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जयपुर की महारानी गायत्री देवी को दुनिया की सबसे खूबसूरत राजकुमारी कहा जाता था, जिनकी सुंदरता पर अंग्रेज राजपरिवार के लोग भी फिदा थे। मात्र 12 साल की उम्र में उन्हें शादीशुदा भारतीय महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय से प्यार हो गया, और उन्होंने परंपराओं को तोड़ते हुए उनसे विवाह रचाया। यह प्रेम कहानी आज भी रॉयल इतिहास की अनोखी मिसाल बनी हुई है।​ खूबसूरती की रानी गायत्री देवी का जन्म 1919 में लंदन के कोचबीहर राजघराने में हुआ, जहां उनकी मां इंदिरा देवी भी सौंदर्य की मशहूर शख्सियत थीं। पर्ल्स, हीरे और ट्रेडिशनल ज्वेलरी में सजी उनकी तस्वीरें आज भी इंटरनेट पर वायरल होती रहती हैं। यूरोपीय मैगजीन ने उन्हें 'एशिया की सबसे खूबसूरत 10 महिलाओं' में शुमार किया, जो उनकी चमकदार आंखों और शाही अंदाज की वजह से था।​ 12 साल की उम्र में प्यार 12 साल की कम उम्र में गायत्री को जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह से पहली नजर का प्यार हो गया, जो उस समय शादीशुदा थे। महाराजा की पहली पत्नी का निधन हो चुका था, फिर भी यह रिश्ता सामाजिक बाधाओं से जूझा। गायत्री ने अपनी जिद पर डटे रहने का फैसला लिया और 1940 में 21 साल की उम्र में उनसे शादी कर ली।​ शाही जीवन और विरासत शादी के बाद गायत्री जयपुर की महारानी बनीं, जहां उन्होंने पोलो, गोल्फ और राजनीति में नाम कमाया। वे स्वतंत्र भारत की पहली लोकसभा सांसद बनीं और जयपुर को पर्यटन हब बनाने में योगदान दिया। तीन संतान—जगत सिंह, भवानी सिंह और प्रियदर्शिनी—के साथ उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहा। 2009 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी कहानी फिल्मों और किताबों में अमर है।​ समाज पर प्रभाव गायत्री की प्रेम कहानी बताती है कि सच्चा प्यार उम्र और बाधाओं से परे होता है। आज के दौर में भी युवा उनकी बेबाकी से प्रेरणा लेते हैं। रॉयल फैमिलीज में ऐसी क्रॉस-कल्चरल शादियां दुर्लभ थीं, जो गायत्री ने संभव बनाया। उनकी जिंदगी साबित करती है कि खूबसूरती सिर्फ चेहरा नहीं, हिम्मत भी है।

Dec 8, 2025 - 09:06
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TRN LIVE TRNDKB JITENDRAKUMAR JEETUDR JEETUDEHATI JD SERIES TRN LIVE

: भारत के लिए पाकिस्तान उतना बड़ा दुश्मन नहीं है जितना अमेरिका और पश्चिम के लिए रूस है। रहीम का दोहा कि बड़े बढ़ाई ना करें वो डोनाल्ड ट्रम्प को इस समय चुभ रहा होगा और कारण भी ठीक है।

पहली बात तो अपने दिमाग़ से ये निकाल दीजिए कि रूस भारत का सगा है, ये अंतर्राष्ट्रीय संबंध है और जरूरत के हिसाब से बनते है। वास्तविकता यह है कि भारत को रूस से तेल चाहिए और रूस को भारत का बाजार चाहिए।

इस समय भारत और रूस के संबंध अपने समय की सबसे बड़ी ऊंचाई पर है, डोनाल्ड ट्रम्प के पहले क्रम मे ट्रम्प ने भारत को अमेरिका के काफी करीब ला दिया था और तब लगा था कि अमेरिका रूस की जगह ले लेगा। लेकिन तब के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर और अरुण जेटली ने रक्षा समझौते के लिए कांग्रेस की नीति नहीं बदली और रूस पऱ ही भरोसा दिखाया।

2025 मे ट्रम्प मे जो ये नोबल पुरस्कार का भूत घुसा इसने ना भारत को नुकसान किया ना ही रूस को बस बैठे बैठाये चीन को विजय दिला दी। आज भी समझ नहीं आया कि ट्रम्प जैसा व्यापारी जो अरबो डॉलर का मालिक है, वो नोबल के लालच मे इतना बड़ा घोटाला आखिर कैसे कर गया?

एशिया मे चीन को चेक मे रखने के लिए भारत का अमेरिका के पक्ष मे होना जरूरी था और इसी का प्रयास बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रम्प ने किया था। जो बाइडेन के समय यदि तख्तापलट के प्रयास ना हुए होते तो उन्हें भी इस कड़ी मे जोड़ता।

अब भारत चीन के विरुद्ध तब ही जाएगा ज़ब चीन कोई गलती कऱ दें, अक्साई चीन को लेकर आज नहीं तो कल विवाद होना तय है। लेकिन ये भी तय मानिये कि भारत अरब वालो समस्याओ को पहले सुलझायेगा उसके बाद ही चीन के विरुद्ध सोचेगा। इसलिए दीर्घकाल के लिए भारत चीन शत्रुता पर बर्फ पड़ी समझो।

लेकिन चीन को आज नहीं तो कल काउंटर तो करना ही है, इसलिए भारत को उम्मीद है कि क्या पता ट्रम्प मे ही सद्बुद्धि आ जाए। ट्रम्प ने ये काम अच्छा किया कि संबंधो को नुकसान इतना ज्यादा कर दिया कि उन्हें नॉर्मल करने के लिए अब भारत को बहुत कुछ देना पड़ेगा।

रहा सवाल रूस का, तो जो कट्टरपंथ समस्या वाला एंगल है उसमे मदद रूस की ही लगेगी क्योंकि जो अमेरिकी समर्थन और हथियार पाकिस्तान के पास है उसकी काट रूस के पास है। जबकि जो रूस की तकनीक चीन के पास है उसकी काट अमेरिका के पास है, यही कारण है कि हमें गुटनिरपेक्ष ही रहना है।

भारत के पैरो मे भले ही टेरीफ नाम की बेड़ी पड़ी हो, चाहे डॉलर 90 रूपये के पार क्यों ना गया हो मगर भारत किसी के रोके रुक नहीं रहा। पश्चिम के लिए ये बहुत शोक की घड़ी है क्योंकि पिछले 108 सालो से रूस के बारे मे उनकी जो अवधारणा है वह उन्हें प्राकृतिक रूप से परेशान करती है।

इतने प्रतिबन्ध झेलकर भी रूस अब तक कमजोर नहीं हुआ ये भी कही ना कही पश्चिम को डराता है, ऐसे मे भारत के प्रधानमंत्री का व्लादिमीर पुतिन को एयरपोर्ट पर रिसीव करना कुछ वैसा ही सेटबैक है जैसा आसिम मुनीर का व्हाइट हॉउस मे जाना। बल्कि पुतिन का स्वागत इससे भी बढ़कर है और इसका श्रेय जाता है डोनाल्ड ट्रम्प को।

आपको बराक ओबामा से इतना ही खार था तो आप ओबामा की तरह नीतियां बनाते या उनसे अच्छी बनाते। ये तो कोई मापदंड नहीं हुआ कि ओबामा को नोबल मिला तो हमें भी मिलना चाहिए। ट्रम्प बड़बोलेपन मे इतना कुछ बोल तो गए और अब समेटते बन नहीं रहा, उसी का नतीजा ये मीटिंग है।

ये बात सही है कि आपने भारत का नुकसान तो लगभग अच्छा कर दिया क्योंकि डॉलर 90 रूपये पर है, RBI चाहे तो रोक सकती है मगर निर्यातको को फायदा हो इसलिए चुप है। भारत मे महंगाई बढ़ नहीं सकती क्योंकि GST कम हो गया है, आयात करना थोड़ा महंगा जरूर होगा लेकिन उससे स्वदेशी का रास्ता भी खुल सकता है।

ये वो जंग है जिसमे हम हारे तो आखिर एक सुपरपॉवर से हारेगे और यदि हरा दिया तो एक सुपरपॉवर को हरायेगे। इससे पहले अमेरिका को ऐसी पटखनी रूस के अलावा शायद ही किसी ने दी हो।

TRN LIVE: पश्चिम बंगाल में चुनाव की तैयारियों का केंद्र अब SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया बन चुका है।

लेखक : लोकेश कुशवाहा 

इस कार्यवाही का मूल उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। SIR के दौरान उन नामों की पहचान और समीक्षा की जा रही है जो या तो मृतक मतदाता हैं या जिन पर शंका है कि वे वैध भारतीय मतदाता नहीं हैं। यह प्रक्रिया चुनावी ढांचे की गुणवत्ता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

चुनाव आयोग ने SIR अभियान को प्रभावी बनाने के लिए BLOs (Booth Level Officers) को घर-घर जाकर फॉर्म वितरण, दस्तावेज़ सत्यापन और मतदाता की पहचान की पुष्टि का कार्य सौंपा है। यह पहली बार है जब राज्य में इतनी व्यापक स्तर पर घर-घर सत्यापन किया जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि जो मतदाता SIR सत्यापन में भाग नहीं लेंगे, उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदान अधिकार केवल उन्हीं नागरिकों के पास रहे जो वास्तव में इसके पात्र हैं।

SIR प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सत्यापन में अनुपस्थित या असफल पाए जाने वाले नाम राष्ट्रीय डेटा बेस में चिह्नित किए जाएंगे। अनुमान है कि भविष्य में ऐसी जानकारी राशन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य सरकारी लाभ योजनाओं के सत्यापन में भी उपयोग की जा सकती है। इससे फर्जी पहचान, बनावटी दस्तावेज़ और अवैध प्रवासियों के पंजीकरण पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।

लंबे समय से राजनीतिक संरक्षण या दस्तावेज़ी हेरफेर के माध्यम से बने रहे अवैध पहचान तंत्र पर भी यह कदम एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

SIR को देशव्यापी चुनाव सुधार की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है—

भारत की मतदाता सूची में केवल वही भारतीय नागरिक बने रहें जो वैधानिक रूप से इसके अधिकारी हैं।

मृतक मतदाता, दोहराए गए नाम, या संदिग्ध पहचान वाले प्रविष्टियों को हटाने से न केवल चुनावी धांधलियों की संभावना घटेगी, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी भी बढ़ेगी।

TRN 

पश्चिम बंगाल की राजनीति पर संभावित प्रभाव

इतनी व्यापक और कठोर सत्यापन प्रक्रिया ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक माहौल में तनाव और सक्रियता दोनों को जन्म दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि SIR अभियान के पूर्ण होने के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

मतदाता सूची का शुद्धिकरण उन क्षेत्रों में बड़ा असर डालेगा जहाँ पहले शिकायतें थीं कि फर्जी या संदिग्ध वोटरों का प्रभाव चुनाव परिणामों को प्रभावित करता है।

SIR प्रक्रिया न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश के चुनावी ढांचे को मजबूती प्रदान करने वाला कदम है। यह अभियान इस संदेश को मजबूत करता है कि

भारत की चुनावी प्रणाली में अब केवल वैध भारतीय नागरिक ही मतदाता के रूप में बने रहेंगे, और फर्जी या अवैध पहचान को कोई स्थान नहीं मिलेगा।

इससे चुनावी पारदर्शिता, प्रशासनिक साख और लोकतांत्रिक प्रणाली—तीनों में सुधार सुनिश्चित होगा।

--- लोकेश कुशवाहा 

🩵 टेलीग्राम चैनल

TRN 

TRN LIVE: *दोपहर शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें*

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*1* गोवा के नाइट क्लब में सिलेंडर ब्लास्ट, 25 मौतें, क्लब का मैनेजर गिरफ्तार; 4 टूरिस्ट समेत 18 लोगों के शवों की पहचान की गई

*2* अवैध निर्माण की शिकायत के बाद भी संचालित हो रहा था नाइट क्लब, अग्निकांड के कई अनसुलझे सवाल

*3* दोषियों को बख्शेंगे नहीं: सीएम सावंत ने गोवा नाइट क्लब अग्निकांड की जांच के दिए आदेश; अब तक 25 की मौत

*4* पीएम मोदी ने अग्निकांड पर जताया दुख, मारे गए 23 लोगों के लिए मुआवजे का किया एलान।

*5* वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर कल संसद में होगी चर्चा, लोकसभा में PM मोदी करेंगे शुरुआत

*6* इंडिगो पर सख्ती... तलब करेगी संसदीय समिति, सरकार ने भी शुरू कर दी हाई लेवल जांच, आज सबसे ज्यादा कैंसिल हो रहीं उड़ानें

*7* नहीं कम हो रही यात्रियों की परेशानी! आज भी 650 फ्लाइट्स कैंसिल, इंडिगो ने 10 दिसंबर तक संचालन सामान्य होने की जताई उम्मीद

*8* भारत में रहना शेख हसीना का निजी फैसला', बांग्लादेश की पूर्व पीएम के प्रत्यर्पण पर जयशंकर का बयान

*9* पुतिन के दौरे से भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत मुश्किल होने की बात को विदेश मंत्री ने खारिज कर दिया। रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, भारत जैसे बड़े और तेजी से उभरते देश के लिए जरूरी है कि सभी अहम देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखा जाए और जहां तक हो हमारे पास विकल्प चुनने की आजादी हो।

*10* डीआरडीओ ने नई स्वदेशी तकनीकें भारतीय सशस्त्र बलों को सौंपीं, बढ़ेगा आत्मनिर्भरता और सुरक्षा क्षमता

*11* 'पंडित नेहरू पर झूठ फैला रहे राजनाथ सिंह', कांग्रेस ने शेयर की सरदार पटेल की बेटी की डायरी

*12* बाबरी मस्जिद वाले हुमायूं बनाएंगे नई पार्टी, ओवैसी के साथ मिलकर लड़ेंगे ममता के खिलाफ चुनाव

*13* बाबर का महिमामंडन करने वाले, भारत के गद्दार; बाबरी मस्जिद के शिलान्यास पर भड़के बाबा रामदेव

*14* स्मृति मंधाना की पलाश मुच्छल से टूट गई शादी, क्रिकेटर ने इंस्टा पोस्ट में खुद किया कंफर्म

*15* नए साल में बदल जाएगा दिल्ली का 'नक्शा', 11 की जगह होंगे 13 जिले; शाहदरा डिस्ट्रिक्ट होगा खत्म

*16* दिसंबर में निपटाने हैं 4 जरूरी काम, 31 दिसंबर तक पैन को आधार से लिंक करें, एडवांस टैक्स भरने का भी आखिरी मौका

*17* रूस को 'खतरा' नहीं कहेगा अमेरिका, नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में बदलाव; ट्रम्प बोले- यूरोप का वजूद खत्म हो रहा

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 TRN LIVE: राजस्थान मे अब शव रखकर प्रदर्शन करने पर होगी जेल

राजस्थान में मृत शरीर सम्मान अधिनियम के नए नियम आज से लागू हो गए हैं, जिनके बाद सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करना कानूनी अपराध माना जाएगा. परिजन 24 घंटे में अंतिम संस्कार नहीं करेंगे तो पुलिस खुद कार्रवाई कर अंतिम संस्कार कर सकेगी. सरकार का दावा है कि इस तरह का कानून लागू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है.राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब शव को सड़क या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर रखकर प्रदर्शन, विरोध या दबाव बनाना आपराधिक कृत्य माना जाएगा. ऐसे मामलों में दोषियों को 6 महीने से 5 साल तक की सजा मिल सकती है. परिजनों द्वारा ऐसा करने पर भी दो साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है. इसके अलावा अस्पताल अब बकाया बिल के आधार पर शव को नहीं रोक सकेंगे, जिससे मृतक के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित होगी.

#Rajasthan

TRN LIVE: *LoC पर पाकिस्तान के 68 आतंकी लॉन्चपैड सक्रिय:120 आतंकी भारत में घुसने की तैयारी में; सुरक्षाबलों को निर्देश- टेररिस्ट सीमा के करीब न पहुंचें*

*श्रीनगर*

LoC के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा को और कड़ा कर दिया गया है। सभी सेक्टरों में निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि आतंकी सीमा के करीब भी न पहुंच सकें 

जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में 68 लॉन्चपैड सक्रिय हैं। वहां 110 से 120 आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसने की तैयारी कर रहे हैं खुफिया एजेंसियों ने दैनिक भास्कर को ये एक्सक्लूसिव जानकारी दी है

सूत्रों के मुताबिक, अगले कुछ हफ्तों में घुसपैठ की कोशिशें बढ़ सकती हैं LoC के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा को और कड़ा कर दिया गया है। सभी सेक्टरों में निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि आतंकी सीमा के करीब भी न पहुंच सकें

अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी लगातार LoC की ओर भेजा जा रहे हैं, लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं सभी फोर्सेज को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि हर घुसपैठ की कोशिश को सीमा पर ही रोक दिया जाए

*LoC पर सुरक्षा बढ़ाई गई*

सीमा से लगे गांवों और आगे की चौकियों में भी गश्त बढ़ा दी गई है फील्ड यूनिट्स को अधिक सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध हरकत पर तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं

घुसपैठ रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने अपनी काउंटर-इनफिल्ट्रेशन ग्रिड को और मजबूत किया है बॉर्डर पर अब नाइट विजन कैमरे, ड्रोन निगरानी, थर्मल सेंसर, ग्राउंड सेंसर, बढ़ी हुई पेट्रोलिंग और अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी गई है

*30 नवंबरः BSF बोली- फोर्स ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए तैयार*

इससे पहले 30 नवंबर को जम्मू के बीएसएफ कैंपस में एनुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इस दौरान BSF की जम्मू फ्रंटियर के IG शशांक आनंद ने बताया, 'साल 2025 में अब तक BSF ने पाकिस्तान की 118 चौकियां तबाह की हैं। सरकार ने हमें जीरो घुसपैठ का टारगेट दिया है। हम उसको पूरा करेंगे

वहीं, BSF डीआईजी विक्रम कुंवर ने कहा- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान BSF ने कई आतंकी लॉन्च पैड नष्ट किए, इसके बाद पाकिस्तान ने बॉर्डर से 72 से ज्यादा टेरर लॉंचिंग पैड शिफ्ट किए हैं इनमें सियालकोट-जफ्फरवाल में एक्टिव 12 लॉन्च पैड और दूसरी जगहों पर एक्टिव 60 लॉन्च पैड शामिल हैं। हालांकि, ये सभी बॉर्डर से दूर हैं

TRN LIVE: *_बांग्लादेश और पाकिस्तान से होने वाली अवैध घुसपैठ का एक मात्र इलाज है.._*

*_"नसबंदी"_*

*_जैसे ही भारत के किसी भी कोने में कोई अवैध घुसपैठिए पकड़े जाते हैं, सरकार को उनकी पक्की नसबंदी कर देनी चाहिए और उन्हें वापस बॉर्डर के रास्ते उनके देश भेज देना चाहिए ----_*

*_इससे 2 लाभ होंगे --_*

*_पहलाः घुसपैठियों में भय पैदा होगा और भारत में घुसने से घबराएंगे। दूसराः अवैध घुसपैठिया जिसकी नसबंदी हो चुकी है, वह भारत में तो क्या उनके देश में भी बच्चे पैदा नहीं कर सकेंगे। भारत में यदि दुबारा घुसेगा तो भी डेमोग्राफी चेन्ज नहीं कर पाएगा --_*

*_नसबंदी सबसे ताकतवर हथियार है_*

*_जितनी भी महिलाएं जो भारत में रहकर पाकिस्तान के मुसलमानों के बच्चे भारत में पैदा कर रही हैं, उनकी भी नसबंदी की जाए क्योंकि पाकिस्तान के बच्चे पालने का ठेका भारत सरकार ने नहीं लिया और इन महिलाओं का वोटर लिस्ट से नाम हटाया जाए।_*

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TRN LIVE: जब वाजपेई जी ने पढ़ ली थी देवानंद के मन की बात :- 

साल था 1975 . देश में इमरजेंसी लग चुकी थी .इमरजेंसी के दौरान वे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के विचारों और कांग्रेस द्वारा उन्हें देश का अगला प्रधानमंत्री बताने की कोशिश को लेकर काफी नाखुश थे. वे उस नारे से भी परेशान थे, जो अक्सर लगाया जाता था, ‘देश का नेता कैसा हो, संजय गांधी जैसा हो’. उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘रोमांसिंग विद लाइफ : एन ऑटोबायोग्राफी’ में लिखा- ‘देश की राजनीति पर मुझे शर्म आई. क्या इस महान देश को आगे ले जाने के लिए कोई दूरदर्शी नेता नहीं बचा था?’ जब उनसे संजय गांधी और युवा कांग्रेस की तारीफ में चंद शब्द बोलने के लिए कहा गया तो उन्होंने यह कहते हुए इससे इनकार कर दिया कि ‘उनकी आत्मा को यह गवारा नहीं है.’ उनके इस इनकार की वजह से उनकी फिल्मों का राष्ट्रीय चैनलों पर प्रसारण रोक दिया गया. आकाशवाणी ने भी अपने कार्यक्रमों में उनके नाम का जिक्र करना बंद कर दिया था.

देव आनंद की इसी स्पष्टवादिता और साहस की वजह से प्राण उन्हें ‘जेनुइनली वंडरफुल’ (असली शानदार इंसान) कहते थे. बन्नी रुबेन की किताब ‘फॉलीवुड फ्लैशबैक: ए कलेक्शन ऑफ मूवी मेमोरीज’ के लिए उन्होंने लेखक को बताया था- ‘देव आनंद कभी भी फिल्मी राजनीति में नहीं पड़े, लेकिन 13 मार्च 1977 को हुई एक रैली में हम सब (देव आनंद के अलावा डैनी, गोल्डी, शत्रुघन सिन्हा) शामिल हुए थे और हमने इंदिरा गांधी, वी.सी. शुक्ला और इमरजेंसी के खिलाफ भाषण दिए थे.’

इसके बाद वे कुछ समय के लिए जनता पार्टी और मोरारजी देसाई के साथ जुड़े लेकिन फिर उनसे भी उनका मोहभंग हो गया . तब देव आनंद ने ‘राजनेताओं को सबक सिखाने’ का फैसला किया और अपनी खुद की पार्टी ‘नेशनल पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनपीआई) बनाई. उन्होंने अपने समर्थकों से कहा था, ‘अगर एमजीआर तमिलनाडु में जादू कर सकते हैं तो मैं पूरे देश में क्यों नहीं?’ समर्थकों में जवाहरलाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित भी शामिल थीं. देव आनंद ने बाद में कहा था, ‘हमने महसूस किया कि समय आ गया है कि संसद में अधिक बुद्धिमान, जानकार और नेक नीयत वाले लोग भारत के मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करें.’ उन्होंने मुंबई के ऐतिहासिक मैदान शिवाजी पार्क में एक विशाल रैली भी आयोजित की थी.

लेकिन यह मामला भी ज्यादा नहीं चला .पहले नानी पालकीवाला और फिर विजयलक्ष्मी पंडित के लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार के बाद देव आनंद की इस पार्टी का अस्तित्व कुछ ही महीनों में खत्म हो गया. ख्यात न्यायविद और अर्थशास्त्री पालकीवाला ने कथित तौर पर यह संदेश भेजा था कि वे राज्यसभा सदस्य बनने को तो तैयार हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में किस्मत नहीं आजमाना चाहते. बकौल देव आनंद, ‘शुरुआत में उत्साह दिखाने वाले लोगों में धीरे-धीरे नजर आने वाली जड़ता ने मेरा जोश ठंडा कर दिया और यही नेशनल पार्टी के अंत का कारण बना. यह एक बहुत अच्छा विचार था, जिसे उसके शुरुआती चरण में ही खत्म कर दिया गया.’

कई वर्षों बाद देव आनंद ने अटल बिहारी वाजपेयी के लिए समर्थन जुटाने का फैसला किया. 1998 में वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने और उसके अगले वर्ष फरवरी में लाहौर बस यात्रा पर जाने का निर्णय लिया तो उन्होंने अपने साथ देव आनंद को भी इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया. देव आनंद ने अपनी आत्मकथा में लिखा, ‘जब मैंने उन्हें पीछे से देखा तो मुझे लगा कि वे अपनी नियति के सबसे बड़े क्षण में अपने कंधों पर डाली गई एक विराट जिम्मेदारी के साथ अकेले खड़े हैं. उस समय मैंने सोचा कि काश, मैं उनकी जिम्मेदारी का एक छोटा-सा हिस्सा भी किसी तरह उठा पाता.’ मानो वाजपेयी ने उनके मन की बात पढ़ ली हो. देव आनंद को उनके बाजू में बैठने के लिए कहा गया. देव आनंद ने लिखा, ‘मैंने उनका हाथ थामा और धीरे से दबाते हुए कहा- हम सब आपके साथ हैं. आपके जो भी सपने हैं, उन्हें पूरा कीजिए.’

