देश का सबसे बड़ा IPO जून तक आ सकता है:जियो का 2.5% हिस्सेदारी बेचकर ₹37,000 करोड़ जुटाने का प्लान; ₹20 लाख करोड़ तक हो सकती है वैल्यूएशन

Jan 10, 2026 - 18:26
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देश का सबसे बड़ा IPO जून तक आ सकता है:जियो का 2.5% हिस्सेदारी बेचकर ₹37,000 करोड़ जुटाने का प्लान; ₹20 लाख करोड़ तक हो सकती है वैल्यूएशन
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी अपनी टेलीकॉम कंपनी 'रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स' को शेयर बाजार में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी इस साल अपना आईपीओ (IPO) ला सकती है, जिसमें 2.5% हिस्सेदारी बेची जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा, जिसकी वैल्यू 4 बिलियन डॉलर (करीब 37,000 करोड़ रुपए) से ज्यादा हो सकती है। जियो के पास फिलहाल 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं और इसका बाजार में बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। वैल्यूएशन में हुंडई को पीछे छोड़ेगी जियो इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने पिछले साल नवंबर में जियो की वैल्यूएशन करीब 180 बिलियन डॉलर (16 लाख करोड़ रुपए) आंकी थी। हालांकि, अब कुछ बैंकर्स इसकी वैल्यूएशन 200 बिलियन डॉलर से 240 बिलियन डॉलर (करीब 20 लाख करोड़ रुपए तक) बता रहे हैं। इस वैल्यूएशन के हिसाब से 2.5% हिस्सा बेचने पर भी जियो पिछले साल आए हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,000 करोड़ के आईपीओ को पीछे छोड़ देगी। नियम बदलने का इंतजार, 2.5% शेयर बेचने की तैयारी मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने बड़ी कंपनियों के लिए नियम बदलने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें आईपीओ के समय 5% के बजाय न्यूनतम 2.5% हिस्सेदारी बेचने की छूट मिल सकती है। रिलायंस फिलहाल इसी नियम के वित्त मंत्रालय से मंजूर होने का इंतजार कर रही है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी कम हिस्सा इसलिए बेचना चाहती है ताकि मार्केट में शेयरों की डिमांड बनी रहे। मॉर्गन स्टेनली और कोटक महिंद्रा बैंक ड्राफ्ट पर कर रहे काम अभी बैंकों की औपचारिक नियुक्ति नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक मॉर्गन स्टेनली और कोटक महिंद्रा बैंक के अधिकारी आईपीओ के पेपर (DRHP) तैयार करने के लिए रिलायंस के साथ काम करना शुरू कर चुके हैं। मुकेश अंबानी ने पिछले साल अगस्त में संकेत दिया था कि जियो की लिस्टिंग 2026 की पहली छमाही में हो सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला बाजार स्थितियों को देखकर होगा। विदेशी निवेशकों को मिल सकता है निकलने का मौका पिछले 6 सालों में रिलायंस जियो ने केकेआर (KKR), सिल्वर लेक और गूगल जैसे बड़े ग्लोबल इन्वेस्टर्स से फंड जुटाया है। माना जा रहा है कि इस आईपीओ के जरिए कई विदेशी निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं और बाहर निकल सकते हैं। मस्क की स्टारलिंक से मुकाबला और AI पर फोकस जियो सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सर्विसेज में भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए एनवीडिया के साथ पार्टनरशिप की है। बाजार में जियो की सीधी टक्कर इलॉन मस्क की स्टारलिंक से होने वाली है, जो जल्द ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने वाली है।

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला