ऑपरेशन शिनाख्त: कानपुर में 4,436 अपराधियों की पहचान, 1,238 पर पुलिस की विशेष निगरानी* कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने ‘ऑपरेशन शिनाख्त’
*बारिश में उजड़ा आशियाना, तीन मासूम बेटियों का भविष्य अधर में; राहत की आस में भटक रहा परिवार* मध्य प्रदेश की न्यूज़ भारत सिवनी संवाददाता ईश्वर दीक्षित
TRN Live: *प्रकाशनार्थ*
*राजनैतिक व्यंग्य-समागम*
*1. कड़ी कार्रवाई : विष्णु नागर*
इस देश में 'कड़ी कार्रवाई' का बड़ा चक्कर है। जब देखो, तब कड़ी कार्रवाई होने लगती है। कभी भी सीधी-सिंपल कार्रवाई नहीं होती! कुछ भी ऐसा या वैसा हुआ -- और ऊपरवाले की किरपा से लगभग हर रोज़ होता रहता है -- तो फौरन 'कड़ी कार्रवाई' होना शुरू हो जाती है। राम मंदिर में 200 करोड़ की डकैती हुई, तो इस मामले में भी 'कड़ी कार्रवाई' ही होगी। जैसा कि चलन है, आदित्यनाथ जी ने भी कह दिया है कि कोई कितने ही बड़े पद पर हो, दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। कोई आश्चर्य नहीं कि कड़ी से कड़ी कार्रवाई भी हो जाए, बल्कि कड़ी से कड़ी से कड़ी कार्रवाई होने की आशंकाएं हैं, क्योंकि मामला उत्तर प्रदेश का है, उसमें भी अयोध्या का है और अयोध्या में भी राम मंदिर का है और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ हैं, जो कड़ी से कम कार्रवाई करते नहीं, बल्कि अकसर कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर डालते हैं, बल्कि कभी-कभी तो कड़ी से भी कड़ी और उससे भी कड़ी कार्रवाई करके ही मानते हैं, मगर लोगों को इसका पता उनके भारी-भरकम बयानों से चलता है!यही उनकी मुख्य विशेषता है। इसी कारण उत्तर प्रदेश चल रहा है, वरना कभी का बैठ चुका होता!
राममंदिर मामले में कड़ी से कड़ी और उससे भी कड़ी कार्रवाई हुई, तो भी ईडी-सीबीआई बीच मे नहीं आएगी और न उसे आने दिया जाएगा। कहीं बुलडोजर नहीं चलेगा, किसी का फुल या हाफ एनकाउंटर नहीं होगा। सब शांतिपूर्वक होगा, लेकिन कार्रवाई तो साहब, कड़ी से कड़ी ही होगी! बस उसमें बड़ा से बड़ा कोई नहीं फंसेगा और यह कहने की बात नहीं कि उसमें छोटा से छोटा, बल्कि उससे भी छोटा फंसेगा। चांस इसके ज्यादा हैं कि कोई नहीं फंसेगा, उल्टे आरोप लगाने वाले फंस जाएंगे, क्योंकि मामला राममंदिर का है, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ हैं और चुनाव बहुत दूर नहीं हैं! उन्हें मंदिर में की गई यह डकैती अभी से अफवाह लगने लगी है, भक्तों की भावनाएं आहत करने की कोशिश लगने लगी है, अयोध्या को बदनाम करने की साज़िश लगने लगी है, तो आप समझ लीजिए, एसआईटी बेचारी क्या करेगी? मुख्यमंत्री जी की भावनाओं का सम्मान करके जयश्री राम करते हुए बैठ जाएगी!
उधर प्रधानमंत्री के खासमखास नृपेंद्र मिश्र इसे डकैती और विश्वासघात बता रहे हैं। मतलब दिल्ली और लखनऊ में अंदर ही अंदर रस्साकशी चल रही है।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है, चिंता न करें, नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इंडिगो की लापरवाही के कारण हजारों हवाई यात्री परेशान हुए, कड़ी कार्रवाई होगी। खाद की कालाबाजारी करनेवालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। नकली दवाई सप्लाई करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। गैंगस्टर को अपना आइकन माननेवालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। स्कूल के कमरे गिर गए, बच्चे मर गए, चिंता न करें, कड़ी कार्रवाई होगी। मंदिर जाते या आते समय या प्रवचन के बाद लोग मारे गए, कड़ी कार्रवाई होगी। अस्पताल में लापरवाही से लोग मर गए, कड़ी कार्रवाई होगी। मतलब सब कड़ी कार्रवाई के पीछे पड़ गए हैं!
पहले वाले भी कड़ी कार्रवाई करते थे। ये भी यही करते हैं और आगे आने वाले भी, मेरा दृढ़ मत है कि यही करेंगे, क्योंकि इस देश में कड़ी कार्रवाई करने की परंपरा 'भगवान श्री राम' के समय से चली आ रही है। यहां कार्रवाई चूंकि कड़ी होती है, इसीलिए यहां राम राज्य स्थापित हो चुका है और हिन्दू राष्ट्र स्थापित होने वाला है! डंका बजाने वाले को जब भी विदेश यात्राओं से लंबी फुर्सत मिलेगी, डंका बज जाएगा!
आजादी के बाद से आज तक कम से कम पांच करोड़ बार हिंदुस्तान के हर कोने में हर मामले में कड़ी कार्रवाई हो चुकी है और अभी भी जारी है, इसलिए यह आंकड़ा जल्दी ही बढ़कर छह करोड़ तक जा सकता है। आजकल चूंकि सरकार ने अपनी तरफ से बात करना बंद कर दिया है,अपनी ओर से बोलने का अधिकार सूत्रों को दे दिया है, इसलिए उन्होंने बताया है कि यह आंकड़ा सात करोड़ को छू सकता है। 2047 तक भारत को चूंकि विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री प्रतिबद्ध हैं, इसलिए इसे दस करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वैसे सच यह है कि दोष हमारा है। मंत्री-मुख्यमंत्री-गृहमंत्री आदि दरअसल 'कड़ी' नहीं, 'कढ़ी' कार्रवाई की बात करते हैं। हमें चूंकि कार्रवाई के साथ 'कड़ी' सुनने की गंदी आदत पड़ चुकी है, इसलिए हम 'कढ़ी' को भी 'कड़ी' सुनते और पढ़ते हैं।टीवी और अखबारवाले भी 'कड़ी' और 'कढ़ी' में अंतर करना नहीं जानते, वे भी 'कढ़ी' को 'कड़ी' कह या लिख देते हैं। विनम्रता में मंत्रीगण भी इसका खंडन नहीं करते!
और जब 'कड़ी' की जगह 'कढ़ी' कार्रवाई होती है, तो हम सरकार और प्रशासन की निंदा करने लगते हैं। सरकार इसे भी सहन कर लेती है। सरकार दरअसल आजकल बहुत सहनशील हो चुकी है!
इस समाज में मज़ाक़ समझने की तमीज अब रही नहीं! वैसे 'कढ़ी' भी हर प्रदेश, हर क्षेत्र, बल्कि हर घर की अलग होती है।उसमें तीन ही चीजें कामन होती हैं -- छाछ, बेसन और नमक!उसी तरह कढ़ी कार्रवाई में सब जगह कढ़ी शब्द ही कामन होता है, सबमें बेसन, छाछ और नमक और पानी का अनुपात अलग होता है। कढ़ी से कढ़ी और उससे भी कढ़ी कार्रवाई का अर्थ है, कोई कार्रवाई नहीं! इस गूढ़ार्थ को लोग समझते नहीं और पें-पें, चें-चें करने लगते हैं!
तो इस देश में कढ़ी कार्रवाई होती रहती है। कभी-कभी कड़ी कार्रवाई भी हो जाती है लेकिन उसके लिए दोषी का 'बाबर की औलाद' होना जरूरी है, 'मुल्ला' होना आवश्यक है। हिंदू खतरे में है, इसलिए उन्हें 'टाइट 'करना समय की आवश्यकता है, पर हमें इससे घबराना नहीं है, क्योंकि हमें प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 2047 में विकसित भारत बनाने का सपना पूरा करना है!
*(कई पुरस्कारों से सम्मानित विष्णु नागर साहित्यकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं। जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।)*
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*2. वे काग़ज़ नहीं दिखाएंगे! : राजेंद्र शर्मा*
मोदी जी के इन विरोधियों ने हिंदू संस्कृति का अपमान करने की कसम ही खा रखी है क्या? बताइए, चुनाव आयोग की ढिलाई से कर्नाटक में इनकी सरकार क्या बन गयी, आरएसएस से ही कागज दिखाने की मांग करने लगे।
हिंदू आरएसएस, उसका हिंदू राष्ट्र, फिर भी कहते हैं कि रजिस्ट्रेशन के कागज दिखाओ। जमा-खर्च का हिसाब बताओ।
जिस आरएसएस से सौ साल में किसी ने कागज दिखाने को नहीं कहा, उसे इन्हें कागज दिखाने होंगे? जिस आरएसएस के कागज देखने की अंगरेजों तक की हिम्मत नहीं पड़ी, उसे इन दलित साहबों को कागज दिखाने होंगे? और किसलिए ? सिर्फ इसलिए कि आरएसएस परिवार वाले खुद भी तो दूसरों से कागज दिखाने की मांग कर रहे थे -- पहले एनआरसी में और अब एसआईआर में! यानी मियां की जूती, मियां के ही सिर!
लेकिन, यह क्या हिंदू संस्कृति का खुला अपमान ही नहीं है। यह अर्द्ध-सत्य है कि आरएसएस परिवार कागज दिखाने के लिए कहता आया है। माने आरएसएस परिवार कागज दिखाने के लिए कहता जरूर आया है, लेकिन यह अधूरा सच है। बाकी आधा सच इसमें है कि वह किस से कागज दिखाने के लिए कहता आया है? किसी से छुपा नहीं है कि आरएसएस परिवार कोई सबसे कागज दिखाने की मांग नहीं करता है। वह भला हिंदुओं से कागज दिखाने की मांग क्यों करने लगा? हिंदुओं का तो यह देश ही है। सिर्फ इस देश के हिंदुओं का ही नहीं, दूसरे देशों के हिंदुओं का भी। इस देश में पैदा हुए हिंदुओं का ही नहीं, पड़ोसी देशों में पैदा हुए हिंदुओं का भी। तभी तो उन्होंने सीएए वाला कानून बनवाया था -- आस-पड़ोस के देशों के हिंदुओं का, बल्कि बाकी सब का स्वागत है, सिर्फ मुसलमानों को छोड़कर।
अब चूंकि मुसलमानों को छोड़ना है, तो कागज तो दिखाने ही पड़ेंगे। कागज बाकी सब को भी दिखाने पड़ सकते हैं, पर अपने लिए नहीं, मुसलमानों के बाहर रखे जाने के लिए। सब कागज दिखाएंगे, तभी तो जिन्हें बाहर किया जाना है, बाहर किए जाएंगे।
शाह साहब ने जो क्रोनोलॉजी बताई थी, वह तो याद होगी। पहले सीएए से मुसलमान छानकर अलग किए जाएंगे, फिर हिंदू अपनाए जाएंगे। अब बीच में एसआईआर आ जाएगा, हिंदुओं का भी वोट कट जाएगा, यह किसे पता था। खैर! बड़े-बड़े कामों में छोटी-मोटी दुर्घटनाएं तो हो ही जाती हैं।
खैर! मुद्दे की बात यह है कि कागज दिखाने की डिमांड, कम से कम हिंदुओं के लिए नहीं थी -- दूसरों के लिए ही थी। तभी तो ज्यादातर दूसरों ने ही उसका विरोध भी किया था। तब उसे दलील बनाकर, आरएसएस से कागज दिखाने की मांग कैसे की जा सकती है?
आरएसएस और क्या है और क्या नहीं है इसे छोड़ भी दें, तब भी कम से कम उसके हिंदू होने से कोई इंकार नहीं कर सकता है। वह बेचारा तो अपने जन्म से ही हिंदू-हिंदू ही जपता आया है। यह सच है कि उसके विरोधी शुरू से यह कहते आए हैं कि वह ध्यान हमेशा ही मुसलमान-मुसलमान का करता आया है ; कि कैसे मुसलमानों को नीचा दिखाएं ; कैसे हिंदुओं में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाएं ; कैसे ऐसा राज बनाएं, जिसमें मुसलमान दबाए जाएं -- और दलित वगैरह और औरतें भी। पर ध्यान में चाहे जो भी हो, मुंह से तो वह हिंदू-हिंदू का ही जाप करता आया है।
और आज से नहीं, सौ साल से हिंदू-हिंदू का जाप करता आया है। इतनी ज्यादा तल्लीनता से हिंदू-हिंदू का जाप करता आया है कि जब पूरा देश अंगरेजी राज के खिलाफ लड़ रहा था, लोग प्रदर्शनों में लाठियां खा रहे थे, जेल जा रहे थे, फांसियां तक चढ़ रहे थे यानी देश भर में अच्छी-खासी उथल-पुथल चल रही थी, तब भी उन्होंने अपना ध्यान जरा-सा भी भटकने नहीं दिया और हिंदू-हिंदू का अपना जाप कभी टूटने नहीं दिया। उनके जाप में विघ्न डालने के चक्कर में जब गांधी जी ने सीने पर तीन गोलियां खाईं, तब भी उनका जाप जारी रहा। जब इंदिरा गांधी ने तैंतीस गोलियां खाईं, तब भी उनका जाप जारी था। और अब जब उनके स्वयंसेवक राज कर रहे हैं, हरेक संस्था उनकी शाखा बन चुकी है और ऑपरेशन लंगड़ा से लेकर ऑपरेशन एन्काउंटर और ऑपरेशन बुलडोजर तथा मॉब लिंचिंग का बोलबाला है, तब भी उनका हिंदू-हिंदू का जाप जारी है। और तो और, न कोई गौरी आया, न कोई बाबर, फिर भी राम मंदिर लुट गया, तब भी उनका वही जाप जारी है।
ऐसी घनघोर टाइप की हिंदू एंटिटी से उसके अपने हिंदू राष्ट्र में कागज दिखाने की मांग कैसे की जा सकती है, जबकि यह मांग उन्हीं ने खास तौर पर मुसलमानों वगैरह के लिए तय ईजाद की है। एंटिटी हमने जानबूझकर कहा है, क्योंकि आरएसएस, दूसरी भाषाओं की हम नहीं कहते, पर कम से कम हिंदी-संस्कृत में तो अपरिभाषेय है। उसे संगठन नहीं कह सकते, क्योंकि उसके लिए सदस्यता, संविधान, सांगठनिक ढांचा, चुनाव वगैरह, वगैरह के हजार दुनियावी झंझट हैं, जो उसे मंज़ूर नहीं हैं । उसे आंदोलन कह नहीं सकते, क्योंकि आंदोलन शब्द से ही वामपंथ की बू आती है। उसे महज ताना-बाना भी नहीं कह नहीं सकते, क्योंकि वर्दी से लेकर शाखा तक, उसका कठोर अनुशासन है। वह नेति-नेति की महान भारतीय परंपरा में है -- संगठन है भी, नहीं भी है ; आंदोलन है भी, नहीं भी है ; ताना-बाना है भी, नहीं भी है। जो है भी और नहीं भी है, उसके कागज कैसे! और जब कागज होंगे ही नहीं तो, कोई देखेगा क्या और भागवत जी दिखाएंगे क्या?
माना कि आरएसएस की अपनी हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं। उसके आनुषांगिक संगठनों की मिलाकर तो लाखों करोड़ रुपये की संपत्तियां होंगी। माना कि उसका देश-विदेश तक फैले हजारों संगठनों का ताना-बाना है। माना कि उसका और उसके संगठनों का पचासों हजार करोड़ सालाना का खर्चा है। माना कि मौजूदा राज पर और उसकी सारी संस्थाओं पर, असल में उसी का कब्जा है। पर उससे क्या? सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान तो ईश्वर को भी कहते हैं। अब क्या आरएसएस से कागज मांगने वाले रामलला से कागज मांगने जाएंगे? क्या सुप्रीम कोर्ट ने रामलला से मस्जिद वाली जमीन के कागज मांगे थे? कल को ये दलित-वलित तो हिंदू धर्म से भी कागज मांगने लग जाएंगे! कागज की जरूरत मुसलमानों के लिए है, हिंदू आरएसएस से मोदी राज में कागज क्यों मांगे जाएंगे? वे कागज नहीं दिखाएंगे!
*(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और 'लोकलहर' के संपादक हैं।)*
Jitendra Kumar: *प्रकाशनार्थ*
*भारत में तानाशाहीपूर्ण लोकतंत्र*
*(आलेख : पी. सी. नियोगी, अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते)*
ब्रिटिश राज एक तानाशाह शासन के रूप में काम करता था, जिसका मुख्य मकसद संसाधनों का दोहन और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। आज़ादी के बाद, भारत को विरासत में औपनिवेशिक दौर की नौकरशाही और पुलिस का ढांचा मिला, और इसने नागरिक आज़ादी के बजाय राज्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जारी रखा। असहमति को दबाने के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधान — जैसे राजद्रोह कानून, निवारक नज़रबंदी और आपातकाल की व्यापक शक्तियां —आज़ाद भारतीय राज्य के ढांचे में आसानी से शामिल कर लिए गए और शासन के दमनकारी औज़ारों के तौर पर बने रहे।
भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में तानाशाही वाली प्रवृत्ति सबसे ज़्यादा तब दिखी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने आपातकाल (1975-77) लागू किया। इस दौरान नागरिकों की आज़ादी छीन ली गई, प्रेस की आज़ादी पर रोक लगा दी गई और कानून के शासन को कार्यपालिका के मातहत कर दिया गया। 25 जून 1975 को लागू और 21 मार्च 1977 को हटाया गया आपातकाल विपक्षी पार्टियों के लिए एक बड़ा झटका था, जिन्होंने इसे लागू किए जाने का कड़ा विरोध किया था। आखिरकार, विपक्षी पार्टियों के नेतृत्व में चले जन-आंदोलन ने लोगों के विरोध को लामबंद किया और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को बहाल किया। राजनीतिक विश्लेषक आम तौर पर इस घटना को संवैधानिक लोकतंत्र से एक अस्थायी, लेकिन गंभीर भटकाव मानते हैं, जिसे अक्सर भारत के इतिहास में एक काले दौर के तौर पर याद किया जाता है।
2014 के बाद से, कई विद्वानों और विश्लेषकों ने भारत के राजनैतिक सफर को लोकतांत्रिक व्यवस्था के निलंबन के पिछले दौर से बिल्कुल अलग माना है। इसे सिर्फ़ कुछ समय के लिए रास्ते से हटना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक नियम-कायदों के लगातार कमज़ोर होने के दौर के तौर पर देखा जाता है। देश को अक्सर 'चुनावी तानाशाही' के रूप में वर्णित किया जाता है — एक ऐसी व्यवस्था, जहाँ लोकतंत्र की संस्थाएँ तो औपचारिक रूप से बनी रहती हैं, लेकिन सत्ता के केंद्रीकरण, असहमति को दबाने और बहुसंख्यकवादी राजनीति के दबदबे जैसी चीज़ों से वे धीरे-धीरे कमज़ोर होती जाती हैं। कई राजनीतिक विचारकों का तर्क है कि 2014 के बाद के दौर में ये रुझान और तेज़ हुए हैं, जिससे भारत की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक नींव के धीरे-धीरे कमज़ोर होने को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हुई हैं।
*चुनावी तानाशाही*
भारत में 'कानून के शासन' का अधिकार तेज़ी से कार्यपालिका (सरकार) के हाथों में सिमटता जा रहा है, क्योंकि केंद्र सरकार जान-बूझकर केंद्रीकरण की नीति अपना रही है। यह बदलाव तानाशाही शासन की ओर एक निर्णायक कदम है। विपक्षी दलों, नागरिक समाज और मीडिया को या तो भारतीय जनता पार्टी के तानाशाहीपूर्ण तौर-तरीकों को मानने के लिए मजबूर किया जाता है, या फिर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। ऐसी कार्रवाई अक्सर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), आयकर विभाग, पुलिस और अर्ध-सैनिक बलों जैसी एजेंसियों के ज़रिए की जाती है।
सत्ताधारी पार्टी मीडिया, संस्थानों और राज्य के संसाधनों पर अपना नियंत्रण मज़बूत करके अपना दबदबा बनाए रखती है। धर्म-आधारित लोकतंत्र ने इसके उभार में मदद की है, जिसमें सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के लिए नागरिकों के बीच कट्टरपंथी सिद्धांतों को बहुत बारीकी से लागू किया जाता है। आरएसएस और भाजपा की राजनीति ने समाज में गहरे विभाजन पैदा किए हैं, जिससे उन्हें राजनीतिक वर्चस्व हासिल करने में मदद मिली है। चुनावी मशीनरी को अपने मज़बूत प्रभाव में रखकर चुनावी जीत भी सुनिश्चित की जाती है।
धार्मिक कट्टरता तानाशाही शासन को बनाए रखने का एक पैना हथियार बन गया है। आरएसएस की मुख्य विचारधारा, यानी मनुवादी विचारधारा, देश के सामाजिक-राजनीतिक ढांचे को बदलने के लिए एक मार्गदर्शक नज़रिया प्रदान करती है। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण अब किसी एक धर्म तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कई समुदायों में फैल गया है, जिससे भारत की धर्मनिरपेक्ष भावना के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। साथ ही, नैतिक शिक्षा का कमज़ोर होना — जो कभी नागरिक जीवन का आधार हुआ करती थी — एक चिंताजनक गिरावट का संकेत है। स्थापित मानदंडों से इस गिरावट के पीछे कुछ खास लोगों के हित रहे हैं, जिससे देश की व्यापक नैतिक नींव कमज़ोर हुई है।
*शक्तियों का केंद्रीकरण*
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के कामकाज के तरीके से पता चलता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय में सत्ता का काफ़ी हद तक केंद्रीयकरण हो गई है और इससे केंद्र-राज्य संबंधों का स्वरूप बदल गया है। इस केंद्रीकरण ने भारत के संघीय लोकतांत्रिक ढांचे पर गहरा असर डाला है और कई तरीकों से राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था को नया रूप दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय फ़ैसले लेने का मुख्य केंद्र बन गया है, जहाँ से नीति बनाने और रोज़मर्रा के प्रशासनिक कामकाज, दोनों पर ही पूरा नियंत्रण रखा जाता है। सत्ता के इस केंद्रीकरण से मंत्रियों के अपने विवेक से फ़ैसले लेने की गुंजाइश काफ़ी कम हो गई है और अलग-अलग मंत्रालय असल में प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों के अधीन हो गए हैं।
*कार्यकारी शक्तियों का केंद्रीकरण*
कार्यकारी अधिकार तेज़ी से केंद्रित होते जा रहे हैं, जिसमें राज्य और संघीय दोनों तरह की शक्तियाँ सत्ताधारी प्रशासन के हाथों में आ गई हैं। संसदीय प्रक्रियाओं और मंत्रिमंडल की चर्चाओं को नज़रअंदाज़ किया जाता है या कमज़ोर कर दिया गया है, जिससे संस्थागत नियंत्रण और संतुलन कमज़ोर पड़ गए हैं। शक्तियों का यह केंद्रीकरण कार्यकारी प्रभुत्व की ओर बढ़ते एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है, जहाँ निर्णय लेने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक ढाँचों में बँटी होने के बजाय केंद्रीय नेतृत्व के नियंत्रण में हो गई है।
*संस्थाओं का कमज़ोर होना और लोकतंत्र का पिछड़ना*
लोकतंत्र पर नज़र रखने वाली पारंपरिक संस्थाओं की स्वायत्तता का काफ़ी क्षरण हुआ है। स्वीडन स्थित 'वेरायटीज़ ऑफ़ डेमोक्रेसी' (वी-डेम) इंस्टीट्यूट और वॉशिंगटन डी.सी. स्थित 'फ्रीडम हाउस' जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं इस गिरावट की ओर इशारा करती हैं, और ख़ास तौर पर चुनाव आयोग, न्यायपालिका और जांच एजेंसियों का ज़िक्र करती हैं। जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई ये संस्थाएं अब विपक्ष को रोकने और सरकार (कार्यपालिका) का नियंत्रण मज़बूत करने के औजार के तौर पर देखी जा रही हैं। वी-डेम और फ्रीडम हाउस, दोनों का मानना है कि भारत में लोकतंत्र काफ़ी कमज़ोर हो रहा है। वी-डेम भारत को 'चुनावी तानाशाही' वाला देश मानता है, जबकि फ्रीडम हाउस ने इसके दर्जे को घटाकर 'आंशिक रूप से स्वतंत्र' कर दिया है। ये संस्थाएं नागरिक आज़ादी में कमी, प्रेस की आज़ादी पर रोक और नागरिक समाज पर बढ़ते दबाव को भारत में लोकतंत्र के कमज़ोर होने की मुख्य वजहें बताती हैं।
*असहमति का दमन*
नागरिक समाज संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों और स्वतंत्र पत्रकारों को वर्तमान शासन के ढांचे के तहत बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। असहमति की आवाजों को दबाने और बाहरी फंडिंग को प्रतिबंधित करने के लिए प्रायः व्यापक कानूनी उपकरणों, विशेष रूप से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), आतंकवाद विरोधी कानून, धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) और विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) का उपयोग किया जाता है। इन उपायों ने बढ़ी हुई निगरानी और असुरक्षा का माहौल तैयार किया है, जहां नागरिक समाज और मीडिया में महत्वपूर्ण कारकों के स्वतंत्र रूप से काम करने की उनकी क्षमता में बाधा उत्पन्न होती है।
*अल्पसंख्यकों का हाशिए पर जाना*
बहुसंख्यकवादी राजनीति में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी ने अल्पसंख्यक समुदायों के लिए उपलब्ध सामाजिक-राजनीतिक जगह को व्यवस्थित रूप से कम कर दिया है। विधायी और नीतिगत उपाय -- खासकर वे, जो नागरिकता और रोज़मर्रा की कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े हैं -- राष्ट्रीयता की एक बहुसंख्यकवादी अवधारणा को गढ़ने की सोची-समझी कोशिश को दर्शाते हैं। इन घटनाक्रमों ने बहुलतावाद और समावेशिता के क्षरण को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं, जो भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांत हैं।
*न्यायिक और कानूनी साधन*
तानाशाहीपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था में, नेतृत्व शासन के चार स्तंभों — विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया — पर अपना दबदबा बनाने की कोशिश करता है। इन संस्थाओं पर नियंत्रण करके, वे अपने लक्ष्यों को तेज़ी से हासिल कर लेते हैं। यह स्थिति भारत में भी साफ़ तौर पर देखी जा सकती है, जहाँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समर्थित मोदी सरकार ऐसे तानाशाही तरीकों का इस्तेमाल कर रही है, जिन्हें वैश्विक समुदाय खुलेआम देख रहा है। बहरहाल, न्यायपालिका को कभी-कभी निष्क्रिय माना जाता है और उसकी तुलना महाभारत के उस धृतराष्ट्र से की जाती है, जो हकीकत को देख नहीं पाते थे। लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की न्यायपालिका की संवैधानिक ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 से आती है। अनुच्छेद 32, जिसे डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने संविधान की 'आत्मा और हृदय' कहा था, सुप्रीम कोर्ट को मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण), 'मैन्डमस' (परमादेश), 'प्रोहिबिशन' (प्रतिषेध), 'सर्टिओरारी' (उत्प्रेषण) और 'को वारंटो' (अधिकार-पृच्छा) जैसी रिट जारी करने का अधिकार देता है ; इससे नागरिकों को लोकतांत्रिक आज़ादी के उल्लंघन की स्थिति में सीधे अदालत जाने का रास्ता मिलता है। अनुच्छेद 226 हाई कोर्ट को भी व्यक्तियों या सरकारी अधिकारियों के ख़िलाफ़ रिट जारी करने का ऐसा ही अधिकार देता है, जिससे राज्य स्तर पर संवैधानिक सुरक्षा मज़बूत होती है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश की हालिया टिप्पणियों ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि कैसे कुछ लोग अनुचित लाभ उठाने के लिए न्यायिक प्रक्रियाओं का दोहन करते हैं। यह दृष्टिकोण युवा पीढ़ी के साथ गहराई से जुड़ गया है, जिससे उनका मोहभंग हुआ है और कॉकरोच जनता पार्टी जैसे संगठित प्रतिरोध के उदय को प्रेरणा मिली है। साथ ही, यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि कई न्यायाधीशों ने कानून के शासन को कायम रखने और हमारी न्यायिक प्रणाली के भीतर न्याय के निष्पक्ष प्रशासन को सुनिश्चित करने में सराहनीय उदाहरण स्थापित किए हैं। उनके सैद्धांतिक निर्णय और संवैधानिक मूल्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता दर्शाती है कि व्यवस्थागत दबावों के बावजूद, न्यायपालिका लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में काम करने की क्षमता बनाए हुए हैं।
*बुलडोज़र से न्याय*
हाल के समय में बुलडोज़र से न्याय ('बुलडोज़र जस्टिस') का विचार काफ़ी चर्चित हुआ है, हालाँकि 'कानून के शासन' के दायरे में इसकी कोई वैध जगह नहीं है। बुलडोज़र असल में एक मशीनी उपकरण है, जिसका इस्तेमाल तकनीकी ज़रूरत के तौर पर किया जाता है। उदाहरण के लिए, जब कोई अदालत किसी जगह से लोगों को हटाने का आदेश देती है, तो विशेषज्ञ इस कार्रवाई को अंजाम देने वाले एक साधन के तौर पर इसका इस्तेमाल करने का फ़ैसला कर सकते हैं। लेकिन, सत्ताधारी भाजपा ने एक नया सिद्धांत पेश किया है, जिसे आम तौर पर 'बुलडोज़र राज' कहा जाता है ; इसका न्याय देने की स्थापित व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। संसद में अपने बहुमत का इस्तेमाल करके पार्टी इस अवधारणा को कानून का रूप भी दे सकती है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के लिए मॉल, होटल और मोटल बनाने का रास्ता साफ़ हो सकता है।
असल में, तोड़-फोड़ की कार्रवाई बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए की जा रही है। गिद्ध का अपने शिकार के गिरने का सब्र से इंतज़ार करने वाला उदाहरण इस व्यवस्था के शिकारी स्वभाव को बखूबी दिखाता है। पश्चिम बंगाल में, विधानसभा चुनावों में भाजपा को
TRN Live] The Kanpur Reporter: *मेयर पुत्र अमित पांडे पर जमीन कब्जाने का आरोप, सीवर लाइन को लेकर नगर निगम में हंगामा*
कानपुर में संत लाल का हाता के सैकड़ों लोग शनिवार को सीवर लाइन की मांग को लेकर नगर निगम पहुंचे और प्रदर्शन किया। लोगों ने मेयर और उनके बेटे अमित उर्फ बंटी पांडेय के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सीवर लाइन का टेंडर जारी होने के बावजूद मेयर पुत्र क्षेत्र की कीमती जमीन पर नजर रखते हुए काम रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों ने नगर आयुक्त को ज्ञापन देकर सीवर लाइन का काम जल्द शुरू कराने और बाधा डालने वालों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों और लोगों के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई।

TRN Live] The Kanpur Reporter: *ऑपरेशन शिनाख्त: कानपुर में 4,436 अपराधियों की पहचान, 1,238 पर पुलिस की विशेष निगरानी*
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने ‘ऑपरेशन शिनाख्त’ के तहत सात दिन तक विशेष अभियान चलाकर 4,436 अपराधियों का सत्यापन किया। पुलिस ने 1,238 अपराधियों के डोजियर तैयार कर उन पर विशेष निगरानी शुरू की है। अभियान के दौरान 35 मामलों में गुंडा एक्ट, 15 मामलों में गैंगस्टर एक्ट और 31 अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोलने की कार्रवाई की गई। सत्यापन में 1,167 अपराधी घरों पर मिले, 177 जेल में बंद पाए गए, जबकि 292 अपराधी लापता मिले।
Y: *थाना गोविंद नगर अपडेट कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल के निर्देशन में कानपुर पुलिस द्वारा अपराधियों की धर पकड़ जारी.*
*ऑपरेशन त्रिनेत्र के ज़रिए थाना गोविंद नगर पुलिस के हाथ लगी बड़ी सफलता.*
*दबोचे गए दो शातिर वाहन चोर.*
*पकड़े गए अभियुक्त धीरज व सुभाष शुक्ला हैं.*
*दोनों अभियुक्त गाड़ी चोरी के दो मामले में वांछित चल रहे थे.*
*पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की मदद से दोनों अभियुक्तों को धर दबोचा.*
*दोनों अभियुक्तों के पास से ग्रे स्कूटी UP 78 HD 3890, हीरो स्पलेंडर UP 78 BU 2724, एक हॉन्डा बाइक व एक एक्टिवा स्कूटी बरामद.*
*दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध पहले से ही 5 -5 मुकदमें दर्ज़.*
*अभियुक्त धीरज व सुभाष शुक्ला को अग्रिम विधिक कार्यवाही के उपरांत भेजा जा रहा है न्यायालय.*
*उप निरीक्षक अमित फौजदार,उप निरीक्षक मनीष सिंह,कांस्टेबल विष्णु,अभिनव व सोनू ने इस गिरफ्तारी व बरामदगी को अंजाम दिया.*
Jeetu dehati: *थाना पनकी अपडेट कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*थाना पनकी प्रभारी निरीक्षक दिनेश सिंह विष्ट की ताबड़तोड़ कार्यवाही जारी.*
*दबोचा गया वांटेड अपराधी.*
*पकड़ा गया अभियुक्त केडीए कॉलोनी अर्रा निवासी 19 वर्षीय प्रिंस गुप्ता उर्फ बनिया उर्फ कृष्णा गुप्ता है.*
*अभियुक्त प्रिंस गुप्ता उर्फ बनिया उर्फ कृष्णा गुप्ता 4 महीने से कानून को खिलवाड़ समझ कर पुलिस से खेल रहा था आंख मिचौली.*
*बीती 13 फरवरी 2026 को अभियुक्त ने वादी के साथ मारपीट कर 15 हज़ार रुपए व बैग की लूट की थी.*
*अभियुक्त प्रिंस गुप्ता उर्फ बनिया उर्फ कृष्णा गुप्ता के पास से एक अदद अवैध तमंचा 12 बोर व दो अदद ज़िंदा कारतूस 12 बोर बरामद.*
*अभियुक्त प्रिंस गुप्ता उर्फ बनिया उर्फ कृष्णा गुप्ता को अग्रिम विधिक कार्यवाही के उपरांत भेजा जा रहा है न्यायालय.*
*प्रभारी निरीक्षक दिनेश सिंह विष्ट के नेतृत्व में उप निरीक्षक विकास वर्मा, महेश सरोज, शरद कुमार, रि. कांस्टेबल अजय कुमार, वीर प्रताप सिंह व चंद्रशेखर ने इस गिरफ्तारी को अंजाम दिया.*
Jeetu dehati: *कमिश्नरेट कानपुर अपडेट उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल के निर्देशन में 26 जून 2026 से 28 जून 2026 तक तीन दिवसीय " अग्नि सुरक्षा व बचाव जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान" का किया जा रहा है आयोजन*
*कानपुर में अग्नि सुरक्षा अभियान के दूसरे दिन होटल संचालकों को मिला फायर फाइटिंग व फर्स्ट एड का प्रशिक्षण। 250 लोगों ने ली ट्रेनिंग.*
*जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल के निर्देशन में अभियान के दूसरे दिन आज 27 जून 2026 को पुलिस कार्यालय सभागार में होटल संचालकों एवं व्यवस्थापकों के लिए प्रशिक्षण व जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया.*
*कार्यक्रम का समन्वय नोडल अधिकारी अपर पुलिस उपायुक्त,अभिसूचना महेश कुमार के द्वारा किया।*
*कार्यक्रम में मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक शर्मा, फायर सर्विस, सिविल डिफेंस एवं केस्को के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे.*
*होटल संचालकों को आग लगने की स्थिति में प्रारंभिक स्तर पर प्रभावी व सुरक्षित ढंग से नियंत्रण के उपाय बताए गए।*
*विभिन्न प्रकार के फायर एक्सटिंग्यूशर के सही व सुरक्षित उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया*
*आग की घटना में झुलसने या घायल होने की स्थिति में प्राथमिक उपचार प्रदान करने के आवश्यक तरीकों की जानकारी दी गई.*
*विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि अग्निकांड की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। प्रशिक्षित व सतर्क व्यक्ति जनहानि व संपत्ति की क्षति को काफी हद तक कम कर सकते हैं.*
*कार्यक्रम में सीएफओ दीपक शर्मा द्वारा निर्देश दिए गए कि होटल परिसरों में अग्निशमन उपकरणों के नियमित रखरखाव के साथ विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए.*
*कार्यक्रम में होटल संचालकों सहित कुल 250 प्रतिभागियों ने सहभागिता की.*
Jeetu dehati: *यातायात विभाग अपडेट कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*आरटीओ व ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त प्रवर्तन कार्यवाही से विधनू थाना क्षेत्र में मचा हड़कंप*
*अभियान के दौरान एआरटीओ सोमलता व संबंधित जोन के टीआई ट्रैफिक द्वारा संयुक्त रूप से ट्रक व डंपर वाहनों की सघन चेकिंग की गई.*
*चेकिंग के दौरान ओवरलोड वाहनों, मानक के अनुरूप नंबर प्लेट न लगाने वाले वाहनों, एक्सेल उठा कर संचालित किए जा रहे ट्रकों, बिन वैध प्रपत्रों के संचालित वाहनों एवं यातायात के नियमों का उलंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध नियमानुसार प्रवर्तनात्मक कार्यवाही की गई.*
*साथ ही वाहन चालकों को यातायात के नियमों के प्रति जागरूक किया गया.*
*कानपुर नगर में स्थित राजमार्ग-34 (एनएच-34) पर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए बनाई गई कार्य योजना के तहत एनएच-34 पर 8 स्थानों पर बैरियर स्थापित करते हुए ड्यटूी लगायी गयी.*
*प्रत्येक 20 किलोमीटर पर इंटरसेप्टर मोबाइल तैनात की गई है। ताकि तेज़ गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ प्रवर्तन कार्यवाही अमल में लाई जा सके.*
*27 जून 2026 को एनएच 34 पर 38 ट्रक, 5 बस व 108 चार पहिया/दो पहिया कुल 161 वाहनों का ओवरस्पीड पर चालान किया गया.*
*एन एच 19 पर 3 ट्रक, 8 बस व 110 दो पहिया/ चार पहिया कुल 121 वाहनों का ओवरस्पीड में चालान किया गया*
*गंगा बैराज पर 72 वाहनों का ओवरस्पीड में चालान किया गया.*
*26 मई 2026 को कुल 2563 वाहनों का चालान किया गया.*
*साथ ही सड़क सुरक्षा के नियमों के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।*
जैसे
✓ रॉन्ग साइड वाहन न चलाएं
✓ वाहन चलाते समय हेलमेट/सीट बेल्ट का प्रयोग अवश्य करें
✓ सड़क पर गति सीमा को निर्धारित रखें
✓ ओवरटेक हमेशा दाहिने से करें
✓ यातायात के संकेतो का पालन अवश्य करें
✓ शराब पीकर वाहन न चलायें
*डीसीपी ट्रैफिक ने समस्त नागरिकों से अपील की है कि यातायात के नियमों का पालन करें। किसी भी असुविधा की स्थित में निम्न नंबरों पर संपर्क करें*
TRN Live Kanpur Reporter: *महंत पर हमले का आरोपी गैंगस्टर अजय ठाकुर गिरफ्तार, पुलिस पर उठे थे सवाल*
रावतपुर में महंत पर हत्या के प्रयास के मामले में फरार गैंगस्टर अजय ठाकुर को पुलिस ने शनिवार को रतनलाल नगर से गिरफ्तार कर लिया। फरारी के दौरान वह शहर में खुलेआम घूमकर सोशल मीडिया पर रील पोस्ट कर रहा था, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे थे। पुलिस के अनुसार सटीक लोकेशन मिलने पर घेराबंदी कर उसे पकड़ा गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने खुद को ईंट मारकर घायल कर लिया। आरोपी के खिलाफ 33 मुकदमे दर्ज हैं और वह महंत पर हमले सहित कई गंभीर मामलों में आरोपी है।
Tej raftar news: *नगर आयुक्त कार्यालय अपडेट कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए भारत ए टू जेड न्यूज*
*आज 27 जून 2026 को नगर आयुक्त का औचक निरीक्षण.*
*अधिकारियों में मचा हड़कंप.*
*नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय द्वारा आज अभियंत्रण विभाग द्वारा साफ कराये जा रहे बड़े नालों का औचक निरीक्षण किया गया.*
*सीसामऊ बड़े के सम्बन्ध में नगर आयुक्त ने निर्देशित किया कि बरसात के पूर्व नाले के अन्तिम छोर तक मानव बल के द्वारा सफाई करायी जाये। ताकि बरसात के समय बरसाती पानी बिना किसी रूकावट के गंगा नदी में प्रवाहित हो सके.*
*साथ ही यह भी निर्देशित किया जाता है कि वीआईपी रोड से पावर हाउस के अन्दर होते हुए सीसामऊ निकास द्वार की सफाई मानव बल से कराई जाये.*
*सीसामऊ टैपिंग प्वाइन्ट का निरीक्षण किया गया। मौके पर गेट बन्द पाया गया एवं पानी जल निगम के सम्पवेल में जाते हुए पाया गया। मौके पर जाली के पास गन्दगी पायी गयी। निर्देशित किया गया कि जल निकासी हेतु लगी जाली की नियमित सफाई की जाये। जिससे जल निकासी में कोई व्यवधान न उत्पन्न हो सके.*
*जोन 6़ गूबा गार्डेन में बरसात के समय जलभराव की स्थिति के निदान हेतु सम्पवेल का निरीक्षण किया।क्षेत्रीय पार्षद द्वारा अवगत कराया गया कि सम्पवेल का पम्प क्रियाशील है।*
*साथ ही एक पम्प अतिरिक्त रखा हुआ है। ताकि बरसात के समय यदि एक पम्प खराब हो जाये। तो दूसरे को तत्काल क्रियाशील किया जा सके। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र की जल निकासी हेतु पत्रावली भी स्वीकृत हो चुकी है.*
*नगर आयुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि बरसात के समय इसे लगातार क्रियाशील रखा जाये। ताकि पीछे की ओर के क्षेत्र गूबा गार्डेन, न्यू अशोक नगर आदि में जलभराव की स्थिति न उत्पन्न हो सके.*
*जोन 6 में पनकी कल्यानपुर शिवली बाजार में कई स्थानों नालियाॅ भरी हुई पाई गई.*
*नगर आयुक्त द्वारा निर्देशित किया जाता है कि आज ही नालियों की सफाई कराकर जियो टैग फोटो भेजी जाये।*
*साथ ही मुकेश, सफाई पर्यवेक्षक वार्ड 34 एवं संविदा सफाई कर्मचारी रौमिक का एक दिन का वेतन काटा जाए.*
*कल्यानपुर में तालाब का निरीक्षण किया गया । मौके पर तालाब पटा हुआ पाया गया।*
*साथ ही कूड़े का ढेर भी पाया गया।पार्षद द्वारा अवगत कराया कि इस तालाब का जीर्णोद्वार अत्यन्त आवश्यक है। जिससे तालाब में गन्दगी आदि न रहे। इस हेतु क्षेत्रीय निवासियों द्वारा लगातार अनुरोध किया जा रहा है.*
*इस सम्बन्ध में नगर आयुक्त द्वारा निर्देशित किया जाता कि फिलहाल अभियान चलाकर इसकी सफाई कराई जाये।*
*तथा एक सप्ताह तक यह देखा जाये कि निवासियों द्वारा इसमें कूड़ा इत्यादि तो नही फेका जा रहा है। तत्पश्चात् ही आगे की कार्य योजना तैयार की जायेगी.*
*पनकी कल्यानपुर मुख्य मार्ग पर कई सथानों पर नाले से निकली सिल्ट पड़ी पाई गई.*
*नगर आयुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि आज ही सिल्ट का उठान कराकर जियोटैग फोटो भेजी जाये.*
*पनकी कल्यानपुर मुख्य मार्ग पर सरायमीता चैराहे पर रफाका नाले का भी निरीक्षण किया गया.*
*निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नाले की सफाई ठीक तरह से नही की गई है। नाले के किनारे किनारे बड़े झाड़ उग गये हैं.*
*नगर आयुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि इस नाले की पुनः तलीझार सफाई करायी जाये तथा किनारे किनारे उगे झाड़ों को भी हटाया जाए.*
*अर्मापुर के अन्दर पुलिया के पास रफाका नाले का निरीक्षण किया गया.*
*नगर आयुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि इस स्थान पर पुन दोनों ओर से नाले की तलीझार सफाई कराई जाये। साथ ही जहाँ मानव बल की आवश्यकता होनं वहाँ पर उनके माध्यम से नाले की सफाई कराई जाये.*
*रफाका नाले के सम्बन्ध में जोनल अभियन्ता 6 को पुनः निर्देश दिये गए कि रफाका नाले की सफाई प्रारम्भिक स्थान से अन्तिम छोर तक करायी जाये। तथा एक मशीन लगातार रफाका नाले की सफाई के लिए क्रियाशील रखी जाये। साथ ही जहाँ पर कलवर्ट है। वहाँ पर विशेष ध्यान देते हुए सफाई कराई जाए.*
*नगर आयुक्त ने निर्देशित किया कि विजय नगर चैराहे पर दोनों ओर रफाका नाले का पानी निरन्तर तेज गति से चलायमान रहे।*
*इस हेतु बरसात के पूर्व व बरसात के समय इसकी कलवर्ट की निरन्तर सफाई की जाये। एवं यातायात का भारी दबाव देखते हुए सिल्ट का उठान उसी दिन सुनिश्चित कर लिया जाये.*
*गोविन्द जी ब्लॉक का नाला जो रेलवे लाइन के नीचे से आ रहा है। उसके संबंध में निर्देशित किया गया,आज ही सिल्ट का उठान सुनिश्चित किया जाये।*
*तथा सम्बन्धित अवर अभियन्ता दिनेश को शिथिल पर्यवेक्षण के दृष्टिगत कारण बताओ नोटिस निर्गत किया जाये.*
*नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय कानपुर को आदर्श शहर बनाने के लिए संकल्पबद्ध.*
Tej raftar news: *ब्रेकिंग कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*क्या कमज़ोर पड़ रहा है योगीराज.*
*क्या सुस्त पड़ गए कानपुर पुलिस के जाँबाज.*
*क्या फिर से कायम हो रहा है गुंडाराज.*
*मामला बर्रा थाना क्षेत्र के आज़ाद कुटिया ईलाके का.*
*मामूली विवाद में दबंग ने खुलेआम लहराया तमंचा.*
*पीड़ित युवक की कनपटी पर असलहा सटा कर गोली मारने की दी धमकी.*
*पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद.*
*सीसीटीवी फुटेज में साफ साफ नज़र आ रहा है कि दबंग बार असलहा लहता रहा है। और खोपड़ी में छेद करने की धमकी दे रहा है.*
*सूत्रों के हवाले से पता चला है कि शिकायत के बाद भी बर्रा थाना प्रभारी के कान में जूँ तक नहीं रेंगी.*
*पीड़ित ने पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल को तहरीर देकर सख्त कार्यवाही की है माँग.*
Ye: *यातायात विभाग अपडेट कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*आज 27 जून 2026 को पुलिस उपायुक्त यातायात रवीन्द्र कुमार द्वारा मरियमपुर चौराहा , फज़लगंज चौराहा , बीओबी चौराहा , नन्दलाल चौराहा , चावला चौराहा , सचान चौराहा व नौबस्ता चौराहा का किया गया भौतिक निरीक्षण.*
*निरीक्षण के दौरान डीसीपी ट्रैफिक ने यातायात व्यवस्था , सड़क सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं , यातायात दबाव , अवैध अतिक्रमण तथा यातायात संचालन का जायजा लिया.*
*निरीक्षण के उपरांत*
*प्रमुख चौराहों एवं मुख्य मार्गों पर अवैध अतिक्रमण, सड़क किनारे खड़े वाहनों तथा ठेला खोमचा तत्काल हटाने का दिया निर्देश.*
*डीसीपी ट्रैफिक ने निर्देशित किया कि सभी प्रमुख चौराहों पर यातायात संचालन को सुगम व सुव्यवस्थित बनाए रखा जाए। तथा जाम की स्थिति उत्पन्न होने पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.*
*डीसीपी ट्रैफिक ने व्यस्त चौराहों पर यातायात का दबाव कम करने तथा जाम की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यकतानुसार ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती का भी दिया निर्देश.*
*निरीक्षण के दौरान सड़क निर्माण, खुदाई अथवा अन्य कार्यों के कारण प्रभावित यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने तथा संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया.*
*नो पार्किंग क्षेत्रों में खड़े वाहनों के विरुद्ध प्रभावी प्रवर्तन कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए.*
*डीसीपी ट्रैफिक रविंद्र कुमार ने आमजन से यातायात नियमों के पालन करने, निर्धारित स्थानों पर वाहन पार्क करने तथा सड़क सुरक्षा नियमों का अनुपालन करने की अपील की.*
Tej raftar news: *थाना कल्याणपुर अपडेट कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल के निर्देशन में कानपुर पुलिस की ताबड़तोड़ कार्यवाही जारी.*
*अपराधियों को भेजा जा रहा है जेल की काल कोठरी में.*
*इसी कड़ी में थाना कल्याणपुर पुलिस ने ऑपरेशन त्रिनेत्र की मदद से किया चोरी का खुलासा.*
*दबोचा गया शातिर चोर.*
*पकड़ा गया अभियुक्त पुरवा नानकारी निवासी अमरजीत त्रिवेदी है.*
*अभियुक्त अमरजीत त्रिवेदी ने वादिनी प्रभा देवी के घर में घुस के चोरी को दिया था अंजाम.*
*अभियुक्त अमरजीत त्रिवेदी के पास से 2 जोड़ी पायल चांदी, एक अदद चेन चांदी, 3 चौका बिछिया, 3 अंगूठी चांदी, एक अदद चाबी का गुच्छा चांदी व सोने का ॐ बरामद.*
*अभियुक्त अमरजीत त्रिवेदी को अग्रिम विधिक कार्यवाही के उपरांत भेजा गया है न्यायालय.*
*उप निरीक्षक इतेंद्र कुमार, पंकज कुमार निर्मल, राजर्षि त्रिपाठी व कांस्टेबल रोहित कुमार ने इस गिरफ्तारी व बरामदगी को दिया अंजाम.*
Jeetu dehati: *फायर ब्रिगेड अपडेट कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*थाना चकेरी के अंतर्गत अगरबत्ती व धूपबत्ती की फैक्ट्री में लगी भीषण आग.*
*आग की विकरालता देख कर मच गया हड़कंप.*
*सूचना को अमल में लाते हुए मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक शर्मा के दिशा निर्देश पर जाजमऊ फायर स्टेशन से पहुंची दमकल गाडियां.*
*देखा तो शुभ संकल्प इंटरप्राइजेज में भयंकर आग लगी है.*
*फायर कर्मियों ने आग बुझाना प्रारंभ किया। आग की विकरालता को देखते हुए नरवल फायर स्टेशन से भी बुलाई गई दमकल गाड़ी.*
*फायर कर्मियों ने कड़ी मशक्कत व सूझ बूझ से पा लिया आग पर काबू.*
*आग को पूरी तरह से बुझा दिया गया है.*
*कोई जनहानि की सूचना नही है.*
TRN Live: *थाना रावतपुर अपडेट कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*थानाध्यक्ष कमलेश राय के नेतृत्व में थाना रावतपुर पुलिस की ताबड़तोड़ कार्यवाही जारी.*
*दबोचा गया नाबालिग का अपरहणकर्ता.*
*पकड़ा गया अभियुक्त चमनगंज निवासी अरमान है.*
*वादी के अनुसार उनकी 17 वर्षीय बेटी 21 जून को घूमने गई थी। तभी कार सवार युवकों ने उसे अगुवा कर लिया.*
*मुख्य अभियुक्त अरमान नाबालिग को अपने घर ले गया.*
*अभियुक्त अरमान के माता पिता व बहन ने नाबालिग पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला।*
*गोमांस खिलाने की कोशिश की। और जबरन धार्मिक सूत्र पढ़ाने की कोशिश की गई.*
*विरोध करने पर गर्म चिमटे से नाबालिग के शरीर को दागा गया.*
*नाबालिग किसी तरह बच के एक सप्ताह बाद अपने घर पहुंची.*
*थानाध्यक्ष कमलेश राय के अनुसार अभियुक्त अरमान को दबोच लिया गया है.*
*अभियुक्त अरमान को सुसंगत धाराओं के तहत अग्रिम विधिक कार्यवाही के उपरांत भेजा जा रहा है न्यायालय.*
*थानाध्यक्ष कमलेश राय के नेतृत्व में उप निरीक्षक पंकज शर्मा, रामायण पांडेय व विशाल सरोज ने इस गिरफ्तारी को अंजाम दिया.*
TR: *थाना रावतपुर अपडेट कानपुर, उत्तर प्रदेश*
*अवधेश चौहान भारत ए टू जेड न्यूज*
*थानाध्यक्ष कमलेश राय की सख्त कार्यवाही से क्षेत्र के अपराधियों में हड़कंप.*
*एक के बाद एक अपराधी भेजे जा रहे हैं सलाखों के पीछे.*
*इसी क्रम में दबोचा गया एक और अभियुक्त.*
*पकड़ा गया अभियुक्त ककवन निवासी करन सिंह है.*
*अभियुक्त करन सिंह के पास से 90 क्वार्टर मस्तीह ब्रांड देशी शराब बरामद.*
*अभियुक्त करन सिंह को धारा 60 आबकारी अधिनियम के तहत अग्रिम विधिक कार्यवाही के उपरांत भेजा गया है न्यायालय.*
*थानाध्यक्ष कमलेश राय के नेतृत्व में उप निरीक्षक पवन कुमार मिश्रा,सुशांत पांडेय,चेतन कुमार,हेड कांस्टेबल अनिल कुमार व कांस्टेबल मोहम्मद बख्तियार ने इस गिरफ्तारी व बरामदगी को अंजाम दिया.*
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