आज उन्हीं देवानंद साहब की पुण्यतिथि है .आज से ठीक 14 साल पहले यानी 3 दिसंबर 2011 को उन्होंने अंतिम सांस ली थी. उनकी पुनीत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि 

सादर

सुधांशु

(समाचार माध्यम)

TRN LIVE: “आर्य बनाम द्रविड़” विभाजन कैसे गढ़ा गया ? 

एक और मनगढ़ंत कहानी की धज्जियाँ उड़ाई जाये ! 

मैक्स मूलर , मैकाले, नेहरू एंड कंपनी के फर्जीवाड़े को वैज्ञानिक रूप से समझें …

यह विभाजन भारतीय परंपरा में कभी था ही नहीं । अंग्रेज़ों के आने के पूर्व कहीं कोई उल्लेख नहीं है । एक भी उल्लेख नहीं । यह पूरी की पूरी एक कपोल कल्पना है , वैज्ञानिक, धार्मिक , सामाजिक रूप से इस गप्प को देखते हैं । 

भारत के किसी भी प्राचीन ग्रंथ वेद ( वेदों के शीर्ष भाग उपनिषद) किसी भी भाषा की रामायण , महाभारत , किसी भी पुराण अथवा तामिल संगम साहित्य में भी , 

कहीं भी “आर्य नस्ल बनाम द्रविड़ नस्ल” जैसा विचार विद्यमान ही नहीं है।

“आर्य” का अर्थ श्रेष्ठ आचरण वाला, सज्जन, उदार, शीलवान और “अनार्य” का अर्थ दुष्ट आचरण वाला ही माना गया है , सदैव से संपूर्ण भारतीय परंपरा में । 

अर्थात् आर्य एक नैतिक शब्द था, नस्ली नहीं।

दूसरी ओर “द्रविड़” शब्द संस्कृत के द्रविड़ / द्रमिल / तमिल से आया है । पुनः पढ़ें ( मेरे बड़े पिताजी स्वतंत्र भारत के सबसे पहले भाषा वैज्ञानिकों में से थे , द्रविड़ शब्द भी संस्कृत का है )

और यह भारत के दक्षिणी भाग भू-प्रदेश और भाषा-समूह का नाम है, यह किसी नस्ल का नहीं है जो मैकाले एंड कंपनी द्वारा गढ़ा गया । नेहरू रोमिला थापर द्वारा पोषित किया गया । 

भारत में यह विभाजन सांस्कृतिक या भाषाई विविधता था,

न कि अलग “जातियाँ” या “नस्लें”।

नस्लवाद और औपनिवेशिक मानसिकता का आधार कैसे बना इसे ध्यान से समझा जाये , 

19वीं सदी का यूरोप नस्लवाद से भरा था। बहुत कुछ आज भी है । उस समय यूरोपीय तथाकथित विद्वान मानवता को 3–4 नस्लों में बाँटते थे:

पहली Caucasian (सफेद)

दूसरी Mongoloid (पूर्वीय)

और तीसरी Negroid (अफ्रीकी)

भारत जैसी जटिल सभ्यता में उनका यह मॉडल फिट नहीं होता था, तो उन्होंने भारत को अपनी नस्ल-थ्योरी के अनुसार तोड़ना शुरू किया।

इसी से जन्म हुआ, “ आर्य = गोरे हमलावर” ( जो कि जेनेटिक थ्योरी से ग़लत सिद्ध हो चुका है । 

“द्रविड़ = काले मूल निवासी ( दक्षिणी और उत्तरी भारत की जेनेटिक समानता , वैज्ञानिक आधार पर इस असत्य सिद्ध कर रही हैं ।

तो , यह विभाजन भारतीय वास्तविकता पर नहीं, यह 

यूरोपीय नस्लवादी कपोल कल्पना पर आधारित था।

मैक्स मूलर और भाषाविज्ञान से कैसे शुरू हुआ यह भ्रम ? 

मैक्स मूलर ने इंडो-यूरोपियन भाषाओं का अध्ययन किया।

उन्होंने इंडो-आर्यन भाषा-समूह कहा जो एक भाषाई वर्गीकरण था।

लेकिन यूरोपीय विद्वानों ने इसे बना क्या बना दिया ? 

भाषा → नस्ल → आक्रमण ( इसके फर्जीवाड़े पर मैंने पूर्व में पोस्ट लिखा है उसे देख लें ) 

जबकि भाषा का फैलाव कई तरह होता है जैसे व्यापार, संस्कृति, प्रव्रजन, शिक्षा, विवाह अर्थात हर जगह आक्रमण नहीं होता। लेकिन युरोपियन को लड़ाई के अतिरिक्त न तब दिखता था न आज कुछ दिख रहा है ।

अर्थात् भाषा = नस्ल = आक्रमण , यह एक कुटिल औपनिवेशिक तर्क था, वैज्ञानिक नहीं। पुनः पढ़ें यह एक औपनिवेशिक सोच थी जिसका आज का विज्ञान खण्डन कर रहा है । 

पुनः कह रहा हूँ कि पुनः पढ़ें विज्ञान की हर धारा औपनिवेशिक तर्कों का खण्डन कर रही है । 

ब्रिटिश शासन ने “Divide and Rule” के लिए ही इसे प्रचारित किया और काले अंग्रेज़ों ने 1947 के बाद पोषित किया ।

क्योंकि ब्रिटिश नीति स्पष्ट थी कि भारत को बाँटो, जिससे कि वह दुर्बल हो जाए और इसलिए उन्होंने नकली मनगढ़ंत विभाजन बनाए:

आर्य बनाम द्रविड़

उत्तर बनाम दक्षिण ( जबकि हमारे लिये वह दिशा का सूचक है )

आर्य भाषा बनाम द्रविड़ भाषा

सभ्य आर्य बनाम असभ्य द्रविड़

ब्राह्मण बनाम शूद्र

ब्रिटिश प्रशासक रॉबर्ट काल्डवेल ने 1856 में पहली बार

“द्रविड़” को एक अलग नस्ल बताया, जो शोध से नहीं, राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित था।

और फूले पचके सकपाल इत्यादि निर्मित किये गये । 

स्कूल-कॉलेजों में यही सिद्धांत पढ़ाया गया ताकि भारतीय आपस में लड़ें

AIT (आर्यन इनवेज़न थ्योरी) और Dravidian-Race Theory दोनों को शिक्षा प्रणाली में शामिल किया गया।

नेहरू , रोमिला , गुहा ने मनगढ़ंत इतिहास लिखे ।

परंतु: आज , न पुरातत्व इसका समर्थन करता है, न DNA इसका समर्थन करता है , न प्राचीन साहित्य और न सांस्कृतिक निरंतरता के तथ्य । 

यह पूरी तरह यूरोप की काल्पनिक नस्ल-थ्योरी थी। मनगढ़ंत और विकृत भ्रम फैलाया गया । 

आधुनिक विज्ञान ने इन सिद्धांतों को गलत सिद्ध किया

आनुवंशिकी विज्ञान ( DNA) क्या कहती है ? 

उत्तर और दक्षिण भारतीयों का DNA अधिकतर समान

कोई “अलग नस्ल” नहीं

कोई “बाहरी आर्य” नहीं

कोई अचानक आनुवंशिक बदलाव नहीं

सब भारतीय एक ही प्राचीन मूल जनसंख्या के अंग

पुरातत्व विज्ञान क्या कहती है ? 

सिंधु , वैदिक संस्कृति में निरंतरता

किसी भी बाहरी आक्रमण का प्रमाण नहीं ( आक्रमण सातवीं सदी के बाद अरब से हुआ ) 

कोई जनसंख्या replacement नहीं

भाषाविज्ञान क्या कहता है ?

भाषाएँ अलग हो सकती हैं,

पर भाषाओं से नस्ल नहीं बनती। लगभग सभी भारतीय भाषाओं में अद्भुत समानताएं भी हैं । 

आज इतिहासकार क्या मानते हैं? ( वे इतिहासकार जिनमें थोड़ा बहुत सत्य कहने का साहस है । 

कि “ आर्य” एक सांस्कृतिक शब्द है 

कि द्रविड़” = भाषाई/भौगोलिक शब्द है 

कि नस्ल-आधारित विभाजन = औपनिवेशिक निर्माण 

कि भारत की सभ्यता = सतत, मिश्रित, साझा, प्राचीन विकास

अब इसे कहा जाता है कि शेयर की हुई सभ्यता—Shared Civilizational Heritage”

किसी एक समूह की देन नहीं।

संतों के आधार पर देखा जाये , 

आदि शंकराचार्य (केरल) दक्षिण भारत के विद्वान , संपूर्ण भारत में मठ स्थापित किए , श्रृंगेरी , बदरीनाथ, द्वारका और पुरी । भगवद्पाद के दर्शन “अद्वैत वेदांत” को भारत के उत्तरी भाग , दक्षिणी भाग , पूर्वी भाग और पश्चिमी भाग में समान रूप से अपनाया । उनके शिष्य पूरे भारत में फैले

यदि उत्तर–दक्षिण विभाजन होता तो यह संभव ही नहीं था।

रामानुजाचार्य (तमिलनाडु) , भगवान रामानुज , श्रीवैष्णव दर्शन के प्रवर्तक , उनके अनुयायी पूरे भारत में फैले

वेद, उपनिषद, भगवद्गीता , सभी को दक्षिणी भारत से समझाया और प्रतिष्ठित किया , 12 आलवारों की भक्ति को वैदिक दर्शन से जोड़ा

उनकी परंपरा दिखाती है कि पूरे भारत की आस्थाएँ एक-दूसरे की निरंतरता हैं, विरोध नहीं।

मध्वाचार्य (कर्नाटक) भगवान मध्व, द्वैत दर्शन के प्रवर्तक

वेदांत परंपरा को दक्षिणी भाग से उत्तरी भारत तक जोड़ने वाले आचार्य , बदरीनाथ तक यात्रा कर वेद-व्यास से दीक्षा लेने का वर्णन

नयनमार–आलवार संत ( तमिल भक्ति आंदोलन)

शिव और विष्णु की आराधना को वेदों और आगमों से जोड़ा

भक्ति-युग में उत्तर भारतीय आराध्यदेव , राम, कृष्ण, दक्षिणी भारत में उतनी ही श्रद्धा से प्रतिष्ठित हुए । इससे स्पष्ट है कि सांस्कृतिक एकता गहरी थी, नस्लीय विभाजन नहीं।

तिरुवल्लुवर (तिरुक्कुरल) उनका ग्रंथ नैतिकता, धर्म, न्याय, अहिंसा का सार्वभौमिक ग्रंथ है, पूरे भारत में सम्मानित और वेदांत और भारतीय दर्शन से सहज जुड़ाव

ऐसे सैकड़ों संतों का उदाहरण है , और हर सदी का है । 

यह सब एक ही बात सिद्ध करता है कि भारत एक संयुक्त सभ्यता है

यदि भारत में सचमुच “आर्य बनाम द्रविड़” जैसी नस्ली दुश्मनी होती , तो शंकर, रामानुज, बसवन्ना, माध्वाचार्य जैसी परंपराएँ पूरे भारत में क्यों फैलतीं?

दक्षिणी भाग के सुदूर मंदिर में गंगोत्री का जल और दक्षिणी भाग की सुपारी बदरीनाथ भगवान को अनादि काल से चढ़ती रही । 

भक्ति आंदोलन पूरे उपमहाद्वीप में एक जैसा कैसे हुआ?

देवी–देवता, दर्शन, कला, संगीत—सबमें समानता कैसे?

सच्चाई एक वाक्य में

भारत कभी आर्य बनाम द्रविड़ नहीं था।

यह विभाजन अंग्रेज़ों ने बनाया और विज्ञान ने उसे ख़ारिज कर दिया।

भारत एक ऐसी सभ्यता है

जहाँ उत्तर–दक्षिण–पूर्व–पश्चिम सब की सब दिशाओं का नाम है सब एक-दूसरे से हजारों वर्षों से जुड़े हुए हैं।

नमस्कार 

🙏🌷🙏

नारायण नारायण नारायण नारायण

Let yet another fabricated tale be torn to shreds!

How was the “Aryan vs Dravidian” division fabricated?

Let’s understand the fraud of Max Müller, Macaulay, Nehru & Company scientifically.

This division never existed in Indian tradition. There is no mention of it anywhere prior to the arrival of the British. Not a single mention. It is entirely imaginary—let’s examine this fiction scientifically, religiously, and socially.

In any of India’s ancient texts—Vedas (including the Upanishads), any language’s Ramayana, Mahabharata, any Purana, or even Tamil Sangam literature—nowhere is the idea of an “Aryan race vs Dravidian race” present.

“Arya” = One with noble conduct, gentleman, generous, virtuous

“Anarya” = One with wicked conduct

Arya was an ethical term, not racial.

On the other hand, the word “Dravida” comes from Sanskrit’s Dravida/Dramila/Tamil. Read again—my esteemed father was among independent India’s earliest linguists; the word Dravida is also from Sanskrit.

It is the name of a southern region and a language group in India—it is not a race, which was fabricated by Macaulay & Company.

In India, this division was one of cultural or linguistic diversity,

not separate “castes” or “races.”

Racism and Colonial Mentality: The Foundation Laid Here

19th-century Europe was steeped in racism—much of it persists today. European so-called scholars of that time divided humanity into 3–4 races: Caucasian (white), Mongoloid (eastern), Negroid (African).

Their model did not fit a complex civilisation like India, so they began breaking India according to their race theory.

This gave birth to:

“Aryans = fair-skinned invaders” (which has been genetically disproven)

“Dravidians = dark-skinned natives” (the genetic similarity between North and South India scientifically disproves this falsehood)

Thus, this division was not based on Indian reality—it was based on European racist fantasy.

The Confusion Began with Max Müller and Linguistics

Max Müller studied Indo-European languages.

He spoke of the Indo-Aryan language group—a linguistic classification.

But European scholars turned it into:

Language → Race → Invasion (I have previously written a post on this fraud; please refer to it)

Whereas languages spread in various ways—trade, culture, migration, education, marriage—invasion is not the only means. But Europeans then, as now, saw little beyond conflict.

Thus, Language = Race = Invasion was a cunning colonial argument, not scientific.

Read again: every branch of science refutes this colonial logic.

British Rule Propagated This for “Divide and Rule”

British policy was clear—divide India so it becomes weak, and so they created artificial, fabricated divisions:

Aryan vs Dravidian

North vs South (whereas for us, it is merely a directional indicator)

Aryan language vs Dravidian language

Civilised Aryans vs Uncivilised Dravidians

Brahmin vs Shudra

British administrator Robert Caldwell in 1856 first described “Dravidian” as a separate race—motivated not by research but political purpose.

And Phule, Savarkar were manufactured.

This theory was taught in schools and colleges so Indians would fight among themselves.

Both AIT (Aryan Invasion Theory) and Dravidian-Race Theory were included in the education system.

Nehru, Romila, Guha wrote fabricated history.

But today—neither archaeology supports it, nor DNA, nor ancient literature, nor the facts of cultural continuity.

It was entirely Europe’s imaginary race-theory. Fabricated and distorted confusion was spread.

Modern Science Has Proven These Theories Wrong

What does genetic science (DNA) say?

North and South Indians share mostly the same DNA

No “separate race”

No “external Aryans”

No sudden genetic change

All Indians belong to the same ancient ancestral population

What does archaeological science say?

Continuity between Indus and Vedic cultures

No evidence of any external invasion (invasions began after the 7th century from Arabia)

No population replacement

What does linguistics say?

Languages can be different,

but languages do not make races. Almost all Indian languages also have remarkable similarities.

What do historians believe today? (Those historians who have even a little courage to speak the truth.)

That “Arya” is a cultural term

That “Dravida” = a linguistic/geographical term

That race-based division = a colonial construct

That Indian civilisation = continuous, mixed, shared, ancient development

It is now termed “Shared Civilizational Heritage”—not the contribution of any one group.

If We Look at the Basis of Saints:

Adi Shankaracharya (Kerala)—a scholar from South India, established monasteries across India: Sringeri, Badrinath, Dwarka, Puri. The philosophy of Bhagavatpada, “Advaita Vedanta,” was equally adopted in North, South, East, and West India. His disciples spread throughout India.

If a North–South division existed, this would have been impossible.

Ramanujacharya (Tamil Nadu)—Lord Ramanuja, founder of Sri Vaishnava philosophy, his followers spread across India. He explained and established the Vedas, Upanishads, Bhagavad Gita from South India, connecting the devotion of the 12 Alvars with Vedic philosophy.

His tradition shows that the beliefs of all India are continuities of each other, not oppositions.

Madhvacharya (Karnataka)—Lord Madhva, founder of Dvaita philosophy. An acharya who connected the Vedanta tradition from the South to North India, described travelling to Badrinath to receive initiation from Veda Vyasa.

Nayanmars–Alvars saints (Tamil Bhakti movement)—connected the worship of Shiva and Vishnu with the Vedas and Agamas. In the Bhakti era, North Indian deities—Rama, Krishna—were revered with equal devotion in South India. This clearly shows deep cultural unity, not racial division.

Thiruvalluvar (Thirukkural)—his text is a universal scripture on ethics, dharma, justice, non-violence, respected across India and naturally connected with Vedanta and Indian philosophy.

There are examples of hundreds of such saints, from every century.

All this proves one thing—India is a united civilisation.

If there truly was racial enmity like “Aryan vs Dravidian” in India, why would traditions like Shankara, Ramanuja, Basavanna, Madhvacharya spread across India?

Why has water from Gangotri been offered in distant southern temples, and betel nut from the South offered to Lord Badrinath since time immemorial?

How did the Bhakti movement occur uniformly across the subcontinent?

How is there similarity in deities, philosophies, art, music?

The Truth in One Sentence

India was never Aryan vs Dravidian.

This division was created by the British, and science has rejected it.

India is a civilisation

where North–South–East–West are merely names of directions—all have been connected to each other for thousands of years.

 क्या न्यायपालिका पक्षपाती है❓❓

👉 क्योंकि मुस्लिम अपीजमेंट की इन्तहा को पार करते हुए राष्ट्रहित सर्वोपरी के सिद्धांत को धूल चाटते हुए बाबरी रोक फिर से वेस्ट बंगाल में शुरू कर दिया गया है। मुद्दा क्या है❓ 6 दिसंबर के ही के दिन, दिन देखिएगा, 6 दिसंबर ही के दिन फिर से एक मस्जिद का शिलान्यास होने जा रहा है वेस्ट बंगाल में, और उस मस्जिद का नाम है बाबरी मस्जिद। और क्लियरली कहा गया है कि #इट इज एन एग्जैक्ट रेप्लिका उस बाबरी मस्जिद का जो कि डेमोलिश की गई थी।

 तीसरा, ये कहां होने वाला है❓ ये होने वाला है सबसे डेलिकेट और #सेंसिटिव एरिया, वेस्ट बंगाल का जो है #मुर्शिदाबाद डिस्ट्रिक्ट। और मुर्शिदाबाद डिस्ट्रिक्ट वही है जिसपे 6 महीने पहले भी #कर्फ्यू जैसे हालात थे, राइट्स की सिचुएशन थी, कम्युनल डिसरस था बहुत ज्यादा। और वहां का भी जो सबसे ज्यादा कम्युनल इट एरिया है, वो है #बेलदाना एरिया जहां पे ये मस्जिद का शिलान्यास किया जा रहा है। अब आप सोच रहे होंगे, ऐसा काम कौन करेगा❓ और ये #प्लानिंग से काम करती है #दीदी, क्योंकि हम सबको मालूम है, उनको #राम_लला से कितना प्यार है। क्योंकि जैसे ही उनकी मीटिंग्स में ये जय श्री राम का नारा लगाया जाता है वो इसको अपना अपमान समझ लेती है उनके प्रवक्ता टीवी पे आते हैं तो जे एस आर बोलना शुरू कर देते हैं। जय श्री राम बोलने में भी उन्हें बुरा लगने लगता है। तो ऐसे में एक टीएमसी के एमएलए हैं, उनका नाम है #हुमायूं_कबीर। कितनी ज्यादा वो डिसिप्लिंड है, उसका अंदाजा इससे लगाइएगा, ऑलरेडी वो इस समय सस्पेंडेड है। 

 👉हुमायूं कबीर यह आवाहन करता है कि इसके अंदर मेरे 2000 से ज्यादा कार्यकर्ता सम्मिलित होंगे 40 कि.मी. रोड स्ट्रेच पे इसके जलूस निकाले जाएंगे और लाखों लोग इसमें सम्मिलित होंगे। हमारे आयोजन की तैयारी वहां पर विधिवत रूप से कई महीनों से की जा रही है और डेट रखी गई 6 दिसंबर नाम रखा गया बाबरी मस्जिद और एरिया रखा गया मुर्शिदाबाद.

 अभी क्या लगता है❓ ये सब इत्तेफाक तो नहीं हो सकता , इतना तो हम समझदार हैं वो सब समझते हैं कि ये सब फिर से कहीं ना कहीं जिस तरह से #हिंदू कंसोलिडेशन करने का प्रयास में लगे हुए हैं वोट बैंक का वैसे ही यहां पर #मुस्लिम_अपीजमेंट की इंतिहा पार करते हुए मुस्लिम कंसोलिडेशन का #ममता का यह प्रयास यहां पर दिखाई दे रहा है।

 👉 ठीक है, राजनीति करने का हक सबको है। लेकिन थोड़ा सा मन खट्टा कहां होता है जब ये #पिटीशन जाती है कोर्ट में। और कोर्ट में एक पिटीशन दायर की जाती है कि देखिएगा ये #जानबूझ के कम्युनल हारमनी को बिगाड़ने का प्रयास है। ये #लॉ_एंड_ऑर्डर सिचुएशन क्रिएट करने का जानबूझ के यहां पे एक प्रयास किया जा रहा है। 

क्यों❓

 ये जो एरिया है मुर्शिदाबाद आपके जिन लोगों को नहीं पता हो ऑलरेडी इस समय जब आप और मैं बात कर रहे हैं पिछले 6 महीने से 19 #कंपनीज_सेंट्रल_आर्मड_पुलिस_फोर्स की ऑलरेडी यहां पे लगाई हुई है #भारत_सरकार ने। इतना डिस्प्यूटेड है। 

 6 महीने से 19 कंपनियां वहां तैनात हैं। तब जाके यह हालात है कि #बीजेपी के सांसदों पे भी कैसे #जानलेवा_अटैक होते हैं। #खूनो_खून कर दिया जाता है। हमने सबने देखा है कि वहां की लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन कैसी है। और क्यों ना हो बाबरी मस्जिद का निर्माण खुद वहां की होम मिनिस्टर ममता दीदी जो ठहरी चीफ मिनिस्टर।

 अब रक्षक और भक्षक एक ही हो जाए, तो बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी। इसलिए 1 प्रतिशत कार्रवाई की गई #हाई_कोर्ट के अंदर, kolkata हाई कोर्ट के अंदर, कि लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन क्रिएट हो सकती है कि जानबूझ के शैतानी काम करने का प्रयास लग रहा है।

 तारीख देखिए, नाम देखिए, एरिया देखिए, #जानबूझ के सब यह प्लान है। आगे पीछे कभी भी बनाइए मस्जिद बनाने को किसने रोका है❓ यहां तो खुद #सुप्रीम_कोर्ट ने रामलला के समीप में वहां पर अयोध्या में इनको जगह दी है जब #उत्तर_प्रदेश में मस्जिद बनाने की जगह दी गई है तो बंगाल में जाके बनाने की क्या जरूरत है❓

 अयोध्या में ही बनाइए किसने रोका आपको❓ 

लेकिन शैतानी करने का प्रयास मत कीजिए। तो मालूम है आपको वही #हाई_कोर्ट जो इस तरह की #पिटीशंस पे कहता था हां लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन नहीं आनी चाहिए एक काम करो #राम_नवमी के जुलूस की तारीख बदल दो।

 चलो दूसरा काम करो #राम_नवमी के जुलूस का #रूट_बदल दो।

 चलो एक काम करो एक जुलूस को मुहर्रम के जुलूस निकाल लो और #राम_नवमी के जुलूस को ##शाम को निकाल लो। कुछ भी करके शांति के हालात बना लेना चाहिए। वो जो कहा करते थे। क्यों तुमने इस रूट से जुलूस निकाला जो तुम्हें पता था पहले ही कम्युनली सेंसिटिव❓ स्टेबिलिटी को मेंटेन करना हमारी जिम्मेदारी है और हम ये गारंटी देते हैं कि लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन किया जाएगा।

 क्यों❓ क्योंकि यहां पे मुस्लिम अपीज़मेंट नहीं करनी तो और क्या है❓ एक एक आप बड़े विसक। इसी परिस्थिति है में हिंदुस्तान में रहते हुए #हिंदू मेजॉरिटी को किस तरीके से #थेंगे पे रख दिया जाता है, हमारे #इमोशंस को, हमारे #सेंटीमेंट्स को किस तरीके से ये लोग कैसे एकदम जिसको बोलते हैं ना शेड ऑफ कर देते हैं बिना परवाह किए।

 कभी तो #दुर्गा की फोटो निकाली जाती है #बीड़ी_पीते हुए, कभी इस तरह के अपमानजनक स्टेटमेंट्स आते हैं।

 सब एकदम खामोश। सोचने की जरूरत तो जरूर है। शायद बहुत से लोग यह भी सोच रहे होंगे कि जब लॉ एंड ऑर्डर की इतनी बुरी हालत है तो फिर सेंट्रल गवर्नमेंट क्या कर रही है❓

 क्यों नहीं वहां प्रेसिडेंट रूल लगा दिया❓ 

क्यों नहीं वहां पे आप कुछ और स्ट्रिक्ट मेजर्स लेते❓

 तो ये सवाल तो बहुत से राष्ट्रभक्त सनातनियों के मन में है। लेकिन कहते हैं ना सही पॉलिटिशियन वो है जो गरम-गरम नहीं खाता, ठंडा करके खाता है। तो शायद #अमित_शाह जी भी कुछ ऐसे ही सही मौके की इंतजार में हैं, Mamata Banerjee का पाप का घड़ा शायद वो भर जाए, छलकने लगे तो शायद ऐसा भी जल्दी ही देखने को मिले। लेकिन कुल मिला के परिस्थिति जो है, वो अगर अभी नहीं तो शायद वेस्ट बंगाल में हिंदुओं के रहने की वाली परिस्थिति धीरे-धीरे #कम करने का जो प्रयास है.

 टीएमसी सरकार का हिंदू सनातनियों के पलायन कराने का जो प्रयास है, कहीं वो सफल नहीं हो जाए ऐसा मुझे लगता है .

#चीफ_मिनिस्टर_इन_शैडोज, जो उनके राइट हैंड मैन है❓ वो एक #कट्टर_शरिया_फॉलोवर_इस्लामिक_आदमी है।

और उसके बाद बाबरी मस्जिद का नाम है तो कम्युनल टेंशन बढ़ाने की बात नहीं है तो और क्या है❓ आप क्या चाहते हैं? वहां पे मुर्शिदाबाद की बात होती है, मुर्शिदाबाद इन फैक्ट पूरे वेस्ट बंगाल में कम से कम 2500 लोगों की लाश मिली है पिछले 6 महीने के अंदर।

लोग कहते हैं राष्ट्रपति शासन लगाओ, राष्ट्रपति शासन लगाओ। 

वास्तव में वे क्या करना चाहते हैं

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PM  कानून अंधा ही नहीं बल्कि बहरा और गूंगा भी हो चुका है. मामला ये है कि एक महिला अपनी सास की हत्या कर देती है लोहे की रॉड मार मार कर। और बाद में उसको 2 साल तक जेल में रखा जाता है फिर उसको जमानत मिल जाती है। वो जब गिरफ्तार होती है तो उस समय वो गर्भवती होती है और उसके बाद वो जेल के अंदर ही एक बच्चे को जन्म देती है। उसकी इन हरकतों से परेशान होकर उसका पति फैमिली कोर्ट में डायवोर्स की याचिका लगाता है और बाद में उसको डायवोर्स मिल भी जाता है। लेकिन फैमिली कोर्ट का जो फैसला है उसे आप सुनेंगे तो आप भी चौंक जाएंगे।

 फैमिली कोर्ट महिला के लिए ₹45 लाख देने का पति को आदेश देती है उसके और इसी बात से ये जो पति है, वो हाई कोर्ट पहुंचता है और हाई कोर्ट में याचिका लगाता है कि जिस महिला ने #क्रूरता_पूर्वक मेरी मां की हत्या कर दी, मैं उसको ₹45 लाख क्यों दूं❓

 साफ तौर पर यह सही सवाल है, नैतिकता का प्रश्न है और प्रश्न यह भी है कि जो एक अपराधी है, अदालत कैसे उसको ₹45 लाख का इनाम देने की बात कर सकती है। साफ तौर पर यह तो उसे महिला के लिए इनाम है, इस तरह से । उस महिला ने अपने पति से झगड़ा किया, अपने सास से झगड़ा किया और उस झगड़े के दौरान उसने लोहे की रोड मारकर अपनी सास की हत्या कर दी। इस हत्या के लिए उसे सजा मिलनी चाहिए या फिर ₹45 लाख का इनाम मिलना चाहिए। ये इस अंधे कानून को चलाने वाले क्यों नहीं समझ पाते हैं❓

 हाई कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए साफ तौर पर उस आदेश पर रोक लगा दी है। इसकी सुनवाई की तारीख बढ़ा दी गई है जनवरी तक के लिए और तब तक के लिए यह कह दिया है कि उस आदेश इस महिला को कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। इस महिला के पति को। 

अब आप सोचिए कि जो महिला है जिसने अपनी सास की हत्या की है और हत्या का मामला उस पर चल रहा है उसको जमानत मिली हुई है और उस केस में ये पूरी तरीके से अपराधी भी साबित हो रही है तो फिर कोर्ट इस तरीके के आदेश कैसे दे सकता है❓ 

इसके पीछे वजह यह है कि हमारे देश में जो कानून बनते हैं, वह कितना भी दिमाग लगाकर बना लिए जाए, कितने भी डिस्कशंस के बाद बना लिए जाए, लेकिन जो वकीलों की एक जाति इस देश में अंग्रेज पैदा कर गए हैं। ये उन कानूनों में कुछ ना कुछ ऐसा ढूंढ लेती है जो पैसे लेकर अपने क्लाइंट के पक्ष में जजों से फैसले आसानी से करा लेती है। अब इसके

 अब इसके पीछे उनके दाव पेंच भी होते हैं और कहीं-कहीं तो साफ तौर पर लेनदेन भी होता है। जैसे अभी पिछले दिनों 1 साल पहले करीब एक व्यक्ति ने आत्महत्या की थी और उसने भी ये खुलासा किया था कि जो फैमिली कोर्ट जज थी, ₹500000 की डिमांड व्यक्ति से करती है और न देने पर उसकी पत्नी के पक्ष में वो खड़ी होती दिखाई दे रही थी जिसके बाद उस व्यक्ति ने #आत्महत्या कर दी थी। जो अदालतें है उनमें न केवल वकील ये सब करते हैं पैसे के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं, बल्कि इन अदालतों में जो जज बैठते हैं वो भी बेईमानी भ्रष्टाचार करने से बिल्कुल नहीं डरते हैं। इसके पीछे वजह क्या है❓

 वजह साफ तौर पर यही है कि इन जजों को किसी भी तरीके का कानून का या सजा का भय नहीं है। हमारे देश में कोई भी जज चाहे मुंसिफ की अदालत का हो या सुप्रीम कोर्ट का हो वो कोई भी किसी भी तरीके का उन जनून फैसला दे देता है तब भी उसके खिलाफ उसके फैसले को लेकर, ना तो कोई कारवाई होती है ना ही उसको सजा मिलती है। आप इसको छोटे केस से लेकर बड़े केस तक समझ सकते हैं। 

निचली अदालतों के हजारों केस रोजाना सुप्रीम कोर्ट में आते हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में टिप्पणी करता है और यह कहता है कि ये जज कर क्या रहे हैं। और इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने एक नियम बनाया कि जो मुंसिफ या जो लोअर जजों की भर्ती के डिस्कशंस पे बात बना ली जाए, लेकिन जो वकीलों की एक जाति हमारे देश में अंग्रेज पैदा कर गए हैं। ये उन कानूनों में कुछ ना कुछ ऐसा ढूंढ लेती है जो पैसे लेकर अपने क्लाइंट के पक्ष में जजों से फैसले आसानी से करा लेती है। अब इसके पीछे उनके दाव पेंच भी होते हैं और कहीं-कहीं तो साफ तौर पर #लेनदेन भी होता है। जैसे अभी पिछले दिनों 1 साल पहले करीब एक व्यक्ति ने #आत्महत्या की थी और उसने भी ये खुलासा किया था कि जो #जजस थी, उसके फैमिली कोर्ट की, उसमें साफ तौर पर ₹5 लाख भी रिश्वत(Bribe ) की मांगकर उस व्यक्ति से और उसकी पत्नी के पक्ष में वो खड़ी होती दिखाई दे रही थी जिसके बाद उस व्यक्ति ने #आत्महत्या कर दी थी। इन अदालतों में जो जज बैठते हैं वो भी बेईमानी भ्रष्टाचार करने से बिल्कुल नहीं डरते हैं। इसके पीछे वजह क्या है❓ वजह साफ तौर पर यही है कि इन जजों को किसी भी तरीके का #कानून या सजा का #भय नहीं है। हमारे देश में कोई भी #जज चाहे मुंसिफ की अदालत का हो या #सुप्रीम_कोर्ट का हो वो कोई भी किसी भी तरीके का उल जलूल फैसला दे देता है तब भी उसके खिलाफ उसके फैसले को लेकर, ना तो कोई कारवाई होती है ना ही उसको सजा मिलती है। आप इसको छोटे केस से लेकर बड़े केस तक समझ सकते हैं।

 निचली अदालतों के हजारों केस रोजाना सुप्रीम कोर्ट में आते हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में टिप्पणी करता है और यह कहता है कि ये जज कर क्या रहे हैं। और इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने एक नियम बनाया कि जो मुंसिफ या जो लोअर जजों की भर्ती के लिए कम से कम 3 साल का वकालत का एक्सपीरियंस होना चाहिए। अब उन्हें लगा कि शायद एक्सपीरियंस वकालत का होगा तो वो कुछ अच्छे जजमेंट देंगे। लेकिन इसकी वजह कुछ दूसरी।। लेकिन इसकी वजह कुछ दूसरी।

वजह यह है कि चूंकि सभी जो लोग जज बनते हैं उनमें से ज्यादातर ईमानदार होते हैं। लेकिन जो बेईमानी करने के मूड से बैठे होते हैं उनको यह पता होता है कि भारत के अंदर किसी भी बेईमान भ्रष्टाचारी अपराधी को सजा नहीं होती है। 

फिर सजा का कोई प्रावधान है ही नहीं। क्योंकि जज के किसी भी फैसले में अगर वह गलत भी पाया जाता है उसको ऊपरी अदालत पलट भी देती है। तब भी उस गलती के लिए जज के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। और फिर चाहे वो जज मुंसिफ अदालत का हो या फिर #जेबी_पारदीवाला की तरह सुप्रीम कोर्ट का जज ही क्यों ना हो। आपको याद होगा कि पिछले 6 #महीने के दौरान जेबी पारदीवाला के तमाम ऐसे फैसले आए हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई ने या फिर जो बड़ी बेंचेस ने #खारिज किया है और सुप्रीम कोर्ट ने उसके बावजूद पारदीवाला के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा गया है। यही हाल हाई कोर्ट के जजों का होता है और यही वजह है कि ये जो #जज होते हैं पैसा लेने में, रिश्वत लेने में बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाते हैं। वो जानते हैं कि अगर हमने एक फैसला दे दिया और उससे मोटी कमाई कर ली तो बाद में हमारा फैसला अगर #गलत साबित भी हो गया तब भी हमारे खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा। एक बड़ा उदाहरण #अरविंद_केजरीवाल के केस में भी है। अरविंद केजरीवाल का जब मामला स्पेशल कोर्ट में चल रहा था तो बार-बार स्पेशल कोर्ट की जो जज थी वो केजरीवाल को जमानत से मना कर रही थी और वो साफ कर चुकी थी कि इसमें केजरीवाल और उसके गिरोह के बाकी सदस्यों का पूरा #इन्वॉल्वमेंट दिखता है। लेकिन वेकेशन बेंच में एक #न्याय_बिंदु नाम की जज आती है और अभिषेक मनु सिंहवी के प्रभाव में आकर वो केजरीवाल को #रेगुलर_बेल दे देती है। और बेल देते हुए वो ये भी कहती है कि इस केस की जो फाइल है बहुत मोटी है। मेरे पास उसको पढ़ने का समय नहीं है और वो फिर एक विदेशी थिंकर का एक कोट सामने रखती है कि चाहे 100 गुनेगार छूट जाए पर एक बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिए और यह कहते हुए उस न्याय बिंदु नाम की जज ने अन्याय के बिंदु पर पहुंचते हुए केजरीवाल को जमानत दे दी। बाद में हाई कोर्ट में जब मामला गया हाई कोर्ट की बेंच में साफ तौर पर यह पाया कि जो जज थी जो वेकेशन बेंच को हेड कर रही थी उसने जो फैसला लिया था वो #फैसला_गलत था वो जज द्वारा दिया गया बेल का फैसला पूरी तरीके से कानूनी तौर पर गलत है। लेकिन क्या न्याय बिंदु के खिलाफ कोई कार्यवाही हुई❓ बिल्कुल, तो सवाल है कि न्याय में देरी ने यह अन्याय का काम कैसे किया❓ तो इसके पीछे साफ तौर पर रिश्वत हो सकती है, बहुत मोटी रिश्वत हो सकती है। क्योंकि ""कोई भी व्यक्ति इस तरीके के फैसले बिना किसी लालच के नहीं दे सकता।""

   आज आप लोग न्याय बिंदु का नाम कहीं भी नहीं देख रहे होंगे, कोई #कार्यवाही न्याय बिंदु के खिलाफ नहीं हुई है लेकिन उसने फैसला ले लिया और उसके बदले में उसको क्या मिला था❓ ये तो #केजरीवाल_अभिषेक_मनु_सिंघवी या #न्याय_बिंदु ही जानते हैं।

 ये एक उदाहरण है। कि किस तरीके से जज मनमानी करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि वो कुछ भी करेंगे तो कोई भी उनका बाल बांका नहीं कर सकता है। अब जो डिस्ट्रिक्ट लेवल के जज होते हैं उनके खिलाफ हाई कोर्ट कार्रवाही कर सकता है लेकिन देखने में ये आता है कि कार्रवाही के नाम पर कुछ भी नहीं होता है। और हाई कोर्ट के जो सुप्रीम कोर्ट के जजों को तो सुप्रीम कोर्ट की प्रेसिडेंस ने पूरी तरीके से किसी भी कार्यवाही से मुक्त कर दिया है। 

यह 90 के दशक का सुप्रीम कोर्ट का फैसला है। जिसमें उन्होंने कहा था कि ""जो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज होंगे, उनके खिलाफ किसी भी अपराध के लिए न तो एफआईआर हो सकती है, न ही भारत की कोई एजेंसी उनके खिलाफ जांच कर सकती है। जब तक के भारत का सीजेआई उसकी इजाजत न दे दे।"" और आज तक एक से एक जघन्य मामला सामने आने के बावजूद, भारत के किसी भी सीजेआई ने किसी भी हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के जज के #खिलाफ एफआईआर की परमिशन नहीं दी है। #यशवंत_वर्मा का केस तो आप सबके सामने है जो करीब 8 महीना सुनने की परमिशन की राह देख रहा है और उसपे 2-3 बार सुप्रीम कोर्ट में #पीआईएल बार-बार खारिज हो चुकी है।

  सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल इसमें एक चीज और जोड़ी कि जो जज है वो हाई कोर्ट में 2 तरीके के जज होते हैं एक एडिशनल या एडहॉक जज होते हैं जो 2 साल के लिए रखे जाते हैं बार-बार प्रोवाइज किए जाते हैं इस प्रोवाइज में जज होते हैं। तो सुप्रीम कोर्ट ने ये क्लियर कर दिया है कि एडिशनल जज के मामले में भी ये #रूल लागू होगा। यानी कि कोई व्यक्ति मतलब अस्थाई तौर पर भी हाई कोर्ट का जज नियुक्त हुआ है तो फिर उसके खिलाफ ना कोई एफआईआर हो सकती है ना जांच हो सकती है।

 अब आप सोचिए कि जब कानून का भय ही नहीं होगा तो फिर कोई व्यक्ति अपराध करने से या बेईमानी करने से क रस्ते लेने से क्यों डरेंगा❓ क्योंकि ये मानवीय स्वभाव है। या तो मानव जो व्यक्ति होता है वो #भय से कुछ काम करता है, या किसी #लालच_वश करता है। एक तीसरा फैक्टर और होता है, जो आज के जमाने में बिल्कुल नहीं दिखता और तीसरा फैक्टर है नीति या धर्म यानी कि आपका दायित्व आ रहा है। लेकिन जजों के मामले में यह #डर_बिल्कुल_खत्म हो चुका है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का तो उन्हें बता ही दिया और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जजों को भी पता है कि हाई कोर्ट उनके खिलाफ एक्शन ले सकता है। लेकिन चूंकि हाई कोर्ट में भी उनके #भाई-बंद ही बैठे हुए हैं तो फिर वो भी उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेने वाले हैं।

 यही वजह है कि इस तरीके के फैसले आते हैं कि एक #कातिल को भी अदालत ये आदेश दे देती है कि 45 लाख का इनाम दिया जाए। हालांकि अभी इस इनाम की जो राशि दिए जाने पर रोक लगा दी है हाई कोर्ट ने. हाई कोर्ट इसकी सुनवाई जनवरी में करेगा। 

  देश के अंदर जो कानून चल रहा है, कानून को किस तरीके से मिसइंटरप्रेट करके वकील और जज गुनहगारों को सजा देने की बजाय बेगुनाहों को बचाने और उनको इनाम देने का काम कर रहे हैं। यह आप सबके सामने है। यह अब जनता के अधिकार क्षेत्र में है कि वो इसके खिलाफ आवाज उठाएं और इस अंधे कानून का जो राज चल रहा है, इसको जल्द से जल्द खत्म करने की दिशा में कुछ कदम उठाएं।

TRNLIVE: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने पाकिस्तान पर अमेरिका के ट्रंप प्रशासन के रुख की कड़ी आलोचना की है। *रुबिन ने कहा कि* इस्लामाबाद से रिश्ते रखने के पीछे कोई तर्क नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान के नए बने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) फील्ड मार्शल असीम मुनीर के जून में वॉइट हाउस दौरे को लेकर भी ऐतराज जताया है कि *असीम मुनीर को अमेरिका आने पर सम्मान देने के बजाय गिरफ्तार कर लेना चाहिए।*✅✅💪 समाचार एजेंस ANI से बात करते हुए रुबिन ने पाकिस्तान को आतंक को पोषित करने वाला देश घोषित कर देना चाहिए👍

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 *आपकी बातों से मैं🙋‍♂️ बिल्कुल भी सहमत हूं*💪 और यह कहना चाहूंगा की यह वही मुनीर है जिसने एक समय के *पाकिस्तान के गौरव शमा वर्ल्ड कप जीतने वाले क्रिकेटर इमरान खान जो भूतकाल में देश का वडा प्रधान रह चुका है* उसको अपनी कठपुतली की तरह नचाकर भारत से दुश्मनावट करने का प्रयास किया😡 किंतु जब इमरान खान को सब पता चला तो वह उसके आधीन नहीं हुए और अपना रुख मोड़ दिया 💪जिसके कारण आज यही *आतंकवादी मुनीर इमरान खान के साथ जो की भूतपूर्व बड़ा प्रधान रह चुका है किस प्रकार का व्यवहार कर रहा है पूरी दुनिया देख रही है* मुझे🙋‍♂️ तो आश्चर्य यह हो रहा है कि यह इतना सब होने के बावजूद भी *आतंकवादी मुनीर तो ठीक है किंतु वहां का वड़ा प्रधान एवं राष्ट्रपति भी मुनीर को समर्थन दे रहे हैं* 😳🤔 

*मैं🙋‍♂️ तो बहुत आश्चर्य चकित हूं कि वहां की सुप्रीम कोर्ट आंखें मूंदकर कैसे खड़ी रह सकती है❓❓❓❓❓🤔 पूरी स्थिति को देखकर लोकशाही हनन हो रहा है तो स्वत: संज्ञान नहीं ले सकते❓🤔 कोर्ट के आदेश के बावजूद भी इमरान खान को उनके परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा है और पागल घोषित करने के पैतरे वहां का पुलिस प्रशासन/जेल प्रशासन/मुनीर की सेना रच रहे हैं😡*

TRN LIVE: कामदेव के तेरह तथ्य .... 

   

हिन्दू धर्म में कामदेव, कामसूत्र, कामशास्त्र और चार पुरुषर्थों में से एक काम की बहुत चर्चा होती है। खजुराहो में कामसूत्र से संबंधित कई मूर्तियां हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या काम का अर्थ सेक्स ही होता है? नहीं, काम का अर्थ होता है कार्य, कामना और कामेच्छा से। वह सारे कार्य जिससे जीवन आनंददायक, सुखी, शुभ और सुंदर बनता है काम के अंतर्गत ही आते हैं। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।

आपने कामदेव के बारे में सुना या पढ़ा होगा। पौराणिक काल की कई कहानियों में कामदेव का उल्लेख मिलता है। जितनी भी कहानियों में कामदेव के बारे में जहां कहीं भी उल्लेख हुआ है, उन्हें पढ़कर एक बात जो समझ में आती है वह यह कि कि कामदेव का संबंध प्रेम और कामेच्छा से है।

लेकिन असल में कामदेव हैं कौन? क्या वह एक काल्पनिक भाव है जो देव और ऋषियों को सताता रहता था या कि वह भी किसी देवता की तरह एक देवता थे?आजो जानते हैं कामदेव के बारे में 13 रहस्य...

