रिटेल महंगाई 8 महीने में सबसे ज्यादा:जनवरी में बढ़कर 2.75% पर पहुंची; महंगाई में अब ओटीटी, ऑनलाइन शॉपिंग भी जुड़ी

Feb 16, 2026 - 09:11
 0  0
रिटेल महंगाई 8 महीने में सबसे ज्यादा:जनवरी में बढ़कर 2.75% पर पहुंची; महंगाई में अब ओटीटी, ऑनलाइन शॉपिंग भी जुड़ी
जनवरी में रिटेल महंगाई पिछले महीने के मुकाबले बढ़कर 2.75% पर पहुंच गई है। दिसंबर में ये 1.33% पर थी। 8 महीनों में सबसे ज्यादा है। मई 2025 में महंगाई 2.82% पर पहुंच गई थी। सरकार ने गुरुवार, 12 फरवरी को महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। नए पैमाने में शामिल हुए ई-कॉमर्स और OTT सरकार ने महंगाई मापने के लिए आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है। यह बदलाव एक दशक से अधिक समय के बाद किया गया है। ब्लूमबर्ग के सर्वे में 32 अर्थशास्त्रियों ने अनुमान जताया था कि इससे जनवरी की महंगाई दर 2.77% के आसपास रह सकती है। खाने-पीने की चीजों का वेटेज घटा पुराने इंडेक्स में खाने-पीने की चीजों का वेटेज लगभग 50% था, जिसे अब घटाकर 36.8% कर दिया गया है। सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग के मुताबिक, भारतीयों की आय बढ़ने के साथ अब वे भोजन पर कम और हाउसिंग व अन्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। बेस ईयर क्या होता है? बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है। उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 - 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है। बेस ईयर कैसे चुना जाता है और कैसे काम करता है? सरकार आमतौर पर हर 5-10 साल में नया बेस ईयर चुनती है। ये ऐसा साल होता है जो सामान्य हो, न ज्यादा सूखा हो, न महामारी, न ज्यादा महंगाई। एक्सपर्ट बोले- बेस ईयर बदलने से महंगाई की सटीक जानकारी मिलेगी बैंक ऑफ बड़ोदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि इस बदलाव से ज्यादा सटीक तस्वीर आएगी। यह पुराने आधार वर्ष से बेहतर है। इस सूचकांक को समय-समय पर बदलना जरूरी है, ताकि यह मौजूदा हालात के मुताबिक बना रहे। खाने-पीने की चीजों का वेटेज कम होने से अब गैर-खाद्द वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज्यादा साफ दिखेगा। क्रेडिट पॉलिसी यानी, ब्याज दर तय करने के लिहाज से यह बदलाव सही और उपयोगी है। अक्टूबर में 14 साल के निचले स्तर पर थी रिटेल महंगाई अक्टूबर में रिटेल महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई थी। इसका कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में कमी थी। ये 2012 CPI सीरीज में सबसे कम महंगाई थी। यानी, ये करीब 14 साल का निचला स्तर रहा था। महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। --------------------------------------------------------------------- बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें चांदी आज ₹5,835 गिरी, कीमत ₹2.61 लाख किलो हुई: सोना ₹1,175 गिरकर ₹1.56 लाख पर आया सोने-चांदी के दाम में आज 12 फरवरी को गिरावट है। IBJA के अनुसार, एक किलो चांदी की कीमत 5,835 रुपए कम होकर 2,60,614 रुपए पर आ गई है। इससे पहले बुधवार को चांदी की कीमत 2,66,449 रुपए किलो थी। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 1,175 रुपए गिरकर 1,56,147 रुपए पर आ गई है। पूरी खबर पढ़ें

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला