2025 में शेयर बाजार से विदेशी-निवेशकों का सबसे बड़ा एग्जिट:रिकॉर्ड ₹1.58 लाख करोड़ निकाले; 2026 में FII की वापसी की उम्मीद
भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2025 विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के लिहाज से अब तक का सबसे खराब साल साबित हुआ है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस साल भारतीय इक्विटी मार्केट से करीब 1.58 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी निकासी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव और भारत में ऊंची वैल्यूएशन के कारण निवेशकों ने अपना पैसा निकाला है, हालांकि अब उम्मीदें 2026 पर टिकी हैं। शेयर बाजार से ₹2.31 लाख करोड़ की बिकवाली इस साल की कुल निकासी में शेयर बाजार (सेकेंडरी मार्केट) से की गई सीधी बिकवाली का बड़ा हिस्सा है। विदेशी निवेशकों ने स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए 2,31,990 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। हालांकि, इस बड़ी निकासी के बावजूद प्राइमरी मार्केट (IPO और अन्य निवेश) में विदेशी निवेशकों ने 73,583 करोड़ रुपए का निवेश भी किया। इन दोनों को मिलाकर कुल नेट आउट-फ्लो (शुद्ध निकासी) 1.58 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा है। 2024 में FII का कुल निवेश पॉजिटिव रहा था पिछले साल यानी 2024 की तुलना में यह आंकड़ा काफी डराने वाला है। 2024 में विदेशी निवेशकों ने स्टॉक एक्सचेंज पर 1,21,210 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी, लेकिन तब उन्होंने आईपीओ और अन्य माध्यमों (प्राइमरी मार्केट) में 1,21,637 करोड़ रुपए का निवेश किया था। इस वजह से 2024 में कुल निवेश पॉजिटिव रहा था। लेकिन 2025 में बिकवाली इतनी ज्यादा रही कि प्राइमरी मार्केट का निवेश भी उसे कवर नहीं कर पाया। IT-FMCG सेक्टर में सबसे ज्यादा निकासी सेक्टर वाइज आंकड़ों को देखें तो सबसे ज्यादा पैसा आईटी (IT) और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर से निकला है। आईटी सेक्टर से करीब 79,155 करोड़ रुपए और एफएमसीजी से 32,361 करोड़ रुपए की निकासी हुई है। इसके अलावा पावर, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी भारी बिकवाली देखी गई। जानकारों के मुताबिक, ग्लोबल ग्रोथ में सुस्ती की आशंका के चलते निवेशकों ने इन सेक्टर्स से दूरी बनाई। रुपए की कमजोरी भी बड़ी वजह जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस लगातार बिकवाली का सीधा असर भारतीय रुपए पर भी पड़ा है। इस साल रुपए में डॉलर के मुकाबले काफी गिरावट देखी गई। जब विदेशी निवेशक अपना निवेश वापस खींचते हैं, तो वे भारतीय रुपए बेचकर डॉलर खरीदते हैं। जिससे रुपए पर दबाव बढ़ता है और वह कमजोर होता है। 2026 में वापसी की उम्मीद क्यों? भले ही 2025 बाजार के लिए मुश्किल भरा रहा हो, लेकिन एक्सपर्ट्स 2026 को लेकर पॉजिटिव हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि 2026 में भारत की जीडीपी ग्रोथ मजबूत रहने और कॉर्पोरेट अर्निंग्स (कंपनियों के मुनाफे) में सुधार होने से विदेशी निवेशक फिर से भारत की ओर रुख करेंगे। इसके अलावा, भारत की आर्थिक स्थिति ग्लोबल लेवल पर अभी भी कई देशों से बेहतर बनी हुई है। ये खबर भी पढ़ें... एक हफ्ते में चांदी ₹27,771 महंगी हुई: 1 किलो का भाव ₹2.28 लाख पहुंचा, इस साल 165% चढ़ा दाम; हफ्तेभर में सोना ₹6,177 महंगा हुआ चांदी की कीमत में लगातार पांचवे हफ्ते तेजी देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 19 दिसंबर को एक किलो चांदी की कीमत 2,00,336 रुपए थी, जो एक हफ्ते में 27,771 रुपए बढ़कर 26 दिसंबर को 2,28,107 रुपए/kg पर पहुंच गई है। इस हफ्ते चांदी ने लगातार चार दिन ऑल टाइम हाई बनाया और हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को 9,124 रुपए चढ़कर बंद हुआ। इधर, सोने में भी तेजी रही। पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी 19 दिसंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,31,779 रुपए का था। एक हफ्ते में 6,177 रुपए महंगा होकर शुक्रवार, 26 दिसंबर को 1,37,956 रुपए पर पहुंच गया। ये सोने का सबसे ऊंची कीमत है। पूरी खबर पढ़ें...
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