US Iran War Ceasefire: 15 दिन के सीजफायर से क्या कम होगा फ्लाइट का किराया, फ्यूल सरचार्ज पर क्या पड़ेगा असर?
Iran US Ceasefire: दुनिया भर में छाई युद्ध की काली घटाएं अब छंटने लगी हैं. अमेरिका और ईरान के बीच 15 दिनों के सीजफायर ने न केवल बंदूकों को खामोश किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरते तेल के दामों ने नई उम्मीद जगाई है. अगर आप भी महंगे हवाई टिकटों और बढ़ते फ्यूल सरचार्ज से परेशान थे, तो यह खबर आपके लिए राहत का पैगाम लेकर आई है. कच्चे तेल के भाव में आई इस बड़ी गिरावट का सीधा संबंध आपकी अगली फ्लाइट और ऑनलाइन डिलीवरी के खर्चों से है.
युद्धविराम की घोषणा और ट्रंप का बड़ा कदम
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष विराम का ऐलान कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान द्वारा दिए गए 10 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को बातचीत का आधार बनाया जाएगा. यह कदम वैश्विक राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है. हालांकि, ईरान ने इस समझौते के बदले अपने हुए नुकसान के मुआवजे की मांग भी रखी है. इस शांति समझौते का सबसे अहम हिस्सा है होर्मुज व्यापारिक मार्ग का खुलना, जिसने तनाव के कारण पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को बाधित कर रखा था.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से हटेगी सबसे बड़ी बाधा
दुनिया के तेल वितरण की लाइफलाइन माना जाने वाला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब दोबारा पूरी तरह सक्रिय हो सकेगा. ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते इस रास्ते से होने वाली तेल की सप्लाई पर संकट मंडरा रहा था. इस जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी ऑक्सीजन से कम नहीं है. यहीं से दुनिया के एक बड़े हिस्से का तेल एक्सपोर्ट होता है. इसके सुरक्षित होने से अब तेल कंपनियों को लंबी दूरी तय करने या जोखिम भरे रास्तों की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे लॉजिस्टिक खर्च कम होगा.
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कच्चे तेल की कीमतों में आई ऐतिहासिक गिरावट
जैसे ही युद्धविराम की खबर बाजार में फैली, कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है. ग्लोबल मार्केट में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत करीब 17 प्रतिशत तक गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई है. वहीं, ब्रेंट क्रूड भी 16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92 डॉलर के स्तर पर आ गया है. कुछ ही समय पहले ये कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रही थीं. तेल के दामों में इतनी बड़ी कमी आने से अब यह साफ हो गया है कि इसका असर सीधे तौर पर पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन की कीमतों पर देखने को मिलेगा.
हवाई किराए में कमी की संभावना
हवाई यात्रियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि 15 दिनों के इस सीजफायर से फ्लाइट के टिकट सस्ते हो सकते हैं. दरअसल, हवाई टिकट की कुल कीमत में एक बड़ा हिस्सा हवाई ईंधन यानी एटीएफ (ATF) का होता है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होता है, तो एयरलाइंस कंपनियों का परिचालन खर्च कम हो जाता है. कंपनियां इस बचत का फायदा यात्रियों को किराए में कटौती के रूप में दे सकती हैं. तनाव कम होने से अब बाजार को उम्मीद है कि हवाई सफर फिर से आम आदमी की पहुंच में आ सकेगा.
फ्यूल सरचार्ज और आम आदमी को राहत
पिछले कुछ समय से एयरलाइंस और ई-कॉमर्स कंपनियों ने बढ़ते तेल के दामों के कारण फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया था. अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों ने भी शिपिंग पर अतिरिक्त शुल्क बढ़ा दिए थे. अब चूंकि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है, तो ये कंपनियां 3.5% या उससे अधिक के अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज को वापस ले सकती हैं. इसका मतलब है कि न केवल आपका सफर सस्ता होगा, बल्कि ऑनलाइन शॉपिंग और सामान की डिलीवरी के लिए भी आपको कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे.
वॉर रिस्क इंश्योरेंस का बोझ होगा कम
युद्ध की स्थिति में जहाजों और विमानों को उन इलाकों से गुजरने के लिए वॉर रिस्क इंश्योरेंस (युद्ध जोखिम बीमा) लेना पड़ता है, जो बहुत महंगा होता है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति बहाल होने से अब यह जोखिम कम हो गया है. बीमा कंपनियों द्वारा प्रीमियम घटाने से एयरलाइंस और कार्गो कंपनियों का खर्च घटेगा. यह वह अदृश्य खर्च है जिसका बोझ अंततः आम उपभोक्ता की जेब पर ही पड़ता था. अब इस बोझ के हटने से बाजार में स्थिरता आने की पूरी उम्मीद है.
सप्लाई चेन की बहाली और महंगाई पर लगाम
इस 15 दिन की शांति ने ठप पड़ी वैश्विक सप्लाई चेन को फिर से पटरी पर लाने का मौका दिया है. माल ढुलाई (Freight) का खर्च कम होने से केवल हवाई जहाज ही नहीं, बल्कि समुद्र के रास्ते आने वाला सामान भी सस्ता होगा. तेल की कीमतों में नरमी का सीधा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है. जब ट्रक और जहाजों का ईंधन सस्ता होगा, तो रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी गिरावट आएगी. इससे आम जनता को महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है.
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