आज सुबह का मुख्य समाचार पत्र और मां_की_जान_ले_ली,_बेटी_को_उठा_ले_गए..__आरोपियों_को_बचाने_में_जुटी_सरकार!_Meerut_Kapsad_Ruby_News
केसरवानी वैश्य सभा ने निकाली भव्य व ऐतिहासिक विराट शोभा यात्रा, वैश्य एकता का दिखा अनूठा मिसाल देवघर । स्थानीय श्याम गंज रोड से वैधनाथद्याम केसरवानी वैश्य सभा ने केसरवानी आश्रम में महर्षि कश्यप मुनि की विधिवत पूजा कर एक शानदार भव्य, विराट व ऐतिहासिक धार्मिक शोभा यात्रा निकाली । जो शहर के मुख्य मार्गो से भ्रमण करते हुए केसरवानी अतिथि भवन, झौसागढी तक गई। जिसमें केसरी परिवारों के महिला, पुरुष, युवक युवतियों बच्चें, दुकानदार आदि ने उत्साहपूर्वक बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस भव्य आकर्षक मनोरम शोभा यात्रा में महामुनि कश्यप ऋषि ,भारत-माता, एवं विभिन्न देवी-देवताओं की झलक दिखाई दी। इसके अलावा कोलकाता से आए कलाकारों द्वारा एवं 50 लोगों के छत्तीसगढ़ टीम की भी अनुपम झांकी की प्रस्तुति की गई।जिसमे सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक गतिविधियों की जीवंत मिसाल देखने को मिला। मौके पर भारतीय वैश्य महासभा के जिला अध्यक्ष श्री प्रभाष गुप्ता ने कहा कि इस ऐतिहासिक भव्य शोभा यात्रा में वैश्य परिवार के एकजुटता, व संगठन की एकता का अनूठा मिसाल देखने को मिला।
TRN LIVE: *जब नालंदा जलाई गई, तब केवल ईंट-पत्थर नहीं जले भारत की आत्मा रोई।*
*नालंदा कोई साधारण विश्वविद्यालय नहीं था, वह भारत की बौद्धिक चेतना, ज्ञान-परंपरा और विश्वगुरु होने का प्रमाण था।*
*यहाँ देश-विदेश से विद्यार्थी आते थे, जहाँ तर्क, दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा और खगोल विद्या का अद्भुत संगम था।*
*जब अज्ञान की आग ने नालंदा की ग्रंथालयों को भस्म किया, तब हजारों वर्षों का संचित ज्ञान राख हो गया।*
*यह केवल एक इमारत का विनाश नहीं था, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर, हमारी पहचान और हमारे स्वाभिमान पर किया गया आघात था, कहते हैं,,*
*नालंदा के ग्रंथ इतने विशाल थे कि उनकी आग महीनों तक बुझी नहीं; यह उस ज्ञान की गहराई का प्रमाण है।*
TRN LIVE: 14, जनवरी — मकर संक्रांति के पावन अवसर पर फारिदाबाद के स्लम क्षेत्रों में लगभग 50 बच्चों व बड़ों को जुराबें व सर्दियों की टोपी वितरित
फरीदाबाद, 14 जनवरी — मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर सेवा भाव से 14 जनवरी को फरीदाबाद के डबुआ कॉलोनी कम्युनिटी सेंटर,सेक्टर 12 और आयशर चौक के स्लम इलाकों में लगभग 50 जरूरतमंद बच्चों और वयस्कों को जुराबें व सर्दियों की टोपी वितरित की जाएँगी। यह छोटा प्रयास ठंडी के मौसम में जरूरी राहत पहुँचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
दान और सहयोग का अनुरोध:
- आप नई या अच्छी स्थिति में प्रयुक्त जुराबें तथा टोपी दान कर सकते हैं।
- आर्थिक सहयोग भी स्वागत है; आपकी देने की क्षमता अनुसार योगदान से कार्य को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
- साथ चलकर सेवा देने वाले स्वयंसेवकों का हार्दिक स्वागत है।
संपर्क:
राक़तवीर प्रवीन गुलाटी
संपर्क: 9818649500 / 9212181500
सभी से अनुरोध है कि सहानुभूति एवं मानवीय सहयोग के साथ आगे आएँ और मकर संक्रांति पर जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाने में सहायता करें।
TRN LIVE: जेल से बाहर निकलने पर जिनका फूल माला से स्वागत किया जा रहा है जय जयकार किया जा रहे हैं यह कोई भारत के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में जेल में नहीं गए थे बल्कि 57 लोगों के जघन्य हत्या के मामले में जेल में थे
दिल्ली दंगों के आरोपी जेल से बाहर आ रहे हैं
शिफा, मीरान हैदर, मोहम्म सलीम ख़ान, गुलिफ़्शा फ़ातिमा जमानत पर जेल से बाहर आए तो फूल मालाओं से स्वागत हुआ है
सुप्रीम कोर्ट ने माना है की प्रथम दृष्टि आई उनकी दंगों में सहभागिता है किसी ने किसी रूप में यह दंगे में शामिल है लेकिन चुकी है 5 साल से जेल में है तो मानवता के आधार पर ही ने रिहा किया जाता है जमानत दी जाती है इन्हें 22 जनवरी नहीं किया गया है और इनको 12 कड़ी शर्तों के साथ जमानत मिली है
●प्रत्येक अभियुक्त को दो लाख का निजी मुचलका और इतनी राशि के दो स्थानीय जमानती पेश करने पर रिहा कर दिया जाएगा
●अभियुक्त दिल्ली में ही रहेंगे और ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बगैर दिल्ली नहीं छोड़ेंगे। दिल्ली से बाहर जाने का अनुरोध करते वक्त अभियुक्तों को उसका कारण बताना होगा और कोर्ट मेरिट के आधार पर उस पर विचार करेगा
●अभियुक्ति ट्रायल कोर्ट में अपना पासपोर्ट सरेंडर करेंगे। और अगर उनके पास पासपोर्ट नहीं है तो वे इस संबंध में एक हलफनामा देंगे। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और पुलिस को निर्देश दिया है कि वे देश की सभी आव्रजन अथारटीज को सूचित करेंगे कि वे कोर्ट की इजाजत के बगैर अभियुक्तों में किसी को भी किसी भी तरीके से देश छोड़ने की इजाजत नहीं देंगी।
●अभियुक्त अपना मौजूदा पता, ईमेल जांच अधिकारी और ट्रायल कोर्ट को देंगे। अभियुक्ति ट्रायल कोर्ट और जांच अधिकारी को सात दिन पूर्व लिखित सूचना दिए बगैर अपने रहने का स्थान या संपर्क नंबर नहीं बदलेंगे।
●सभी अभियुक्त गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिया उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद हफ्ते में दो बार सोमवार और गुरुवार को सुबह 10 से 12 बजे के बीच दिल्ली पुलिस आयुक्त के मुख्यालय जयसिंह मार्ग नयी दिल्ली में पुलिस थाना क्राइम ब्रांच के थानाध्यक्ष के समक्ष निजी तौर पेश होंगे। और अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। थानाध्यक्ष अलग रजिस्टर में उनकी उपस्थिति दर्ज करेंगे और ट्रायल कोर्ट को मासिक अनुपालन रिपोर्ट भेजेंगे जिसे मामले के मुख्य रिकार्ड के साथ रखा जाएगा।
●अभियुक्त प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी गवाह या केस से संबंधित व्यक्ति से संपर्क करने या उसे प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे। औ न ही इस मामले से संबंधित, किसी समूह या संगठन के साथ जुड़ेंगे।
●मामले का ट्रायल पूरा होने तक अभियुक्त इस केस के संबंध में प्रिंट या इलेक्ट्रानिक मीडिया या सोशल मीडिया पर कोई बयान या लेख नहीं देंगे।
●अभियुक्ति केस का ट्रायल पूरा होने तक किसी भी कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे और न ही किसी रैली या सभा को संबोधित करेंगे। फिजिकल या वर्चुअल किसी भी तरह से नहीं संबोधित करेंगे।
●अभियुक्ति किसी तरह की पोस्ट, हैंड बिल, पोस्टर बैनर प्रचारित प्रसारित नहीं करेंगे
●अभियुक्ति ट्रायल में सहयोग करेंगे और प्रत्येक तारीख पर कोर्ट में पेश होंगे। जब तक कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें कारण दर्ज पेशी से छूट न दी हो। अभियुक्ति सुनवाई में देरी का कोई आचरण नहीं करेंगे।
●अभियुक्ति लगातार शांति और अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन करेंगे। मामले के लंबित रहने के दौरान कोई भी अपराध करने पर, अभियोजन पक्ष को ट्रायल कोर्ट में जमानत रद करने की अर्जी देने की स्वतंत्रता होगी। अगर ऐसी अर्जी दाखिल होती है तो ट्रायल कोर्ट उस पर मेरिट के आधार पर विचार करेगा।
●शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियुक्तों द्वारा उपरोक्त किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर या स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने पर ट्रायल कोर्ट को अभियुक्तों को सुनवाई का मौका देते हुए, जमानत रद करने की छूट होगी। इन जिहादी गद्दारों और देशद्रोहियों के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपने पांच बड़े-बड़े वकीलों को खड़ा किया था जिनकी कुल फीस एक करोड़ के आसपास बनती है अब देश की जनता समझ ले कांग्रेस कितनी गद्दार पार्टी है
*और इन्हें फूल मालाएं पहनाई जा रही हैं...!*
TRN LIVE: *द हिंदू के अंतरराष्ट्रीय संपादक स्टैनली जॉनी ने अमेरिका के इन फ़ैसलों को लेकर एक्स पर लिखा है*
, "देश सिर्फ़ ताक़त का संतुलन बनाने के लिए ही गठबंधन नहीं करते बल्कि उन्हें जो ख़तरे नज़र आते हैं, उसके आधार पर भी गठबंधन बनाते हैं. अगर अमेरिका एक बेलगाम महाशक्ति की तरह व्यवहार करता रहा, तो उसके ख़िलाफ़ संतुलन बनाने वाले गठबंधन बनेंगे."
"और अगर यह बेहद आक्रामक 500 फ़ीसदी टैरिफ़ वाला क़ानून लागू हो जाता है, तो भारत को अमेरिका के साथ अपनी 'समग्र वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' की बुनियादी सोच पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा."
स्टैनली जॉली की इस पोस्ट के मद्देनज़र समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत ऐसी साझेदारियों पर विचार कर रहा है.
रॉयटर्स ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत का वित्त मंत्रालय चीनी कंपनियों के लिए सरकारी ठेकों में बोली लगाने पर लगी पांच साल पुरानी पाबंदियों को हटाने की योजना बना रहा है.
साल 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई घातक झड़प के बाद ये पाबंदियां लगाई गई थीं. इन नियमों के तहत चीनी कंपनियों को बोली लगाने से पहले भारत सरकार की एक समिति में पंजीकरण कराना और राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी लेना ज़रूरी था.
विदेश नीति पर काम करने वाला थिंक टैंक अनंता सेंटर की सीईओ इंद्राणी बागची ने एक्स पर इस बिल और अमेरिका की रणनीति पर एक लंबी पोस्ट लिखी है.
वो लिखती हैं, "लिंडसे ग्राहम का यह बिल पिछले नौ महीनों से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था. अब इसे सामने लाया गया है क्योंकि यह अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच यूक्रेन के भविष्य को लेकर हुए एक समझौते का हिस्सा है. अमेरिका और यूरोपीय संघ रूस के सामने अपना अंतिम प्रस्ताव रखने की तैयारी कर रहे हैं."
"भारत को भी इस पूरे मामले में नुक़सान है लेकिन असली निशाना चीन है. अमेरिका अगर भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों पर प्रतिबंध लगाता है, तो इसके बदले यूरोपीय संघ यूक्रेन को लेकर ऐसे समझौते पर राज़ी हो सकता है, जिसमें कीएव को मॉस्को के पक्ष में कुछ इलाक़ों को लेकर रियायतें देनी पड़ें."
"भारत की नीति हमेशा यथार्थवाद और व्यवहारिक सोच पर टिकी रही है. इसी आधार पर मेरा मानना है कि भारत जल्द ही रूस से तेल आयात शून्य के स्तर तक ले जाएगा. भारत पहले ही 50 फ़ीसदी टैरिफ़ से जूझ रहा था, ऐसे में 500 फ़ीसदी टैरिफ़ टिकाऊ नहीं होगा."
वो इसके बाद एक्स पर लिखती हैं कि दिसंबर और जनवरी के दौरान रूस से भारतीय तेल आयात में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है.
इंद्राणी बागची कहती हैं कि भारत रूसी तेल के बिना भी ठीक रहेगा और रूस भी भारत को ख़रीदार के रूप में खोने के बाद ख़ुद को संभाल लेगा, इसलिए क्योंकि वैश्विक स्तर पर तेल की क़ीमतें अभी काफ़ी संतुलित हैं.
वो कहती हैं कि पिछले एक साल में भारत-अमेरिका रिश्तों पर गहरा असर पड़ा है और आने वाले कुछ समय तक इस रिश्ते के आईसीयू में ही रहने की संभावना है.
इंद्राणी बागची ने 500 फ़ीसदी तक टैरिफ़ वाले अमेरिकी बिल को लेकर कहा, "अमेरिकी कांग्रेस से पारित होने की संभावना वाले इस क़ानून में राष्ट्रपति को छूट देने का अधिकार भी शामिल होगा. सूत्रों के मुताबिक़, किसी भी ट्रांस-अटलांटिक समझौते में यूरोपीय संघ को कुछ विशेष छूट दी जाएगी. इसका मतलब यह है कि यूरोप बिना किसी रोक-टोक के रूसी ऊर्जा ख़रीदता रहेगा. अमेरिका अब भी रूस से संवर्धित यूरेनियम ख़रीदता है. यह भी साफ़ नहीं है कि अमेरिका मौजूदा क़ानूनों के तहत 2028 तक ख़ुद को छूट देता रहेगा या नहीं."
"मौजूदा नैरेटिव में इन तथ्यों को नज़रअंदाज़ किए जाने की संभावना है और ध्यान भारत और चीन को खलनायक के रूप में पेश करने पर रहेगा. चीन को हाल ही में लैटिन अमेरिका में वेनेज़ुएला को लेकर बड़ा झटका लगा है.
रूसी तेल पर टैरिफ़ चीन के लिए भी बड़ा नुक़सान साबित हो सकता है. इसके बाद ईरान अगला निशाना बन सकता है. ऐसे में अगर चीन रेयर अर्थ या मैग्नेट पर प्रतिबंध की धमकी देता है, तो अमेरिका उसके ख़िलाफ़ दबाव बनाने की स्थिति में आ जाएगा."
वहीं भारत के अंग्रेज़ी अख़बार द इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि इस बिल से ख़ासतौर पर भारत को निशाना बनाया जा सकता है जबकि चीन के काफ़ी हद तक सुरक्षित रहने की उम्मीद है.
TRN LIVE: *अपने आप को विश्व के शक्तिशाली कहने वाले देश का एक महिला के पर अतिनींदनीय नीच कृत्य/अत्याचार* 👆😡😲🤔
यह वेनेजुएला के राष्ट्रपति मदुरै की पत्नी है😔
अमेरिका के कोर्ट में पेशी के दौरान का फोटो है
साफ लग रहा है कि इनको गिरफ्तार करने के पहले इनको बहुत बुरी तरह से मारा गया है उनकी आंखे डैमेज है इनका सर भी फूटा है
अगर ऐसी घटना भारत में हुई होती जहां किसी क्रिश्चियन महिला के साथ इस तरह का काम होता तो अब तक पूरे भारत के ईसाई मिशनरी पूरी दुनिया के देश छाती कूट-कूट कर पागल हो गए होते
लेकिन क्योंकि *यह कुकर्म खुद एक ईसाई ट्रम्प ने किया है इसीलिए सब चुप हैं*😷
TRN LIVE: पैरों में काले धागे बांधने वाली हिंदू लड़कियाँ सतर्क रहें — नई "दरगाही चाल" शुरू हो चुकी है!
यह केवल लड़कियाँ नहीं, बल्कि 40-50 साल की महिलाएँ तक भी आजकल इस झांसे में फँस रही हैं।
मन्नत माँगने के नाम पर दरगाहों में जाने वाली महिलाएँ काले धागे की बेड़ी बंधवा रही हैं — लेकिन इसका असली मतलब और असर कोई नहीं समझ रहा।
बेड़ी बाँधने और काटने की रहस्यमयी रस्म क्या है..??
दरगाहों में एक "मान्यता" फैलाई जा रही है कि मन्नत माँगने वाली लड़की या महिला को पैर में काले धागे की बेड़ी बाँधनी होती है।
जब मन्नत पूरी हो जाए, तब जाकर उस बेड़ी को ख़ादिम (दरगाह के मुल्ला) से कटवाना पड़ता है।
लड़की तभी "मुक्त" मानी जाती है जब वो बेड़ी कटवा दे।
यह रस्म दरअसल एक मानसिक और सांस्कृतिक बंधन है, जो एक बार बंध जाने के बाद हिंदू लड़की को अंदर से "मज़ार संस्कृति" से जोड़ देता है।
इस टोटके की शुरुआत "कलियर शरीफ़" से हुई थी। अब ये हर छोटी-बड़ी दरगाह में फैल चुका है — "बेड़ी बाँधो और कटवाओ" वाला धंधा।
भोली-भाली हिंदू लड़कियाँ इस जाल में आकर दरगाहों पर बेड़ी बाँध रही हैं
उन्हें लगता है कि ये कोई सामान्य धार्मिक आस्था है — जबकि ये कट्टरपंथी जाल का हिस्सा है।
यह केवल मानसिक जकड़न नहीं — ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी घातक है!
पैर में जहाँ पायल या बिछुए पहनते हैं, वह स्थान मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल ग्रह को काली वस्तुएँ (जैसे काला धागा) पसंद नहीं होतीं।
पैर में काला धागा पहनना अशुभ माना गया है — इससे दांपत्य जीवन, स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यह कोई मासूम परंपरा नहीं, बल्कि हिंदू महिलाओं को इस्लामी सूफ़ी दरगाही सिस्टम में धीरे-धीर खींचने की योजना है। हिंदू लड़कियों और माताओं-बहनों से निवेदन है:
अपनी आस्था को विवेक से संचालित करें, अंधविश्वास से नहीं।
मन्नत माँगनी है तो अपने इष्ट से माँगिए — मंदिर जाइए, गाय को रोटी दीजिए, गरीब की मदद कीजिए,
लेकिन दरगाहों की बेड़ियाँ मत बाँधिए!
जो रस्म आपको मन से गुलाम बनाती है, वो आस्था नहीं, मानसिक बंधन है। जागरूक रहे, अपने परिवार की सुरक्षा करे।
TRN LIVE: TV9 की एंकर को धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने धो दिया इस बेशर्म एंकर को पहचानो जो कम्युनिस्ट के कहने से सवाल पूछता है और सवाल फिर सवाल करती है बाबा ने मुंह तोड़ कर दिया अब पता लगा इसकी असलियत का पहचान लो
TRN LIVE: 'तुम हिंदू टीचर हो, BHU क्यों नहीं चली जाती'
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हिन्दू टीचर के साथ भेदभाव आया सामने।
AMU की प्रोफेसर रचना कौशल ने बयां किया 27 साल का दर्द।
AMU में राजनीति विज्ञान विभाग की सीनियर प्रोफेसर रचना कौशल ने एएमयू प्रशासन पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
इनका आरोप है कि वह सिर्फ हिंदू शिक्षक होने की वजह से पिछले करीब 27 साल से उत्पीड़न झेल रही हैं।
रचना कौशल ने कहा कि वह सबकुछ बर्दाश्त करते हुए काम कर रही हैं, लेकिन एएमयू के कुछ प्रोफेसर उनकी आलोचना करते हैं और उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
अपने आरोपों में रचना कौशल ने कहा,
'AMU के कुछ प्रोफेसर कहते हैं कि हिंदू शिक्षक जान-बूझकर मुस्लिम बच्चों को नहीं पढ़ाते, तुम हिंदू टीचर हो तो बीएचयू क्यों नहीं चली जाती।
एक लंबे वक्त से मैं ये सब झेल रही हूं, लेकिन अब मेरे पास सिर्फ कानूनी कार्रवाई का ही विकल्प बचा है।
बहुत जल्द मैं सार्वजनिक रूप से पूरे मामले का खुलासा करने के बाद FIR दर्ज कराऊंगी।'
TRN LIVE: साभार...
मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है क्यों ?
काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है। यह सभी को नहीं मालूम है। खांटी बनारसी लोग या अगल बगल के लोग ही इस परम्परा को जानते हैं। बाहर से आये शवदाहक जन इस बात को नहीं जानते।
जीवन के शतपथ होते हैं। 100 शुभ कर्मों को करने वाला व्यक्ति मरने के बाद उसी के आधार पर अगला जीवन शुभ या अशुभ प्राप्त करता है। 94 कर्म मनुष्य के अधीन हैं। वह इन्हें करने में समर्थ है पर 6 कर्म का परिणाम ब्रह्मा जी के अधीन होता है।
हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश- अपयश ये 6 कर्म विधि के नियंत्रण में होते हैं। अतः आज चिता के साथ ही तुम्हारे 94 कर्म भस्म हो गये। आगे के 6 कर्म अब तुम्हारे लिए नया जीवन सृजित करेंगे।
अतः 100 - 6 = 94 लिखा जाता है।
गीता में भी प्रतिपादित है कि मृत्यु के बाद मन अपने साथ 5 ज्ञानेन्द्रियों को लेकर जाता है। यह संख्या 6 होती है।मन और पांच ज्ञान इन्द्रियाँ।
अगला जन्म किस देश में कहाँ और किन लोगों के बीच होगा यह प्रकृति के अतिरिक्त किसी को ज्ञात नहीं होता है। अतः 94 कर्म भस्म हुए 6 साथ जा रहे हैं।
विदा यात्री। तुम्हारे 6 कर्म तुम्हारे साथ हैं।
आपके लिए इन 100 शुभ कर्मों का विस्तृत विवरण दिया जा रहा है जो जीवन को धर्म और सत्कर्म की ओर ले जाते हैं एवं यह सूची आपके जीवन को सत्कर्म करने की प्रेरणा देगी।
100 शुभ कर्मों की गणना
- धर्म और नैतिकता के कर्म
1. सत्य बोलना
2. अहिंसा का पालन
3. चोरी न करना
4. लोभ से बचना
5. क्रोध पर नियंत्रण
6. क्षमा करना
7. दया भाव रखना
8. दूसरों की सहायता करना
9. दान देना (अन्न, वस्त्र, धन)
10. गुरु की सेवा
11. माता-पिता का सम्मान
12. अतिथि सत्कार
13. धर्मग्रंथों का अध्ययन
14. वेदों और शास्त्रों का पाठ
15. तीर्थ यात्रा करना
16. यज्ञ और हवन करना
17. मंदिर में पूजा-अर्चना
18. पवित्र नदियों में स्नान
19. संयम और ब्रह्मचर्य का पालन
20. नियमित ध्यान और योग
- सामाजिक और पारिवारिक कर्म
21. परिवार का पालन-पोषण
22. बच्चों को अच्छी शिक्षा देना
23. गरीबों को भोजन देना
24. रोगियों की सेवा
25. अनाथों की सहायता
26. वृद्धों का सम्मान
27. समाज में शांति स्थापना
28. झूठे वाद-विवाद से बचना
29. दूसरों की निंदा न करना
30. सत्य और न्याय का समर्थन
31. परोपकार करना
32. सामाजिक कार्यों में भाग लेना
33. पर्यावरण की रक्षा
34. वृक्षारोपण करना
35. जल संरक्षण
36. पशु-पक्षियों की रक्षा
37. सामाजिक एकता को बढ़ावा देना
38. दूसरों को प्रेरित करना
39. समाज में कमजोर वर्गों का उत्थान
40. धर्म के प्रचार में सहयोग
- आध्यात्मिक और व्यक्तिगत कर्म
41. नियमित जप करना
42. भगवान का स्मरण
43. प्राणायाम करना
44. आत्मचिंतन
45. मन की शुद्धि
46. इंद्रियों पर नियंत्रण
47. लालच से मुक्ति
48. मोह-माया से दूरी
49. सादा जीवन जीना
50. स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन)
51. संतों का सान्निध्य
52. सत्संग में भाग लेना
53. भक्ति में लीन होना
54. कर्मफल भगवान को समर्पित करना
55. तृष्णा का त्याग
56. ईर्ष्या से बचना
57. शांति का प्रसार
58. आत्मविश्वास बनाए रखना
59. दूसरों के प्रति उदारता
60. सकारात्मक सोच रखना
- सेवा और दान के कर्म
61. भूखों को भोजन देना
62. नग्न को वस्त्र देना
63. बेघर को आश्रय देना
64. शिक्षा के लिए दान
65. चिकित्सा के लिए सहायता
66. धार्मिक स्थानों का निर्माण
67. गौ सेवा
68. पशुओं को चारा देना
69. जलाशयों की सफाई
70. रास्तों का निर्माण
71. यात्री निवास बनवाना
72. स्कूलों को सहायता
73. पुस्तकालय स्थापना
74. धार्मिक उत्सवों में सहयोग
75. गरीबों के लिए निःशुल्क भोजन
76. वस्त्र दान
77. औषधि दान
78. विद्या दान
79. कन्या दान
80. भूमि दान
- नैतिक और मानवीय कर्म
81. विश्वासघात न करना
82. वचन का पालन
83. कर्तव्यनिष्ठा
84. समय की प्रतिबद्धता
85. धैर्य रखना
86. दूसरों की भावनाओं का सम्मान
87. सत्य के लिए संघर्ष
88. अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना
89. दुखियों के आँसू पोंछना
90. बच्चों को नैतिक शिक्षा
91. प्रकृति के प्रति कृतज्ञता
92. दूसरों को प्रोत्साहन
93. मन, वचन, कर्म से शुद्धता
94. जीवन में संतुलन बनाए रखना
- विधि के अधीन 6 कर्म
95. हानि
96. लाभ
97. जीवन
98. मरण
99. यश
100. अपयश
94 कर्म मनुष्य के नियंत्रण में
उपरोक्त सूची में 1 से 94 तक के कर्म वे हैं, जो मनुष्य अपने विवेक, इच्छाशक्ति, और प्रयास से कर सकता है। ये कर्म धर्म, सत्य, और नैतिकता पर आधारित हैं, जो जीवन को सार्थक बनाते हैं।
6. कर्म विधि के अधीन:
अंतिम 6 कर्म ( हानि, लाभ, जीवन, मरण, यश, अपयश ) मनुष्य के नियंत्रण से बाहर हैं। इन्हें भाग्य, प्रकृति, या ईश्वर की इच्छा के अधीन माना जाता है।
TRN: *अर्थनिरक्षरांची निरर्थक आवई*
शिउबाठा पक्षप्रमुख *उद्धव ठाकरे* आणि त्या पक्षाचे युवानेते *आदित्य ठाकरे* यांनी *BMC च्या FD मोडल्या* असे सांगत महायुती सरकारविरोधात आघाडी उघडली आहे..या विषयावर याआधी मी दोन पोस्ट लिहून हा सगळा कांगावा आहे हे सिद्ध केले होते. त्यात Audited Accounts च्या आधारे *ठाकरेंच्या narrative* ला उत्तर देईन असे म्हंटले होते. त्यानुसार या विषयावर माझी तिसरी आणि शेवटची पोस्ट.
एखादा मध्यमवर्गीय माणूस भविष्यातील खर्चिक परदेशी प्रवासासाठी अथवा घरातील लग्नकार्यासाठी किंवा मुलांच्या उच्च शिक्षणासाठी पैसे बाजूला टाकतो. FD त ठेवतो .तो प्रवास किंवा तो लग्नसमारंभ किंवा तो शैक्षणिक खर्च करण्याची वेळ जवळ आली की त्या FD मोडून खर्च केला जातो. याला वित्तीय भाषेत earmarking असे म्हणतात. *हाउसिंग सोसायटीमध्ये Sinking Fund च्या FD अशाच earmark केलेल्या असतात* हे सगळ्यांनाच माहीत असेल. *BMC च्या FD चे ऑपरेशन असेच असते*.
ही संकल्पना पुन्हा एकदा समजावून सांगितली आहे आता प्रत्यक्ष audited accounts च्या आकडेवारीकडे वळू. Commerce न शिकलेल्यांना सोप्या भाषेत समजावणे आवश्यक आहे. म्हणून काही basic principles समजून घेणे आवश्यक आहे.
Double Entry accounting system मध्ये Income and expenditure account आणि balance sheet तयार केले जातात. *BMC ही व्यावसायिक संस्था नसल्याने profit and loss account नसते.त्या ऐवजी Income and expenditure account बनवतात*.
Income and expenditure account मध्ये त्यावर्षी BMC ला surplus आहे का deficit आहे हे समजते तर Balance sheet मध्ये BMC च्या assets आणि liabilities समजतात
*BMC ची मुदत २०१७ साली संपली. ती बरखास्त झाली त्यानंतर आयुक्तांच्या मार्फत राज्य सरकार BMC चा कारभार करत आहे.* साहजिकच सलग १९९७ पासून BMC वर हुकूमत गाजवणाऱ्या *शिउबाठाने कांगावा* सुरू केला आहे त्यांच्या राजकीय भूमिकेस सोयीचे ठरते म्हणून वाटेल ते आरोप केले जात आहेत *त्यापैकीच एक आरोप FD मोडल्या हा आहे*. FD मोडल्या याचा अर्थ तोटा नाही हे लोकांनी पुन्हा एकदा लक्षात घ्यावे. ज्या कारणासाठी FD मध्ये पैसे गुंतवले होते त्या कारणासाठीच खर्च झाले आहेत.
आता आपण audited accounts कडे वळू.
BMC बरखास्त झाल्यानंतर तीन आर्थिक वर्षे पूर्ण झाली आहेत.*२०२२-२३,२०२३-२४ आणि २०२४-२५ या तिन्ही वर्षात पालिकेचे उत्पन्न खर्चापेक्षा जास्त आहे.एकाही वर्षात पालिकेला तूट सहन करावी लागलेली नाही*. जर आर्थिक गैरव्यवहार केले असते तर BMC चा खर्च उत्पन्नापेक्षा जास्त असता. नाही का ?
एखादी संस्था आर्थिक दृष्ट्या सशक्त आहे की नाही याचा सगळ्यात मोठा पुरावा म्हणजे balance sheet मध्ये दिसत असलेले *reserves and surplus.* या तीन वर्षात जर त्यात घट झाली असेल तर परिस्थिती नक्कीच चिंताजनक असती. पण तसे झाले आहे का ? बिलकुल नाही..प्रत्यक्षात परिस्थिती याउलट आहे.
२०२२-२३ च्या सुरुवातीला BMC कडे *१६९५०४ कोटी* रुपयांचे reserves होते. २०२४-२५ च्या अखेरीस ते *२०४६४६ कोटी* रुपये झाले आहेत. *म्हणजे पालिका सरकारच्या नियंत्रणाखाली होती त्या तीन वर्षांत मिळून reserves मध्ये तब्बल ३५१४२ कोटी रुपयांची भरच पडली आहे आणि हे सर्व विकासकामांना गती देऊन हे महत्त्वाचे आहे*.
महायुती सरकारने पालिकेत आर्थिक घोटाळे केले, पैशांची अफरातफर केली हे *ठाकरे कुटुंबीयांचे आरोप बिनबुडाचे आहेत*,निखालस खोटे आहेत.
परवा एका मुलाखतीत *उद्धव ठाकरे यांनी महायुती सरकारवर एक हास्यास्पद आरोप केला आहे. BMC ने कंत्राटदारांना तीन लाख कोटी रुपयांचा advance दिला आणि त्यातून पैसे खाल्ले हा तो आरोप*.
त्यांच्या आरोपाला एका सेकंदात उडवून लावता येऊ शकते. *BMC चे आर्थिक वर्ष २०२५-२६ चे बजेटच मुळात ७४४२७ कोटी रुपयांचे आहे.असे असताना तीन लाख कोटी रुपयांच्या कामांचा advance कसा दिला जाऊ शकतो ?*
अजून एक महत्त्वाची गोष्ट म्हणजे BMC च्या balance sheet चा size ३१ मार्च २०२५ रोजी २३६७४० कोटी रुपये इतका आहे. म्हणजे balance sheet ची total इतकी आहे.अशा परिस्थितीत *तीन लाख रुपयांचा कोटी रुपयांचा advance दिल्याचा आरोप हा बालिशपणा आहे*.
*उद्धव ठाकरे हे अर्थनिरक्षर आहेत.* हा आरोप मी करत नाही. अर्थमंत्री निर्मला सीतारामन यांच्या उपस्थितीतच *मला बजेटमधील काही कळत नाही अशी जाहीर कबुली खुद्द उद्धव ठाकरे यांनीच दिलेली जगाने पाहिली आहे*. म्हणून आर्थिक विषयासंबंधी त्यांनी केलेले आरोप गांभीर्याने घेण्याची अजिबात आवश्यकता नाही.
जो माणूस स्वतःच्या अर्थनिरक्षरतेची कबुली देतो त्याच्या आरोपाला किती महत्त्व द्यायचे हे मुंबईतील भोळ्या भाबड्या आणि *ठाकरे आडनावाच्या प्रेमात पडलेल्या मराठी माणसांनी* लक्षात ठेवले पाहिजे.
बरखास्त झाल्यानंतर महायुती सरकारच्या ताब्यात असलेली BMC सुस्थितीत आहे.आर्थिक दृष्ट्या सशक्त आहे.महायुतीतील घटक पक्ष असलेल्या भाजप आणि शिवसेना यांच्या हातातच BMC ची सत्ता असली पाहिजे. केंद्र सरकार,राज्य सरकार आणि स्थानिक स्वराज्य संस्था यांचे धोरण एकाच दिशेने जाणारे असले पाहिजे. Triple Engine. त्यातच समाजाचे व्यापक हित दडलेले आहे. *आपण विकासशत्रू आणि म्हणूनच लोकहितशत्रू आहोत हे ठाकरेंनी अनेकदा सिद्ध केले* असल्यामुळे त्यांच्या हातात BMC चा कारभार सोपवणे हा मुंबईकरांसाठी आत्मघात ठरेल.
मतदानाच्या दिवशी सामान्य मराठी माणसाने हे लक्षात ठेवून *महायुतीच्या उमेदवाराला भरघोस मतदान* करावे.
*उद्या IFSC सेंटर गुजरातला हलवले या खोट्या आरोपाचा भांडाफोड करणार आहे*
सीए आनंद देवधर
०९/०१/२०२६
TRN LIVE: ट्रंप और उनकी कैबिनेट जिस तरह से बार-बार मोदी जी समेत अन्य राष्ट्राध्यक्षों को अपमानित कर रहे हैं — विश्व इतिहास मे ऐसी कोई अन्य मिसाल मिलनी कठिन है। ऐसा कभी नही हुआ — कभी भी नही!
स्पष्ट कहूँ तो अब पानी नाक तक आ चुका है, और हमारे प्रधानमंत्री को अब अपना, और अपने माध्यम से देश का और अपमान नही करवाना चाहिये। ट्रंप प्रशासन के सामने आप मान-अपमान से परे जाकर सारी लिबिर-लिबिर भारत के वाणिज्यिक हित सुरक्षित रखने के लिये ही कर रहे हैं — यह हम समझते हैं। लेकिन जो बात शायद आप स्वयं नही समझ रहे, वो यह है कि ये सनकी व्यक्ति आपको ब्लैकमेल की किस सीमा तक पीछे धकेलता जायेगा — यह तय नही है। वेनेजुएला के तेल भंडार इसे चाहिये थे, तो इसने क्या किया - आपने देख लिया। अब ग्रीनलैंड का उदाहरण भी सामने है जिसे ये अपनी नेशनल सिक्योरिटी के लिये जरूरी बताता हुआ डेनमार्क से सैन्य ताकत के बल पर बीस दिनों मे छीन लेने की बात कह रहा है - आप इसे भी देखते जाइये।
कल को ये भारत के सामने भी ऐसी ही कोई असामान्य अटपटी डिमांड रख देगा — जैसे सदर्न इंडिया मे कोई नेवल-बेस या लद्दाख मे कोई एयरबेस बनाने के लिये अपनी पसंद की पाँच हजार स्क्वायर किलोमीटर भूमि. . . या मान लीजिये ये आपसे आपके थोरियम-रिच इलाकों की माइनिंग का ठेका अमेरिकी कंपनियों को देने के लिये आपकी बाँह मरोड़ने लगे. . . या ऐसा ही कुछ और, तब आप क्या करेंगे? ऐसी माँगें स्वीकार करना राष्ट्रद्रोह होगा - आप वह कर नही सकेंगे। और नकारने की सूरत मे ये राहुल गांधी के सुर मे सुर मिलाता हुआ आप पर भी सरकार बनाने के लिये उसी तरह चुनावी धोखाधड़ी करने का आरोप मढ़ देगा जैसा कि मादुरो पर मढ़ा, और यहाँ भी “सच्चा लोकतंत्र” कायम करने के नाम पर नेपाल, बांग्लादेश, ईरान जैसा आक्रामक कोवर्ट अभियान छेड़ देगा, तब आप क्या करेंगे? आपका तो विपक्ष भी ऐसे ही किसी अवसर की ताक मे है, तो यहाँ से भी उसे खूब समर्थन मिलेगा ही।
मै ये नही कह रहा कि ट्रंप मादुरो की तरह आपको भी उठा ले जायेगा — इतनी तो खैर किसी के बाप की औकात नही है। लेकिन झल्ल निकालने के लिये यदि यह भारत पर भी ईरान, रूस, वेनेजुएला जैसे कठोर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट सैंक्शंस लगा दे, फिर आप क्या कर लेंगे? क्या तब हमारे वाणिज्य और अर्थव्यवस्था को चार चांद लग जायेंगे?
मुझे लगता है कि ट्रंप-प्रशासन को एक अंतिम बार पूरी संजीदगी के साथ बैकडोर चैनल से यह मैसेज पहुँचा दिये जाने की जरूरत है कि भारत आपके मनमाने टैरिफ, इस या उस तरह की धमकियाँ, और व्यक्तिगत बदतमीजियाँ अब और सहन नही करेगा। आप यदि इन पर तत्काल पॉवर-ब्रेक नही लगाते हैं तो हम भी अब कुछ ऐसे अभूतपूर्व कदम उठायेंगे जिन पर आपको बहुत बहुत अधिक पछतावा होगा। उन्हे बात समझ आ जाती है तो ठीक, वरना इस सरफिरे व्यक्ति को पहली गोली चलाने का मौका को देने की बजाय आपको खुद पहला फायर कर देना चाहिये. . . . बिना किसी पूर्व सूचना के एक दिन अचानक टीवी पर आकर राष्ट्र के नाम संदेश जारी कर दीजिये, जिसका निचोड़ यह हो कि भारत ट्रंप प्रशासन द्वारा अपनाये जा रहे उत्पीड़नात्मक हथकंडों को अब और बर्दाश्त करने को तैयार नही है, और ओवल-ऑफिस मे किसी स्थिर मानसिक स्थिति वाले व्यक्ति के पद संभालने तक भारत अमेरिका के साथ सभी कूटनीतिक और व्यापार संबंध निलंबित करता है।
आज का भारत कोई इंदिरा युग वाला निर्बल गरीब भारत नही है कि कोई किसिंजर टाइप अहंकारी इसके हेड ऑफ स्टेट को कुतिया कह कर बिना किसी परिणाम की चिंता के हाथ झाड़ के चलता बनेगा। आज का भारत विश्वपटल पर बहुत अधिक वजन रखता है, और हमारे ऐसा करने से जो वैश्विक भूचाल आयेगा उससे वॉशिंगटन भी हिल कर रहेगा। H1B और एक्सपोर्ट-टू-अमेरिका का लोभ संवरण करके कुछ वर्ष पूरा फोकस घरेलू क्षमतायें विकसित करने के साथ साथ यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, और एशिया के बाजारों मे चीन से स्पर्धा पर लगाइये — लाँगटर्म मे आपको इसके कहीं बेहतर परिणाम मिलेंगे। अमेरिका के कूटनीतिक बहिष्कार वाले इस समय का उपयोग ब्रिक्स को एक सशक्त वैकल्पिक प्लेटफार्म बनाने के लिये भी किया जा सकेगा जो भचिष्य के लिये हमे और बेहतर निगोशियेशन का लीवरेज देगा (ट्रंप के साये मे रहते ऐसा कर पाना संभव नही — ये तो आप भी समझते ही होंगे), तो इस पर भी कुछ सोचिये।
भले अस्थाई ही सही, लेकिन अमेरिका को दिया गया ये तलाक बाकी के संसार को भी इस नये तथ्य से भली भांति परिचित करवा देगा — कि बांह मरोड़ कर भारत से काम निकलवाने के दिन लद चुके. . . अब इस देश से बदतमीजी करने की सोचना भी मूर्खता होगी। यूरोप आज तक जिस बिल्ली के गले मे घंटी बांधने के नाम से डरता आया है, एक बार आप ही साहस जुटा उसे घंटी बांध दीजिये। क्या पता आपका यही कदम अमेरिका को एलियनेट करके एक नई व्यवस्था की - ग्लोबल रीअलाइनमेंट की शुरुआत करे और भारत को सच्चे अर्थों मे विश्वगुरु कहलाने का हकदार बना दे!
“अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझे फोन करके आमंत्रित किया, लेकिन मैंने महाप्रभु की भूमि, ओडिशा आने का निमंत्रण ठुकरा दिया।” — प्रधानमंत्री मोदी
🤔 लेकिन पप्पू और पिडी गिरोह, ISPR ट्रोल्स के साथ मिलकर, अमेरिका के बाल यौन शोषण करने वाले राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को लेकर भारत की छवि खराब करने के लिए सुबह से दुष्प्रचार कर रहे हैं।
TRN LIVE: स्कूलों में गूँजेंगे गीता के श्लोक! कक्षा 6 से 10 तक 'भगवद गीता' बन सकता है अनिवार्य विषय, मोदी सरकार की बड़ी तैयारी 📖🚩
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत, केंद्र सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है। कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों के लिए गीता के उपदेशों को नैतिकता, कर्तव्य (Svadharma), और निर्णय क्षमता विकसित करने के लिए एक अलग विषय या सप्लीमेंट्री बुक के रूप में पेश करने का प्रस्ताव है।
अर्जुन का विषाद और कृष्ण का प्रसाद—अब क्लासरूम में भी दिखेगा जीवन का प्रबंधन। भगवद गीता का पाठ्यक्रम किसी धर्म विशेष के लिए नहीं, बल्कि हर छात्र के चरित्र निर्माण के लिए है।
2026 का नया भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। जब दुनिया तनाव और अनिश्चितता से जूझ रही है, तब भारत अपने बच्चों को गीता के 'निष्काम कर्म' का कवच पहना रहा है।
शिक्षक अब केवल किताबी थ्योरी नहीं, बल्कि गीता के माध्यम से नेतृत्व क्षमता (Leadership) और भावनात्मक संतुलन (Emotional Intelligence) सिखाएंगे।
#BhagavadGita | #IndiaCulture | #EducationReform | #NarendraModi |
TRN LIVE: #BREAKING: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ को अफ्रीका–फ्रांस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।
यह शिखर सम्मेलन 11–12 मई, 2026 को नैरोबी, केन्या में आयोजित किया जाना है।
𝑻𝑯𝑬 𝑮𝑹𝑶𝑼𝑵𝑫 𝑹𝑬𝑷𝑶𝑹𝑻
TRN LIVE: Breaking News
US सीनेट ने कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना ट्रंप को वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ आगे मिलिट्री एक्शन लेने से रोकने के लिए वोट किया।
सीनेट ने 52-47 वोटों से प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को वेनेजुएला में आगे मिलिट्री एक्शन लेने से रोकने के लिए वोट किया।
TRN LIVE: *🤷🏻♂️ मुस्लिम-बहुल इलाके हिंदुओं के लिए कैसे वर्जित क्षेत्र बन गए हैं।*
👉एक सच्चाई जो कई लोग अनुभव करते हैं, कम ही बोलते हैं। अपने ही देश में, कुछ हिंदू खुद को पराया महसूस करते हैं।
🙋🏻♂️हम हमेशा कहते हैं - भारत सबके लिए है।
👉हाँ, ऐसा होना चाहिए।
💁🏻♂️लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही कहती है।
🤷🏻♂️भारत भर में कई जगहों पर, हिंदू परिवार चुपचाप कुछ इलाकों को छोड़ रहे हैं।
💁🏻♂️क्यों.....?
👉गरीबी की वजह से नहीं।
👉सुविधाओं की कमी की वजह से नहीं।
💁🏻♂️बल्कि मुस्लिम-बहुल इलाकों में डर, अलगाव और धीरे-धीरे होने वाली बदमाशी की वजह से।
*👁️🗨️आइए इस असहज सच्चाई पर बात करें - नफ़रत फैलाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी आँखें खोलने के लिए।☝️*
1️⃣. इसकी शुरुआत छोटे-छोटे बदलावों से होती है जिन्हें लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
👉शुरू में तो सब ठीक लगता है। कुछ हिंदू परिवार मुस्लिम पड़ोसियों के बीच शांति से रहते हैं।
👉कोई समस्या नहीं।
👉कोई तनाव नहीं।
👉 जीवन चलती रहती है ।
*🤷🏻♂️लेकिन धीरे-धीरे बदलाव शुरू होते हैं:*
📣लाउडस्पीकरों की संख्या बढ़ जाती है।
👉 हर जगह स्थानीय मांस की दुकानें खुल जाती हैं।
👉 होली, दिवाली जैसे त्योहारों पर रोक लग जाती है।
👉 तेज़ संगीत या पूजा की आवाज़ें शिकायतों या धमकियों का कारण बनती हैं।
*💁🏻♂️कोई भी खुलकर कुछ नहीं कहता। लेकिन संदेश साफ़ है यह इलाका अब तुम्हारा नहीं है।*
*2️⃣. स्थानीय बहुसंख्यक दैनिक जीवन पर हावी होने लगते हैं।*
🤷🏻♂️ जब मुसलमानों की संख्या 60-70% हो जाती है, तो माहौल बदल जाता है। अब हिंदू रीति-रिवाजों का विरोध शुरू हो जाता है।
👉-सड़कों पर गरबा या दुर्गा पंडाल की अनुमति नहीं है।
👉 पुलिस की अनुमति के बिना राम नवमी या हनुमान जयंती के जुलूस नहीं निकाले जा सकते👉 स्कूलों का समय और सार्वजनिक स्थानों का उपयोग शुक्रवार की नमाज़ के आसपास समायोजित होने लगता है।
👉और अगर कोई हिंदू असहजता व्यक्त करता है, तो उसे कहा जाता है -"तुम यहाँ अल्पसंख्यक हो। समायोजित हो जाओ।"
*3️⃣. महिलाएँ असुरक्षित महसूस करती हैं और मंदिरों में उत्पीड़न होता है ऐसे कई इलाकों में, हिंदू महिलाओं को टिप्पणियों, घूरने या नैतिक पुलिसिंग का सामना करना पड़ता है। बिंदी, चूड़ियाँ या पारंपरिक पोशाक पहनने वाली लड़कियों को घूरा जाता है या उनका मज़ाक उड़ाया जाता है। विभिन्न धर्मों के लोगों पर उत्पीड़न भी बढ़ता है - जिसे अक्सर स्थानीय पुलिस नज़रअंदाज़ कर देती है।*
*🛕मंदिरों में:*
👉 ध्वनि प्रतिबंध
👉 अज़ान के दौरान प्रवेश निषेध
👉कुछ मामलों में तोड़फोड़
💁🏻♂️कोई भी विरोध करने की हिम्मत नहीं करता। चुप्पी ही जीवन रक्षा का उपाय बन जाती है।
*4️⃣. राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना पुलिस की मौजूदगी का कोई मतलब नहीं है।*
हिंदू शिकायत भी करें, तो स्थानीय पुलिस अक्सर तटस्थ या डरी हुई रहती है।
💁🏻♂️क्यों.....?
👉"सांप्रदायिक" लेबल का डर।
👉राजनीतिक दबाव का डर।
👉सोशल मीडिया पर आक्रोश का डर।
*👁️🗨️ नतीजा.......?*
👉 धमकियों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
👉 ज़मीन पर अतिक्रमण को "सुलझाया" जाता है।
👉हिंसा को "झड़प" कहा जाता है - जिसका कभी स्पष्ट रूप से नाम नहीं लिया जाता।
💁🏻♂️कानून तो है, लेकिन न्याय गायब है।
*5️⃣ व्यवसाय बंद हो जाते हैं, मकान - मकान में बिक जाते हैं, छात्रावास घर बदल जाते हैं!*
👉 हिंदू पर बहिष्कार या दबाव बढ़ना प्रतीत होता है- "उससे कुछ मत खरीदो, वह हमसे नहीं है। उसकी दुकान मस्जिद के पास है, उसे हटा दो।"
👉परिवार के आवास में शामिल हैं - बार-बार क्रोएशिया में। कोई बड़ा विरोध नहीं। कोई मीडिया विज्ञापन नहीं। बस यात्री निकल जाते हैं। परिवर्तन परिवर्तन ऐसे ही होता है - कानून से नहीं, बल्कि डर से।
*6️⃣. एकतरफ़ा "धर्मनिरपेक्षता" कट्टरपंथियों को दुस्साहसी बनने में मदद करती है।*
🤷🏻♂️अगर कोई हिंदू समूह आवाज़ उठाता है, तो मीडिया कहता है :- *"सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है।"* लेकिन जब कट्टरपंथी पक्ष धमकी देता है, गाली-गलौज करता है, या परेशान करता है - कोई रिपोर्ट नहीं करता। कोई राष्ट्रीय आक्रोश नहीं। यह दोहरा मापदंड कट्टरपंथियों को आत्मविश्वास देता है: *"कुछ भी करो - कोई तुम्हें रोकेगा नहीं।"*
👉और ठीक यही होता है - धीरे-धीरे, लगातार।
*7️⃣. संख्या कम होते ही, संस्कृति की जगह डर हावी हो जाता है।*
👉 जब कुछ ही हिंदू परिवार बचते हैं, तो वे कोई भी उत्सव धूमधाम से मनाना बंद कर देते हैं।
👉 बाहर दीपावली के दीये नहीं जलाए जाते।
👉 तेज़ आवाज़ में आरती नहीं की जाती।
👉 उत्सव की रोशनी या भजन नहीं गाए जाते।
👉होली भी जोखिम भरी हो जाती है। किसी पर एक भी गलत रंग, और भीड़ जमा हो सकती है।इसलिए लोग चुपचाप रहते हैं, चुपचाप रहते हैं - जैसे अपने ही शहर में मेहमान हों।
*8️⃣. लव जिहाद और धमकाने की तरकीबें डर को और बढ़ा देती हैं।*
💁🏻♂️कई हिंदू माता-पिता कहते हैं - "हमारी बेटियों को बाहर खुलकर बात करने मत दो। "क्यों....?
क्योंकि झूठी पहचान, बनावटी रवैए, विरोध करने पर धमकियों की कहानियाँ फैलती हैं।
अगर कोई बोलता है, तो उसे "दक्षिणपंथी" या "फर्जी खबर फैलाने वाला" कहा जाता है।लेकिन डर असली है। उन परिवारों से पूछिए जिन्होंने इसका सामना किया है।
*9️⃣. यह सिर्फ़ आस्था का मामला नहीं है - यह प्रभुत्व का मामला है।*
💁🏻♂️कई मुसलमान हिंदुओं के साथ शांतिपूर्वक रहते हैं। इसमें कोई शक नहीं। लेकिन जब कट्टरपंथी तत्व स्थानीय सत्ता हासिल कर लेते हैं, तो वे सह-अस्तित्व नहीं चाहते।
*💁🏻♂️वे नियंत्रण चाहते हैं। इन पर नियंत्रण:*
👉वे ध्वनियाँ जिन्हें आप बजा सकते हैं।
👉वे कपड़े जिन्हें आप पहन सकते हैं।
👉 वे सड़कें जिन्हें आप इस्तेमाल कर सकते हैं।
👉 वे शब्द जिन्हें आप बोल सकते हैं।
*💁🏻♂️और तभी यह "मिश्रित क्षेत्र" नहीं रह जाता - यह धर्म के लिए वर्जित क्षेत्र बन जाता है।*
*🔟. कोई भी इसके बारे में खुलकर नहीं बोलता - डर या अपराध-बोध के कारण।*
👉मीडिया भी इन विषयों से बचता है।
👉प्रतिक्रिया का डर।
👉दंगों का डर।
👉"इस्लामोफोबिक" कहलाने का डर।
🤷🏻♂️इसलिए हिंदू चुपचाप सहते हैं।
👉घर बदलते हैं।
👉स्कूल बदलते हैं।
👉पूजा-पाठ बंद कर देते हैं।
👉और सबसे दुखद बात - अपने बच्चों को सिखाते हैं: "बेटा, ज़ोर से मत बोलो।"
👉इस तरह पूरे इलाके अपना धर्म खो देते हैं।
🙋🏻♂️नफ़रत नहीं।
🤷🏻♂️सिर्फ़ सच्चाई।
💁🏻♂️यह किसी समुदाय पर हमला नहीं है।
*🤦🏻♂️यह अपने ही देश में बेबस हिंदुओं की चीख़ है। हर हिंदू वर्चस्व नहीं चाहता। हम सम्मान चाहते हैं। हम बिना किसी डर के रहने, पूजा करने और बच्चों की परवरिश के लिए सुरक्षित जगह चाहते हैं। लेकिन वह जगह सिकुड़ रही है - और कोई बोल नहीं रहा।*
*🤷🏻♂️आइए, बोलने से पहले किसी और कैराना, मालदा या मेवात का इंतज़ार न करें।*
*🙋🏻♂️आइए, उन खामोश हिंदुओं की बात करें जिन्हें जबरन बाहर निकाला गया - क़ानून से नहीं, बल्कि डरा-धमकाकर। क्योंकि अगर हिंदू बहुल भारत में हिंदू सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते, तो हम कहाँ सुरक्षित महसूस करेंगे....?*
*👉यह नफ़रत भरी बातें नहीं हैं। यह आहत करने वाली बातें हैं। और जब लंबे समय तक नज़रअंदाज़ किया जाता है, तो आहत बातें इतिहास बन जाती हैं।*
TRN LIVE: राजीव गांधी को भूल कर भी मत भूलिएगा
भगवान का शुक्र है कि उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था नहीं तो राहुल गांधी से भी बड़े थे राजीव गांधी।
आज कुछ किस्से मै आपको बताने जा रहा हूं जिसे पढ़कर आप दंग रह जाएंगे कि राजीव गांधी जैसे लोग भी इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री बन गए!!!
राजीव गांधी के पास सिर्फ एक ही योग्यता थी कि वो फिरोज गांधी के बेटे थे... और उससे भी ज्यादा जरूरी... वो पंडित नेहरू के नाती थे।
राजीव गांधी पढ़ाई लिखाई में फिसड्डी थे। 5 Star Doon School से स्कूलिंग के बाद 1961 में उन्हें इंजियनीरिंग पढ़ने लन्दन के ट्रिनिटी कॉलेज कैब्रिज भेजा गया।
यहीं पर राजीव से एडवीज अंतोनियो अल्बिना माइनो जिन्हें आज हम सोनिया गांधी के नाम से जानते हैं के सम्पर्क में आये।
1965 तक वो Antonio Mayno के प्यार में डूबे रहे और निरंतर फेल होते रहे और पास नहीं हो सके जिसके बाद कॉलेज ने राजीव को निकाल दिया।
फिर राजीव ने 1966 में लन्दन स्थित इम्पीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, किन्तु वहां भी फेल हुए।
उसी वर्ष राजीव की मां इंदिरा प्रधानमंत्री बनी और राजीव भारत आ गए, 1966 में दिल्ली फ्लाइंग क्लब ज्वाइन किया और प्लेन उड़ाना सीखने लगे।
अब 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा ने जुगाड़ लगवा कर राजीव को सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया में कमर्शियल पायलट के तौर पर नौकरी में लगवा दिया।
1971 में भारत पाक युद्ध हुआ भारतीय सेना व् वायु सेना को लाजिस्टिक स्पोर्ट के लिए पायलट्स की आवश्यकता थी और एयर इंडिया के कमर्शियल पायलट्स को रसद एवं हथियार एयर ड्राप करने हेतु बुलाया गया।
सारे के सारे पायलट्स तुरन्त युद्ध क्षेत्र में सेवाएं देने को आ गये सिवाय एक के और वो राजीव गांधी थे जो डर के मारे सोनिया गांधी संग दिल्ली में इटली के दूतावास में जा छिपे थे।
1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव राजनीती में आये।
1984 में इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने दोपहर में गोली मार दी। राजीव गांधी ने मां की मृत्यु के शोक संताप में समय लगाने के बजाय उसी दिन शाम को भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर अपनी तशरीफ़ रख दी।
और कांग्रेसियों को सिखों का नरसंहार करने का आदेश दे डाला, कांग्रेसियों ने स्कूलों के रजिस्टरों और वोटर लिस्ट निकाल निकाल कर सिखों के घर खोजे और घरों में घुसकर हजारों सिखों को काटा। सिख महिलाओं से दुष्कर्म किया।
कई गर्भवती महिलाओं को जीवित ही जला दिया।
सिखों को और उनके बच्चो को, उनकी सम्पत्तियों को फूंकने हेतु कांग्रेस नेताओं के पेट्रोल पंपों से पेट्रोल सप्पलाई किया गया। सड़क चलते सिखों के गले में टायर डालकर जला दिया गया।
यहाँ तक कि तत्कालीन राष्ट्रपति जैल सिंह को भी नहीं बख्शा गया और जब वो गाड़ी में थे तो उनपर भी कांग्रेसियों ने हमला किया। गाड़ी के कांच तोड़ दिए गए।
दिल्ली में कांग्रेसियों का हिंसा का तांडव शुरू हुआ और शीघ्र ही ये देश के कोने कोने में फ़ैल गया।
और राजीव गांधी ने इंदिरा की मृत्यु का बदला देश भर में हजारों निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतरवाकर लिया।
और बाद में राजीव गांधी ने उसे “बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है” वाला ब्यान देकर उसे न्यायोचित ठहरा दिया।
खैर अगले चुनाव हुए और जनता ने राजीव द्वारा करवाये सिख नरसंहार को महत्व दिए बिना राजीव को इंदिरा की सहानुभूति के नाम पर 411 सीटें देकर असीम शक्ति दे दी..
और राजीव ने निरंकुश होकर उस बहुमत का दुरूपयोग किया,
1985 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहबानो को न्याय देकर मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक से बचने और गुजारे भत्ते का जो मार्ग खोला था उसपर आतातायी राजीव ने अपनी अक्ल पर पड़ा बड़ा वाला भीमकाय पत्थर दे मारा।
और अपुर्व बहुमत का प्रयोग कर मुस्लिम तुष्टिकरण का नया अध्याय लिखा और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटकर मुस्लिम महिलाओं को पुनः गुलाम बना दिया।
भोपाल गैस कांड हुआ हजारों निर्दोष लोगों के हत्यारे यूनियन कार्बाइड के मालिक वारेन एंडरसन को राजीव ने अमेरिकी सरकार से सौदेबाजी कर सुरक्षित अमरीका भेज दिया।
राजीव में न वैश्विक कूटनीति की समझ थी, न सैन्य शक्ति के सदुपयोग की समझ थी। अतः अपने सीमित विवेक क्षमता से ग्रस्त राजीव गांधी ने श्रीलंका में LTTE से लड़ने भारतीय सेना जबर्दस्ती भेज दी। और इंडियन पीस कीपिंग फोर्सेस के 1400 सैनिक मरवाये और 3000 सैनिक घायल करवाये
हलांकि बाद में राजीव को थूककर चाटना पड़ा और सैनिकों को वापस बुलाना पड़ा। राजीव को अपनी उस गलती के कारण ही श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई सैनिक द्वारा हमला किया गया था।
वो पहले व् एकमात्र प्रधानमंत्री बने जिन्हें विदेशी धरती पर विदेशी सैनिक द्वारा अपमानित होना पडा!
