आज सुबह के मुख्य समाचार पत्र जन दैनिक पंचांग प्रकाशित हुआ मानदेय और अन्य भारतीय टीम प्रबंधक बलवंत
*राष्ट्रपति से मिलने पर काशिफ राणा को एआईएमआईएम पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष शाहरुल ने किया सम्मानित* *चरथावल विधानसभा ही नही जनपद के लिए गौरव की बात : शाहरुल त्यागी* *मुज़फ्फरनगर।* चरथावल विधानसभा के ग्राम सुजडू में पहुंचे एआईएमआईएम पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं चरथावल विधानसभा से प्रबल दावेदार शाहरुल त्यागी एडवोकेट ने राष्ट्रपति से मिले काशिफ राणा को संविधान की बुक देकर सम्मानित किया। शाहरुल त्यागी एडवोकेट ने कहा कि राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक है, उनसे मिलने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। चरथावल विधानसभा के सुजडू में काशिफ राणा को अवसर मिला जो पूरे जनपद के लिए फख्र की बात है। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने भी स्कूल के बच्चों से गर्मजोशी से मुलाकात की है। उनके भी हम आभारी रहेंगे। और कहा कि हमने संविधान देकर सम्मानित किया है ताकि संविधान को पढ़कर तथा समझकर देश के अधिकारों के लिए बड़ा होकर काशिफ लड़ सके। एआईएमआईएम पश्चिम प्रदेश सचिव हाजी दीन मोहम्मद ने कहा कि संविधान देकर हमने इसलिए सम्मानित किया क्योकि हमारे नेता असदुद्दीन ओवैसी संविधान के आधार पर ही बोलते है, ताकि काशिफ भी बड़ा होकर संविधान के दायरे में लोगो की आवाज़ बन सके। इस दौरान काशिफ तलत, चौधरी जफरयाब मौजूद रहे।
जयपुर की महारानी गायत्री देवी को दुनिया की सबसे खूबसूरत राजकुमारी कहा जाता था, जिनकी सुंदरता पर अंग्रेज राजपरिवार के लोग भी फिदा थे। मात्र 12 साल की उम्र में उन्हें शादीशुदा भारतीय महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय से प्यार हो गया, और उन्होंने परंपराओं को तोड़ते हुए उनसे विवाह रचाया। यह प्रेम कहानी आज भी रॉयल इतिहास की अनोखी मिसाल बनी हुई है।
खूबसूरती की रानी
गायत्री देवी का जन्म 1919 में लंदन के कोचबीहर राजघराने में हुआ, जहां उनकी मां इंदिरा देवी भी सौंदर्य की मशहूर शख्सियत थीं। पर्ल्स, हीरे और ट्रेडिशनल ज्वेलरी में सजी उनकी तस्वीरें आज भी इंटरनेट पर वायरल होती रहती हैं। यूरोपीय मैगजीन ने उन्हें 'एशिया की सबसे खूबसूरत 10 महिलाओं' में शुमार किया, जो उनकी चमकदार आंखों और शाही अंदाज की वजह से था।
12 साल की उम्र में प्यार
12 साल की कम उम्र में गायत्री को जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह से पहली नजर का प्यार हो गया, जो उस समय शादीशुदा थे। महाराजा की पहली पत्नी का निधन हो चुका था, फिर भी यह रिश्ता सामाजिक बाधाओं से जूझा। गायत्री ने अपनी जिद पर डटे रहने का फैसला लिया और 1940 में 21 साल की उम्र में उनसे शादी कर ली।
शाही जीवन और विरासत
शादी के बाद गायत्री जयपुर की महारानी बनीं, जहां उन्होंने पोलो, गोल्फ और राजनीति में नाम कमाया। वे स्वतंत्र भारत की पहली लोकसभा सांसद बनीं और जयपुर को पर्यटन हब बनाने में योगदान दिया। तीन संतान—जगत सिंह, भवानी सिंह और प्रियदर्शिनी—के साथ उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहा। 2009 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी कहानी फिल्मों और किताबों में अमर है।
समाज पर प्रभाव
गायत्री की प्रेम कहानी बताती है कि सच्चा प्यार उम्र और बाधाओं से परे होता है। आज के दौर में भी युवा उनकी बेबाकी से प्रेरणा लेते हैं। रॉयल फैमिलीज में ऐसी क्रॉस-कल्चरल शादियां दुर्लभ थीं, जो गायत्री ने संभव बनाया। उनकी जिंदगी साबित करती है कि खूबसूरती सिर्फ चेहरा नहीं, हिम्मत भी है।
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: *छरीला कई बिमारियों की काट है :-*
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क्या आप जानते हैं कि छरीला क्या है, और छरीला का प्रयोग किस काम में किया जाता है? आमतौर पर लोग छरीला का इस्तेमाल मसालों के रूप में ही करते हैं, लेकिन छरीला के और भी फायदे हैं। कई लोगों को छरीला से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी ही नहीं है।
आयुर्वेद के अनुसार, छरीला एक उपयोगी औषधि है। बालों की समस्या, आंखों के रोग में छरीला के इस्तेमाल से फायदे मिलते हैं। इसी तरह विसर्प रोग, सिर दर्द, मूत्र रोग में भी छरीला से लाभ मिलता है। यह कई बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है। आइए छरीला के फायदे के बारे में जानते हैं।
1 छरीला क्या है?
2 अन्य भाषाओं में छरीला के नाम
3 छरीला के फायदे और औषधीय गुण
3.1 बालों की समस्या में छरीला के फायदे
3.2 सिर दर्द में छरीला के औषधीय गुण से लाभ
3.3 आंखों के रोग में छरीला के फायदे
3.4 मूत्र रोग में छरीला के सेवन से लाभ
3.5 विसर्प रोग में छरीला के औषधीय गुण से फायदा
3.6 छरीला के औषधीय गुण से घाव का इलाज
3.7 कुष्ठ रोग में फायदेमंद छरीला के फायदे
3.8 खुजली की बीमारी में छरीला का औषधीयु गण फायदेमंद
3.9 छरीला के औषधीय गुण से सूजन की समस्या का इलाज
4 छरीला के उपयोगी भाग
5 छरीला का इस्तेमाल कैसे करें?
6 छरीला कहां पाया या उगाया जाता है?
छरीला क्या है?
छरीला एक प्रकार की वनस्पति (लाइकेन) है जो चट्टानों, वृक्षों तथा दीवारों पर जमता है। पथरीले पहाड़ों पर पैदा होने से यह शैलेय और चट्टानों पर फूल जैसा दिखाई देता है। इसके कारण इसे शिलापुष्प भी कहा जाता है। इसके पीछे वाला भाग श्यामला रंग का और नीचला भाग सफेद रंग का होता है। इसमें एक विशिष्ट गन्ध होती है।
अन्य भाषाओं में छरीला के नाम
छरीला का वानस्पतिक नाम Parmelia perlata (Huds.) Ach. (पारमेलिया परलेटा) है, और यह Parmeliaceae (पार्मेलिएसी) कुल का है। छरीला को देश या विदेशों में अन्य कई नामों से भी जाना जाता है, जो ये हैंः-
हिन्दी – छरीला, भूरिछरीला, पत्थरफूल
संस्कृत – शैलेय, शिलापुष्प, वृद्ध, कालानुसार्यक, अश्मपुष्प, शीतशिव
English
(dagad phool in english) –
येलो लाइकेन
(Yellow lichen),
लिथो लाइकेन (Litho lichen), लाइकेन (Lichens), Stone flowers
(स्टोन फ्लावर)
Urdu – हबाक्कारमनी (Habakkarmani), रीहानकरमनी (Rihankarmani)
Kannada –
कल्लूहूवु (Kalluhavu)
Gujarati –
घबीलो (Ghabilo),
पत्थरफूला (Patharphula), छडीलो (Chadilo)
Tamil –
कलपसी (Kalpasi),
कलापु (Kalapu)
Telugu – शैलेय मनेद्रव्यमु (Shelayamanedravayamu),
रतिपंचे (Ratipanche)
Bengali –
शैलज (Shelaj)
Nepali –
भन्याऊ (Bhanyau)
Punjabi –
चालचालीरा (Chalchalira)
Marathi –
दगडफूल (Dagadaphula)
Malayalam –
सेलेयाम (Celeyam),
कलपुवु (Kalppuvu)
Arabic –
आशीना (Ashina),
उसनाह (Ushnah)
Persian –
दवाला (Davala),
दोवालह (Dowalah),
उशनह (Ushnah),
गुलेसंग (Gulesang)
छरीला के फायदे और औषधीय गुण
आप छरीला के औषधीय गुण से इन रोगों में लाभ पा सकते हैंः-
बालों की समस्या में छरीला के फायदे
बालों की समस्या आज लोगों की आम परेशानी बन चुकी है। छोटे बच्चे हों या वयस्क, सभी के बाल सफेद होने लगे हैं। ऐसे में छरीला का प्रयोग बहुत लाभ पहुंचाता है। आप छरीला, कर्चूर, हल्दी, काली तुलसी, तगर तथा गुड़ को समान मात्रा में मिला लें। इसे पीसकर सिर में लेप करने से बालों का पकना कम होने लगता है।
सिर दर्द में छरीला के औषधीय गुण से लाभ
अगर आप बराबर सिर के दर्द से परेशान रहते हैं तो आपको छरीला का इस्तेमाल करना चाहिए। छरीला को पीसकर मस्तक पर लगाएं। इससे सिर दर्द से राहत मिलती है।
आंखों के रोग में छरीला के फायदे
आंखों की कई बीमारियों में छरीला का उपयोग फायदेमंद होता है। हरीतकी, बहेड़ा, आँवला, सोंठ, मरिच, पिप्पली, समुद्रफेन, छरीला तथा राल की बराबर-बराबर मात्रा लें। इसकी बत्ती बनाकर जल में घिस लें। इसे आंखों में काजल की तरह लगाएं। इससे कफज विकार के कारण होने वाली आंखों की बीमारी में लाभ होता है।
इसी तरह छरीला चूर्ण का भी अगर आप आंखों में काजल की तरह लगाएंंगे तो बहुत लाभ मिलता है।
मूत्र रोग में छरीला के सेवन से लाभ
छरीला को पीसकर गुनगुना कर लें। इसका सेवन करने और पेट, कमर, किडनी, कमर के आस-पास लेप करने से मूत्र रोग में लाभ होता है।
छरीला का काढ़ बना लें। इसे 10-30 मिली की मात्रा में 1 ग्राम जीरा का चूर्ण मिला लें। इसमें 5-10 ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से रुक-रुक कर पेशाब आने की परेशानी ठीक होती है।
छरीला को पीसकर नाभि के नीचे बांधने से पेशाब के रुक-रुक कर आने की परेशानी में लाभ होता है।
विसर्प रोग में छरीला के औषधीय गुण से फायदा
सज्जीक्षार (सर्जिकादि चूर्ण), नीलाथोथा, कासीस, छरीला, रसाञ्जन तथा मैनसिल (मन शिला) का चूर्ण बना लें। इसे त्वचा पर लगाने से घाव और विसर्प रोग में लाभ होता है।
छरीला के औषधीय गुण से घाव का इलाज
छरीला के चूर्ण को घाव पर लगाएं। इससे घाव ठीक हो जाता है। बेहतर उपाय के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।
कुष्ठ रोग में फायदेमंद छरीला के फायदे
आप कुष्ठ रोग में भी छरीला का प्रयोग कर लाभ पा सकते हैं। छरीला को पीसकर मक्खन में मिला लें। इसे लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
खुजली की बीमारी में छरीला का औषधीयु गण फायदेमंद
छरीला खुजली में लाभ पहुंचाता है। छरीला को पीसकर खुजली वाले प्रभावित स्थान पर लगाने से लाभ होता है।
छरीला, छोटी इलायची, अगरु, कूठ, चोरपुष्पी, तगर, दालचीनी, देवदारु और रास्ना की घी या जल के साथ पीस लें। इससे त्वचा विकार जैसे पित्ती निकलने की परेशानी में लाभ होता है।
छरीला के औषधीय गुण से सूजन की समस्या का इलाज
छरीला आदि द्रव्यों को तेल में पका लें। इससे मालिश करने से या छरीला आदि द्रव्यों का लेप लगाने से सूजन कम हो जाती है।
छरीला को पीसकर गुनगुना करके लेप करने से सूजन की परेशानी से आराम मिलता है।
छरीला के उपयोगी भाग
पंचांग
औषधि उपयोग के लिए नए ताजे तथा सुगन्धित क्षुप का प्रयोग करना चाहिए।
छरीला का इस्तेमाल कैसे करें?
काढ़ा – 10-30 मिली
अधिक लाभ के लिए छरीला का प्रयोग चिकित्सक के परामर्शानुसार करें।
छरीला कहां पाया या उगाया जाता है?
छरीला भारत में प्रायः उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, नीलगिरी के पहाड़ी क्षेत्रों में पत्थरों के ऊपर एवं पुराने वृक्षों पर मिलता है।
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*🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
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ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
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TRN: *सुबह खाली पेट डालें गुड़ खाने की आदत, शरीर की इन 6 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा*
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सुबह खाली पेट गुड़ का सेवन करने से पाचन से जुड़ी परेशानी दूर होती है। साथ ही कई अन्य समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।
आयुर्वेद में गुड़ का इस्तेमाल औषधी के रूप में किया जाता है। इसके सेवन से शरीर की खई परेशानी होती है। यह चीनी का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। ऐसे में चीनी से होने वाली समस्याओं से राहत दिलाने में गुड़ काफी लाभकारी हो सकता है। इसमें कई तरह के विटामिंस और मिनरल्स पाए जाते हैं, तो शरीर की कई परेशानी दूर करने में लाभकारी हो सकता है। कई हेल्थ एक्सपर्ट खाली पेट गुड़ का सेवन करने की सलाह देते हैं। खाली पेट गुड़ का सेवन करने से पचन को मजबूती मिलती है। साथ ही इससे शरीर में खून की कमी से भी राहत मिल सकता है। आज इस लेख में हम खाली पेट गुड़ का सेवन ( Jaggery Health benefits) करने के फायदों के बारे में जानेंगे।
खाली पेट गुड़ खाने के फायदे ( Eating Jaggery Empty Stomach )
1. पाचन को मजबूती
खाली पेट गुड़ का सेवन करने से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है। साथ ही इससे पाचन को मजबूती मिलती है। दरअसल, इसमें फुक्रोज होता है, जो पाचन और कब्ज जैसी समस्याओं को कंट्रोल करने में प्रभावी हो सकता है। साथ ही इसके नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में पाचन के एंजाइम एक्टिव होते हैं। इससे पेट फूलने जैसी परेशानी कम होती है।
2. शरीर में लाए एनर्जी
गुड़ का सेवन करने से शरीर को कार्बोहाइड्रेट प्राप्त होता है। इससे शरीर को भरपूर रूप से एनर्जी मिलती है। गुड़ का सेवन करने से शरीर में लंबे समय तक हो रही थकान दूर होती है। सुबह-सुबह गुड़ खाने से शरीर को एनर्जी मिलती है।
3. आयरन की कमी करे दूर
गुड़ में आयरन, फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में रेल ब्लड सेल्स को कम करने में प्रभावी हो सकता है। खाली पेट नियमित रूप से गुड़ का सेवन करने से शरीर में आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है।
4. जोड़ों में दर्द से छुटकारा
सुबह गुड़ का सेवन करने से जोड़ों में दर्द की परेशानी को दूर किया जा सकता है। यह गठिया में होने वाली अन्य समस्याओं से राहत दिलाने में प्रभावी है। दरअसल, सुबह के समय गुड़ खाने से शारीरिक और हड्डियों की संचरना बेहतर होती है, जिससे जोड़ों में होने वाले दर्द और सूजन की परेशानी को कम करता है।
5. ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल
गुड़ में पोटैशियम और सोडियम पाया जाता है, जो शरीर में एसिड को कम करने में प्रभावी होता है। साथ ही इससे रेड ब्लड सेल्स स्वस्थ रहते हैं। रोजाना सुबह के समय 1 टुकड़ा गुड़ खाने से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
6. पीरियड्स की परेशानी करे दूर
सुबह गुड़ का सेवन करने से पीरियड्स में होने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है। यह शरीर के दर्द और ऐंठन को कम करने में प्रभावी है। साथ ही यह ब्लड फ्लो को भी बेहतर करता है। ऐसे में पीरियड्स के दौरान सुबह के समय गुड़ का सेवन आपके लिए प्रभावी हो सकता है।
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*🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷*
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
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TRN: *हड़जोड़ या 'अस्थिसंधानक*
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#हड़जोड़ या 'अस्थिसंधानक' (वानस्पतिक नाम : Cissus quadrangularis) अंगूर परिवार का बहुवर्षी पादप है।
इसको #अस्थिश्रृंखला के नाम से जाना जाता है। यह छह इंच के खंडाकार चतुष्कोणीय तनेवाली लता होती है। हर खंड से एक अलग पौधा पनप सकता है। चतुष्कोणीय तने में हृदय के आकार वाली पत्तियां होती है। छोटे फूल लगते हैं। पत्तियां छोटी-छोटी होती है और लाल रंग के मटर के दाने के बराबर फल लगते हैं। यह बरसात में फूलती है और जाड़े में फल आते हैं।
दक्षिण भारत और श्रीलंका में इसके तने को साग के रूप में प्रयोग करते हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार हड़जोड़ में सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम कार्बोनेट भरपूर पाया जाता है। हड़जोड़ में कैल्शियम कार्बोनेट और फास्फेट होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। आयुर्वेद में टूटी हड्डी जोड़ने में इसे रामबाण माना गया है। इसके अलावा कफ, वातनाशक होने के कारण बवासीर, वातरक्त, कृमिरोग, नाक से खून और कान बहने पर इसके स्वरस का प्रयोग होता है। मुख्य रूप से इसके तने का ही प्रयोग किया जाता है। 10 से 20 मिलीलीटर स्वरस की मात्रा निर्धारित है।
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*आवश्यक जानकारी:*🙏
* अगर आपके परिवार में किसी को *जोड़ो/कमर/घुटना या कंधे के दर्द* संबंधित समस्या हो, तो कृपया इस ग्रुप के साथ, पेशेंट को जोड़े।
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
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ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
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TRN LIVE: सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त 4500 साल पुरानी मुद्रा जिसे भगवान शिव के पशुपतिनाथ स्वरूप की मानी जाती है
मुद्रा में शिव एक अलग सा विचित्र सा मुकुट धारण किए हुए है जिसका वर्णन यजुर्वेद रुद्राष्टाध्याई में भी है
नम ऽ उष्णीषिणे गिरिचराय कुलुञ्चानां पतये नमो
अर्थात: पगड़ीधारी को नमन. पर्वत पर विचरने वाले को नमन
एक और यहां भगवान शिव एक प्रकार का कवच भी धारण किए हुए है जिसका वर्णन यजुर्वेद रुद्राष्टाध्याई में भी है
नमो बिल्मिने च कवचिने च नमो वर्मिणे च वरूथिने च नमः
अर्थात: सिर की रक्षा हेतु धारण करने वाले (उपकरण) के लिए नमन. कवचधारी रुद्र के लिए नमन.
बाकी शिव जी रुद्र देव हाथों में कंगन पूरे हाथों में पहने हुए है शिव जी को शास्त्र में हिरण्यबाहु भी कहा गया जिसका अर्थ ही है जिनकी भुजाएं स्वर्ण की है जिनकी भुजाएं में ही स्वर्ण के कंगन सुसज्जित है।
बाकी शास्त्रों में भी रुद्र देव भगवान शिव को पशुपति कहा गया है जो सभी पशुओं के नाथ है
और बाकी तंत्र में भगवान शिव का एक और रूप है जिसका नाम है महिष मुख महाकाल भैरव यानी भैंस के मुख वाले भैरव
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