा गया था कि 6 महीने काम करना है, लेकिन अब 7 महीने हो गए हैं और हमें जाने नहीं दिया जा रहा है। हमारे सरदार के साथ मारपीट की गई थी, जिसके बाद वह भाग गया और हम यहां फंसे हुए हैं। साहब लोग पिछले 5 दिनों से कह रहे हैं कि कल चले जाना, लेकिन जाने नहीं दिया जा रहा है। रोज आज कल किया जा रहा है। हमें एक वक्त बस सुबह का खाना मिलता है। रात में खाना भी नहीं मिलता, सुबह का बचा हुआ खाना ही थोड़ा-थोड़ा रात में दे दिया जाता है। यानी दिन का ही खाना रात में भी दिया जाता है। एक बच्चा भी बीमार हो गया है। लेबर को 1000 रुपए मिलते थे, अभी यहां पुलिस लगी है, जो कह रही है कि साहब का आदेश होगा तब ही जाने दिया जाएगा।” पड़ताल के दौरान रिपोर्टर की मुलाकात जहरुलहक से हुई। वह मजदूर हैं, लेकिन वोट को लेकर काफी गंभीर दिखाई दिए। उन्होंने बताया कि हम सभी मजदूरों को हमारे ही जिले से करीब 50 की संख्या में यहां काम के लिए लाया गया था, अब वोट डालने के लिए भी नहीं जाने दिया जा रहा है। पढ़िए जहरुल हक के वोट नहीं दे पाने का दर्द। “यहां आए हुए 7 महीने हो चुके हैं। हालात दिन-ब-दिन और खराब होते जा रहे हैं। शुरुआत में हमें लालच देकर 40 हजार रुपए एडवांस दिए गए थे और कहा गया था कि 6 महीने काम करने के बाद पूरी मजदूरी देकर वोट डालने के लिए घर भेज दिया जाएगा। अब हम यहां ऐसे फंस गए हैं कि ना तो वोट डालने जा पा रहे हैं और ना ही यहां से निकलने की सोच पा रहे हैं। हमें यहां लेकर आने वाला ठेकेदार नजरूल फरार हो गया है। वह असम के गौरीपुर का रहने वाला है, लेकिन उससे कोई कॉन्टेक्ट नहीं हो पा रहा है। हम लोग भी उसी इलाके, गौरीपुर विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं। अब जब हमारे क्षेत्र में चुनाव हो रहा है तो हम सभी वोटर अपने घर जाकर मतदान करना चाहते हैं, लेकिन हमें जबरन रोका जा रहा है।” असम के वोटर्स को फंसाने वाले ठेकेदार को भास्कर ने ढूंढ निकाला बिहार में फंसे 50 से अधिक असम के वोटर्स से बात करने के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने उस ठेकेदार को भी ढूंढ निकाला। ठेकेदार की तलाश में भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को बिहार से लेकर असम की दो विधानसभा क्षेत्रों में अपना नेटवर्क एक्टिव करना पड़ा। पढ़िए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम कैसे पहुंची उस ठेकेदार के पास जिसने बिहार में असम के वोटर्स को फंसाया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को असम के वोटर्स से ठेकेदार नजरुल का इनपुट मिला। वोटर्स के पास ठेकेदार का जो मोबाइल नंबर था वह स्विच ऑफ था। ऐसे में ठेकेदार तक पहुंच पाना हमारे लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन मामला गंभीर था इसलिए नजरुल तक पहुंचना जरुरी था। नजरुल हक असम के गौरीपुर विधानसभा क्षेत्र का रहने वाला है, लेकिन वहां के सभी कॉन्टेक्ट खंगालने के बाद भी रिपोर्टर की बात ठेकेदार से नहीं हो पाई। ठेकेदार तक पहुंचने के लिए भास्कर रिपोर्टर ने बिहार के 6 से अधिक ईंट भट्‌ठे पर संपर्क किया। इसके बाद गौरीपुर विधानसभा क्षेत्र के एक मुखिया का नंबर मिला। घंटों मशक्कत के बाद मुखिया ने ठेकेदार से वीडियो कॉल पर बात कराई। जानिए ठेकेदार नजरुल पिटाई के बाद कैसे असम के वोटर्स को बिहार में छोड़कर अपनी जान बचाकर भागा। नजरुल ने बताया, “हमारे लोग उधर से फोन कर रहे हैं। मैं भी वहां था, लेकिन मैं भागकर यहां आ गया। अगर नहीं आता तो JDU नेता हमारी हत्या कर देता। कितने दिन मैं बर्दाश्त कर पाता? जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो वहां से भाग