कामदेव का परिवार :पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र हैं। उनका विवाह रति नाम की देवी से हुआ था, जो प्रेम और आकर्षण की देवी मानी जाती है। कुछ कथाओं में यह भी उल्लिखित है कि कामदेव स्वयं ब्रह्माजी के पुत्र हैं और इनका संबंध भगवान शिव से भी है। कुछ जगह पर धर्म की पत्नी श्रद्धा से इनका आविर्भाव हुआ माना जाता है।

प्रेम के देवता :जिस तरह पश्चिमी देशों में क्यूपिड और यूनानी देशों में इरोस को प्रेम का प्रतीक माना जाता है, उसी तरह हिन्दू धर्मग्रंथों में कामदेव को प्रेम और आकर्षण का देवता कहा जाता है। 

कामदेव के अन्य नाम: 'रागवृंत', 'अनंग', 'कंदर्प', 'मनमथ', 'मनसिजा', 'मदन', 'रतिकांत', 'पुष्पवान' तथा 'पुष्पधंव' आदि कामदेव के प्रसिद्ध नाम हैं। कामदेव को अर्धदेव या गंधर्व भी कहा जाता है, जो स्वर्ग के वासियों में कामेच्छा उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी हैं। कहीं-कहीं कामदेव को यक्ष की संज्ञा भी दी गई है।

कामदेव का स्वरूप :कामदेव को सुनहरे पंखों से युक्त एक सुंदर नवयुवक की तरह प्रदर्शित किया गया है जिनके हाथ में धनुष और बाण हैं। ये तोते के रथ पर मकर (एक प्रकार की मछली) के चिह्न से अंकित लाल ध्वजा लगाकर विचरण करते हैं। वैसे कुछ शास्त्रों में हाथी पर बैठे हुए भी बताया गया है।

कामदेव के धनुष और बाण :उनका धनुष मिठास से भरे गन्ने का बना होता है जिसमें मधुमक्खियों के शहद की रस्सी लगी है। उनके धनुष का बाण अशोक के पेड़ के महकते फूलों के अलावा सफेद, नीले कमल, चमेली और आम के पेड़ पर लगने वाले फूलों से बने होते हैं।

 

कामदेव के पास मुख्यत:5 प्रकार के बाण हैं।कामदेव के 5 बाणों के नाम :1. मारण, 2. स्तम्भन, 3. जृम्भन, 4. शोषण, 5. उम्मादन (मन्मन्थ)।

मदन-कामदेव मंदिर :मदन-कामदेव मंदिर को 'असम का खजुराहो' के नाम से जाना जाता है। वहां की मैथुन-प्रतिमाएं मध्यप्रदेश के खजुराहो की याद दिलाती हैं। सेक्स के देवता कामदेव और उनकी पत्नी रति की कथा को आज भी ये जीवंत बना रही हैं। यह मंदिर घने जंगलों के भीतर पेड़ों से छुपा हुआ है। कहते हैं कि भगवान शंकर द्वारा तृतीय नेत्र खोलने पर भस्म हो गए कामदेव का इस स्थान पर पुनर्जन्म तथा उनकी पत्नी रति के साथ पुन: मिलन हुआ था।

कामदेव की ऋतु वसंत :वसंत पंचमी के दिन कामदेव की पूजा की जाती है। वसंत कामदेव का मित्र है इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। इस धनुष की कमान स्वरविहीन होती है यानी जब कामदेव जब कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है। 

कामदेव का एक नाम 'अनंग' है यानी बिना शरीर के ये प्राणियों में बसते हैं। एक नाम 'मार' है यानी यह इतने मारक हैं कि इनके बाणों का कोई कवच नहीं है। वसंत ऋतु को प्रेम की ही ऋतु माना जाता रहा है। इसमें फूलों के बाणों से आहत हृदय प्रेम से सराबोर हो जाता है।

यहां रहता है कामदेव का वास :

यौवनं स्त्री च पुष्पाणि सुवासानि महामते:।

गानं मधुरश्चैव मृदुलाण्डजशब्दक:।।

उद्यानानि वसन्तश्च सुवासाश्चन्दनादय:।

सङ्गो विषयसक्तानां नराणां गुह्यदर्शनम्।।

वायुर्मद: सुवासश्र्च वस्त्राण्यपि नवानि वै।

भूषणादिकमेवं ते देहा नाना कृता मया।।

मुद्गल पुराण के अनुसार कामदेव का वास यौवन, स्त्री, सुंदर फूल, गीत, पराग कण या फूलों का रस, पक्षियों की मीठी आवाज, सुंदर बाग-बगीचों, वसंत ऋ‍तु, चंदन, काम-वासनाओं में लिप्त मनुष्य की संगति, छुपे अंग, सुहानी और मंद हवा, रहने के सुंदर स्थान, आकर्षक वस्त्र और सुंदर आभूषण धारण किए शरीरों में रहता है। इसके अलावा कामदेव स्त्रियों के शरीर में भी वास करते हैं, खासतौर पर स्त्रियों के नयन, ललाट, भौंह और होठों पर इनका प्रभाव काफी रहता है।

1.कामदेव और शिव :जब भगवान शिव की पत्नी सती ने पति के अपमान से आहत और पिता के व्यवहार से क्रोधित होकर यज्ञ की अग्नि में आत्मदाह कर लिया था तब सती ने ही बाद में पार्वती के रूप में जन्म लिया। सती की मृत्यु के पश्चात भगवान शिव संसार के सभी बंधनों को तोड़कर, मोह-माया को पीछे छोड़कर तप में लीन हो गए। वे आंखें खोल ही नहीं रहे थे।

 

ऐसे में सभी देवों की अनुशंसा पर कामदेव ने उन पर अपना बाण चलाकर शिव के भीतर देवी पार्वती के लिए आकर्षण विकसित किया। शिव ने क्रोधित होकर जब आंखें खोलीं तो उससे कामदेव भस्म हो गए। हालांकि बाद में शिवजी ने उन्हें जीवनदान दे दिया था, लेकिन बगैर देह के।

श्रीकृष्ण और कामदेव :पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को भी कामदेव ने अपने नियंत्रण में लाने का प्रयास किया था। कामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण से यह शर्त लगाई कि वे उन्हें भी स्वर्ग की अप्सराओं से भी सुंदर गोपियों के प्रति आसक्त कर देंगे। श्रीकृष्ण ने कामदेव की सभी शर्त स्वीकार की और गोपियों संग रास भी रचाया लेकिन फिर भी उनके मन के भीतर एक भी क्षण के लिए वासना ने घर नहीं किया। 

रति ने पाला कामदेव को पुत्र की तरह फिर उनसे कर लिया विवाह :जब शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया तब ये देख रति विलाप करने लगी तब जाकर शिव ने कामदेव के पुनः कृष्ण के पुत्र रूप में धरती पर जन्म लेने की बात बताई। शिव के कहे अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि को प्रद्युम्न नाम का पुत्र हुआ, जो कि कामदेव का ही अवतार था।

कहते हैं कि श्रीकृष्ण से दुश्मनी के चलते राक्षस शंभरासुर नवराज प्रद्युम्न का अपहरण करके ले गया और उसे समुद्र में फेंक आया। उस शिशु को एक मछली ने निगल लिया और वो मछली मछुआरों द्वारा पकड़ी जाने के बाद शंभरासुर के रसोई घर में ही पहुंच गई।

 

तब रति रसोई में काम करने वाली मायावती नाम की एक स्त्री का रूप धारण करके रसोईघर में पहुंच गई। वहां आई मछली को उसने ही काटा और उसमें से निकले बच्चे को मां के समान पाला-पोसा। जब वो बच्चा युवा हुआ तो उसे पूर्व जन्म की सारी याद दिलाई गई। इतना ही नहीं, सारी कलाएं भी सिखाईं तब प्रद्युम्न ने शंभरासुर का वध किया और फिर मायावती को ही अपनी पत्नी रूप में द्वारका ले आए। 

भगवान ब्रह्मा ने दिया वरदान: पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय ब्रह्माजी प्रजा वृद्धि की कामना से ध्यानमग्न थे। उसी समय उनके अंश से तेजस्वी पुत्र काम उत्पन्न हुआ और कहने लगा कि मेरे लिए क्या आज्ञा है? तब ब्रह्माजी बोले कि मैंने सृष्टि उत्पन्न करने के लिए प्रजापतियों को उत्पन्न किया था किंतु वे सृष्टि रचना में समर्थ नहीं हुए इसलिए मैं तुम्हें इस कार्य की आज्ञा देता हूं। यह सुन कामदेव वहां से विदा होकर अदृश्य हो गए। 

यह देख ब्रह्माजी क्रोधित हुए और शाप दे दिया कि तुमने मेरा वचन नहीं माना इसलिए तुम्हारा जल्दी ही नाश हो जाएगा। शाप सुनकर कामदेव भयभीत हो गए और हाथ जोड़कर ब्रह्माजी के समक्ष क्षमा मांगने लगे। कामदेव की अनुनय-विनय से ब्रह्माजी प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि मैं तुम्हें रहने के लिए 12 स्थान देता हूं- स्त्रियों के कटाक्ष, केश राशि, जंघा, वक्ष, नाभि, जंघमूल, अधर, कोयल की कूक, चांदनी, वर्षाकाल, चैत्र और वैशाख महीना। इस प्रकार कहकर ब्रह्माजी ने कामदेव को पुष्प का धनुष और 5 बाण देकर विदा कर दिया।

 

ब्रह्माजी से मिले वरदान की सहायता से कामदेव तीनों लोकों में भ्रमण करने लगे और भूत, पिशाच, गंधर्व, यक्ष सभी को काम ने अपने वशीभूत कर लिया। फिर मछली का ध्वज लगाकर कामदेव अपनी पत्नी रति के साथ संसार के सभी प्राणियों को अपने वशीभूत करने बढ़े। इसी क्रम में वे शिवजी के पास पहुंचे। भगवान शिव तब तपस्या में लीन थे तभी कामदेव छोटे से जंतु का सूक्ष्म रूप लेकर कर्ण के छिद्र से भगवान शिव के शरीर में प्रवेश कर गए। इससे शिवजी का मन चंचल हो गया। 

 

उन्होंने विचार धारण कर चित्त में देखा कि कामदेव उनके शरीर में स्थित है। इतने में ही इच्छा शरीर धारण करने वाले कामदेव भगवान शिव के शरीर से बाहर आ गए और आम के एक वृक्ष के नीचे जाकर खड़े हो गए। फिर उन्होंने शिवजी पर मोहन नामक बाण छोड़ा, जो शिवजी के हृदय पर जाकर लगा। इससे क्रोधित हो शिवजी ने अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से उन्हें भस्म कर दिया।

 

कामदेव को जलता देख उनकी पत्नी रति विलाप करने लगी। तभी आकाशवाणी हुई जिसमें रति को रुदन न करने और भगवान शिव की आराधना करने को कहा गया। फिर रति ने श्रद्धापूर्वक भगवान शंकर की प्रार्थना की। 

 

रति की प्रार्थना से प्रसन्न हो शिवजी ने कहा कि कामदेव ने मेरे मन को विचलित किया था इसलिए मैंने इन्हें भस्म कर दिया। अब अगर ये अनंग रूप में महाकाल वन में जाकर शिवलिंग की आराधना करेंगे तो इनका उद्धार होगा। 

 

तब कामदेव महाकाल वन आए और उन्होंने पूर्ण भक्तिभाव से शिवलिंग की उपासना की। उपासना के फलस्वरूप शिवजी ने प्रसन्न होकर कहा कि तुम अनंग, शरीर के बिन रहकर भी समर्थ रहोगे। कृष्णावतार के समय तुम रुक्मणि के गर्भ से जन्म लोगे और तुम्हारा नाम प्रद्युम्न होगा।

कामदेव मंत्र :कामदेव के बाण ही नहीं, उनका 'क्लीं मंत्र' भी विपरीत लिंग के व्यक्ति को आकर्षित करता है। कामदेव के इस मंत्र का नित्य दिन जाप करने से न सिर्फ आपका साथी आपके प्रति शारीरिक रूप से आकर्षित होगा बल्कि आपकी प्रशंसा करने के साथ-साथ वह आपको अपनी प्राथमिकता भी बना लेगा। 

कहा जाता है कि प्राचीनकाल में वेश्याएं और नर्तकियां भी इस मंत्र का जाप करती थीं, क्योंकि वे अपने प्रशंसकों के आकर्षण को खोना नहीं चाहती थीं। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र का लगातार जाप करते रहने की वजह से उनका आकर्षण, सौंदर्य और कांति बरकरार रहती थी।

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TRN: _*“मैकाले की फाइल — 190 साल पुराना रहस्य”*_

_अयोध्या में धर्म-ध्वजा की सुबह…_

_भीड़ श्वास रोककर खड़ी थी।_

_*प्रधानमंत्री जैसे ही मंच पर पहुँचे*_

_हवा में एक अजीब सा कंपन उठा।_

_उन्होंने जो शब्द बोले…_

_वो किसी मंत्र की तरह सीधे इतिहास के सबसे अंधेरे कमरे का ताला तोड़ गए—_

_*“190 साल पहले, 1835 में… एक अंग्रेज़ ने भारत की आत्मा को चोट पहुँचा दी थी।”*_

_भीड़ स्तब्ध थी।_

_नाम आया—_

_*“मैकाले।”*_

_और उसी पल…_

_सदियों पुरानी एक फाइल खुली।_

_*फाइल नं. 27 — ‘Indian Mind Project’*_

_ब्रिटिश आर्काइव में यह फाइल हमेशा “टॉप-सीक्रेट” चिन्हित रही।_

_कागज़ पीले थे… लेकिन पन्नों पर लिखी स्याही अब भी जलती थी।_

_पहला वाक्य पढ़ते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं—_

_*“भारत को हराना तलवार से नहीं… विचारों से होगा।”*_

_दूसरा पन्ना और भी खतरनाक—_

_*“उनकी शक्ति उनकी भूमि नहीं… उनका अध्यात्म है।*_

_उसे कमजोर करो।_

_उनकी शिक्षा बदलो।_

_*"उनके बच्चों को ऐसा बनाओ… जो भारतीय शरीर में हों, लेकिन सोच में ब्रिटिश।”"*_

_*यही था वो ‘Mental Slavery Model-( मतलब- मानसिक गुलामी मॉडल)',*_

_जिसका ज़िक्र मोदी जी ने अयोध्या में किया।_

_*अंधेरे कमरे का सच — 1835 का वह दिन*_

_एक विशाल टेबल पर किताबें पड़ी थीं—_

_संस्कृत, वेद, गणित, ज्योतिष, तत्वज्ञान…_

_सबका विश्लेषण किया गया।

निष्कर्ष आया—_

_*"भारतीय को शारीरिक रूप से पराजित करना असंभव है!,*_

_*“शारीरिक हार सम्भव नहीं…*_

_*उनकी सोच बदलो।*_

_*उनका आत्मविश्वास तोड़ो।”*_

_और यहीं लिया गया वह फैसला,_

_जिसने आने वाली पीढ़ियों की नियति बदल दी—_

_*"अंग्रेज़ी शिक्षा लागू।*_

_*भारतीय ज्ञान को ‘inferior’ (मतलब-निचा, हीन )घोषित कर दिया।*_

_*संस्कृति को ‘mythology’ (मतलब-पौराणिक कथा )कहा गया।*_

_सब कुछ योजनाबद्ध था।_

_खामोश… लेकिन घातक।_

_*फाइल का अंतिम पन्ना — सबसे डरावना सच*_

_एक लाइन थी जो ब्रिटिश अफसरों ने कभी सार्वजनिक नहीं की—_

_*“जब भारत अपनी जड़ों पर लौट आएगा…*_

_*हमारी बनाई मानसिक कैद ढह जाएगी।”*_

_और ठीक यही बात—_

_*मोदी जी ने अयोध्या में दोहराई।*_

_*आज की सच्चाई — ताले खुल रहे हैं*_

_जैसे ही धर्म-ध्वजा लहराई,_

_ऐसा लगा जैसे सदियों पुरानी बेड़ियाँ टूट गई हों।_

_मैकाले की फाइल में लिखी वही चेतावनी सच हो गई—_

_*"भारतीय उस दिन उठ खड़ा होगा जब उसे याद होगा वह कौन है."*_

_*और अब…*_

_देश उसी मोड़ पर खड़ा है—_

_जहाँ इतिहास बदला नहीं—

_“वापस लिखा” जा रहा है।_

_*अंत में एक प्रश्न…*_

_मैकाले की पूरी योजना इस विश्वास पर टिकी थी कि_

_भारत अपनी जड़ों को भूल जाएगा।_

_*लेकिन आज—*_

_जब लोग सनातन, संस्कृति, अध्यात्म और अपने स्व की ओर लौट रहे हैं…_

_तो क्या 190 साल पुरानी ‘Mental Slavery', (मतलब-मानसिक गुलामी) की दीवार_

_दरारों से भर नहीं रही?_

_*और सबसे बड़ा सवाल—*_

_*क्या 1835 में शुरू हुई कहानी*_

_*2025 में ख़त्म होने वाली है?...ll?*_

💕 _आपकी अपनी #Neha_💕

TRN: *भारत रूस की गहरी मजबूत दोस्ती का असर* 👆👇💪

*अमेरिका के पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन ने एक ऐसा बयान दिया* है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। *उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश घोषित किया जाना चाहिए* , क्योंकि दुनिया भर में फैले अस्थिर माहौल के पीछे उसकी भूमिका किसी से छिपी नहीं है। रुबिन ने यहां तक कह दिया कि अगर पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अमेरिका आएं, तो उन्हें सम्मान नहीं बल्कि गिरफ्तारी का सामना करना चाहिए।

रुबिन यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि *पिछले एक साल में अमेरिका ने भारत के साथ जैसा व्यवहार किया है, उसके लिए उसे खुलकर माफी मांगनी चाहिए* । यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के रिश्तों पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। रुबिन का यह बयान भारत की वैश्विक स्थिति और अमेरिका की नीति दोनों पर बड़ा सवालचिह्न लगाता है।✅

TRN: *जयपुर*

SOG मुख्यालय से बड़ी खबर,

हाईकोर्ट लिपिक भर्ती परीक्षा में हाई-टेक नकल,

ब्लूटूथ से चयनित 4 कनिष्ठ लिपिक गिरफ्तार,

स्पेन से मंगाए गए स्पाई कैमरा से लीक हुआ था पेपर, 

नियुक्ति के बाद चुकाई गई थी लाखों की रकम,

12 मार्च और 19 मार्च 2023 को संपन्न हुई थी परीक्षा,

डीआईजी एसओजी परिस देशमुख का रहा सुपरवीज़न,

दिनेश कुमार, मनोज कुमार, संजय और मनीष बुडिया गिरफ़्तार

ADG विशाल बंसल ने दी जानकारी

TRN: 6 दिसंबर शौर्य दिवस की शुभकामनाएं...............

भगवान राम थे तम्बू में, नेताओ घर इफ्तारी थी 

और हमारी मजबूरी पर सिर्फ सियासत भारी थी 

हिन्दू को अपमानित कर गैरों के उत्सव होते थे 

रामलला की फ़िक्र न थी सैफई महोत्सव होते थे 

रामचन्द्र की धरती पर सब हिन्दू ताने सहते थे 

माँ को डायन कहने वाले बड़ी शान से रहते थे  

हिन्दू बस होते अपना अपमान देखते रहते क्या 

धीरे धीरे खोती अपनी पहचान देखते रहते क्या 

जात पात के बंधन तोड़े राम से नाता जोड़ दिया 

और दोगले नेताओ का साथ सभी ने छोड़ दिया 

अब जब हिन्दू जागे हैं तो राम राज्य फिर आया है 

और हमारा भगवा ध्वज सबसे ऊँचा लहराया है 

लेकिन इतना ध्यान रहे ये गर्व दिलाया किसने है 

और हमारे जीवन को फिर पर्व बनाया किसने है 

इस ऊंचे भगवे में शामिल कई वीर अभिमानी हैं 

कोठारी बन्धु जैसे भाई, सिंघल जैसे बलिदानी हैं 

कारसेवकों ने जब धरती अपने रक्त से पूजी थी

जय श्री राम के नारों से जब सारी अयोध्या गूँजी थी 

जो खून बहा था सरयू में, अस्थियों भरी जो गगरी है 

उनको भूल न जाना जिनकी ऋणी अयोध्या नगरी है 

लेकर दर्शन की आस गए, पूरे न कई अरमान हुए 

किंतु नमन उन सबको है जो मन्दिर पर बलिदान हुए

शौर्य कारसेवकों का यदि मृत्यु से न बड़ा होता 

मस्जिद अगर बनी रहती तो मन्दिर नहीं खड़ा होता 

साध लिया वह पूर्ण किया निज धाम दिया अविनाशी को

अब अपनी जिम्मेदारी है कि लें लें मथुरा, काशी को 

🙏 श्री सीताराम नाम महाराज की जय 🙏

TRN: *आज कोलकाता में 5 लाख लोगों ने एक साथ गीता का पाठ किया।* 

यह वही ब्रिगेड ग्राउंड है 

जहाँ बंगाल में राजनीतिक पार्टियाँ अपनी ताकत दिखाती हैं, लेकिन आज बंगाल के हिंदुओं ने अपनी शक्ति प्रदर्शित की।

पूरा बंगाल भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा है, 

*जहां हर दिशा में गीता ज्ञान की ध्वनि सुनाई दे रही है।*💫🚩

TRN: 🛑

बंगाल में निलंबित TMC विधायक ने बाबरी की नींव रखी:मौलवियों के साथ फीता काटा; 2 लाख से ज्यादा लोग मस्जिद के लिए ईंट लेकर पहुंचे

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने शनिवार को अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनने वाली मस्जिद की आधारशिला रखी। कबीर ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंच पर मौलवियों के साथ फीता काटकर औपचारिकता पूरी की।

इस दौरान नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर के नारे लगाए गए। कार्यक्रम में 2 लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटी। बंगाल के अलग-अलग जिलों से आए लोगों में कोई अपने सिर, कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली तो कोई रिक्शा या वैन से ईंट लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा था।

कार्यक्रम को लेकर बेलडांगा समेत आसपास का इलाका आज सुबह से हाई अलर्ट पर है। बेलडांगा और उसके आसपास सेंट्रल आर्म्ड फोर्स की 19 टीमें, रैपिड एक्शन फोर्स, बीएसएफ, स्थानीय पुलिस की कई टीमों समेत 3 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं।

हुमायूं कबीर ने 25 नवंबर को कहा था कि वे 6 दिसंबर को अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस के 33 साल पूरे होने पर बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखेंगे। TMC ने 4 दिसंबर को हुमायूं कबीर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया था।

हुमायूं कबीर बोले- मस्जिद निर्माण रोकने की साजिशें रची गईं

कार्यक्रम से पहले हुमायूं कबीर ने शनिवार को कहा था कि हिंसा भड़काकर कार्यक्रम को बाधित करने की साजिशें रची जा रही हैं, लेकिन मैं बेलडांगा में मस्जिद की नींव रखूंगा। कोई भी ताकत इसे रोक नहीं सकती। हम कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करेंगे।

हाईकोर्ट ने मस्जिद निर्माण पर रोक से इनकार किया था

कोलकाता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मस्जिद निर्माण पर रोक लगाने से इनकार किया था। कोर्ट ने कहा- कार्यक्रम के दौरान शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुमायूं कबीर ने मस्जिद की नींव रखी।

सऊदी से धार्मिक नेता पहुंचे, 150 फीट लंबा स्टेज तैयार हुआ

बारी मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम में सऊदी अरब से धार्मिक नेता पहुंचे थे। 25 बीघा जमीन पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। हुमायूं कबीर ने पहले ही 3 लाख से ज्यादा लोगों के जुटने का अनुमान जताया था।

कार्यक्रम के लिए 150 फीट लंबा और 80 फीट चौड़ा स्टेज तैयार किया गया था। स्टेज पर 400 से ज्यादा लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए 60 हजार से ज्यादा बिरयानी पैकेट तैयार कराए गए थे। 2 हजार से ज्यादा वॉलंटियर्स ने व्यवस्था को संभाला।

भाजपा बोली- यह मुलिम वोट बैंक खींचने की राजनीति

भाजपा नेता दिलीप घोष ने मुर्शिदाबाद में बाबरी के नाम पर मस्जिद के शिलान्यास पर कहा- जनता उन लोगों को पहचानने लगी हैं जो राजनीतिक लाभ के लिए मुसलमानों को गुमराह करते हैं। TMC और हुमायूं कबीर के बीच तालमेल है। यह मुलिम वोट बैंक खींचने की राजनीति है।

सीनियर भाजपा नेता अमित मालवीय ने X पर लिखा- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आग से खेल रही हैं। ममता मुस्लिम भावनाओं का ध्रुवीकरण करने के लिए हुमायूं कबीर का इस्तेमाल कर रही हैं। बेलडांगा राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। यहां झड़पों का एक लंबा और अशांत इतिहास रहा है। यहां अशांति फैली, तो राज्य की आंतरिक एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

मुर्शिदाबाद बाबरी मस्जिद को लेकर विवाद की टाइमलाइन...

28 नवंबर: मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में कई जगहों पर बाबरी मस्जिद के शिलान्यास के पोस्टर नजर आए। लिखा था- 6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास समारोह होगा। पोस्टर पर हुमायूं कबीर को आयोजनकर्ता बताया गया था। इसके बाद विवाद बढ़ गया था। बीजेपी ने इसका विरोध किया, वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसका समर्थन किया।

3 दिसंबर: TMC ने मामले से खुद को अलग किया। बयान में कहा कि- कबीर की इस घोषणा से पार्टी का कोई संबंध नहीं है। एक और पार्टी नेता ने कहा- हुमायूं कबीर ने यह विवाद इसलिए खड़ा किया है ताकी उन्हें रेठनगर सीट से विधानसभा चुनाव में टिकट मिल सके। हुमांयु वर्तमान में मुर्शिदाबाद की भरतपुर सीट से विधायक हैं।

4 दिसंबर: मामला बढ़ता देखा TMC ने विधायक हुमायूं कबीर को सस्पेंड कर दिया। कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम ने कहा- पार्टी सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं करती। पार्टी एक्शन पर हुमायूं ने कहा- मैं अपने बाबरी मस्जिद वाले बयान पर कायम हूं। 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी की भी घोषणा करूंगा। विधानसभा चुनाव में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारूंगा। मैं उन दोनों (TMC और भाजपा) के खिलाफ चुनाव लड़ूंगा। #वायरल #पोस्ट #भारत #जागरूकता

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Suspended TMC MLA Lays Foundation Stone for Babri-Style Mosque in Bengal; Cuts Ribbon with Clerics; Over 2 Lakh People Arrive with Bricks for the Mosque

In Beldanga, Murshidabad district of West Bengal, suspended TMC MLA Humayun Kabir laid the foundation stone for a mosque modeled after the Babri Masjid in Ayodhya on Saturday. Amidst tight security, Kabir formally inaugurated the project by cutting a ribbon on the stage with clerics.

During the ceremony, slogans of "Nara-e-Takbir, Allahu Akbar" (God is Great) were chanted. Over 200,000 people gathered for the event. People from various districts of Bengal arrived at the venue carrying bricks – some on their heads, others in tractor-trolleys, rickshaws, or vans.

The Beldanga area and its surroundings have been on high alert since Saturday morning. More than 3,000 security personnel, including 19 teams of Central Armed Police Forces, Rapid Action Force, BSF, and several teams of local police, were deployed in and around Beldanga.

Humayun Kabir had announced on November 25 that he would lay the foundation stone of the Babri Masjid on December 6, marking 33 years since the demolition of the disputed structure in Ayodhya. The TMC suspended Humayun Kabir from the party on December 4.

Humayun Kabir says: Conspiracies hatched to stop mosque construction

Before the event, Humayun Kabir said on Saturday that conspiracies were being hatched to disrupt the program by inciting violence, but he would lay the foundation stone of the mosque in Beldanga. He asserted that no power could stop it and that they would abide by the orders of the Calcutta High Court.

High Court refused to stay mosque construction

The Calcutta High Court had refused to stay the construction of the mosque on Friday. The court stated that the state government would be responsible for maintaining peace during the event. Following the High Court's directive, Humayun Kabir laid the foundation stone of the mosque.

Religious leaders from Saudi Arabia arrived, a 150-foot-long stage was prepared

Religious leaders from Saudi Arabia also attended the foundation stone laying ceremony of the mosque. The event was organized on 25 bighas of land. Humayun Kabir had already estimated that more than 300,000 people would attend.

A stage 150 feet long and 80 feet wide was prepared for the event. Seating arrangements were made for more than 400 people on the stage. More than 60,000 biryani packets were prepared for the attendees. More than 2,000 volunteers managed the arrangements.

BJP says: This is politics to attract the Muslim vote bank

BJP leader Dilip Ghosh, commenting on the foundation stone laying ceremony of a mosque named after Babri in Murshidabad, said: "The public has started recognizing those who mislead Muslims for political gain. There is a nexus between the TMC and Humayun Kabir. This is politics to attract the Muslim vote bank."

Senior BJP leader Amit Malviya wrote on X: "West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee is playing with fire. Mamata is using Humayun Kabir to polarize Muslim sentiments. Beldanga is one of the sensitive areas of the state. It has a long and turbulent history of clashes. If unrest spreads here, it could threaten the internal unity and national security of the state."

Timeline of the controversy surrounding the Murshidabad Babri Mosque...

November 28: Posters announcing the foundation stone laying ceremony of the Babri Mosque appeared in several places in Beldanga, Murshidabad. They read: "The foundation stone laying ceremony of the Babri Mosque will be held in Beldanga on December 6." Humayun Kabir was mentioned as the organizer on the posters. This sparked a controversy. The BJP protested against it, while Congress leaders supported it.

December 3: The TMC distanced itself from the matter. A statement said that the party had no connection with Kabir's announcement. Another party leader said that Humayun Kabir had created this controversy so that he could get a ticket to contest the assembly elections from the Rethnagar seat. Humayun is currently the MLA from the Bharatpur seat in Murshidabad. December 4: Seeing the matter escalate, the TMC suspended MLA Humayun Kabir. Kolkata Mayor Firhad Hakim said the party does not believe in communal politics. Regarding the party's action, Humayun said, "I stand by my statement about the Babri Masjid. I will also announce my new party on December 22. I will field candidates in 135 seats in the assembly elections. I will contest against both of them (TMC and BJP)." #Viral #Post #India #Awareness

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TRN: 🛑

इन मज़हबी लड़कों 👇की आंखों में इनकी एक हिन्दू पत्रकार युवती के प्रति घृणित Body language देखिये.... माइक छीनने की कोशिश देखिये... हँसी देखिये, ज़हर से भरी हुई !!

          जीवन के 3 दशक हमने ऐसे ही घृणित वातावरण में बिताए हैं ... हम लोग जो इन लोगों की बहुलता वाले इलाकों में रहते हैं... रोज़ाना ऐसी ही विद्रूपता और नफरत झेलते हैं ! एक फल वाला,नाई या परचून वाला तक... आपको ऐसी ही अश्लीलता और खा जाने वाली निगाह से देखता है, घृणा का कारण सिर्फ यही है कि आप सनातनी हिन्दू हैं..  

            मुझे शैशवकाल का एक छोटा सा वाकया याद आता है कि मेरे स्कूल जाने के रास्ते में कई मुसलमानों के घर थे, एक मुस्लिम मां, मेरे हमउम्र मुस्लिम बच्चे को मुझे इंगित करते हुए, स्कूल जाने के प्रेरित, यह कह कर करती थी ...." देखो, हिंदुओं 'तक' के बच्चे स्कूल जाते है, तू भी जाया कर "... 

             इस वाक्य 👆का निहितार्थ एक सामान्य हिन्दू कभी नहीं समझेगा ! दरअसल पारंपरिक रूप से हर मुस्लिम शख्स में बचपन से ही हिंदुओं के मुकाबले अति श्रेष्ठ होने का दम्भ भरा जाता है ,यही इनका मज़हबी अक़ीदा है ! 

               मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने भी मोहनदास गांधी के लिए फिकरा कसा था कि ' सबसे निकृष्ट मुस्लिम भी गांधी से ज़्यादा श्रेष्ठ है "...दिल्ली के ही शाहीनबाग, ओखला, नंदनगरी... जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में आप भगवा कपड़े या हिन्दू पहचान के साथ निकलें तो आपको यह महसूस होगा कि अन्य लोगों की घृणा से भरी आंखें आपको छेद रही हैं...

         बंगाल,केरल,कश्मीर,कैराना,संभल... में रहने वाले हिंदुओं की दुर्दशा की कल्पना कर सकते हैं... वीडियो देखिये....

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Look at the hateful body language of these religious boys 👇 towards a young Hindu female journalist... Look at their attempt to snatch the microphone... Look at their laughter, full of venom!!

We have spent three decades of our lives in such a hateful environment... We, who live in areas with a majority of these people... face such ugliness and hatred every day! Even a fruit vendor, a barber, or a grocer... looks at you with such obscenity and a devouring gaze, the only reason for this hatred is that you are a Sanatani Hindu.

I remember a small incident from my childhood: there were many Muslim houses on my way to school. A Muslim mother, pointing to her Muslim child of my age, would encourage him to go to school by saying, "Look, even Hindu children go to school, you should go too..."

A common Hindu will never understand the implication of this sentence 👆! In fact, traditionally, every Muslim person is instilled with a sense of superiority over Hindus from childhood; this is their religious belief!

Maulana Mohammad Ali Jauhar also made a sarcastic remark about Mohandas Gandhi that "even the lowest Muslim is superior to Gandhi"... In Muslim-majority areas of Delhi like Shaheen Bagh, Okhla, Nand Nagri... if you go out wearing saffron clothes or displaying Hindu identity, you will feel that the hateful eyes of others are piercing you...

You can imagine the plight of Hindus living in Bengal, Kerala, Kashmir, Kairana, Sambhal... Watch the video....

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TRN: रूसी राष्ट्रपति को भगवद्गीता देना बुद्धिजीवी वर्ग को रास नहीं आ रहा है

उन्हें डर है कि इससे भारत की हिंदू राष्ट्र की छवि दुनिया के सामने जाएगी

ऐसे लोगों को ये हजम कैसे होगा, जिनके समय में पूरे शहर के मंदिरों को ढंक दिया जाता हो, ताकि सुल्तान साहब जो पक्के इस्लामिक कल्चर वाले है वे इन्हें देख न ले

ये शहर कोई और नहीं काशी थी, वहीं काशी जो अब पूरी दुनिया के लोगो के आध्यात्मिक केंद्र बन चुकी है और दूसरे धर्म के लोग भी बहुतायत में आते है

TRN: 🛑

एक ओर सादाब हसन जैसे अज्ञानी, छोटी बच्चियों के वक्षस्थल पर गंदी दृष्टि डालने वाले व्यक्ति सोशल मीडिया पर वीडियो बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जाहिल आईएएस संतोष वर्मा ब्राह्मणों से उनकी बेटियों को खींच लेने की बात खुले मंच से कहता है और भाजपा की सरकार उसे अपना समर्थन देती है तथा उसका बचाव करके उसे पदोन्नति दे देती है।

दस रुपये के बिस्किट मांगने से लेकर एक बेटी की मां से चुम्बन मांगने तक का सफर सादाब हसन ने बड़ी मुश्किल से तय किया है। इस सफर में जिहादी मानसिकता वाले सादाब हसन ने अपनी मां की दुरवस्था दिखाई, कई पॉडकास्ट पर जाकर आंसू बहाए और अपनी गरीबी की कहानी बेचकर समाज व सोशल मीडिया पर गंदगी परोसकर ढेर सारी शोहरत कमा ली।

किंतु समय के पटल पर किसी भी व्यक्ति का प्रपंच अटल नहीं रहता; समय सबको नंगा कर देता है और झूठ का चोला ओढ़े सादाब जैसे लोगों के असली चेहरे जनता के समक्ष आ ही जाते हैं।

दूसरी ओर अपनी निकृष्ट सोच का प्रदर्शन करते हुए संतोष वर्मा जैसे अज्ञानी आईएएस ब्राह्मणों के घरों से उनकी बेटियों को खींच लेने की बात कर रहा है और अपने बेटे से संबंध बनाने के लिए खुले मंच से कह रहा है।

संतोष वर्मा जैसे दो कौड़ी के लोग आरक्षण के नाम पर भीख मांगकर स्कूल-कॉलेजों में प्रवेश लेते हैं, फिर भीख मांगकर सरकारी नौकरियां लेते हैं और इसी भीख मांगने की आदत से विवश होकर ब्राह्मणों की बहन-बेटियों की मर्यादा का हनन करते हैं।

इनकी इसी सोच के कारण सवर्ण समाज इन्हें मुंह नहीं लगाता और इनसे छुआछूत करता है, क्योंकि ये कोरोना की तरह होते हैं; इनसे दूरी न रखी जाए तो ये पूरे देश में अपने कोरोना का संक्रमण फैला देते हैं, इसी कारण सवर्ण समाज इनसे दूर रहता है।

क्योंकि सवर्ण जानता है कि जिस अम्बेडकरवादी विचारधारा के साथ ये लोग आते हैं, उनका अंतिम लक्ष्य सवर्णों की बहन-बेटियों को गालियां देना, अपमानित करना और हिन्दुओं के देवी-देवताओं, भगवानों को अपमानित तथा गाली देना ही होता है।

सामाजिक समरसता के नाम पर इन्होंने स्तन कर से लेकर पांच हजार वर्ष तक पानी न पीने देना, हगने-मूतने न देना, पीछे झाड़ू बांधकर आगे मटकी लटकाने जैसी झूठी कहानियां गढ़कर स्कूल-कॉलेजों में सीटें हड़प लीं, सरकारी नौकरियां हड़प लीं और अब इनकी अज्ञानता निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग से आगे बढ़कर सवर्णों की बहन-बेटियों को खींचने तक पहुंच गई है।

परंतु ये भिखारी अभी यहीं नहीं रुकेंगे; ये आगे कहेंगे कि सवर्ण सामाजिक समरसता के नाम पर इन्हें अपनी आधी जमीन और आधा घर भी दे दे और ये निकम्मे पड़े-पड़े सब कुछ ले लें तथा इसी को अपना हक बताकर सामाजिक समरसता की दुहाई देंगे।

इस व्यक्ति के विरुद्ध न तो सरकार कोई कार्रवाई करेगी, न कोर्ट और न ही आईएएस एसोसिएशन, क्योंकि सरकार जानती है कि सवर्ण तो हमारा गुलाम है; अब हमें सत्ता से कौन हटा सकता है? अब तो अनंत काल तक भाजपा को सवर्ण वोट देता रहेगा, हम भले ही इस समाज को जातिवादी कानून बनाकर गुलाम बना लें या आरक्षण के माध्यम से इसे नौकरियों में न घुसने दें, इसे भूखा मार दें!

इसके कई राजनीतिक कारण हैं। जिस अम्बेडकरवादी विचारधारा के कारण अज्ञानी आईएएस संतोष वर्मा बोल रहा है, उसी धर्म-विरोधी, हिन्दू धर्म के विरुद्ध 22 प्रतिज्ञाएं दिलवाने वाले भीमराव को भाजपा ने अपना पैगंबर बना लिया है और उन्हें पैगंबर बनाकर भारत में स्थापित कर रही है। किंतु मैं भाजपा वालों से कहना चाहती हूं कि राजनीतिक मजबूरियों और कट्टर अम्बेडकरवादियों का शिकार हिन्दुओं की आस्था और ब्राह्मणों की बेटियां हो रही हैं।

ब्राह्मण समाज को अनाथ न समझें; आपने सत्ता की बेड़ियां पहनी हैं, ब्राह्मण अपनी बेटियों की रक्षा तो कर ही लेगा।

सादाब हसन और संतोष वर्मा जैसे अम्बेडकरवादियों की विचारधारा में कोई अंतर नहीं है। दोनों एक ही जिहादी मानसिकता से ग्रस्त हैं। हां, सादाब हसन का जिहाद संतोष वर्मा के लिए भी है और शेष हिन्दुओं के लिए भी, किंतु संतोष वर्मा जैसे अम्बेडकरवादी जिहादियों का जिहाद केवल ब्राह्मणों के लिए है।

जैसे सादाब हसन के लिए हर हिन्दू काफिर है, उसी प्रकार संतोष वर्मा और उसके जैसे अम्बेडकरवादी जिहादियों के लिए हर ब्राह्मण काफिर है।

सादाब हसन जैसे जिहादी जितनी नफरत संतोष वर्मा और उसके जैसे अम्बेडकरवादी जिहादियों तथा समस्त हिन्दुओं से करते हैं, ठीक उतनी ही नफरत संतोष वर्मा और उसके जैसे अम्बेडकरवादी जिहादी ब्राह्मणों से करते हैं।

एक स्त्री के सम्मान में महाभारत का युद्ध करने वाला समाज आज अपनी बेटियों के बलात्कार का आह्वान करने वाले अज्ञानी आईएएस संतोष वर्मा को अपने ही समाज के बीच पनपने दे रहा है; इसका कारण यह है कि ब्राह्मण भगवान परशुराम और आचार्य चाणक्य को भूल चुका है।

शिष्टाचार से युद्ध नहीं लड़े जाते, युद्ध वीरता मांगता है और वीरता प्रमाण मांगती है!

उठो और अपनी रक्षा स्वयं करो!

By: Priti Gautam

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On one hand, ignorant individuals like Shadab Hasan, who cast lewd glances at young girls' chests, are making videos on social media, while on the other hand, the uneducated IAS officer Santosh Verma openly talks about snatching away Brahmin girls from their homes, and the BJP government supports him, defends him, and even promotes him.

Shadab Hasan has traversed a difficult journey, from begging for a ten-rupee biscuit to demanding a kiss from a mother of a daughter. During this journey, the jihadist-minded Shadab Hasan showcased his mother's plight, shed tears on several podcasts, and earned immense fame by selling his story of poverty and spreading filth on social media and in society.

However, no one's deception remains hidden forever; time exposes everyone, and the true faces of people like Shadab, who wear the cloak of lies, are eventually revealed to the public.

On the other hand, displaying his despicable mindset, the ignorant IAS officer Santosh Verma is talking about snatching away Brahmin girls from their homes and openly suggesting that his son have relations with them.

Worthless people like Santosh Verma gain admission to schools and colleges by begging in the name of reservations, then beg for government jobs, and compelled by this habit of begging, they violate the dignity of Brahmin women and girls.

Because of this mindset, the upper-caste community avoids them and practices untouchability towards them, because they are like a virus; if distance is not maintained from them, they spread their infection like coronavirus throughout the country, which is why the upper-caste community stays away from them.

Because the upper-caste community knows that the ultimate goal of these people, with their Ambedkarite ideology, is to abuse and insult upper-caste women and girls, and to insult and abuse Hindu deities and gods. In the name of social harmony, they have fabricated false stories ranging from imposing a breast tax to preventing people from drinking water for five thousand years, preventing them from defecating or urinating, and forcing them to tie a broom to their backs and hang a pot in front of them. They have used these lies to seize seats in schools and colleges, grab government jobs, and now their ignorance has progressed from demanding reservations in the private sector to even targeting the sisters and daughters of upper castes.

But these beggars won't stop here; they will further demand that upper castes give them half their land and half their houses in the name of social harmony, allowing them to take everything while doing nothing, and then they will claim this as their right and invoke social harmony.

Neither the government, nor the courts, nor the IAS Association will take any action against this individual, because the government knows that the upper castes are our slaves; who can remove us from power now? The upper castes will continue to vote for the BJP indefinitely, even if we enslave this society by making casteist laws or prevent them from getting jobs through reservations, even if we starve them!

There are several political reasons for this. The same Ambedkarite ideology that makes the ignorant IAS officer Santosh Verma speak this way, the same anti-religious, anti-Hindu ideology of Bhimrao Ambedkar, who made people take 22 anti-Hindu vows, has been adopted by the BJP as their prophet, and they are establishing him as a prophet in India. But I want to tell the BJP people that due to political compulsions and the actions of कट्टर (hardcore) Ambedkarites, the faith of Hindus and the daughters of Brahmins are becoming victims.

Don't consider the Brahmin community helpless; you may have donned the shackles of power, but Brahmins will protect their daughters.

There is no difference in the ideology of Ambedkarites like Sadab Hasan and Santosh Verma. Both are afflicted with the same jihadist mentality. Yes, Sadab Hasan's jihad is for Santosh Verma as well as for the rest of the Hindus, but the jihad of Ambedkarite jihadis like Santosh Verma is only against Brahmins. Just as every Hindu is an infidel for Shadab Hasan, similarly, every Brahmin is an infidel for Santosh Verma and other Ambedkarite jihadis like him.

The hatred that jihadis like Shadab Hasan harbor towards Santosh Verma and other Ambedkarite jihadis, as well as all Hindus, is exactly the same hatred that Santosh Verma and other Ambedkarite jihadis harbor towards Brahmins.

A society that waged the Mahabharata war to uphold a woman's honor is now allowing the ignorant IAS officer Santosh Verma, who calls for the rape of its own daughters, to thrive within its midst; this is because the Brahmin community has forgotten Lord Parshuram and Acharya Chanakya.

Wars are not fought with courtesy; war demands valor, and valor demands proof!

Rise up and defend yourselves!

By: Priti Gautam

TRN: 🛑

अहमदाबाद का नाम सोलंकी राजा कर्णदेव के समय से कर्णावती है। इसके पूर्व यह भद्रावती था-भद्रकाली मन्दिर का स्थान। इसी २१ अक्षांश पर ओड़िशा के भद्रक में भी भद्रकाली है। आकाश में २१ अहर्गण के भीतर सूर्य का रथ है (पृथ्वी व्यास का २ घात १८ गुणा)। पुरुष सूक्त में यह सहस्राक्ष क्षेत्र है-सूर्य से १००० सूर्य-व्यास दूरी तक के ग्रहों शनि तक का ही दृश्य प्रभाव पड़ता है। अतः पृथ्वी पर २१ उत्तर अक्षांश भद्र हुआ।

फैजाबाद का पुराना नाम अयोध्या था जिसके कई भाग थे-साकेत, नन्दिग्राम (सचिवालय), अयोध्या-राजमहल और सरकारी क्षेत्र। प्राचीन काल में अधिकारियों के १० स्तर थे-आजकल ५० के करीब हैं। सबसे ऊपर राजा १० स्तर पर था। उसके नीचे मन्त्री या सचिव को नन्द कहते थे जो नवम स्तर का था। अतः ज्योतिष में नन्द का अर्थ ९ है। जहां मन्त्री-सचिवों का कार्यालय था वह नन्दिग्राम हुआ। शासन चलाने के लिये भरत को वहां रहना पड़ता था। दूसरा कारण था कि अपने को नन्द स्तर का ही माना, राजा नहीं। किसी भी पुराण में सूर्यवंशी राजाओं की सूची में दशरथ के बाद राम का ही नाम है, १४ वर्ष तक भरत को राजा नहीं कहा गया। यह आदर्श और व्यवस्था प्राचीन नामों से ही प्रकट होगी। बाबरी मस्जिद से यही पता चलेगा कि जो भी लूटमार करे उसकी सम्पत्ति हो जायेगी।

रोहतक का पुराना नाम रोहितक था। यह शून्य देशान्तर रेखा के निकट था जो विषुव रेखा पर प्राचीन लंका तथा उज्जैन से गुजरती थी।

लङ्काकुमारी तु ततस्तु काञ्ची, मानाटमश्वेतपुरी त्वथोदक्।

श्वेतोऽचलोऽस्मादपि वात्स्यगुल्मं, पूः स्यादवन्ती त्वनुगर्गराटम्॥१॥

आश्रमपत्तनमालवनगरे पट्टशिवमेव रोहितकम्।

स्थाण्वीश्वरमस्तु हिमवान् मेरुर्लेखाध्वकर्म नास्त्येषाम्॥२॥

(वटेश्वर सिद्धान्त, १/८/१-२)

मध्य विषुव रेखा के निकट के स्थान-लंका (विषुव पर) से उत्तर कुमारी, काज्ची, मानाट, अश्वेतपुरी, श्वेत पर्वत, वात्स्यगुल्म (वत्स राज्य की छावनी), अवन्ती, गर्गराट्, आश्रमपत्तन (सरस्वती तट पर पत्तन), मालवनगर, पट्टशिव, रोहितक, स्थाण्वीश्वर (थानेश्वर), हिमालय (कैलास निकट), मेरु (उत्तरी ध्रुव)। इस रेखा पर सबसे उत्तर का नगर शिविर (साइबेरिया) का उत्तर कुरु था किसे ओम्स्क कहते हैं (वहां से देशान्तर की माप होती है अतः ॐ नाम)।

पुरबन्दर मूल नाम है। इसी प्रकार का बोरीबन्दर मुम्बई में है। बन्दर = पत्तन। इसके अधिकारियों के वानर कहते थे जो वननिधि (समुद्र) में चलते थे। बान्ध्यो वननिधि नीरनिधि उदधि सिन्धु वारीश। सत्य तोयनिधि कम्पति जलधि पयोधि नदीश॥ (रावण द्वारा रामसेतु बनने पर आश्चर्य व्यक्त कर समुद्र के १० नाम कहना)।

आजमगढ़ = अर्यमागढ़।

उज्जैन के ३ भाग थे-अवन्तिका, उज्जयिनी, विशाला (पुराण संकलन का स्थान भविष्य पुराण-मेघदूत में)

विशाखापत्तनम् मूल नाम है। यहां दो नदियां वंशधारा और नागावली स्रोत से समुद्र तक दो धाराओं (शाखा) में एक साथ चलती हैं।

पटना के कई भाग थे-प्रकाश स्तम्भ क्षेत्र प्रकाशपत्तन (मञ्जुल का लघुमानस), सरकारी कार्यालय और आवास के सेक्टर (पटल)-पाटलिपुत्र, मुख्य बाजार-बृहद् हट्टी-बिहटा, विश्वविद्यालय भाग-कुसुमपुर (फुलवारीशरीफ), खगोल वेधशाला-खगोल।

एक आश्चर्य है कि भारत राष्ट्र है तो उसका छोटा अंश महाराष्ट्र कैसे हुआ? भागवत माहात्म्य में है कि भक्ति से ज्ञान-वैराग्य का जन्म द्रविड़ में हुआ, वृद्धि कर्णाटक में हुयी तथा विस्तार महाराष्ट्र तक हुआ। गुर्जर जाते जाते प्रभाव समाप्त हो गया। 

अहं भक्तिरिति ख्याता इमौ मे तनयौ मतौ।

ज्ञान वैराग्यनामानौ कालयोगेन जर्जरौ॥४५॥

उत्पन्ना द्रविडे साहं वृद्धिं कर्णाटके गता। 

क्वचित् क्वचित् महाराष्ट्रे गुर्जरे जीर्णतां गता॥४८॥

तत्र घोर कलेर्योगात् पाखण्डैः खण्डिताङ्गका। 

दुर्बलाहं चिरं जाता पुत्राभ्यां सह मन्दताम्॥४९॥

वृन्दावनं पुनः प्राप्य नवीनेव सुरूपिणी। 

जाताहं युवती सम्यक् श्रेष्ठरूपा तु साम्प्रतम्॥५०॥

(पद्म पुराण उत्तर खण्ड श्रीमद् भागवत माहात्म्य, भक्ति-नारद समागम नाम प्रथमोऽध्यायः)

सृष्टि का आरम्भ अप् से हुआ, अतः उसके शब्द रूप वेद के उद्गम को द्रविड़ कहा (द्रव = अप् = जल)। वेद श्रुति आदि माध्यम से प्राप्त ज्ञान है अतः श्रुति हुआ। इसका ग्रहण कर्ण से होता है अतः इसकी वृद्धि का क्षेत्र कर्णाटक हुआ। वृद्धि का अर्थ है शब्द के अर्थों का विस्तार। शब्दों का मूल अर्थ आधिभौतिक था, उनके आध्यात्मिक तथा आधिदैविक अर्थ बनाना वृद्धि हुआ। आज भी वेद का सबसे अधिक शोध वहीं होता है। इस अर्थ में भी वेद प्रसार की अन्तिम सीमा कर्णावती हो सकती है। इसका उलटा अर्थ अहमदाबाद से आयेगा। अहमद शाह ने इसे बर्बाद किया था, उसके द्वारा आबाद कहना सत्य का उलटा है। प्रभाव या विस्तार क्षेत्र महर् (महल) है। अतः वेद का जहां तक विस्तार हुआ, वह महाराष्ट्र है। 

बाद में उत्तर भारत में प्रसार होने पर श्रुति क्षेत्र कर्णपुर, कान्यकुब्ज, बहराइच (बहवृच =ऋग्वेद) उत्तर बिहार का रीगा आदि हुए।

इस ज्ञान के अभाव में कहते हैं कि उत्तर भारत के आर्यों ने दक्षिण भारत पर वेद थोप दिया। स्पष्टतः इन लोगों ने वेद कभी देखा नहीं है। ऋग्वेद के पहले ही सूक्त में ही दो शब्दों का प्रयोग केवल दक्षिण भारत में होता है। दोषा-वस्ता = रातदिन। दोषा काल का मुख्य भोजन दोसा है। सौर मण्डल के धाम वस्त (बस्ती) हैं जिनकी गिनती अहः में होती है। इनका नियन्त्रक सूर्य या दिन का समय वस्ता है। जैसे हिन्दी फिल्मों का एक पुराना तेलुगू गीत था-रमैया वस्ता वैया।

विष्णु ने नगरों का निर्माण किया था अतः उनको उरुक्रम कहते हैं। केवल दक्षिण भारत में ही नगरों को उर या उरु कहते हैं जैसे बंगलूरु, मंगलूर, नेल्लूर, तञ्जाउर आदि। बंगलोर को टीपूसुल्तानाबाद कहने से यह पता नहीं चलेगा। 

उरुं हि राजा वरुण श्चकार (ऋग् वेद १/२४/८) शं नो विष्णुरुरुक्रमः (ऋग् वेद १/९०/१)

बाद में वरुण ने भी वैसे ही उर बनाये। अतः इराक का सबसे पुराना नगर ऊर था।

TRN: 🛑

इंडोनेशिया एक मुस्लिम बाहुल्य देश है। यहां एक ऐसा मंदिर है जहां अमृत कलश होने का दावा किया जा रहा है। ये मंदिर मुख्य जावा आइलैंड के बीचों-बीच है। इस मंदिर का नाम कंडी सुकुह है। इस प्राचीन मंदिर में एक कलश है जिस में एक तरल पदार्थ पाया गया है। ये तरल पदार्थ हजारों सालों के बाद भी नहीं सूखा है। यहां लोगों का ऐसा मानना है कि ये वही कलश है जिसे समुद्र मंथन के दौरान निकाला गया था।

साल 2016 की शुरूआत में पुरातत्व विभाग की एक टीम इस मंदिर में मरम्मत का कार्य कर रही थी। काम करने के दौरान यहां इस टीम को कई सारी कलाकृतियां मिली जिन्हें संग्रहालय में भेज दिया गया क्यों कि ये सारी काफी बेशकीमती थी। एक दीवार से टीम को एक कलश मिला। तांबे के बने इस कलश में एक खास तरह का लिक्विड था और इस के साथ ही इस में एक पारदर्शी स्फटिक का बना शिवलिंग भी जुड़ा हुआ था।

इस में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात तो ये थी कि इस कलश को जिस दीवार से निकाला गया था उस पर 'अमृत मंथन' की नक्काशी की गई है। इस के साथ ही कंडी सुकुह में एक दीवार में महाभारत के आदिपर्व का वर्णन किया गया है। खजुराहो के मंदिर की भांति यहां काम में लिप्त मूर्तियां भी स्थित हैं। 

पुरातत्व विभाग द्वारा उद्धार किए गए इस कलश की कार्बन डेटिंग लगभग बारहवीं सदी के आसपास बताई गई है। उस दौरान मलेशिया हिंदू राष्ट्र्र था। पंद्रहवीं शताब्दी जब यहां इस्लाम का खतरा मंडराया तो यहां मंदिरों का बनना कम हो गया और शायद इसी डर की वजह से कलश को यहां इस मंदिर में छिपा दिया गया होगा। मरम्मत कार्य के दौरान टीम को कई सारे कीमती रत्न भी मिलें। इंडोनेशिया में अकसर हिंदू मंदिर के अवशेष मिलते हैं।

Indonesia is a Muslim-majority country. However, there is a temple there that claims to possess a vessel containing the elixir of immortality. This temple is located in the heart of the main island of Java and is called Candi Sukuh. This ancient temple houses a vessel containing a liquid that has not dried up even after thousands of years. Locals believe this is the same vessel that was obtained during the churning of the ocean (Samudra Manthan) in Hindu mythology.

In early 2016, an archaeological team was carrying out restoration work at the temple. During the work, the team discovered several artifacts, which were sent to a museum because of their immense value. From a wall, the team recovered a copper vessel containing a unique liquid and a transparent crystal Shiva lingam.

The most surprising aspect was that the wall from which the vessel was recovered was adorned with carvings depicting the "Churning of the Ocean." Additionally, a wall at Candi Sukuh depicts scenes from the Adi Parva of the Mahabharata. Like the temples of Khajuraho, this temple also features sculptures depicting erotic scenes.

Carbon dating of the recovered vessel by the archaeological department suggests it dates back to around the 12th century. During that time, Malaysia was a Hindu kingdom. In the 15th century, when the threat of Islam loomed, the construction of temples decreased, and perhaps due to this fear, the vessel was hidden in this temple. During the restoration work, the team also found several precious gems. Remains of Hindu temples are frequently found in Indonesia.

TRN: 🛑

यो राजस्थान हैं राजे।

थार मरुस्थल भारत का सबसे विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र है जहाँ दूर तक फैली सुनहरी रेत, उठते बैठते धोरे, दिन में गर्म लू और रात में ठंडी हवा मिलकर एक अनोखा अनुभव देती है। ऊँट की घंटियों की आवाज, रेगिस्तान का शांत वातावरण, राजस्थानी लोकसंगीत और सांस्कृतिक नृत्य इस मरुस्थल की असली पहचान हैं। सैम और खूरी जैसे स्थान सूर्यास्त के समय बिल्कुल चित्र जैसे लगते हैं जब लालिमा रेत पर फैल जाती है।

यह मरुस्थल राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और जोधपुर के कुछ हिस्सों में फैला है। सबसे प्रसिद्ध अनुभवों में ऊँट सफारी, जीप ड्यून्स बैशिंग, और डेजर्ट कैंप शामिल हैं जहाँ रात को तारों भरा आसमान यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

थार मरुस्थल घूमने का मुख्य केंद्र जैसलमेर माना जाता है। जैसलमेर एयरपोर्ट शहर से लगभग 12 से 16 किलोमीटर दूर है। जोधपुर एयरपोर्ट से जैसलमेर लगभग 275 किलोमीटर की दूरी पर है। जैसलमेर तक रेल और सड़क दोनों से सीधा कनेक्शन उपलब्ध है। यहाँ से आगे सैम या खूरी जाने के लिए जीप और टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं।

जैसलमेर से सैम सैंड ड्यून्स लगभग 40 किमी,

जैसलमेर से खूरी लगभग 50 किमी,

जोधपुर से जैसलमेर लगभग 275 किमी हैं।

सैम और खूरी दोनों जगह रेगिस्तानी टेन्ट्स, डेजर्ट कैंप और बजट से लेकर मिड रेंज तक कई सुविधा वाले कैंप मिलते हैं। ज्यादातर कैंप में शाम का सांस्कृतिक कार्यक्रम, राजस्थानी भोजन और सुबह का नाश्ता शामिल होता है।

फोटो साभार

This is Rajasthan, the land of kings.

The Thar Desert is India's largest desert region, where vast stretches of golden sand, undulating dunes, scorching heat during the day, and cool breezes at night combine to create a unique experience. The sound of camel bells, the serene desert atmosphere, Rajasthani folk music, and cultural dances are the true essence of this desert. Places like Sam and Khuri look absolutely picturesque at sunset when the crimson hues spread across the sand.

This desert stretches across parts of Jaisalmer, Barmer, Bikaner, and Jodhpur in Rajasthan. Among the most popular experiences are camel safaris, jeep dune bashing, and desert camps where the starry night sky captivates travelers.

Jaisalmer is considered the main hub for exploring the Thar Desert. Jaisalmer Airport is approximately 12 to 16 kilometers from the city. Jaisalmer is about 275 kilometers from Jodhpur Airport. Direct rail and road connections are available to Jaisalmer. Jeeps and taxis are easily available from here to travel to Sam or Khuri.

Sam Sand Dunes are approximately 40 km from Jaisalmer,

Khuri is approximately 50 km from Jaisalmer,

Jodhpur is approximately 275 km from Jaisalmer.

Both Sam and Khuri offer desert tents, desert camps, and various accommodations ranging from budget to mid-range. Most camps include evening cultural programs, Rajasthani cuisine, and breakfast.

Photo Credit

TRN: 🛑

गौर करनेवाली बात है ..✍️😒

ये लड़की अपनी माँ से बात करते हुए कहती है कि मम्मी अब तुम विधवा हो गई हो, तो अब तुम किसी अमीर बुड्ढे से शादी करके मुझे अमीर बाप दे दो ..

जो करोड़पति हो, गंजा हो तो भी चलेगा क्योंकि अब तुम्हारे बाल भी झड़ रहे हैं .. किसी से भी शादी कर लो, लेकिन मुझे अमीर बाप दे दो ..मुझे अमीर शुगर डैडी दे दो ..

दरअसल इस लड़की ने वही बात कही है 

जो भारत की ज्यादातर लड़कियां सोचती या चाहती हैं,

ज्यादातर लड़कियां अपनी मेहनत से नहीं 

बाप, भाई, पति और बॉय फ्रेंड के पैसे पर मौज करना चाहती हैं ..

असल में वोमेन एम्पोवेर्मेंट का सबसे ज्यादा शोषण ऐसी महिलाओं ने ही किया है, सब कुछ फ्री चाहिए इतना कि वो उच्च शिक्षित होकर भी गृहणी बन जाती हैं ..

ये सिर्फ निकम्मापन है और कुछ नहीं ..

#राधे_राधे 🙏🚩

It's worth noting... ✍️😒

This girl, while talking to her mother, says, "Mom, you're a widow now, so marry a rich old man and give me a rich father...

Someone who's a millionaire, even if he's bald, that's fine too, because your hair is falling out anyway... Marry anyone, but give me a rich father... Give me a rich sugar daddy..."

In fact, this girl has said exactly what most girls in India think or want.

Most girls don't want to work hard; they want to enjoy life on the money of their father, brother, husband, and boyfriend.

Actually, it's these kinds of women who have exploited the concept of women's empowerment the most. They want everything for free, so much so that even after being highly educated, they become housewives.

This is nothing but laziness and nothing else.

#Radhe_Radhe 🙏🚩

TRN: 🛑

TMC नेता हुमायूं कबीर ने कहा, "2024 में घोषणा की

 थी कि वो जल्द ही मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी 

मस्जिद का उद्घाटन करेगा. 6 दिसंबर 2025 को उसने

 मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की बुनियाद भी रख दिया

दिलचस्प बात यह रही यहाँ की बाबरी मस्जिद के निर्माण

 के लिए मालदा समेत कई जिलों से मस्जिद कंस्ट्रक्शन का सामान लेकर 2 लाख की संख्या में मुसलमान लोग

 ट्रैक्टर ट्राली पैदल मुर्शिदाबाद के बेलडांगा पहुंच गए

 बंगाल के अलग-अलग हिस्सों से कुछ मुस्लिम लोग

 अपने सिर पर ईंट रखकर मुर्शिदाबाद पहुंच गए थे🔥

 100/200/500 हजार रुपये चंदा भी देने लगे वहाँ.

वहाँ पहुँचने वालों में 70% ऐसे मुसलमान थे

जिनके खुद के पक्के मकान तक नहीं हैं☝

ग़रीब हैं अशिक्षित हैं. बीमार हैं ईलाज का अभाव है

क्युकी ईलाज करवाने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं.

उनको बच्चों को पढ़ाने खिलाने के लिए पैसे नहीं है⚡

किंतु उनमें से किसी को न मकान दुकान नहीं चाहिए

किसी को भी हॉस्पिटल शिक्षण संस्थान नहीं चाहिए

        इनको चाहिए सिर्फ़ #बाबरी_मस्जिद 

इसी से इनको रोजी रोटी रोजगार दवाई पढाई मिलेगी? 

जैसे बाकी हजारों मस्जिदों से मिल रही है वैसे ही 🔥

 अच्छा इनको छोड़ दीजिये 

राम मन्दिर निर्माण और निर्माण के बाद आज भी

जो लोग ज्ञानी ध्यानी विज्ञानी लोग PDA के मसीहा

मन्दिर से रोजी रोटी रोजगार ईलाज शिक्षा मिलेगा

जैसे वाहियात् सवाल उठाने का काम कर रहे थे/ हैं

उनमें से किसी एक ने इस बाबरी मस्जिद निर्माण

पर एक भी सवाल उठाया है इससे क्या मिलेगा? 

किसी एक ने उठाया हो तो मेरे मुँह पर मारो स्कृन शॉट

 🆎आप स्वयं इनके मक्कारी दोगलेपन को समझें

   इनका मकसद हिंदुओ को हिंदू धर्म संस्कृति को

   टार्गेट करना होता है⚡हिंदुओं को भटकाना होता है

    

जबकि मुसलमान को ये लोग संगठित करना चाहते हैं

 इसलिए उनकी गालियाँ लात जूते गोलियां खाकर उनकी

  हर जायज नाजायज मांग हरकतों पे वाह वाह करते हैं

  अथवा मौन रहकर ये लोग मुक समर्थन करते हैं🔥🔥

Note📝 वाहियात सवाल इसलिए मैने बोला है

Because मन्दिर से रोजी रोटी रोजगार ईलाज

शिक्षा सब मिलता है, हजारो करोड़ रुपये मिलते हैं☝

जिनको संदेह हो वो कमेंट बॉक्स में ज़रा आ जाएं

उनके संदेह के निवारण हेतु पुरा इंतज़ाम किया गया है

मस्जिद /मदरसे से समाज और देश को क्या मिलता है

आप जनता जनार्दन स्वयं जानती क्या बताएं आपको

मुस्लिम से मुझे एक चीज सीखने को मिलती है वो है

अपने मजहब के प्रति नि: स्वार्थ और पूर्ण समर्पण 

कोई सवाल नहीं कोई भय नहीं कोई झिझक नहीं

दुर्भाग्य से ये क्वालिटी हिंदुओं में नहीं दिखती है⚡

जिस दिन हिंदू अपने धर्म के प्रति इतना समर्पित होगा

हजारों साल तक कोई कुछ नहीं उखाड़ पायेगा हमारा

      हम शाश्वत थे सनातन हैं और रहेंगे भी ⛳

वरना पाकिस्तान बांग्लादेश अफगानिस्तान बनने में भी

वक्त नहीं लगेगा वहाँ भी कभी हिंदू बौद्ध सिक्ख सत्ता थी

पिछले 200 सालों के भीतर हमारा सफाया हो गया💡

7 वी शताब्दी से पूर्व तक तो कोई मुस्लिम भी नहीं था

आज तीनों इस्लामिक मुल्क हैं हम गिने चुने बचे हैं🔥

बाकी अपनी अपनी जाति जाकर ढूढ़ लो वहाँ 🆎??

🔴

TMC leader Humayun Kabir said, "In 2024, it was announced that he would soon inaugurate the Babri Masjid in Beldanga, Murshidabad. On December 6, 2025, he even laid the foundation stone of the Babri Masjid in Murshidabad.

Interestingly, for the construction of the Babri Masjid there, 200,000 Muslims from several districts, including Malda, arrived in Beldanga, Murshidabad, carrying mosque construction materials on tractor-trolleys and on foot.

Some Muslim people from different parts of Bengal even reached Murshidabad carrying bricks on their heads. 🔥

They also started donating 100/200/500 thousand rupees there.

70% of those who reached there were Muslims

who don't even have proper houses of their own.☝

They are poor, uneducated, and sick, lacking access to treatment

because they don't have money for medical care.

They don't have money to feed and educate their children.⚡

But none of them want houses or shops.

None of them want hospitals or educational institutions.

They only want the #Babri_Masjid.

Will they get their livelihood, employment, medicine, and education from this?

Just like they are getting it from thousands of other mosques? 🔥

Okay, leave them aside.

Even today, after the construction of the Ram Mandir,

those so-called knowledgeable, thoughtful, and intellectual people, the messiahs of PDA,

who were/are raising absurd questions like whether they will get livelihood, employment, treatment, and education from the temple,

has any one of them raised a single question about this Babri Masjid construction? What will they get from this?

If anyone has raised such a question, show me a screenshot.

🆎Understand their hypocrisy and double standards yourself.

Their aim is to target Hindus and Hindu religion and culture.⚡ To mislead Hindus.

While they want to organize Muslims,

that's why they tolerate their abuses, kicks, shoes, and bullets, and support their every legitimate and illegitimate demand and action." They either applaud

or silently offer their tacit support 🔥🔥

Note📝 I called it a ridiculous question because

You get livelihood, employment, medical treatment,

and education from the temple, and thousands of crores of rupees are received.☝

Those who have doubts, please come to the comment section.

Complete arrangements have been made to address your doubts.

What does society and the country get from mosques/madrasas?

You, the general public, already know, what can I tell you?

There is one thing I learn from Muslims:

Selfless and complete devotion to their religion.

No questions, no fear, no hesitation.

Unfortunately, this quality is not seen in Hindus.⚡

The day Hindus become so devoted to their religion,

no one will be able to harm us for thousands of years.

We were eternal, we are eternal, and we will remain so. ⛳

Otherwise, it won't take long for India to become like Pakistan, Bangladesh, and Afghanistan.

There, too, Hindus, Buddhists, and Sikhs once held power.

Within the last 200 years, we have been wiped out.💡

Before the 7th century, there were no Muslims.

Today, all three are Islamic countries, and we are left in small numbers.🔥

As for the rest, go and find your own caste there 🆎??

🔴

TRN: 🛑

"मुझे 90 माइनॉरिटी बाहुल्य सीटों पर मुस्लिम MLA चाहिए, बांकी 204 सीटों पर ममता और सुवेंदु को लड़ने दो"👆

विधायक हुमायूं कबीर

ध्यान रखो, ये लोग हमेंशा एक दम क्लियर हैं, कि वोट केवल मुस्लिम प्रत्याशी को या फिर बीजेपी को हराने वाले को ही देना है, कन्फ्यूज तो केवल हिंदू समाज है।👆

"I want Muslim MLAs in the 90 minority-dominated constituencies; let Mamata and Suvendu fight it out in the remaining 204 seats." 👆

MLA Humayun Kabir

Remember, these people are always crystal clear that the vote should only go to a Muslim candidate or someone who can defeat the BJP. It's only the Hindu community that is confused. 👆

: 🛑

पैगम्बर मोहम्मद द्वारा हिन्दू, हिन्दू संस्कृति व हिन्दू मंदिरों का विनाश के बिना मोहम्मदवाद व नव मज्हुब इस्लाम की स्थापना करना सर्वथा असंभव था । 

मार्च 631 ई में, नव मज्हुब (इस्लाम) की स्थापना के साथ अपना पूजा-स्थल बना लिया होता, तो अन्य धर्मस्थलों को तोड़कर मस्जिद बनाने की परम्परा न पड़ती ।

हिन्दू मंदिरों के विनाश और उनकी जगह मस्जिदें, खानकाहें, मदरसे व ईदगाह आदि बनाने का विस्तृत विवरण सीताराम गोयल ने अपनी पुस्तक "हिन्दू टेम्पिल्स व्हाट हैपेंन्ड टू देम" (वॉइस ऑफ इंडिया, 1990-91) में दिया है, जो मुगल शासकों (1192-1707 एडी) ने ध्वस्त किए।

प्रमुख मंदिरों को तोड़कर बनाई गई मस्जिदों के कुछ उदाहरण -

● काशी विश्वनाथ मंदिर पर बनी ज्ञानवापी मस्जिद,

● मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पर बनी ईदगाह, 

● कन्नौज की दीन मस्जिद, ● इटावा की जामी मस्जिद, 

● दिल्ली की कुब्बतुल-इस्लाम मस्जिद, ● अजमेर का अढ़ाई दिन का झोपड़ा, ● जौनपुर का अटाला देवी मस्जिद, 

● विदिशा की बनी बीजा मंडल मस्जिद, ● धार की भोजशाला और लाल मस्जिद, ● मालदा के पास पंडुआ में बनी अदीना मस्जिद आदि।

ऐसा नहीं है कि यह केवल भारत में हुआ । काशी-मथुरा की तरह यहूदियों के धार्मिक स्थल ’रोनी दीवार’ जैरूसलम की भी ऐसी ही समस्या है । पहले यह समस्या यहूदियों की थी, अब अरबों की बन गई।

लगभग 2500 वर्ष पहले इजरायल में यहूदियों का आखिरी राज्य जूडिया समाप्त हो गया और यहूदी शरणार्थी बन कर दूसरे देशों में भटकने लगे । इस्लाम के फैलने के साथ जेरूसलम (यहूदी) और बैतलहम (ईसाई) धार्मिक स्थल मुसलमानों के अधिकार में चले गए ।

तुर्की सामाज्य (1098-1251) के समय मुसलमानों ने उनके धर्म-स्थलों व 'रोनी दिवार' को तोड़कर उन पर मस्जिदों का निर्माण किया ।

यहूदियों का धार्मिक स्थल ’रोनी दीवार’ 50 फुट लम्बी एक दीवार है, जिसे यहूदी अति पवित्र मानते हैं और मान्यता है कि उनके अवतारों या अति प्राचीन समय में अवतारों की याद में पूजा के लिए बनाया गया, जिस पर वे सिर रख कर रोते हैं । यही उनकी पूजा का ढंग है ।

यहूदियों के बार-बार प्रार्थना करने पर भी मुसलमानों ने उस (रोनी दीवार) को नहीं दिया और न उसपर से मस्जिद हटाई तो यहूदी उसी दीवार के अन्तिम कोने के 5-7 फुट बचे टुकड़े पर पूजा करते रहे । 

1948 में यहूदियों का एक स्वतंत्र राष्ट्र इजराइल बना और इसी के साथ अरबों तथा यहूदियों में युद्ध शुरु हो गया । जेरुसलम शहर आधा यहूदियों और आधा अरबों के अधिकार में रहा । रोनी दीवार जेरुसलम के जिस हिस्से में थी, उस पर अरबों का अधिकार था ।

1948 से 1967 तक यहूदी और इजरायल सरकार अरब मुसलमानों और समस्त मुस्लिम राष्ट्रों से यह अपील करते रहे कि उनकी भावनाओं का ध्यान करते हुए उन्हें 'रोनी दीवार' वापस कर दी जाए । 

उत्तर में वे यह कहते रहे कि वे इजराइल के सब यहूदियों को काट कर समुद्र में फेंक देंगे । आखिरकार 1967 में युद्ध भड़क उठा और यहूदियों ने सारे जेरूसलम शहर पर कब्जा कर ‘रोनी दीवार’ पर बनी मस्जिद खोदकर फेंक दी ।

1990 में ‘रोनी दीवार’ से थोड़ी दूर सड़क खुदाई करते समय एक अति प्राचीन पवित्र नाली निकली, जिसमें होकर ‘रोनी दीवार’ पर धार्मिक पूजा-पाठ को चढ़ाया जल बहकर बाहर बाग तक जाता था ।

इसका वर्णन यहूदी ग्रंथों में था, परन्तु रोनी दीवार पर मस्जिद बना लेने के बाद 800 वर्षों में इसका अस्तित्व ही कहीं लुप्त हो गया था । बाहर की ओर थोड़ा आगे जाने पर फिर उस पर मुसलमानों ने कब्रें बना डाली थीं तथा एक छोटी मस्जिद भी खड़ी कर दी थी ।

मुसलमानों से कहा गया कि वे वहां से कब्रें और मस्जिद हटा लें । उनके न सुनने पर यहूदियों ने कब्रों एवं मस्जिद को खोदकर फेंक दिया । सितंबर-अक्टूबर 1990 में इस पर अरब और यहूदियों में भयंकर झगड़े हुए ।

इजरायल ने इस पर संयुक्त राष्ट्र संघ का भी कोई आदेश मानने से इन्कार कर दिया । सारे यहूदियों को काटकर समुद्र में फेंक देने का दावा करने वाले अरब, फिलिस्तीन और दुनियाभर के मुसलमान कुछ भी नहीं कर सके ।

क्या कारण है कि इस्लाम के अनुयायी विश्व में कहीं भी भाई- चारे की भावना से काम नहीं करते और धार्मिक मसलों में अन्य धर्मावलम्बियों का दिल दुखाने में जरा भी नहीं हिचकिचाते ?

इतिहास गवाह है कि मुसलमान केवल बल प्रयोग की भाषा जानते हैं और यही समझते हैं । कम-से-कम अरब राष्ट्रों का यह राष्ट्रीय चरित्र बन गया है और यही उनकी राष्ट्रीय पहचान बन गयी है ।

मौलाना असद मदनी का कथन है कि- "इस्लाम दुनिया के सभी धर्मों से लड़ने के लिए पैदा हुआ है", सही लगता है और यही मुसलमानों की पहचान का मुख्य तत्व प्रतीत होता है। यह उनको एक धार्मिक गुट की पहचान तो देता है, जिसे मुसलमान 'मिल्लत' कहते हैं, लेकिन उनको कोई राष्ट्र की पहचान नहीं दे पाता ।

इस्लाम, किसी भी मुसलमान के लिए 'मिल्लत' पहले है और 'राष्ट्र' को बाद में रखने पर बल देता है । यहीं पर उनकी पहचान का प्रश्न दो-राहे पर आकर खड़ा हो जाता है, मुसलमान को 'मिल्लत' के रूप में पहचाना जाए या एक 'कौम-राष्ट्र' के रूप में ? 

(प्रो. ए.पी. सारस्वत, साम्प्रदायिकता : राष्ट्रीय पहचान और राष्ट्रीय एकीकरण)

@highlight 

✍️ जय किशन कर्णवाल जी

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TRN: 🛑

सांपों को दूध पिलाने का परिणाम है डसे😭 जाना ।

आज मिलिए इस शख्स से!

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इनका नाम है डॉ नाकामुरा तेत्सु!

जापानी डॉक्टर....!

ये जापान से पाकिस्तान 1984 में आये थे कुष्ठ रोगियों के इलाज के लिए। पाकिस्तान के साथ-साथ ये अफगानिस्तान में भी इलाज करते थे। इनकी एक संस्था चलती थी जिसका नाम 'पेशावर-काई' था।

सन 2000 में अफगानिस्तान में भयंकर सूखा और अकाल पड़ा। जिसमें विशेषज्ञों ने बताया कि इस अकाल से 40 लाख लोग प्रभावित होंगे और करीब 10 लाख लोग केवल भूख प्यास से मर जायेंगे। पानी की अनुपलब्धता के चलते लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हुए जिसके चलते वहाँ डिसेंट्री और डायरिया तेजी से फैलने लगा। हजारों बच्चे डायरिया के चलते प्राण त्याग रहे थे। 

ऐसे में नाकामुरा ने सोचा कि इनका इलाज तो हम बाद में भी कर लेंगे लेकिन ये पहले सर्वाइव तो कर ले.. जिंदा रहेंगे तभी तो इलाज कर पाएंगे.. और जिंदा रहने के लिए पानी सबसे पहले जरूरी है। और जब तक इसका कोई परमानेंट हल नहीं निकल जाता तब तक कुछ नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि, "दवाइयां भूखे और प्यासों का इलाज नहीं कर सकती.. अतः मैं दवाइयों के संकीर्ण फील्ड से आगे बढ़ कर कुछ करना चाहता हूँ जिससे ये लोग भूखे प्यासे न रहे। कुछ ऐसा करूँ जिससे इन्हें रोटी और पानी मिल सके।"

इसके बाद इन्होंने पूर्वी अफगानिस्तान में नहर प्रॉजेक्ट की नींव रखी.. कुनार नदी से सूखे ग्रस्त इलाके में पानी पहुंचाना.. 25 किलोमीटर का नहर..!

डॉ नाकामुरा के पास कोई सिविल इंजीनियर नहीं था या पूरे अफगानिस्तान में ऐसा कोई कैपेबल इंजीनियर नहीं था जो इस प्रोजेक्ट को कर सकते थे। डॉ नाकामुरा इंजीनियरिंग फील्ड से नहीं थे इसके बाद भी वो इस फील्ड में कूदे.. वो बार-बार जापान जाते और स्वयं ही स्टडी करते.. वहाँ के इंजीनियर्स से मिलते उनसे सलाह लेते.. प्राचीन जापानी इरीगेशन टेक्नोलॉजी का अध्ययन करते और उसको अफगानिस्तान में आ के इम्प्लीमेंट करते।

इस नहर के बदौलत 16,000 हेक्टेयर बंजर बन चुकी भूमि पुनर्जीवित हो उठी.. इससे 6 लाख लोगों के लिए फूड सिक्योरिटी प्रदान हुआ।

बीस वर्ष इन्होंने अफगानिस्तान के बेहतरी के लिए दिया.. भूख प्यास से बचाने के लिए दिया.. बंजर भूमि को हरियाली से भर दिया.. पानी से भर दिया... ! लोग इन्हें प्यार से 'काका मुराद' कहते थे।

लेकिन... लेकिन.. लेकिन... इन्हें बदले में क्या मिला ?

वही अफगानिस्तान की गोली!

दिसंबर 2019 में ये जब नहर के ही एक साइट में निरीक्षण के लिए जा रहे थे तो रास्ते में में ही तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्तान के आतंकियों ने इन्हें गोलियों से भून दिया.. जिसमें इसके साथ इनका बॉडीगार्ड और ड्राइवर भी मारा गया।

...

इससे क्या सीख मिलती है... ये आप सब स्वयं ही विचार करें?

साभार चन्द्राश्मि सिंह जी

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TRN LIVE: 🛑

रशियन मीडिया RT ने यह तस्वीर दिखाई है

 पुतिन प्लेन में बैठकर मास्को जा रहे हैं साथ में मोदी जी द्वारा दिया गया भागवत गीता जो रशियन भाषा में है उसे पढ़ रहे हैं

 मोदी जी ने एक बहुत बड़ा मास्टर स्ट्रोक चला है क्योंकि कुछ वर्ष पहले रूस के ऑर्थोडॉक्स चर्च के कुछ लोगों ने रूस में इस्कॉन संस्था को प्रतिबंधित करने की मांग किया था उसको लेकर रूस की संसद में बहस भी हुई थी

 हालांकि रूस सरकार ने इस्कॉन पर प्रतिबंध नहीं लगाया था लेकिन ऑर्थोडॉक्स चर्च के इस कदम से रूस में इस्कॉन और ज्यादा पॉपुलर हो गया

 और ऊपर से मोदी जी ने पुतिन को भागवत गीता गिफ्ट में देकर एक बेहद शानदार संदेश दिया है

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Russian media outlet RT has shown this picture:

Putin is sitting on a plane, traveling to Moscow, and reading the Bhagavad Gita, which was gifted to him by Prime Minister Modi and is in the Russian language.

Modi has played a masterstroke because a few years ago, some members of the Russian Orthodox Church had demanded a ban on the ISKCON organization in Russia, and this even led to a debate in the Russian Parliament.

Although the Russian government did not ban ISKCON, this move by the Orthodox Church made ISKCON even more popular in Russia.

And on top of that, Modi has sent a very powerful message by gifting the Bhagavad Gita to Putin.

TRN LIVE: 🛑

1965 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना की एक टुकड़ी ने हिंदू

 मंदिरों पर बमबारी करके मूर्तियाँ नष्ट कर दीं, और उन्हें

  बुत-शिकन (मूर्ति-भंजक) की उपाधि मिली।

हमारी पाकिस्तानी सेना में एक विशेष टुकड़ी है जो सिर्फ

 हिंदू मंदिरों को तोड़ने के लिए ही बनी है और इस

 डिवीजन के जवान और अधिकारी बड़े सम्मान के

 हकदार हैं क्योंकि वह बुत शिकन जैसा नेक इस्लामी

 काम करते हैं

इस्लाम में बुत शिकन की शुरुआत कहां 

से हुई आप लोग गूगल पर सर्च करिए 

और क्यों हर इस्लामी योद्धा का सपना मूर्तियों को 

तोड़ना होता है वह भी आप लोग गूगल पर सर्च करिए

 जब ISIS चीफ अबू अल बगदादी इराक में 

कब्जा किया था तब सबसे पहले उसने मेसोपोटामिया दौर की तमाम मूर्तियों को तोड़ दिया था 

और आप लोग गूगल पर सर्च करिए कि पाकिस्तान अपना नेवी दिवस किस उपलक्ष में बनता है 

जी हां पाकिस्तान ने अपनी पूरी यूनिट को लगा दिया था की द्वारकाधीश मंदिर को नष्ट किया जाए और सोमनाथ मंदिर को नष्ट किया जाए

 पहले उन्होंने कराची से जब फ्रिगेट भेजें जो ओखा होते हुए वह द्वारिका पर आए द्वारकाधीश मंदिर को निशाने पर लिया लेकिन इस समय अचानक समुद्र में ज्वार आया और उनकी फ्रिगेट 6 इंच ऊपर उठ गई और उनका कैलकुलेशन गलत हो गया और वह गोला मंदिर के ऊपर से गुजरते हुए मंदिर के आगे खाली मैदान में बैठी दो गाय के ऊपर गिरा जिससे वह दोनों गाय मारी गई

मंदिर को कुछ नहीं हुआ पाकिस्तान बफ्रिगेट को लगा कि उसने द्वारकाधीश मंदिर को नष्ट कर दिया है क्योंकि आवाज बहुत तेज आई थी उसके बाद पाकिस्तान के अखबारों में और मीडिया में खबर भी छप गई कि पाकिस्तान ने भारत के द्वारकाधीश मंदिर को नष्ट कर दिया पूरे पाकिस्तान में खुशियां मनाई गई उस वक्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उस फ्रिगेट के यूनिट को सम्मानित किया था और ऐलान किया कि आज का दिन पाकिस्तान में नेवी दिवस के तौर पर मनाया जाएगा

 उस वक्त की कांग्रेस सरकार ने एक महीने तक 

यह खबर दबा कर रखी थी कि द्वारकाधीश मंदिर

 सुरक्षित है क्योंकि यही कूटनीति होती है

 और ये दोगले क्या वे चाहते हैं कि हिंदू 1992 

 के एक विवादित ढाँचे के लिए माफ़ी मांगें? 

 कभी नहीं। हम अपने सारे मंदिर ले लेंगे ⛳

       जितेंद्र सिंह जी द्वारा

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In the 1965 war, a unit of the Pakistani army bombed Hindu temples, destroying idols, and earned the title of "idol-breakers."

Our Pakistani army has a special unit dedicated solely to destroying Hindu temples, and the soldiers and officers of this division deserve great respect because they perform the noble Islamic act of idol-breaking.

Where did the concept of idol-breaking originate in Islam? You can search for this on Google.

And why is it every Islamic warrior's dream to break idols? You can also search for this on Google.

When ISIS chief Abu al-Baghdadi seized control in Iraq, the first thing he did was destroy all the statues from the Mesopotamian era.

And you can search on Google to find out what occasion Pakistan celebrates its Navy Day for.

Yes, Pakistan deployed its entire unit to destroy the Dwarkadhish Temple and the Somnath Temple.

First, they sent frigates from Karachi, which, after passing through Okha, arrived at Dwarka and targeted the Dwarkadhish Temple. But suddenly, a high tide rose in the sea, and their frigate lifted six inches, causing their calculations to go wrong. The shell missed the temple and landed in an empty field in front of it, killing two cows that were grazing there.

The temple remained unharmed. The Pakistani frigate crew thought they had destroyed the Dwarkadhish Temple because the sound was very loud. Afterward, news was published in Pakistani newspapers and media outlets that Pakistan had destroyed India's Dwarkadhish Temple. Celebrations took place throughout Pakistan. At that time, the Pakistani Prime Minister honored the frigate's unit and declared that the day would be celebrated as Navy Day in Pakistan.

The then Congress government suppressed this news for a month, keeping it a secret that the Dwarkadhish Temple was safe, because that's how diplomacy works.

And these hypocrites, do they want Hindus to apologize for a disputed structure from 1992? Never. We will take back all our temples ⛳

By Jitendra Singh

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यहूदी जब बेबीलोन में निर्वासित जीवन जी रहे थे, तो वहां की नदियों के तट पर बैठकर येरूशलम की ओर मुंह करके रोते हुए विरह गीत गाते थे।

उन्होंने सौगंध ली थी कि हम तबतक कोई आनंदोत्सव नहीं मनाएंगे, जबतक कि हमें हमारा येरुशलम और जियान पर्वत दोबारा नहीं मिल जाता।

इस निर्वासित जीवन में यहूदियों की अपनी मातृभूमि के प्रति वेदना की तुलना हिन्दुस्तान के घुसपैठिए आक्रांताओं के कालखण्ड के दौरान अपने पूर्वजों के उत्पीड़न पर हिन्दुओं की वर्तमान सन्तति से कीजिए, जिन्हें अपनी सिमटती हुई मातृभूमि के प्रति न कोई वेदना है और न उसके सिमटने व सनातन पतन के कारण ज्ञात हैं कि वे, क्यों अफगानिस्तान से निकाले गए, क्यों पाकिस्तान से निकाले गए, क्यों बांग्लादेश से निकाले गए। और तो और सरकार, सेना, पुलिस, शासन व प्रशासन के रहते कश्मीर से निकाले गए, क्या शेष भारत में इसके लिए कोई वेदना है?

भारत को अक्षुण्ण रखने व भविष्य में अन्य राज्यों से कश्मीर की भांति कोई पलायन न हो। क्या इसके लिए कोई चिन्तन है? 

क्या इजरायल की भांति हिन्दुओं ने भी अपने पूर्वजों और मातृभूमि के प्रति कोई विरह गीत गाए जाने की परम्परा प्रारंभ की? क्या अपने छोड़े गए शहर, पहाड़, नदी व घर आदि की स्मृति को किसी रूप में संजोया? एक मात्र अपवाद नाथूराम गोडसे के आत्मोत्सर्ग के उपरांत उनकी अस्थियां आज भी भारत के झण्डे तले सिन्धु नदी में प्रवाहित किए जाने का इन्तजार कर रही हैं!

सनातन के सिकुड़ने, हार व पतन का सबसे बड़ा जीता-जागता सबूत है कि न तो हमें हिन्दुस्तान की दाई भुजा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और न बाई भुजा बंगलादेश के कटने और न कश्मीर के खण्डित सिर (पीओके) को देखकर दर्द होता है और न ही हमें हमारी खोई हुई भूमि, नदियां, पर्वत और लूटे नर-नारी, मंदिरों की खण्डित मूर्तियां व हिंदू-मस्जिदें कोई पीड़ा देते हैं!

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When the Jews were living in exile in Babylon, they would sit by the rivers, facing Jerusalem, weeping and singing songs of lamentation.

They swore that they would not celebrate any joyous occasion until they regained their Jerusalem and Mount Zion.

Compare the anguish of the Jews for their homeland during this exile to the current generation of Hindus, whose ancestors suffered persecution during the period of invading conquerors in India. This generation of Hindus feels no anguish for their shrinking homeland, nor do they understand the reasons for its contraction and continuous decline—why they were driven out of Afghanistan, why they were driven out of Pakistan, why they were driven out of Bangladesh. And even more so, why they were driven out of Kashmir despite the presence of the government, army, police, and administration. Is there any anguish for this in the rest of India?

Is there any thought given to preserving India's integrity and preventing similar exoduses from other states like Kashmir in the future?

Have Hindus, like the Israelis, established a tradition of singing songs of lamentation for their ancestors and homeland? Have they preserved the memory of their abandoned cities, mountains, rivers, and homes in any form? The only exception is the ashes of Nathuram Godse, which, after his self-sacrifice, still await immersion in the Indus River under the Indian flag!

The greatest living proof of the shrinking, defeat, and decline of Sanatan Dharma is that we feel no pain at the amputation of India's right arm (Afghanistan and Pakistan) and left arm (Bangladesh), nor at the mutilation of Kashmir (PoK). Nor do we feel any pain for our lost lands, rivers, mountains, or the looted men and women, the broken idols in temples, and the Hindu-turned-mosques!

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TRN LIVE: देश के 50 बड़े बड़े लोग सुप्रीम कोर्ट में अवैध यानि घुसपैठियों रोहिंग्या मुसलमानो के समर्थन में जी जान लगा चुके है, ये रोहिंग्या मुसलमानो के समर्थन में अपना पूरा जोर लगा रहे है

इन सभी ने रोहिंग्यों को भारत में ही रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लिखित पिटीशन दाखिल की है, इन सभी ने रोहिंग्यों के समर्थन में पिटीशन को साइन किया है

ये है बड़े #रोहिंग्या_प्रेमी 

* प्रशांत भूषण - वामपंथी वकील

* शशि थरूर - कांग्रेस नेता व् सांसद

* पि चिदंबरम - कांग्रेस नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री

* कामिनी जैस्वाल - वामपंथी वकील

* हर्ष मंदार - वामपंथी कार्यकर्त्ता

* केसी सिंह - UAE में भारत का पूर्व राजदूत

* जीके पिल्लई - पूर्व गृह सचिव

* डीपी त्रिपाठी - सांसद

* राजू रामचंद्रन - वामपंथी वकील

* मजीद मेमन - एनसीपी सांसद

* करण थापर - वामपंथी पत्रकार

* सागरिका घोसे - वामपंथी पत्रकार

* अजय शुक्ल - वामपंथी पत्रकार

* मीलों कोठरी - वामपंथी कार्यकर्त्ता

* मनोज मित्ता - वामपंथी पत्रकार

* नूपुर बासु - वामपंथी पत्रकार

* नीलांजन मुखोपाध्याय - वामपंथी पत्रकार

* योगेंद्र यादव - वामपंथी नेता, केजरीवाल का पूर्व साथी

* जॉन दयाल - हिन्दू विरोधी कार्यकर्त्ता

* तीस्ता सीतलवाड़ - हिन्दू विरोधी कार्यकर्त्ता

* मिताली शरण - वामपंथी पत्रकार

* नीतू मेनन - वामपंथी कार्यकर्त्ता

* फरहा नकवी - वामपंथी पत्रकार

* अरविन्द नारायण - NGO धंधेबाज

* सुधा भरद्वाज - वामपंथी वकील

* फेड्रिक प्रकाश - ईसाई मिशनरी

* साइरस गुडजेर - व्यापारी

* अनिल दरकार - - वामपंथी पत्रकार

* रवि कुलकर्णी - - वामपंथी पत्रकार

* गुलाम पेश इमाम - व्यापारी

* शकुंतला कुलकर्णी - वामपंथी फिल्मबाज़

* चित्रा पालेकर - वामपंथी फिल्मबाज़

* नंदन मुलसते - व्यापारी

* जावेद आनंद - हिन्दू विरोधी कार्यकर्त्ता, तीस्ता सीतलवाड़ का शौहर

* उर्वशी बुटालिया - वामपंथी पत्रकार

* स्वरा भास्कर - फिल्मबाज़

* प्रीतिश नंदी - वामपंथी लेखक

* संजय राजौरा - वामपंथी पत्रकार

* प्राणोजॉय रॉय ठाकुरता - वामपंथी पत्रकार

* संजय कक - फिल्मबाज़

* गौरी गिल - फिल्मबाज़

* राम रहमान - फोटोग्राफर

* कँवर संधू - कांग्रेस नेता

* अपूर्वानंद - वामपंथी शिक्षक

* अनुराधा चिनॉय - वामपंथी शिक्षक

* लॉरेंस लिआंग - ईसाई वकील

* निवेदिता मेनन - JNU की वामपंथी शिक्षक

* दिलीप सिमोन - वामपंथी शिक्षक

* विजय रुख्मणि - वामपंथी कार्यकर्त्ता

इन सभी ने सुप्रीम कोर्ट में अवैध घुसपैठिये रोहिंग्या मुसलमानो के समर्थन में पिटीशन दाखिल किया है!

इधर नीचे फोटो देखे जिसकी ऊँगली टूटी हो वह चला है दूसरों का सर फोड़ने पहले अपना इलाज करवा ले नहीं तो गैगरिंग हो जायेगी फिर कहा जायेगा अपना इलाज कराने भाड़ 👇

TRN: “आर्य बनाम द्रविड़” विभाजन कैसे गढ़ा गया ? 

एक और मनगढ़ंत कहानी की धज्जियाँ उड़ाई जाये ! 

मैक्स मूलर , मैकाले, नेहरू एंड कंपनी के फर्जीवाड़े को वैज्ञानिक रूप से समझें …

यह विभाजन भारतीय परंपरा में कभी था ही नहीं । अंग्रेज़ों के आने के पूर्व कहीं कोई उल्लेख नहीं है । एक भी उल्लेख नहीं । यह पूरी की पूरी एक कपोल कल्पना है , वैज्ञानिक, धार्मिक , सामाजिक रूप से इस गप्प को देखते हैं । 

भारत के किसी भी प्राचीन ग्रंथ वेद ( वेदों के शीर्ष भाग उपनिषद) किसी भी भाषा की रामायण , महाभारत , किसी भी पुराण अथवा तामिल संगम साहित्य में भी , 

कहीं भी “आर्य नस्ल बनाम द्रविड़ नस्ल” जैसा विचार विद्यमान ही नहीं है।

“आर्य” का अर्थ श्रेष्ठ आचरण वाला, सज्जन, उदार, शीलवान और “अनार्य” का अर्थ दुष्ट आचरण वाला ही माना गया है , सदैव से संपूर्ण भारतीय परंपरा में । 

अर्थात् आर्य एक नैतिक शब्द था, नस्ली नहीं।

दूसरी ओर “द्रविड़” शब्द संस्कृत के द्रविड़ / द्रमिल / तमिल से आया है । पुनः पढ़ें ( मेरे बड़े पिताजी स्वतंत्र भारत के सबसे पहले भाषा वैज्ञानिकों में से थे , द्रविड़ शब्द भी संस्कृत का है )

और यह भारत के दक्षिणी भाग भू-प्रदेश और भाषा-समूह का नाम है, यह किसी नस्ल का नहीं है जो मैकाले एंड कंपनी द्वारा गढ़ा गया । नेहरू रोमिला थापर द्वारा पोषित किया गया । 

भारत में यह विभाजन सांस्कृतिक या भाषाई विविधता था,

न कि अलग “जातियाँ” या “नस्लें”।

नस्लवाद और औपनिवेशिक मानसिकता का आधार कैसे बना इसे ध्यान से समझा जाये , 

19वीं सदी का यूरोप नस्लवाद से भरा था। बहुत कुछ आज भी है । उस समय यूरोपीय तथाकथित विद्वान मानवता को 3–4 नस्लों में बाँटते थे:

पहली Caucasian (सफेद)

दूसरी Mongoloid (पूर्वीय)

और तीसरी Negroid (अफ्रीकी)

भारत जैसी जटिल सभ्यता में उनका यह मॉडल फिट नहीं होता था, तो उन्होंने भारत को अपनी नस्ल-थ्योरी के अनुसार तोड़ना शुरू किया।

इसी से जन्म हुआ, “ आर्य = गोरे हमलावर” ( जो कि जेनेटिक थ्योरी से ग़लत सिद्ध हो चुका है । 

“द्रविड़ = काले मूल निवासी ( दक्षिणी और उत्तरी भारत की जेनेटिक समानता , वैज्ञानिक आधार पर इस असत्य सिद्ध कर रही हैं ।

तो , यह विभाजन भारतीय वास्तविकता पर नहीं, यह 

यूरोपीय नस्लवादी कपोल कल्पना पर आधारित था।

मैक्स मूलर और भाषाविज्ञान से कैसे शुरू हुआ यह भ्रम ? 

मैक्स मूलर ने इंडो-यूरोपियन भाषाओं का अध्ययन किया।

उन्होंने इंडो-आर्यन भाषा-समूह कहा जो एक भाषाई वर्गीकरण था।

लेकिन यूरोपीय विद्वानों ने इसे बना क्या बना दिया ? 

भाषा → नस्ल → आक्रमण ( इसके फर्जीवाड़े पर मैंने पूर्व में पोस्ट लिखा है उसे देख लें ) 

जबकि भाषा का फैलाव कई तरह होता है जैसे व्यापार, संस्कृति, प्रव्रजन, शिक्षा, विवाह अर्थात हर जगह आक्रमण नहीं होता। लेकिन युरोपियन को लड़ाई के अतिरिक्त न तब दिखता था न आज कुछ दिख रहा है ।

अर्थात् भाषा = नस्ल = आक्रमण , यह एक कुटिल औपनिवेशिक तर्क था, वैज्ञानिक नहीं। पुनः पढ़ें यह एक औपनिवेशिक सोच थी जिसका आज का विज्ञान खण्डन कर रहा है । 

पुनः कह रहा हूँ कि पुनः पढ़ें विज्ञान की हर धारा औपनिवेशिक तर्कों का खण्डन कर रही है । 

ब्रिटिश शासन ने “Divide and Rule” के लिए ही इसे प्रचारित किया और काले अंग्रेज़ों ने 1947 के बाद पोषित किया ।

क्योंकि ब्रिटिश नीति स्पष्ट थी कि भारत को बाँटो, जिससे कि वह दुर्बल हो जाए और इसलिए उन्होंने नकली मनगढ़ंत विभाजन बनाए:

आर्य बनाम द्रविड़

उत्तर बनाम दक्षिण ( जबकि हमारे लिये वह दिशा का सूचक है )

आर्य भाषा बनाम द्रविड़ भाषा

सभ्य आर्य बनाम असभ्य द्रविड़

ब्राह्मण बनाम शूद्र

ब्रिटिश प्रशासक रॉबर्ट काल्डवेल ने 1856 में पहली बार

“द्रविड़” को एक अलग नस्ल बताया, जो शोध से नहीं, राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित था।

और फूले पचके सकपाल इत्यादि निर्मित किये गये । 

स्कूल-कॉलेजों में यही सिद्धांत पढ़ाया गया ताकि भारतीय आपस में लड़ें

AIT (आर्यन इनवेज़न थ्योरी) और Dravidian-Race Theory दोनों को शिक्षा प्रणाली में शामिल किया गया।

नेहरू , रोमिला , गुहा ने मनगढ़ंत इतिहास लिखे ।

परंतु: आज , न पुरातत्व इसका समर्थन करता है, न DNA इसका समर्थन करता है , न प्राचीन साहित्य और न सांस्कृतिक निरंतरता के तथ्य । 

यह पूरी तरह यूरोप की काल्पनिक नस्ल-थ्योरी थी। मनगढ़ंत और विकृत भ्रम फैलाया गया । 

आधुनिक विज्ञान ने इन सिद्धांतों को गलत सिद्ध किया

आनुवंशिकी विज्ञान ( DNA) क्या कहती है ? 

उत्तर और दक्षिण भारतीयों का DNA अधिकतर समान

कोई “अलग नस्ल” नहीं

कोई “बाहरी आर्य” नहीं

कोई अचानक आनुवंशिक बदलाव नहीं

सब भारतीय एक ही प्राचीन मूल जनसंख्या के अंग

पुरातत्व विज्ञान क्या कहती है ? 

सिंधु , वैदिक संस्कृति में निरंतरता

किसी भी बाहरी आक्रमण का प्रमाण नहीं ( आक्रमण सातवीं सदी के बाद अरब से हुआ ) 

कोई जनसंख्या replacement नहीं

भाषाविज्ञान क्या कहता है ?

भाषाएँ अलग हो सकती हैं,

पर भाषाओं से नस्ल नहीं बनती। लगभग सभी भारतीय भाषाओं में अद्भुत समानताएं भी हैं । 

आज इतिहासकार क्या मानते हैं? ( वे इतिहासकार जिनमें थोड़ा बहुत सत्य कहने का साहस है । 

कि “ आर्य” एक सांस्कृतिक शब्द है 

कि द्रविड़” = भाषाई/भौगोलिक शब्द है 

कि नस्ल-आधारित विभाजन = औपनिवेशिक निर्माण 

कि भारत की सभ्यता = सतत, मिश्रित, साझा, प्राचीन विकास

अब इसे कहा जाता है कि शेयर की हुई सभ्यता—Shared Civilizational Heritage”

किसी एक समूह की देन नहीं।

संतों के आधार पर देखा जाये , 

आदि शंकराचार्य (केरल) दक्षिण भारत के विद्वान , संपूर्ण भारत में मठ स्थापित किए , श्रृंगेरी , बदरीनाथ, द्वारका और पुरी । भगवद्पाद के दर्शन “अद्वैत वेदांत” को भारत के उत्तरी भाग , दक्षिणी भाग , पूर्वी भाग और पश्चिमी भाग में समान रूप से अपनाया । उनके शिष्य पूरे भारत में फैले

यदि उत्तर–दक्षिण विभाजन होता तो यह संभव ही नहीं था।

रामानुजाचार्य (तमिलनाडु) , भगवान रामानुज , श्रीवैष्णव दर्शन के प्रवर्तक , उनके अनुयायी पूरे भारत में फैले

वेद, उपनिषद, भगवद्गीता , सभी को दक्षिणी भारत से समझाया और प्रतिष्ठित किया , 12 आलवारों की भक्ति को वैदिक दर्शन से जोड़ा

उनकी परंपरा दिखाती है कि पूरे भारत की आस्थाएँ एक-दूसरे की निरंतरता हैं, विरोध नहीं।

मध्वाचार्य (कर्नाटक) भगवान मध्व, द्वैत दर्शन के प्रवर्तक

वेदांत परंपरा को दक्षिणी भाग से उत्तरी भारत तक जोड़ने वाले आचार्य , बदरीनाथ तक यात्रा कर वेद-व्यास से दीक्षा लेने का वर्णन

नयनमार–आलवार संत ( तमिल भक्ति आंदोलन)

शिव और विष्णु की आराधना को वेदों और आगमों से जोड़ा

भक्ति-युग में उत्तर भारतीय आराध्यदेव , राम, कृष्ण, दक्षिणी भारत में उतनी ही श्रद्धा से प्रतिष्ठित हुए । इससे स्पष्ट है कि सांस्कृतिक एकता गहरी थी, नस्लीय विभाजन नहीं।

तिरुवल्लुवर (तिरुक्कुरल) उनका ग्रंथ नैतिकता, धर्म, न्याय, अहिंसा का सार्वभौमिक ग्रंथ है, पूरे भारत में सम्मानित और वेदांत और भारतीय दर्शन से सहज जुड़ाव

ऐसे सैकड़ों संतों का उदाहरण है , और हर सदी का है । 

यह सब एक ही बात सिद्ध करता है कि भारत एक संयुक्त सभ्यता है

यदि भारत में सचमुच “आर्य बनाम द्रविड़” जैसी नस्ली दुश्मनी होती , तो शंकर, रामानुज, बसवन्ना, माध्वाचार्य जैसी परंपराएँ पूरे भारत में क्यों फैलतीं?

दक्षिणी भाग के सुदूर मंदिर में गंगोत्री का जल और दक्षिणी भाग की सुपारी बदरीनाथ भगवान को अनादि काल से चढ़ती रही । 

भक्ति आंदोलन पूरे उपमहाद्वीप में एक जैसा कैसे हुआ?

देवी–देवता, दर्शन, कला, संगीत—सबमें समानता कैसे?

सच्चाई एक वाक्य में

भारत कभी आर्य बनाम द्रविड़ नहीं था।

यह विभाजन अंग्रेज़ों ने बनाया और विज्ञान ने उसे ख़ारिज कर दिया।

भारत एक ऐसी सभ्यता है

जहाँ उत्तर–दक्षिण–पूर्व–पश्चिम सब की सब दिशाओं का नाम है सब एक-दूसरे से हजारों वर्षों से जुड़े हुए हैं।

नमस्कार 

🙏🌷🙏

नारायण नारायण नारायण

TRN LIVE: मुझे पुतिन से मिलने नहीं दिया जा रहा है। मैं पुतिन से मिलकर उनको बताना चाहता हूं कि

 महाभारत में GST नहीं थी ।

महाभारत में सभी जाति के लोग लड़ रहे थे ।

आंटा 40 रु लीटर बिक रहा है ।

 हमारे देश की आबादी 1 अरब 40 करोड़ रुपये है..

हमारे यहां ऐसी भी महिलाएं हैं जो एक साल में ५२ बच्चे देती हैं।

हमारी तकनीक से किसान एअरपोर्ट पे अपना माल बेच सकते हैं।

 और कांग्रेस पार्टी ने आलू से सोना बनाना सीख लिया है ।

राहुल खान🙄😜😂

TRN LIVE: *भारत रूस की गहरी मजबूत दोस्ती का असर* 👆👇💪

*अमेरिका के पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन ने एक ऐसा बयान दिया* है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। *उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश घोषित किया जाना चाहिए* , क्योंकि दुनिया भर में फैले अस्थिर माहौल के पीछे उसकी भूमिका किसी से छिपी नहीं है। रुबिन ने यहां तक कह दिया कि अगर पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अमेरिका आएं, तो उन्हें सम्मान नहीं बल्कि गिरफ्तारी का सामना करना चाहिए।

रुबिन यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि *पिछले एक साल में अमेरिका ने भारत के साथ जैसा व्यवहार किया है, उसके लिए उसे खुलकर माफी मांगनी चाहिए* । यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के रिश्तों पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। रुबिन का यह बयान भारत की वैश्विक स्थिति और अमेरिका की नीति दोनों पर बड़ा सवालचिह्न लगाता है।✅

TRN: डॉ अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशेष रूप से प्रकाशित 

भेड़ की खाल में भेड़िया

किसी ने मुझसे पूछा की भेड़ की खाल में भेड़िया का उदाहरण दो।

मैंने कहा आज के समाज में भेड़ की खाल में भेड़िया का सबसे सटीक उदाहरण "दलित चिंतक/विचारक" हैं। जो खाते इस देश का है, आरक्षण भी इस देश लेते है और गाली भी इस देश को ही देते है। कुछ उदाहरण द्वारा मैं इस तथ्य को समझाना चाहता हूँ।

1. दलित चिंतक हर हिन्दुत्व वादी को ब्राह्मण वाद, मनुवाद के नाम पर गाली देते हैं। इसमें वो हिन्दू भी शामिल हैं जो जातिवाद को नहीं मानते और परस्पर सहयोग से जातिवाद का नाश करना चाहते है।

2. दलित चिंतक पाकिस्तान ज़िंदाबाद, कश्मीर में आज़ादी जैसी मांगो को करने वाले अलगाव वादियों के साथ खड़े दिखाई देते हैं। यह एक प्रकार का राष्ट्रद्रोह हैं। वे भारतीय सेना के कश्मीर की रक्षा में दिए गए योगदान को जनता से अनभिज्ञ रखकर भारत विरोधी नारे बाजी और सेना पर पत्थरबाजी करने वालों को महिमा मंडित करते दिखाई देते हैं।

3. दलित चिंतक भारतीय संस्कृति, वेद, दर्शन, उपनिषद आदि की पवित्र शिक्षाओं को जानते हुए भी विदेशी विद्वानों के घिसे पिटे अधकचरे और भ्रामक अनुवादों को शोध के नाम पर रटते/गाते रहते हैं। उनका उद्देश्य प्राचीन महान आर्य संस्कृति को गाली देना होता हैं। JNU जैसे संस्थानों से हर वर्ष शोध के नाम पर ऐसा कूड़ा कचरा ही छपता हैं।

4. भारतीय संविधान निर्माता डॉ अम्बेडकर द्वारा बनाये गए संविधान के आधार पर दोषी देश द्रोही अफ़जल गुरु, याकूब मेनन जैसो की फांसी का करना हमारे संविधान की अवमानना करने के समान हैं। इस प्रकार से ये भेड़िये डॉ अम्बेडकर के किये कराये पर पानी फेर रहे हैं।

5. डॉ अम्बेडकर को हैदराबाद के निज़ाम ने इस्लाम स्वीकार करने के लिए भारी प्रलोभन दिया था। उन्होंने देशभक्त के समान उसे सिरे से नकार दिया था। NGO धंधे की आड़ में दलित चिंतक विदेशों से पैसा लेकर भारत को कमजोर बनाने में लगे हुए हैं। वे विदेशी ताकतों के इशारे पर देश तोड़क कार्य करते हैं।

6. कहने को दलित चिंतक अपने आपको महात्मा बुद्ध का शिष्य बताते हैं। अहिंसा का सन्देश देने वाले महात्मा बुद्ध के शिक्षा बीफ़ फेस्टिवल बनाकर गौमांस खाकर अपनी अहिंसा का साक्षात प्रदर्शन करते हैं। इनसे बड़े दोगले आपको देखने को नहीं मिलेंगे। क्योंकि ऐसी गतिविधि का उद्देश्य केवल और केवल सामाजिक एकता का नाश होता हैं।

7. जब भी देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगे होते है। तब मुसलमान दंगाई यह भेद नहीं देखते की हिन्दू स्वर्ण हैं अथवा दलित। उनके लिए तो सभी काफ़िर हैं। दंगों में सभी स्वर्ण और दलित हिन्दुओं की हानि होती हैं। जमीनी हकीकत यही है। दंगे शांत होने पर दलित चिंतक दलितों को मुसलमानों द्वारा जो प्रताड़ित किया गया उसकी अनदेखी कर 'मुज्जफरनगर अभी बाकि है' जैसी वृत्तचित्रों का समर्थन करते है। इसे दलितों की पीठ पीछे छुरा घोंपना कहा जाये तो सटीक रहेगा।

8. मुसलमानों द्वारा लव जिहाद में फंसाकर स्वर्ण और दलित दोनों हिन्दुओं की लड़कियों का जीवन बर्बाद किया जाता हैं। इस सोची समझी साज़िश की अनदेखी कर दलित चिंतक लव जिहाद षड्यंत्र को कल्पना बताने वालों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े दिखाई देते है। इस पर आप ही टिप्पणी करे तो अच्छा हैं।

9. मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करने को डॉ अम्बेडकर गलत मानते थे। आज अधिकतर दलित चिंतक केवल नाम से हिन्दू हैं। वे धर्म परिवर्तन करने वालों का कभी विरोध नहीं करते और उनका खुला समर्थन करते हैं। इस प्रकार से उन्होंने डॉ अम्बेडकर को भी ठेंगा दिखा दिया।

10. कुछ राजनीतिक दल दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कवायद में नारे लगाते हैं। डॉ अम्बेडकर द्वारा अपनी पुस्तक थॉट्स ओन पाकिस्तान में इस्लाम की मान्यताओं द्वारा जातिवाद की समस्या का समाधान होने का स्पष्ट निषेध किया था। डॉ अम्बेडकर ने पाकिस्तान बनने पर सभी दलितों को पाकिस्तान छोड़कर भारत आकर बसने के लिए कहा था। क्योंकि उन्हें मालूम था की इतिहास में मुस्लिम आक्रमणकारियों ने हिन्दू-बौद्ध समाज पर कैसे कैसे अत्याचार किये हैं। दलित चिंतक राजनीतिक तुच्छ लाभ के लिए मुस्लिम नेताओं के हाथ की कठपुतली बन डॉ अम्बेडकर की अवमानना करने से पीछे नहीं रहते।

यह कुछ उदाहरण हैं। आपको जितने भी वैदिक धर्म-देश और जाति के विरोध में देश में कार्य दिखेंगे उसमें भेड़ की खाल में भेड़िये आसानी से नज़र आ जायेंगे। आइये जातिवाद का नाश कर एक आदर्श समाज का निर्माण करे। जिसमें सभी एक दूसरे के साथ भ्रातृत्व व्यवहार करे।

#डॉ_विवेक_आर्य

#Ambedkar

TRN: ममता बनर्जी के छलावे में 

न आएं हिंदू -

“हुमायूँ कबीर” को पार्टी से 

निकालना एक धोखा है -

बाबर की औलादें क्या भाईचारा 

और गंगा जमुनी तहजीब की 

बात करेंगी - 

ममता बनर्जी ने पिछले 15 वर्षों में केवल मुस्लिमों के पक्ष में खड़े हो कर बंगाल में हिंदुओं का दमन ही किया है - अभी SIR से खतरा लग रहा है ममता को कि मुस्लिम वोट बैंक बांग्लादेश चला जाएगा तो इसलिए हिंदुओं को पुचकारने के लिए “बाबरी” के नाम पर हुमायूँ कबीर को पार्टी से निकाल दिया लेकिन उसने फिर भी “बाबरी” का शिलान्यास कर दिया जिसका मतलब है अपनी पार्टी में ही “भाईचारा और गंगा जमुनी तहजीब” ख़त्म कर दी - हुमायूँ कबीर तो नाम से ही बाबर की औलाद है फिर अपना नाम “बाबर” ही क्यों नहीं रख लेता -

कांग्रेस का इमरान मसूद सुशांत सिन्हा को कह रहा था कि मुसलमान लोकसभा में सबसे कम रह गए है क्योंकि उन्हें “अछूत” बना दिया गया है - प्रश्न ये है कि उसके लिए जिम्मेदार कौन है - वो यह भी कह रहा था कि जिन्ना ने देश को तोड़ कर सबसे ज्यादा नुकसान मुसलमानों का किया - लेकिन सच यह भी है कि 95% मुसलमानों ने पाकिस्तान मांगा था लेकिन पाकिस्तान गए नहीं - 

आज भारत में महमूद, अरशद मदनी और ओवैसी के नेता नदवी चीख रहे हैं कि जब हमारे ऊपर जुल्म होगा हम जिहाद करेंगे - पाकिस्तान बना कर भी तो जिहाद ही किया था और जब जिन्ना ने साफ़ कह दिया था कि हिंदू और मुसलमान दो कौम एक साथ नहीं रह सकती तो फिर देश के विभाजन के बाद मुसलमानों को भारत में रहने का तो कोई अधिकार था ही नहीं - साथ नहीं रह सकते थे तो फिर विभाजन के बाद साथ रहने का फितूर क्यों आया दिमाग में 

पाकिस्तान में आज क्या हो रहा है - वहां मुसलमानों पर कौन जुल्म कर रहा है, वहां तो कोई मोदी नहीं है और जब पाकिस्तान के मुसलमान आपस में “भाईचारा” और गंगा जमुनी तहजीब नहीं निभा पा रहे तो ये गाना भारत में क्यों गाते हो - जहां इस्लाम पैदा हुआ उस सऊदी अरब समेत करीब 20 मुल्क ऐसे हैं जिनमें गंगा और जमुना तो छोड़ो, कोई भी नदी नहीं है और इनमें अधिकांश इस्लामिक मुल्क है, फिर गंगा जमुनी तहजीब का पाठ भारत में हिंदुओं को क्यों पढ़ाया जाता है -

इमरान मसूद और बड़े बड़े मुस्लिम नेता फिर “अछूत” बनाए जाने की बात क्यों करते हैं जब आज भी भारत के मुसलमान इस्लामिक लुटेरों और मुग़लों को अपना पूर्वज मानते हैं और मुस्लिम लीडर्स उन्हें ऐसा करने के लिए उकसाते हैं - अछूत तो मुस्लिम खुद को कर रहे हैं - उन्हें शिकायत रहती है कि भाजपा उन्हें विधानसभा और लोकसभा के लिए टिकट नहीं देती और न मुस्लिम मंत्री बनाती है, इस शिकायत का क्या आधार है जब मुस्लिम भाजपा को वोट ही नहीं देते तो वो टिकट क्यों दे और क्यों मंत्री बनाए लेकिन फिर हर योजना के लाभ से मुसलमानों को वंचित भी नहीं किया जाता पर वोट मुसलमानों का केवल कांग्रेस और सेकुलर दलों को जाता है -

मुस्लिम खुद को अछूत बना रहे हैं - दिल्ली में मुस्लिम डॉक्टरों द्वारा किए आतंकी हमले की किसी मुस्लिम लीडर द्वारा निंदा करना तो छोड़िए, अनेक उनके समर्थन में खड़े हो गए यह कहते हुए कि इतने पढ़े लिखे लोग आतंकी क्यों बन रहे हैं - हर कौम के पढ़े लिखे लोग तो आतंकी नहीं बन रहे केवल मुस्लिम ही क्यों बन रहे हैं -

अल्लामा इक़बाल ने “हिंदी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा” लाइन पाकिस्तान बनने के बाद बदल दी थी “मुस्लिम हैं हम वतन हैं, सारा जहाँ हमारा” लेकिन आज उस पाकिस्तान का अस्तित्व ही खतरे में है जहाँ की तो बात छोड़िए - भारत में तो जुल्म होने का बहाना बना देते हैं मुस्लिम लेकिन दुनिया भर में इस्लामिक देशो में और जहां मुस्लिमों ने घुसपैठ की है या शरणार्थी बन कर गए, वहां उन पर कौन जुल्म करता है ।

TRN: ❗ *क्या हमारा समाज अगली सदी तक रहेगा ही नहीं?*

- एक गहन आत्ममंथन, हिन्दू समाज की आंखें खोलने वाला लेख -

 समाज के चारों ओर अंधकार ही अंधकार

 • बेटियाँ 30–35 की उम्र तक कुंवारी।

 • बेटे भी 35 पार कर चुके, लेकिन विवाह नहीं।

 • शादी होती है तो देरी से…

 • बच्चे होते हैं तो एक ही…

 • और फिर तलाक़… टूटे हुए परिवार…

 • वृद्ध माता-पिता अकेले…

 • और पूरी पीढ़ी खोखली।

क्या हम इसे “शिक्षित समाज” कहें? 

या आत्मघाती समाज?

⚠️ जनसंख्या घटने की चुपचाप चलती साजिश

एक उदाहरण से समझिए:

 • आज समाज में 100 लोग हैं = 50 जोड़े।

 • यदि हर जोड़ा सिर्फ एक ही संतान पैदा करता है,

तो अगली पीढ़ी में अधिकतम 45-46 संतानें (कुछ निःसंतान जोड़े मान लें)।

 • फिर वे भी एक-एक संतान करें — तो अगली पीढ़ी में 20–22।

 • और तीसरी पीढ़ी में समाज शून्य के करीब।

👉 यह कोई अनुमान नहीं — यह गणित है, और यह हो चुका है!

आज समाज के गांव उजड़ चुके हैं।

शहरों में बड़ी इमारतें हैं, पर उनमें कोई संयुक्त हिन्दू परिवार नहीं बचा।

❗ क्यों नई बहुएँ एक ही संतान चाहती हैं?

 • ताकि जीवन का “आनंद” ले सकें❗

 • ताकि करियर न रुके❗

 • ताकि “डिलीवरी” में शरीर न बिगड़े❗

 • और कहीं कोई “बांज” न कहे, इसलिए बस एक बच्चा — वो भी देर से❗

👉 क्या यही धर्म है❓

👉 क्या यही समाज का भविष्य है❓

🔥 सच यह है कि संतान अब ‘सोशल प्रूफ’ बन चुकी है — स्नेह नहीं।

 • बच्चे अब प्रेम का परिणाम नहीं,

समाज को दिखाने की वस्तु बन चुके हैं।

यह सोच मूल्यहीन है, धर्महीन है, और भविष्यविहीन है।

 सबसे बड़ा दोष लड़की के पिता का है!

 • वही पिता, जिसने खुद 22–25 की उम्र में विवाह कर लिया था।

 • पत्नी के साथ समय बिताया, परिवार बसाया, संतान पाई।

 • आज वही अपनी बेटी को 30 तक कुंवारी रखता है —

कभी करियर के नाम पर,

कभी “बढ़िया लड़का नहीं मिल रहा” कहकर,

तो कभी दहेज व प्रतिष्ठा का हवाला देकर।

👉 बेटी को सिर पर बैठाकर, आपने उसे रिश्तों से दूर कर दिया।

👉 अब वही बेटी अवसाद में, IVF में, या तलाक़ में जा रही है।

📉 आज हिन्दू समाज में क्या चल रहा है?

 • विवाह की औसत आयु: लड़के – 32 वर्ष, लड़की – 29 वर्ष

 • औसतन संतान: 1 या 0.5 प्रति दंपत्ति

 • डिवोर्स रेट: भारत में सबसे तेज़ वृद्धि दर कर रहा हे हिन्दू समाज में

 • प्रजनन क्षमता की समस्या: हर 4 में 1 दंपत्ति को संतान होने में समस्या

 • विवाह योग्य युवक/युवतियाँ कुंवारे — हज़ारों की संख्या में

🧘‍♂️ और समाज के अध्यक्ष क्या कर रहे हैं?

 • मौन।

 • समाज के मूलभूत संकट पर कोई चर्चा नहीं।

 • विवाह, परिवार और संतान को त्याज्य मान लिया गया है।

 • लेकिन यह धर्म नहीं — पलायन है!

👉 विवाह भी एक धार्मिक कर्तव्य है — यह कोई सांसारिक बंधन नहीं,

बल्कि वंश और धर्म की निरंतरता का माध्यम है।

💥 हमने क्या किया? — एक आत्म-स्वीकृति

 • बेटी को “राजकुमारी” बनाकर विवेक से वंचित किया।

 • बेटे को जिम्मेदारी से दूर कर दिया।

 • विवाह को टालते रहे,

और जब किया तो देरी से — शरीर साथ नहीं देता।

 • जब बच्चे हुए — तो सिर्फ एक।

 • और जब रिश्ता बिगड़ा —

तो बेटी अकेली, बेटा टूट गया, और घर बिखर गया।

👨‍👩‍👧‍👦 अब क्या करना होगा?

🔷 समय पर विवाह को अनिवार्य बनाएँ।

22 के बाद पुत्र, 20 के बाद पुत्री — विवाह हो जाना चाहिए।

🔷 एक नहीं, कम से कम तीन संतानें — यह आवश्यक है।

“बस एक बच्चा” — यह मानसिकता समाज को शून्य पर ला रही है।

🔷 अध्यक्षों और प्रबुद्धजन को सामाजिक विषयों पर बोलना ही होगा।

समाज का विनाश धर्म से भी बड़ा प्रश्न है।

🔷 लड़की के पिता को अब सजग होना होगा।

अपेक्षाएँ नहीं, समझदारी लानी होगी।

बेटी की ज़िंदगी बचानी है तो समय पर विवाह कराओ।

 अंतिम चेतावनी — अब नहीं चेते तो इतिहास में रह जाएगा ‘हिन्दू समाज’

 • ना युवक होंगे, ना युवतियाँ

 • ना संतानें होंगी, ना संस्कार

 • ना समाज होगा, ना मंदिर

🙏🚩🙏

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला