बांका के भदरिया स्थल पर फिर शुरू होगी खुदाई:डीएम ने निरीक्षण किया, 5 साल से ठप परियोजना को मिली गति
बांका के अमरपुर प्रखंड स्थित भदरिया गांव के ऐतिहासिक स्थल पर एक बार फिर खुदाई कार्य शुरू होने की उम्मीद जगी है। बांका के जिला पदाधिकारी (डीएम) नवदीप शुक्ला ने हाल ही में इस स्थल का निरीक्षण किया,जिसके बाद पांच वर्षों से ठप पड़ी परियोजना को गति मिलने की संभावना है । चांदन नदी के तट पर स्थित इस पुरातात्विक स्थल के निरीक्षण के दौरान,डीएम ने वहां मौजूद अवशेषों और पूर्व में कराए गए सर्वेक्षण व खुदाई कार्य की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीण एवं समाजसेवी लखनलाल पाठक से भी स्थल के इतिहास और अब तक मिले अवशेषों के बारे में जानकारी ली । प्राप्त अवशेषों को विभाग को भेजा जाएगा जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला ने कहा कि भदरिया का यह स्थल ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि यहां से प्राप्त अवशेषों और सर्वेक्षण से जुड़ी सभी जानकारियों को एकत्र कर संबंधित विभाग को भेजा जाएगा । आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद यहां पुनः खुदाई कार्य शुरू कराने की दिशा में पहल की जाएगी। डीएम ने जोर दिया कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और जल्द ही सकारात्मक पहल देखने को मिल सकती है । उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करना और उन्हें पर्यटन तथा शोध के केंद्र के रूप में विकसित करना है। 20 नवंबर को मिले थे पुराने भवन के अवशेष उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 20 नवंबर को छठ घाट की सफाई के दौरान ग्रामीणों को पुराने भवन के अवशेष मिले थे ।इस खोज के बाद पूरे क्षेत्र में इस स्थल को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। सूचना मिलने पर पटना और भागलपुर से पुरातत्व विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर चांदन नदी के तट पर मिले अवशेषों का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी।सफाई के दौरान नदी के नीचे ईंटों से बनी एक दीवार मिलने के बाद इस ऐतिहासिक स्थल को लेकर लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई थी। स्थानीय विधायक सह पूर्व मंत्री जयंत राज के प्रयास से इस स्थल को लेकर राज्य स्तर पर पहल शुरू हुई। उनकी पहल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी दो बार इस स्थल का दौरा कर यहां मिले अवशेषों का अवलोकन किया था। संभावित ऐतिहासिक अवशेषों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से चांदन नदी की धारा को मोड़ने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बांध का निर्माण भी कराया गया,ताकि नदी के बहाव से किसी भी तरह का नुकसान न हो। आईआईटी कानपुर की टीम को बुलाया गया था
इसके बाद इस स्थल के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए आईआईटी कानपुर की टीम को बुलाया गया था। आईआईटी की टीम ने अपने सर्वेक्षण में नदी के गर्भ में किसी प्राचीन सभ्यता के अवशेष होने के संकेत दिए थे। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की गई और बिहार विरासत विकास समिति को यहां खुदाई कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई।
खुदाई के दौरान कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक वस्तुएं और संरचनाएं भी मिलीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह स्थल किसी विकसित प्राचीन सभ्यता का हिस्सा रहा होगा। इतिहासकारों का मानना है कि यह स्थल संभवतः बुद्ध काल या कुषाण काल से भी जुड़ा हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों से परियोजना ठप पड़ी हुई थी
हालांकि पिछले कुछ वर्षों से यह परियोजना विभिन्न कारणों से ठप पड़ी हुई थी, जिससे स्थानीय लोगों में निराशा का माहौल था। हाल ही में विधायक जयंत राज ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया, जिस पर कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री ने आश्वासन दिया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस स्थल के लिए प्राक्कलन तैयार कर कार्य शुरू किया जाएगा।
जिला पदाधिकारी के ताजा निरीक्षण के बाद इस दिशा में प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। समाजसेवी लखनलाल पाठक ने कहा कि यह स्थल न केवल बांका जिले बल्कि पूरे बिहार के इतिहास को नई दिशा दे सकता है। ग्रामीण बोले- क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व बढ़ेगा
ग्रामीणों का मानना है कि यदि यहां दोबारा खुदाई कार्य शुरू होता है तो इससे क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व बढ़ेगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही भदरिया गांव की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो सकती है।
निरीक्षण के दौरान डीडीसी उपेंद्र सिंह, कला एवं संस्कृति विभाग की अधिकारी प्रीति कुमारी, बीडीओ प्रतीक राज, सीआई राजेश कुमार झा, थानाध्यक्ष राकेश कुमार, मुखिया प्रतिनिधि प्रशांत कापरी, सरपंच गणेश भगत सहित कई अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
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