आया। गांव वाले कह रहे हैं कि किसी तरह से उन्हें लेकर आओ। मैं तो लोगों को लेकर जाता हूं, लेकिन इतना लफड़ा पहली बार हुआ है। वहां हर तरह की गंदगी थी, लड़कियों के साथ गलत काम होता था। मालिक नेता था, बहुत बदमाश था। बात-बात में गोली मारने की धमकी देता था। एक आदमी को गोली मारी गई, पैर में गोली लगी थी। अब मैं जाऊं तो क्या होगा? JCB में बांधकर मारता था। जो मालिक है, अगर कोई लड़की उसे पसंद आ जाए, तो बुलाता है कि उसे हमारे पास लाओ। हम तो काम करने आए थे, लेकिन वह लड़कियों को अंदर बुला लेता था। हमारा तो ठेकेदार का काम है जगह-जगह ठेकेदारी करते हैं। आदमी पहुंचाते हैं, लेकिन यह नहीं पता था कि जहां आदमी पहुंचा रहे हैं वह इंसान नहीं राक्षस है। हम तो इतना डर गए हैं कि बिहार में जाने की हिम्मत नहीं है। वह देखेगा तो मार डालेगा क्योंकि उसकी पसंद की लड़की हम नहीं पहुंचा पाए हैं। वह हमसे हमेशा नॉर्थ ईस्ट की सुंदर लड़कियों की डिमांड करता था। इस बार 70 से अधिक परिवार दिए, लेकिन उसमें उसके पसंद की लड़कियां कम थीं, इसलिए वह गुस्सा हो गया। मुझे JCB में बांधकर पीटा, बिजली का करंट लगाया। भागा नहीं होताा तो लड़की के कारण मेरी जान ले लेता। अब जो लोग फंसे हैं,वह आ जाएं, हम बिहार दोबारा जाएंगे ही नहीं।” SP बोले- पुलिस ने किसी को नहीं रोका सहरसा SP सुबोध कुमार ने कहा, “पुलिस ने किसी को भी नहीं रोका है और थाने को भी ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है। जिन लोगों का रेस्क्यू किया गया है, उन्हें सामान्य प्रक्रिया के तहत संरक्षण में रखा जाता है, ताकि उन पर किसी प्रकार का दबाव न पड़े।” ---------------- इससे जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… JDU नेता असम की लड़कियां होटलों में भेजता है:पीड़ित बोली- फार्महाउस में रातभर डांस कराया, टैबलेट खिलाईं; ओवैस की CM के साथ फोटो “हम लोगों को रात में होटल ले जाते थे। वहां घंटों जिस्म से खेला जाता था। नेताजी के गेस्ट वहां पहले से मौजूद रहते थे। जिसका जैसा मन करता था, वैसा करने लगता था। हम चाहकर भी विरोध नहीं कर पाते थे। गेस्ट हम लोगों को बहुत दर्द देते थे। रात में वापस घर भेज दिया जाता था। हम तो समझ भी नहीं पाते थे, हमारे साथ क्या हो रहा है। जाने के लिए मना करते तो वो लोग मारपीट करते थे। भगवान से यही मांगते थे कि रात न हो, क्योंकि हर रात ऐसे ही दर्द से गुजरना पड़ता था..।” यह दर्द 14 साल की उस मासूम का है, जिसके खुलासे के बाद सहरसा के JDU नेता ओवैस करणी उर्फ मुन्ना मुखिया तक पुलिस पहुंची। वह अकेली नहीं ऐसी ही पीड़ित 7 मासूमों ने मुन्ना मुखिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पूरी खबर पढ़िए स्वीमिंग पुल में नहाती लड़कियों को देखता था JDU नेता:पीड़ित बोली- पुलिस-VIP गेस्ट भी आते; एजेंट्स से नॉर्थ ईस्ट की लड़कियां मंगवाता “JDU नेता मुंशी से रोज रात को मेरी बेटी को बुलवाता था। बेटी बताती थी कि वहां एक स्वीमिंग पुल है। जिसमें कपड़े उताकर नहाने के लिए कहते थे। मालिक गार्डन में बैठकर हमें नहाते देखते थे। इधर-उधर टच करते थे। पुलिस और बड़ी-बड़ी गाड़ियों से लोग भी वहां आते थे।” ये कहना है 14 साल की नाबालिग लड़की की मां का, जिसे असम से JDU नेता ओवैस करनी उर्फ चुन्ना मियां के यहां मजदूरी के लिए लाया गया था। इनपुट के बाद भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम JDU नेता के फार्म हाउस पहुंची। ये बिल्कुल सुनसान जगह पर बना है। यहां हमें वो सब मिला जो पीड़ित लड़की की मां ने बताया था। पूरी खबर पढ़िए

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला