1500 रुपये वाली व्हिस्की की असली कीमत पर कितनी, जानें एक बोतल पर कितना लगता है GST?

Jan 1, 2026 - 10:51
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1500 रुपये वाली व्हिस्की की असली कीमत पर कितनी, जानें एक बोतल पर कितना लगता है GST?

भारत में शराब सिर्फ एक पीने की चीज नहीं है, बल्कि यह राज्यों के लिए एक बहुत बड़ा आय का स्रोत भी है. देश के अलग-अलग राज्यों में शराब पर कई तरह के टैक्स लगाए जाते हैं, जैसे कि एक्साइज ड्यूटी, वैट और अन्य शुल्क. इन टैक्सों की वजह से शराब की कीमत असली उत्पादन लागत से कई गुना बढ़ जाती है. 

भारत में शराब पर जीएसटी लागू नहीं होती, इसका मतलब यह है कि शराब पर केंद्रीय कर नहीं लगता, लेकिन राज्य सरकारें इसे लेकर भारी टैक्स वसूलती हैं. कई राज्यों में शराब की कीमत का 60 प्रतिशत से 80 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ टैक्स होता है. दिल्ली में शराब की बोतल की कीमत का लगभग 65 से 70 प्रतिशत टैक्स होता है. वहीं कर्नाटक और तमिलनाडु में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत से भी ज्यादा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 1500 रुपये वाली व्हिस्की की असली कीमत पर कितनी है और एक बोतल पर कितना GST लगता है. 

1500 रुपये वाली व्हिस्की की असली कीमत पर कितनी?

1500 रुपये वाली व्हिस्की की असली कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है.  यह वह कीमत है जिस पर शराब निर्माता इसे बनाता है. इसमें शराब, बोतल, ढक्कन, लेबल और पैकेजिंग शामिल होती है. आम तौर पर इस बोतल की फैक्ट्री कीमत लगभग 350 से 500 होती है. फैक्ट्री से बोतल दुकानों तक पहुंचाने में डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर का भी खर्च और मुनाफा शामिल होता है. यह लगभग 50 से 100 के बीच हो सकता है. इसके बाद राज्य टैक्स, यह सबसे बड़ा हिस्सा है. राज्यों के अनुसार यह अलग-अलग होता है. जैसे नतमिलनाडु में टैक्स बहुत ज्यादा है, वहीं गोवा में थोड़ा कम 1,500 की बोतल पर राज्य सरकार को लगभग 1,000 से 1,150 टैक्स मिलता है. इन सभी चीजों को जोड़ने के बाद एक बोतल की खुदरा कीमत 1,500 बनती है. 

टैक्स का असली प्रभाव

अगर इस शराब पर टैक्स न लगाया जाए तो इसका मतलब यह होगा कि उपभोक्ता को यह बोतल सिर्फ 350 से 500 में मिल सकती है यानी टैक्स के कारण ही शराब की कीमत 3-4 गुना बढ़ जाती है. इसके अलावा, शराब पर कई तरह के अतिरिक्त शुल्क भी लगते हैं. जैसे स्पेशल लाइसेंस फीस, ट्रांसपोर्टेशन शुल्क, लेबल और रजिस्ट्रेशन चार्ज, वहीं अगर शराब विदेशी है तो इसमें और भी अधिक टैक्स लगते हैं. यही कारण है कि एक ही बोतल दिल्ली में 900 में मिल सकती है, लेकिन कर्नाटक में 1,400 से 1,500 तक बिक सकती है. वहीं मानव उपभोग के लिए शराब पर जीएसटी लागू नहीं होती है. लेकिन शराब बनाने के लिए जो सामग्री यूज होती है. जैसे बोतल, ढक्कन, लेबल उन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है. निर्माता इस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकते हैं. 

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला