सरकार बोली-सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत:जस्टिस नागरत्ना बोलीं- महिला को महीने के 3 दिन अछूत मानें, चौथे दिन नहीं, ऐसा क्यों
केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को एंट्री का आदेश जारी रहे या नहीं, सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान बेंच ने इस पर मंगलवार को 5 घंटे सुनवाई की। केंद्र ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाने का समर्थन किया। सरकार ने कहा- अदालतें महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश के मामले में दखल नहीं दे सकतीं। अगर कोई प्रथा गैर-वैज्ञानिक लगती है, तो उसका हल संसद या विधानसभा के पास है, न कि अदालत के पास। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- महिलाओं की मंदिर में एंट्री पर 2018 का फैसला गलत तरीके से लिया गया। उन्हें मंदिर में न जाने देना उनका अपमान करना नहीं है। भारत में उन्हें पूजा जाता है। हमें ऐतराज इस बात से है कि मंदिर की इस परंपरा को ‘अस्पृश्यता’ (छुआछूत या अनुच्छेद 17) कहा गया। बेंच की एकमात्र महिला जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा- अगर किसी महिला को मासिक धर्म के कारण मंदिर में घुसने से रोका जाता है, तो क्या वह ‘छुआछूत’ नहीं है? ऐसा नहीं हो सकता कि महीने के 3 दिन महिला के साथ छुआछूत जैसा व्यवहार हो और चौथे दिन वह अचानक ‘शुद्ध’ हो जाए। संविधान का नियम हर दिन के लिए एक समान होना चाहिए। कोर्ट रूम लाइव : केंद्र बोला- हर धार्मिक प्रथा का सम्मान करना चाहिए सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा रिव्यू पिटीशन धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े ये सवाल पिछले 26 साल से देश की अलग-अलग अदालतों में पेंडिंग हैं। सुप्रीम कोर्ट में आज से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशनरों और उन्हें सपोर्ट करने वाले 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक, जबकि विरोध करने वाले 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक दलीलें दे सकेंगे। दरअसल, सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला के अलावा मस्जिदों में महिलाओं की एंट्री, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला का खतना और दूसरे धर्म में शादी करने वाली पारसी महिलाओं को धार्मिक स्थलों में जाने का अधिकार मिले या नहीं, कोर्ट इस पर भी फैसला करेगा। 9 जजों की बेंच के सामने सुनवाई के 5 मुद्दे पुनर्विचार याचिकाओं के आधार पर 7 सवाल, जिन पर बहस हो रही सुप्रीम कोर्ट ने फैसला बरकरार रखा तो क्या बदलेगा धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामले से जुड़ी सुनवाई की पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं…
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