Khaleda Zia Death: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का क्या था भारत से खास कनेक्शन?
बांग्लादेश की राजनीति की दिग्गज नेता और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार (30 दिसंबर 2025) को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस खबर की पुष्टि की. खालिदा जिया लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं और ढाका के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था.
BNP के अनुसार, खालिदा जिया लिवर सिरोसिस, गठिया, डायबिटीज, सीने और दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थीं. उनकी हालत काफी समय से नाजुक बनी हुई थी और उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था. आखिरकार इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली.
कौन थीं खालिदा जिया
खालिदा जिया का जन्म 1946 में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में हुआ था, जो उस समय अविभाजित दिनाजपुर जिले का हिस्सा था. उन्होंने बांग्लादेश की राजनीति में एक मजबूत पहचान बनाई और 1991 के बाद तीन बार देश की प्रधानमंत्री रहीं. वह बांग्लादेश की पहली महिला थीं, जिन्हें लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री चुना गया.
जियाउर रहमान से शादी और राजनीति में प्रवेश
खालिदा जिया की शादी बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान से हुई थी, जिनकी 1981 में हत्या कर दी गई थी. जियाउर रहमान के राष्ट्रपति बनने के बाद खालिदा जिया देश की फर्स्ट लेडी बनीं. उनके निधन के बाद ही खालिदा जिया ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा.
BNP में अहम भूमिका
पति की मौत के बाद खालिदा जिया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) में एक सामान्य सदस्य के रूप में शामिल हुईं. 1983 में उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया और एक साल बाद वह BNP की चेयरपर्सन चुनी गईं. इसके बाद उन्होंने पार्टी को एक नई दिशा दी और बांग्लादेश की राजनीति में एक मजबूत विपक्षी चेहरा बनकर उभरीं.
तानाशाही शासन के खिलाफ आंदोलन की अगुआ
खालिदा जिया को 1983 में बने सात-दलीय गठबंधन का मुख्य सूत्रधार माना जाता है. इस गठबंधन का उद्देश्य तत्कालीन सैन्य शासक जनरल हुसैन मोहम्मद इरशाद के शासन को समाप्त करना था. उनके नेतृत्व में चला आंदोलन बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास का अहम अध्याय माना जाता है.
राजनीतिक विरासत
खालिदा जिया का नाम बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना के साथ लंबे समय तक चले सत्ता संघर्ष के लिए भी जाना जाता है. उन्होंने दशकों तक देश की राजनीति को प्रभावित किया और महिला नेतृत्व की एक मजबूत मिसाल पेश की.
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