Saudi Arabia Deportation: अमेरिका से कहीं ज्यादा भारतीयों को सऊदी अरब ने किया डिपोर्ट, MEA के आंकड़ों से बड़ा खुलासा

Dec 28, 2025 - 09:13
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Saudi Arabia Deportation: अमेरिका से कहीं ज्यादा भारतीयों को सऊदी अरब ने किया डिपोर्ट, MEA के आंकड़ों से बड़ा खुलासा

सऊदी अरब ने पिछले पांच वर्षों में अमेरिका की तुलना में कहीं अधिक भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया है. यह जानकारी विदेश मंत्रालय (MEA) ने राज्यसभा में पेश आधिकारिक आंकड़ों के जरिए दी है. ये आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि खाड़ी देशों में होने वाले डिपोर्टेशन का बड़ा कारण अवैध सीमा पार करना नहीं, बल्कि वीजा ओवरस्टे, श्रम कानूनों का उल्लंघन और रेजीडेंसी नियमों की अनदेखी है.

18 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि कई देश हिरासत (detention) से जुड़ा डेटा साझा नहीं करते, लेकिन Emergency Certificate (EC) के जरिए जारी डिपोर्टेशन आंकड़े भारतीय नागरिकों के खिलाफ की गई कार्रवाई का भरोसेमंद संकेत देते हैं.

भारतीयों को सबसे ज्यादा डिपोर्ट करने वाला देश

भारतीय दूतावास, रियाद से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सऊदी अरब ने साल 2021 से 2025 तक हर साल हजारों की संख्या में भारतीयो कों डिपोर्ट किया है, जो इस प्रकार है.

  • 2021: 8,887
  • 2022: 10,277
  • 2023: 11,486
  • 2024: 9,206
  • 2025 (अब तक): 7,019

अधिकारियों के मुताबिक, ये आंकड़े सऊदी अरब में इकामा (रेजीडेंसी परमिट) नियमों की सख्ती,सऊदीकरण (Saudisation) नीति,लेबर मार्केट में कड़े नियंत्रण और वीजा ओवरस्टे के खिलाफ समय-समय पर अभियान का परिणाम हैं.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''खाड़ी क्षेत्र, खासकर सऊदी अरब में, वीजा अवधि से अधिक रुकने, बिना परमिट काम करने और रेजीडेंसी नियमों के उल्लंघन के कारण बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन होते हैं.”

अमेरिका से डिपोर्टेशन के आंकड़े काफी कम

इसके विपरीत, अमेरिका से भारतीय नागरिकों के डिपोर्टेशन के आंकड़े काफी कम रहे हैं, भले ही वहां इमिग्रेशन पर राजनीतिक बहस तेज रही हो. वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय मिशन के मुताबिक 2021 में 805, 2022 में 862,2023 में 617,2024 में 1,368 और 2025 में 3,414 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है. अमेरिका के अन्य मिशनों (न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को, अटलांटा, ह्यूस्टन, शिकागो) में यह संख्या दहाई या सैकड़ों में ही रही, जो खाड़ी देशों के मुकाबले बेहद कम है.

डिपोर्टेशन की प्रमुख वजहें

MEA के अनुसार, डिपोर्टेशन के पीछे मुख्य कारण में वीजा अवधि से अधिक रुकना, वैध वर्क परमिट के बिना काम करना, स्थानीय श्रम कानूनों का उल्लंघन करना और समय-समय पर चलाए जाने वाले सामूहिक जांच अभियान शामिल है. अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश मामलों में मास डिटेंशन नहीं होता और कई भारतीयों के पास वैध यात्रा दस्तावेज होते हैं, जिससे Emergency Certificate की जरूरत भी नहीं पड़ती.

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