Greenland Security: जब ग्रीनलैंड की नहीं है अपनी कोई सेना तो कौन करता है उसकी सुरक्षा, अमेरिका ने हमला किया तो कौन बचाएगा?

Jan 10, 2026 - 18:21
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Greenland Security: जब ग्रीनलैंड की नहीं है अपनी कोई सेना तो कौन करता है उसकी सुरक्षा, अमेरिका ने हमला किया तो कौन बचाएगा?

Greenland Security: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से खुलकर यह कह दिया है कि रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करेगा. ग्रीनलैंड को हासिल करने के बारे में यह अब तक का सबसे साफ और सीधा बयान है. इसी बीच आइए जानते हैं कि जब ग्रीनलैंड की अपनी कोई सेना नहीं है तो उसकी सुरक्षा कौन करता है.

ग्रीनलैंड के पास नहीं है कोई सेना

ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य के अंदर एक सेमी ऑटोनॉमस क्षेत्र है. हालांकि यह कई घरेलू मामलों को कंट्रोल करता है लेकिन रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क की जिम्मेदारी बनी हुई है. इसका सीधा सा मतलब है कि ग्रीनलैंड को अपनी सेना की जरूरत नहीं है. इसकी सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत डेनिश राज्य द्वारा संभाली जाती है. इससे ग्रीनलैंड के खिलाफ कोई भी सैन्य हमला डेनिश पर हमला माना जाएगा.

ग्रीनलैंड में डेनमार्क की सैन्य भूमिका 

डेनिश सशस्त्र बल को सामूहिक रूप से डेनिश रक्षा के रूप में जाना जाता है. यह ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होती है. इसे मैनेज करने के लिए डेनमार्क एक खास संयुक्त आर्कटिक कमान चलाता है. इसे ग्रीनलैंड और फरो आईलैंड्स में संप्रभुता लागू करने, निगरानी और सैन्य रक्षा का काम सौंपा गया है.

अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है तो क्या होगा 

व्यावहारिक रूप से इसे काफी असंभव माना जाता है क्योंकि डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो के संस्थापक सदस्य हैं. हालांकि कानूनी और सैन्य रूप से इसके परिणाम काफी बड़े होंगे. नाटो संधि के अनुच्छेद 5 के तहत डेनमार्क जिसमें ग्रीनलैंड भी शामिल है, पर हमला सभी नाटो सदस्यों पर हमला माना जाएगा. 

डेनमार्क के स्थायी सैन्य आदेश

एक जरूरी बात यह है कि डेनमार्क का एक सैन्य निर्देश 1952 का है जो अभी भी लागू है. इस आदेश के तहत ग्रीनलैंड में डेनिश सेना को यह अधिकार है कि अगर विदेशी सेनाएं बिना इजाजत के इलाके पर कब्जा करने की कोशिश करती है तो वह पहले गोली चलाएं बाद में सवाल पूछें के आदेश को फॉलो करेंगे. अगर संयुक्त राज्य अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है तो इससे नाटो के अंदर एक बड़ा संकट पैदा हो जाएगा. सहयोगी देशों को डेनमार्क की रक्षा करने या फिर गठबंधन के सबसे शक्तिशाली सदस्य का सामना करने के बीच एक बड़ी दुविधा का सामना करना पड़ेगा.

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला