Brahmi Script Seal: पाकिस्तान में मिली भगवान शिव से जुड़ी हुई ये चीज़, जानें कितनी पुरानी, क्या है इतिहास
पुराने समय की चीजों को समझने से इतिहास के कई छिपे हुए राज सामने आते हैं. इस कड़ी में Archaeological Survey of India (ASI) के एपिग्राफी डिवीज़न ने एक अहम खोज की है. पाकिस्तान में एक पुरानी सील मिली है, जिस पर ब्राह्मी अक्षरों पर लिखा हुआ है. इसको पढ़ने पर पता चला है कि यह सील 5वीं सदी की है, जिसका संबंध संस्कृत शिलालेख से है. इस हिसाब से ये 1500-1700 साल पुरानी है. इस सील पर देवदरुवन स्वामी कोटेश्वर लिखा हुआ है. इसका मतलब यह है कि यह एक शैव मंदिर से जुड़ी हुई है, जो हिमालय के देवदार के पेड़ों के जंगल यानी देवदरुवन में था और भगवान शिव के रूप स्वामी कोटेश्वर को समर्पित किया गया था.
ASI के एपिग्राफी विंग के प्रमुख के. मुनिरत्नम रेड्डी ने सील के बारे में जानकारी दी है. यह सील हांगकांग की फ्रैंकोइस मैंडविल ने ASI के साथ साझा की थी. ASI के एपिग्राफी डिवीज़न के अनुसार, इस सील को स्कंदपुराण में बताई गई उस कहानी से भी जोड़ा जा रहा है, जिसमें भगवान शिव के देवदरुवन में घूमने का जिक्र मिलता है. इसे उस कहानी का अब तक का सबसे पुराना लिखा हुआ और चित्र के रूप में सबूत माना जा सकता है.
पाकिस्तान के पेशावर में बड़ी खोज
साल 2024 में ASI ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगिट इलाके के पास मिले 4वीं सदी के संस्कृत शिलालेख की भी खोज की थी. वह भी ब्राह्मी लिपि में लिखा था. मुनिरत्नम रेड्डी ने बताया कि पुष्पसिंह नाम के व्यक्ति ने अपने गुरु की पुण्यतिथि पर महेश्वरलिंग की स्थापना की थी, हालांकि गुरु का नाम पूरा साफ लिखा हुआ नहीं था. गिलगिट की इस खोज से करीब 5 महीने पहले ASI ने पेशावर के पास मिले एक पत्थर के टुकड़े पर लिखे 10वीं सदी के एक टूटे हुए शिलालेख को ढूंढा था, जिसके ऊपर संस्कृत भाषा में लिखा गया था और शारदा लिपि का इस्तेमाल हुआ था. इसमें बौद्ध धरणी मंत्रों का जिक्र मिला था, जिसकी छठी लाइन में दा धा रिनी शब्द लिखा हुआ है. इन सभी खोजों से यह साफ होता है कि उस समय इस इलाके में अलग-अलग धर्म और परंपराएं मौजूद थीं और वहां का सांस्कृतिक जीवन काफी समृद्ध था.
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