श्रम कानून में बदलाव के खिलाफ 12 फरवरी को हड़ताल:एक धंटे के लिए रेल-रोड होगा जाम, इंटर के परीक्षार्थियों को नहीं होने दी जाएगी तकलीफ
केंद्र सरकार की नीतियों और श्रम कानून में बदलाव के विरोध में संयुक्त ट्रेड यूनियनों की ओर से 12 फरवरी को होने वाली हड़ताल का बेगूसराय में व्यापक असर देखने को मिलेगा। आज कर्मचारी भवन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान एटक, इंटक, सीटू, एक्टू, सेवा संघ फेडरेशन और किसान संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से हड़ताल की तैयारियों की जानकारी साझा की। नेताओं ने कहा है कि हड़ताल में जिले के तमाम औद्योगिक प्रतिष्ठानों के स्थायी कर्मचारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में असंगठित क्षेत्र के मजदूर भी शामिल होंगे। वर्तमान में चल रही इंटर की परीक्षा को ध्यान में रखते हुए आंदोलनकारियों ने रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है। छात्रों को असुविधा न हो, इसके लिए दोपहर में एक घंटे के लिए रेल और रोड जाम किया जाएगा। 10 सूत्री मांग पर आधारित है हड़ताल हड़ताल मुख्य रूप से 10 सूत्री मांग पर आधारित है, जिसमें मेहनतकशों की एकता जिंदाबाद का नारा दिया गया है। संगठनों का आरोप है कि सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए कोड लागू किए हैं, जो मजदूरों को गुलामी की ओर धकेलने वाले हैं। इन्हें तुरंत रद्द किया जाए। मनरेगा में काम के दिनों को बढ़ाकर 200 दिन और मजदूरी को 600 रुपए प्रतिदिन करने के बदले उसे खत्म किया जा रहा है। इसके माध्यम से किसान संगठनों ने कृषि के कॉर्पोरेटीकरण पर रोक लगाने और सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग उठाई है। आंगनबाड़ी, आशा और रसोइया जैसे स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी घोषित करने और सम्मानजनक मानदेय देने पर जोर दिया गया है। सरकार की नीतियां खुले तौर पर कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाली है।
ठेका प्रथा को बढ़ावा देकर युवाओं का शोषण किया जा रहा आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण किया जा रहा है और ठेका प्रथा को बढ़ावा देकर युवाओं का शोषण किया जा रहा है। महंगाई-बेरोजगारी से आम जनता त्रस्त है, जबकि सरकार केवल पूंजीपतियों के लिए नीतियां बना रही है। इस हड़ताल में बरौनी रिफाइनरी, खाद कारखाना और थर्मल पावर स्टेशन सहित निजी क्षेत्रों के मजदूर भी शामिल होंगे। चारों लेबर कोड वापस लेने तक हम लोग चरणबद्ध आंदोलन करते रहेंगे। बैंक, पोस्ट ऑफिस, सभी केंद्रीय और राज्य सरकार के उपक्रम में हड़ताल पर रहेंगे। क्योंकि यह मेहनतकश पर जबरदस्त हमला है। श्रमिक के हित में बने कानून को निरस्त किया जा रहा है। लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है। सरकार ने मजदूरों की हड़ताल करने पर भी रोक लगाने के लिए कानून बना दिया है। प्रेसवार्ता में प्रह्लाद सिंह, चंद्रदेव वर्मा, उषा सहनी, दिनेश सिंह, रंजीत कुमार, प्रदीप कुमार और ललन लालित्य भी उपस्थित थे।
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