बैंक फ्रॉड की रकम 30% बढ़कर ₹21,515 करोड़ हुई:अप्रैल-सितंबर के बीच मामले कम हुए लेकिन नुकसान बढ़ा; लोन से जुड़े फ्रॉड सबसे ज्यादा
देश के बैंकिंग सिस्टम में अप्रैल-सितंबर के बीच धोखाधड़ी के मामले घटे हैं, लेकिन रकम ₹16,569 करोड़ 30% बढ़कर ₹21,515 करोड़ पर पहुंच गई है। पिछले साल 18,386 मामले दर्ज हुए थे। इस बार यह घटकर केवल 5,092 रह गए हैं। सरकारी बैंकों में लोन से जुड़े फ्रॉड सबसे ज्यादा रिपोर्ट हुए हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 29 दिसंबर 2025 को अपनी सालाना रिपोर्ट 'ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2024-25' जारी की। इस रिपोर्ट में 2024-25 और 2025-26 की पहली छमाही के दौरान बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन की जानकारी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी फ्रॉड की रकम फ्रॉड की रकम में इस उछाल की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट का 27 मार्च 2023 का एक फैसला है। रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए 122 पुराने फ्रॉड मामलों की दोबारा जांच की गई और उन्हें फ्रेश रिपोर्ट किया गया। अकेले इन 122 मामलों में ही 18,336 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि शामिल है। यह कुल फ्रॉड राशि का एक बड़ा हिस्सा है। डिजिटल फ्रॉड की संख्या ज्यादा, लेकिन लोन फ्रॉड में पैसा ज्यादा डूबा संख्या के लिहाज से देखें तो कुल मामलों में से 66.8% मामले डिजिटल फ्रॉड से जुड़े हैं। हालांकि, जब बात डूबे हुए पैसे की आती है, तो लोन से जुड़े फ्रॉड सबसे आगे हैं। कुल फ्रॉड राशि में लोन से जुड़ी धोखाधड़ी की हिस्सेदारी 33.1% रही है। यह डेटा 1 लाख रुपए और उससे अधिक के फ्रॉड मामलों पर आधारित है। अलग-अलग बैंक ग्रुप्स में फ्रॉड का पैटर्न भी अलग नजर आया: जब कोई व्यक्ति या कंपनी गलत दस्तावेज दिखाकर बैंक से मोटा लोन लेती है और उसे चुकाती नहीं, तो इसे लोन (Advances) फ्रॉड कहा जाता है। इसमें अक्सर बड़ी राशि शामिल होती है। करीब ₹1.28 लाख करोड़ के फ्रॉड केस वापस लिए गए डेटा यह भी दिखाता है कि 30 सितंबर 2025 तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा कुल 942 फ्रॉड केस वापस लिए गए हैं। इन मामलों में करीब 1.28 लाख करोड़ रुपए की राशि शामिल थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 'नैचुरल जस्टिस' के सिद्धांतों का पालन न करने की वजह से इन मामलों को वापस लिया गया है। लोन से जुड़े फ्रॉड पर बढ़ी सख्ती बैंकिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोन से जुड़े फ्रॉड का बढ़ता ग्राफ चिंता का विषय है। यही वजह है कि बैंकों ने अब 'एडवांस रिलेटेड फ्रॉड' की कैटेगरी में री-क्लासिफिकेशन और सख्ती बढ़ा दी है। हालांकि, सभी बैंक ग्रुप्स में कार्ड और इंटरनेट से जुड़े फ्रॉड की संख्या में पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कमी देखी गई है, जो डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक पॉजिटिव संकेत हो सकता है।
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