भभुआ सदर अस्पताल युवक को ‘ब्रॉट डेड’ घोषित किया:परिजनों का दावा- 3.5 घंटे तक जिंदा था, डॉक्टरों ने आरोप नकारे, जांच की मांग

Apr 8, 2026 - 17:10
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भभुआ सदर अस्पताल युवक को ‘ब्रॉट डेड’ घोषित किया:परिजनों का दावा- 3.5 घंटे तक जिंदा था, डॉक्टरों ने आरोप नकारे, जांच की मांग
भभुआ के सदर अस्पताल में एक बार फिर लापरवाही का आरोप लगा है। 24 वर्षीय युवक विशाल कुमार तिवारी की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजनों का दावा है कि डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के कई घंटों बाद तक युवक की सांसें चल रही थीं। परिजनों के अनुसार, विशाल ने रात में एक स्थानीय रेस्टोरेंट से पनीर और मंचूरियन खाया था, जिसके बाद उसकी और दो अन्य साथियों की तबीयत बिगड़ गई। घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें… 4 घंटे बाद निजी अस्पताल ले गए विशाल को सुबह करीब 4:00 से 4:30 बजे के बीच गंभीर हालत में सदर अस्पताल लाया गया। ड्यूटी पर तैनात डॉ. कमलेश प्रसाद ने बिना किसी गहन जांच या ऑक्सीजन सपोर्ट के उसे 'ब्रॉट डेड' (मृत अवस्था में लाया गया) घोषित कर दिया। मृतक के पिता मार्कंडेय तिवारी और भाई विनायक ने बताया कि सदर अस्पताल में मृत घोषित किए जाने के लगभग चार घंटे बाद वे विशाल को एक निजी अस्पताल ले गए। वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि युवक की मृत्यु महज 15-20 मिनट पहले हुई थी। मृत घोषित के साढ़े तीन घंटे तक जीवित रहा परिजनों का आरोप है कि इस हिसाब से विशाल सदर अस्पताल में मृत घोषित होने के बाद भी लगभग साढ़े तीन घंटे तक जीवित था। उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज या ऑक्सीजन मिलती तो उसकी जान बच सकती थी। सदर अस्पताल के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि जब मरीज को अस्पताल लाया गया था, तब उसमें जीवन के कोई लक्षण नहीं थे। मौत का सटीक समय पता लगाना फिलहाल संभव नहीं डॉ. कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि चिकित्सा विज्ञान में ऐसा कोई पैमाना नहीं है जिससे मौत का सटीक समय बताया जा सके। फिलहाल, विशाल की मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पीड़ित परिवार ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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