Lockdown In Pakistan: पेट्रोल-डीजल की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान में लॉकडाउन, जानें किन देशों ने क्या उठाए कदम?

Apr 9, 2026 - 16:18
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Lockdown In Pakistan: पेट्रोल-डीजल की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान में लॉकडाउन, जानें किन देशों ने क्या उठाए कदम?

Lockdown In Pakistan: दुनिया भर में गहराता ऊर्जा संकट अब आम आदमी की दहलीज तक पहुंच गया है. भले ही अमेरिका और ईरान के बीच 15 दिनों का सीजफायर हो गया हो, लेकिन मिडिल ईस्ट में मचे घमासान ने तेल और गैस की सप्लाई चेन को इस कदर तोड़ दिया है कि पाकिस्तान से लेकर वियतनाम तक सरकारों के हाथ-पांव फूल रहे हैं. आलम यह है कि पेट्रोल बचाने के लिए कहीं स्कूल बंद किए जा रहे हैं, तो कहीं वर्क फ्रॉम होम को फिर से अनिवार्य बनाया जा रहा है. अगर आप सोच रहे हैं कि लॉकडाउन सिर्फ बीमारी में लगता है, तो तैयार हो जाइए, क्योंकि एनर्जी लॉकडाउन का दौर शुरू हो चुका है.

पाकिस्तान में रात 8 बजे सन्नाटा

शहबाज शरीफ सरकार ने ईंधन और बिजली बचाने के लिए पाकिस्तान में सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. ताजा आदेश के मुताबिक, देश के अधिकांश हिस्सों में बाजार और शॉपिंग मॉल को रात 8 बजे के बाद खुला रखने की इजाजत नहीं होगी. सरकार का मानना है कि जल्दी बाजार बंद होने से बिजली की खपत कम होगी और ईंधन की बचत की जा सकेगी. मिडिल ईस्ट संकट की वजह से कच्चे तेल के बढ़ते दामों ने पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था पर गहरा बोझ डाल दिया है, जिससे निपटने के लिए अब नाइट लाइफ पर ब्रेक लगा दिया गया है.

ईंधन बचाने के लिए स्मार्ट लॉकडाउन

पाकिस्तान सिर्फ बाजारों को बंद करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन अब देश में स्मार्ट लॉकडाउन लगाने पर भी विचार कर रहा है. इसके तहत पेट्रोल की खपत कम करने के लिए स्कूलों को बंद करने और सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू करने की तैयारी है. अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और घरेलू राजनीति की अस्थिरता के बीच तेल की कमी ने सरकार के लिए दोहरी मुसीबत खड़ी कर दी है. जनता में बढ़ती महंगाई को लेकर भारी गुस्सा है, लेकिन सरकार के पास फिलहाल ईंधन बचाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं दिख रहा है. 

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श्रीलंका में पेट्रोल राशनिंग और छुट्टियां

पड़ोसी देश श्रीलंका की स्थिति भी बेहद नाजुक बनी हुई है. ईंधन बचाने के लिए यहां की सरकार ने एक अनोखा तरीका निकाला है. श्रीलंका में अब हर बुधवार को सरकारी अवकाश घोषित कर दिया गया है ताकि सड़कों पर गाड़ियां कम चलें और सरकारी इमारतों की बिजली बचाई जा सके. इतना ही नहीं, निजी वाहनों के लिए पेट्रोल की राशनिंग शुरू कर दी गई है, यानी एक तय सीमा से ज्यादा तेल अब कोई भी वाहन मालिक नहीं खरीद सकता. देश में ऊर्जा की कमी ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है.

फिलीपींस में राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल

फिलीपींस अपनी तेल जरूरतों के लिए 98 प्रतिशत तक आयात पर निर्भर है, यही वजह है कि वहां स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है. सरकार ने आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल की घोषणा कर दी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा दिया है. सप्लाई चेन बाधित होने के कारण वहां न केवल पेट्रोल की कमी हो गई है, बल्कि बिजली उत्पादन के लिए जरूरी गैस का भंडार भी खत्म होने की कगार पर है.

म्यांमार में ओड-ईवन फॉर्मूला लागू

म्यांमार ने सड़कों पर गाड़ियों की भीड़ कम करने और ईंधन बचाने के लिए दिल्ली जैसा ऑड-ईवन नियम लागू कर दिया है. अब गाड़ियों के नंबर के हिसाब से ही उन्हें सड़क पर आने की इजाजत मिल रही है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सीमित तेल भंडार को लंबे समय तक चलाया जा सके. वहीं बांग्लादेश में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं, वहां बड़े पैमाने पर बिजली कटौती की जा रही है और स्कूलों में जल्दी छुट्टी के आदेश दे दिए गए हैं, ताकि बिजली और परिवहन के खर्च को कम किया जा सके.

वियतनाम में गैर-जरूरी सफर पर पाबंदी

वियतनाम में पेट्रोल की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों में 50 से 60 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई है. इस महंगाई को देखते हुए सरकार ने गैर-जरूरी यात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया है. वहां की कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दें. वियतनाम सरकार का ध्यान इस वक्त केवल उन क्षेत्रों को ऊर्जा मुहैया कराने पर है, जो देश की जीडीपी के लिए अनिवार्य हैं, बाकी क्षेत्रों में ऊर्जा की भारी कटौती की जा रही है.

क्या है यह एनर्जी लॉकडाउन?

विशेषज्ञ अब इन प्रतिबंधों को 'एनर्जी लॉकडाउन' का नाम दे रहे हैं. यह कोई मेडिकल लॉकडाउन नहीं है, बल्कि ऊर्जा संसाधनों (तेल, गैस और बिजली) की भारी किल्लत होने पर लगाया जाने वाला प्रतिबंध है. इसमें सरकारों का मुख्य उद्देश्य ईंधन की खपत को हर हाल में कम करना होता है. इसके लिए वर्क फ्रॉम होम, स्पीड लिमिट कम करना, सार्वजनिक परिवहन का कम उपयोग और स्कूलों-बाजारों की बंदी जैसे कड़े उपाय अपनाए जाते हैं. दक्षिण अफ्रीका और जर्मनी जैसे देश भी अब धीरे-धीरे इसी दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं.

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला