आज सुबह के पंचांग और राशिफल पर ध्यान केंद्रित कर दिए निर्देश पर विचार विमर्श

आज सुबह देश 🏴󠁧󠁢󠁷󠁬󠁳󠁿 और अन्य भारतीय मशरूम पर ध्यान केन्द्रित

Sep 1, 2025 - 06:55
 0  14
आज सुबह के पंचांग और  राशिफल पर ध्यान केंद्रित कर दिए निर्देश पर विचार विमर्श

 🚩 *🙏🏻 सनातन धर्मरक्षक समिति* (पं.) 🚩

*✍🏻🧾लेख

*🗓आज का पञ्चाङ्ग एवम् राशिफल 🗓*

*🌻 सोमवार,०१सितम्बर २०२५🌻*    

*_🔅 तिथि नवमी अगले दिन के +02:45 AM तक✳️_*

*_🔅 मूलसंज्ञक नक्षत्र ज्येष्ठा 07:56 PM तक✳️ उसके बाद मूल नक्षत्र🔥_*

*_🔅 करण :-भद्रा👇 नहीं है।✳️_*

 बालव 01:56 PM तक,

 कौलव अगले दिन के 02:45 AM तक।

*_🔅 पक्ष शुक्ल✳️_*  

🔅 योग विश्कुम्भ 04:31 PM

*_🔅 वार सोमवार✳️_*  

*_🌞सूर्य व🌙चन्द्र से संबंधित गणनाएँ👇_*    

🔅 सूर्योदय 05:58 AM  

🔅 चन्द्रोदय 02:07 PM  

*_🌙चन्द्र राशि वृश्चिक 07:56PM तक✳️ उसके बाद धनु राशि🔥_*  

🔅 सूर्यास्त 06:43 PM  

🔅 चन्द्रास्त +00:10 AM  

🔅 ऋतु शरद  

*_☀ हिन्दू मास एवं वर्ष👇_*    

🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु

🔅 कलि सम्वत 5127  

🔅 दिन काल 12:44 PM  

🔅 विक्रम सम्वत 2082  

🔅 मास अमांत भाद्रपद  

🔅 मास पूर्णिमांत भाद्रपद  

*_✡️शुभ और🔥अशुभ समय👇_*    

*_✡️शुभ समय👇_*    

🔅 अभिजित 11:55:31 - 12:46:29

*_🔥अशुभ समय🌙_*    

🔅 दुष्टमुहूर्त 12:46 PM - 01:37 PM

🔅 कंटक 08:31 AM - 09:22 AM

🔅 यमघण्ट 11:55 AM - 12:46 PM

*_🔅 राहु काल 07:34 AM - 09:09 AM🔥_*

🔅 कुलिक 03:19 PM - 04:10 PM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 10:13 AM - 11:04 AM

🔅 यमगण्ड 10:45 AM - 12:21 PM

🔅 गुलिक काल 01:56 PM - 03:32 PM

*_☀ दिशा शूल👇_*    

🔅 दिशा शूल पूर्व  

*_🌙चन्द्रबल और✨ताराबल👇_*    

*_✨ताराबल👇_*  

🔅 अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती  

*_🌙चन्द्रबल👇_*  

🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ

*_💫🪴 सितम्बर महीने 2025 के इन👇तारीखों में शुभाशुभ मुहुर्त🌹🥀_*

🔅 विवाह मुहूर्त

  नहीं है,हरिशयन दोष है।इसलिए इस समय विवाह जैसे मांगलिक कार्य बन्द रहेंगे। विवाह के कोई मुहूर्त नहीं है।हरि शयन दोष जो लगभग दो मास तक विवाह मुहूर्त नहीं है।

🔅 मुंडन मुहूर्त

कोई मुहूर्त नहीं है

🔅 गृह प्रवेश मुहूर्त

कोई मुहूर्त नहीं है

🔅 नामकरण मुहूर्त

3rd, 4th, 5th, 7th, 8th, 10th, 14th, 17th, 22nd, 24th

🔅 अन्नप्राशन मुहूर्त

5th, 24th

🔅 कर्णवेध मुहूर्त

5th, 22nd, 24th, 27th

🔅 विद्यारम्भ मुहूर्त

23rd

🔅 उपनयन/जनेऊ मुहूर्त

3rd, 4th, 24th, 27th

🔅 वाहन खरीद मुहूर्त

5th, 7th, 10th, 14th, 17th, 22nd, 24th

🔅 प्रॉपर्टी खरीद मुहूर्त

2nd, 3rd, 7th, 8th, 16th, 26th, 27th

🔅 सर्वार्थ सिद्धि योग

5th, 9th, 11th, 13th, 15th, 18th, 21st, 26th, 28th

🔅 अमृत सिद्धि योग

13th, 15th, 18th

🔅 पंचक

6th, 7th, 8th, 9th, 10th

🔅 भद्रा

3rd, 7th, 10th, 13th, 16th, 19th, 25th, 29th

*_⚜️लगन👇तालिका⚜️_*

    सूर्योदय का समय: 05:58:47

सूर्योदय के समय लग्न सिंह स्थिर

133°55′01″

🔅 सिंह स्थिर

शुरू: 04:54 AM समाप्त: 07:12 AM

 

🔅 कन्या द्विस्वाभाव

शुरू: 07:12 AM समाप्त: 09:28 AM

 

🔅 तुला चर

शुरू: 09:28 AM समाप्त: 11:48 AM

 

🔅 वृश्चिक स्थिर

शुरू: 11:48 AM समाप्त: 02:07 PM

 

🔅 धनु द्विस्वाभाव

शुरू: 02:07 PM समाप्त: 04:11 PM

 

🔅 मकर चर

शुरू: 04:11 PM समाप्त: 05:54 PM

 

🔅 कुम्भ स्थिर

शुरू: 05:54 PM समाप्त: 07:22 PM

 

🔅 मीन द्विस्वाभाव

शुरू: 07:22 PM समाप्त: 08:47 PM

 

🔅 मेष चर

शुरू: 08:47 PM समाप्त: 10:22 PM

 

🔅 वृषभ स्थिर

शुरू: 10:22 PM समाप्त: अगले दिन 00:18 AM

 

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव

शुरू: अगले दिन 00:18 AM समाप्त: अगले दिन 02:33 AM

 

🔅 कर्क चर

शुरू: अगले दिन 02:33 AM समाप्त: अगले दिन 04:54 AM

*_⚜️6 बजे प्रातः👇ग्रह स्पष्ट🪷_*

निरायण, Sidereal

ग्रह राशि

निरायण नक्षत्र, पद

निरायण

लग्न सिंह 14°9' पूर्व फाल्गुनी1 मो

 सूर्य सिंह14°38' पूर्व फाल्गुनी1 मो

 चन्द्र वृश्चिक22°58' ज्येष्ठा2 या

 बुध ^ सिंह2°53' मघा1 मा

 शुक्र कर्क13°23' पुष्य4 ड

 मंगल कन्या21°44' हस्त4 ठ

 बृहस्पति मिथुन23°40' पुनर्वसु2 को

 शनि * मीन5°54' उत्तरभाद्रपदा1 दू

 राहू * कुम्भ24°29' पूर्वभाद्रपदा2 सो

 केतु * सिंह24°29' पूर्व फाल्गुनी4 टू

 यूरेनस * वृषभ7°15' कृत्तिका4 ए

 नेपच्यून * मीन7°8' उत्तरभाद्रपदा2 थ

 प्लूटो * मकर7°33' उत्तराषाढा4 जी

सायन, Tropical

ग्रह Tropical Position

सायन

लग्न 158°22'

 सूर्य 158°51'

 चन्द्र 257°11'

 बुध ^ 147°6'

 शुक्र 127°36'

 मंगल 195°57'

 बृहस्पति 107°53'

 शनि * 0°7'

 राहू * 348°42'

 केतु * 168°42'

 यूरेनस * 61°28'

 नेपच्यून * 1°21'

 प्लूटो * 301°46'

अयनांश लाहिरी / चित्रपक्ष = 24°13'

*_आज के लिए खास_*

*_यहां जो लेख दिये जा रहे हैं यह पूरी तरह जानकारी और अनुभव आधारित है, इसके प्रयोग के लाभ हानि के जिम्मेदार आप स्वयं होंगे इसमें लेखक एवं प्रसारणकर्ता की किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं होगी_*

"अष्टांग योग: पतंजलि योगसूत्र का विस्तृत विश्लेषण"

√•पतंजलि के योगसूत्र में प्रस्तुत अष्टांग योग योग दर्शन का केंद्रीय और व्यावहारिक ढांचा है, जो आठ अंगों (अष्ट = आठ, अंग = हिस्सा) से मिलकर बना है। यह एक समग्र प्रणाली है, जो शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास को एकीकृत करती है, जिसका अंतिम लक्ष्य चित्त की वृत्तियों का निरोध (योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः, सूत्र 1.2) और कैवल्य (मुक्ति) की प्राप्ति है। अष्टांग योग को साधन पाद (सूत्र 2.29-2.55) में विस्तार से वर्णित किया गया है, और यह सामान्य साधकों के लिए योग का व्यवस्थित मार्ग प्रदान करता है। नीचे प्रत्येक अंग का गहराई से विश्लेषण किया गया है, जिसमें इसके सिद्धांत, अभ्यास, और आधुनिक संदर्भ शामिल हैं।

√•अष्टांग योग के आठ अंग: 

पतंजलि ने अष्टांग योग के आठ अंगों को इस प्रकार सूचीबद्ध किया है: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, और समाधि। ये अंग एक रैखिक प्रगति की तरह नहीं, बल्कि एक समन्वित प्रक्रिया के रूप में अभ्यास किए जाते हैं, जहां प्रत्येक अंग दूसरे को समृद्ध करता है।

√•1. यम: सामाजिक नैतिकता के नियम

यम पांच सामाजिक और नैतिक नियम हैं, जो व्यक्ति को समाज के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने और आंतरिक शुद्धि के लिए मार्गदर्शन करते हैं। ये नियम बाहरी व्यवहार को नियंत्रित करते हैं और योग साधना की नींव रखते हैं। सूत्र 2.30: "अहिंसासत्यास्तेयब्रह्मचर्यापरिग्रहा यमाः।"

√•अहिंसा: किसी भी प्राणी को मन, वचन, या कर्म से हानि न पहुंचाना। अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा से बचने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें क्रोध, घृणा, और नकारात्मक विचार भी शामिल हैं। सूत्र 2.35 कहता है: "अहिंसाप्रतिष्ठायां तत्सन्निधौ वैरत्यागः" - जब अहिंसा दृढ़ हो जाती है, तो साधक के समीप शत्रुता समाप्त हो जाती है।

√•सत्य: सत्य बोलना और सत्य के प्रति निष्ठा। यह केवल सच बोलना नहीं, बल्कि वह सत्य जो हितकारी और अहिंसापूर्ण हो। सूत्र 2.36: "सत्यप्रतिष्ठायां क्रियाफलाश्रयत्वम्" - सत्य की सिद्धि से साधक की वाणी और कर्म फलदायी हो जाते हैं।

√•अस्तेय: चोरी न करना, चाहे वह भौतिक वस्तु हो या दूसरों का समय, ऊर्जा, या विचार। सूत्र 2.37: 'अस्तेयप्रतिष्ठायां सर्वरत्नोपस्थानम्" - अस्तेय की सिद्धि से सभी प्रकार के रत्न (धन और मूल्य) साधक के पास आते हैं।

√•ब्रह्मचर्य: इंद्रियों का संयम, विशेष रूप से यौन ऊर्जा का नियंत्रण और उसे आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करना। सूत्र 2.38: "ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायां वीर्यलाभः" - ब्रह्मचर्य की सिद्धि से अपार शक्ति और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

√•अपरिग्रह: लालच और संग्रह की प्रवृत्ति से मुक्ति। यह न्यूनतम आवश्यकताओं के साथ जीवन जीने और अनावश्यक संपत्ति से मुक्त होने का आह्वान करता है। सूत्र 2.39: "अपरिग्रहस्थैर्ये जन्मकथंतासंबोधः"- अपरिग्रह की स्थिरता से पिछले जन्मों का ज्ञान प्राप्त होता है।

√•आधुनिक प्रासंगिकता: यम आज के समाज में नैतिकता और सामाजिक सद्भाव के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उदाहरण के लिए, अहिंसा पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक शांति से जोड़कर देखी जा सकती है, जबकि अपरिग्रह उपभोक्तावाद के युग में न्यूनतम जीवनशैली को प्रोत्साहित करता है।

√•2. नियम: व्यक्तिगत अनुशासन

नियम पांच व्यक्तिगत अनुशासन हैं, जो साधक को आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक विकास के लिए तैयार करते हैं। सूत्र 2.32: 'शौचसंतोषतपःस्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि नियमाः।"

√•शौच: शरीर, मन, और पर्यावरण की शुद्धि। इसमें शारीरिक स्वच्छता (जैसे स्नान) के साथ-साथ मानसिक शुद्धता (नकारात्मक विचारों से मुक्ति) शामिल है। शौच से साधक का मन शांत और एकाग्र होता है।

√•संतोष: जो कुछ है, उसमें संतुष्टि। यह लालच और असंतोष से मुक्ति का मार्ग है। सूत्र 2.42: "संतोषात् अनुत्तमः सुखलाभः"- संतोष से अतुलनीय सुख की प्राप्ति होती है।

√•तप: आत्म-अनुशासन और तपस्या। इसमें शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों को सहन करना, उपवास, और इंद्रियों का नियंत्रण शामिल है। तप से चित्त की शक्ति बढ़ती है।

√•स्वाध्याय: स्वयं का अध्ययन, विशेष रूप से पवित्र ग्रंथों (जैसे वेद, उपनिषद, या योगसूत्र) का अध्ययन और आत्म-निरीक्षण। सूत्र 2.44: "स्वाध्यायात् इष्टदेवतासंप्रयोगः" - स्वाध्याय से इष्ट देवता के साथ संयोग होता है।

√•ईश्वर प्रणिधान: ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण। यह साधक को अहंकार से मुक्त करता है और समाधि की ओर ले जाता है। सूत्र 2.45: "समाधिसिद्धिः ईश्वरप्रणिधानात्"- ईश्वर प्रणिधान से समाधि की सिद्धि होती है।

√•आधुनिक प्रासंगिकता: नियम व्यक्तिगत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उदाहरण के लिए, शौच को स्वच्छता अभियानों और मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ा जा सकता है, जबकि संतोष तनाव प्रबंधन और सकारात्मक मनोविज्ञान का आधार है।

√•3. आसन: शारीरिक स्थिरता

आसन का अर्थ है स्थिर और सुखद शारीरिक मुद्रा। सूत्र 2.46: "स्थिरसुखमासनम्।" पतंजलि के अनुसार, आसन का उद्देश्य शरीर को लंबे समय तक ध्यान के लिए स्थिर और आरामदायक बनाना है, न कि जटिल शारीरिक व्यायाम। सूत्र 2.47 कहता है: "प्रयत्नशैथिल्यानंतसमापत्तिभ्याम्" - आसन में प्रयास की शिथिलता और अनंत (ईश्वर या प्रकृति) के साथ तादात्म्य से सिद्धि होती है।

√•आसन का अभ्यास शारीरिक स्वास्थ्य, लचीलापन, और ऊर्जा संतुलन को बढ़ावा देता है। हठयोग ग्रंथों (जैसे हठयोग प्रदीपिका) ने आसनों को विस्तार दिया, जिसमें सूर्य नमस्कार, पद्मासन, और शीर्षासन जैसे अभ्यास शामिल हैं।

√•आधुनिक प्रासंगिकता: आधुनिक योग में आसन सबसे लोकप्रिय पहलू है। वैज्ञानिक अध्ययनों ने सिद्ध किया है कि आसन तनाव कम करने, रक्तचाप नियंत्रित करने, और मांसपेशियों की मजबूती के लिए प्रभावी हैं। हालांकि, पतंजलि के दृष्टिकोण में आसन केवल शारीरिक नहीं, बल्कि ध्यान की तैयारी है।

√•4. प्राणायाम: श्वास नियंत्रण

प्राणायाम श्वास के नियंत्रण की कला है, जो प्राण (जीवन शक्ति) को संतुलित करता है। सूत्र 2.49: "तस्मिन् सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेदः प्राणायामः"- आसन की सिद्धि के बाद श्वास और प्रश्वास की गति को नियंत्रित करना प्राणायाम है।

√•प्राणायाम के प्रकारों में शामिल हैं:

°नाड़ी शोधन: वैकल्पिक नासिका से श्वास।

°कपालभाति: तीव्र श्वास-प्रश्वास।

•भस्त्रिका: शक्तिशाली श्वास।

•उज्जायी: गले से ध्वनि के साथ श्वास।

√•प्राणायाम चित्त को शांत करता है, एकाग्रता बढ़ाता है, और नाड़ी तंत्र को शुद्ध करता है। सूत्र 2.52: "ततः क्षीयते प्रकाशावरणम्" - प्राणायाम से चित्त का अंधकार (अज्ञान) नष्ट होता है।

√•आधुनिक प्रासंगिकता: प्राणायाम को तनाव प्रबंधन, हृदय स्वास्थ्य, और मानसिक शांति के लिए वैज्ञानिक रूप से मान्यता प्राप्त है। उदाहरण के लिए, नाड़ी शोधन स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को संतुलित करता है।

√•5. प्रत्याहार: इंद्रियों का नियंत्रण

प्रत्याहार इंद्रियों को बाहरी विषयों से हटाकर अंतर्मुखी करने की प्रक्रिया है। सूत्र 2.54: "स्वविषयासंप्रयोगे चित्तस्य स्वरूपानुकार इव इंद्रियाणां प्रत्याहारः" - जब इंद्रियां अपने विषयों से अलग होकर चित्त के स्वरूप का अनुकरण करती हैं, तो वह प्रत्याहार है।

√•प्रत्याहार ध्यान की प्रारंभिक अवस्था है, जहां साधक बाहरी distractions से मुक्त होकर आंतरिक एकाग्रता विकसित करता है। यह इंद्रियों को नियंत्रित करने की कला है, जैसे कि शोर को अनदेखा करना या लालच पर काबू पाना।

√•आधुनिक प्रासंगिकता: प्रत्याहार डिजिटल युग में अत्यंत उपयोगी है, जहां सूचना का अतिरेक और सोशल मीडिया distractions का कारण बनते हैं। यह mindfulness और mental detox का आधार है।

√•6. धारणा: एकाग्रता

धारणा चित्त को एक बिंदु पर केंद्रित करना है। सूत्र 3.1: "देशबंधः चित्तस्य धारणा" - चित्त का किसी एक स्थान पर बंधन धारणा है। यह स्थान मंत्र, यंत्र, चक्र, या कोई अन्य ध्यान का विषय हो सकता है।

√•धारणा में साधक का चित्त पूरी तरह से एकाग्र होता है, लेकिन यह एकाग्रता अभी रुक-रुक कर होती है। यह ध्यान की प्रारंभिक अवस्था है।

√•आधुनिक प्रासंगिकता: धारणा उत्पादकता और फोकस बढ़ाने के लिए उपयोगी है। इसे माइंडफुलनेस तकनीकों और कॉग्निटिव ट्रेनिंग से जोड़ा जा सकता है।

√•7. ध्यान: निरंतर एकाग्रता

ध्यान धारणा का निरंतर और निर्बाध प्रवाह है। सूत्र 3.2: "तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्" - वहां (धारणा में) चित्त की एकतानता (निरंतरता) ध्यान है। ध्यान में साधक विषय के साथ पूर्णतः एकरूप हो जाता है, और बाहरी distractions समाप्त हो जाते हैं।

√•ध्यान समाधि की ओर ले जाता है और चित्त को शांत और शुद्ध करता है। यह आत्म-निरीक्षण और आध्यात्मिक जागरूकता का मार्ग है।

√•आधुनिक प्रासंगिकता: ध्यान (meditation) आज मानसिक स्वास्थ्य, चिंता प्रबंधन, और भावनात्मक संतुलन के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है। न्यूरोसाइंस ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान मस्तिष्क की संरचना को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

√•8. समाधि: आत्म-साक्षात्कार

समाधि योग का अंतिम लक्ष्य है, जहां साधक आत्मा के साथ पूर्ण एकीकरण का अनुभव करता है। सूत्र 3.3: "तदेवार्थमात्रनिर्भासं स्वरूपशून्यमिव समाधिः" - जब केवल विषय का प्रकाश रहता है और चित्त का स्वरूप शून्य-सा हो जाता है, तो वह समाधि है।

√•समाधि दो प्रकार की होती है:

- सम्प्रज्ञात समाधि: विषय के साथ एकाग्रता, जिसमें सवितर्क, निर्वितर्क, सविचार, और निर्विचार अवस्थाएं शामिल हैं।

- असम्प्रज्ञात समाधि: निर्विषय समाधि, जहां चित्त पूर्णतः निरुद्ध हो जाता है। यह कैवल्य की ओर ले जाती है।

√•आधुनिक प्रासंगिकता: समाधि को आधुनिक संदर्भ में "flow state" या गहरी आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ा जा सकता है। यह मानव चेतना की उच्चतम अवस्था का प्रतीक है।

√•अष्टांग योग का एकीकरण और अभ्यास

पतंजलि का अष्टांग योग एक समग्र प्रणाली है, जहां प्रत्येक अंग एक-दूसरे को समर्थन देता है। उदाहरण के लिए, यम और नियम नैतिक और आंतरिक शुद्धि प्रदान करते हैं, जो आसन और प्राणायाम के लिए स्थिरता और ऊर्जा देते हैं। प्रत्याहार इंद्रियों को अंतर्मुखी करता है, जिससे धारणा और ध्यान संभव होते हैं, और अंत में समाधि प्राप्त होती है।

√•पतंजलि ने इसे क्रिया योग (तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान) के साथ जोड़ा है, जो अष्टांग योग को और प्रभावी बनाता है। सूत्र 2.1: "तपःस्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि क्रियायोगः।"

√•आधुनिक संदर्भ में अष्टांग योग

आधुनिक युग में अष्टांग योग की लोकप्रियता बढ़ी है, लेकिन इसका अधिकांश ध्यान आसन और प्राणायाम पर केंद्रित है। अष्टांग विन्यास योग (Ashtanga Vinyasa Yoga), जो गुरु पट्टाभि जोइस द्वारा विकसित किया गया, एक शारीरिक रूप से गतिशील प्रणाली है, जो पतंजलि के अष्टांग योग से प्रेरित है, लेकिन इसमें यम और नियम जैसे नैतिक पहलुओं पर कम जोर दिया जाता है।

√•वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, अष्टांग योग के विभिन्न पहलुओं के लाभ सिद्ध हुए हैं:

- यम और नियम: नैतिक जीवन और संतोष तनाव कम करते हैं और सामाजिक संबंधों को मजबूत करते हैं।

- आसन: मांसपेशियों की मजबूती, लचीलापन, और हृदय स्वास्थ्य में सुधार।

- प्राणायाम: श्वसन तंत्र को मजबूत करना और तंत्रिका तंत्र को संतुलित करना।

- ध्यान और समाधि: मस्तिष्क की कार्यक्षमता, भावनात्मक स्थिरता, और आत्म-जागरूकता में वृद्धि।

√•हालांकि, आधुनिक योग में चुनौती यह है कि इसे अक्सर केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि पतंजलि का दृष्टिकोण समग्र और आध्यात्मिक है। योग शिक्षकों और साधकों को यम, नियम, और प्रत्याहार जैसे पहलुओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए, ताकि योग का पूर्ण लाभ प्राप्त हो।

√•आलोचना और चुनौतियां

√•1. जटिलता: अष्टांग योग की समग्र प्रणाली को अपनाना आधुनिक जीवन की भागदौड़ में कठिन हो सकता है। उदाहरण के लिए, प्रत्याहार और ध्यान जैसे अभ्यासों के लिए समय और एकांत की आवश्यकता होती है।

√•2. आधुनिक व्याख्या: यम और नियम जैसे नैतिक सिद्धांतों को आधुनिक संदर्भ में लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, विशेष रूप से अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य जैसे सिद्धांत।

√•3. वाणिज्यीकरण: योग का व्यवसायीकरण, विशेष रूप से आसन-केंद्रित कक्षाओं का प्रचलन, अष्टांग योग के आध्यात्मिक आयाम को कमजोर करता है।

√•निष्कर्ष

पतंजलि का अष्टांग योग एक व्यवस्थित और समग्र मार्ग है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति, नैतिक जीवन, और आध्यात्मिक मुक्ति को एकीकृत करता है। इसके आठ अंग - यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, और समाधि - एक दूसरे के पूरक हैं और साधक को चित्त निरोध से कैवल्य तक ले जाते हैं। आधुनिक संदर्भ में, अष्टांग योग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रासंगिक है, बल्कि यह नैतिकता, आत्म-अनुशासन, और आत्म-जागरूकता का भी मार्गदर्शन करता है।

√•सच्चे अर्थों में अष्टांग योग को अपनाने के लिए, साधकों को इसके सभी अंगों को संतुलित रूप से अभ्यास करना चाहिए, न कि केवल आसन या ध्यान तक सीमित रहना चाहिए। यह न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए, बल्कि समाज और पर्यावरण के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन के लिए भी एक शक्तिशाली उपकरण है।

*_हर हर महादेव🙏_*

👉 *मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है।।*

🪷🪴 *विशेष आग्रह* 🪴🪷

👉 *अपने घर में बच्चों के साथ दैनिक पूजन ,भगवान की आरती, माता, पिता व गुरुजनों को प्रणाम करना व मस्तक पर तिलक एवं शिखा (चोटी) अवश्य धारण करायें व हिन्दू धर्म के संस्कार बच्चों को दें एवं शंखनाद करें और अपने पडोसी को व मित्रों को उपरोक्त संस्कार करने के लिए प्रेरित करें इसके दूरगामी लाभ मिलेंगे ।*

🙏🪴 *आज का दिन आपके लिए मंगलमय हो।*🪴🙏

*_अस्वीकरण(Disclaimer)दैनिक पंचांग, धर्म, ज्योतिष,राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर यहाँ प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं।ज्योतिष एक अत्यंत जटिल विषय है, यहां पूरी सतर्कता के उपरांत भी मानवीय त्रुटि संभव है, अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले अपने स्वविवेक के साथ किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें..._*

*_🪴🪷💫 दैनिक राशिफल💫🪷🪴_*

🐑 *_मेष राशि :चू, चे, चो, ल, ली, लू, ले, लो,अ।स्वास्थ्य का ख़याल रखें, नहीं तो लेने के देने पड़ सकते हैं। धन की आवाजाही आज दिन भर होती रहेगी और दिन ढलने के बाद आप बचत करने में भी सक्षम हो पाएंगे। आपको बच्चों या ख़ुद से कम अनुभवी लोगों के साथ धैर्य से काम लेने की ज़रूरत है। अपने प्रिय के बिना समय बिताने में दिक़्क़त महसूस करेंगे। कार्यक्षेत्र में आज आप अपने काम में प्रगति देखेंगे। ऐसे लोगों से जुड़ने से बचें जो आपकी प्रतिष्ठा को आघात पहुँचा सकते हैं। आपके जीवनसाथी की ओर से मिला कोई ख़ास तोहफ़ा आपके खिन्न मन को ख़ुश करने में काफ़ी मददगार साबित होगा।_*

*_उपाय :- सोते समय एक तांबे के पात्र में जल रखकर अगली सुबह घर के पास वाले पेड़ की जड़ में उस जल को डालने से सेहत अच्छी रहेगी।_*

🐂 *_वृषभ राशि :इ, उ, ए, ओ, ब, बी ,बू, बे ,बो।आउटडोर खेल आपको आकर्षित करेंगे- ध्यान और योग आपको फ़ायदा पहुँचाएंगे। आज आपको किसी अज्ञात स्रोत से पैसा प्राप्त हो सकता है जिससे आपकी कई आर्थिक परेशानियां दूर हो जाएंगी। आपका मज़ाकिया स्वभाव आपके चारों ओर के वातावरण को ख़ुशनुमा बना देगा। आपको अपनी तरफ़ से सबसे बेहतर तरीक़े से बर्ताव करने की ज़रूरत है – क्योंकि आज आपका प्रिय जल्दी ही नाराज़ हो सकता है। अपने काम और प्राथमिकताओं पर ध्यान एकाग्र करें। अगर कहीं बाहर जाने की योजना है तो वह आख़िरी वक़्त पर टल सकती है। जीवनसाथी का स्वास्थ्य कुछ गड़बड़ हो सकता है।_*

*_उपाय :- लक्ष्मी-नारायण मंदिर के नियमित दर्शन करने व प्रसाद चढाने से प्रेम सम्बन्ध अच्छे रहेंगे।_*

👩‍❤️‍👨 *_मिथुन राशि :का,की , कु, घ, ङ ,छ, के, को, ह।अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल करना आपके जीवनसाथी को नाराज़ कर सकता है। आपकी माता पक्ष से आज आपको धन लाभ होने की पूरी संभावना है। हो सकता है कि आपके मामा या नाना आपकी आर्थिक मदद करें। कुछ समय आप अपने शौक़ और अपने परिवार वालों की मदद में भी ख़र्च कर सकते हैं। ज़रा संभल कर, क्योंकि आपका प्रिय रूमानी तौर पर आपको मक्खन लगा सकता है – मैं तुम्हारे बग़ैर इस दुनिया में नहीं रह सकता/सकती। आप जो भी करेंगे, बिल्कुल बेहतर ढंग से करेंगे। आपका लाजवाब काम ख़ुद ही आपकी असली क़ीमत लोगों को बताएगा। जिन लोगों के घर वाले शिकायत करते हैं कि वो घरवालों को पर्याप्त समय नहीं देते वो आज घरवालों को समय देने के बारे में सोच सकते हैं लेकिन ऐन वक्त पर किसी काम के आने की वजह से ऐसा नहीं हो पाएगा। जब आपका जीवनसाथी जब सारे मनमुटाव भुलाकर प्यार के साथ आपके पास फिर आएगा, तो जीवन और भी सुन्दर लगेगा।_*

*_उपाय :- विधवाओं की मदद करने से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।_*

🦀 *_कर्क राशि :ही, हू, हे, हो, डा, डी ,डू, डे,डो।अपने विचार और ऊर्जा को उन कामों में लगाएँ, जिनसे आपके सपने हक़ीक़त का रूप ले सकते हैं। सिर्फ़ ख़याली पुलाव पकाने से कुछ नहीं होता है। अभी तक आपके साथ समस्या यह है कि आप कोशिश करने की बजाय केवल इच्छा करते हैं। अगर आपने अपने घर के किसी सदस्य से उधार लिया था तो उसे आज लौटा दें नहीं तो वो आपके खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर सकता है। आज आपको दूसरों की ज़रूरतों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। हालाँकि बच्चों को ज़्यादा छूट देना आपके लिए समस्या खड़ी कर सकता है। ख़ुशमिज़ाज रहें और प्यार की राह में बाधाओं का सामना करने के लिए तैयार रहें। मुश्किल मामलों से बचने के लिए आपको अपने संपर्क उपयोग करने की ज़रूरत है। अपने समय की कीमत समझें, उन लोगों के बीच रहना जिनकी बातें आपके समझ में नहीं आती हैं गलत है। ऐसा करना भविष्य में आपको परेशानियों के अलावा कुछ नहीं देगा। जीवनसाथी के साथ एक आरामदायक दिन बीतेगा।_*

*_उपाय :- स्वस्थ पारिवारिक जीवन पानें पिछड़ी जाति से आने वाली लड़कियों की सहायता करें।_*

🦁 *_सिंह राशि :मा, मी, मू, में, म़ो, ट, टी, टू, टे।आज अपनी सेहत के चिंता करने की क़तई ज़रूरत नहीं है। आपके आस-पास के लोग आपको प्रोत्साहित करेंगे व सराहेंगे। आपका धन आपके काम तभी आता है जब आप फिजूलखर्ची करने से खुद को रोकते हैं आज ये बात आपको अच्छी तरह से समझ में आ सकती है। नवयुवकों को स्कूल प्रोजेक्ट की बाबत कुछ राय लेने की ज़रूरत हो सकती है। अगर अपने लव पार्टनर को अपना जीवनसाथी बनाना चाहते हैं तो उनसे आज बात कर सकते हैं। हालांकि बात करने से पहले आपको उनके मनोभावों को जान लेना चाहिए। आज आपकी कलात्मक और रचनात्मक क्षमता को काफ़ी सराहना मिलेगी और इसके चलते अचानक लाभ मिलने की संभावना भी है। आज काफ़ी दिगाग़ी कसरत मुमकिन है। आपमें से कुछ शतरंज खेल सकते हैं, वर्ग-पहेली हल कर सकते हैं, कोई कविता-कहानी लिख सकते हैं या भविष्य की योजनाओं पर गहराई से सोच सकते हैं। कोई पुराना दोस्त आपके और आपके जीवनसाथी की साझा यादों को तरोताज़ा कर सकता है।_*

*_उपाय :- नरसिंह चालीसा व आरती पढ़ने से पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा।_*

👰🏻‍♀ *_कन्या राशि :टो,पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, प़ो।आपका तल्ख़ बर्ताव जीवनसाथी के साथ आपके संबंधों में तनाव डाल सकता है। कोई भी ऐसा काम करने से पहले इसके परिणामों के बारे में सोच लें। अगर मुमकिन हो तो अपना मूड बदलने के लिए कहीं और जाएँ। घर की छोटी-छोटी चीजों पर आज आपका बहुत धन खराब हो सकता है जिसकी वजह से आप मानसिक तनाव में आ सकते हैं। वक़्त पर आपकी मदद किसी की ज़िंदगी बचा सकती है। यह बात आपके परिवार वालों को आपके ऊपर गर्व करने की वजह देगी और उन्हें प्रेरित करेगी। आपका प्यार न सिर्फ़ परवान चढ़ेगा, बल्कि नई ऊँचाइयों को भी छूएगा। दिन की शुरुआत प्रिय की मुस्कान से होगी और रात उसके सपनों में ढलेगी। किसी के साथ नयी परियोजना या भागीदारी वाले व्यवसाय को शुरू करने से बचें। जो लोग घर सेे बाहर रहते हैं आज वो अपने सारे काम पूरे करके शाम के समय किसी पार्क या एकांत जगह पर समय बिताना पसंद करेंगे। आज आपका आपस में कुछ ज्यादा विवाद हो सकता है जिसके दूरगामी परिणाम वैवाहिक जीवन के लिए नकारात्मक हो सकते हैं।_*

*_उपाय :- स्वास्थ्य लाभ के लिए पीला रुमाल जेब में रखें।_*

⚖️ *_तुला राशि :रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते।आपमें से कुछ लोगों को आज महत्वपूर्ण फ़ैसला लेने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है, जिससे आप तनावग्रस्त और चिंतित हो सकते हैं। यात्रा आपको थकान और तनाव देगी- लेकिन आर्थिक तौर पर फ़ायदेमंद साबित होगी। दफ़्तर के कामकाज में ज़्यादा व्यस्तता के चलते अपने जीवनसाथी के साथ आपका रिश्ता तनावपूर्ण हो सकता है। रोमांस के लिए अच्छा दिन है। वरिष्ठ से आपको पदोन्नति या लम्बे वक़्त से लटके किसी काम के पूरे होने का तोहफ़ा मिल सकता है। आज आपको महत्वपूर्ण मामलों पर ध्यान लगाने की ज़रूरत है। घरेलू मोर्चे पर बढ़िया खाने और गहरी नीन्द का पूरा लुत्फ़ आप ले पाएंगे।_*

*_उपाय :- सेहत दुरुस्त रखनी हो तो सूर्य स्नान (नहाने के पानी में गेहूँ, साबुत मसूर, लाल सिंदूर डालकर) करें।_*

🦂 *_वृश्चिक राशि :तो,न, नी, नू, ने, नो, या, यी , यु।मुस्कुराएँ, क्योंकि यह सभी समस्याओं का सबसे उम्दा इलाज है। घर के जरुरी सामान पर धन खर्च करके आपको आर्थिक परेशानी तो आज जरुर होगी लेकिन इससे आप भविष्य की कई परेशानियों से बच जाएंगे। किसी दूर के रिश्तेदार से अचानक मिली ख़बर आपका दिन बना सकती है। आपकी प्रेम कहानी आज एक नया मोड़ ले सकती है, आपका साथी आज आपसे शादी को लेकर बात कर सकता है। ऐसे में कोई भी फैसला लेने से पहले आपको विचार अवश्य करना चाहिए। आपका वर्चस्ववादी स्वभाव आलोचना की वजह बन सकता है। जरुरी कामों को समय न देना और फिजूल के कामों पर वक्त जाया करना आज आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है। आज के दिन जीवन साथी पर किया गया संदेह आने वाले दिनों में आपके वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।_*

*_उपाय :- अच्युतं केशवं विष्णुं हरिं सत्यं जनार्दनम्। हंसं नारायणं चैवमेतन्नमाष्टकम् पठेत।। विष्णु जी के इन 8 नामों का जाप करने से आर्थिक उन्नति होगी।_*

🏹 *_धनु राशि :ये,यो, भा, भी,, भू, ध,फ, ढ़, भे।भागमभाग भरे दिन के बावजूद आपकी सेहत पूरी तरह दुरुस्त रहेगी। पैसा अचानक आपके पास अएगा, जो अपके ख़र्चों और बिल आदि को सम्हाल लेगा। आप महसूस करेंगे कि आपके दोस्त सहयोगी स्वभाव के हैं- लेकिन बोलने में सावधानी बरतें। आपके प्यार को न सुनना पड़ सकता है। अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए नयी तकनीकों का सहारा लें। आपकी शैली और काम करने का नया अन्दाज़ उन लोगों में दिलचस्पी पैदा करेगा, जो आप पर नज़दीकी से ग़ौर करते हैं। इस राशि के छात्र आज मोबाइल पर सारा दिन बर्बाद कर सकते हैं। अपने जीवनसाथी को सरप्राइज़ देते रहें, नहीं तो वह ख़ुद को आपके जीवन में महत्वहीन समझ सकता है।_*

*_उपाय :- बेडरूम की दक्षिण दीवार पर ज़ीरो वाट का लाल बल्ब जलाएं, इससे पारिवारिक सुख बढ़ेगा।_*

🐊 *_मकर राशि :भो,ज, जी,जू,जे जो, खी,खू, खे, खो, गा, गी।आज के मनोरंजन में बाहर की गतिविधियों और खेल-कूद को शामिल किया जाना चाहिए। जमीन या किसी प्रॉपर्टी में निवेश करना आज आपके लिए घातक हो सकता है जितना हो सके इन चीजों में निवेश करने से बचें। आज आपका ऊर्जा से भरपूर, ज़िंदादिल और गर्मजोशी से भरा व्यवहार आपके आस-पास के लोगों को ख़ुश कर देगा। आपको आज ही अपने प्रिय को दिल की बात बताने की ज़रूरत है, क्योंकि कल बहुत देर हो जाएगी। कार्यक्षेत्र में आपको कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह दिन बेहतरीन दिनों में से एक हो सकता है। आज दिन में आप कई अच्छे प्लान भविष्य के लिए बना सकते हैं लेकिन शाम के वक्त किसी दूर के रिश्तेदार के घर में आ जाने के कारण आपके सारे प्लान धरे के धरे रह सकते हैं। घरेलू मोर्चे पर बढ़िया खाने और गहरी नीन्द का पूरा लुत्फ़ आप ले पाएंगे।_*

*_उपाय :- अपने इष्टदेव को पीले पुष्प चढ़ाएं, इससे आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी।_*

⚱️ *_कुम्भ राशि :गू, गे, गो, सा, सि, सू, से, सो, द।दोस्तों के साथ शाम अच्छी रहेगी लेकिन ज़्यादा खाने से बचें क्योंकि यह आपकी अगली सुबह ख़राब कर सकती है। अतिरिक्त धन को रिअल एस्टेट में निवेश किया जा सकता है। घर में साफ़-सफ़ाई की ज़रूरत तुरंत है। हमेशा की तरह इस काम को अगली बार के लिए न टालें और कमर कस कर जुट जाएँ। अगर आपको लगता है कि आपका लवमेट आपकी बातों को समझ नहीं पाता तो आज उनके साथ वक्त बिताएं और अपनी बातों को स्पष्टता के साथ उनके सामने रखें। कामकाज के मामलों को सुलझाने के लिए अपनी होशियारी और प्रभाव का इस्तेमाल करें। आप खुद को समय देना जानते हैं और आज तो आपको काफी खाली समय मिलने की संभावना है। खाली समय में आज आप कोई खेल-खेल सकते हैं या जिम जा सकते हैं। आज आपको महसूस होगा कि जीवनसाथी की ज़िन्दगी में आपकी कितनी एहमियत है।_*

*_उपाय :- बड़ के पेड़ पर दूध चढ़ायें और फिर गीली हुई मिटटी से तिलक करें, स्वास्थ्य बढ़िया रहेगा।_*

🐬 *_मीन राशि:दी, दु, थ, झ, ञ, दे, दो, च, ची।आपमें आज चुस्ती-फुर्ती देखी जा सकती है। आपका स्वास्थ्य आज पूरी तरह से आपका साथ देगा। परिवार के किसी सदस्य के बीमार पड़ने की वजह से आपको आर्थिक परेशानी आ सकती है, हालांकि इस वक्त आपको धन से ज्यादा उनकी सेहत की चिंता करनी चाहिए। जीवनसाथी से झगड़ा मानसिक तनाव की ओर ले जा सकता है। बेकार का तनाव लेने की ज़रूरत नहीं है। ज़िंदगी का एक बड़ा सबक़ इस बात को मान लेना है कि बहुत-सी चीज़ों को बदलना नामुमकिन है। प्यार में थोड़ी निराशा आपको हतोत्साहित नहीं कर सकेगी। कामकाज के नज़रिए से आज का दिन वाक़ई सुचारू रूप से चलेगा। मुमकिन है कि आपके अतीत से जुड़ा कोई शख़्स आज आपसे संपर्क करेगा और इस दिन को यादगार बना देगा। आज आपका जीवनसाथी आपकी सेहत के प्रति असंवेदनशील हो सकता है।_*

*_उपाय :- पिता अथवा गुरु के सुबह उठते ही पाँव छुए व सेवा करें। पारिवारिक जीवन सुख-शांतिमय रहेगा।_*

*_🪴🪷⭐जय श्री राम⭐🪷🪴_*

▬▬▬▬▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬▬▬▬▬

तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम्‌ ।

सुखसङ्‍गेन बध्नाति ज्ञानसङ्‍गेन चानघ ॥

*🙏 श्री काशी विश्वनाथ कीजय हो*

🚩🙏🏻 *धर्मो रक्षति रक्षितः ࿗ सुखस्य मूलं धर्मः* 🚩

: *🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*

*⛅दिनांक - 01 सितम्बर 2025*

*⛅दिन - सोमवार*

*⛅विक्रम संवत् - 2082*

*⛅अयन - दक्षिणायण*

*⛅ऋतु - शरद*

*⛅मास - भाद्रपद*

*⛅पक्ष - शुक्ल*

*⛅तिथि - नवमी रात्रि 02:43 सितम्बर 02 तक तत्पश्चात् दशमी*

*⛅नक्षत्र - ज्येष्ठा शाम 07:55 तक तत्पश्चात् मूल*

*⛅योग - विष्कम्भ शाम 04:32 तक तत्पश्चात् प्रीति*

*⛅राहुकाल - सुबह 07:56 से  सुबह 09:31 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)* 

*⛅सूर्योदय - 06:22*

*⛅सूर्यास्त - 06:57 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार)*

*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*

*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:51 से प्रातः 05:36 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*

*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:14 से दोपहर 01:05 तक*

*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:17 सितम्बर 02 से रात्रि 01:02 सितम्बर 02 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*

*⛅️व्रत पर्व विवरण - ज्येष्ठ गौरी पूजा*

*⛅️विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य  है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

   🙏🏻🚩श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🙏🏻🚩

: *📜 01 सितम्बर 📜*

*🎀 भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) // स्थापना दिवस 🎀*

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) एक भारतीय जीवन बीमा कंपनी है जिसकी स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी। यह भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है। भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी होने के साथ ही यह भारत की सर्वश्रेष्ठ बीमा कंपनी है जो अपनी बेहतर बीमा सेवाओं के लिए जाना जाता है। इस बीमा कंपनी का मुख्यालय भारत के मुंबई शहर में स्थित है। इस बीमा निगम कंपनी का स्वामित्व भारत सरकार के पास है।

>> भारतीय जीवन बीमा निगम कंपनी की स्थापना <<

भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India) की स्थापना 1 सितंबर 1956 को हुई। दर‌असल वर्ष 1956 में भारतीय संसद ने देश में बीमा उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया जिसके लिए भारत के संसद ने भारतीय जीवन बीमा अधिनियम पारित किया। भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना भी इसी अधिनियम के तहत हुआ। उस समय राज्य के स्वामित्व वाली भारतीय जीवन बीमा निगम बनाने के लिए भारतीय संसद ने देश के 245 से अधिक बीमा कंपनियों और प्रोविडेंट सोसायटियों का विलय कर दिया।

>> भारतीय जीवन बीमा निगम के कार्य <<

भारतीय जीवन बीमा निगम हमारे देश की एक सर्वश्रेष्ठ जीवन बीमा कंपनी है जो देश के नागरिकों को जीवन बीमा उपलब्ध करवाता है। भारतीय जीवन बीमा निगम का मुख्य कार्य लोगों को विभिन्न प्रकार की सुरक्षा बीमा उपलब्ध करवाना है। LIC एक जीवन बीमा कंपनी है जो लोगों को अनेक प्रकार की सुरक्षा बीमा प्रदान करता है। इस बीमा कंपनी का कार्य है, लोगों को बीमा के बारे में जागरूक करना एवं उनका बीमा करना ताकि यदि किसी बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो यह बीमा कंपनी उनके उत्तराधिकारी को निश्चित राशि का भुगतान करती है।

इसके अतिरिक्त यदि बीमित व्यक्ति के साथ कोई दुर्घटना घटित हो जाता है तो यह बीमा निगम कंपनी दुर्घटना बीमा के तहत उस व्यक्ति को क्षतिपूर्ति प्रदान करने का उत्तरदायित्व लेता है। क्योंकि इस बीमा निगम कंपनी की स्थापना का उद्देश्य कम्पनियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना नहीं है, बल्कि यह जीवन बीमा कंपनी, कम्पनियों को वित्त प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। इसके साथ ही यह बीमा निगम कंपनी विभिन्न औद्योगिक कम्पनियों की प्रतिभूतियों के अभिगोपन का कार्य करता है तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा जारी बाण्डों तथा अंशों की खरीद करके उनके लिये साख व्यवस्था करता है।

वर्ष 1956 में भारतीय जीवन बीमा निगम कंपनी का राष्ट्रीयकरण किया गया। इसके राष्ट्रीयकरण के पूर्व इसके कुल वित्त विनियोग का 16 प्रतिशत ही इस निगम द्वारा कम्पनियों की प्रतिभूतियों में विनियोजित किया जाता था। लेकिन वर्तमान समय में इसके निवेश में काफी वृद्धि हुई है।

भारत के राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में इस जीवन बीमा कंपनी की भूमिका देखते हुए वर्ष 1975 में इस कंपनी के उपबन्धों में संशोधन किया गया। इसके संशोधन के प्रश्चात कंपनी के नियन्त्रित कोष में हुई वृद्धि का 25 प्रतिशत केन्द्र सरकार के ऋण करों और कम से कम 50 प्रतिशत केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा स्थानीय सरकार द्वारा गारण्टी शुदा बाजार ऋण में लगाना होता है।

भारतीय जीवन बीमा कंपनी भारत की एक सर्वश्रेष्ठ जीवन कंपनी के साथ ही यह भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एवं दुनिया की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनियों में से एक है। इसके साथ ही वर्तमान समय में भारत के औद्योगिक एवं व्यवसायिक संस्थानों को वित्त प्रदान करने में इस बीमा कंपनी का एक अहम योगदान है, जिसके कारण हम यह कह सकते हैं कि भारत के आर्थिक विकास में इस बीमा कंपनी का एक महत्वपूर्ण योगदान है।

 देवेन्द्र सिकरवार✍️

#प्रतिसंतुलन

इन दिनों चीन व भारत के बीच बड़े आवन जावन हो रहा है और तथाकथित विशेषज्ञ 'रिक्स' या 'ब्रिक्स' के मजबूत गठबंधन की संभावनाएं जता रहे हैं। 

आपको जानकर अच्छा नहीं लगेगा होगा लेकिन सच यह है कि ऐसा शायद ही हो। 

प्रतिसंतुलन द्वारा संतुलन ही मोदी सरकार की विदेश नीति का मुख्य आधार है। 

इस नीति के मूल में हैं भारत के पास अपरिहार्यता की चाबी का अभाव जो सारे बिग प्लेयर्स के पास है। 

--अमेरिका के पास टेक्नोनोलॉजिकल सुपीरियरटी, सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और गोरे नस्लवाद से जुड़े यूरोपीय देशों का समर्थन है। 

--रूस के पास विनाशकारी हथियार टेक्नोलॉजी, तेल व गैस और चीन जैसा खरीददार है। 

-चीन अकेला है लेकिन उसकी अर्थ व्यवस्था 18 ट्रिलियन की है और उसके पास विश्व की सप्लाई चेन विशेषतः रेयर अर्थ मिनरल व कुछ अन्य तकनीकी हार्डवेयर उत्पादन की चाबी है जिसके बिना अमेरिका, यूरोप का सैन्य, ऑटोमोबाईल व इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन ठप हो जायेगा। 

-भारत के पास फिलहाल क्या है? 

भारत के पास आज की तारीख में हथियार विशेषतः वैमानिकी में पूर्ण आत्मनिर्भरता नहीं है और जनसंख्या के लिहाज से प्रति व्यक्ति उच्च आय वाली पर्याप्त विकसित अर्थव्यवस्था भी नहीं है और यही कारण है कि मोदी क्वाड को एकदम से छोड़ना नहीं चाहते हालाँकि क्वाड का आधार बुरी तरह दरक चुका है। 

लेकिन भारत के पास एक ताकत है जो विश्व में किसी के पास नहीं है-

विश्व का सबसे बड़ा 'मध्यम वर्ग' का उपभोक्ता बाजार। 

लेकिन यह भारत की सबसे बड़ी ताकत के साथ-साथ कमजोरी भी है। 

भारत की जनता के संदर्भ में मोदीजी की स्थिति उस बाप की तरह है जिसकी एक बहुत खूबसूरत बेटी और एक अपाहिज बेटी है और वह दोनों से समान प्रेम करता है, विशेषतः कमजोर बेटी से क्योंकि उसे वह अपनी दूसरी बेटी की ही तरह स्वस्थ व सुंदर देखना चाहता है। 

लेकिन चारों ओर फैले भेड़िये इस बाप की खूबसूरत बेटी पर जीभ लपलपा रहे हैं और दुःख की बात यह है कि यह बेटी भी बाप के दुःख को समझने को तैयार नहीं और उसे लगता है कि बाप उसके हिस्से के पैसे उसकी बदसूरत व अपाहिज बहन पर खर्च किये जा रहा है। 

मध्यम वर्ग वही खूबसूरत लड़की है और भारत के किसान, पशुपालक, मजदूर व आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग आदि कुल 40% जनसंख्या उसकी अपाहिज बेटी है। 

अमेरिका चाहता है कि मोदी अपनी इस खूबसूरत बेटी को उसे ब्याह दे यानि अपने दरवाजे कृषि व डेयरी उत्पादों के लिए खोल दे। 

चीन की भी यह गंदी ख्वाहिश सस्ते व विषैले इलेक्ट्रोनिक सामानों के संदर्भ में तो है ही, साथ ही वह ताइवान और तिब्बत की नस से भारत का हाथ हटवाना चाहता है। 

अब मोदी जी के सामने इधर कुआँ और उधर खाई है। 

पर यह सारी स्थिति तो ट्रम्प के प्रथम कार्यकाल में भी थीं पर तब ऐसा क्यों नहीं हुआ? 

ब्रह्मा चेलानी जैसे विशेषज्ञ जब यह कहते हैं कि मोदी को ट्रम्प के ईगो को संतुष्ट करना चाहिए जैसे कि कल यूरोपीय नेताओं ने किया तो मुझे हंसी आती है कि भारत की एक समस्या ऐसे विशेषज्ञ भी हैं। 

यह सही है कि मोदी जी ने जो बिडेन के काल में ट्रम्प से मिलने से इनकार कर भीषण गलती की थी परन्तु उसके बदले ट्रम्प व्हाइट हाउस में मोदी जी का स्वागत एक सचिव से करवाकर अपना बदला पूरा कर चुके हैं लेकिन उसके बाद जो कुछ हो रहा है उसमें व्यक्तिगत एंगल ढूंढना ज्यादती लगती है हालाँकि नोबेल पुरुस्कार की ट्रम्प की सनक ने सम्भवतः फिर एक मूर्खतापूर्ण व्यक्तिगत एंगल जोड़ दिया है। 

लेकिन अगर अमेरिका 'क्वाड' की कीमत पर भी यह सब कर रहा है तो मामला ट्रम्प की पहुँच से ऊपर चल रहा है, चाहे वह अमेरिकन डीप स्टेट द्वारा ब्लैकमेलिंग हो या स्वयं ट्रम्प के व्यापारिक साम्राज्य को बढ़ाने देने की शर्त पर समझौता हो। 

पर हम इस संभावना को अगर असम्भव मानते हैं तो अमेरिका इस कदर भारत पर झुंझुलाया हुआ क्यों हैं? 

उत्तर है, पश्चिमी प्रवृत्ति। 

पश्चिम पिछले तीन सौ वर्ष से कभी स्पेन, कभी ब्रिटेन और आज अमेरिका के नेतृत्व में विश्व पर राज कर रहा है। 

जब भी विश्व में कोई शक्ति उभरती है, ये भेड़ियों के झुंड की तरह उस पर टूट पड़ते हैं, चाहे वह सोवियत संघ जैसा दानव हो या जापान जैसा बौना या सद्दाम जैसा छोटा मोटा मोहरा। 

इन सबके बीच चीन स्वयं को सोवियतों का प्रतिद्वंदी बताते हुए पश्चिम को उल्लू बनाकर अपने कोकून में अपना विकास करता रहा और पश्चिम अपनी जरूरत के कारण चीन को भारत के रीढ़ विहीन कांग्रेसी नेताओं का देश समझकर उसे इग्नोर करता रहा। 

लेकिन चालीस साल बाद जब कोकून से तितली की बजाय भयंकर ड्रेगन प्रकट हुआ तो आनन फानन में 2007 में 'क्वाड' का गठन हुआ। 

यह भले चार देशों का समूह था लेकिन वास्तविकता यह थी कि सैन्य दृष्टि से सारा भार अमेरिका को ही उठाना था और ऑस्ट्रेलिया सप्लाई के लिए चीन पर निर्भर था इसलिए क्वाड कागज पर ही बना रहा।

लेकिन 2014 में मोदी सरकार के आने के साथ स्थिति में तेजी से परिवर्तन हुआ। भारत न केवल तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बना बल्कि सैन्य रुप से भी बेहद शक्तिशाली बना इसलिए 2017 में वर्ल्ड ऑर्डर की पटकथा पुनः लिखते हुए क्वाड को सक्रिय किया गया। 

2020 में कोविड के कारण प्रॉडक्शन सेंटर चीन से भारत की ओर शिफ्ट हुआ तो ऑस्ट्रेलिया की झिझक भी मिटी और क्वाड एक वास्तविक संगठन में बदला। 

अमेरिकी थिंक टैंक की नीयत भारत को चीन के विरुद्ध उसी तरह इस्तेमाल करने की थी जैसे कार्नवालिस ने टीपू के विरुद्ध मराठों को इस्तेमाल किया था जिसमें सारे नुक्सान मराठो के हिस्से आये और लाभ अंग्रेजों के। 

लेकिन अमेरिकी थिंक टैंक का एक वर्ग शुरू से ही मोदी की 'इंडिया फर्स्ट' नीति को लेकर आशंकित था जिसकी अभिव्यक्ति न्यूयॉर्क टाइम्स में उस अभिलेख में हुई जिसमें मोदी पर अमेरिका व पश्चिम को भारत के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। 

इसीलिये अमेरिकी डीप स्टेट ने चीन पर निगाह रखने के नाम पर बांग्लादेश से सैन्य अड्डे के लिए टापू की मांग की ताकि भारत पर नजर व नियंत्रण रखा जा सके। 

लेकिन भारत की बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति और ऑपरेशन सिंदूर में सैन्य शक्ति के अकल्पनीय प्रदर्शन ने अमेरिका को अपनी रणनीति बदलने पर विवश कर दिया है। 

उन्हें स्पष्ट तौर पर यह लगने लगा है कि कहीं ऐसा न हो कि चीन को बर्बाद करने की कोशिश में भारत इतना शक्तिशाली हो जाये कि पश्चिम के लिए सैन्य चुनौती बन जाये जबकि विश्व में इस्कॉन के माध्यम से 'सांस्कृतिक चुनौती' पहले ही बना हुआ है। 

अस्तु! यह निर्विवाद सत्य है कि कुछ मिलिट्री तकनीक व तेल को छोड़ दें तो चीन विश्व शक्ति संतुलन में रूस से ऊपर है लेकिन वह अमेरिका व यूरोप की 'भेड़ियों के झुंड' के रुप में में 'शिकार' करने की वृत्ति से पहले ऐतिहासिक अनुभव से परिचित हैं और आशंकित भी। 

लेकिन केवल यही कारण नहीं है जो चीन भी भारत से बड़ी गर्मजोशी से मिल रहा है। 

वास्तव में इसके पीछे वही पुष्ट-अपुष्ट घटना है जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई और वह थी पाकिस्तान में अमेरिकी न्यूक्लियर मिसाइल अड्डे का खुलासा। 

चीन को पाकिस्तान का 'वेश्या चरित्र' एकदम स्पष्ट हो गया और जिस तरह आसिम मुनीर ट्रम्प की गोदी में बैठ गया है, उससे स्पष्ट है कि पाकिस्तानी एकदम अविश्वसनीय चरित्र का देश है लेकिन वहां उसका अरबों का निवेश सी पैक में फंसा पड़ा है अतः वह पाकिस्तान को छोड़ भी नहीं सकता। 

लेकिन भारत से ऐतिहासिक सीमा विवाद और तिब्बत की फांस के चलते भारत से दीर्घकालीन संबंध भी संभव नहीं है 

इसीलिये चीन का विदेश मंत्री भारत दौरे के बाद सीधे पाकिस्तान दौड़ा, सफाई देने के लिए।

इसी तरह मोदी जी भी शंघाई सम्मिट में जाने से पूर्व जापान पहुंचे हैं ताकि चीन के भविष्य के के खतरे को न्यूट्रलाइज करने के लिए एक मोहरा बना रहे। 

अमेरिका भी भली भांति जानता है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद कभी नहीं सुलझेगा और उसके रहते कभी भी दोनों देश एक दूसरे पर भरोसा नहीं कर सकते और इसी लिए अमेरिकी वित्त सचिव भारत पर दिनोंदिन मौखिक हमले करने की जुर्रत कर रहा है। 

यह भी कड़वा सत्य है कि अमेरिका जानता है कि भारत के पास बेचने को जो कुछ है उसका बाजार या तो अमेरिका है या यूरोप और यूरोप अमेरिका के इशारों पर नाचता है जैसा कि पिछले दिनों हमने देखा जब ट्रम्प प्रिंसिपल की तरह बैठकर व्हाइट हाउस में युरोपियन नेताओं की क्लास ले रहे थे। चीन स्वयं उत्पादक है, जापान में उपभोग सीमित है और रूस को जरूरत नहीं और इसीलिये भारत को नुक्सान उठाना ही होगा जो राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए कोई मायने नहीं रखता। 

इसके उपरान्त भी एक बात तो तय है कि जब अमेरिका भारत पर 1965, 1974, 1998 में प्रतिबन्ध लगाकर कुछ बिगाड़ नहीं पाया तो 50 प्रतिशत टेरिफ से हुए थोड़े आर्थिक नुक्सान से क्या ही बिगड़ेगा। 

लेकिन अमेरिका को असली डर है ब्रिक्स करेंसी से। 

ब्रिक्स में स्वयं भारत ब्रिक्स करेंसी नहीं चाहता क्योंकि यह वस्तुतः चीनी यूआन को अधिक फायदा पहुंचायेगा इसलिए भारत स्वयं रूपये विनिमय मुद्रा के रूप में मजबूत करने के प्रयासों में जुटा है। 

इसके अलावा अमेरिका को इंडो पेसफिक में भारत के नौसैनिक सैन्य महत्व का भी पता है। इसीलिये अमेरिका ने जापान और ऑस्ट्रेलिया से स्पष्ट पूछा है कि जब ताईवान को लेकर उसका चीन से युद्ध होगा तो वह उसका साथ देंगे या नहीं। 

इसलिए भारत के लिए विश्व में अजीब स्थिति बनी हुई है। 

रूस vs अमेरिका + यूरोप

चीन vs अमेरिका + यूरोप 

चीन vs जापान + अमेरिका 

भारत vs चीन + पाकिस्तान

इजरायल + अमेरिका vs मुस्लिम देश 

भारत vs पाकिस्तान + कभी अमेरिका कभी चीन

अब विश्व में भारत के मात्र दो प्राकृतिक सहयोगी हैं- इजरायल और जापान लेकिन वहां भी द्वैत है इसलिए खुलकर किसी एक का पक्ष नहीं ले सकते। 

भारत का मूल उद्देश्य है पाकिस्तान का विखंडन और गिलगित बाल्टिस्तान को हासिल करना और तब जाकर वह पश्चिम दिशा से फ्री हैंड होकर मनचाही विदेश नीति चला सकता है और तब उसे,

रूस और अमेरिका,

चीन और जापान, 

इजरायल और मुस्लिम देश,

इनके बीच संतुलन साधकर ही चलना होगा। 

विदेश नीति में राष्ट्रीय स्वार्थ महत्वपूर्ण होते हैं निजी सम्मान और भावनाएं नहीं। 

-बीते कल मोदी के गले मिलते ट्रम्प का फोन तक आज मोदी नहीं उठाते और कल को फिर हो सकता है मोदी ही ट्रम्प को शांति का मसीहा घोषित कर दें बशर्ते भारत के राष्ट्रीय हित पूरे हो रहे हों। 

-आज चीन के रैड कारपेट पर चीन के स्वागत को स्वीकार करते मोदी कल को अंडमान की नौसैनिक कमांड को चीन की सप्लाई लाइन को ब्लॉक करने का आदेश भी जारी कर सकते हैं। 

-आज पुतिन से गले लगते मोदी कल को तेल खरीद बंद करके अमेरिकी F 35 खरीदने का समझौता कर सकते हैं। 

-ईरान ओ अरब से गले मिलते मोदी इजरायल को हमास पर बरसाने के लिए गोला बारूद सप्लाई कर सकते हैं। 

अब भारत के कुछ सयाने, राष्ट्रीय हित साधने की नीति पर व्यंग्य करें, आहत हों, क्रुद्ध हों तो क्षमा कीजिये आप आज नहीं बल्कि जन्म से विशुद्ध क्यूट हैं।

: संघ यात्रा के नए क्षितिज..!

- प्रशांत पोळ

दिनांक 26, 27 और 28 अगस्त को, दिल्ली के विज्ञान भवन में '100 वर्ष की संघ यात्रा - नए क्षितिज' इस शीर्षक से व्याख्यानमाला संपन्न हुई। यह व्याख्यानमाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आयोजित की थी और सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत जी इसमें वक्ता थे। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के गिने-चुने एक हजार लोग आमंत्रित थे। इनमें कुछ देशों के राजनयिक भी सम्मिलित थे। विज्ञान भवन अत्याधुनिक तकनीकी से सुसज्जित हैं। इसलिए, सरसंघचालक जी जब हिंदी में बोल रहे थे, तभी हेडफोन्स के माध्यम से उसे अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश और जर्मन भाषा में सुनने की व्यवस्था थी। हम यूं समझें, कि देश के वैचारिक क्षेत्र के Who's Who वहां उपस्थित थे।

मोटे तौर पर, पहले दिन सरसंघचालक जी ने सौ वर्ष के संघ के प्रवास का वर्णन

किया। संघ की स्थापना की आवश्यकता का गहराई से विवेचन किया। दूसरे दिन, संघ के प्रवास की दिशा क्या रहेगी, संघ का लक्ष्य क्या रहेगा, अगले सौ वर्षों की संघ की सोच क्या रहेगी, इन विषयों पर चर्चा की। अंतिम दिन श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर दिए।

तीन दिनों की यहां व्याख्यानमाला अनेक अर्थों में ऐतिहासिक थी। संघ के बारे में अत्यंत स्पष्ट चित्र खींचने वाली थी। यह दिशा दर्शक भी थी।

इस विजया दशमी को संघ को सौ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। यह एक बहुत बड़ा मील का पत्थर हैं। किंतु साध्य नहीं हैं। इस प्रवास में अभी और आगे जाना है।

'कहां तक और किस दिशा में..?'

इसका उत्तर भी सरसंघचालक जी ने बड़े विस्तार के साथ दिया हैं। आपका दूसरे दिन का उद्बोधन, कार्यक्रम प्रारंभ होने के बाद 30 वे मिनट से आगे, लगभग 10 - 12 मिनट तक यदि हम सुनते हैं, तो सारा चित्र स्पष्ट हो जाता हैं।

सरसंघचालक जी ने धर्म (रिलिजन नहीं) की स्पष्टता बताते हुए कहा कि, "धर्म तो इस सृष्टि में पहले से ही अस्तित्व में था। धर्म यह यूनिवर्सल हैं। विश्व की गति को पहचान कर उसको ठीक से चलाने वाला जो प्राकृतिक नियम हैं, वह धर्म हैं।"

धर्म की इतनी सरल, इतनी सुंदर और इतनी सुस्पष्ट व्याख्या हमने कहीं सुनी नही होगी।

इसी विचार को आगे बढ़ते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि, "इस धर्म को हमें विश्व को समझाना हैं। उसे सारे विश्व में लेकर जाना हैं।"

पर कैसे..?

Not by Preaching, not by Conversion, but by Practice.

(प्रवचन या भाषण देकर नहीं, धर्मांतरण करके भी नहीं, तो धर्म को जीने का उदाहरण प्रस्तुत करके)

यह जबरदस्त हैं। नए वैश्विक परिदृश्य में यह अत्यंत प्रभावी संदेश हैं। 'वसुधैव कुटुंबकम्' की हमारी संकल्पना प्राचीन हैं। उसे अगले 100 वर्षों में धरातल पर उतारने का संकल्प लेकर संघ आगे बढ़ रहा हैं।

सरसंघचालक जी ने वर्ष 1991 का एक वाकया बताया। तब वह विदर्भ प्रांत के प्रांत प्रचारक थे। स्वर्गीय लक्ष्मणराव जी भिड़े उन दिनों पश्चिम क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक थे। इससे पहले वह अनेक वर्ष विदेश विभाग में प्रचारक थे। सरसंघचालक जी 1991 के वर्ग में लक्ष्मणराव जी भिड़े के उद्बोधन का उल्लेख कर रहे थे। उस उद्बोधन में लक्ष्मणराव जी ने कहा कि, "भारत के बाहर संघ का कार्य करने वाली अब तीसरी पीढ़ी हैं। इस पीढ़ी ने अपने-अपने देशों में, देश - काल - परिस्थिति और प्रवृत्ति के अनुरूप संघ खड़ा करना चाहिए। ऐसा संघ, जिसे देखकर उस देश के लोग कहे, हमें ऐसा RSS खड़ा करना हैं..!"

कितनी बड़ी सोच है यह..!

स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी की कविता की पंक्तियां हैं -

     शत जन्म शोधिताना I शत आर्ति व्यर्थ झाल्या I

     शत सूर्य मालिकांच्या I दीपावली विझाल्या II

(असंख्य जन्मों की खोज, अनगिनत आरतियाँ और हजारों सूर्य-मालाओं की दीप्ति भी निष्फल सिद्ध हुई, मानो दीपावली के दीप भी बुझ गए हों।)

इसमें सावरकर जी अपने सौरमाला (सूर्य मंडल) जैसे सौ सौरमाला (Solar System) की बात कर रहे हैं। प्रख्यात मराठी लेखक पु. ल. देशपांडे जी ने कहा था, "सावरकर जी की इन दो पंक्तियों में दिखी विचारों की उडान के लिए उन्हें साहित्य का नोबेल मिलना चाहिए।"

बस् ऐसा ही कुछ इस सोच में भी है।

       विश्व धर्म प्रकाशेन I विश्व शांति प्रवर्तके II

अर्थात, इस विश्व धर्म के प्रकाश में, विश्व शांति का प्रवर्तन होना चाहिए।

आज जो विश्व का परिदृश्य हम देख रहे हैं, वह बहुत अच्छा नहीं हैं। यहां लड़ाई हैं, संघर्ष हैं, गरीबी हैं, सामाजिक अस्वस्थता हैं, उजड़े हुए कुटुंब हैं, विद्वेष हैं, कट्टरपन और बहशीपन हैं... ऐसे विश्व में आज अपने देश का 'हिंदू विचार' अत्यंत प्रासंगिक और महत्व का बन गया हैं। इसलिए, अब विश्व के अनेक देशों में यह विचार लेकर, उन - उन देशों की प्रकृति और प्रवृत्ति के अनुसार उसे ढालकर, नयी विश्व रचना का सृजन करने की आवश्यकता दिख रही हैं।

सहसा, 11 सितंबर 1893 को, शिकागो के अंतरराष्ट्रीय धर्म परिषद में दिया गया स्वामी विवेकानंद जी का भाषण स्मरण हो आया..!

सरसंघचालक जी ने कहा कि 'वसुधैव कुटुंबकम्' की संकल्पना संघ में नई नहीं हैं। संघ के अंदर कई बार इसकी चर्चा हो चुकी हैं। किंतु प्रकट रूप से संघ यह बात कहता नहीं था। सरसंघचालक जी ने कहा, "उन दिनों यदि हम आपको बुलाते तो आप नहीं आते। आते भी, तो हमारी बातों को गंभीरता से नहीं लेते। और यह विश्व कल्याण की बातें तो आपको स्वप्नरंजन लगती।"

इसका कारण था। तब संघ की विशेष ताकत नहीं थी, और अपने देश की भी स्थिती, किसी को सुनाने जैसी नहीं थी।

किंतु अब नहीं। अब बहुत कुछ बदला हैं। संघ की शक्ति और फैलाव भी बढा हैं। साथ ही, भारत वैश्विक मंच पर एक शक्तिशाली तथा तेजी से आगे बढ़ते देश के रुप मे प्रस्थापित हो चुका हैं।

किंतु सरसंघचालक ने यह भी कहा कि, "विश्व कल्याण की बात करने से पहले हमें एक प्रतीक के रूप में, एक मॉडल के रूप में खड़ा होना पड़ेगा। यदि हम ही हमारे हिंदू विचार को प्रत्यक्ष जीवन में नहीं उतारेंगे, तो विश्व हमारी बातें क्यों सुनेगा.?"

इसलिए, संघ ने अपने प्रवास के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर प्रत्यक्ष समाज में परिवर्तन लाने का संकल्प लिया हैं। इस परिवर्तन के पांच आयाम है - 

1. समरसता - सारा समाज जाति पंथ से परे, एकजुट हो। 'राष्ट्र सर्वप्रथम' यह भावना सबके मन में रहे।

2. पर्यावरण - पर्यावरण पूरक जीवन यह हमारी हिंदू जीवन पद्धति का अभिन्न अंग रहा हैं। उसे, हमे पुनः आज के परिपेक्ष्य में अपनाना हैं।

3. 'स्व' के भाव का जागरण - देश तभी उठ खड़ा होगा, जब हमारे अंदर अपने 'स्व' का भाव जागृत होगा। इसलिए स्वदेशी समवेत, हमारी पहचान से जुड़ी हर चीज अपनानी होगी।

4. परिवार प्रबोधन - समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार, उसे मजबूत करना।

5. नागरिक कर्तव्य - सामाजिक कर्तव्य का निर्वहन करते हुए राष्ट्रहित में योगदान देना।

इन पांच बातों को यदि हम समाज में ठीक से उतारते हैं, तो हम निश्चित रूप से विश्व को कुछ बताने की भूमिका में रह सकेंगे।

इस त्रि दिवसीय व्याख्यानमाला में सरसंघचालक जी ने अत्यंत खुलकर और पारदर्शिता से सारी बातें कहीं। 'हिंदू' शब्द के आग्रह के बारे में तर्कपूर्ण विचार रखें। साथ ही, "भारत यह हिंदू राष्ट्र है। अलग से घोषित करने की आवश्यकता नहीं।" यह भी अत्यंत स्पष्टता से कहा।

दो मिनट के लिए जरा राजनीति को बाजू में रखें, मीडिया के टीआरपी समाचारों को दुर्लक्षित करें और इस तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के बारे में सोचे, तो हम पाएंगे कि भारत के भविष्य का एक सुस्पष्ट चित्र सरसंघचालक जी ने खींचा है..!

- प्रशांत पोळ

(अगर यह व्याख्यानमाला नही सुनी होगी, तो एक बार अवश्य सुने।)

: #स्वदेशीचिट्ठी

भारत में है दम...#बोलो_वंदे_मातरम! आज मैं और कश्मीरी लाल जी वंदे भारत से भोपाल जा रहे थे। ग्वालियर आते-आते फोन खोला तो बड़ा सुखद समाचार देखा अभी "वर्ष 2025..26 की पहली तिमाही में भारत के जीडीपी 7.8% प्रतिशत बढ़ी है,जबकि अनुमान था 6.7% का।

 भारत के ही नहीं, विश्व भर के अर्थशास्त्री हैरान हैं।वास्तव में भारत में इस समय पर युवा शक्ति उछाल पर है।खपत और उत्पाद दोनों बढ़ रहे हैं। इंडस्ट्री ग्रोथ पर है,GST बंपर पैसा दे रहा है।

जरूर ट्रंप को जब यह आंकड़े सुनने को मिले होंगे तो उसका मुंह लटक गया होगा। उधर आज ही मोदी जी ने जापान में बहुत अच्छा समझौता किया है।जापान 5 लाख भारतीयों को रोजगार देगा और वहां से टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट भारत आएगी। इतना ही नहीं जापान ने अमेरिका के साथ अपना व्यापार समझौता फिलहाल रोक दिया है।इसके बाद मोदी जी चीन जाने वाले हैं।अमेरिका की परेशानी पर परेशानी बढ़ रही है।

हमने भी ठाना है ट्रंप और उसके अमेरिका को हराना है। भारत तेजी से स्वदेशी की राह पर बढ़ ही रहा है। सब तरफ इसी का शोर है,शोर नहीं ज़ोर है। जापान और विश्व भर में हमारे हो रहे व्यापार समझौते अपनी जीडीपी को विश्व की सबसे तेज रफ्तार वाली रखेंगे ही, धरे रह जाएंगे ट्रंप के टैरिफ।

भारत की 145 करोड़ जनता इस विश्व व्यापार युद्ध को जीतने को कृत संकल्प है। जय स्वदेशी... सतीश

नीचे...आज प्रगति मैदान दिल्ली में चश्मों की एक प्रदर्शनी में जाना हुआ और एक अच्छा वीडियो किसी कार्यकर्ता ने भेजा, सोचा स्वदेशी चिट्ठी के पाठकों को शेयर करूं। देखिए केवल 1.10 मिनट का विडियो।

: 0️⃣1️⃣❗0️⃣9️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣

*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*

        *!! हंस और दुष्टों की संगति !!* 

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

पुराने समय की बात है। एक राज्य में एक राजा था। किसी कारण से वह अन्य गाँव में जाना चाहता था। एक दिन वह धनुष-बाण सहित पैदल ही चल पड़ा। चलते-चलते राजा थक गया। अत: वह बीच रास्ते में ही एक विशाल पेड़ के नीचे बैठ गया। राजा अपने धनुष-बाण बगल में रखकर, चद्दर ओढ़कर सो गया। थोड़ी ही देर में उसे गहरी नींद लग गई। उसी पेड़ की खाली डाली पर एक कौआ बैठा था। उसने नीचे सोए हुए राजा पर बीट कर दी। बीट से राजा की चादर गंदी हो गई थी। राजा खर्राटे ले रहा था। 

उसे पता नहीं चला कि उसकी चादर खराब हो गई है। कुछ समय के पश्चात कौआ वहाँ से उड़कर चला गया और थोड़ी ही देर में एक हंस उड़ता हुआ आया। हंस उसी डाली पर और उसी जगह पर बैठा, जहाँ पहले वह कौआ बैठा हुआ था अब अचानक राजा की नींद खुली। उठते ही जब उसने अपनी चादर देखी तो वह बीट से गंदी हो चुकी थी। राजा स्वभाव से बड़ा क्रोधी था। उसकी नजर ऊपर वाली डाली पर गई, जहाँ हंस बैठा हुआ था। राजा ने समझा कि यह सब इसी हंस की ओछी हरकत है। इसी ने मेरी चादर गंदी की है।

क्रोधी राजा ने आव देखा न ताव, ऊपर बैठे हंस को अपना तीखा बाण चलाकर, उसे घायल कर दिया। हंस बेचारा घायल होकर नीचे गिर पड़ा और तड़पने लगा। वह तड़पते हुए राजा से कहने लगा-

'अहं काको हतो राजन्!

हंसाऽहंनिर्मला जल:।

दुष्ट स्थान प्रभावेन,

जातो जन्म निरर्थक।।'

अर्थात् हे राजन्! मैंने ऐसा कौन सा अपराध किया, तुमने मुझे अपने तीखे बाणों का निशाना बनाया है? मैं तो निर्मल जल में रहने वाला प्राणी हूँ? ईश्वर की कैसी लीला है। सिर्फ एक बार कौए जैसे दुष्ट प्राणी की जगह पर बैठने मात्र से ही व्यर्थ में मेरे प्राण चले जा रहे हैं, फिर दुष्टों के साथ सदा रहने वालों का क्या हाल होता होगा? हंस ने प्राण छोड़ने से पूर्व कहा - 'हे राजन्! दुष्टों की संगति नहीं करना। क्योंकि उनकी संगति का फल भी ऐसा ही होता है।' राजा को अपने किए अपराध का बोध हो गया। वह अब पश्चाताप करने लगा।

*शिक्षा:-*

उपर्युक्त प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि 'हमें दुष्टों की संगति में रहने से बचना चाहिये', क्योंकि दुष्ट प्रवृत्ति के लोगों की संगति का फल भी उनके जैसा ही होता हैं। साथ ही, हमें किसी भी काम को करने से पहले अच्छे से सोच-समझ लेना चाहिए। बिना सोचे-विचारे कुछ भी काम नहीं करना चाहिए।

*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*

*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

: 🌻भाद्रपद शुक्ल नवमी

🌻विक्रम संवत 2082

🌻सोमवार, 1 सितंबर 2025

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य रहेगा। यात्रा के योग बनेंगे। निवेश सोच-समझकर ही करें। धन-दौलत में वृद्धि के योग बनेंगे। प्रोफेशनल लाइफ में वातावरण अनुकूल रहेगा। नई प्रॉपर्टी या वाहन की खरीदारी के योग बनेंगे। आज साथी से अपनी फीलिंग्स को शेयर करने में संकोच न करें। इससे रिश्तों में प्यार और रोमांस बरकरार रहेगा। कुछ लोगों के रिलेशनशिप में एक्स-लवर की वापसी होगी। लेकिन मैरिड लोग ऐसा न करें। इससे वैवाहिक जीवन में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आज आपकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। विभिन्न स्त्रोतों से धन लाभ होगा। करियर में नए मौके मिलेंगे। वेकेशन का प्लान बना सकते हैं। नौकरी और व्यापार में लाभ होगा। मेहनत का फल मिलेगा। विद्यार्थियों को शैक्षिक कार्यों में अच्छे परिणाम मिलेंगे। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा।

मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य रहेगा। शैक्षिक कार्यों में सुखद परिणाम मिलेंगे। सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। कार्यस्थल में काम का तनाव रहेगा। निवेश के नए विकल्पों पर नजर रखें। आज सोच-समझकर किए गए निवेशों से भविष्य में अच्छा रिटर्न मिलेगा। आज के दिन वाद-विवाद से दूर रहें।

कर्क राशि- कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन शुभ रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। लाभ के कई अवसर मिलेंगे। ऑफिस में मान-सम्मान बढ़ेगा। हर कार्य में सफलता मिलेगी। परिवार के साथ अधिक समय व्यतीत करेंगे। करियर में सफलता मिलेगी। सामाजिक पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नई प्रॉपर्टी या वाहन की खरीदारी करेंगे। आज आप आनंददायक जीवन गुजारेंगे।

सिंह राशि- सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। परिवार का सपोर्ट मिलेगा। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। नई प्रॉपर्टी खरीदने के योग भी हैं। परिजनों के साथ मौज-मस्ती भरे पलों को एंजॉय करेंगे। नौकरीपेशा वालों का प्रमोशन या अप्रेजल हो सकता है। प्रोफेशनल लाइफ में नई उपलब्धियां हासिल होगी। कार्यों के मनचाहे परिणाम मिलेंगे।

कन्या राशि- कन्या राशि वालों को आज थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता है। आर्थिक मामलों में सतर्क रहें। धन का खर्च सोच-समझकर ही करें। नौकरी और व्यापार में किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें। बिजनेस डील साइन करने से पहले डॉक्यूमेंट्स को अच्छे पढ़ लें, वरना नुकसान हो सकता है। लव लाइफ में साथी की प्राइवेसी का ध्यान रखें और उन्हें थोड़ा पर्सनल स्पेस दें।

तुला राशि- तुला राशि वालों को मिलेजुले परिणाम मिलेंगे। इस समय अपना विशेष ध्यान रखें। धन खर्च सोच-समझकर ही करें। आज पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें। उनसे अपनी फीलिंग्स शेयर करें। लेकिन पास्ट इश्यूज को ज्यादा डिस्कस न करें और साथी से ऐसी बात का जिक्र न करें, जिससे रिश्तों में मनमुटाव बढ़े। करियर में भी काम का तनाव रह सकता है।

वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों के लिए आज का दिन वरदान के समान साबित होगा। आज ऑफिस में आपकी क्रिएटिविटी और लीडरशिप स्किल की प्रशंसा होगी। आज धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। प्रोफेशनल लाइफ अच्छी रहेगी। नौकरी में प्रमोशन या अप्रेजल के चांसेस बढ़ेंगे।

धनु राशि - धनु राशि वालों को आज महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी मिलेगी। दिन सुखद रहेगा। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। सामाजिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। प्रोफेशनल लाइफ में क्रिएटिविटी और इनोवेटिव आइडियाज के साथ किए गए कार्यों के अच्छे रिजल्ट मिलेंगे। लव लाइफ के रोमांचक पलों को एंजॉय करेंगे।

मकर राशि- मकर राशि वालों के दिन सामान्य रहेगा। ऑफिस में नए कार्य कि जिम्मेदारी मिलेगी। शैक्षिक कार्यों में नई उपलब्धि हासिल होगी। फैमिली या फ्रेंड्स के साथ कहीं घूमने का प्लान बना सकते हैं। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर फैसला लें। बिना रिसर्च किए इनवेस्ट न करें, वरना नुकसान हो सकता है। आय में वृद्धि के नए विकल्पों की तलाश करें। इससे आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।

कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के जीवन में आज बड़े बदलाव हो सकते हैं। प्रोफेशनल लाइफ में नए अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। कानूनी मामलों में जीत हासिल होगी। फैमिली के साथ ट्रिप का प्लान बना सकते हैं। आज आपको फैमिली का सपोर्ट मिलेगा। करियर की बाधाओं से मुक्ति मिलेगी। लव लाइफ में प्यार और रोमांस बढ़ेगा।

मीन राशि- मीन राशि वालों के लिए दिन शुभ रहेगा। सभी सपने साकार होंगे। रुके हुए कार्य चल पड़ेंगे। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। ऑफिस में आपकी परफॉर्मेंस शानदार रहेगी। जीवन में ऊर्जा और उत्साह भरपूर होगा। आय के नए साधनों से धन लाभ होगा। आज आपकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। लव लाइफ भी अच्छी रहेगी।

: .. *जय श्री राम*

*सोमवार, 01 सितंबर 2025 के मुख्य समाचार*

🔸'सीमा विवाद से ऊपर रहें रिश्ते', पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच अहम बातचीत... चीनी विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान

🔸जम्मू-कश्मीर के पुंछ में बड़ी कार्रवाई, 2 आतंकवादी गिरफ्तार; राइफल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद

🔸ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर नवारो को अमेरिकी एक्सपर्ट ने बताया ‘बेलगाम तोप’, भारत विरोधी बयानबाजी पर की आलोचना

🔸पीएम मोदी से मिलने के बाद जिनपिंग ने कहा, 'ड्रैगन और हाथी अब आ जाएं साथ'

🔸पीएम मोदी ने कहा, "तीसरे पक्ष के नजरिये से भारत-चीन रिश्तों को न देखें"

🔸अवैध मतांतरण के खिलाफ आज विधानसभा में बिल पेश करेगी राजस्थान सरकार

🔸तेल कंपनियों ने घटाई कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत, घरेलू गैस के दाम जस के तस

🔸SCO समिट में पाक‍िस्‍तानी प्रधानमंत्री का नया ड्रामा, पुतिन को देख दौड़े शहबाज

🔸अफगानिस्तान में 6.0 तीव्रता का भूकंप, 9 लोगों की मौत, कई घायल... दिल्ली-NCR तक महसूस हुए झटके

🔸रावी में फंसे NDRF कर्मियों को वायुसेना ने बचाया, एक पहिए पर हेलिकॉप्टर टिकाकर चला रेस्क्यू ऑपरेशन

🔸प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा

🔸एससीओ समिट से पहले बोले पुतिन, 'सबसे बेहतर दौर में रूस-चीन संबंध, ब्रिक्स को मजबूत करने पर कर रहे काम'

🔸हरियाणा में 48 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी: CM का विदेश दौरा कैंसिल; अधिकारियों की छुटि्टयां रद्द; अंबाला में नेशनल हाइवे धंसा

🔸पंजाब CM ने PM से 60 हजार करोड़ मांगे: बोले- प्रति एकड़ 50 हजार देने को तैयार; केंद्र मदद करे, 3 लाख एकड़ फसल डूबी

🔸अनिल विज बोले- PM की मां का अपमान देश नहीं सहेगा: राहुल-तेजस्वी की चुप्पी मतलब सहमति, अंबाला में विरोध जुलूस निकाला

🔸'मन की बात’ के 125वें एपिसोड में PM Modi का राष्ट्र से संवाद; UPSC, प्राकृतिक आपदाओं और खिलाड़ियों का किया जिक्र

🔸निर्णय से खफा अभ्यर्थी पहुंचे आरपीएससी मुख्यालय : हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में डबल बैंच में जाने की बात कही

🔸लखनऊ में अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट : 4 लोगों की मौत, 10 घायल

🔹बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप 2025: सात्विक-चिराग को कांस्य पदक, सेमीफाइनल में चीनी जोड़ी ने दी मात

           *आप का दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात....!*

                          जय हो🙏

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला