आज गणपति विसर्जन *देश के गद्दार*. *अमेरिका के टैरिफ से खुश जरूर है* 👽👽👽 *लेकिन वो भी जानते हैं* 👇👇👇 मोदी झुकेगा नहीं *ट्रम्प की गांड़ फाड़कर छोड़ेगा* 😂

*# राक्षस जिहादी, गैरजिहादियों को नजिस/नजस ( अपवित्र अशुद्ध एक प्रकार से टट्टी संडास गु समझते हैं) समझते है....उन हलाला उत्पन्नो से क्या उम्मीद कर सकते ...???*

Sep 6, 2025 - 16:04
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आज गणपति विसर्जन *देश के गद्दार*.   *अमेरिका के टैरिफ से खुश जरूर है* 👽👽👽  *लेकिन वो भी जानते हैं* 👇👇👇    मोदी झुकेगा नहीं  *ट्रम्प की गांड़ फाड़कर छोड़ेगा*  😂
आज गणपति विसर्जन *देश के गद्दार*.   *अमेरिका के टैरिफ से खुश जरूर है* 👽👽👽  *लेकिन वो भी जानते हैं* 👇👇👇    मोदी झुकेगा नहीं  *ट्रम्प की गांड़ फाड़कर छोड़ेगा*  😂

: 🌊 बाढ़ की तबाही और इंसानियत की पुकार

आज यमुना का जलस्तर इतना बढ़ चुका है कि उसने न केवल झुग्गी–झोपड़ियों में बसे गरीब परिवारों को डुबो दिया, बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास तक अपने पैरों की आहट पहुँचा दी है। यह दृश्य किसी को भी अंदर तक हिला देने वाला है।

सोचिए, वो मासूम बच्चे जो कल तक अपने आँगन में खेल रहे थे, आज किसी ऊँचे मकान की छत पर बैठे हुए भूख और डर से कांप रहे हैं। वो बुजुर्ग माँ–बाप, जिन्होंने अपनी सारी जिंदगी मेहनत करके घर बनाया, आज लाचार होकर पानी के सैलाब में अपनी पूरी कमाई को डूबते देख रहे हैं।

लोग कहते हैं कि पंजाब के लोगों को फंड दो… हाँ, बिल्कुल दीजिए, क्योंकि वहाँ भी बाढ़ ने कई जिंदगियाँ बर्बाद कर दी हैं। लेकिन दिल्ली की गलियों में भी वही आँसू, वही दर्द, वही भूख और वही बेबसी पसरी हुई है।

यहाँ भी लोग मदद की आस में बैठे हैं…

यहाँ भी माँ अपने बच्चे को गोद में लेकर इस उम्मीद में है कि कोई आएगा और उसे एक कौर रोटी थमा देगा।

क्या इंसानियत का फर्ज सिर्फ एक राज्य तक सीमित है❓

क्या मदद सिर्फ पंजाब तक ही पहुँचे और दिल्ली के वो गरीब लोग, जिनकी छत, घर, सामान सब कुछ डूब गया, वो अनसुने रह जाएँ❓

आज वक्त है कि हम सब अपने दिल से पूछें—

अगर हम बाढ़ में फँसे होते तो क्या हम भी उम्मीद नहीं करते कि कोई हमारी मदद को आए?

👉 हमें पंजाब के लोगों की मदद करनी है, लेकिन साथ ही दिल्ली के उन बेजुबान, बेबस परिवारों की भी, जिनकी आवाज़ शायद मीडिया और राजनीति के शोर में दब गई है।

इंसानियत का हाथ सबकी तरफ बढ़ना चाहिए, चाहे वो पंजाब हो या दिल्ली।

दोस्तों, जब-जब इस धरती पर आपदा आई है, तब-तब इंसानियत सबसे बड़ा धर्म बनी है। आज फिर वही समय है…

आओ, हाथ मिलाएँ…

दिल्ली और पंजाब दोनों की पीड़ा को समझें…

और मिलकर आँसुओं की इस नदी को इंसानियत के सागर में बदल दें।

🙏 क्योंकि ज़ख्म चाहे किसी भी शहर का हो, दर्द हमेशा इंसान का होता है।

JITENDRAKUMAR: 🔴 विशेष ब्लॉग 🔴

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*‼️पढ़े लिखे लोगों का मूर्ख शहर अजमेर??‼️*🙄

            *✒️सुरेन्द्र चतुर्वेदी*

                *अजमेर पढ़े लिखे मूर्खों का शहर है यह मैं नहीं मानता था मगर कल मेरे एक प्रशासनिक मित्र की पत्नी को डिजिटल अरेस्ट कर लिया तो मुझे यह बेफकूफी वाला एतबार भी हो गया। अख़बार में पढ़ा कि अधिकारी महोदय की पत्नी को डिजिटल अरेस्ट करके साढ़े सात लाख का चूना लगा दिया। भई वाह!हर रोज़ इस तरह की घटनाएं प्रचारित होती रहती हैं मगर उच्च शिक्षित स्याने लोग भी मूर्खता कर बैठते हैं।*🫢

               *अजमेर की जिस महिला लेक्चरार को डिजिटल अरेस्ट किया उसके पति बहुचर्चित अधिकारी हैं।*🙋‍♂️

            *डिजिटल गिरफ्तारी ! डर का एक नया कारोबार है जो मूर्खों की कृपा से फल फूल रहा है।*🥺

                  *अब गिरफ्तारी थाने में नहीं होती, मोबाइल स्क्रीन पर होती है।कोई कॉल करता है, आवाज़ में अकड़ भरता है और कहता है—*

*“आपको कल सुबह गिरफ्तार कर लिया जाएगा।” बस, हम बैंलेंस ट्रांसफर करने बैठ जाते हैं।*😨

               *पुलिस अब घर पर दस्तक नहीं देती। न हथकड़ी चाहिए, न गाड़ी।*❌

                    *ठग कहते हैं—“ऑनलाइन ज़मानत जमा करो।” मूर्ख हड़बड़ी में करा भी देते हैं।*😳

              *असल में यह गिरफ्तारी नहीं, मूर्खता की रसीद है।और मज़ा देखिए, असली पुलिस ढूँढे नहीं मिलती नक़ली पुलिस घर बैठे पकड़ लेती है।*😱

              *कल को शायद ठग डिजिटल जेल भी खोल देंगे। जज साहब ज़ूम पर बैठेंगे और कहेंगे—“14 दिन की सज़ा है, लॉगिन करके रोज़ हाज़िरी लगाना।”*😇

                  *यहां सवाल यह नहीं कि ठग इतने होशियार कैसे हो गए❓सवाल यह है कि पढ़े-लिखे लोग इतने डरपोक कैसे हो गए❓किसी ने कहा—“सीबीआई से बोल रहा हूँ”, और हम तुरंत अपना बैंक बैलेंस सौंप बैठे। असली पुलिस ढूँढे नहीं मिलती और नकली पुलिस घर बैठे पकड़ लेती है।*🤨

          *याद रखिए—डिजिटल गिरफ्तारी नाम की कोई चीज़ नहीं। यह ठगों का नया कारोबार है। इनकी दुकान डर से चलती है। आप न डरें, तो दुकान बंद।*🤷‍♂️

         *इलाज़ बहुत सीधा है—फोन आए तो घबराइए मत। पैसे कभी मत भेजिए। साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत कर दीजिए।*💁‍♂️

           *दरअसल, ठग हथकड़ी नहीं पहनाते, हम डर के हाथों ख़ुद ही हथकड़ी पहन लेते हैं। अगर आप डरे नहीं, तो उनकी डिजिटल हथकड़ी हमेशा के लिए टूट जाएगी।*💯

TRNDKB: *कांग्रेसी सुअर कलीम सिब्बल अभिषेक मनु सिंघवी बहुत दुखी हुए इन हरामजादों को जमानत नहीं मिली*

आज कांग्रेसी इस व्यक्ति को जमानत न मिलने पर आंसू बहा रहे हैं 

यह कह रहा है पूर्वोत्तर को पूरी तरह से मुसलमानो इकट्ठे होकर काट डालो यह चिकन नेक समझ रहा है सिलीगुड़ी गलियारा बंद करने की बात कर रहा है रेल की पटरियां उखाड़ दो सड़के तोड़ दो सारे ब्रिज तोड़ दो ताकि भारत की सेना पूर्वोत्तर तक ना जा सके और इस तरह हम बड़ी आसानी से पूर्वोत्तर को भारत से अलग कर देंगे

 सोचिए ऐसे व्यक्ति के लिए आज कांग्रेस आंसू बहा रही है कि इसको जमानत क्यों नहीं दी गई

 कांग्रेस की सहानुभूति इसके साथ सिर्फ इसलिए है क्योंकि यह मुस्लिम है

 वरना कांग्रेस तो हिंदुओं को फर्जी केस में फांसी और आजीवन कारावास की सजा देने की पूरी प्लानिंग करती है

TRNDKB: *ब्याज समेत हिसाब👏*

*अस्पताल में एक पेशेंट का केस आया। मरीज बेहद सीरियस था।*

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*अस्पताल के मालिक डॉक्टर ने तत्काल खुद जाकर आईसीयू में केस की जांच की।*

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*दो-तीन घंटे के ओपरेशन के बाद डॉक्टर बाहर आया और अपने स्टाफ को कहा कि इस व्यक्ति को किसी प्रकार की कमी या तकलीफ ना हो और उससे इलाज व दवा के पैसे न लेने के लिए भी कहा।*

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*मरीज तकरीबन 15 दिन तक मरीज अस्पताल में रहा। जब बिल्कुल ठीक हो गया और उसको डिस्चार्ज करने का दिन आया...*

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*उस मरीज का तकरीबन ढाई लाख रुपये का बिल अस्पताल के मालिक और डॉक्टर की टेबल पर आया।*

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*डॉक्टर ने अपने अकाउंट मैनेजर को बुला करके कहा … इस व्यक्ति से एक पैसा भी नहीं लेना है।*

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*ऐसा करो तुम उस मरीज को लेकर मेरे चेंबर में आओ। मरीज व्हीलचेयर पर चेंबर में लाया गया।*

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*डॉक्टर ने मरीज से पूछा, भाई ! मुझे पहचानते हो?*

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*मरीज ने कहा, लगता तो है कि मैंने आपको कहीं देखा है।*

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*डॉक्टर ने कहा, याद करो, अंदाजन दो साल पहले सूर्यास्त के समय शहर से दूर उस जंगल में तुमने एक गाड़ी ठीक की थी।*

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*उस रोज मैं परिवार सहित पिकनिक मनाकर लौट रहा था कि अचानक कार में से धुआं निकलने लगा और गाड़ी बंद हो गई।*

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*कार एक तरफ खड़ी कर हम लोगों ने चालू करने की कोशिश की, परंतु कार चालू नहीं हुई।*

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*अंधेरा थोड़ा-थोड़ा घिरने लगा था। चारों और जंगल और सुनसान था। परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर चिंता और भय की लकीरें दिखने लगी थी और सब भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि कोई मदद मिल जाए।*

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*थोड़ी ही देर में चमत्कार हुआ। बाइक के ऊपर तुम आते दिखाई पड़े । हम सब ने दया की नजर से हाथ ऊंचा करके तुमको रुकने का इशारा किया।*

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*तुमने बाईक खड़ी कर के हमारी परेशानी का कारण पूछा। तुमने कार का बोनट खोलकर चेक किया और कुछ ही क्षणों में कार चालू कर दी।*

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*हम सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। हमको ऐसा लगा कि जैसे भगवान ने आपको हमारे पास भेजा है क्योंकि उस सुनसान जंगल में रात गुजारने के ख्याल मात्र से ही हमारे रोगंटे खड़े हो रहे थे।*

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*तुमने मुझे बताया था कि तुम एक गैराज चलाते हो। मैंने तुम्हारा आभार जताते हुए कहा था कि रुपए पास होते हुए भी ऐसी मुश्किल समय में मदद नहीं मिलती।*

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*तुमने ऐसे कठिन समय में हमारी मदद की, इस मदद की कोई कीमत नहीं है, यह अमूल्य है।*

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*परंतु फिर भी मैं पूछना चाहता हूँ कि आपको कितने पैसे दूं ?*

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*उस समय तुमने मेरे आगे हाथ जोड़कर जो शब्द कहे थे, वह शब्द मेरे जीवन की प्रेरणा बन गये हैं।*

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*तुमने कहा था कि मेरा नियम और सिद्धांत है कि मैं मुश्किल में पड़े व्यक्ति की मदद के बदले कभी कुछ नहीं लेता।*

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*मेरी इस मजदूरी का हिसाब भगवान् रखते हैं।*

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*उसी दिन मैंने सोचा कि जब एक सामान्य आय का व्यक्ति इस प्रकार के उच्च विचार रख सकता है, और उनका संकल्प पूर्वक पालन कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता।*

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*और मैंने भी अपने जीवन में यही संकल्प ले लिया है।*

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*दो साल हो गए है, मुझे कभी कोई कमी नहीं पड़ी, अपेक्षा पहले से भी अधिक मिल रहा है।*

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*यह अस्पताल मेरा है। तुम यहां मेरे मेहमान हो और तुम्हारे ही बताए हुए नियम के अनुसार मैं तुमसे कुछ भी नहीं ले सकता।*

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*ये तो भगवान् की कृपा है कि उसने मुझे ऐसी प्रेरणा देने वाले व्यक्ति की सेवा करने का मौका मुझे दिया।*

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*ऊपर वाले ने तुम्हारी मजदूरी का हिसाब रखा और वो हिसाब आज उसने चुका दिया।*

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*मेरी मजदूरी का हिसाब भी ऊपर वाला रखेगा और कभी जब मुझे जरूरत होगी, वो जरूर चुका देगा।* 

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*डॉक्टर ने मरीज से कहा, तुम आराम से घर जाओ, और कभी भी कोई तकलीफ हो तो बिना संकोच के मेरे पास आ सकते हो।*

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*मरीज ने जाते हुए चेंबर में रखी भगवान् कृष्ण की तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर कहा कि हे प्रभु ! आपने आज मेरे कर्म का पूरा हिसाब ब्याज समेत चुका दिया।*

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*सदैव याद रखें कि आपके द्वारा किये गए कर्म आपके पास लौट कर आते है। और वो भी ब्याज समेत।*

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*वर्तमान में कठिन समय चल रहा है। जितना हो सकता है लोगों की मदद करें। आपका हिसाब ब्याज समेत वापस आएगा।*

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 *🌹जय श्री राधे राधे जी🌹* 

 *🌹कान्हा प्रभात मंगलम🌹*

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*आप सभी प्रियजनों का दिन शुभ, मंगलमय, खुशियों भरा और कृष्णमय हो🙏🌹*

TRNDKB: *🤲🏼🫧श्राद्ध संबंधित कुछ 🤔💭शंकाओं का 😌समाधान...*

*🤲🏼💦श्राद्ध 🤷🏻‍♂️कब से आरंभ होंगे...❓* 

_श्राद्ध 07 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक है ।_

*००००००००००००००००००*

*👤👥पितरों को प्रसन्न* करने के लिए *श्राद्ध में 🤔क्या करना चाहिए...❓* 

_खूब शुद्धी से, खूब श्रद्धा से श्राद्ध करना चाहिए ।_ 

*सूत जी ने 📖 वायु पुराण* में कहा है कि, हे ऋषियों.‼️इस *📿मंत्र की रचना ब्रह्माजी ने* की थी - यह *💧अमृत 📿मंत्र* हैं....

*🤲🏼💦श्राद्ध के आरम्भ और अंत में तीन बार 👇🏼निम्न 📿मंत्र का 🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️जप करें ।*

_*📿मंत्र ध्यान से पढ़ें :👇🏽*_

_देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च ।_

_नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः ll_

_*"समस्त देवताओं, पितरों, महायोगियों, स्वधा एवं स्वाहा सबको हम नमस्कार करते हैं । ये सब शाश्वत फल प्रदान करने वाले हैं ।"*_

🤲🏼💦श्राद्ध में *तुलसी का पत्ता उपयोग* करना चाहिए । इससे *👤👥पित्तरों को प्रसन्नता* मिलती है और वह *बैकुंठ लोक जाते हैं तो इस प्रकार हम पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं ।* 

*००००००००००००००००००*

*🤲🏼💦श्राद्ध की 🪔पूजा अगर किसी वजह से ❌नहीं कर सकते हैं तो 🤷🏻‍♂️क्या करें...❓* 

अगर सामर्थ्य ❌नहीं हो श्राद्ध करने का....

▪️अगर *💰वित्त से कमजोर हों तो* 📚शास्त्रों में विधान है *🐂देसी गौ को हरा चारा पितरों के निमित्त खिला दें ।* इससे भी पितरों को तृप्ति मिलती है । 

▪️इसमें भी सामर्थ्य नहीं है तो फिर *🧉तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें काला तिल, जौ डाल दें और 📖 गीता जी के सातवें अध्याय का पाठ करें और 🌞भगवान सूर्य को यह 🫗अर्घ्य रूप में अर्पण करदें अपने पित्तरों के निमित्त ।* 

▪️अगर ये भी नहीं कर सकते तो *दोनों हाथ 🙌🏼ऊपर कर दें, 🌞सूर्य भगवान की ओर दिखाते हुए । सुबह प्रार्थना करें कि* _"मेरे पास श्राद्ध कर्म करने के योग्य न धन संपत्ति है और ना ही कोई अन्य सामग्री है । अतः मैं अपने पित्तरों को प्रणाम करता हूं, वह मेरी भक्ति से ही तृप्ति लाभ करें, मैंने अपनी दोनों बाहें आकाश में उठा रखी हैं ।"_

_।।ॐ ह्रीं श्रीं क्लीम स्वधादेव्यै स्वाहा l।_

_👆🏼इस 📿मंत्र का जप करके हाथ उठाकर 🌞सूर्य नारायण को पितृ की तृप्ति एवं सदगति के लिए प्रार्थना करें । *स्वधा ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं* इस मंत्र के जप से पितृ की तृप्ति अवश्य होती है और श्राद्ध में जो त्रुटी रह गई हो वे भी पूर्ण हो जाती है ।_

*००००००००००००००००००*

*🤷🏻‍♀️क्या हम ससुराल वाले पूर्वज और मायके वाले पूर्वजों का श्राद्ध कर्म एक साथ कर सकते हैं 🌌सर्वपित्री अमावस्या के दिन...❓* 

*बिल्कुल कर सकते हैं ।* श्राद्ध में *तीन प्रकार का पिंडदान* होता है *और* तीन प्रकार का *तर्पण* भी होता है।.…¡

▪️ *पितृ पक्ष* के लिए किया जाता है ।

▪️ *नाना जी के पक्ष* के लिए किया जाता है ।

▪️ *आप्त जनों* के लिए किया जाता है आप्त जनों में *हमारे मित्र भी आ गए, हमारे रिश्तेदार भी आ गए ।* 

*००००००००००००००००००*

*💥अगर आत्महत्या करने वालों का हम श्राद्ध नहीं करेंगे तो क्या वह हमें परेशान नहीं करेंगे...❓* 

*आत्महत्या को महापाप* बताया गया है, जिसका कोई भी *प्रायश्चित ❌नहीं है ।* यहां तक के 📚शास्त्र कहते हैं कि *उनके अंतिम संस्कार में भी ❌नहीं* जाना चाहिए । उनके लिए *श्राद्ध नहीं* करना चाहिए क्योंकि *उसने ईश्वर के द्वारा दिए हुए उपहार (इस तन) का अनादर किया है ।* 

 *_"बड़े भाग मानुष तन पावा...."_* जो देवताओं को भी दुर्लभ है ऐसा तन भगवान ने कृपा करके दिया और *उसका आत्महत्या द्वारा इसने घात किया तो ईश्वर का अपराधी माना जाता है ।* 

आत्महत्या वाले सीधे *🧟‍♀️🧟प्रेत की योनि में जाते हैं* और वहां उन्हें बहुत कष्ट भोगना पड़ता है । 

फिर भी जो हमारे संत हैं *महापुरुष* हैं - इनके भी *कल्याण का* सोच कर *उपाय* बताते हैं कि *इनकी हड्डियों को गंगा जी* में डालें और *📖 गरुड़ पुराण* के अनुसार इनके लिए तीर्थ में जाकर *नारायण बलि एक पूजा होती है वह करवाना चाहिए ।* लेकिन याद रखें आत्महत्या 👿महा पाप है ।

*००००००००००००००००००*

🤔 *हर दिन श्राद्ध ना कर पाऊं तो* _क्या मैं *📖भागवत गीता* का सप्तम अध्याय का पाठ कर सकता हूॅं क्या इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलेगी...❓_

*जी बिल्कुल मिलेगी मुक्ति ।* गीता जी के सातवें अध्याय का *पाठ करें और सूर्य भगवान को पित्तरों के निमित्त जल अर्पित करें ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 एक बार जब *पिंड दान कर दिया जाता है तो जब श्राद्ध पक्ष आए तब 🤷🏻‍♀️क्या करना चाहिए...❓* 

*श्राद्ध पक्ष में भी पिंडदान करना चाहिए और तर्पण करना चाहिए ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 *श्राद्ध कब करें ❓* 

श्राद्ध वैसे तो श्राद्ध पक्ष में 15 दिनों तक *रोज करना चाहिए ।* नहीं तो अपने *पूर्वजों की तिथि पर* करिये यदि *तिथि याद नहीं है तो सर्वपित्रि अमावस्या पर* कर सकते हैं । वैसे *वर्ष भर* में जितनी भी *अमावस्याएँ* आती हैं वह *पितरों को ही समर्पित होती हैं ।* तो हर अमावस्या पर आप साथ में *📖गीताजी के सातवें अध्याय का पाठ करें और सूर्य को जल अर्पण करें अपने पितरों के निमित्त । सर्वपित्री अमावस्या पर तो विशेष रूप से करना चाहिए ।*

 *००००००००००००००००००*

🤔 *महिलाएं श्राद्ध का भोजन नहीं कर सकतीं लेकिन वह श्राद्ध तो करती हैं ना..❓* 

यह जो महिलाएं श्राद्ध का भोजन नहीं कर सकती हैं यह किसी *विशेष वर्ग के लिए कहा गया है । बाकी महिलाएं श्राद्ध का भोजन भी कर सकती हैं और श्राद्ध भी कर सकती हैं, शुद्धता से, पवित्रता से ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 मेरी उम्र 16 वर्ष है मेरे *पिता के अकाल मृत्यु* हुई है कृपया मुझे कोई *ऐसी विधि का तरीका बताएं जिससे मेरे पिताजी मुझसे खुश रहें..❓*

 

जिनकी भी *अकाल मृत्यु हुई है या शस्त्रों के द्वारा मृत्यु हुई है या आग की दुर्घटना में मृत्यु* हुआ है उनको *🪐चतुर्दशी के दिन श्राद्ध करना चाहिए* यानी अमावस्या से एक दिन पहले । ध्यान रहे कि जिनके *चतुर्दशी के दिन शरीर शांत हुआ है उनका श्राद्ध चतुर्दशी को ना करें, उनका श्राद्ध अमावस्या* को किया जाता है ।

*००००००००००००००००००*

🤔 *पितृ दोष से मुक्ति 🤷🏻‍♂️कैसे पाएं ❓अज्ञात व्यक्ति का श्राद्ध कैसे करें ❓* 

पितृ दोष से मुक्ति पाना हो तो *श्राद्ध पक्ष में यत्नपूर्वक श्राद्ध करें । रोज लोटे में जल लेकर, काला तिल, जौ डालकर गीता जी के सातवें अध्याय का पाठ करके, जल सूर्य भगवान को अर्पण करें कि* _"मेरे पितृ संतुष्ट हो"_ *इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है ।* 

फिर सर्वपित्री अमावस्या के दिन श्राद्ध भी करें । *अज्ञात व्यक्तियों* के लिए जिनका हमें नाम, तिथि नहीं पता, तो उनके सभी के लिए हम *अमावस्या को श्राद्ध कर सकते हैं ।* 

*००००००००००००००००००*

*🤔 श्राद्ध में कौवे को ही क्यों खाना खिलाते हैं* कोई और पक्षी को क्यों ❌नहीं...❓

 *👺यमराज ने कौवे को वरदान दिया था कि तुम्हें दिया गया भोजन पूर्वजों की आत्मा को शांति देगा ।* श्राद्ध पक्ष में कौवे को खाना खिलाने से *यमलोक में पितृ देवों को शांति की अनुभूति होती है इसलिए पक्षियों में कौवे को खिलाया जाता है ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 *क्या यह हर साल करने होते हैं ❓* 

*बिल्कुल करना चाहिए* हर साल । आप उन्हें हर साल नहीं तृप्त करते हैं बल्कि आप उन्हें हर दिन तृप्त करते हैं । *हमारा एक साल, उनका एक दिन होता है तो हर साल यदि हम श्राद्ध करते हैं तो रोज हम उन्हें 🍲भोजन देते हैं ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 *📖गीता पठन संस्कृत में नहीं किया सिर्फ हिंदी में किया तो क्या लाभ होगा ❓* 

हां जी हिंदी में कीजिए, *भाव से, प्रेम से कीजिए, भगवान की वाणी है अवश्य लाभ होगा ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 *गया जी जाकर श्राद्ध करके आए हैं फिर श्राद्ध करें या नहीं..❓* 

*पुराणों में वर्णन* है कि *गया जी में पिंडदान के बाद श्राद्ध की जरूरत नहीं होती* है परंतु हमारे कई पूर्वज हुए हैं और श्राद्ध ऐसा कर्म है कि इसके अंदर *चींटी से लेकर ब्रह्मा जी तक को तृप्त करने का उपाय है ।* देवता, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, भूत, प्रेत, राक्षस, मुनी, सभी की तृप्ति का उपाय इस श्राद्ध कर्म में है । तो *हमने जो गया में जाकर पिंडदान कर दिया* वह हमने अपने पितरों के लिए किया *वह सकाम कर्म में गिना जाएगा । सर्वपित्री अमावस्या पर करें श्राद्ध हमने सबके लिए किया तर्पण आदि तो उनके आशीर्वाद भी हमें मिलते हैं* और हमारे जो घर में बच्चे हैं उनको भी संस्कार मिलता है कि श्राद्ध करना चाहिए । *नहीं तो आने वाली पीढ़ी को पता भी नहीं चलेगा कि श्राद्ध क्या होता है...❓इसलिए अगर आपने गया जी में पिंडदान कर दिया है तो कोई बात नहीं आप सर्वपित्री अमावस्या पर सभी की तृप्ति के लिए श्राद्ध कर सकते हैं ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 *बेटी, पोती श्राद्ध की पूजा कर सकते हैं क्या ? वह किस प्रकार करें ❓अभी विवाह भी नहीं हुआ है ।* 

जी सभी श्राद्ध कर सकते हैं ।

*००००००००००००००००००*

🤔 *मेरे घर में कोई नहीं है बताने वाला श्राद्ध कौन सी तिथि में निकालें और किस नाम से निकालें...❓* 

*जिनकी तिथि नहीं पता है, नाम नहीं पता है, वह सर्वपित्री अमावस्या पर अवश्य श्राद्ध करें ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 हर रोज *जल देते समय कौन सा मंत्र बोले* 

_।।ॐ ह्रीम् श्रीम् क्लीम स्वधादेव्यै स्वाहा ।।_

_*👆🏼इस मंत्र का जप करके हाथ उठाकर 🌞सूर्य नारायण को पितृ की तृप्ति एवं सदगति के लिए प्रार्थना करें*_ । _स्वधा ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं_ *इस 📿मंत्र के जप से पितृ की तृप्ति अवश्य होती है और श्राद्ध में जो त्रुटी रह गई हो वे भी पूर्ण हो जाती है ।*

*००००००००००००००००००*

🤔 *मेरे पापा इस साल मई महीने में गुजर गए तो क्या इस साल श्राद्ध कर सकते हैं..❓* 

इस साल ❌नहीं कर सकते हैं *अगले साल से करें ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 बाहर देश में रहते हैं इसलिए *श्राद्ध का खाना 👤👥पितरों को अर्पित करने के बाद गाय, कौवे कुत्ते को पहले नहीं दे पाते हैं..❓* 

तो जब आप श्राद्ध करते हो इस समय के लिए *🇮🇳भारत में जो भी आपके रिश्तेदार* रहते हैं उनसे कह दीजिए कि *इस समय गाय को या कौवे को या कुत्ते को खाना दे दें और आप उतनी रकम या उतने पैसे उन्हें भेज दीजिए ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 *👤👥पितरों को श्राद्ध में जोड़ना हो तो 3 साल बाद करना है क्या ❓* 

नहीं नहीं *1 साल बाद कर सकते हैं ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 *अगर घर में 🤰🏻महिला गर्भवती हो तो क्या उस घर में श्राद्ध करना चाहिए ❓* 

*जरूर करना चाहिए* बहुत लाभ होता है ।

*००००००००००००००००००*

🤔 *🪷एकादशी के दिन श्राद्ध हो तो क्या करें ❓* 

जिसका व्रत हो वह चावल नहीं खा सकते और नहीं खिला सकते *पिंड तो चावल का ही बनाएं खिलाने के लिए चावल की जगह मखाने डालकर खीर बनाएं और खिलाएं ।* 

*००००००००००००००००००*

🤔 *क्या हमारे 👤👥पितरों की आत्मा अभी तक धरती लोक पर ही है उन्हें नया जीवन नहीं मिला ❓* 

नया जीवन मिला हो या नहीं मिला हो या पितृलोक में हों *आप श्राद्ध करते हैं तो उनको उस रूप में जाकर मिल जाता है ।*

TRNDKB: *श्री गणेश विसर्जन...*

               💦卐💦卐💦卐💦

*🚩हिन्दू पंचाग से...* 

*🗓️ 06 सितंबर, शनिवार 2025* को *अनंत चतुर्दशी* हैं 

📚धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन *10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन* होता है व घरों व सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित *गणेश प्रतिमाओं का 🌊विसर्जन* किया जाता है। 

 📖 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन *विसर्जन से पहले नीचे बताए गए छोटे-छोटे उपाय* किए जाएं तो सभी की 😌मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

*💰पैसा, 👩🏻‍💻नौकरी, 🛒🛍️बिजनेस हर समस्या का हल है 🔰ये उपाय...*

1️⃣

_"भगवान श्री गणेश को पूजा में *रेशमी दुपटटा* चढ़ाएं। दाम्पत्य जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ेगा।"_

2️⃣

_🌾🧆भगवान श्री गणेश को *पांच तरह के 🧆लड्डुओं का भोग* लगाएं। भौतिक सुख-सुविधाएं मिलेंगी।_

3️⃣

_श्री गणेश का अभिषेक *🐂गाय के कच्चे 🥛दूध (बिना उबला) से* करें। धन की कमी पूरी होगी।_

4️⃣

_स्फटिक से बनी *🌾🧆श्री गणेश की मूर्तियाँ भक्तों को बांटें।* समाज में मान-सम्मान मिलेगा।_

5️⃣

_श्री गणेश को *ताजी, हरी दूर्वा चढ़ाएं।* मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर होगी।_

6️⃣

_श्री गणेश को *सिंदूर* चढ़ाएं। ऑफिस और परिवार में चल रही समस्याएं समाप्त होंगी।_

7️⃣

_*आम के पत्तों से* भगवान श्री गणेश की पूजा करें। सभी तरह के रोग ठीक होने लगेंगे।_

8️⃣

_भगवान श्री गणेश को *गुड, चीनी* और *दही का भोग लगाएं।* आने वाले संकटों से बचेंगे।_

9️⃣

_भगवान श्री गणेश का *पंचामृत से अभिषेक करें।* पैसों से संबंधित फायदा होने के योग बन सकते हैं।_

🔟

_*तांबे के सिक्के को काले धागे में बांधकर* श्री गणेश को८ चढ़ाएं। धन लाभ होगा।_

1️⃣1️⃣

_भगवान श्री गणेश को *गुलाब के 21 फूल चढ़ाएं।* संतान संबंधी समस्या का निदान होगा।_

1️⃣2️⃣

_*पीला रेशमी कपड़ा* भगवान श्री गणेश को अर्पित करें। नौकरी व व्यापार में लाभ होगा।_

*🗓️ 6 सितंबर को अनंत 🪐चतुर्दशी पर इनमें से कोई एक 📝उपाय करें, 😌मनोकामनाएं होंगी 💫पूर्ण....*

TRNDKB: कितना अजीब है ये सब... 🧐

एक परिवार इस देश को इस्लामी राज्य बनाने का सपना देखता रहा, और सत्तर साल तक हिंदुओं को इसका एहसास ही नहीं हुआ। फिर भी, पिछले पाँच सालों में ही, मुसलमानों को समझ आ गया है कि हिंदू अब भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं।

देश दो हिस्सों में बँट गया, फिर भी कोई हंगामा नहीं हुआ।

आधा कश्मीर छिन गया... कोई हंगामा नहीं।

तिब्बत हाथ से निकल गया... कोई विद्रोह नहीं।

आरक्षण, आपातकाल, ताशकंद, शिमला, सिंधु - ऐसे तमाम ज़ख्म दिए गए, फिर भी कोई अशांति नहीं।

2जी स्पेक्ट्रम, कोयला, राष्ट्रमंडल खेल, ऑगस्टा वेस्टलैंड, बोफोर्स जैसे घोटालों ने देश को कलंकित किया, फिर भी किसी ने मुँह नहीं उठाया।

चीन को वीटो पावर दे दी गई, फिर भी विरोध में कोई ट्रेन नहीं रोकी गई।

लाल बहादुर जैसे महान नेता हार गए, फिर भी सीबीआई जाँच की माँग करते हुए कोई मोमबत्तियाँ नहीं जलाई गईं। माधवराव और राजेश पायलट जैसे नेता भी मारे गए, फिर भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा।

लेकिन जब गोमांस पर प्रतिबंध लगाया गया, तो उसे नरसंहार कहा गया।

जब राष्ट्रगान अनिवार्य किया गया, तो इसे अत्याचार माना गया।

जब "वंदे मातरम" या "भारत माता की जय" कहने को कहा गया, तो लोगों की ज़बान बंद हो गई।

नोटबंदी और जीएसटी ने अराजकता फैला दी।

आधार की निंदा की गई और उसे निराधार बताया गया।

अपनी ही मातृभूमि में शरणार्थी बने कश्मीरी पंडितों को कोई सहानुभूति नहीं मिली, फिर भी रोहिंग्या मुसलमानों के लिए आँसू बहाए जा रहे हैं।

किसी ने एक बार बहुत गहरा सच कहा था...!

देश को ज़हरीले साँप ने डस लिया, और घर अपने ही दीयों से आग की लपटों में जल उठा।

अब यह घोषणा की गई है कि कश्मीर में आतंकवाद के कारण बंद या ध्वस्त किए गए 50,000 मंदिरों को फिर से खोला और पुनर्निर्मित किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने यह बड़ी खुशखबरी साझा की है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या - 50,000 - सुनकर कोई भी दंग रह जाता है।

अगर किसी चर्च की खिड़की पर एक पत्थर फेंका जाए, या किसी मस्जिद की दीवार पर रंग-बिरंगा पाउडर गिर जाए, तो मीडिया हफ़्तों तक उसे दोहराता रहता है। लेकिन यह तथ्य कि 50,000 मंदिर नष्ट हो गए और अचिह्नित पड़े हैं—न तो हिंदुओं ने और न ही मीडिया ने एक शब्द कहा। क्यों?

पहले हिंदुओं को घाटी से जबरन निर्वासित किया गया, फिर हिंदुत्व के निशान मिटा दिए गए, और अंततः पूरे क्षेत्र से हिंदू धर्म को ही उखाड़ फेंका गया। ज़रा सोचिए, इस षड्यंत्र की भयावहता कितनी बड़ी थी।

अगर मोदी सरकार न आती, तो शायद सच्चाई कभी सामने न आती।

वामपंथी पत्रकारों, मुस्लिम बुद्धिजीवियों और कांग्रेस पार्टी व उसके साथियों ने इसे देश के सामने क्यों नहीं लाया?

कांग्रेस की करतूतों और वामपंथी पत्रकारों व तथाकथित विचारकों की धूर्तता के कारण ही आम हिंदू अपने असली इतिहास से अनजान रहा।

ऐसा लगता है मानो पूरा ब्रह्मांड चुपचाप, अदृश्य रूप से षड्यंत्र रच रहा हो, जबकि हम अनजान बैठे रहे।

अगर आपके भीतर हिंदुत्व की ज़रा भी लौ है, तो इसे साझा करें।

-सुशील कुमार सरोगी

राष्ट्रीय अध्यक्ष,

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच,

नई दिल्ली, भारत।

TRNDKB: GST रिफॉर्म्स बेहतरीन हैं, टैक्स कम हुआ है, लेकिन गौर से देखिए, बारीकी से देखने पर ऐसा लग रहा है जैसे घर के किसी बड़े ने घरवालों की सेहत और घर को उन्नति के लिए नियम बनाए हो 

1 पनीर, दुग्ध, रोटी, परांठा टैक्स फ्री, घी, सूखे मेवे काजू पिस्ता बादाम आदि पर टैक्स कम, कोल्ड ड्रिंक फास्ट फूड पर टैक्स बढ़ाया, यानी सेहतमंद खाओ उल्टा सीधा नहीं जंक फूड नहीं

2 सिगरेट शराब पुड़िया तंबाकू पर टैक्स बढ़ा यानि इन सब चीजों से दूर रहे 

3 साबुन टूथपेस्ट तेल शैंपू शेविंगक्रीम आदि रोजमर्रा की चेजों पर टैक्स कम ताकि घर आराम से चल सके 

4 रबर पेंसिल मैप्स ग्लोब चार्ट्स कॉपी टैक्स फ्री ताकि बच्चे खूब पढ़ सकें आगे बढ़ सकें

5 घर का सामान जैसे AC TV फ्रिज वॉशिंग मशीन आदि पर टैक्स कम ताकि घर पर बोझ ना बढे और आप आराम से जीवन व्यतीत कर सकें

6 घर बनाने की सामग्री जैसे सीमेंट आदि पर टैक्स कम ताकि हर परिवार अपना घर बना सके

7 हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस टैक्स फ्री यानी परिवार की सुरक्षा सर्वोपरि ताकि विपत्ति की स्थिति में आपको परेशान ना होना पड़े 

8 जीवन रक्षक दवाएं टैक्स फ्री, बाकी दवाओं और मेडिकल उपकरणों पर न्यूनतम टैक्स ताकि आपको दवा सस्ती मिल सके, मेडिकल टेस्ट भी सस्ते

9 ट्रैक्टर, कटाई मशीन, अन्य उपकरण, टैक्सी ऑटो रिक्शा आदि पर टैक्स कम ताकि आपकी आजीविका का इंतज़ाम हो सके, आप काम करें 

10 छोटी कारों पर टैक्स कम लक्जरी कारों पर टैक्स ज्यादा, 350 सीसी से कम की बाइक पर टैक्स कम, यानी फालतू का दिखावा मत करो, जरूरत की उपयोगी चीज लो

जैसा आपके पिता आपको समझते है कि जीवन कैसे जीना है यह टैक्स स्लैब बिल्कुल वैसा ही है, ऐसा लगता है जैसे घर के बड़ों ने बैठ कर टैक्स स्लैब बनाया हो, ताकि सेहत बनी रहे, घर चलने में दिक्कत ना हो, बच्चे पढ़ सके, घर का जरूरी सामान आ सके, नया घर बन सके, घर का कमाऊ मेंबर और घर वाले सुरक्षित रहे, जरूरत पड़ने पर इलाज करा सकें, सब काम धंधे में लगें, और कोई फालतू दिखावा ना करे

बस इतना ही है GST रिफॉर्म, मेरी नजर में यह बजट से भी बेहतर है, इसमें वो सबकुछ है जो मैं सरकार से पिछले कई सालों से मांग रहा था, ऐसा लग रहा है जैसे सरकार ने नहीं यह GST रिफॉर्म मैने खुद ने किया है

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और प्रधानमंत्री मोदी का यह अब तक का सबसे बेहतरीन फैसला है, इसकी जितनी तारीफ की जाए कम है.

TRNDKB: *कानपुर में अदानी डिफेंस और एयरोस्पेस कैंपस का नजारा आप देखिए*🔥🇮🇳

 पहले जो हथियार हम विदेशो से खरीदते थे 

फिर उनके कल पुर्जे गोला बारूद के लिए उसी देश पर निर्भर रहते थे हमारी काफी विदेशी मुद्रा हथियारों को खरीदने में बर्बाद होती थी 

*अब हम हथियार Exporter बन गए हैं*😎🇮🇳💪🏻🎯

अब हमने प्राइवेट सेक्टर को हथियार के क्षेत्र के लिए खोल दिया है और अब दुनिया के डेवलप देश इजराइल से लेकर फ्रांस तक को भारत हथियार निर्यात कर रहा है 

इसमें.. 

टाटा, अदानी, रिलायंस जैसे ग्रुप साथ में भारत फोर्ज हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसी कंपनियों का बहुत बड़ा योगदान है

🚀🚀🚀✌🏼

: *ब्याज समेत हिसाब👏*

*अस्पताल में एक पेशेंट का केस आया। मरीज बेहद सीरियस था।*

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*अस्पताल के मालिक डॉक्टर ने तत्काल खुद जाकर आईसीयू में केस की जांच की।*

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*दो-तीन घंटे के ओपरेशन के बाद डॉक्टर बाहर आया और अपने स्टाफ को कहा कि इस व्यक्ति को किसी प्रकार की कमी या तकलीफ ना हो और उससे इलाज व दवा के पैसे न लेने के लिए भी कहा।*

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*मरीज तकरीबन 15 दिन तक मरीज अस्पताल में रहा। जब बिल्कुल ठीक हो गया और उसको डिस्चार्ज करने का दिन आया...*

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*उस मरीज का तकरीबन ढाई लाख रुपये का बिल अस्पताल के मालिक और डॉक्टर की टेबल पर आया।*

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*डॉक्टर ने अपने अकाउंट मैनेजर को बुला करके कहा … इस व्यक्ति से एक पैसा भी नहीं लेना है।*

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*ऐसा करो तुम उस मरीज को लेकर मेरे चेंबर में आओ। मरीज व्हीलचेयर पर चेंबर में लाया गया।*

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*डॉक्टर ने मरीज से पूछा, भाई ! मुझे पहचानते हो?*

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*मरीज ने कहा, लगता तो है कि मैंने आपको कहीं देखा है।*

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*डॉक्टर ने कहा, याद करो, अंदाजन दो साल पहले सूर्यास्त के समय शहर से दूर उस जंगल में तुमने एक गाड़ी ठीक की थी।*

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*उस रोज मैं परिवार सहित पिकनिक मनाकर लौट रहा था कि अचानक कार में से धुआं निकलने लगा और गाड़ी बंद हो गई।*

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*कार एक तरफ खड़ी कर हम लोगों ने चालू करने की कोशिश की, परंतु कार चालू नहीं हुई।*

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*अंधेरा थोड़ा-थोड़ा घिरने लगा था। चारों और जंगल और सुनसान था। परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर चिंता और भय की लकीरें दिखने लगी थी और सब भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि कोई मदद मिल जाए।*

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*थोड़ी ही देर में चमत्कार हुआ। बाइक के ऊपर तुम आते दिखाई पड़े । हम सब ने दया की नजर से हाथ ऊंचा करके तुमको रुकने का इशारा किया।*

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*तुमने बाईक खड़ी कर के हमारी परेशानी का कारण पूछा। तुमने कार का बोनट खोलकर चेक किया और कुछ ही क्षणों में कार चालू कर दी।*

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*हम सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। हमको ऐसा लगा कि जैसे भगवान ने आपको हमारे पास भेजा है क्योंकि उस सुनसान जंगल में रात गुजारने के ख्याल मात्र से ही हमारे रोगंटे खड़े हो रहे थे।*

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*तुमने मुझे बताया था कि तुम एक गैराज चलाते हो। मैंने तुम्हारा आभार जताते हुए कहा था कि रुपए पास होते हुए भी ऐसी मुश्किल समय में मदद नहीं मिलती।*

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*तुमने ऐसे कठिन समय में हमारी मदद की, इस मदद की कोई कीमत नहीं है, यह अमूल्य है।*

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*परंतु फिर भी मैं पूछना चाहता हूँ कि आपको कितने पैसे दूं ?*

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*उस समय तुमने मेरे आगे हाथ जोड़कर जो शब्द कहे थे, वह शब्द मेरे जीवन की प्रेरणा बन गये हैं।*

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*तुमने कहा था कि मेरा नियम और सिद्धांत है कि मैं मुश्किल में पड़े व्यक्ति की मदद के बदले कभी कुछ नहीं लेता।*

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*मेरी इस मजदूरी का हिसाब भगवान् रखते हैं।*

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*उसी दिन मैंने सोचा कि जब एक सामान्य आय का व्यक्ति इस प्रकार के उच्च विचार रख सकता है, और उनका संकल्प पूर्वक पालन कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता।*

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*और मैंने भी अपने जीवन में यही संकल्प ले लिया है।*

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*दो साल हो गए है, मुझे कभी कोई कमी नहीं पड़ी, अपेक्षा पहले से भी अधिक मिल रहा है।*

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*यह अस्पताल मेरा है। तुम यहां मेरे मेहमान हो और तुम्हारे ही बताए हुए नियम के अनुसार मैं तुमसे कुछ भी नहीं ले सकता।*

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*ये तो भगवान् की कृपा है कि उसने मुझे ऐसी प्रेरणा देने वाले व्यक्ति की सेवा करने का मौका मुझे दिया।*

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*ऊपर वाले ने तुम्हारी मजदूरी का हिसाब रखा और वो हिसाब आज उसने चुका दिया।*

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*मेरी मजदूरी का हिसाब भी ऊपर वाला रखेगा और कभी जब मुझे जरूरत होगी, वो जरूर चुका देगा।* 

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*डॉक्टर ने मरीज से कहा, तुम आराम से घर जाओ, और कभी भी कोई तकलीफ हो तो बिना संकोच के मेरे पास आ सकते हो।*

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*मरीज ने जाते हुए चेंबर में रखी भगवान् कृष्ण की तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर कहा कि हे प्रभु ! आपने आज मेरे कर्म का पूरा हिसाब ब्याज समेत चुका दिया।*

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*सदैव याद रखें कि आपके द्वारा किये गए कर्म आपके पास लौट कर आते है। और वो भी ब्याज समेत।*

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*वर्तमान में कठिन समय चल रहा है। जितना हो सकता है लोगों की मदद करें। आपका हिसाब ब्याज समेत वापस आएगा।*

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 *🌹जय श्री राधे राधे जी🌹* 

 *🌹कान्हा प्रभात मंगलम🌹*

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*आप सभी प्रियजनों का दिन शुभ, मंगलमय, खुशियों भरा और कृष्णमय हो🙏🌹*

: *कांग्रेसी सुअर कलीम सिब्बल अभिषेक मनु सिंघवी बहुत दुखी हुए इन हरामजादों को जमानत नहीं मिली*

आज कांग्रेसी इस व्यक्ति को जमानत न मिलने पर आंसू बहा रहे हैं 

यह कह रहा है पूर्वोत्तर को पूरी तरह से मुसलमानो इकट्ठे होकर काट डालो यह चिकन नेक समझ रहा है सिलीगुड़ी गलियारा बंद करने की बात कर रहा है रेल की पटरियां उखाड़ दो सड़के तोड़ दो सारे ब्रिज तोड़ दो ताकि भारत की सेना पूर्वोत्तर तक ना जा सके और इस तरह हम बड़ी आसानी से पूर्वोत्तर को भारत से अलग कर देंगे

 सोचिए ऐसे व्यक्ति के लिए आज कांग्रेस आंसू बहा रही है कि इसको जमानत क्यों नहीं दी गई

 कांग्रेस की सहानुभूति इसके साथ सिर्फ इसलिए है क्योंकि यह मुस्लिम है

 वरना कांग्रेस तो हिंदुओं को फर्जी केस में फांसी और आजीवन कारावास की सजा देने की पूरी प्लानिंग करती है

: `

*ll भक्ती असेल महान, तर मूर्ती ठेवा लहान ! ll*

वाईट परिस्थिती आहे. गणपतीची मूर्ती लहान घ्या आणि श्रद्धा महान ठेवा ! 

 महाकाय मुर्त्यांच्यासाठी येणारा खर्च समाजाच्या हितासाठी वापरा ! 

लोकमान्य टिळकांनी सार्वजनिक गणेशोत्सवाची सुरुवात लोकांना एकत्र येण्यासाठी केली होती पण लोकांनी त्याला वेगळेच स्वरूप देऊन टाकले.  

दरवर्षी मूर्ती आणतांना आणि विसर्जन करतांना होणाऱ्या दुर्घटना पाहून विचार करायला पाहिजे ! 

आपण दहा दिवस ज्या मुर्तीची मनोभावे पूजा अर्चना करतो आणि शेवटच्या दिवशी तिची अशी विटंबना फार फार चुकीचे आहे ! 

येणाऱ्या काळात गणेश उत्सव दुर्गा उत्सवसाठी सर्व समाज बांधवांनी विचार करावा !

 मूर्ती लहान व श्रद्धा भक्ती महान ठेवा !

 

राजकीय व सामाजिक क्षेत्रात काम करणाऱ्या सर्व समाज बांधवानी पुढे येवून याचे महत्त्व पटवून देण्याचे हे महान कार्य करावे !

गणपती बाप्पा मोरया !!!🙏🙏

: अनंत चतुर्दशी आज 

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अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होता है। गणेश चतुर्दशी से आरंभ हुआ यह पर्व अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इस दिन बप्पा को विदा किया जाता है और उनको पवित्र नदी में विसर्जन किया जाता है। शास्त्रीय नियमों के अनुसार, गणेश चतुर्दशी पर जब बप्पा को घर में विराजमान किया जाता है तो डेढ़ दिन, ढाई दिन, पांच दिन, 7 दिन या फिर 11 दिन तक अपने घरों में स्थापित किया जाता है। 11वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को विधि विधान से विदा किया जाता है। 

अनंत चतुर्दशी 2025 कब है? 

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अनंत चतुर्दशी तिथि का आरंभ 6 सितंबर को सुबह 3 बजकर 14 मिनट पर आरंभ होगी और 7 सितंबर को मध्यरात्रि 1 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, उदय तिथि के हिसाब से 6 सितंबर को ही अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा।

अनंत चतुर्दशी पर बप्पा का विसर्जन करने का मुहूर्त

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शुभ चौघड़िया सुबह में 7 बजकर 36 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक।

लाभ चौघड़िया दोपहर में 1 बजकर 54 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक।

अमृत चौघड़िया दोपहर में 3 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 3 मिनट तक।

: टिटहरी,,,,, सात बात पते की,,,

वैज्ञानिक फेल है,,,इनके आगे

इस बार टिटहरी ने कई जगह छत पर अंडे दिये,, ये पिछले 50 वर्ष में राजस्थान में पहली बार देखा गया है,,,

1.टिटहरी ने 4 अंडे दिये तो समझो 4 माह बारिश

2. टिटहरी ने ऊँचाई पर जमीन पर अंडे दिये तो समझो बहुत अच्छी बारिश

3. टिटहरी पेड़, दीवार, खम्बे, रस्सी या जहाँ तक हो छत पर नही बैठती है,,

4. यदि टिटहरी ने छत पर अंडे दे दिये तो समझो पानी से तबाही,,,

5.कभी आप टिटहरी को कुरुक्षेत्र के अलावा देश मे मृत नही देख सकते,,

6 टिटहरी जिस खेत मे अंडे देती है वो खेत खाली नही रहता।

7 जिस वर्ष टिटहरी अंडे न दे समझ लो भयंकर अकाल है।

प्रकृति इनसे है,,, ये प्रकृति के पोषक है,,, जब विज्ञान नही था तब ये थे,, प्रभु ने इसलिये इन्हें बनाया,,, हम खो रहे भुगत रहे है अचेत है इनको इग्नोर कर,,, संभलो मुह नही बोलते पर सन्देश,,, अटल है।

सालों का अनुभव और प्रकृति का सूक्ष्म संदेश — विज्ञान जितना भी आगे बढ़ जाए, कभी-कभी छोटे जीव ही बड़े संकेत दे जाते हैं।

सचमुच, टिटहरी केवल पक्षी नहीं, बल्कि मौसम और खेती के लिए भगवान की संदेशवाहक हैं। 

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जय हिन्द 

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https: . *💫 जो बोओगो वहीं काटोगो.💫* 

एक गांव में एक किसान रहता था जो दूध से दही और मक्खन बनाकर बेचने का कार्य करता था ! एक दिन उसकी बीवी ने उसे मक्खन तैयार करके दिया वह उसे बेचने शहर गया वह मक्खन गोल पेड़े की शक्ल में था तथा हर पेड़े का वजन 1 किलो था !

शहर में किसान ने उस मक्खन को हमेशा की तरह एक दुकानदार को बेच दिया और दुकानदार से चाय चीनी तेल साबुन वगैरह खरीदकर अपने गांव रवाना हो गया

 

किसान के जाने के बाद दुकानदार ने एक पेड़े का वजन किया तो पेड़ा 900 ग्राम का निकला फिर तो उस दुकानदार ने हर पेड़े का वजन किया परंतु सभी 900 ग्राम के निकले अगले हफ्ते किसान फिर से हमेशा की तरह मक्खन लेकर दुकानदार की दहलीज पर चढ़ा तो दुकानदार ने चिल्लाते हुए किसान से कहा दफा हो जाओ किसी बेईमान और धोखेबाज शख्स से मुझे कारोबार नहीं करना 900 ग्राम मक्खन को 1 किलो बताकर बेचने वाले शख्स की शक्ल भी नहीं देखना चाहता हूँ.

तब किसान बड़ी विनम्रता से बोला भाई हम तो गरीब,बेचारे लोग हैं हमारे पास माल तोलने के लिए बाट (वजन) खरीदने की हैसियत कहां है ! मैं तो आपसे जो 1 किलो चीनी लेकर जाता हूं ! उसी को तराजू के एक पलड़े में रखकर दूसरे पलड़े में उतने ही वजन का मक्खन तोल कर ले आता हूं.

 *भाइयों..* हम जो दूसरों को देंगे वही लौटकर आएगा चाहे वह इज्जत हो,मान-सम्मान हो या चाहे धोखा हो !

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: *सबसे बड़ा सबक ✓* 

एक बार एक पिता के मन में ख्याल आया कि वो अपने बेटे को आज दुनिया का सबसे बड़ा सबक सिखाएं, इसके लिए उसने एक कौतुक रचा, अपने बेटे को थोड़ा ऊँचाई पर खड़ा कर के कहा कि तुम वहाँ से ज़मीन पर छलांग मारो मैं तुमको पकड़ लूंगा, लेकिन बच्चा कूदने से डर रहा था, उसने बोला नहीं पिताजी यदि मैं कूदूँगा तो मैं गिर सकता हूँ और मुझे चोट लग सकती है, तो पिता ने अपने बच्चे को विश्वास दिलाया कि बेटा तू नहीं गिरेगा मैं तुझे पकड़ लूंगा, ऐसा पिता ने कई बार बोला अपने बच्चे को विश्वास दिलाने के लिए, जब बच्चे को पिता पर पूरा विश्वास हो गया तब वो कूद गया और पिता ने जानबूझकर अपने बच्चे को नहीं पकड़ा।

परिणामस्वरूप बच्चा गिर गया और उसे चोट लग गई, तब बच्चे ने बहुत हैरानी से अपने पिता से पूछा कि आपने तो मुझे इतना विश्वास दिलाया था कि जब मैं कूदूँगा तो आप मुझे पकड़ लोगे, फिर आपने मुझे क्यों नहीं पकड़ा, तब उसके पिता ने बोला की बेटा यही सबक तो मैं तुझे सिखाना चाहता था कि इस दुनिया में अपने बाप पर भी विश्वास नहीं करना और इसको इस दुनिया का सबसे बड़ा सबक समझना।

दरअसल वो पिता बहुत अनुभवी था उसने दुनिया देखी थी और वो ये जानता था कि इस मतलबी दुनिया में किसी पर भी विश्वास नहीं किया जा सकता, इसीलिए अपने बच्चे की भलाई के लिए उसने ऐसा कौतुक रचा था ताकि उसके बेटे को ये सबक ज़िंदगी भर याद रहे।

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: *अगर आज आप अपने जीवन में किसी बात को लेकर परेशान हो तो ये पोस्ट सिर्फ आपके लिए है. पूरी पोस्ट जरूर पढ़ें.👇*

जैसा कि आप सभी जानते है कि बाज़ सभी पक्षियो का राजा होता है जिसकी उम्र लगभग 70 वर्ष तक होती है. लेकिन बाज़ के जीवन में एक ऐसा मुश्किल वक्त आता है जब उसका जीवन दाव पर लगा होता है. जब बाज़ 40 साल का हो जाता है तब उसके पंख काम करना बंद कर देते है जिससे वो उड़ नहीं पाता.

उसके नाखून कमजोर पड़ जाते है जिससे वो शिकार को पकड़ भी नहीं पाता और उसकी चोंच भी कमजोर पड़ जाती है जिससे वो शिकार को मुँह में भी नहीं दबा पाता. ये वक्त बाज़ के जीवन का सबसे बुरा वक्त होता है बाज़ के पास 2 ऑप्सन होते है पहला की बाज़ खुद को बूढ़ा घोषित कर दे और अपने मरने का इंतज़ार करें

और दूसरा ऑप्सन ये कि वो अपने पंख, चोंच और नाखून को तोड़ दे ताकि कुदरत उसे दुबारा नए पंख, चोंच और नाखून दे सके. आपको जान कर हैरानी होगी बाज़ दूसरे ऑप्सन को चुनता है बाज़ अपनी चोंच और नाखून को पत्थर से मार मार का तोड़ देता है और जब कुदरत उसे दुबारा नई चोंच और नाखून देती है तो वो अपने नाखून से अपने दोनों पंखों को तोड़ देता है ताकि उसे नए पंख मिल सके.

6 महीने दर्द सहने के बाद प्रकृति उसे नए पंख, चोंच और नाखून देती है जिससे अब वो बचे हुए 30 साल फिर से नया जीवन शुरू करता है. इस 6 महीने में बाज़ को बेहद तकलीफ होती है उसके शरीर से खून आने लगता है लेकिन वो फिर भी हिम्मत नहीं हारता क्योंकि वो जानता है ये 6 महीने का दर्द आने वाले 30 साल तक उसकी ताकत बन कर उसके साथ रहेगा.

`बाज़ के जीवन से हमें 2 बातें सीखने को मिलती है.`

*पहली सीख-* यदि जीवन में खराब समय आ गया है सब कुछ बरवाद हो चुका है तो उसके लिए रोने का कोई अर्थ नहीं है अपनी खराब situation को accept कीजिए और पूरी जान लगा कर कोई दूसरी शुरुआत कीजिए जिससे आपका जीवन बेहतर हो सके क्योंकि 1 बात को लेकर आप कितने भी साल बैठे रहिए यदि आप उसे बदल नहीं सकते तो उसे accept कर लीजिए.

*दूसरी सीख-* एक बार यदि आप अपने काम मे कुछ साल मेहनत करके दर्द सह लोगे तो आने वाले समय में वही दर्द आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा. अभी कुछ साल अपने काम में जी तोड़ मेहनत कीजिए फिर देखिये आने वाले समय में आपके पास सब कुछ होगा और आप एक बेहतरीन जीवन जी रहे होंगे. हिम्मत कीजिए और अभी के अभी शुरुआत कीजिये.

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: *कुरान का विचित्र विज्ञान*

1) - सूरज दलदल में ड़ूबजाता है."यहाँतक कि वह सूर्यास्त की जगह पहुँच गया,उसने देखा कि सूरज एक काले कीचड़ (muddy spring ) में ड़ूब रहा था.सूरा.अलकहफ़ (कुरान 18 :86)

2) - अल्लाह ने प्रथ्वी को ठहरा रखा है."वहकौन है,जिसने प्रथ्वी को एक स्थान पर ठहरा दिया है. (made the earth fixed ) सूरा -अन नमल ( कुरान27 :61)

3) - धरती झूलती रहती है."वही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को पालना बनाया (resting झूला)सूरा - अज जुखुरुफ (कुरान 43 :10)

4) - धरती फैलायी जा सकती है. "और धरती को जैसा चाहा फैलाया(spread the earth) सूर -अस शम्श (कुरान 91 :6)

5) रात और दिन लपेटे जा सकते है और वह रात को दिन पर लपेटता है एवं दिनको रात पर लपेटता है.सूरा - अज जुमुर (कुरान39 :5)

6) - वही है जिसने तुम्हारे लिए जमीन को फर्श और आसमान को छत बनाया,और आकाश से पानी उतारा। (कुरान 2:22)

7) अल्ला ने आकाश को धरती पर गिरने से रोक रखा है (कुरान 22:65) भाई आकाश क्या है? कोई छत या दिवार है क्या?

8) अल्ला ने आकाशको बनाया फ़िर उसकी उचाई खूब उचाकरके उसे ठिक ठाककिया (कुरान 79:28)

9)निश्चय ही इसके लिए (चंद्रमा पर जाने के लिए ) तुम्हें एक केबाद एक सीढी चढ़ना पड़ेगीं "सूरा -इन शिकाक (कुरान 84 :18)

10) अल्लाह ने कहा कि ,हे मनुष्य औरजिन्नों के समूहों यदि तुम में सामर्थ्य हो तो ,इस धरती कीपरिधि से निकल कर आकाश की सीमा में प्रवेश करके अन्दरघुसकरआगे निकल जाओ " सूरा -रहमान (कुरान55:33)

11) न तो तुमधरती की सीमा से बहार निकल सकते हो,और न आकाश कीसीमा में प्रवेश कर सकते हो "सूरा - अनकबूत (कुरान29:22)

12) जब आकाशकी खाल उतार ली जाएगी (कुरान81:11)

13) अल्ला नेआकाश को बिना पिलर के उचा उठाया है (कुरान13:2)

14) कयामत के दिनअल्ला आकाश को ऐसे लपटेगा जैसे किताब को पन्ने मे लपेटतेहै (कुरान 21:104)

15)अल्ला चाहे तो आकाश के टूकडे गिरा दे (कुरान34:9)

: *न्यायमूर्ति जीडी खोसला वह न्यायाधीश थे*

*जिन्होंने नाथूराम गोडसे मामले की सुनवाई की और नाथूराम गोडसे को मौत की सजा सुनाई। गोडसे को फाँसी दिए जाने के बाद, न्यायाधीश ने अपनी पुस्तक "द मर्डर ऑफ़ द महात्मा एंड अदर केसेज़ फ्रॉम अ जजेज़ डायरी" के पृष्ठ 305-06 पर लिखा: "अदालत में, गोडसे ने पाँच घंटे लंबे, 90 पृष्ठों के बयान में अपना पक्ष रखा। जब उसने बोलना बंद किया, तो दर्शक स्तब्ध और व्यथित थे, महिलाओं की आँखों में आँसू थे, और पुरुष खाँस रहे थे और रूमाल ढूँढ़ रहे थे।"*

*मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगर उस दिन अदालत कक्ष में उपस्थित लोगों की एक जूरी गठित की जाती और उसे गोडसे पर फैसला सुनाने के लिए कहा जाता, तो वे उसे भारी बहुमत से 'निर्दोष' घोषित कर देते। गोडसे का बयान सुनने के बाद, मैं उसे फाँसी की सज़ा नहीं देना चाहता था, लेकिन सरकार और प्रशासन के दबाव में मैं मजबूर हो गया। मैं जानता हूँ कि गोडसे को फाँसी की सज़ा सुनाकर मैंने एक 'पाप' किया है, जिसके लिए मैं यम के घर में कठोर दंड की प्रतीक्षा कर रहा हूँ। मैंने एक 'निर्दोष' और 'महान देशभक्त' को फाँसी की सज़ा सुनाई है और इसके लिए ईश्वर मुझे कभी क्षमा नहीं करेगा।*

*भारत में सनातनियों के प्रति कांग्रेस की उपलब्धियों और काले कारनामों से सभी सनातन धर्मावलंबियों को अवगत होना चाहिए। सभी जातियों के हिंदुओं के विरुद्ध कांग्रेस की कुछ "विशेष उपलब्धियाँ" नीचे सूचीबद्ध हैं:*

*1. "केवल मुसलमानों के लिए" पाकिस्तान बनाया।*

*2. "केवल मुसलमानों के लिए" बांग्लादेश बनाया।*

*3. कश्मीर में "केवल मुसलमानों के लिए" अनुच्छेद 370 लागू किया।*

*4. "केवल मुसलमानों के लिए" अल्पसंख्यक विधेयक बनाया।*

*5. "केवल मुसलमानों के लिए" मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना की।*

*6. "केवल मुसलमानों के लिए" अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय बनाया।*

*7. "केवल मुसलमानों के लिए" वक्फ बोर्ड की स्थापना की।*

*8. "केवल मुसलमानों के लिए" अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय बनाए।*

*9. "केवल मुसलमानों के लिए" धार्मिक आधार पर भारत का विभाजन किया।*

*10. मुसलमानों के पूजा स्थलों पर कानून बनाया।*

*11. हिंदू मंदिरों के चढ़ावे से मुस्लिम मदरसों का वित्तपोषण।*

*12. मुसलमानों के लिए हज यात्रा पर सब्सिडी।*

*13. संसद में मुसलमानों के लिए सांप्रदायिक हिंसा विरोधी विधेयक पेश किया,*….

*….हालाँकि, भाजपा ने इसे पारित होने से रोक दिया। कांग्रेस ने इस विधेयक को "केवल मुसलमानों के लिए" फिर से पेश किया।*

*अगर यह विधेयक पारित हो जाता, तो "हिंदुओं को खत्म करने में केवल 10 साल लगते।" अगर किसी को कोई संदेह है, तो वह गूगल पर खोज कर पढ़ सकता है। कांग्रेस चुपचाप देश को इस्लामिक राज्य बनाने की तैयारी कर रही थी, हिंदुओं को केवल "आरक्षण का लालच" दे रही थी ताकि "हिंदू समुदाय आपस में बंटा रहे और लड़ता रहे, ग़ज़वा-ए-हिंद के ज़रिए इस्लामीकरण की उनकी साज़िश को कभी न समझे"। हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने के लिए, हिंदू कोड बिल "केवल मुसलमानों के लिए" पेश किया गया।*

*कभी-कभी मन करता है कि पोस्ट न करूँ... फिर सोचता हूँ, "भारत इसे पढ़कर ही देशद्रोहियों की छाती पर कूद पड़ेगा।"*

*कृपया इस संदेश को आगे बढ़ाएँ ताकि हमारे सभी हिंदू भाई इस गहरी बात को समझ सकें। सनातनियों को दफ़नाने के लिए गड्ढे खोदे जा रहे हैं।*

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: जय भीम जय मीम -

यह नारा अब पूरी तरह से सार्थक हो गया है। लगभग 25 साल पहले अफगानिस्तान के बमियान प्रान्त से बुद्ध की विशाल मूर्तियों को विस्फोट द्वारा उड़ा दिया गया। 

            जम्मू कश्मीर में एक इस्लामिक स्थल है जिसे हजरत बल दरगाह कहते है। इसके सूचना पट्ट पर अशोक चक्र बना था। यह राष्ट्रीय प्रतीक है तो इतिहास भी। 2 दिन पहले इसे पत्थर के शिलापट्ट से हटा दिया। हटाने वाले शांतिदूत/शांतिप्रिय कौम के मोमिन जिहादी । इस मामले में देश के सारे बौद्ध,कथित भीमवादी, दलित संगठन चुप है। अब पता नहीं इस में कौन सा भाईचारा छुपा है कि दलित राजनीति के आका भी चुप्पी मारे है। दलित-मुस्लिम गठजोड़ और जय भीम-जय मीम का नारा देने वाले आपको कभी जोगेंद्र नाथ मंडल का नाम लेते नहीं दिखेंगे । क्योंकि इसके पीछे एक बड़ा कारण है, वह हैं इसका परिणाम। मंडल ने पूर्वी अविभाजित भारत की सियासत में दलितों का नेतृत्व किया । इतिहास में पहली बार दलित-मुस्लिम गठजोड़ का प्रयोग जोगेंद्र नाथ मंडल ने ही किया था। डॉ अंबेडकर से उलट उनका इस नए गठबंधन पर अटूट विश्वास था। मुस्लिम लीग के अहम नेता के तौर पर उभरे जोगेंद्र नाथ मंडल ने भारत विभाजन के वक्त अपने दलित अनुयायियों को पाकिस्तान के पक्ष मे वोट करने का आदेश दिया था। सिलहट वर्तमान में बांग्लादेश में है। वहां हिन्दुओं और मुसलमानों की आबादी लगभग समान थी। मंडल के कहने पर दलित हिन्दुओं ने मुसलमानों का पक्ष लिया और सिलहट पाकिस्तान का भाग बन गया। इस प्रकार से मुस्लिम लीग मण्डल के सहयोग से भारत का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने मे सफल हुआ। यहाँ तक कि जब बंगाल में भयंकर दंगे हुए तो मंडल ने बंगाल में घुम घुमकर दलित हिन्दुओं को मुसलमानों के विरुद्ध हथियार उठाने से मना किया। अपने कृत्यों से वह तत्कालीन बंगाल के मुख्यमंत्री सुहरावर्दी के खासम-खास बन गए। मंडल का कहना था कि मुसलमान भी दलित हिन्दुओं के समान शोषित और पीड़ित हैं।  

                  1947 में बांग्लादेश इलाके के लाखों सवर्ण हिन्दू भारत में आकर बस गए। जबकि मण्डल का कहना मानकर लाखों दलित हिन्दू मुस्लिम एकता के नारे का समर्थन करते हुए पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में ही बस गए। विभाजन के बाद मुस्लिम लीग ने दलित-मुस्लिम गठजोड़ का मान रखते हुए मंडल को पाकिस्तान का पहला कानून मंत्री बनाया था। वे पाकिस्तान के संविधान लिखने वाली कमेटी के अध्यक्ष भी रहे थे। जोगेंद्र नाथ मंडल ने वैसे ही पाकिस्तान का संविधान रचा है जैसे बाबा साहेब ने भारत का संविधान। पर छल अधिक दिनों तक नहीं छुप सकता। अब मुस्लिम लीग को दलित-मुस्लिम एकता का ढोंग करने की कोई आवश्यकता नहीं थी । उनके लिए हर गैर-मुस्लिम काफिर के समान था चाहे वह सवर्ण हो चाहे वह दलित हो। पूर्वी पाकिस्तान में धीरे धीरे मण्डल की अहमियत खत्म होती गई। उनके कहे पर रुकें दलित हिन्दुओं पर मज़हबी अत्याचार आरम्भ हो गए। 1950 में पूर्वी पाकिस्तान में अनेक दलित हिन्दुओं को मार दिया गया। दलित हिन्दुओं का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। न उनसे कोई व्यापारिक सम्बन्ध रखता था। न ही कोई उनकी सहायता करना चाहता था। 30% दलित हिन्दू जनसंख्या का भविष्य अन्धकारमय हो गया। यह देख मण्डल ने दुःखी होकर जिन्ना को कई पत्र लिखे। उनके भाव कुछ इस प्रकार से थे -

मंडल लिखते है-

 "मुस्लिम लोग हिंदू वकीलों, डॉक्टरों, दुकानदारों और कारोबारियों आदि का बहिष्कार करने लगे। जिसकी वजह से इन लोगों को जीविका की तलाश में पश्चिम बंगाल जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। गैर-मुस्लिमों के संग नौकरियों में अकसर भेदभाव होता है। लोग हिंदुओं के साथ खान-पान भी पसंद नहीं करते। पूर्वी बंगाल के हिंदुओं (दलित-सवर्ण सभी ) के घरों को आधिकारिक प्रक्रिया पूरा किए बगैर कब्जा कर लिया गया। हिंदू मकान मालिकों को मुस्लिम किरायेदारों ने किराया देना काफी पहले बंद कर दिया। ऐसे भेदभाव भरे माहौल में हिन्दू कैसे जीवन यापन करे।"

: मुंबई में धमाके की झूठी धमकी देने वाला आरोपी नोएडा से गिरफ्तार

मुंबई को उड़ाने और दहलाने की धमकी भरा व्हाट्सएप मैसेज भेजने वाले आरोपी को गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान अश्वनी कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पटना का रहने वाला है और पिछले पांच साल से ज्योतिष और वास्तु का काम कर रहा था।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी ने मुंबई पुलिस को व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर दावा किया था कि लश्कर-ए-जिहादी के 14 पाकिस्तानी आतंकी मुंबई में घुसपैठ कर चुके हैं और 400 किलो RDX से मुंबई को उड़ाया जाएगा। मैसेज में यहां तक लिखा गया था कि धमाके में एक करोड़ लोगों की जान जाएगी।

मुंबई ज्वाइंट सीपी ने तत्काल गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह से संपर्क किया। इसके बाद सीपी लक्ष्मी सिंह ने ज्वाइंट सीपी (L/O) और SWAT टीम को कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी। नोएडा पुलिस की इस टीम ने महज 4 से 5 घंटों में नोएडा सेक्टर-79 की एक सोसाइटी से आरोपी को दबोच लिया।

गौरतलब है कि धमकी ऐसे समय दी गई थी जब मुंबई में आज बड़े स्तर पर गणेश विसर्जन होना है।वही आरोपी को पकड़ने वाली टीम को सीपी लक्ष्मी सिंह ने 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।

: अनंत चतुर्दशी आज 

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अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होता है। गणेश चतुर्दशी से आरंभ हुआ यह पर्व अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इस दिन बप्पा को विदा किया जाता है और उनको पवित्र नदी में विसर्जन किया जाता है। शास्त्रीय नियमों के अनुसार, गणेश चतुर्दशी पर जब बप्पा को घर में विराजमान किया जाता है तो डेढ़ दिन, ढाई दिन, पांच दिन, 7 दिन या फिर 11 दिन तक अपने घरों में स्थापित किया जाता है। 11वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को विधि विधान से विदा किया जाता है। 

अनंत चतुर्दशी 2025 कब है? 

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अनंत चतुर्दशी तिथि का आरंभ 6 सितंबर को सुबह 3 बजकर 14 मिनट पर आरंभ होगी और 7 सितंबर को मध्यरात्रि 1 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, उदय तिथि के हिसाब से 6 सितंबर को ही अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा।

अनंत चतुर्दशी पर बप्पा का विसर्जन करने का मुहूर्त

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शुभ चौघड़िया सुबह में 7 बजकर 36 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक।

लाभ चौघड़िया दोपहर में 1 बजकर 54 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक।

अमृत चौघड़िया दोपहर में 3 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 3 मिनट तक।

लाभ चौघड़िया शाम में 6 बजकर 37 मिनट से 8 बजकर 3 मिनट तक।

पंचांग के अनुसार, इन शुभ मुहूर्त में किसी भी समय आप गणेश विसर्जन कर सकते हैं।

गणेश विसर्जन की विधि

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गणेश विसर्जन के दिन बप्पा को विदा करने से पहले स्नान आदि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

इसके बाद घी का दीपक जलाकर गणेश जी के मंडप के सामने आसन पर बैठकर गणेश मंत्र गं गणपतयै नम: का जप करें।

इसके बाद गणेश जी को अक्षत, फूल, धूप, धन अर्पित करें।

फिर गणेश जी की आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ करें और गणेश जी को भोग लगाए। अंत में पूजा में हुई भूल चूक के लिए माफी मांगे और गणेश जी को अपने घर के पास किसी पवित्र नदी में गणेश जी का विसर्जन कर दें।

राजेन्द्र गुप्ता,

ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

मो. 9116089175

नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें।

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🤔भारत मे गुरुपूर्णिमा जैसा महान पर्व है फिर हमें शिक्षक दिवस की क्या आवश्यकता है 

वास्तव में शिक्षक दिवस के प्रारंभ हुआ ही गुरुपूर्णिमा के महत्व को कम करने के लिए है 

प्रमाण सामने है आज भारत के हर व्यक्ति को ये पता है कि शिक्षक दिवस कब मनाया जाता है लेकिन गुरुपूर्णिमा की जानकारी अधिकांश को नही होती 😌

जिस व्यक्ति के कारण आप शिक्षक दिवस मानते है क्या उसका चरित्र इस योग्य था कि हम उसके जन्मदिन को उत्सव के रूप में मना सकें 

तो आइए आज सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और उनके कार्यो पर एक नज़र डालते है

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन सर्वपल्ली गांव के एक मेधावी छात्र थे। उन्होंने ईसाइयों के स्कूल और ईसाइयों के ही कॉलेज में पढ़ाई की और उनके अधीन ही अध्यापक बने। वे कम्युनिस्ट और ईसाइयों के सदा निकट रहे और अंग्रेजों ने उन्हें सदा अपना भरोसेमंद पाया। उनका बेटा गोपाल कट्टर नास्तिक और कम्युनिस्ट है।

राधाकृष्णन ने भारतीय मान्यताओं को ध्वस्त करने के लिए कुछ नए सिद्धांत स्थापित किये जैसे कि 

* जैन दर्शन वेदों से पहले ही भारत में व्यापक था

* बाद में वेद का प्रचार हुआ

* वेद ईश्वरीय ज्ञान नहीँ हैं, रचयिताओं के कथन हैं

* ईसाइयत औऱ वेदान्त का समन्वय होंना चाहिये

 राधाकृष्णन ने गीता की भूमिका में लिखा कि इसके लेखक का पता नहीं है तथा किसी काल्पनिक व्यास के नाम से 1500 वर्षों में लोगों ने 700 श्लोक जोड़ दिये हैं। आज भी किसी भी भारतीय विश्वविद्यालय में गीता का श्लोक उद्धृत करने पर लोग इसी आधार पर विरोध करते हैं

राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति बनते ही तिरुपति संस्कृत विद्यापीठ से वेदों का प्रकाशन बन्द करवा दिया।

 पं. बेल्लिकोठ रामचन्द्र शर्मा कौथुमी संहिता की व्याख्या प्रकाशित कर रहे थे उंस समय हार्वर्ड विश्वविद्यालय उंस शोध को खरीदना चाहता था जिसके लिए 1 करोड़ रुपये देने को भी तैयार था लेकिन पंडित रामवहान्द्र शर्मा इसे बेचने के लिए तैयार नही थे क्योकि वह मानते थे कि वेद बिक्री की चीज नहीं है। 

राधाकृष्णन ने इस अपराध में पंडित रामचंद्र शर्मा को तुरन्त नौकरी से निकाला गया तथा प्रेस में छप रही पुस्तक को वापस ले कर हार्वर्ड को बेच दिया। योग्य सम्पादक के अभाव में अभी तक वहां से 4 खण्डों में केवल 2 ही प्रकाशित हो पाये हैं।

इसके अतिरिक्त राधाकृष्णन के कुछ अन्य महान कार्य

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से मूल संस्कृत जानने वालों को झूठे बहाने बना कर निकाला 

 नेपाल सम्स्कृत ग्रन्थावली का प्रकाशन तुरन्त बन्द करवाया यद्यपि उसका खर्च नेपाल राजा दे रहे थे।

ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष श्री रामव्यास पाण्डेय पर आरोप लगाया कि उन्होंने हजारी प्रसाद द्विवेदी जैसे अयोग्य व्यक्ति को केवल अपना सम्बन्धी होने के कारण उनको प्राध्यापक बनवा दिया। 

 रामव्यास पाण्डेय की कोई पुस्तक प्रकाशित नहीं होने दी।

अपने ही छात्र जदुनाथ सिन्हा की थीसिस को चोरी कर के अपने नाम से इंडियन फिलासफी नाम की किताब में छपवा दिया

ऐसे थे महान राधाकृष्णन

क्या आप ऐसे धर्मद्रोही और चोर का जन्मदिन शिक्षक दिवस में रूप में मनाना चाहते हैं!!!🍂🏵️🍂

🤔India has a great festival like Guru Purnima, then why do we need Teachers' Day?

In fact, Teachers' Day was started to reduce the importance of Guru Purnima.

The proof is in front of us that today every person in India knows when Teachers' Day is celebrated, but most people do not know about Guru Purnima. 😌

The person because of whom you celebrate Teachers' Day, was his character worthy enough that we can celebrate his birthday as a festival?

So let us take a look at the life and works of Sarvepalli Radhakrishnan today.

Doctor Sarvepalli Radhakrishnan was a brilliant student of Sarvepalli village. He studied in a Christian school and a Christian college and became a teacher under them. He was always close to the Communists and Christians and the British always found him trustworthy. His son Gopal is a staunch atheist and communist.

 Radhakrishnan established some new theories to demolish Indian beliefs such as: 

* Jain philosophy was prevalent in India even before the Vedas

* Vedas were propagated later

* Vedas are not divine knowledge, they are the statements of the authors

* There should be a coordination between Christianity and Vedanta

Radhakrishnan wrote in the introduction of Gita that its author is not known and people have added 700 verses in the name of some imaginary Vyas in 1500 years. Even today, if a verse from Gita is quoted in any Indian University, people protest on this basis.

As soon as Radhakrishnan became the President, he stopped the publication of Vedas from Tirupati Sanskrit Vidyapeeth.

Pt. Bellikoth Ramchandra Sharma was publishing the explanation of Kauthumi Samhita, at that time Harvard University wanted to buy that research for which it was ready to pay Rs. 1 crore, but Pandit Ramvahandr Sharma was not ready to sell it because he believed that Vedas are not a thing for sale.

 Radhakrishnan immediately fired Pandit Ramchandra Sharma for this crime and took back the book being printed in the press and sold it to Harvard. Due to lack of a capable editor, only 2 out of 4 volumes have been published from there till now.

Apart from this, some other great works of Radhakrishnan

Expelled those who knew the original Sanskrit from Kashi Hindu University on false pretexts

Immediately stopped the publication of Nepal Sanskrit Granthavali although the King of Nepal was paying for it.

Accused the head of the astrology department, Shri Ramvyas Pandey, that he made an incompetent person like Hazari Prasad Dwivedi a professor only because he was his relative.

Did not allow any book of Ramvyas Pandey to be published.

Stealed the thesis of his own student Jadunath Sinha and got it printed in a book named Indian Philosophy in his own name

Such was the great Radhakrishnan

Do you want to celebrate the birthday of such a traitor and thief as Teacher's Day!!!🍂🏵️🍂

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 *🚩🕉️07 सितंबर 2025 को लगने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण के बारे में जानकारी* 

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*🚩🕉️7 सितंबर को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है. यह चंद्र ग्रहण दो कारणों से खास रहने वाला है. एक तो चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान होगा, जिसका सूतक काल 9 घंटे पहले ही लग जाएगा. दूसरा, चंद्र ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा और पितृ पक्ष के दिन पड़ रहा है. ऐसे में ज्योतिविदों का कहना है कि साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भारत राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति को प्रभावित करता है.*

*🚩🕉️ज्योतिषविद नंदिता पांडेय के मुताबिक, 7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा. जब भी पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है तो उसका प्रभाव देश-दुनिया पर करीब 3 महीने पहले और 3 महीने बाद तक देखने को मिलता है. यह ग्रहण राहु के नक्षत्र शतभिषा से शुरू होगा और गुरु के नक्षत्र पूर्वभाद्रपद पर इसका समापन होगा.*

*🚩🕉️चंद्र ग्रहण के दिन सूर्य, शनि और गुरु जैसे बड़े ग्रहों का महासंयोग भी बन रहा है. इस दिन दो ग्रहों की अहम भूमिका रहेगी. चंद्र ग्रहण में राहु और चंद्रमा एकसाथ होते ही हैं. इस बार ग्रहण रविवार को है तो सूर्य की भी एंट्री हो गई है, क्योंकि रविवार सूर्य देव का दिन होता है. साथ ही. यह साल मंगल का साल है तो मंगल भी आ गए हैं. जिस दिन ये ग्रहण लग रहा है, वो तारीख और उस तारीख का मूलांक 7 है जो केतु का प्रतिनिधित्व करता है.*

*🚩🕉️चंद्र ग्रहण का राजनेताओं पर प्रभाव*

*ज्योतिषविद नंदिता पांडेत के मुताबिक, इस चंद्र ग्रहण का विश्व राजनीति पर नकारात्मकता प्रभाव देखने को मिल सकता है. किसी विशेष राजनेता को बहुत सारी तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है. गुरु के नक्षत्र में ग्रहण जाएगा तो प्रशासन से जुड़ी चीजों में बहुत दिक्कतें आएंगी. इसके अलावा, इस दौरान सरकारें नीतियों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण और बड़े निर्णय ले सकती हैं.*

*🚩🕉️सरकार और जनता के बीच किसी बड़े मुद्दे पर टकराव हो सकता है. इसके अलावा, शनि वक्री हो रहे हैं और कुंभ राशि को प्रभावित कर रहे हैं तो इससे कानूनी मामलों पर तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है. प्रशासनिक मामलों पर भी दबाव रहेगा.*

*🚩🕉️चंद्र ग्रहण की अवधि* 

*🚩🕉️भारतीय समयानुसार, 7 सितंबर को साल का आखिरी चंद्रग्रहण रात 9 बजकर 58 मिनट से शुरू हो जाएगा, जिसका समापन 8 सितंबर की अर्धरात्रि 1 बजकर 26 मिनट पर होगा. चंद्र ग्रहण का पहला स्पर्श रात 8 बजकर 59 मिनट पर होगा और इस ग्रहण के अंतिम स्पर्श रात 2 बजकर 24 मिनट पर होगा. यानी भारत में संपूर्ण ग्रहण काल की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट की रहेगी. अगर चंद्र ग्रहण के सबसे महत्वपूर्ण और पीक टाइमिंग की बात की जाए तो ये रात 11 बजकर 42 मिनट पर अपने चरम पर होगा.* 

*🚩🕉️चंद्र ग्रहण के सूतक काल की टाइमिंग* 

*🚩🕉️चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले यानी 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से लग जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में भोजन खाना, सोना और पूजा-पाठ वर्जित माना जाता है. लेकिन, ग्रहण के दौरान भगवान के मंत्र का जाप करना बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है.*  

*🚩🕉️कहां कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण* 

*🚩🕉️साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा. भारत के अलावा चंद्र ग्रहण को एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका, फिजी और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा.*  

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*🚩🌺पितृ पक्ष 2025: आरंभ और समाप्ति तिथियां, महत्व और पूर्वजों के सम्मान के लिए अनुष्ठान*

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*🚩🌺पितृ पक्ष, हिंदू पंचांग का एक महत्वपूर्ण काल ​​है, जो श्राद्ध और तर्पण जैसे अनुष्ठानों के माध्यम से पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए समर्पित है।* 

*🚩🌺यह 16-दिवसीय अनुष्ठान, जिसे सोरह श्राद्ध, महालय, अपरा पक्ष या पितृपक्ष भी कहा जाता है, आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली माना जाता है, लेकिन मृत्यु संस्कार से जुड़े होने के कारण अशुभ माना जाता है। 2025 में, पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू होगा और 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या (महालया अमावस्या) के साथ समाप्त होगा।*

*🚩🌺पितृ पक्ष 2025: प्रारंभ और समाप्ति तिथियां*

*🚩🌺पितृ पक्ष प्रारंभ 7 सितंबर, 2025*

*🚩🌺पितृ पक्ष समाप्ति 21 सितंबर, 2025*

*🚩🌺सर्वपितृ अमावस्या (महालय अमावस्या) 21 सितंबर, 2025*

*🚩🌺पितृ पक्ष का महत्व*

*🚩🌺पितृ पक्ष को एक पवित्र काल माना जाता है जब पूर्वजों की आत्माएँ अपने वंशजों से तर्पण प्राप्त करने के लिए पृथ्वी पर आती हैं।* 

*🚩🌺ऐसा माना जाता है कि इस दौरान श्राद्ध करने से पितृ ऋण (पितृ ऋण) कम होता है और दिवंगत आत्माओं का आशीर्वाद, शांति और मार्गदर्शन प्राप्त होता है।*

*🚩🌺पितृ पक्ष अनुष्ठान*

*🚩🌺पितृ पक्ष के दौरान अनुष्ठान भारत भर में भिन्न होते हैं, लेकिन आम तौर पर इसमें शामिल हैं:*

*🚩🌺आमतौर पर सबसे बड़े बेटे द्वारा शुद्धि स्नान से इसकी शुरुआत की जाती है।*

*🚩🌺ब्राह्मणों को चावल, दाल और सब्जी जैसे साधारण भोजन देना।*

*🚩🌺प्रार्थना करते समय तिल मिश्रित जल डालना।*

*🚩🌺कपड़े और भोजन का दान करना, तथा गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन कराना शुभ माना जाता है।*

*🚩🌺क्षेत्रीय अनुष्ठान*

*🚩🌺गया, बिहार: श्राद्ध कर्म के लिए सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। भक्तगण पितृ तर्पण के लिए गंगा घाटों पर एकत्रित होते हैं, ऐसा माना जाता है कि इससे उच्च आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है।*

*🚩🌺दक्षिणी एवं पश्चिमी भारत:* 

*🚩🌺गणेश उत्सव के बाद भाद्रपद के उत्तरार्ध में मनाया जाता है।*

*🚩🌺उत्तर भारत: नदी के किनारे और पूर्वजों को समर्पित मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं।*

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*🚩🕉️गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ* 

*🚩🕉️गणेश जी की स्तुति अद्भुत, गणनायक गजानन प्रसन्न होकर करते हैं सिद्ध सब काम*

 

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*🚩🕉️गणेश चतुर्थी एवं गणेश उत्सव के पूरे 10 दिन तक भगवान अष्टविनायक श्रीगणेश जी के इन पावरफूल दिव्य मंत्रों का अर्थों सहित पाठ करने से गणनायक श्री गजानन जी जीवन के सभी श्रेष्ठ कार्यों में सहायक बन जाते हैं। गणेश जी प्रसन्न होकर सभी कार्यों को सिद्ध और सफल कर देते हैं।* 

 *🚩🕉️विघ्नविनाशक, संकटमोचक श्रीगणेश का ऐसा संपूर्ण परिचय जिसे शायद ही आप जानते होंगे*

*🚩🕉️अष्टविनायक के इन 8 मंत्रों के जप से जीवन के हर काम बन जाते हैं-*

*🚩🕉️1- वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:।*

*निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा॥*

*🚩🕉️भावार्थ- हे हाथी के जैसे विशालकाय जिसका तेज सूर्य की सहस्त्र किरणों के समान है। बिना विघ्न के मेरा कार्य पूर्ण हो और सदा ही मेरे लिए शुभ हो ऐसी कामना करते हैं।*

*🚩🕉️2- नमामि देवं सकलार्थदं तं सुवर्णवर्णं भुजगोपवीतम्ं।*

*गजाननं भास्करमेकदन्तं लम्बोदरं वारिभावसनं च॥*

*🚩🕉️भावार्थ- मैं उन भगवान् गजानन की वन्दना करता हूं, जो समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं, सुवर्ण तथा सूर्य के समान देदीप्यमान कान्ति से चमक रहे हैं। वे सर्पका यज्ञोपवीत धारण करते हैं, एकदन्त हैं, लम्बोदर हैं तथा कमल के आसनपर विराजमान हैं।*

*3- एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं।*

*विध्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥*

*🚩🕉️भावार्थ- जो एक दांत से सुशोभित हैं, विशाल शरीरवाले हैं, लम्बोदर हैं, गजानन हैं तथा जो विघ्नोंके विनाशकर्ता हैं, मैं उन दिव्य भगवान् हेरम्बको प्रणाम करता हूं।*

*🚩🕉️4- विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।*

*नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥*

*🚩🕉️भावार्थ- विघ्नेश्वर, वर देनेवाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओंसे परिपूर्ण, जगत् का हित करनेवाले, गजके समान मुखवाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वतीपुत्र को नमस्कार है; हे गणनाथ! आपको नमस्कार है।*

*5- द्वविमौ ग्रसते भूमिः सर्पो बिलशयानिवं।*

*राजानं चाविरोद्धारं ब्राह्मणं चाप्रवासिनम्॥*

*🚩🕉️भावार्थ- जिस प्रकार बिल में रहने वाले मेढक, चूहे आदि जीवों को सर्प खा जाता है, उसी प्रकार शत्रु का विरोध न करने वाले राजा और परदेस गमन से डरने वाले ब्राह्मण को यह समय खा जाता है।*

*🚩🕉️6- गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं।*

*उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥*

*🚩🕉️भावार्थ- जो हाथी के समान मुख वाले हैं, भूतगणादिसे सदा सेवित रहते हैं, कैथ तथा जामुन फल जिनके लिए प्रिय भोज्य है, पार्वती के पुत्र हैं तथा जो प्राणियों के शोक का विनाश करने वाले हैं, उन विघ्नेश्वर के चरणकमलों में नमस्कार करता हुं।*

*🚩🕉️7- रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षकं।*

*भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात्॥*

*🚩🕉️भावार्थ- हे गणाध्यक्ष रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिये। हे तीनों लोकों के रक्षक! रक्षा कीजिए; आप भक्तों को अभय प्रदान करने वाले हैं, भवसागर से मेरी रक्षा कीजिये।*

*🚩🕉️8- केयूरिणं हारकिरीटजुष्टं चतुर्भुजं पाशवराभयानिं।*

*सृणिं वहन्तं गणपं त्रिनेत्रं सचामरस्त्रीयुगलेन युक्तम्॥*

*🚩🕉️भावार्थ- मैं उन भगवान् गणपतिकी वन्दना करता हूं जो केयूर-हार-किरीट आदि आभूषणों से सुसज्जित हैं, चतुर्भुज है और अपने चार हाथों में पाशा अंकुश-वर और अभय मुद्रा को धारण करते हैं, जो तीन नेत्रों वाले हैं, जिन्हें दो स्त्रियां चंवर डुलाती रहती है।*

*🚩🕉️जय श्री गणपति बप्पा मोरया* 

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*🚩🕉️गणेश विसर्जन के समय करें इन मंत्रों का जप, जानें बप्पा को विदा करने की विधि*

*🚩🌺आयुषी त्यागी🚩🌺*

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*🚩🕉️गणपति बप्पा मोरिया!* 

*🚩🕉️अनंत चतुर्दशी के शुभ अवसर पर, भक्तगण 6 सितंबर 2025 को बप्पा को विदा करने के लिए तैयार हैं। पूरे विधि-विधान के साथ गणेश विसर्जन करना महत्वपूर्ण है ताकि साल भर घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और बप्पा का आशीर्वाद आपको मिलता रहे। यहां जानें गणेश विसर्जन की सही विधि और मंत्र।*

*🚩🕉️गणपति बप्पा मोराया, अगले बरस तू जल्दी आ। अनंत चतुर्दशी के दिन अब बप्पा को विदा करने का मौका आ चुका है।*

*🚩🕉️बता दें कि अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर 2025 शनिवार के दिन है। गणेशजी को जितनी धूमधाम से घर लाया जाता है वैसे ही अनंत चतुर्दशी पर बड़ी धूमधाम के साथ बप्पा को विदा किया जाता है।* 

*🚩🕉️सालभर घर में गणेशजी की कृपा पाने के लिए उनका विसर्जन पूरे विधि विधान के साथ करना जरुरी है। आइए जानते हैं बप्पा को विदा करने की सही विधि और मंत्र।*

*🚩🕉️गणेश विसर्जन की विधि* 

*🕉️🚩1) गणपति के विसर्जन के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठे। जैसे रोजाना गणेश जी की पूजा करते हैं वैसे ही उनकी पूजा करें।*

*🚩🕉️2) इसके बाद गणेशजी जहां आपने विराजमान किए हैं वहां पर दोनों जगह हल्दी और कुमकुम से तिलक लगाएं। इसके बाद बप्पा के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लें।*

*🕉️🚩3) इसके बाद गणेशजी को सबसे पहले दूर्वा अर्पित करें। फिर एक नारियल अर्पित करें इसके बाद फूल और इत्र अर्पित करें और फिर मोदक का भोग लगाएं।*

*🚩🕉️4) इसके बाद बप्पा को उनके स्थान से उठाने से पहले बप्पा की मूर्ति को आसान के साथ ही हिलाएं। फिर बप्पा को गोद में उठा लें और फिर उन्हें एक लकड़ी की चौकी पर विराजमान करें।* 

*🚩🕉️5. चौकी पर लाल या गुलाबी रंग के कपड़ा बिछाएं और चौकी को पहले ही गंगाजल से अच्छे से साफ कर लें।*

*🚩🕉️6) बप्पा को विसर्जन करने से पहले कुमकुम, अक्षत, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, हल्दी आदि अर्पित करें।*

*🚩🕉️7) इसके बाद बप्पा की आरती करें और फिर विसर्जन करें। विसर्जन करने के लिए आप जिस भी नदी या तालाब में जा रहे हैं वहां किनारे पर खड़े होकर पहले बप्पा की मूर्ति को तीन बार डुबकी लगाएं और फिर बप्पा को विसर्जित कर दें। इस बात का ध्यान रखें की बप्पा का विसर्जन शुभ मुहूर्त में ही करें।*

*🚩🕉️गणेश विसर्जन मंत्र*

*🚩🕉️जब आप गणेश जी को अपने घर से गोद में उठाएं तो उस समय ' ओंम श्री विघ्नराजाय नमः।'मंत्र का जप करें।*

*🚩🕉️इसके बाद ऊं यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्। इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च॥ मंत्र बोलकर उन्हें दूसरी चौकी पर विराजमान कर दें।*

*🚩🕉️फिर ओम गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ, स्वस्थाने परमेश्वर। यत्र ब्रह्मादयो देवाः' तत्र गच्छ हुताशन। का जप करें।*

*🚩🕉️जब बप्पा को विसर्जित करें तो उस समय बोले गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ और बप्पा को इस तरह विदा करें। ताकि आप घर में सालभर सुख समृद्धि बनी रहे।*

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: *🙏🌹🙏जय श्री राम 🙏🌹🙏*

*👌💥एक खूबसुरत सोच अनन्त चतुर्दशी विषेश💥👌*

*👉आप सभी को भाद्रमाह शुक्लपक्ष चतुर्दशी तिथि अनंत चतुर्दशी व्रत एवं श्री गणेश विसर्जन की हार्दिक शुभकामनाएँ🙏*

*👉आज अनन्त चतुर्दशी शनिवार 06.09.2025 पूजा मुहुर्त:– प्रातः 06:01 से 25:44 (रात्रि 01:44) तक🙏*

*👉हिन्दू धर्म में अनन्त चतुर्दशी का बड़ा महत्व है, इसे अनन्त चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनन्त रूप की पूजा की जाती है। भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और अनन्त सूत्र को बाँधने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन कई जगहों पर धार्मिक झांकियां निकाली जाती है🙏*

*👉अनन्त चतुर्दशी पर भगवान विष्णु, यमुना नदी और शेषनाग जी की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार अनन्त चतुर्दशी का व्रत मनुष्य को जीवन के सभी कष्टों से बाहर निकलता है। लेकिन अनन्त चतुर्दशी व्रत के नियमों का पालन किए बिना आप इसे पूर्ण नहीं कर सकते हैं और न हीं इसके शुभफलों को प्राप्त कर सकते है। अनन्त चतुर्दशी का व्रत करने से पहले आपको इस व्रत के नियम अवश्य ही जान लेनी चाहिये🙏*

*🌹अनन्त चतुर्दशी व्रत के नियम🌹*

*👉01. अनन्त चतुर्दशी का व्रत करने वाले साधक को ब्रह्ममुहूर्त में उठना चाहिए और स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए🙏*

*👉02. इस दिन भगवान विष्णु, माता यमुना और शेषनाग जी की पूजा की जाती है, इसलिए इनकी पूजा अवश्य करें🙏*

*👉03. अनन्त चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के साथ कलश के रूप में माता यमुना और दूर्वा के रूप में शेषनाग जी को स्थापित करें🙏*

*👉04. इस दिन अनन्त सूत्र भी धारण किया जाता है, इसलिए पूजा के समय 14 गाँठों वाला अनन्त धागा भगवान विष्णु के चरणों में अवश्य रखें, इसके बाद ही इसे धारण करें🙏*

*👉05. अनन्त चतुर्दशी के दिन आपको अनन्त चतुर्दशी की कथा अवश्य सुननी और पढ़नी चाहिए 🙏*

*👉06. यदि आपने अनन्त चतुर्दशी का व्रत किया है तो आपको इस दिन झूठ बिल्कुल भी नहीं बोलना चाहिए और न हीं किसी की निंदा करनी चाहिए🙏*

*👉07. अगर आपने अनन्त चतुर्दशी के दिन व्रत किया है तो आपको अनन्त धागे को साल भर अवश्य बाँधना चाहिए, यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो कम से कम 14 दिन तक जरूर बाँधे🙏*

*👉08. अनन्त चतुर्दशी के दिन यदि आपने व्रत किया है तो आपको इस दिन नमक का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए आपको इस दिन मीठा ही भोजन करना चाहिए🙏*

*👉09. इस दिन आपको सिर्फ एक ही समय भोजन करना चाहिए, क्योंकि अनन्त चतुर्दशी के व्रत में केवल पारण के समय ही भोजन किया जाता है🙏*

*👉10. अनन्त चतुर्दशी के दिन आपको निर्धन व्यक्ति और ब्राह्मण को भोजन कराकर अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा अवश्य देनी चाहिए🙏*

*👉पूजा विधि:- इस दिन सुबह सुबह स्नान कर साफ सुथरे कपडे़ पहन लें। उसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल पर कलश की स्थापना करें। कलश पर कुश से बने अनन्त की स्थापना करें। आप अगर चाहें तो भगवान विष्णु की प्रतीमा भी लगा सकते हैं। अब एक डोरी या धागे में कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनन्त सूत्र बना लें, जिसमें 14 गाँठें लगाएं। इस सूत्र को भगवान विष्णु को अर्पित करें। अब भगवान विष्णु और अनन्त सूत्र की षोडशोपचार विधि से पूजा शुरू करें, और इस मंत्र का जाप करें🙏*

*🌹अनन्त संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव, अनन्तरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते🌹*

*👉पूजन के बाद इस अनन्त सूत्र को अपनी बाजू पर बाँध लें। इस बात का ध्यान रखें कि अनन्त सूत्र पुरुष अपने दाएं हाथ पर और महिलाएं बाएं हाथ पर बाँधे। ऐसा करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें🙏*

*👉अनन्त चतुर्दशी का महत्व:- पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल से अनन्त चतुर्दशी व्रत की शुरुआत हुई। यह भगवान विष्णु का दिन माना जाता है। अनन्त भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी। इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए वह स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, जिससे वे अनन्त प्रतीत होने लगे। इसलिए अनन्त चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनन्त फल देने वाला माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है। भारत के कई राज्यों में इस व्रत का प्रचलन है। इस दिन भगवान विष्णु की लोक कथाएं सुनी जाती है🙏*

*👉अनन्त चतुर्दशी कथा:- एक बार महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया। उस समय यज्ञ मंडप का निर्माण सुन्दर तो था ही, अद्भुत भी था वह यज्ञ मंडप इतना मनोरम था कि जल व थल की भिन्नता प्रतीत ही नहीं होती थी। जल में स्थल तथा स्थल में जल की भांति प्रतीत होती थी। बहुत सावधानी करने पर भी बहुत से व्यक्ति उस अद्भुत मंडप में धोखा खा चुके थे🙏*

*👉एक बार कहीं से टहलते-टहलते दुर्योधन भी उस यज्ञ-मंडप में आ गया और एक तालाब को स्थल समझ उसमें गिर गया। द्रौपदी ने यह देखकर ‘अंधों की संतान अंधी’ कह कर उनका उपहास किया। इससे दुर्योधन चिढ़ गया🙏*

*👉यह बात उसके हृदय में बाण समान लगी। उसके मन में द्वेष उत्पन्न हो गया और उसने पाण्डवों से बदला लेने की ठान ली। उसके मस्तिष्क में उस अपमान का बदला लेने के लिए विचार उपजने लगे। उसने बदला लेने के लिए पाण्डवों को द्यूत-क्रीड़ा में हरा कर उस अपमान का बदला लेने की सोची। उसने पाण्डवों को जुए में पराजित कर दिया🙏*

*👉पराजित होने पर प्रतिज्ञानुसार पाण्डवों को बारह वर्ष के लिए वनवास भोगना पड़ा। वन में रहते हुए पांडव अनेक कष्ट सहते रहे। एक दिन भगवान कृष्ण जब मिलने आए, तब युधिष्ठिर ने उनसे अपना दुख कहा और दुख दूर करने का उपाय पूछा। तब श्रीकृष्ण ने कहा–‘हे युधिष्ठिर! तुम विधिपूर्वक अनन्त भगवान का व्रत करो, इससे तुम्हारा सारा संकट दूर हो जाएगा और तुम्हारा खोया राज्य पुन: प्राप्त हो जाएगा🙏*

*👉इस संदर्भ में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एक कथा सुनाई:- प्राचीन काल में सुमंत नाम का एक नेक तपस्वी ब्राह्मण था। उसकी पत्नी का नाम दीक्षा था। उसकी एक परम सुन्दरी धर्मपरायण तथा ज्योतिर्मयी कन्या थी। जिसका नाम सुशीला था। सुशीला जब बड़ी हुई तो उसकी माता दीक्षा की मृत्यु हो गई 🙏*

*👉पत्नी के मरने के बाद सुमंत ने कर्कशा नामक स्त्री से दूसरा विवाह कर लिया। सुशीला का विवाह ब्राह्मण सुमंत ने कौंडिन्य ऋषि के साथ कर दिया। विदाई में कुछ देने की बात पर कर्कशा ने दामाद को कुछ ईंटें और पत्थरों के टुकड़े बाँध कर दे दिए🙏*

*👉कौंडिन्य ऋषि दुखी हो अपनी पत्नी को लेकर अपने आश्रम की ओर चल दिए। परन्तु रास्ते में ही रात हो गई। वे नदी तट पर संध्या करने लगे। सुशीला ने देखा- वहाँ पर बहुत-सी स्त्रियाँ सुन्दर वस्त्र धारण कर किसी देवता की पूजा पर रही थीं। सुशीला के पूछने पर उन्होंने विधिपूर्वक अनन्त व्रत की महत्ता बताई, सुशीला ने वहीं उस व्रत का अनुष्ठान किया और चौदह गाँठों वाला डोरा हाथ में बाँध कर ऋषि कौंडिन्य के पास आ गई 🙏*

*कौंडिन्य ने सुशीला से डोरे के बारे में पूछा तो उसने सारी बात बता दी। उन्होंने डोरे को तोड़ कर अग्नि में डाल दिया, इससे भगवान अनन्त जी का अपमान हुआ। परिणामत: ऋषि कौंडिन्य दुखी रहने लगे। उनकी सारी सम्पत्ति नष्ट हो गई। इस दरिद्रता का उन्होंने अपनी पत्नी से कारण पूछा तो सुशीला ने अनन्त भगवान का डोरा जलाने की बात कहीं🙏*

*👉पश्चाताप करते हुए ऋषि कौंडिन्य अनन्त डोरे की प्राप्ति के लिए वन में चले गए। वन में कई दिनों तक भटकते-भटकते निराश होकर एक दिन भूमि पर गिर पड़े। तब अनन्त भगवान प्रकट होकर बोले–‘हे कौंडिन्य! तुमने मेरा तिरस्कार किया था, उसी से तुम्हें इतना कष्ट भोगना पड़ा। तुम दुखी हुए। अब तुमने पश्चाताप किया है। मैं तुमसे प्रसन्न हूँ। अब तुम घर जाकर विधिपूर्वक अनन्त व्रत करो। चौदह वर्षपर्यंत व्रत करने से तुम्हारा दुख दूर हो जाएगा। तुम धन-धान्य से संपन्न हो जाओगे। कौंडिन्य ने वैसा ही किया और उन्हें सारे क्लेशों से मुक्ति मिल गई 🙏*

*👉श्रीकृष्ण की आज्ञा से युधिष्ठिर ने भी अनन्त भगवान का व्रत किया जिसके प्रभाव से पांडव महाभारत के युद्ध में विजयी हुए तथा चिरकाल तक राज्य करते रहे जय जय श्री राधे 🙏*

*👉अपनी सोच को बदलें ज्ञान की बातें ओर मन की शांति, क्रोध, ज़िद और प्रतिक्रिया आत्म-विनाश के सबसे आसान रास्ते है🙏*

*🙏आज आपका दिन शुभमंगलमय हो🙏*

*🌻🙏🌻सुप्रभात🌻🙏🌻*

: *🙏🌹🙏जय श्री राम 🙏🌹🙏*

*👌💥एक खूबसुरत सोच💥👌*

*🌹प्रेम और आकर्षण में अंतर 🌹*

*👉कई मित्रों ने मुझसे कहा कि आप प्रेम के बारे में कुछ बोलिये कि प्रेम क्या है? दोस्तों, इस तरह के विषय उठाना थोड़ा सा बड़ा मुश्किल है। क्योंकि जो प्रेम आप लोगों को बताया गया है अभी तक, वो प्रेम और आत्मिक प्रेम में बहुत बड़ा अंतर है। आप लोगों को मन का ही प्रेम दिखाया गया है। मन का ही प्रेम समझाया गया है। आप लोगों को द्वैत या अद्वैत इन्हीं संबंधों से प्रेम करना सिखाया गया है। प्रेम जो अभी तक आप लोगों को बताया गया है कि किसी स्त्री से किसी पुरुष से किसी गुरु से किसी भगवान से चाह रखना, अपना समर्पण करना अपना सब कुछ न्योछावर करना ही प्रेम बताया गया है🙏*

*👉मित्रों जो परिभाषा अभी तक आपको प्रेम की मिली है। असल में वह प्रेम नहीं है। उसको चाहे आप चाहत कह दो, चाहे आकर्षण कह दो या चाहे स्वार्थ कह दो। लेकिन वह प्रेम नहीं है। प्रेम का अर्थ बहुत ही गहरा है। उस प्रेम को समझना मन के वश का, संसार के वश का या अस्तित्व के वश का नहीं है। प्रेम अपने आपमें बहुत विराट है। प्रेम अपने आपमें बहुत सुंदर है बहुत सरल है। कुछ लोग कहते हैं कि प्रेम किया नहीं जाता हो जाता है। कुछ लोग कहते हैं प्रेम किया जाता है। जितने लोग मिलेंगे उतनी बातें मिलेंगी। लेकिन प्रेम न तो किया जाता है न ही हो जाता है। ये ऐसी कोई प्रोसेस नहीं है कि यह हो जाता है या किया जाता है। अपितु ये प्रेम कोई क्रिया है ही नहीं🙏*

*👉प्रेम आपके वश में नहीं है कि आप किसी को प्रेम करोगे या फिर कोई व्यक्ति आया उसके गुण देखे आपने या उसमें ऐसी कोई क्वालिटी देखी कि आपका मन आकर्षित हो गया और उसी को आपने प्रेम समझ लिया। आपके मन में आकर्षण के जो बाण हैं, वह कईं विधियों से लगते हैं और जब वह आकर्षण के बाण आपके हृदय में लग जाते हैं तो आप उसी को प्रेम समझ लेते हो। लेकिन प्रेम, आकर्षण के द्वारा लगे बाणों का प्रेम नहीं होता है। वह केवल चाह या आकर्षण ही है🙏*

*👉प्रेम तो निरंतर चल रहा है। न वो किया जाता है न हो जाता है। आप नहीं थे तब भी प्रेम था। आप हो तब भी प्रेम चल रहा है। आप नहीं रहोगे तब भी प्रेम रहेगा। प्रेम न घटता है न बढ़ता है। प्रेम किया नहीं जाता। वो चल रहा है। क्रिया अक्रिया इन दोनों से परे की अवस्था को प्रेम कहते हैं। घटना बढ़ना, चाहत का काम होता है। ये मन का विषय है। लेकिन प्रेम न तो कभी घटा है और न कभी बढ़ा है। बढ़ इसलिए नहीं सकता, क्योंकि प्रेम हमेशा अपनी परिपूर्णता पर होता है। इसको समझने के लिए हम ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे कोई घड़ा है, वो पूरा भरा है, अब उसको कितना भरोगे? ज्यादा डालोगे तो बिखर जाएगा। ये केवल मैंने समझाने के लिए आपको एग्जांपल दिया है🙏*

*👉वैसे ही प्रेम है। वो घट तो सकता ही नहीं। लेकिन बढ़ भी नहीं सकता। क्योंकि वो पूरा ही भरा हुआ है। लबालब भरा हुआ है। एक अंश मात्र नहीं है कि उसको और भरा जा सके। प्रेम को पवित्र कहना या अपवित्र कहना प्रेम की गाली है। इन दोनों व्याख्याओं से परे है प्रेम। प्रेम इस तरह से भेदभाव नहीं करता है कि राम को ज्यादा प्रेम है या श्याम को ज्यादा प्रेम है। कृष्ण को ज्यादा प्रेम है या मोहन को ज्यादा प्रेम है। प्रेम न नाम से चलता है न ही काम से चलता है न गुण से चलता है न ही अवगुण से चलता है। प्रेम न ईश्वर से होता है न गुरु से न स्त्री से न भाई से न बहन से। प्रेम कोई व्यक्ति विशेष नहीं होता। न स्थान विशेष होता न गुण विशेष होता। क्योंकि अगर गुण विशेष है तो वहां भेदभाव है, अगर व्यक्ति विशेष है तो भी भेदभाव। समस्त भेदभावों से परे प्रेम है। संपूर्ण समरसता का नाम प्रेम है🙏*

*👉दोस्तों इस प्रेम को जान लिया तो फिर जानने योग्य कुछ है ही नहीं। अब प्रेम मन तो जान ही नहीं सकता। ये मन का विषय है भी नहीं। शब्दों में कहना पड़ता है कि प्रेम को जान लिया। प्रेम तो निरंतर चल रहा है। उसको नहीं जानोगे तो भी चलेगा। जान जाओगे तो भी चलेगा। बस उस प्रेम को आपके मन ने थोड़ा भी जान लिया कि हां प्रेम मैं जो समझ रहा हूँ वो नहीं है। तो उस अनंत प्रेम की थोड़ी सी बूंदें इस मन को भी मिलना शुरू होती हैं और जब मन को वो अनंत, वो अप्रकट, वो निरंतर चलने वाले प्रेम की कुछ बूंदे मिलती हैं तो मन भी तृप्त हो जाता है। मन की वासनायें धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं। मन कभी भी अपने प्रयासों से शांत नहीं हो सकता। मन को तो कृपा चाहिए🙏*

*👉प्रेम के अलग-अलग व्याख्यान हैं। अलग-अलग शास्त्र में अलग-अलग बातें कही गई हैं। कैसा भी शास्त्र उठा लीजिए, किसी भी संत की वाणी ले आइये, सबने प्रेम को या तो द्वैत स्वरूप से समझाया है या अद्वैत स्वरूप से समझाया है। लेकिन सही मायने में प्रेम नहीं समझा पाये🙏*

*👉प्रेम तो सहज है। निरंतर है। मिला हुआ ही है सबको। लेकिन हम उस प्रेम को छोड़कर चाहत और आकर्षण में घुसे हुए हैं🙏*

*👉अपनी सोच को बदलें ज्ञान की बातें ओर मन की शांति, क्रोध, ज़िद और प्रतिक्रिया आत्म-विनाश के सबसे आसान रास्ते है🙏*

*🙏आज आपका दिन शुभमंगलमय हो🙏*

*🌻🙏🌻सुप्रभात🌻🙏🌻*

: . *गणपति विसर्जन*

          मान्यता है कि गणेशजी ने ही महाभारत ग्रंथ को लिखा था। महर्षि वेदव्यास ने गणेशजी को लगातार 10 दिन तक महाभारत की कथा सुनाई और गणेशजी ने 10 दिनों तक इस कथा को हूबहू लिखा। 10 के बाद वेदव्यासजी ने जब गणेशजी को छुआ तो देखा कि उनके शरीर का तापमान बहुत बढ़ चुका था। वेदव्यासजी ने उन्हें तुरंत कुंड में ले जाकर उनके शरीर के तापमान को शांत किया। तभी से मान्यता है कि गणेशजी को शीतल करने के लिए उनका विसर्जन किया जाता है।

          विसर्जन का नियम इसलिए है कि मनुष्य यह समझ ले कि संसार एक चक्र के रूप में चलता है भूमि पर जिसमें भी प्राण आया है वह प्राणी अपने स्थान को फिर लौटकर जाएगा और फिर समय आने पर पृथ्वी पर लौट आएगा। विसर्जन का अर्थ है मोह से मुक्ति, आपके अन्दर जो मोह है उसे विसर्जित कर दीजिए। आप बप्पा की मूर्ति को बहुत प्रेम से घर लाते हैं उनकी छवि से मोहित होते हैं लेकिन उन्हें जाना होता है इसलिए मोह को उनके साथ विदा कर दीजिए और प्रार्थना कीजिए कि बप्पा फिर लौटकर आएं, इसलिए कहते हैं गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।

          सभी देवी-देवताओं का विसर्जन जल में होता है। जल को नारायण रूप माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है संसार में जितनी मूर्तियाँ इनमें देवी-देवता और प्राणी शामिल हैं, उन सभी में मैं ही हूँ और अन्त में सभी को मुझमें ही मिलना है। जल में मूर्ति विसर्जन से यह माना जाता है कि जल में घुलकर परमात्मा अपने मूल स्वरूप से मिल गए। यह परमात्मा के एकाकार होने का प्रतीक भी है।

          जल का संबंध ज्ञान और बुद्धि से भी माना गया है जिसके कारक स्वयं भगवान गणेश हैं। जल में विसर्जित होकर भगवान गणेश साकार से निराकार रूप में घुल जाते हैं। जल को पंच तत्वों में से एक तत्व माना गया है जिनमें घुलकर प्राण प्रतिष्ठा से स्थापित गणेश की मूर्ति पंच तत्वों में सामहित होकर अपने मूल स्वरूप में मिल जाती है।

          हर साल अनंत चतुर्दशी का दिन बप्पा के भक्तों के लिए बेहद खास होता है। गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक पूरे 10 दिन तक भक्त गणपति को अपने घरों में बैठाते हैं। इस दौरान घरों में लगातार विधिवत पूजा पाठ चलता रहता है। हालांकि कई बार लोग वक्त की कमी के चलते गणपति को डेढ़ दिन, 4 दिन, 5 दिन या 7 वें दिन में ही विसर्जित कर देते हैं। लेकिन गणपति विसर्जन का उपयुक्त समय स्थापना के 11 वें दिन अनंत चतुर्दशी का होता है। गणपति विसर्जन से जुड़े नियम और विधि इस प्रकार हैं -  

  "*गणपति विसर्जन की पूजा*"

          विसर्जन के दिन परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ मिलकर आरती करनी चाहिए। आरती में गणपति को 5 चीजें- दीप, फूल, धूप, सुगंध और नैवेद्य आदि चढ़ाए जाते हैं। आरती करने के बाद भगवान गणेश को भोग लगाया जाता है। भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों के बीच बांट दिया जाता है। आरती और प्रसाद के बाद परिवार का एक सदस्य एकदम धीरे-धीरे गणपति की मूर्ति को थोड़ा आगे बढ़ाता है। ऐसा घर से निकलने के 5 से 10 मिनट पहले किया जाता है। ऐसा करना गणपति को इशारा करता है कि अब विसर्जन का समय आ गया है। 

*गणपति विसर्जन के नियम*"

          गणपति विसर्जन से पहले विधिवत पूजा पाठ करके बप्पा को मोदक का भोग लगाएँ। इसके बाद गणपति को नए वस्त्र पहनाएँ। इसके बाद एक रेशमी कपड़े में मोदक, थोड़े पैसे, दूर्वा घास और सुपारी रखकर उसमें गाँठ लगा दें। इस पोटली को बप्पा के साथ ही बाँध दें। आरती के समय घऱ के सब लोग मिलकर गणेश जी की आरती गाते हुए 'गणपति बाप्पा मोरया' के जयकारे लगाएँ।

          इसके बाद अपने दोनों हाथ जोड़कर अपने मन में बप्पा से क्षमा प्रार्थना करते हुए अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा माँग लें। अब किसी पवित्र जलाशय में पूजा की सभी सामग्री के साथ गणपति का विसर्जन कर दें।

          विसर्जन के नियम है कि जल में देवी-देवताओं की प्रतिमा को डुबोया जाता है। इसके लिए श्रद्धालु नदी, तालाब, कुण्ड, सागर में प्रतिमा को विसर्जित कर सकते हैं। महानगरों में जहाँ नदी, तालाब तक जाना कठिन होता है वहाँ लोग जमीन खोदकर उसमें जल भरकर प्रतिमा को विसर्जित कर लेते हैं। अगर आपके पास छोटी प्रतिमा है तो घर के किसी बड़े बर्तन में भी प्रतिमा विसर्जित कर सकते हैं। बस ध्यान रखना चाहिए कि इस जल में पैर न लगे। इस जल को गमले में भी डाल सकते हैं।

: 🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉  

🌄सुप्रभातम🌄

🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓

🌻शनिवार, ०६ सितम्बर २०२५🌻

सूर्योदय: 🌄 ०६:१२

सूर्यास्त: 🌅 ०६:३८

चन्द्रोदय: 🌝 १७:५०

चन्द्रास्त: 🌜२९:१३

अयन 🌘 दक्षिणायणे (उत्तरगोलीय)

ऋतु: 🏔️ शरद

शक सम्वत: 👉 १९४७ (विश्वावसु)

विक्रम सम्वत: 👉 २०८२ (सिद्धार्थी)

मास 👉 भाद्रपद 

पक्ष 👉 शुक्ल 

तिथि 👉 चतुर्दशी (२५:४१ से पूर्णिमा)

नक्षत्र 👉 धनिष्ठा (२२:५५ से शतभिषा)

योग 👉 अतिगण्ड (११:५२ से सुकर्मा)

प्रथम करण 👉 गर (१४:३१ तक)

द्वितीय करण 👉 वणिज (२५:४१ तक)

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॥ गोचर ग्रहा: ॥ 

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सूर्य 🌟 सिंह 

चंद्र 🌟 कुम्भ (११:२१ से)

मंगल 🌟 कन्या (उदित, पूर्व, मार्गी)

बुध 🌟 सिंह (उदय, पूर्व, मार्गी)

गुरु 🌟 मिथुन (उदित, पूर्व, मार्गी)

शुक्र 🌟 कर्क (उदित, पश्चिम, मार्गी)

शनि 🌟 मीन (उदय, पूर्व, वक्री)

राहु 🌟 कुम्भ 

केतु 🌟 सिंह

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शुभाशुभ मुहूर्त विचार

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अभिजित मुहूर्त 👉 ११:५० से १२:४०

अमृत काल 👉 १२:५० से १४:२३

रवि योग 👉 ०५:५६ से २२:५५

विजय मुहूर्त 👉 १४:२१ से १५:१२

गोधूलि मुहूर्त 👉 १८:३३ से १८:५६

सायाह्न सन्ध्या 👉 १८:३३ से १९:४२

निशिता मुहूर्त 👉 २३:५२ से २४:३८

राहुकाल 👉 ०९:०६ से १०:४०

राहुवास 👉 पूर्व

यमगण्ड 👉 १३:५० से १५:२४

दुर्मुहूर्त 👉 ०५:५६ से ०६:४७

होमाहुति 👉 चन्द्र

दिशा शूल 👉 पूर्व

अग्निवास 👉 पाताल (२५:४१ से पृथ्वी)

भद्रावास 👉 मृत्यु (२५:४१ से) 

चन्द्र वास 👉 दक्षिण (पश्चिम ११:२१ से) 

शिववास 👉 भोजन में (२५:४१ से श्मशान में)

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☄चौघड़िया विचार☄

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॥ दिन का चौघड़िया ॥ 

१ - काल २ - शुभ

३ - रोग ४ - उद्वेग

५ - चर ६ - लाभ

७ - अमृत ८ - काल

॥रात्रि का चौघड़िया॥ 

१ - लाभ २ - उद्वेग

३ - शुभ ४ - अमृत

५ - चर ६ - रोग

७ - काल ८ - लाभ

नोट👉 दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 

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शुभ यात्रा दिशा

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पश्चिम-दक्षिण (वायविंडिंग अथवा तिल मिश्रित चावल का सेवन कर यात्रा करें)

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तिथि विशेष

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पंचक आरम्भ ११:२१ से, अनन्त चतुर्दशी व्रत, गणेश विसर्जन आदि।

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आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 

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आज २२:५५ तक जन्मे शिशुओ का नाम धनिष्ठा नक्षत्र के द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (गी, गू, गे) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम शतभिषा नक्षत्र के प्रथम एवं द्वितीय चरण अनुसार क्रमशः (गो, सा) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।

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उदय-लग्न मुहूर्त

सिंह - २८:२९ से ०६:४८

कन्या - ०६:४८ से ०९:०६

तुला - ०९:०६ से ११:२७

वृश्चिक - ११:२७ से १३:४६

धनु - १३:४६ से १५:५०

मकर - १५:५० से १७:३१

कुम्भ - १७:३१ से १८:५७

मीन - १८:५७ से २०:२०

मेष - २०:२० से २१:५४

वृषभ - २१:५४ से २३:४९

मिथुन - २३:४९ से २६:०४+

कर्क - २६:०४+ से २८:२५+

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पञ्चक रहित मुहूर्त

रज पञ्चक - ०५:५६ से ०६:४८

शुभ मुहूर्त - ०६:४८ से ०९:०६

चोर पञ्चक - ०९:०६ से ११:२७

शुभ मुहूर्त - ११:२७ से १३:४६

रोग पञ्चक - १३:४६ से १५:५०

शुभ मुहूर्त - १५:५० से १७:३१

मृत्यु पञ्चक - १७:३१ से १८:५७

अग्नि पञ्चक - १८:५७ से २०:२०

शुभ मुहूर्त - २०:२० से २१:५४

मृत्यु पञ्चक - २१:५४ से २२:५५

अग्नि पञ्चक - २२:५५ से २३:४९

शुभ मुहूर्त - २३:४९ से २५:४१+

रज पञ्चक - २५:४१+ से २६:०४+

शुभ मुहूर्त - २६:०४+ से २८:२५+

चोर पञ्चक - २८:२५+ से २९:५७+

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आज का राशिफल

🐐🐂💏💮🐅👩

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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

आज का दिन आपके लिए कोई नई समस्या लेकर आएगा। बुद्धि विवेक होते हुए भी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाएंगे। घर में संतान के कारण कोई ना कोई परेशानी लगी रहेगी। संतानों का अनापेक्षित अथवा उद्दंड व्यवहार मन को दुखी कर सकता है। कार्य क्षेत्र पर आपका कुशल व्यवहार एवं निर्णय लेने की क्षमता लोगों को पसंद आएगी लेकिन लाभ प्राप्त करने के लिए सहयोगी नहीं बनेगी। आज किसी की खुशामद अथवा कुछ उटपटांग कार्य करके ही लाभ प्राप्त किया जा सकता है। परंतु इससे शत्रु वृद्धि भी होनी संभव है। संध्या के आस-पास दिन भर की मेहनत रंग लाएगी धन लाभ किसी ना किसी साधन से अवश्य होगा। पारिवारिक जीवन में भाई बंधुओं के अतिरिक्त अन्य किसी से कोई अपेक्षा ना रखें। मध्यान्ह बाद सुखोपभोग में वृद्धि होने से मानसिक राहत मिलेगी सेहत मानसिक तनाव को छोड़ सामान्य ही रहेगी।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

आज के दिन परिवार अथवा कार्य क्षेत्र पर पूर्व में बरती किसी अनियमितता के चलते अव्यवस्था अथवा अन्य उलझन बढ़ने का भय दिन के आरंभ से ही लगा रहेगा। दिन के आरंभ में पूर्व की गतिविधियों का अवलोकन करेंगे इन में सुधार करने का निर्णय लेंगे लेकिन परिस्थितिवश ऐसा कर नहीं पाएंगे। कार्यक्षेत्र पर आज किसी न किसी रूप में परिजन अथवा अन्य पैतृक संबंधी ही बाधक बन सकते हैं। लाभ कमाने के लिए आज जोखिम से ना घबराए जिस कार्य में झंझट लगेगा उससे बाद में कुछ ना कुछ लाभ अवश्य मिलेगा। धन की आमद संतोषजनक हो जाएगी। लेकिन बिना मानसिक एवं बौद्धिक परिश्रम किए सफल नहीं हो सकते। दांपत्य जीवन में आज सुख की कमी अनुभव होगी धैर्य से आज का दिन बताए रात्रि के बाद वातावरण में स्वत ही परिवर्तन आने लगेगा। किसी कुटुंबी जन के कारण यात्रा हो सकती है। सेहत में छुटपुट विकार लगे रहेंगे।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)

आज का दिन बीते कल की तुलना में राहत भरा रहेगा सेहत में थोड़ा सुधार आएगा। फिर भी सेहत से संबंधित लापरवाही से बचें खासकर ज्यादा परिश्रम वाले कार्य ना करें। परिवार में आज पैतृक कारणों से खींचतान लगी रहेगी संध्या तक इसको अनदेखा करने का प्रयास करें इसके बाद स्थिति स्वतः ही सुधरने लगेगी कार्य व्यवसाय से आज भी आशा तो काफी लगा कर रखेंगे। लेकिन सोचे कार्य अंत समय में या तो बिगड़ेंगे अथवा आगे के लिए टलेंगे। आज व्यवसाय से संबंधित कोई वादा समय पर पूरा ना करने पर मन में अपमान का भय सताएगा। दैनिक खर्चों की पूर्ति जोड़ तोड़ कर हो ही जाएगी। आज आवश्यकता पड़ने पर जीवनसाथी अथवा किसी अन्य पारिवारिक सदस्य से आर्थिक मदद लेनी पड़ेगी इस कारण ताने भी सुनने को मिलेंगे। पेट, मूत्र संबंधित व्याधि अथवा जुखाम से परेशानी हो सकती है। यात्रा टालने का प्रयास करें हानि हो सकती है

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

आज के दिन आप बीते समय से मिल रही निराशा एवं असफलता के कारण धर्म से विमुख हो सकते हैं। दिन के आरंभिक भाग में थोड़ी शांति रहेगी। लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते विविध उलझनों में फंस जाएंगे फिर भी बीते कल की तुलना में आज थोड़ी राहत का अनुभव भी होगा। कार्यक्षेत्र पर किसी पुराने संपर्क द्वारा मिली सहानुभूति जीवन को नई राह दिखाएगी। व्यवसाई वर्ग को अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए अतिरिक्त परिश्रम करना पड़ेगा। लेकिन धन लाभ इकट्ठा ना होकर थोड़ा-थोड़ा होगा इसलिए कार्यक्षेत्र पर अधिक सतर्कता बरतनी पड़ेगी। अन्यथा आपके हिस्से का लाभ एवं कोई नया सौदा किसी प्रतिस्पर्धी को मिल सकता है। पुरानी उधारी एवं अन्य खर्चों के कारण बचत नहीं कर पाएंगे। घरेलू मामलों में अति आवश्यकता होने पर ही अपने विचार रखें छोटी-छोटी बातों पर अनबन हो सकती है। नेत्र संबंधित समस्या अथवा रक्त पित्त विकार उत्पन्न होंगे। अनदेखा ना करें अन्यथा आगे परेशानी बढ़ भी सकती है।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

आज के दिन भी किसी ना किसी प्रसंग को लेकर आपका मन राग-द्वेष से भरा रहेगा। आपकी दिनचर्या भी अन्य दिनों से धीमी रहेगी एक बार किसी कार्य में विलंब होने पर अन्य कार्य भी अव्यवस्थित हो जाएंगे। कार्य क्षेत्र पर स्वयं तो लापरवाही करेंगे अन्य लोगों भी आपकी देखा देख कार्य में विलंब करेंगे। कार्यक्षेत्र पर परिस्थितियां पल-पल में बदलेंगी एक पल जहां से लाभ की संभावना रहेगी अगले ही पल वहां से निराश होना पड़ेगा। आज आप स्वयं के बलबूते निर्णय लें तो कुछ ना कुछ लाभ अवश्य होगा अन्यथा गलत मार्गदर्शन मिलने से हानि ही निश्चित है। कई दिनों से अटके सरकारी कार्य अथवा सरकारी उलझनों में कुटुंब का सहयोग मिलने से मुक्ति मिल सकती है। दांपत्य जीवन में भी अन्य दिनों की अपेक्षा शांति का अनुभव होगा। संध्या के समय उत्तम भोजन मिष्ठान आदि का सुख मिलेगा। सेहत मौसमी बीमारियों के चलते थोड़ी नरम रहेगी।

 

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)

आज का दिन आपके लिए धन-धान्य में वृद्धि कार्य करेगा। आज आपके स्वभाव में सुखोपभोग की इच्छा भी प्रबल रहेगी। इसके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार भी रहेंगे। लेकिन आज विपरीतलिंगी आकर्षण एवं अभद्र भाषा के प्रयोग से बचना होगा अन्यथा सार्वजनिक क्षेत्र पर अपमान के साथ शत्रुओं में वृद्धि भी हो सकती है। कार्य क्षेत्र से आज आश्चर्यजनक रूप से लाभ मिलेगा। जिस कार्य से उम्मीद नहीं रहेगी वह भी धन लाभ करा देगा। सहकर्मियों के प्रति नरम व्यवहार रखें छोटी-छोटी बातों पर शक करना आपको ही परेशानी में डाल सकता है। घरेलू वातावरण कामना पूर्ति करने पर कुछ समय के लिए शांत रहेगा फिर भी परिजन किसी ना किसी बात को लेकर नाराज हो सकते हैं। आज भी शरीर में त्रिदोष के असंतुलन से पीड़ा हो सकती है। यात्रा लाभदायक रहेगी।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)

आज का दिन भी बीते कल की भांति ही मिला-जुला फल देगा। आज दिन के आरंभिक भाग में काम करने का मन नहीं करेगा प्रत्येक कार्य में आलस से करेंगे। कार्यक्षेत्र पर भी विलंब होगा लेकिन थोड़ी देर में ही स्थिति को संभाल लेंगे। आज किसी परिचित को आपसे आर्थिक मदद की आवश्यकता पड़ेगी लेकिन स्वयं की ही स्थिति ठीक ना होने के कारण इसे टालने का प्रयास करेंगे फिर भी परोपकारी स्वभाव रहने के कारण मदद करेंगे। आज तेल संबंधित अथवा दूध से संबंधित उत्पाद भूमि भवन संबंधित कार्य में निवेश निकट भविष्य के लिए लाभदायक रहेगा। पारिवारिक वातावरण छोटी मोटी बातों को छोड़ सामान्य ही रहेगा। माता से कोई मनोकामना पूर्ण होने पर जिद बहस हो सकती है। लेकिन भाई बंधुओं से बहस का सामर्थ नहीं बना पाएंगे। घर में यात्रा की योजना बनेगी शीघ्र ही इस पर खर्च भी करना पड़ेगा। सर्दी जुखाम की परेशानी हो सकती।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

आज दिन के पूर्वार्ध से लेकर संध्या तक आपको विविध प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। किसी भी कार्य को करने का प्रयास करेंगे उसमें आर्थिक कारणों से व्यवधान आएंगे धन का प्रबंध कहीं से कर भी लेंगे तो कोई ना कोई अन्य बाधा कार्य को पूर्ण होने से रोकेगी। कार्यक्षेत्र पर भी प्रतिस्पर्धी हावी रहेगे जिसके चलते आज धन लाभ होते होते अंतिम चरण में या तो टलेगा या आशा से बहुत कम होगा। किसी भी प्रकार के नए कार्य में निवेश से बचे ना ही आज कोई नई वस्तु खरीदें अन्यथा बाद में पछताना पड़ेगा। नौकरीपेशा जातक अधिकारी वर्ग से सतर्क रहें आपकी प्रत्येक गतिविधियों पर नजर लगाए हुए हैं। दांपत्य जीवन में आपके किसी अनैतिक कृत्य को लेकर झगड़ा हो सकता है। पेट में गर्मी होने से अन्य विकार उत्पन्न होंगे। यात्रा में सतर्कता बरतें चोट आदि का भय भी है।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)

आज का दिन आपके लिए बेहतर रहने वाला है। लेकिन आज आपके स्वभाव में स्वार्थ सिद्धि की भावना आवश्यकता से कुछ अधिक ही रहेगी। अपने काम निकालने के लिए परिजनों का सहारा लेंगे जाने-अनजाने किसी पारिवारिक सदस्य का अहित भी कर सकते हैं। स्वभाव में दिखावे की भावुकता रहने से जल्दी से कोई आपके कार्य के लिए मना नहीं करेगा। कार्यक्षेत्र पर भी भाग्य का सहारा मिलने से निश्चित ही धन की आमद होगी। लेकिन किसी सरकारी उलझन अथवा अन्य सरकार संबंधित खर्चे बढ़ने से बचत नहीं कर पाएंगे। कार्यक्षेत्र अथवा कुटुंब में किसी के विपरीत व्यवहार का भी सामना करना पड़ेगा इस को अनदेखा करें अन्यथा अपने मूल उद्देश्य से भटक सकते हैं। आज मौसम जनित बीमारी अथवा छाती के निचले हिस्सों में कुछ ना कुछ समस्या उत्पन्न होगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)

आज का दिन आप व्यर्थ के प्रपंचों में पड़कर खराब करेंगे या तो जल्दी से किसी कार्य को हाथ में नहीं लेंगे लेंगे तो उसमें अपनी मनमानी ही करेंगे। दोपहर तक का समय व्यर्थ की भागदौड़ में खराब होगा इसके बाद का समय आपके लिए लाभदायक रहेगा। लेकिन स्वभाव की लापरवाही एवं व्यवहारिकता की कमी के कारण इसका उचित पूर्ण लाभ नहीं उठा पाएंगे। कार्य क्षेत्र पर लोग आपकी उदारता का अनुचित फायदा उठा सकते हैं। सहकर्मी एवं अधिकारी वर्ग भी आपके ऊपर सामर्थ्य से अधिक बोझ डालेंगे जिससे सुविधा अनुभव होगी। संध्या के आसपास किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता मिलने पर दिनभर की उलझनों को भूल जाएंगे। पारिवारिक वातावरण में थोड़ी बहुत छींटा कशी लगी रहेगी फिर भी कोई आपके सामने सर उठाने की हिम्मत नहीं करेगा। सर्दी जुखाम से परेशानी होगी।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)

आज का दिन आपके अनुकूल है। बीते हुए कल की तुलना में आज उसके विपरीत फल मिलेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र पर अपने शुभ आचरण एवं परोपकारी स्वभाव के चलते सम्मान के पात्र बनेंगे। कार्यक्षेत्र पर भी अपने बुद्धि विवेक से बिगड़े कार्य को बनाने की क्षमता रखेंगे। जिससे अधिकारी वर्ग आपसे प्रसन्न रहेंगे लेकिन सहकर्मी क्यों में ईर्ष्या का भाव उत्पन्न होगा। पठन पाठन अथवा इससे संबंधित किसी अन्य व्यवसाय से जुड़े जातकों को मध्यान्ह के समय अपमानित होना पड़ेगा। लेकिन संध्या के समय कुछ विशेष लाभ होने से इस को भूल जाएंगे। आप अपने पराक्रम से जितना भी धन कमाएंगे वह किसी न किसी कार्य में खर्च हो जाएगा। भविष्य के लिए बचत ना कर पाने का दुख होगा। घर परिवार में आनंद का वातावरण रहेगा। परिजन किसी पर्यटन क्षेत्र की यात्रा के लिए जिद कर सकते हैं। गिरने कटने सके चोट का भय है सतर्कता से कार्य करें।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

आज का दिन भी आपके लिए प्रतिकूल फलदायक है। बीते दिनों जिन लोगों से आप को किसी न किसी रूप में मानसिक कष्ट मिल रहा था आज उनको अपने हिसाब से उत्तर देंगे। जिस वजह से आज भी किसी न किसी का विरोध देखना पड़ेगा। कार्यक्षेत्र पर मध्यान तक व्यर्थ की गतिविधियों में लिप्त रहेंगे जिनका दैनिक कार्यों से कोई लेना-देना नहीं रहेगा। दोपहर के बाद किसी वरिष्ठ सामाजिक व्यक्ति का सहयोग मिलने से अपनी योजनाओं को दिशा दे पाएंगे लेकिन धन की आमद आज आवश्यकता से भी कम ही होगी। कोई अक्समात कार्य आने से किसी से उधार भी लेने की नौबत आ सकती है। पारिवारिक वातावरण कुछ समय को छोड़ ठीक ही रहेगा। मन में प्रतिशोध की भावना ना रखें अन्यथा फल विपरीत भी हो सकते। आज मांसपेशियों अथवा शरीर के जोड़ों संबंधित समस्या हो सकती है।

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: "एक चिकनी मिट्टी का टुकड़ा " 

 

एक चिकनी मिट्टी का टुकड़ा, छोटा सा, सड़क पे पड़ा। 

कब से पड़ा नहीं मालूम, कहा पड़ा नहीं मालूम।

कभी किसी पहिए के नीचे आ जाता, कभी कोई बच्चा ठोकर मार जाता। 

कभी बारिश होती तो नर्म हो जाता और धूप में फिर से कठोर हो जाता। 

उसे अपने आप से कोई शिकायत नहीं थी, क्योंकि उसके पास कोई उम्मीद नहीं थी।

बस यूँ समझ लो के ना उसको कोई बड़ा दुःख था, और ना ही कोई ख़ास सुख था।

पर एक बात उसकी बहुत खास थी, की उसको अपनी औकात अच्छे से याद थी।

फिर एक दिन उसके जीवन में एक मोड़ आया, भाग्य से वो एक कुम्हार के पैर के नीचे आया।

कुम्हार ने उसे कुछ गौर से देखा, और फिर उठाकर सीधे अपने बोरे में फेंका।

घर ले जा पहले मारा पानी का छींटा, फिर मसला, गूंथा और खूब पीटा।

चक्के पे फिर उसे घुमाया, डाल भट्टी में खूब पकाया।

रोता रहा, सुबकता रहा, जलता रहा, सुलगता रहा।

पर अब उसका एक 'दाम' था, और 'दीपक' उसका नाम था।

अब एक मंदिर में वो रहता है, अपनी बाती के संग जलता है।

बस प्रभु के दर्शन करता है और दूर अँधेरा करता है।

क्या था वो और क्या बन गया उसकी समझ नहीं आये,

बस अपने हृदय में कुम्हार को यही बोलता जाये।

कि "गुरु गोबिंद दोउ खड़े, का के लागू पाय,

बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो मिलाये।"

🌼🍃 शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🍃🌼

: कृष्ण भक्त की कथा

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बहुत प्राचीन समय की बात है।एक बहुत ही गरीब कृष्ण भक्त का बेटा अरुण गुरुकुल में पढने जाता था। जितना गरीब परिवार था उतना ही कृष्ण भक्त परिवार था। कहते है कि *निर्धनता ही धर्म की कसौटी है।* उन लोगों की भगवान कृष्ण मे अटुट आस्था थी। परिवार मे स्नेह एवं सहयोग की अमृत धारा बहती थी,रुखी सुखी रोटी बाँटकर भगवान का प्रसाद मानकर खा लेते थे । कोई भी कार्य भगवान कृष्ण कन्हैया का नाम ले कर ही शुरु करते थे।

एक बार गुरूजी बच्चो से बोले कि कल वार्षिकोत्सव है,सभी बच्चे अपने अपने घर से दुध लायेंगें। वार्षिकोत्सव सुनकर सभी बच्चे काफी खुश थे। लेकिन अरुण के चेहरे पर कोई खुशी नजर नही आ रही थी, जबकि वह पढने में तेज था।उसके चेहरे पर मायुसी साफ नजर आ रही थी। कारण साफ था। वह सोचते जा रहा था कि वह गुरुकुल के लिए दुध कहाँ से लाएगा।

अरुण मासूमियत भरे लहजे मे अपने माताजी एवं पिताजी से गुरुकुल के लिए दुध की माँग करता है। अरुण की माँ बोली "बेटा हम लोगो के पास गाय माता तो है नही फिर हम लोग दुध कहाँ से लाएगे ,फिर भी हमलोंग कहीं से दुध की व्यवस्था करने का प्रयास करते है।

दुध की ब्यवस्था न होने पर अरुण के पिताजी बोले कि बेटा अपनी असमर्थता बताकर गुरूजी से माफी माँग लेना। दुध की व्यवस्था हम लोग नही कर सके।

अगले दिन माताजी एवं पिताजी के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद ले कर अरुण गुरुकुल चल दिया। उसके सहपाठी बच्चे अपने सुविधानुसार छोटे बड़े पात्र में दुध लेकर हँसी खुशी से बार्षिकोत्सव मनाने की खुशी मे गुरूकुल जा रहे थे। उन बच्चों को हँसता खेलता देखकर बालक मन अरुण और मायूस हो गया।

रास्ते में पेड की छाया में अरुण बैठकर सोचने लगा। हे भगवान मेरे माता - पिता तो आपकी इतनी पुजा पाठ करते है फिर इतना गरीब क्यों है। यह सोचते सोचते अरुण रोने लगा।

उसी समय एक नन्हा सा छोटा सा ग्वालबाल अपनी गायों को चराने उधर से निकला । वह ग्वाला अरुण को रोता देखकर उससे रोने का कारण पूछा। अरुण ने दुधवाली बात उस ग्वालबाल को बता दी । ग्वालबाल हँसते हुए बोला कि बस इतनी सी बात है, मै तुम्हारे लिए अभी दुध की व्यवस्था कर देता हूँ। ग्वालबाल दौड़कर गया और गाय का दुध एक छोटी सी लोटकी में दुहकर अरुण को दे दिया और बोला कि जा कर अपने गुरूजी को दे देना ।

थोड़ा सा ही सही दुध मिलने की खुशी मे अरुण अपने गुरूजी से बोला कि गुरूजी मै दुध कहाँ रखुँ । गुरूजी छोटी सी लोटकी में दुध देखकर बोले ले जाकर जिस वर्तन में दुध रखा हो उसमें रख दो।

अरुण जिस बर्तन में लौटकी का दुध डालता वह पात्र भर जाता लेकिन लोकटी जस का तस दुध से भरी ही रहती । सभी पात्र भरजाने पर अरुण गुरूजी से निवेदन किया कि गुरूजी सभी पात्र दुध से भर गये है फिर मै ये दुध कहाँ रखुँ।

गुरुजी छोटी सी लोटकी के तरफ नजर दौडाये और झुझलाकर बोले कि जहाँ खाली जगह मिले रख दो ।

अरुण एक बार पुनःचारो तरफ देखकर जहाँ भी बर्तन मे थोडी जगह देखता लोटकी का दुध उसमें डाल देता । फिर भी लोटकी दुध से भरी की भरी रह गयी ।

अरुण पुनःगुरुजी से निवेदन किया कि सभी पात्र में थोडी भी जगह नही है । अरुण को गुरूजी साथ लेकर गये और देखे कि पुरा का पुरा सभी पात्र सचमुच दुध से भरा पडा था।

गुरुजी जिस गिलास से पानी पीते थै उसे लेकर अरुण से बोले कि इसमें दुध डाल दो ।अरुण उस मे दुध डाल दिया ,गिलास भी दुध से भर गयी फिर भी लोटकी दुध से भरी की भरी रह गयी। यह देख गुरुजी आश्चर्यचकित रह गये ।

गुरूजी के पुछने पर अरुण ने दुध कहाँ से लिया था, कौन दिया पुरा बृतान्त कह सुनाया । गुरुजी अरुण को लेकर उसजगह गये जहाँ वह ग्वालबाल अरुण को दुध दिया था ,लेकिन वहाँ न तो गायें थी न तो ग्वालबाल।

*गुरुजी बोले धन्य हैं तुम्हारे कृष्ण भक्त माता पिता और धन्य हो तुम।*

*भगवान कहते हैं कि हम भक्तन के भक्त हमारे।*

*बोलो ---*

*श्रीकृष्ण ! गोविन्द ! हरे ! मुरारे ! हे नाथ ! नारायण ! वासुदेव!*

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: श्रीमहाभारतम् 

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।। श्रीहरिः ।।

* श्रीगणेशाय नमः *

।। श्रीवेदव्यासाय नमः ।।

(अंशावतरणपर्व)

द्विषष्टितमोऽध्यायः 

महाभारत की महत्ता...(दिन 178)

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जनमेजय उवाच

कथितं वै समासेन त्वया सर्वं द्विजोत्तम । महाभारतमाख्यानं कुरूणां चरितं महत् ।। १ ।।

जनमेजयने कहा-द्विजश्रेष्ठ ! आपने कुरुवंशियोंके चरित्ररूप महान् महाभारत नामक सम्पूर्ण इतिहासका बहुत संक्षेपसे वर्णन किया है ।। १ ।।

कथां त्वनघ चित्रार्था कथयस्व तपोधन । विस्तरश्रवणे जातं कौतूहलमतीव मे ।। २ ।।

निष्पाप तपोधन ! अब उस विचित्र अर्थवाली कथाको विस्तारके साथ कहिये; क्योंकि उसे विस्तारपूर्वक सुननेके लिये मेरे मनमें बड़ा कौतूहल हो रहा है ।। २ ।।

स भवान् विस्तरेणेमां पुनराख्यातुमर्हति न हि तृप्यामि पूर्वेषां शृण्वानश्चरितं महत् ।। ३ ।।

विप्रवर! आप पुनः पूरे विस्तारके साथ यह कथा सुनावें। मैं अपने पूर्वजोंके इस महान् चरित्रको सुनते-सुनते तृप्त नहीं हो रहा हूँ ।। ३ ।।

न तत् कारणमल्पं वै धर्मज्ञा यत्र पाण्डवाः । अवध्यान् सर्वशो जघ्नुः प्रशस्यन्ते च मानवैः ।। ४ ।।

सब मनुष्योंद्वारा जिनकी प्रशंसा की जाती है, उन धर्मज्ञ पाण्डवोंने जो युद्धभूमिमें समस्त अवध्य सैनिकोंका भी वध किया था, इसका कोई छोटा या साधारण कारण नहीं हो सकता ।। ४ ।।

किमर्थं ते नव्याघ्राः शक्ताः सन्तो ह्यनागसः ।

प्रयुज्यमानान् संक्लेशान् क्षान्तवन्तो दुरात्मनाम् ।। ५ ।।

नरश्रेष्ठ पाण्डव शक्तिशाली और निरपराध थे तो भी उन्होंने दुरात्मा कौरवोंके दिये हुए महान् क्लेशोंको कैसे चुपचाप सहन कर लिया? ।। ५ ।।

कथं नागायुतप्राणो बाहुशाली वृकोदरः ।

परिक्लिश्यन्नपि क्रोधं धृतवान् वै द्विजोत्तम ।। ६ ।।

द्विजोत्तम ! अपनी विशाल भुजाओंसे सुशोभित होनेवाले भीमसेनमें तो दस हजार हाथियोंका बल था। फिर उन्होंने क्लेश उठाते हुए भी क्रोधको किसलिये रोक रखा था? ।। ६ ।।

कथं सा द्रौपदी कृष्णा क्लिश्यमाना दुरात्मभिः । शक्ता सती धार्तराष्ट्रान् नादहत् क्रोधचक्षुषा ।। ७ ।।

द्रुपदकुमारी कृष्णा भी सब कुछ करनेमें समर्थ, सती-साध्वी देवी थीं। धृतराष्ट्रके दुरात्मा पुत्रोंद्वारा सतायी जानेपर भी उन्होंने अपनी क्रोधपूर्ण दृष्टिसे उन सबको जलाकर भस्म क्यों नहीं कर दिया? ।। ७ ।।

कथं व्यसनिनं द्युते पार्थों माद्रीसुतौ तदा ।

अन्वयुस्ते नरव्याघ्रा बाध्यमाना दुरात्मभिः ।। ८ ।।

कुन्तीके दोनों पुत्र भीमसेन और अर्जुन तथा माद्री-नन्दन नकुल और सहदेव भी उस समय दुष्ट कौरवोंद्वारा अकारण सताये गये थे। उन चारों भाइयोंने जुएके दुर्व्यसनमें फँसे हुए राजा युधिष्ठिरका साथ क्यों दिया? ।। ८ ।।

कथं धर्मभृतां श्रेष्ठः सुतो धर्मस्य धर्मवित् । अनर्हः परमं क्लेशं सोढवान् स युधिष्ठिरः ।। ९ ।।

धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ धर्मपुत्र युधिष्ठिर धर्मके ज्ञाता थे, महान् क्लेशमें पड़नेयोग्य कदापि नहीं थे, तो भी उन्होंने वह सब कैसे सहन कर लिया? ।। ९ ।।

कथं च बहुलाः सेनाः पाण्डवः कृष्णसारथिः ।

अस्यन्नेकोऽनयत् सर्वाः पितृलोकं धनंजयः ।। १० ।।

भगवान् श्रीकृष्ण जिनके सारथि थे, उन पाण्डुनन्दन अर्जुनने अकेले ही बाणोंकी वर्षा करके समस्त सेनाओंको, जिनकी संख्या बहुत बड़ी थी, किस प्रकार यमलोक पहुँचा दिया? ।। १० ।।

एतदाचक्ष्व मे सर्वं यथावृत्तं तपोधन ।

यद् यच्च कृतवन्तस्ते तत्र तत्र महारथाः ।। ११ ।।

तपोधन ! यह सब वृत्तान्त आप ठीक-ठीक मुझे बताइये। उन महारथी वीरोंने विभिन्न स्थानों और अवसरोंमें जो-जो कर्म किये थे, वह सब सुनाइये ।। ११ ।।

वैशम्पायन उवाच

क्षणं कुरु महाराज विपुलोऽयमनुक्रमः ।

पुण्याख्यानस्य वक्तव्यः कृष्णद्वैपायनेरितः ।। १२ ।।

वैशम्पायनजी बोले- महाराज! इसके लिये कुछ समय नियत कीजिये; क्योंकि इस पवित्र आख्यानका श्रीव्यासजीके द्वारा जो क्रमानुसार वर्णन किया गया है, वह बहुत विस्तृत है और वह सब आपके समक्ष कहकर सुनाना है ।। १२ ।।

महर्षेः सर्वलोकेषु पूजितस्य महात्मनः ।

प्रवक्ष्यामि मतं कृत्स्नं व्यासस्यामिततेजसः ।। १३ ।।

सर्वलोकपूजित अमित तेजस्वी महामना महर्षि व्यासजीके सम्पूर्ण मतका यहाँ वर्णन करूँगा ।। १३ ।।

क्रमशः...

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: संक्षिप्त श्रीस्कन्द महापुराण 

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ब्राह्मखण्ड (धर्मारण्य-माहात्म्य)

सदाचार - शौच, स्नान, सन्ध्या, तर्पण, बलिवैश्वदेव आदि का महत्त्व...(भाग 4) 

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नृपश्रेष्ठ ! अब मैं प्रसंगवश स्नानकी विधिका वर्णन करता हूँ; क्योंकि विद्वानोंने विधिपूर्वक किये हुए स्नानका महत्त्व साधारण स्नानसे सौगुना अधिक बताया है। विशुद्ध कुशा लेकर पवित्र स्थानपर रखे और आचमन करके स्नान करे। हाथमें कुश लेकर, शिखा बाँधकर जलके भीतर प्रवेश करे और अपनी शाखामें बतायी हुई विधिके अनुसार विधिपूर्वक स्नान करे। इस प्रकार स्नानकार्य समाप्त करके वस्त्र निचोड़कर दो नूतन वस्त्र धारण करे। फिर आचमन करके कुश हाथमें लिये हुए ही प्रातः कालकी सन्ध्या करे। अपने मनको दृढ़तापूर्वक संयममें रखकर प्राणायाम करनेवाला ब्राह्मण दिन और रातमें किये हुए पापोंसे तत्काल मुक्त हो जाता है। यदि मनको संयममें रखकर दस या बारह बार प्राणायाम कर लिये जायँ तो ऐसा मानना चाहिये कि उस पुरुषने बड़ी भारी तपस्या कर ली। व्याहृति और प्रणवके साथ किये हुए सोलह प्राणायाम यदि प्रतिदिन होते रहें तो एक मासमें वे भ्रूणहत्या करनेवाले पापीको भी पवित्र कर देते हैं। जैसे पार्थिव धातुओंका मल आगमें तपानेसे जल जाता है, उसी प्रकार इन्द्रियोंद्वारा किये हुए दोष प्राणायामसे भस्म हो जाते हैं। नृपश्रेष्ठ ! प्रणव परब्रह्म है। प्राणायाम उत्तम तपस्या है और गायत्रीसे बढ़कर दूसरा कोई पवित्र करनेवाला मन्त्र नहीं है। मनुष्य मन, वाणी और क्रियाद्वारा रातमें जो पाप करता है, वह प्रातः सन्ध्याकी उपासना करते हुए प्राणायामोंके द्वारा शुद्ध कर देता है। इसी प्रकार मन, वाणी और क्रियाद्वारा दिनमें जो पाप करता है, उसे सायंकालकी सन्ध्योपासनामें प्राणायामोंके द्वारा नष्ट कर डालता है। सायंकालकी सन्ध्या करनेवाला पुरुष दिनमें किये हुए पापका नाश करता है। जो प्रातःकाल और सायंकालकी सन्ध्या नहीं करता, वह समस्त ब्राह्मणोचित कर्मोंसे शूद्रकी भाँति बाहर कर देने योग्य है।

क्रमशः...

शेष अगले अंक में जारी

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: आनन्दरामायणम्

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श्रीसीतापतये नमः

श्रीवाल्मीकि महामुनि कृत शतकोटि रामचरितान्तर्गतं ('ज्योत्स्ना' हृया भाषा टीकयाऽटीकितम्)

(सारकाण्डम्)

सप्तम सर्गः

( राम का दण्डकवन में प्रवेश))...(दिन 48)

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और यदि वाण से मारकर ला दो तो मैं उसके चमड़े की चोली बनाऊँगी। सीता के वचन सुन तथा कुछ सोच-समझकर रघूत्तम राम सीता की रक्षा के लिये भाई लक्ष्मण को नियुक्त करके शीघ्र मृगके पोछे चल दिये। हरिण भी रामके आगे दौड़ता हुआ उन्हें बहुत दूर जंगलमें दौड़ा ले गया ॥ ९० ॥ ६१ ॥ 

वहां बाण से घायल होकर वह जोर से राम के स्वर में चिल्लाने लगा 'हा लक्ष्मण ! मै बनम मारा गया, शीघ्र आओ' ।। १२ ।।

 इतना कहकर मारीच रक्त वमन करता हुआ मर गया। उस शब्द को सुनकर जानकी ने लक्ष्मण को जाने के लिये कहा ॥ ६३ ॥ 

लक्ष्मण बोले-हे सीते! यह राम का वाक्य नहीं है, मत डरो। सीता फिर कहने लगीं कि में अव तुम्हारे अभिप्राय को जान गयी ॥ ६४ ॥ 

तुम भरत के कहने के अनुसार राम का मरण अथवा राम के मर जाने पर मुझे भोगना चाहते हो। परन्तु याद रखो, मैं तुम्हारी अभिलाषा पूरी नहीं होने दूंगी और अभी मर जाऊँगी ।। ६५ ।।

सीता के इस वचनको सुनकर सुमित्रापुत्र लक्ष्मण जानकी से बोले- हे माता ! मेरी बात सुनो ॥ ६६ ॥ 

राम की आज्ञा से तुम्हारी रक्षा में तत्पर मुझको तुमने जो वाणीस्थ्यी बाणों से ताडित किया है, उसका फल तुम शीघ्र पाओगी ॥ ६७ ॥ 

तो भी मेरे कहे हुए इस हितकारी वचन को सुन लो। मैं धनुष से तुम्हारे चारों ओर यह रेखा खींचे देता हूँ ॥ ६८ ॥ 

यह तुम्हारी रक्षा के लिए और दुष्टों के लिये दुर्लघनीय तथा महान् भय उत्पन्न करने वाली होगी। प्राणों के कण्ठ में आ जाने पर भी तुम इस रेखा का उल्लंघन नहीं करना ।। १६ ।। 

ऐसा कहकर धनुष की कोर से लक्ष्मण ने पञ्चवटी के बाहर खाई की भाँति सीता की चारों ओर रेखा खींच दी ।। १०० ।। 

तदनन्तर सीता को प्रणाम करके चुपचाप शीघ्र राम की ओर चल दिये। इसी समय रावण भिक्षुक का रूप धारण करके पंचवटी के द्वार पर जाकर रेखा के बाहर खड़ा हो गया और "नारायणहरि" कहकर चुप हो रहा ॥ १०१ ॥ १०२ ॥ 

तब छायामयी सीता उसको भिक्षा देनेके लिये बाहर आयी और हाथ बढ़ाकर भिक्षु से 'भिक्षा लो' ऐसा कहा ॥ १०३ ॥ 

तब कमल के समान नेत्रों वाली सीता से भिक्षु ने कहा कि मैं रेखा के भीतर से फ़ेंकी हुई भीख नहीं लेता ॥ १०४ ॥ 

यदि तुम राम के गृहस्थाश्रम की रक्षा करना चाहती होओ तो रेखा के बाहर आकर भिक्षा दो ॥ १०५ ॥ 

भिक्षु के इस वचन को सुनकर 'कहीं पाप न लगे' इस शंका से बायें पाव को रेखा से बाहर रख और लम्बा हाथ करके ।। १०६ ॥ 

क्रमशः...

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: कमल के अद्धभुत रहस्य

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शाश्वत सांस्कृतिक का अद्धभुत प्रतीक है "कमल"

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भारतीय संस्कृति में प्रतीकों का अत्यधिक महत्व है। यहाँ प्रतीकों के माध्यम से अपने इष्ट एवं लक्ष्य कि उपासना - आराधना का विधान है। इस क्रम में कमल एक शाश्वत -सांस्कृतिक प्रतीक है। कमल भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों ही तथ्यों का प्रतीक माना गया है। यह श्रृंगार एवं वैराग्य तथा सृष्टि व प्रलय के रूप में वर्णित होता है। यह असीम-अनंत आकाश के साथ प्राणी के सूक्ष्म अन्तः कारण का भी प्रतीक है। इसे जल, पृथ्वी, आकाश, अग्नि, सूर्य, चंद्रमा एवं ब्रह्माण्ड के तत्व के रूप में भी स्वीकारा गया है। शास्त्रकारों के अनुसार यह पवित्रता, निर्मलता, कोमलता, सृजन जीवन, सौंदर्य, सुरभि एवं अमरता का प्रतीक है। इसके गुण शोभा, स्नेह, आकर्षण दिव्यता, प्रेम, ज्ञान, ऊर्जा, मंगलिता, भव्यता, शीतलता आदि है। कमल के इन्हीं गुणों के कारण उसे विभिन्न धर्मों में सम्मानपूर्वक प्रतिष्ठा मिली है। यही कारण है कि इसकी महत्त्व वैदिक काल से लेकर समय तक अक्षुण्ण है। 

कमल शब्द संस्कृत की श्कम धातु से बना है। श्कम का तात्पर्य है जल और अल का अर्थ है - अकलंक कृत करे वह कमल है। पदम् इसका प्रसिद्ध पर्याय है। जल से उत्पन्न होने के कारण जल कि पर्यायवाची शब्दों के साथ ज, जात अथवा जन्य प्रत्यय लगाने से कमल का पर्याय बन जाता है। इसी तरह रुह प्रत्यय का अर्थ है, अंकुरित और विकसित होना। इसी विशेषता के कारण इसे जलोरुह, सरसीरुह आदि नाम से जाना जाता है। कमल के अनेक अर्थ एवं अनेक नाम है। महाप्रलय के जलप्लावन के पश्चात् विष्णु की नाभि से सृष्टि का सृजन माना जाता है। यह पृथ्वी के सृजन का एक मूर्तिमान् रूप है। श्रीमद्भागवत पुराण, मत्स्यपुराण तथा हरिवंशपुराण में नारायण कि नाभि से कमल कि उत्पत्ति का वर्णन विभिन्न अलंकारिक रूपों में हुआ है। 

ऋग्वेद में कई स्थानों पर नीलोत्पल का उल्लेख आया है। यजुर्वेद के एक मन्त्र के अनुसार बालक के माता पिता उसे कंलो कि माला पहनाकर आचार्य कुल में प्रवेश करने ले जाते है। अथर्ववेद में कमल कि दो जातियाँ पुष्कर (नीलकमल ) और पुण्डरीक ( स्वेत कमल ) का उल्लेख आया है। ऋग्वेद में जल से कमल भूमि कि उत्पत्ति का वर्णन है। वाजस्नेयी संहिता में कमल पृथ्वी का द्योतक है। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार- 

ष्आयो वै पुष्कर तारस्मिय्म पर्ण यथा हवाइदम पुष्करम पर्णम्प्स्वध्याहित्मेव-मियम्स्व्वाध्य्हिता सेयं योनि रानेरियम...। 

अर्थात् जल कमल है और पृथ्वी कमलपत्र है। जैसे जल पर कमलपत्र रखा रहता है उसी प्रकार जल पर पृथ्वी ठहरी हुई है। छान्दोग्य उपनिषद् में आचार्य उपकोसल को यह शिक्षा मिली, यथा पुष्कर पलाश आपो न शिल्स्यन्तेमेव विदि पापं कर्म न शिल्स्य्नती इति। अर्थात् जैसे कमल के पत्रों पर जल नहीं रुकता वैसे ही ब्रह्मा को जानने वाले पाप कर्म में लिप्त नहीं होते। 

छांदोग्य उपनिषद् के अष्टम अध्याय में कमल को हृदय का प्रतीक माना गया है। आत्म्बोधोप्निषद में हृदय कमल के सम्बन्ध में कहा गया है - इस हृदय के ब्रह्मपुत्र कमल में प्रकाशित होने वाले दीपक या विद्दुत के समान देवकी पुत्र, मधुसूदन पुंडरीकाक्ष तथा अच्योत विष्णु ब्रह्म ज्ञानियों के हितैषी है। हृदय कमल में रहने वाला ब्रह्मा ही प्रज्ञा स्वरूप प्रज्ञा -मन्त्र तथा प्रज्ञा में ही रहने वाला है। कैव्ल्योप्निसाद में भी कमल का वर्णन आया है इसमें एकांत में पवित्र होकर,सुखासन में बैठकर भक्तिपूर्वक गुरु को नमन करके शोकरहित हृदय कमल का चिंतन करने का उल्लेख है। 

ब्राह्मणोपनिषद् के मतानुसार लोगों को कर्मफल तथा सौभाग्य देने वाले भगवान वामदेव उनके हृदय के अष्टदल कमल में रहते है। अथर्ववेद में गर्भाशय को कमल के समान चित्रित किया गया है। सूक्ष्म जगत में ह्र्त्कामल का उल्लेख योगशास्त्र में विश्त्रतकिया रूप में हुआ है। 

श्रीमद्भागवत् गीता में कमल कि निर्मलता एवं अलिप्तता को इस प्रकार प्रकट किया गया है – 

ब्रम्हान्ध्यकर्मन्शंड त्वय्क्त्वकरोतियह लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रं मिवंभ्सा। 

अर्थात् जो व्यक्ति अपने को ईश्वर में समर्पित करते हुए आशक्ति कि त्याग कर कार्य करता है, वह पाप से उसी प्रकार लिप्त नहीं होता जिस प्रकार जल में रहते हुए कमल पात्र लिप्त नहीं होता। श्री सूक्त में लक्ष्मी को पद्मिनी पद्द्थिता,पद्द्वानो,पद्द्सम्भ्वा आदि नामों से वर्णन किया गया है। गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान् राम के लिए नवकंज लोचन कंजमुख, करकंज पद कंजारुणं के रूप में चित्रित किया है। महाकवि सूरदास ने कृष्ण के सौंदर्य का बखान करते हुए कहा है सुन्दर श्याम कमल दल लोचन सूरदास सुखदाई। मीराबाई कि भावाभिव्यक्ति सुभग शीतल कमल कोमल त्रिविध ज्वालाहरण के रूप में हुई है। 

कमल कि गणना सात्विक आयुधों में की जाती है। ब्रह्मा,लक्ष्मी,गायत्री, भगवान् बुद्ध, शिव आदि देवता कमलासन कहलाते है, मत्स्यपुराण के अनुसार गणेश जी कमल पुष्प को हाथों में धारण करने वाले माने जाते है। श्री शारदा तिलक में भी गणेश जी को कमल से सम्बंधित दर्शाया गया है। शिल्पराज, अष्टभुजी, हेरंब तथा श्री तत्वनिधि ग्रन्थ में भी गणेश जी के हाथों में कमल लिए चित्रित किया गया है। भविष्यपुराण के ब्रह्मपर्व में उल्लेख आता है कि गरुड़ के छोटे भाई अरुण अपने ललाट पर अर्धचन्द्राकार कमल धारण किये भगवान् सूर्य के सारथी का कार्य करते हैं। देवताओं में से सूर्य ही एकमात्र देवता है, जिनके दोनों हाथों में कमल है। सूर्य को कमलबन्धु कमल्वाल्ल्भ आदि कहा जाता है। सूर्य के साथ कमल का विशेष संबंध है। सूर्योदय के साथ कमल खिलता है और सूर्यास्त के समय संकुचित होता है। मत्स्यपुराण व शारदातिलक में सूर्य भगवान् को लाल कमल के आसन पर स्थिर बताया गया है। वास्तुविद्द्यदिपन्व में पृथक-पृथक आदित्य बताये गए हैं। इनमें से आदित्य गौतम, भानुमान, शाचित, भूमकेतु, संतुष्ट, सुवार्णकेतु के हाथों में कमल है। बृहत् संहिता में भी ऐसा ही वर्णन प्राप्त होता है। मिश्र,तिब्बत,चीन जापान तथा अन्य अनेक देशों तथा भाषाओं में सूर्य देवता और कमल के संबंधों पर प्रकाश मिलता है। 

ब्रह्मा सृष्टिकर्ता हैं। मत्स्यपुराण के अनुसार ब्रह्मा का वर्ण कमल के भीतरी भाग के समान अरुण है। बृहत्संहिता में ब्रह्मा को कमलासन पर स्थिर कमण्डलु लिए हुए दो भुजो तथा चार मुख वाला दर्शाया गया है। विष्णु धर्मोत्तर पुराण में ब्रह्मा को कमलासन पर तथा विष्णु पुराण में विष्णु की नाभि का वर्णन है। ब्रह्मपुराण एवं पद्मपुराण में पुष्कर तीर्थ का संबंध भी कमल से किया गया है। स्कंदपुराण में ततो अंगुष्ठ मात्रस्तु पुरुषो दृश्यते जनैः अर्थात् कमल के मध्य में परम पुरुष अंगुष्ठ परिमाण में दृश्यमान होता है। 

विष्णु पोषण के देवता है। विष्णु के पद्म का नाम पुण्डरीक है। भगवान विष्णु के सहस्र नामों के अंतर्गत पुष्कराक्ष, पद्मनाभ, पुंडरीकाक्ष का वर्णन आता है। इसके अलावा भगवान विष्णु को कमलाकार, कमलनयन आदि भी कहा जाता है। रूप मंडल ग्रन्थ में विष्णु की सभी चौबीस मूर्तियों की भुजाओं में कमल दर्शाया गया है। वैश्नवजन बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार मानते है। बृहत्संहिता में भगवान बुद्ध को पद्मासन पर बैठे हुए वर्णित किया गया है। विष्णु धर्मोत्तर व अग्निपुराण में भी भगवान बुद्ध को पद्मासन वर्णित किया गया है। शिव कल्याण के देवता है। शिव जी के हाथों में भी कही कही कमल दर्शाया गया हैं। 

कमल से अत्याधिक सम्बन्धित देवी महालक्ष्मी है। ये कमल के आसन पर उपस्थित है, उनके हाथों में कमल है, उनके गले में कमलों की माला है और उनके सब अंगों की उपमा कमल से दी जाती है। श्री मद भगवत् पुराण, मार्कंडेय पुराण, दुर्गा सप्तशती तथा अन्य अनेक ग्रंथों में लक्ष्मी को कमल से अलंकृत किया गया है। देवमूर्ति प्रकनम में द्वादश सरस्वती स्वरूपों का वर्णन है। इन सभी स्वरूपों के चारों हाथों में कमल है। इसी तरह दुर्गा एवं गायत्री आदि अनेक देवियों को कमल से विभूषित किया गया है। 

तांत्रिक विद्या के सबसे प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय यंत्र श्रीयंत्र है। भगवान शंकराचार्य की सौंदर्य लहरी के अनुसार श्रीचक्र या यंत्र में दो पद्दचक्र है एक अष्टदल कमल और दूसरा खोद्स्दल कमल। सर्वतोभाद्र चक्र में 289 कोष्ठक है जिसके मध्य में अष्टदल कमल की स्थिति है। महानिर्वाण तंत्र में 16 पंखुड़ियों वाला कमल बताया गया है। अग्निपुराण में उल्लेखनीय दो रक्षापंक्तियों में भी कमल का स्थान है। एक अन्य यंत्र कमल यंत्र नाम से प्रसिद्धि है। स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए तथा बंध्या स्त्रियों को पुत्रलाभ हेतु कमल यंत्र धारण कराया जाता है। इस यंत्र में एक वृत्त और अष्टदल कमल बनाया जाता है। कमल आकार से युक्त असंख्य यंत्रों में से कुछ यंत्रों में आकारों साथ साथ कमलों का स्वरूप इस प्रकार है। श्यामयंत्र में भीतर अष्टदल कमल है और बाहर चौबीस दल कमल है। कालीयंत्र, धूमवतीयंत्र एवं छिन्नमस्तायंत्र में आठ पंखुड़ियों वाला कमल है। भुवनेश्वरीयंत्र में भीतर अष्टदल कमल और बाहर शोदासदल कमल है। शम्भुयंत्र में बत्तीस दल वाला कमल है रामयंत्र में दो अष्टदल, एक द्वादश दल, एक षोडशदल और बत्तीस पंखुड़ियों वाला एक पाँच कमल है। दुर्गायंत्र में एक अष्टदल और चौबीस दल कमल है। 

इस प्रकार शतचक्र कमल की भाँति रूपायित है। मूलाधार में चतुर्भुज कमल है ये चारों पंखुड़ी लाल रंग की है। स्वाधिष्ठान चक्र में छह पंखुड़ी वाला कमल है। सिंदूरी जैसी गुलाबी है। मणिपुर चक्र दस पंखुड़ी वाले कमल की रूप में है। इनका रंग मेघ के समान नीलवर्ण का है। अनाहत चक्र में द्वादश दल कमल है। विशुद्ध चक्र षोडशदल कमल तथा आज्ञाचक्र दो पंखुड़ी वाले कमल के रूप में है। सहस्र चक्र सहस्रदल कमल स्वरूप है। अन्य धर्मों में भी प्रतीकात्मक रूप से कमल का वर्णन मिलता है। बौद्धधर्म के पदार्वीदस्तक के अनुसार बुद्ध के पाँव में कमल का चिन्ह है। बुद्ध की अधिकाँश प्रतिमाओं में वह खिले कमल पर पद्मासन में बैठे या खड़े दिखाए गए है। कमल उनकी अलौकिकता, महाकरुणा, अमरता एवं बुद्धत्व का प्रतीक है। सभी बोधिसत्वों के वाहन तथा आयुध कमल है। अलाव्किक्तेस्वर, पद्मिनी, तारा, पारमिता बोधिसत्वों के अतिरिक्त वज्र गर्भ,पद्द्म्फलोदभव हयग्रीव, गोरिमाहविद्द्या, चिंतामणि चक्र, यशोधरा, करुणा, मुद्रिता महामैत्रे आदि अन्य प्रसिद्ध बोधिसत्व अलंकरणों से युक्त कमलासन पर स्थिर तथा अन्य आयुधों के साथ साथ अपने हाथों में कमल धारण किये हुए है। 

बौद्धगाथाओं के अनुसार सिद्धार्थ का जन्म होते हुए कमल पुष्प खिल उठे। सभी बौद्ध यंत्रों में कमल कोष और उसकी पंखुड़ियों में विभिन्न बुद्धौ और बोधिसत्वों के चित्र बनाये जाते है। सर्वाधिक मान्यता प्राप्त बौद्ध मन्त्र ष्ओंमणि पद्मेहुम हैं, अर्थात् हे कमल से स्थिर मणि! हम तुम्हारी वंदना करते है एशिया में प्रचलित महायान शाखा का प्रसिद्ध ग्रन्थ श् सर्द्धम पुंडरीक सूत्र श् है, जिसका अर्थ है -सत्यधर्म का कमल सूत्र महाविरोचन सूत्र के मतानुसार विश्वविज्ञान के मुद्रा श्वेत कमल पर स्थित है। श्वेत कमल हरदे का प्रतीक है। 

बौद्ध गठाव में कमल सर्वस्व का प्रतीक है। उनके अनुसार आदिबुद्ध सृष्टि के आरंभ में कमल से निकलती हुई ज्वाला के रूप में प्रकट हुए बौद्धों का विश्वास है कि तब तब कमल की कली जल के ऊपर निकलती है। संयुक्त निकाय की तृतीय अध्याय में में भगवान बुद्ध के उपदेश का इस प्रकार उल्लेख किया गया है - भद्र! जैसे कमल जल में उत्पन्न होता है, जल में पूर्ण विकसित होता है तथा जल में ही जल की सतह तक उभरता है, परन्तु फिर भी जल से भीगता नहीं है। इसी प्रकार तथागत संसार में उत्पन्न हुए, संसार में पूरी तरह बड़े हुए, संसार से ऊपर उठे किन्तु फिर भी संसार से प्रभावित नहीं हुए। इसी भाँति जैन धर्म में भी कमल का विशिष्ट स्थान है बुद्ध के समान ही जैन तीर्थकार भी कमल पर बैठे हुए चित्रित किये गए है। जैन मंदिरों कला, स्थापत्य एवं मूर्तिकला में कमल का पर्याप्त प्रयोग मिलता है जैन परंपरा में पाँच लोकोक्तियों या पारमेष्ट्य की पूजा का विधान है। ये है अहन्त, आचार्य उपाध्याय, साधु। कमल की चार पंखुड़ियों में इन पाँच पर्मेस्त्यो को प्रस्तुत किया गया है। जैन पुराण, पद्मपुराण के अनुसार तीर्थकार की प्रतिमा की सुवर्ण के समान कमलों से पूजित प्रदर्शित करनी चाहिए। जैन परम्परा में १ देवियाँ है। उनमें से काली, गाँधारी, मानवी, बिदेवी का वाहन कमल है। वज्र श्रृंखला और गौरी देवी की भुजाओं में कमल है। भगवान् महावीर की माता द्वारा अपने गर्भकाल में देखे गए स्वप्नों में तीन तथा चौदह में से चार का संबंध कमल से है। 

सुंदरता, कोमलता, कामनीयता तथा सौरभ के प्रतीक के रूप में कमल को सभी देशों में सर्वाधिक मान्यता प्राप्त है। संसार की सृष्टि से कमल का संबंध प्राचीन मिश्र में भी उपलब्ध है। हर्मोपोलिसस की एक लोकगाथा में श्रेष्ठतम देवता स्वयं एक कमल पर उद्भव हुए। ग्रीक रोमान काल में निर्मित एडगू के देवालय में एक शिलालेख में प्रथम आदिम देवता को महाकमल कहा गया है, जिसने अस्तित्व में आने पर संसार की रचना की, अव्लोकितेस्वर जिन्हें चीन में श्कुयान इन की रूप में पूजा जाता है। उनके धारिनो सूत्र में चार प्रथम रंगों के कमलों के ये चार लक्षण है।

(1) श्वेत कमल गुणवत्ता का परिचायक है, 

(2) नीलकमल पृष्ठभूमि में पुनर्जन्म का प्रतीक है, 

(3) नीलवर्ण बोधिसत्वों के दर्शन का प्रतीक है, 

(4) लालकमल देवताओं के स्वर्ग में पुनर्जन्म का द्योतक है। 

प्राचीन मिश्र में भी कमल पुनर्जन्म का प्रतीक माना गया था। ओसोसिस देवता मृत्यु के पश्चात पुनः एक कमल से उत्पन्न हुए थे अतः मिश्र के मकबरों, कब्रों एवं ताबूतों पर कमल उत्कीर्ण किया जाता था। इसे पुनर्जन्म का प्रतीक मानते हुए यूनानी, रोमन तथा प्रारंभिक ईसाइयों की शव यात्रा में कमल का उपयोग किया जाता था। 

असंदिग्ध रूप से कमल शाश्वत सांस्कृतिक प्रतीक है। इसकी विशेषता है - सूक्ष्म, अदृश्य, अलिप्तता तथा अलंकरण का सेतु होना। यह सूर्य एवं उसके प्रकाश का भी प्रतीक है यही नहीं यह अन्धकार अविवेक एवं अज्ञान की विरोध का द्योतक है। शतपथ ब्राह्मण में कमल को अग्नि का पर्याय माना गया है। तैत्तिरीय संहिता में उल्लेख है, हे कमल! तुम जल से ऊपर रहने वाले हो और अग्नि के जन्मदाता हो। तुम समुद्र को बढ़ाते हो। सर्वत्र वृधि को प्राप्त होते हुए जल में सभी प्रकार स्थित हो। द्युलोक के तेज से और पृथ्वी की विशालता से चारों ओर विस्तृत हो। 

कुछ भी हो, पर यह सनातन सत्य है कि कमल कीचड़ में उत्पन्न होकर भी उससे अंशमात्र भी नहीं छुआ है। सदा पवित्र एवं पावन बना रहता है। अतः कमल का प्रतीक मनुष्य को भी सांसारिक मोहपंक में रहते हुए भी उससे अलिप्त बने रहने की सीख देता है। कमल के प्रतीक के इस रूप को ह्राद्य्गम किया जा सके, तो ही कमल रूपी सांस्कृतिक प्रतीक कि महत्ता एवं विशेषता सार्थक सिद्ध होगी।

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[06/09, 2:13 pm] +91 73809 35695: बहुत समय पहले की बात है, दुर्गापुर में एक राजा राज्य करते थे। राजा का नाम अजय सिंह था। अजय सिंह बहुत ही धर्मात्मा और पराक्रमी राजा थे। उनके केवल एक लड़की थी, जिसका नाम सोनालिका था । राजकुमारी सोनालिका अभी मुश्किल से तेरह चौदह साल की थी।

लेकिन उसकी सुन्दरता की चर्चा दूर दूर तक फैली थी । राजा अजय सिह उसे अपने प्राणों से भी ज्यादा प्यार करते थे। राजकुमारी भी अपने पिता पर जान छिड़कती थी ।

एक दिन की बात है, राजा अपने सिपाहियों के साथ जंगल में शिकार खेलने गए । राजा के साथ उनके चार अंगरक्षक थे, जो सभी प्रकार के अस्त्र शस्त्रों से सुसज्जित थे। 

राजा को शिकार के लिए भटकते भटकते दोपहर हो गई, लेकिन एक भी शिकार न मिला । थके हारे राजा अपने घोड़े से उतरकर एक बरगद के पेड़ की छाया में लेटकर विश्राम करने लगे। उन्होंने अपना घोड़ा वहीं पेड़ की जड़ से बांध दिया ।

"राजवीर - मुझे ठण्डा पानी चाहिए।" - राजा ने अपने एक अंगरक्षक को सम्बोधित करते हुए कहा ।

"अभी लीजिए महाराज।" - वह बोला और फिर पानी की खोज में अपना घोड़ा लेकर जंगल की ओर बढ़ गया ।

राजा अपने तीनों अनुचरों के साथ काफी समय तक राजवीर के आने की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन राजवीर नहीं आया। पता नहीं क्या बात थी, राजा और उनके सिपाही राजवीर के लिए चिन्तित हो उठे। 

ज्यों ज्यों समय बीतता गया । यह चिंता त्यों त्यों बढ़ती ही चली गई। दूसरी ओर सूर्य की प्रखर किरणें जैसे कण कण जलाये दे रही थीं। प्यास के कारण राजा का गला सूखता ही जा रहा था। तीनों सिपाही राजा की ओर विवशता से ताक रहे थे। 

तभी राजा बोला- "तुम तीनों यहां से तुरन्त चले जाओ और मेरे लिए पानी की खोज करो । साथ ही साथ राजबीर के बारे में भी पता करो कि अभी तक वह क्यों नहीं लौट सका ।" 

"लेकिन कम से कम एक आदमी का तो आपके पास रहना जरूरी ही है महाराज -!" - उनमें से एक बोला ।

राजा ने दो टूक उत्तर दिया- "नही ,तुम लोग मेरी रक्षा के लिए हो और इस वक्त मेरी रक्षा के लिए पानी की सख्त जरूरत है । इसलिए जैसे भी हो, मेरे लिए अति शीघ्र पानी की व्यवस्था करो साथ ही साथ राजवीर की भी खोज करो।"

"जो आज्ञा महाराज ।" - राजा का आदेश पाकर वे तीनों एक स्वर में बोले और फिर अपने अपने घोड़ों पर बैठकर पानी एवं अपने साथी की खोज में निकल पड़े ।

लगभग दो घण्टे तक राजा अपने सिपाहियों के लौटने की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन जब उनमें से कोई नहीं लौटा तो राजा चिन्तित हो उठे । एक तो चिंता, दूसरे तपती हुई धूप , राजा का गला प्यास के कारण सूखता चला गया।

हारकर राजा भी उठ खड़े हुए । अब सबसे पहले उन्हें पानी की तलाश स्वयं ही करनी थी , इस तरह हाथ पर हाथ रखकर बैठने से कोई लाभ नही था ।

राजा ने उठकर पेड़ से बंधा अपना घोड़ा खोला और उस पर बैठकर एक ओर चल दिए। राजा काफी देर तक अपने घोड़े पर बैठे बैठे इधर उधर भटकते रहे, लेकिन उन्हें न तो पानी मिला और न ही अपने सिपाही ।

लेकिन फिर भी राजा ने हिम्मत नही हारी । बार बार निराशा हाथ लगने के बावजूद भी वे दुगुने जोश के साथ अपने काम में जुट गए । वे जिस ओर आगे बढ़ रहे थे, उस ओर जंगल ज्यादा ही घना था। कहीं कहीं तो उन्हें स्वयं घोड़े से नीचे उतरकर रास्ता बनाना पड़ता था । 

राजा आगे बढ़े ही जा रहे थे । सहसा उन्हें फिर घोड़े से उतरना पड़ा, क्योंकि आगे रास्ता वृक्षों की टहनियों ने रोक रखा था। राजा ने नीचे उतरकर अपनी तलवार निकाली और उन्हें काट काट कर रास्ता बनाने लगे ।

तभी उन्हीं झाड़ियों के नीचे राजा को एक गुफा दिखाई दी । गुफा का दरवाजा काफी बड़ा था। राजा की उत्सुकता जगी । वे जल्दी जल्दी गुफा के दरवाजे की ओर बढ़े। गुफा काफी लम्बी थी । राजा अपने घोड़े की रस्सी थामे बढ़ते ही चले गए । 

राजा ने देखा, गुफा के फर्श पर सीलन थी। शायद आगे पानी की बावड़ी होगी । राजा ने सोचा और वे जल्दी जल्दी आगे बढ़ने लगे । थोड़ी दूर चलने के बाद वह गुफा एक लम्बे चौड़े मैदान में बदल गई । 

उसी मैदान के बीचो बीच एक छोटा सा जलाशय था । राजा की आंखें चमक उठीं। उन्होंने अपने सूखते हुए होंठों पर जुबान फेरी और तेज तेज कदमों से जलाशय की ओर बढ़ गए ।

जलाशय की खूबसूरती देखकर राजा मोहित हो उठे, लेकिन एक बात राजा को खटक रही थी कि इतनी खूबसूरती होते हुए भी वहां एकदम सन्नाटा था। एक भी पक्षी उस जलाशय के आस पास दिखलाई नहीं दे रहा था ।

लेकिन राजा को इस बारे में सोचने की फुरसत नहीं थी। उनका तो गला प्यास की अधिकता के कारण सूखा जा रहा था। राजा जल्दी जल्दी जलाशय की सीढ़ियां उतरने लगे । पानी के पास पहुंचकर राजा ने हाथ मुंह धोया और पानी पीने लगे।

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  *♦️♦️भाग - 01♦️♦️*

*♦️♦️ब्राह्मण:तेल की खरीद में जातीय विभाजन की आग*

*♦️♦️पीटर नवारो का मूर्खतापूर्ण बयान केवल भारतीय समाज की सामाजिक संरचना में व्यर्थ हस्तक्षेप और जातिगत विद्वेष भड़काने की निर्लज्ज कोशिश है।* 

*♦️♦️प्रमोद भार्गव♦️♦️♦️* 

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*♦️धर्म और जाति भारत की कमजोर कड़ियां रही हैं। इसकी शुरुआत फिरंगी हुकूमत ने भारत में धर्म के आधार पर बंगाल के विभाजन के साथ की थी, जो कालांतर में अंग्रेजों की कुटिल चाल के परिणाम में भारत विभाजन का मुख्य आधार बनी। अब अमेरिका के भारत विरोधी वाचाल व्यापारी पीटर नवारो एक बार इसी नुस्खे को तूल देकर जातीय वैमनस्य को चिंगारी भड़काने की कोशिश में हैं।* 

*♦️भारत पर लगाए 50 प्रतिशत टैरिफ को लेकर अमेरिका से असंतुष्ट देशों में खासतौर से रूस, भारत, चीन अर्थात आरआईसी ट्राइका संघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में मजबूती से खड़ा होता दिखा। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नींद हराम हो गई।* 

*♦️नतीजतन इसी परिप्रेक्ष्य में ट्रंप के आधिकारिक व्यापारिक सलाहकार पीटर नवारो ने रूस से तेल आयात पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘ब्राह्मण भारतीय जनता की कीमत पर मुनाफाखोरी कमा रहे हैं।‘* 

*♦️दरअसल एससीओ का तियानजिन में एकत्रीकरण ट्रंप के टैरिफ के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दबाव का ऐसा प्रभावी संकेत है, जो न केवल अमेरिका, बल्कि जी-7 और यूरोप की आर्थिक शक्ति को भी संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।*

*♦️नवारो ने ‘फॉक्स न्यूज संडे‘ को दिए साक्षत्कार में कहा कि ‘देखिए, नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के महान नेता हैं, लेकिन वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ खड़े हैं।* 

*♦️मैं कहना चाहूंगा कि भारतीय जनता समझे कि यह क्या हो रहा है। आपके पास जो ब्राह्मण हैं, वे भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। हमें इसे रोकने की जरूरत है। यानी पूंजीपति देश का एक उद्योगपति भारत की जनता को बताएगा कि वह क्या करे ? मसलन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनता नसमझ है। देश की वह जनता नादान है, जिसने आपातकाल में तानाशाह के रूप में पेश इंदिरा गांधी की सरकार को बदल दिया था ?* 

*♦️इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भारी बहुमत से जीते राजीव गांधी की सत्ता को इसलिए बेदखल कर दिया था, क्योंकि शाहबानो प्रकरण को लेकर राजीव गांधी इस्लामी कट्टरवादियों के दबाव में आ गए थे। इसी जनता ने उन मनमोहन सिंह को सत्ताच्युत कर दिया था, जिन्होंने देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों को सौंप देने की वकालत शुरू की थी और फिर इसी जनता ने देश की कमान उन नरेंद्र मोदी को सौंप दी थी, जो अपने बाल्यकाल में पिता की मदद के लिए रेल के डिब्बों में चाय बेचा करते थे।*

*♦️इन्हीं मोदी को जागरूक मतदाताओं ने फिर से 2019 में जिताया, क्योंकि सुरक्षा सैनिकों को ले जाने वाले एक वाहन को पुलवामा में आत्मघाती आतंकी हमलावर, सीआरपीएफ के 46 जवानों की शहादत का कारण बना था। इस जघन्य घटना का बदला लेने के लिए मोदी ने बालाकोट में वायुसेना से सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देकर आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविरों को जमींदोज कर दिया।* 

*♦️2024 के आम चुनाव में इन्हीं मोदी पर देश देश की जनता ने फिर विश्वास किया और तीसरी बार सत्ता की कुंजी मोदी को सौंप दी। साफ है, जनता उन विदेशी उपदेशकों के बहकावे में आने वाली नहीं है, जो मोदी पर नाजायज दबाव बनाकर अपने अनैतिक हित साधने के फेर में हैं। दोहरे मापदंड वाले ट्रंप भारत को रूस से तेल खरीदने पर अतिरिक्त शुल्क के रूप में जुर्माना लगा रहे हैं, जबकि भारत, चीन और यूरोपीय देशों की तुलना में कम ईंधन खरीदता है। पीटर नवारो इन देशों के ब्राह्मणों, अर्थात कुलीन वर्ग या कारपोरेट घरानों के लिए क्या कहेंगे ?*

*♦️♦️लेख जारी है ------*

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  *♦️♦️भाग - 02♦️♦️*

*♦️♦️ब्राह्मण:तेल की खरीद में जातीय विभाजन की आग*

*♦️♦️पीटर नवारो का मूर्खतापूर्ण बयान केवल भारतीय समाज की सामाजिक संरचना में व्यर्थ हस्तक्षेप और जातिगत विद्वेष भड़काने की निर्लज्ज कोशिश है।* 

*♦️♦️प्रमोद भार्गव♦️♦️♦️* 

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*♦️नवारो भारत के विरुद्ध अनर्गल प्रलापों के लिए जाने जाते हैं। नवारो ने इसके पहले, यूक्रेन संघर्श को ‘मोदी का युद्ध आंशिक रूप से नई दिल्ली होकर गुजरता है‘ का लांछन लगाया था।* 

*♦️इसका सटीक उत्तर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह कहते हुए दिया है कि ‘नवारो ने भारत पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध-मशीन को वित्तपोशित करने का आरोप लगाया है, जबकि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर किए हमले के बहुत पहले से पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश रहा है। उसी मात्रा में आज भी रूस तेल निर्यात कर रहा है। अर्थात निवारों का बयान भारत, रूस और चीन की एससीओ की बैठक में देखने में आई जुगलबंदी का नतीजा है।* 

*♦️चूंकि अब ट्रंप अपने ही देश में बेतुके अड़ियल रुख के कारण घिरते जा रहे हैं। अवाम में नाराजी बढ़ रही है। अमेरिका के अरबपति रे डेलियो ने तो यहां तक कह दिया कि ‘ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका 1930 के दशक जैसी तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। निवेशक ट्रंप के डर से चुप हैं। धन एवं मूल्यों की खाई और टूटता भरोसा अमेरिका को चरमपंथी नीतियों की ओर धकेल रहा है।‘*

*♦️निवारो का जातिसूचक बयान एक ऐसी साजिश का सूचक है, जो भारत में शहरी नक्सली और वर्णभेदी वामपंथी बीजरूप में आजादी के बाद से ही बोते रहे हैं। जिससे भारत को जातीय कुचक्र की आग में जलने लग जाए। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत में जाति की जड़ें आज भी गहरी हैं।* 

*♦️लेकिन बीते 75-80 सालों में जनता बौद्धिक-विवेक के रूप में इतनी परिपक्व हो गई है कि वह अब किसी बाहरी व्यक्ति के बहकावे में आने वाली नहीं है। वह जानती है कि भारत में तेल का व्यापार करने वाले जो भी चंद उद्योगपति हैं, उनमें ब्राह्मण कोई नहीं है। यह बयान केवल भारतीय समाज की सामाजिक संरचना में व्यर्थ हस्तक्षेप और जातिगत विद्वेष भड़काने की निर्लज्ज कोशिश है।* 

*♦️हालांकि यह संभवतः अपवाद है कि किसी परदेसी उद्योगपति के मुख से जातिगत व्यवस्था को भारत सरकार की विदेश नीति से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। नवारो ने जातिसूचक शब्द ब्राह्मण का जो प्रयोग किया है, उसे अभिजात्य या कुलीन वर्ग को लांछित करने के रूप में भी देखा जा रहा है।* 

*♦️तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष का कहना है कि बोस्टन ब्रह्माण शब्द अमेरिका में न्यू इंग्लैंड से जाकर बसे धनी वर्ग के लिए प्रयोग में लाया जाता था। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस शब्द को एलीट क्लास से जोड़ा है। दरअसल एक समय अमेरिका के बोस्टन में धनी सुशिक्षित प्रोटेस्टेंटों का एक समुदाय था। ये लोग 18वीं और 19वीं सदी में ताकतवर समुदाय थे। ये अमेरिका के उपनिवेशवादियों के वंशज थे। इन लोगों ने व्यापार में अपने को खफा दिया और सफलता के शिखर छू लिए। इन्हें बोस्टन ब्राह्मण या कुलीन कहा गया। ये बोस्टन के आम लोगों से अलग रहते थे और अभिजात्य जीवन-शैली जीते थे।*

     

*♦️वैदिक युग में भारत में कोई जाति या वर्ण नहीं थे। कालांतर में जाति का उदय हुआ। जिनकी ज्ञानार्जन और अनुसंधान में रुचि थी, वे ब्राह्मण कहलाए। जिनमें बल था, वे क्षत्रिय और जो व्यापार करने लग गए, वे वैश्य कहलाए।जो मूलतःश्रम और कृषि कार्य से जुड़े रहे, वे शुद्र कहलाए। यही बड़ा उत्पादक समूह रहा है और वर्तमान में भी है। ब्राह्मण परशुराम ने क्षत्रिय सहस्त्रबाहु अर्जुन को पराजित कर सत्ता हस्तगत कर ली थी, परंतु उन्हीं के शेष रहे वंशजों को सत्ता सौंप कर ज्ञान की सर्वोच्चता स्थापित कर दी थी।*

*♦️वे परशुराम ही थे,जिन्होंने गोवा के कोंकण क्षेत्र में समुद्र से भूमि खाली करके हजारों वनवासियों को खेती शुरू कराई। इनका यज्ञोपवीत संस्कार कर इन्हें ब्राह्मण बनाया और अक्षय तृतीया के दिन सामूहिक विवाह कराए। युद्ध में विधवा हुई महिलाओं के भी विवाह कराये।* 

*♦️अब भारत में शैक्षिक उन्नति, सह-शिक्षा और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में पेशेवर युवक-युवतियों की बड़ी संख्या में भागीदारी के चलते अन्तर्जातीय व अन्तर्धार्मिक विवाह आम बात हो गई है। बहुत कुछ जातीय कुचक्र टूट गया है।* 

*♦️अलबत्ता यह भी देखने में आ रहा है कि जिस किसी भी वर्ग या जाति के लोग राजनीति, नौकरी या व्यापार में सशक्त होते जा रहे हैं, वे उसी बा्रह्मणवादी व्यवस्था के अनुगामी बनते जा रहे हैं, जिसे एक समय वे कोसते रहे हैं। भारत में निरंतर जातीय समन्वय बढ़ रहा है। अतएव अब वे किसी परदेसी के बचकाने बयान के बहकावे में आने वाले नहीं हैं।*  

    *♦️♦️समाप्त♦️♦️* 

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