बेमौसम बारिश बढ़ाएगी महंगाई, रसोई का बिगड़ेगा बजट:दाल-रोटी से लेकर प्याज-तेल तक महंगा होगा, 6% कम होगी मानसून की बारिश
बुधवार को पटना-गोपालगंज समेत 10 जिलों में बारिश हुई। 38 जिलों में आंधी और बारिश के लिए अलर्ट जारी किया गया है। बारिश से गेहूं की फसल खराब हुई है। इससे पहले 20-21 मार्च को आए आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी थी। कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 12 जिलों में 2,06,658 हेक्टेयर में लगी फसलें तबाह हो गईं, 33% से अधिक नुकसान हुआ है। बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान के चलते आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ेगी। आटा-दाल से लेकर प्याज-तेल तक महंगा होगा। मानसून की बारिश भी 6% कम हो सकती है। हमने मौसम वैज्ञानिक से बातचीत कर जाना कि आखिर अचानक मौसम में बदलाव किन वजहों से हुआ? ग्राउंड पर जाकर देखा कि फसलों को कितना नुकसान हुआ है। पढ़िए रिपोर्ट…। खेतों में तबाही, बाजार में महंगाई तय राज्य के कई हिस्सों में गेहूं और चना जैसी रबी फसल पक कर तैयार थी, लेकिन बेमौसम बारिश और तेज पछुआ हवाओं ने गिरा दिया। कई जगहों पर फसल सड़ी और काली पड़ी है। इस वजह से बाजार में दलहन, तिलहन, मक्का, प्याज, सब्जी और आम के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। इससे कीमतों में वृद्धि हो सकती है। किसान बोले- चना, मसूर, प्याज सब बर्बाद पटना के फुलवारी के किसान अजीत कुमार ने कहा, ‘प्याज, चना, मसूर की फसल बर्बाद हो गई। अब पैदावार कम होगी तो दाम बढ़ना तय है। जिन्होंने जितनी अधिक खेती की उनको उतना अधिक नुकसान हुआ है।’ सुभाष पासवान ने कहा, ‘दलहन की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। दवा-खाद में लगाया पूरा पैसा डूब गया। प्याज की फसल बैठी ही नहीं, घाटा बहुत ज्यादा हो गया, कमाई क्या होगी।’ खगड़िया के कन्हैयाचक के किसान संतोष कुमार ने कहा, ‘मेरी मक्का और गेहूं दोनों फसल बर्बाद हो गई। ढाई बीघा में मक्का और डेढ़ बीघा में गेहूं की खेती थी। बहुत से किसानों की फसल बर्बाद हुई है। सरकार नुकसान का आकलन कर मुआवजा दे।’ मक्का की फसल बर्बाद होने से मेरी 30 हजार से ज्यादा की पूंजी चली गई। आंधी-बारिश से पूरी फसल जमीन पर सो गई। सरकार मुआवजा दे ताकि बच्चों का भरण-पोषण कर सकूं।- सत्तार यादव, मधेपुरा के किसान बेगूसराय के बछवाड़ा के किसान विपिन राय ने कहा, ‘बारिश-आंधी से आलू, गेहूं बर्बाद हो गया। ठेका, बटैया पर खेती किए थे। किसान योगेंद्र राय ने कहा, ‘आम और लीची के मंजर झड़ गए। सब बर्बाद हो गया है।’ आम की पैदावार कम होगी, कीमत बढ़ेगी: सुनील सिंह पटना जिला के पुनपुन में आम के बड़े बागान हैं। यहां आम की खेती कर रहे किसान सुनील सिंह ने कहा, ‘हम लोग मौसम की मार झेल रहे हैं। इस बार आम के मंजर तो खूब आए, लेकिन बारिश और तेज हवा से झर गए।’ उन्होंने कहा, ‘अगर मौसम फिर बिगड़ा तो टिकोले भी गिर जाएंगे। इनकी मजबूती के लिए दवा का छिड़काव करवा रहे हैं। इस बार आम कम होगा और महंगा मिलेगा। मैं प्याज के बीज भी उगाता हूं। आंधी से फसल खराब हो गई। अब अगले सीजन में बंगाल से प्याज के बीज लाना होगा।’ बेमौसम बारिश से किस तरह के नुकसान हो रहे हैं? अगले 24 घंटे में हो सकती है बारिश मौसम के बदलते मिजाज को लेकर भास्कर ने भारत मौसम विज्ञान केन्द्र, पटना के निदेशक आनंद शंकर से बात की। उन्होंने कहा, ‘बिहार के ऊपर से जेट स्ट्रीम गुजर रही है, जिससे पिछले मौसम एक्टिव बना हुआ है। अगले 24 घंटों में बारिश, आंधी और थंडरस्टॉर्म की स्थिति बनी रह सकती है। राज्य का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से कम रहने की उम्मीद है।’ आनंद शंकर ने कहा, ‘रबी की फसलों (गेहूं, जौ, चना, सरसों, मसूर, मटर, अलसी आदि) की उपज में लगे किसानों को अधिक एलर्ट रहने की जरूरत है। फसल तैयार है तो जल्द काट लें। आम और लीची जैसी फसल को भी बारिश और आंधी से नुकसान हो सकता है।’ इस साल मानसून में 6% कम बारिश संभव इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रह सकती है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर के अनुसार, बारिश सामान्य से 6% कम रह सकती है। जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिमी है। सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रहेगी। एजेंसी ने 94% बारिश का अनुमान दिया है। एजेंसी के अनुसार जून में सामान्य बारिश होगी। जुलाई से गिरावट शुरू होकर अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ेगा। खासकर अगस्त-सितंबर में बारिश की कमी ज्यादा रहने के संकेत हैं। मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य क्षेत्रों में बारिश कम रहने के आसार हैं। मानसून की शुरुआत के समय अल-नीनो बनने की संभावना है। इससे मानसून कमजोर पड़ सकता है। हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) मजबूत हो तो अल-नीनो का असर कुछ कम होता है। -जतिन सिंह, एमडी, स्काईमेट वेदर जुलाई से बारिश में कमी होने का अनुमान पिछले एक सप्ताह में बिहार में बारिश कैसी रही? 1 से 7 अप्रैल के बीच बिहार के अलग-अलग जिलों में हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो गया में 4.2-12 मिमी, औरंगाबाद में 4.2 -8.0 मिमी, नवादा में 6.2 मिमी, नालंदा में 6 मिमी, जमुई में 4.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। फसलों के नुकसान पर क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक? आनंद शंकर ने कहा, ‘20 और 21 मार्च को मौसम की एक्टिविटी से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। थंडरस्टॉर्म एक्टिविटी आगे भी रहेगा। गस्टी विंड के कारण नुकसान देखने को मिला है। थंडरस्टॉर्म के साथ गस्टी विंड रहती है तो पछुआ हवा 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है। इससे हैवी रेनफॉल भी हुआ है। आगे भी थंडर वर्म के साथ गस्टी विंड का प्रभाव रहेगा। गस्टी विंड, उस हवा को कहते हैं, जिसमें अचानक से तेजी आ जाती है। यह ऊंचे पेड़ों, इमारतों, ऊबड़-खाबड़ जमीन के पास हवा के घर्षण से होती है। यह सामान्य हवा की तुलना में काफी तेज और अस्थिर होती है। कृषि मंत्री बोले- 33% फसलों की क्षति हुई, सरकार मुआवजा देगी बिहार सरकार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, ‘बेमौसम की बारिश और ओला गिरने से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। इन जिलों में प्रशासन द्वारा वास्तविक क्षति का आकलन करने के लिए तेजी से सर्वेक्षण कहने को कहा गया है।'
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