1989 में बोफोर्स का घोटाला खुला जिसमे पता चला की राजीव गांधी ने सोनिया के “करीबी” जिसे सोनिया अपने संग इटली से दहेज़ में लायी थी और जो सोनिया राजीव के घर में ही रहता था उस ओटावियो कवात्रोची के द्वारा बोफोर्स सौदे में राजीव ने दलाली खायी थी।
1991 में Schweizer Illustrierte नामक स्विस मैगज़ीन ने काले धन वाले उन लोगों के नाम का खुलासा किया जिनका अवैध धन स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जमा था।
और उसमें राजीव गांधी का भी नाम था। मैगज़ीन ने खुलासा किया कि राजीव गांधी के 2.5 बिलियन स्विस फ्रैंक स्विट्ज़रलैंड के बैंक के एक अकाउंट में जमा हैं
1992 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया और द हिन्दू ने खबरें छापीं की राजीव गांधी को सोवियत ख़ुफ़िया एजेंसी KGB से निरंतर धन मिलता था। रूस ने इस खबर की पुष्टि भी की थी और सफाई में कहा था कि सोवियत विचारधारा के हितों की रक्षा हेतु ये पैसे दिए जाते रहे हैं।
1994 में येवगिनिया अल्बट्स और कैथरीन फिट्ज़पेट्रिक ने KGB प्रमुख विक्टोर चेब्रिकोव के हस्ताक्षर युक्त पत्र प्रस्तुत कर ये खुलासा किया कि राजीव के बाद राजीव के परिवार, सोनिया और राहुल को KGB की ओर से धन उपलब्ध करवाया जाता रहा और KGB गांधी परिवार से निरन्तर संपर्क में रहती थी।
अब यदि आप पूरा आकलन करें तो पाएंगे कि राजीव एक औसत से कम समझदार वो व्यक्ति थे जिसने
निर्दोष सिख मरवाये,
भोपाल गैस कांड में हजारों निर्दोषों के हत्यारे को भगाया।
मुस्लिमों महिलाओं का जीवन नर्क बनाया।
रक्षा सौदों में दलाली खायी।
KGB जैसी एजेंसी के वो खुद एजेंट थे और उससे पैसे लेते थे, कूटनीति की समझ नहीं थी।
और मूर्खतावश श्रीलंका में 1400 भारतीय सैनिकों की बलि चढ़वाई और देश का नाम कलंकित किया।
TRN LIVE: 📢 *मात्र 8-10 वर्ष पहले मैं भी एक सामान्य व्यक्ति था, मुझे भी औरों की तरह नेहरू, गांधी, गांधी परिवार तथा हिन्दू मुस्लिम भाई भाई जैसे नारे अच्छे लगते थे ।* 🤔
*मगर ..... मगर ...* 🥵
*इन 8-10 वर्षों में विभिन्न माध्यमों से मुझे कुछ ऐसे सत्य पता चले जो हैरान करने वाले थे।* 🥱
1. सोशल मीडिया से मुझे यह पता चला कि "पत्रकार" निष्पक्ष नहीं होते। वे भी किसी मकसद/व्यक्तिगत स्वार्थ से जुड़े होते हैं।
2. लेखक, साहित्यकार भी निष्पक्ष नहीं होते। वे भी किसी खास विचारधारा से जुड़े होते हैं।
3. साहित्य अकादमी, बुकर, मैग्ससे पुरस्कार प्राप्त बुद्धिजीवी भी निष्पक्ष नहीं होते।
4. फिल्मों के नाम पर एक खास विचारधारा को बढ़ावा दिया जाता है। बालीबुड का सच पता चला।
5. हिन्दू धर्म को सनातन धर्म कहते हैं और देश का नाम हिंदुस्तान है, क्योंकि यह हिंदुओं का इकलौता देश है।
6. हिन्दू शब्द सिंधु से नहीं (ईरानियों द्वारा स को ह बोलने से) नहीं आया बल्कि "हिन्दू" शब्द "ऋग्वेद" में लाखों वर्ष पूर्व से ही वर्णित था।
7. जातिवाद, बाल विवाह, पर्दा प्रथा हजारों वर्ष पूर्व सनातनी नहीं बल्कि मुगलों के आगमन से उपजी कु-व्यवस्था थी, जिसे अंग्रेजों ने सनातन से जोड़कर हिन्दुओं को बांटा। उसे लिखित इतिहास बनाया।
8. किसी समय भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म पूरे विश्व में फैला था।
9. वास्कोडिगामा का सच ये था कि वह एक लुटेरा, धोखेबाज था और किसी भारतीय जहाज का पीछा करते हुए, भारत पहुंचा।
10. बप्पा रावल का नाम, काम और अद्भुत पराक्रम सुना। उनसे डरकर 300 वर्ष तक मुस्लिम आक्रांता इधर झांके भी नहीं।
11. बाबर, हुमायूँ, अकबर, औरंगजेब, टीपू सुलतान सहित सभी मुगल शासक क्रूर, हत्यारे, इस्लाम के प्रसारक और हिंदुओं का नरसंहारक थे, यह सच पता चला।
12. ताज़महल, लालकिला, कुतुब मीनार हिन्दू भवन थे, इनकी सच्चाई कुछ और थी।
13. जिसे लोग व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी कहकर मजाक उड़ाते हैं, उसी ने मुझे हेडगेवार, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल व हिन्दू समाज के साथ कि गई गद्दारी की सच्चाई बताईं।
14. गाँधी जी की तुष्टिकरण और भारत विभाजन के बारे में ज्ञान हुआ।गांधी जी जब अहिंसा के पुजारी थे तो शांतिदूतो को अहिंसा का पाठ न पढाके सिर्फ़ हिन्दुओं को क्यों पढाया
15. नेहरू की असलियत, उसके इरादे, उसकी हरकतें, पता चलीं।
16. POJKL के बारे में भी इन 6 वर्षों में जाना कि कैसे पाकिस्तान ने कब्जा किया। और कौन लोग POJKL को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं।
17. अनुच्छेद 370 और उससे बने नासूर का पता चला।
18. कश्मीर में दलितों को आरक्षण नहीं मिलता, यह भी अब पता चला।
19. AMU मे दलितों को आरक्षण नहीं मिलता, वह संविधान से परे है।
20. जेएनयू की असलियत, वहाँ के खेल और हमारे टैक्स से पलने वाली टुकड़े टुकड़े गैंग का पता चला।
21. वामपंथी-देशद्रोही विचारधारा के बारे में पता चला।
22. जय भीम समुदाय के बारे में पता चला। भीमराव के नाम पर उनके मत से सर्वथा भिन्न खेल का पता चला। मीम भीम दलित औऱ हिन्दू दलित अलग होते हैं पता चला।
23. मदर टेरेसा की असलियत अब जाकर ज्ञात हुई।
24. ईसाई मिशनरी और धर्मांतरण के बारे में पता चला।
25. समुदाय विशेष में तीन तलाक, हलाला, तहरुष, मयस्सर, मुताह जैसी कुरीतियों के नाम भी अब जाकर सुना। इनका मतलब जाना।
26. अब मुझे पता चला कि धिम्मी, काफिर, मुशरिक, शिर्क, जिहाद, क्रुसेड जैसे शब्द हिन्दुओं के लिए क्या संदेश रखते हैं।
27. सच बताऊं, गजवा ऐ हिन्द के बारे मे पता भी नहीं था। कभी नाम भी नहीं सुना था। यह सब इन 6 वर्षों में पता चला। स्टॉकहोम सिंड्रोम और लवजिहाद का पता चला।
28. सेकुलरिज्म की असलियत अब पता चली। मानवाधिकार, बॉलीवुड, बड़ी बिंदी गैंग, लुटियंस जोन इन सबके लिए तो हिन्दू एक चारा था।
29. हिन्दू पर्सनल लॉ और मुस्लिम पर्सनल लॉ अलग हैं, यह भी सोशल मीडिया ने ही बताया। नेहरू ने हिन्दू पर्सनल लॉ को समाप्त कर दिया लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ को रहने दिया।
30. भारतीय इतिहास के नाम पर हमें झूठा इतिहास पढ़ाया गया, जिन मुगलों ने हमें लूटा, हम पर अत्याचार किया उन्हें महान बताया गया। यदि कोई बाहरी व्यक्ति आपके घर पर कब्जा करे लूटे अत्याचार करे, वह महान और लुटने वाला लुटेरा कैसे हो सकता है।
31. इतना सब पता चलने के बाद भी और मोदीजी के महान नेतृत्व के बाद भी केवल तीस प्रतिशत हिन्दू ही समझ पाए बाकी वैसे ही हैं।
32. यहां तक कि न्यायमूर्ति कहे जाने वाले न्यायाधीश तक निष्पक्ष नहीं होते, कुछ विचारधारा से, कुछ डर के कारण, न्याय नहीं कर सकते।
33. अभिव्यक्ति की आजादी और सही इतिहास जिसे दफन कर दिया गया था वह अब धरती फाड़कर बाहर आ रहा हैै। पर पहले लिखा इतिहास सारा झूठ का पुलंदा था।
34. सभी राजनीतिक पार्टियों की वास्तविक हकीकत, और उनका एजेंडा पता चला.
35. 🔥
TRN LIVE: *शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें*
*1* अमित शाह ने लॉन्च किया देश का पहला राष्ट्रीय IED डेटा मैनेजमेंट सिस्टम, आतंरिक सुरक्षा मजबूत होगी
*2* ED रेड के खिलाफ कोलकाता में ममता का मार्च, दिल्ली में TMC सांसदों को 2 घंटे की हिरासत; कोलकाता हाईकोर्ट में हंगामें के कारण सुनवाई टली
*3* दिल्ली में भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ईडी की छापेमारी के खिलाफ टीएमसी के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ममता बनर्जी बंगाल में कोई जांच नहीं होने देती हैं। उन्होंने सीएम ममता पर ईडी के अधिकारियों को धमकाने का भी आरोप लगाया।
*4* 'बंगाल में जो हुआ, वह स्वतंत्र भारत में पहले कभी नहीं हुआ', BJP ने ममता बनर्जी से पूछा- आपको इतनी घबराहट क्यों?
*5* कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा को भ्रष्ट जनता पार्टी बताते हुए उस पर तीखा हमला किया, उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड, उन्नाव बलात्कार कांड, इंदौर में जहरीले पानी से मौतें और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन जैसे कई मुद्दों पर भाजपा की डबल इंजन सरकार को घेरा
*6* CJI बनने के बाद आज पहली बार हरियाणा में सूर्यकांत, सम्मान में स्टेट डिनर देंगे मुख्यमंत्री, बैंड-बाजे के साथ हांसी और हिसार बार में स्वागत होगा
*7* नेताओं को लालच या दबाव देकर पार्टी बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा, अजित पवार का क्या इशारा
*8* अजित पवार ने आरोप लगाया कि अधिकतर राजनीतिक दलों ने अपने मूल सिद्धांतों को त्याग दिया है,और वे अपने समर्थकों की संख्या बढ़ाने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रहे हैं, नेताओं को प्रलोभन देकर यहां दबाब डालकर पार्टी बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है, उन्होंने कहा राजनीति में खुलेआम धन और बाहुबल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनके पास पैसा और बाहुबल है,वे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं
*9* सिंघवी बोले-कुत्तों से जुड़े नियम मौजूद, कोर्ट दखल न दे, सलाह एक्सपर्ट से ही लें; अफसरों की राय के कारण अरावली पर फैसला पलटना पड़ा
*10* बीकानेर कैमल फेस्टिवल में पहनी 22 किलो की पगड़ी, हेरिटेज वॉक में 4KM पैदल चले केंद्रीय कानून मंत्री; गलियों में गूंजा केसरिया बालम
*11* ट्रक में घुसी कार...पूर्व मंत्री की बेटी समेत तीन मौत, मृतकों में कांग्रेस नेता का बेटा भी शामिल, एक घायल; इंदौर में पार्टी कर लौट रहे थे
*12* ईरान के 100 शहरों में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन, पुलिसकर्मी की हत्या, अब तक 45 की मौत; तेहरान एयरपोर्ट, इंटरनेट-फोन सर्विस बंद
*13* ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई का देश के नाम संबोधन, अमेरिका से बोले- 'झुकेंगे नहीं'
*14* भारत कोकिंग कोल का IPO आज से खुला, 50% प्रीमियम के संकेत, प्राइस बैंड ₹21 से ₹23 प्रति शेयर;
*15* सेंसेक्स 604 अंक गिरा, 83,576 पर आया, अमेरिका में ट्रम्प के टैरिफ फैसले पर टिकी नजरें; आज इरेडा और तेजस नेटवर्क के नतीजे।
TRN : *उद्धव, राज, आदित्य, अमित*
हा फक्त *136 सेकंदांचा विडिओ* आहे. हा तुम्ही *136 वेळा बघा*. नो प्रॉब्लेम. वाटलं तर सगळे प्रकल्प एका कागदावर एकाखाली एक लिहून घ्या. पाठांतर करा. आणि त्यानंतर आज मुंबईमध्ये 'सुरू असलेले' (घोषणाबाजी नाही) *हे प्रकल्प फक्त एकदा न बघता आणि एका दमात बोलून दाखवा !* फक्त न चुकता बोलून दाखवलं, तर या सर्व प्रकल्पांचे श्रेय तुम्हाला आणि माझं मत पण तुम्हाला ! बरं ते जाऊद्या. वेगळं चॅलेंज : *मुंबईच्या नकाश्यावर हे*
*प्रकल्प कुठे-कुठे सुरू आहेत तेवढं फक्त बोट ठेवून दाखवायचं, तरी श्रेय तुमचं आणि माझं मत पण तुम्हाला !!!*
बरं चला तेही जाऊद्या, हे सगळं मल्टी-मोडल श्रेणीत मोडतं. मग हे चॅलेंज जमतंय का बघा : *मुंबईत किती मेट्रो प्रकल्प सुरू आहेत, किती पूर्ण झालेत आणि ते सर्व प्रोजेक्ट कुठून कुठपर्यंत आहेत तेवढंच सांगा, श्रेय पण देतो आणि मत पण देतो !!!*
अशी तुम्हाला मी *25 चॅलेंज* देतो मुंबईशी संबंधित. *एकही नाही झेपणार तुम्हाला! फक्त कमिशन खायची आणि श्रेय लाटायची कामं तुमची*. काम पूर्ण झालं की समृद्धीला नाव द्या, नवीमुंबई एयरपोर्टला नाव द्या, अमुक आणि तमुक प्रकल्पाला नाव द्या, महापौर बांगला स्मारक बनवायला द्या.. हीच तुमची कामं. *फक्त घ्यायचं! मागून, ओरबाडून, फसवून !* अरे लाज वाटू द्या रे थोडी. ते *देवेंद्र फडणवीस नागपूरचे आमदार आहेत ! दोनदा मुख्यमंत्री झाले*, पण मुंबईत स्वतःच्या मालकीची एक इंचही जमीन नसलेले महाराष्ट्राच्या आजवरच्या इतिहासातील एकमेव मुख्यमंत्री आहेत ते !! त्यांच्या मालकीची एक इंचही जमीन नाही, पण *मुंबईबद्दलची तळमळ आणि आत्मीयता बघा, व्हिजन आणि डेडिकेशन बघा, त्यांची कमिटमेंट बघा आणि मुंबईकरांच्या जीवनात सकारात्मक बदल घडविण्यासाठीची संवेदनशीलता बघा*. बरं एवढी रेकॉर्ड कामं सुरू आहेत, तरी *पाच पैश्यांच्या भ्रष्टाचाराचा आरोप पण कोणी करायची हिम्मत नाही एवढं पारदर्शक आणि प्रामाणिकपणे काम सुरू आहे ते बघा !!!* आणि थोडी जरी लाज वाटली, तर मुंबईच्या समुद्रकिनारी देवेंद्रजी *21 जेट्टी* उभ्या करत आहेत, त्यातील एखादी जवळची जेट्टी गुगल वर शोधा आणि तिकडे जाऊन *ओंजळीभर पाणी घेऊन त्यात जीव द्या..*
तुमच्याकडून निवडणुकीच्या काळात प्रत्येक वेळी खेळल्या जाणाऱ्या सर्व *भावनिक कार्डाना* यावेळी *मुंबईकर केराची टोपली दाखवणार* आहेत आणि मुंबईसाठी धडपडणाऱ्या व मुंबईसाठी तळमळ असलेल्या भारतीय जनता पार्टीचा महापौर बसवून मुंबईकर देवेंद्र फडणवीस यांच्या यावेळी कामाची पोचपावती देणार आहेत !
माझं हे वाक्य लक्षात ठेवा : 16 जानेवारी 2026 रोजी *मुंबईत भाजपचे कमळ फुलणार* आणि आमची मुंबई पुन्हा एकदा मोकळा श्वास घेणार !!
- *वेद कुमार*
TRN LIVE: *फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने राजनयिक कोर को संबोधित करते हुए कहा—*
उन्होंने कहा कि दुनिया की प्रमुख वैश्विक शक्तियां आपस में दुनिया को बांटने की कोशिश कर रही हैं, और हालिया घटनाओं ने इसकी पुष्टि की है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
मैक्रों ने कहा कि अमेरिका एक स्थापित शक्ति है, लेकिन वह धीरे-धीरे अपने सहयोगियों से दूरी बना रहा है और नियमों को छोड़ता जा रहा है।
मैक्रों के इस बयान से वैश्विक कूटनीति में नई बहस तेज हो गई है।
उन्होंने कहा, “हम ऐसे दौर में हैं जहां जिसकी ताकत, उसकी बात मानी जा रही है।”
मैक्रों ने भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया को रक्षा, सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में फ्रांस के अभूतपूर्व और मजबूत साझेदार बताया।
उन्होंने कहा कि फ्रांस भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता रहेगा।
मैक्रों ने यह भी कहा कि ब्रिक्स का अध्यक्ष होने के नाते भारत, ब्रिक्स और G7 के बीच सेतु (ब्रिज) बनाने की अहम भूमिका निभा सकता है।
TRN LIVE: *कुख्यात तस्कर वीरप्पन को जब कर्नाटक और तमिल नाडू की फोर्स पकड़ नहीं पा रही थी तब दोनों राज्यों की सरकार ने मिलकर पचास करोड़ का इनाम घोषित किया।*
कुछ वर्षों बाद जब वीरप्पन का एनकाउंटर हुआ- वो मारा गया तब तक़रीबन ८५० लोगों ने सरकार के पास अर्जी भेजी कि उनकी तहरीर पे वीरप्पन मारा गया था- लिहाज़ा उन्हें इनाम दिया जायें। पोस्टमैन, पुलिस , धोबी, कुंजड़े, मज़दूर, कुत्ता , बिल्ली- सब ने अपना अपना क्लेम ठोका था।
सरकार कहाँ से पचास करोड़ देती- ख़ज़ाने में इतना रोकड़ कहाँ रहता था उस टाइम। और इनाम किसे देती?
तो ऐसी प्रजा की वैसी सरकार ने एक तरकीब निकाली- उन्होंने बीस लोगों को सेलेक्ट किया- सब को एक एक ख़त भेजा।
ख़त में लिखा - आपको वीरप्पन वाले पचास करोड़ हेतु चुना गया है। आपके साथ १९ लोग और चुने गए है- और आप बीस लोगों को एक दूसरे की पहचान नहीं है। यदि आपको इनाम चाहिए तो एक हफ़्ते में अपना प्रार्थना पत्र भेजें। लेकिन दो शर्त है।
पहली शर्त है कि यदि आपने अपना प्रार्थना पत्र नहीं भेजा तो आपको इनाम नहीं मिलेगा।
दूसरी शर्त है कि आपके अलावा यदि किसी और ने भी प्रार्थना पत्र भेजा तो घंटा किसी को इनाम नहीं मिलेगा।
स्वाभाविक सी बात है- सरकार को वापस पूरे २० पत्र मिले- और सरकार को किसी को कुछ नहीं देना पड़ा।
यथा प्रजा तथा राजा!
इस कांड पे कर्नाटक के सीएम ने हंसते हुए शेर पढ़ा-
काली चिमनी पे ये पोडर की सफेदी मल कर
बुते ऐयार तू धोखा ना दे परवाने को !
नोट- ये इनामी राशि एसटीएफ को मिलने वाली इनाम से अलग थी! *(PC- CA
TRN मोदी सिद्धांत: जब दुनिया हेडलाइंस देख रही है,
तो कुछ बहुत बड़ा चुपचाप हो रहा है।
बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस के।
बिना ड्रामे के।
बिना ट्वीट्स के।
भारत धीरे-धीरे डॉलर के जाल से बाहर निकल रहा है और ग्लोबल पावर बैलेंस को फिर से आकार दे रहा है।
ज़्यादातर लोगों को इसका एहसास तभी होगा जब यह हो जाएगा।
यहां देखें कि असल में क्या हो रहा है 👇
दशकों तक, दुनिया एक भ्रम पर चल रही थी:
💵 अमेरिकी डॉलर अछूत है।
देशों ने अपनी दौलत अमेरिकी ट्रेजरी में रखी, डॉलर में ट्रेड किया, और भरोसा किया कि सिस्टम न्यूट्रल रहेगा।
वह भ्रम उस पल टूट गया जब करेंसी रिज़र्व को हथियार बनाया गया।
जब रिज़र्व को फ्रीज़, ज़ब्त या कैंसिल किया जा सकता है, तो पैसा न्यूट्रल नहीं रहता।
और समझदार देश अपनी सुरक्षा के लिए इजाज़त का इंतज़ार नहीं करते।
भारत ने नारों के बजाय चुप्पी चुनी।
"डी-डॉलराइज़ेशन पॉलिसी" की घोषणा करने के बजाय, उसने कुछ ज़्यादा समझदारी वाला काम किया:
- अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड को मैच्योर होने दिया
- नए खरीदना बंद कर दिया
- चुपचाप अरबों डॉलर का एक्सपोज़र कम किया
- कागज़ी वादों को सोने और चांदी में बदल दिया
कोई भाषण नहीं।
कोई टकराव नहीं।
बस कार्रवाई।
अब कीमती धातुओं को देखें।
भारत में चांदी की कीमतें ऐतिहासिक स्तरों को पार कर गईं।
सोने का भंडार चार अंकों के टन भार के करीब पहुंच रहा है।
यह रिटेल सट्टेबाजी नहीं है।
यह राज्य-स्तर की पोज़िशनिंग है।
सोना = संप्रभुता
चांदी = उद्योग + ऊर्जा + भविष्य की तकनीक
और भारत दोनों जमा कर रहा है।
चांदी खासकर महत्वपूर्ण है, और ज़्यादातर लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
चांदी सिर्फ़ गहने नहीं है।
यह इंफ्रास्ट्रक्चर है।
⚡ सोलर पैनल
⚡ इलेक्ट्रॉनिक्स
⚡ EVs
⚡ रक्षा प्रणालियाँ
भारत का बड़े पैमाने पर सोलर विस्तार अकेले चांदी की लंबी अवधि की औद्योगिक मांग की गारंटी देता है।
यह कोई "ट्रेड" नहीं है।
यह एक स्ट्रक्चरल बदलाव है।
इसी समय, भारत ने अपने बाहरी व्यापार को फिर से व्यवस्थित किया।
रूस के साथ रुपया-रूबल तंत्र अब औपचारिक हो गया है।
जो व्यापार कभी मुश्किल से होता था, वह अब $100 बिलियन का लक्ष्य बना रहा है।
भुगतान इनमें होता है:
रुपये
रूबल
युआन
...लेकिन तेज़ी से डॉलर में नहीं।
इस तरह समानांतर सिस्टम बढ़ते हैं, रातों-रात नहीं, बल्कि अनिवार्य रूप से।
यह क्यों मायने रखता है?
क्योंकि जब रूस के $300 बिलियन के रिज़र्व फ्रीज़ किए गए, तो हर देश एक बात समझ गया:
"अगर उनके साथ ऐसा हो सकता है, तो हमारे साथ भी हो सकता है।" भरोसा, एक बार टूटने के बाद, कभी पूरी तरह वापस नहीं आता।
अब एक नया संतुलन बन रहा है।
न तो दबदबा।
न ही अराजकता।
संतुलन।
इनके बीच:
भारत
रूस
चीन
हर कोई दूसरे को बहुत ज़्यादा ताकतवर बनने से रोकता है।
और मज़े की बात यह है कि अमेरिका भी जानता है कि इस संतुलन को बिगाड़ने से चीन और मज़बूत हो सकता है।
एक और चीज़ जिसे ज़्यादातर लोग कम आंकते हैं: दुर्लभ खनिज।
भारत ने ऐसे भंडार खोजे हैं जो शायद चीन से भी बड़े हैं।
- प्रोसेसिंग मुश्किल है।
- पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील।
- राजनीतिक रूप से जटिल।
लेकिन एक बार जब यह समस्या हल हो जाएगी?
भारत 21वीं सदी की टेक्नोलॉजी के एक अहम चोक पॉइंट को कंट्रोल करेगा।
इस बीच, डॉलर का ग्लोबल ट्रेड में हिस्सा लगातार गिर रहा है:
पहले ~76%
अब ~54%
50% के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ रहा है
एक बार इसके नीचे जाने पर, गिरावट तेज़ी से होती है; इतिहास बार-बार यह दिखाता है।
रिज़र्व करेंसी रातों-रात खत्म नहीं होतीं।
वे धीरे-धीरे कमज़ोर होती हैं।
फिर बिखर जाती हैं।
फिर उनकी जगह दूसरी करेंसी ले लेती हैं।
इसमें अमेरिका में राजनीतिक अनिश्चितता, पॉलिसी पैरालिसिस, और इस नामुमकिन सपने को जोड़ दें:
- मैन्युफैक्चरिंग को घर वापस लाना
- साथ ही हमेशा ज़्यादा कीमत वाली करेंसी बनाए रखना
आप दोनों एक साथ नहीं कर सकते।
हकीकत हमेशा जीतती है।
इसका मतलब क्या है?
यह डॉलर से नफ़रत करने के बारे में नहीं है।
यह उसके गुलाम न बनने के बारे में है।
भारत अमेरिका के खिलाफ दांव नहीं लगा रहा है।
वह अपने लिए दांव लगा रहा है। आत्मनिर्भर भारत के लिए।
सोना।
चांदी।
ऊर्जा।
व्यापार में आज़ादी।
रणनीतिक धैर्य।
साम्राज्य ज़ोर-शोर से गिरते हैं।
नए सिस्टम चुपचाप उभरते हैं।
और जब तक सबको पता चलता है,
तब तक नियम पहले ही बदल चुके होते हैं।
TRN LIVE: मुसलमानों को अभी अभी तक तो यही लग रहा था कि वे भारत जीत लेंगे।
उन्हें लगता है कि उन्होंने 600 साल राज किया, बीच में अंग्रेज टपक पड़े वरना सबकुछ उनका ही था। अलीगढिया इतिहासकारों के अनुसार आजादी की लड़ाई मुस्लिम अपना खोया राज वापस प्राप्त करने के लिए लड़े, खून बहाया लेकिन 1947 में दो छोटे भूमि के टुकड़ों से ही उन्हें संतोष करना पड़ा। जब तक यहूद और हनुद फतेह नहीं कर लिए जाते, कयामत सम्भव नहीं और उसके बिना हिसाब लटका हुआ है और अभी हूरें भी काफी दूर है।
भारत विजय का उनका सपना अब भी अधूरा है। आज जब वे भारत में अपनी स्थिति देखते हैं तो कहीं से भी विजेता जैसी फीलिंग या सम्मान उन्हें नहीं मिल पा रहा, उल्टा उन्हें पता है, सम्मान तो दूर हिन्दू मन अतिशय घृणा के साथ सामने खड़ा दिखाई देता है।
गंगा जर्मनी तहजीब और सेक्युलरों द्वारा खड़े किए गए कृत्रिम टिन टप्पर उड़ चुके हैं, खुला मैदान है, जो छिपा कर करते थे उसकी गुंजाइश नहीं है, चारों तरफ खुला माहौल है, सबको सबकुछ दिख रहा है।
मुसलमानों के अनेक स्थापित विश्वास छिन्न भिन्न हुए हैं।
कश्मीर, जिसे वे बिल्कुल पककर तैयार हुई, अपनी प्लेट में सजी बोटी के रूप में देख रहे थे, अब बहुत दूर खिसक गया है।
उनका यह विश्वास भी भग्न हो चुका है कि दीन की लड़ाई में फरिश्ते आते हैं और सहायता करते हैं। पूर्व में जब उनके आक्रमण होते थे, उनके उस्ताद उन्हें पेट भरकर ऐसे किस्से सुनाते थे और जिन्हें वे बिल्कुल सच भी मानते थे।
आज वे जब ग्लोबल स्थिति देखते हैं तो उन्हें कहीं से भी फरिश्तों का फ़ भी आता हुआ दिखाई नहीं देता।
उनका एक अंधविश्वास यह भी था कि जब भी काफ़िर उनसे अधिक ताकतवर होगा, अल्लाह दुश्मन के ही खानदान में कोई दीनी यौद्धा पैदा कर देगा जिससे हारी बाजी जीत ली जाएगी।
उनके इस विश्वास का आधार इतिहास में वे मंगोल और तुर्क हैं जो कभी इस्लाम के दुश्मन थे लेकिन फिर उन्हीं वंशों में कुछ कन्वर्ट होकर मुस्लिम यौद्धा हुए जिन्होंने दुनिया भर में इस्लाम का प्रसार किया और कहर बरपाया।
भारत में कुछ गद्दार हुए जिन्हें वे इसी नजरिए से देखते हैं। खिलाफत आंदोलन के समय अली बंधुओं के भी महात्मा गांधी के प्रति यही विचार थे।
......
वर्तमान लिबरल और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट जो हिन्दू अथवा ब्राह्मण नाम से उनके पक्ष में बेटिंग करते हैं उन्हें भी वे अल्लाह द्वारा भेजी गई इस्तेमाल लायक सामग्री ही मानते हैं।
किंतु बदली हुई परिस्थितियों में इसके कोई आसार दिखाई नहीं देते कि ये प्रभावी हो पाएंगे और उनके अधूरे सपने को पूरा कर पाएंगे।
विज्ञान, तकनीकी और इंटरनेट से भविष्य का जो भी चित्र बनता है, उलेमा वर्ग बहुत चिंतित हैं। इस्लाम की एक और चिंता बिगड़ती छवि को लेकर है, यह भी है कि दुनिया भर में अधिकांश आतंकी गुट इस्लाम से सम्बंधित हैं, सबसे बड़ी बात वे आतंकवादी समूह, यह खून खराबे वाली भयानक पैशाचिक लड़ाई इस्लाम के मिशन को आगे बढ़ाने के नाम पर अथवा प्रोफेट की इच्छा मानकर लड़ रहे हैं।
उनके स्वप्न भंग का कारण यह भी है कि खिलाफत के नाम पर बना तुर्की साम्राज्य 100 साल पहले ही टूट कर अनेक देशों में बंट गया जो सभी एक दूसरे के खून के प्यासे हैं और उनके पुनः एक होने के आसार दूर दूर तक दिखाई नहीं देते हैं।
दुनिया की इन घटनाओं का प्रभाव भारत के मुसलमानों पर भी पड़ता है और भारत में गजवा ए हिन्द का उनका स्वप्न दिनों दिन धुंधला और बिखरा हुआ सा लगता है।
संसार भर में उनके आतंक पर लीपापोती करने वाला लिब्रान्दू वर्ग भी नंगा हो गया। आज उनकी लाल कच्छी के नीचे झांकती हरी चड्डी के कारण उनके ये तर्क भी प्रभाहीन हो गए कि आतंक का मजहब नहीं होता अथवा ये गन तो अमरीका ने पकड़ाई है, अथवा गरीबी और अनपढ़ होने के कारण वे दंगाई व्यवहार करने वाले हैं।
इनके स्वप्नभंग का एक कारण पाकिस्तान की दुरावस्था भी है। अब तक वे पाकिस्तान को रियासते मदीना मानकर चल रहे थे और आरम्भ में तो उन्होंने यही सोचा कि मात्र दस ही वर्षों में वे फतेह इंडिया कर लेंगे, यह अत्यंत आसान लक्ष्य खिसकते खिसकते PFI के 2047 मिशन तक खिंच गया है इस बीच पाकिस्तान तो थक चुकी बुढ़िया वेश्या जैसा बन गया है जो सरेराह बोली लगवाकर अपनी बिक्री के लिए प्रस्तुत है। जिसे इन्होंने निरन्तर ऊर्जा देने वाली कमसिन माशूका समझा था वह भयंकर मवाद से पीड़ित मरणासन्न बुढ़िया निकल गई।
ऐसे तमाम कारणों से हताश निराश कुंठित मुस्लिम अब दंगा फसाद कर तो देते हैं लेकिन अब उनकी वह अतीत वाली धुनक और वही प्रसिद्ध खेल टीम A B C D चल नहीं पाता। इसमें हिन्दू जागरूकता और सोशल मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका है।
TRN: *┈┉सनातन धर्म की जय,हिंदू ही सनातनी है┉┈*
*लेख क्र.-सधस/२०८२/माघ/कृ./६/११३५४*
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TRN LIVE
वामपंथी इतिहासकारों की धज़्ज़ियाँ उड़ना अब शुरू हो चुका है। क्योंकि लिखने वाले नए लड़के आ रहे हैं। जिनका विजन वैज्ञानिक भी है और तार्किक भी। और सबसे बड़ी बात उनको भारतीय इतिहास संस्कृति में भरोसा भी है।
वामपंथियों!! खेल तो अब शुरू हुआ है...
अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव चः।
धर्मो रक्षति रक्षितः।
अर्थात्...
सत्य उद्घाटन:
रावण द्वारा सीता हरण करके श्रीलंका जाते समय पुष्पक विमान का मार्ग क्या था?
उस मार्ग में कौन सा वैज्ञानिक रहस्य छुपा हुआ है??
उस मार्ग के बारे में लाखों साल पहले कैसे जानकारी थी???
पढ़ो इन प्रश्नों के उत्तर वामपंथी इतिहासकारों के लिए मृत्यु समान हैं।
भारतबन्धुओ! रावण ने माँ सीता का अपहरण पंचवटी (नासिक, महाराष्ट्र) से किया और पुष्पक विमान द्वारा हम्पी (कर्नाटका), लेपक्षी (आँध्रप्रदेश) होते हुए श्रीलंका पहुँचा।
आश्चर्य होता है जब हम आधुनिक तकनीक से देखते हैं कि नासिक, हम्पी, लेपक्षी और श्रीलंका बिलकुल एक सीधी लाइन में हैं।
अर्थात् ये पंचवटी से श्रीलंका जाने का सबसे छोटा रास्ता है।
अब आप ये सोचिये उस समय Google Map नहीं था जो सबसे छोटा रास्ता बता देता।
फिर कैसे उस समय ये पता किया गया कि सबसे छोटा और सीधा मार्ग कौन सा है??
या अगर भारत विरोधियों के अहम् संतुष्टि के लिए मान भी लें कि चलो रामायण केवल एक महाकाव्य है जो वाल्मीकि ने लिखा तो फिर ये बताओ कि उस ज़माने में भी गूगल मैप नहीं था तो रामायण लिखने वाले वाल्मीकि को कैसे पता लगा कि पंचवटी से श्रीलंका का सीधा छोटा रास्ता कौन सा है???
महाकाव्य में तो किन्ही भी स्थानों का ज़िक्र घटनाओं को बताने के लिए आ जाता।
लेकिन क्यों वाल्मीकि जी ने सीता हरण के लिए केवल उन्ही स्थानों का ज़िक्र किया जो पुष्पक विमान का सबसे छोटा और बिलकुल सीधा रास्ता था???
ये ठीक वैसे ही है कि आज से 500 साल पहले गोस्वामी तुलसीदास जी को कैसे पता कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी क्या है? (जुग सहस्त्र जोजन पर भानु = 152 मिलियन किमी - हनुमानचालीसा), जबकि नासा ने हाल ही कुछ वर्षों में इस दूरी का पता लगाया है।
अब आगे देखिये...
पंचवटी वो स्थान है जहाँ प्रभु श्री राम, माता जानकी और भ्राता लक्ष्मण वनवास के समय रह रहे थे| यहीं शूर्पणखा आयी और लक्ष्मण से विवाह करने के लिए उपद्रव करने लगी...
विवश होकर लक्ष्मण ने शूपर्णखा की नाक यानी नासिका काट दी।
और आज इस स्थान को हम नासिक (महाराष्ट्र) के नाम से जानते हैं।
आगे चलिए...
पुष्पक विमान में जाते हुए सीता ने नीचे देखा कि एक पर्वत के शिखर पर बैठे हुए कुछ वानर ऊपर की ओर कौतुहल से देख रहे हैं तो सीता ने अपने वस्त्र की कोर फाड़कर उसमे अपने कंगन बाँधकर नीचे फ़ेंक दिए, ताकि राम को उन्हें ढूँढ़ने में सहायता प्राप्त हो सके।
जिस स्थान पर सीताजी ने उन वानरों को ये आभूषण फेंके वो स्थान था 'ऋष्यमूक पर्वत' जो आज के हम्पी (कर्नाटक) में स्थित है।
इसके बाद...
वृद्ध गिद्धराज जटायु ने रोती हुई सीता को देखा, देखा कि कोई राक्षस किसी स्त्री को बलात् अपने विमान में लेके जा रहा है।
जटायु ने सीता को छुड़ाने के लिए रावण से युद्ध किया। रावण ने तलवार से जटायु के पंख काट दिए। इसके बाद जब राम और लक्ष्मण सीता को ढूँढ़ते हुए पहुँचे तो उन्होंने दूर से ही जटायु को सबसे पहला सम्बोधन 'हे पक्षी' कहते हुए किया और उस जगह का नाम दक्षिण भाषा में 'लेपक्षी' (आंधप्रदेश) है।
अब क्या समझ आया आपको? पंचवटी... हम्पी... लेपक्षी... श्रीलंका।
सीधा रास्ता। सबसे छोटा रास्ता। गूगल मैप का निकाला गया फोटो नीचे है।
अपने ज्ञान विज्ञान, संस्कृति को भूल चुके भारतबन्धुओं रामायण कोई मायथोलोजी नहीं है। ये महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया सत्य इतिहास है।
जिसके समस्त वैज्ञानिक प्रमाण आज उपलब्ध हैं।
इसलिए जब भी कोई वामपंथी हमारे इतिहास, संस्कृति, साहित्य को मायथोलोजी कहकर लोगो को भ्रमित करने का या खुद को विद्वान दिखाने का प्रयास करे तो उसको पकड़कर बिठा लेना और उससे इन सवालों के जवाब पूछना।
विश्वास करो एक का भी जवाब नहीं दे पायेगा। अब इस सबमे आपकी ज़िम्मेदारी क्या है?
आपके हिस्से की ज़िम्मेदारी ये है कि अब जब टीवी पर रामायण देखें तो ये ना सोचें कि कथा चल रही है बल्कि निरंतर ये ध्यान रखें की ये हमारा इतिहास चल रहा है।
इस दृष्टि से रामायण देखें और समझें। विशेष आवश्यक ये कि यही दृष्टि हमारे बच्चों को दें, बच्चों को ये बात 'बोलकर' कम से कम एक दो बार कहें कि 'बच्चो, ये कथा कहानी नहीं है, ये हमारा इतिहास है, जिसको मिटाने की कोशिश की गई है।'
इधर हम आपको नित्य भारत के इतिहास संस्कृति के वैज्ञानिक प्रमाणों वाली जानकारी उपलब्ध कराते रहेंगे।
ताकि भारत राष्ट्र संस्कृति बचाने की इस लड़ाई में आपके पास सबूत और प्रमाण हर समय उपलब्ध रहें।
अगर आपने इसे पूरा पढ़ा है तो कमेंट में जय श्री राम जरूर लिखें। 🚩
*"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪*
*साभार*
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मुखं चन्द्रकान्तं, वदनं मधुरं, नयनं मृगमदकज्जलम्।
"हृदयस्य स्पन्दनं प्रिय, त्वयि मम जीवितं समर्पितम्॥"""
*माता महालक्ष्मी देवी जी की जय*
*⛳⚜सनातन धर्मरक्षक समिति⚜⛳*
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