स्कूल कालेज की शिक्षा को ही सब कुछ ना समझो, असली शिक्षा असली मनुष्य बनने मे है जो हमे परिवार समाज देश को सुखी शांत सभ्य प्रगतिशील मधुर सदभावयुक्त बनाती है

*महाराष्ट्र में जान-बूझकर सडक पर योग कराया?* *ताकि यह एविडेंस हो जाये, कि*... नमाज नहीं होने देते, और योग हो रहा है... ☝️☝️🤔

Jun 23, 2026 - 09:19
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स्कूल कालेज की शिक्षा को ही सब कुछ ना समझो, असली शिक्षा असली मनुष्य बनने मे है   जो हमे परिवार  समाज देश को सुखी शांत सभ्य प्रगतिशील  मधुर सदभावयुक्त बनाती है
जितेन्द्र कुमार

TRNDKB : *आज दिनांक 23/06/2028 का सद्गुण है दृढ़ता।* 

आध्यात्मिक मार्ग पर दृढ़ता किसे कहते हैं इसे देखते हैं......

 *"स्पष्ट लक्ष्य, विवेक और श्रद्धा के साथ साधना मार्ग पर विपरीत परिस्थितियों, बाधाओं तथा उतार-चढ़ावों के बीच भी अटल बने रहना दृढ़ता है।"* 

 *या संक्षेप में— "विवेकपूर्ण निश्चय के साथ अपने आध्यात्मिक लक्ष्य पर अडिग रहना ही दृढ़ता है।"* 

क्योंकि केवल लक्ष्य पर टिके रहना ही पर्याप्त नहीं है; वह *लक्ष्य विवेकपूर्ण और धर्मसम्मत भी होना चाहिए। अन्यथा वह दृढ़ता नहीं, हठ (जिद) बन सकती है।*

 

इसे ऐसे भी समाज सकते हैं...

" *गुरु, शास्त्र और ईश्वर में श्रद्धा रखते हुए साधना में निरंतर पुरुषार्थ करते रहना, चाहे परिस्थितियाँ अनुकूल हों या प्रतिकूल, यही दृढ़ता है।"*

सरल शब्दों में:

 *"जो व्यक्ति परिस्थितियों के दबाव में अपने सद्मार्ग को नहीं छोड़ता, वही दृढ़ है।"* 

दृढ़ता केवल जिद नहीं है।

 *जिद अहंकार से उत्पन्न होती है, जबकि दृढ़ता विवेक, श्रद्धा और लक्ष्य के प्रति समर्पण से उत्पन्न होती है।* 

आध्यात्मिक मार्ग में दृढ़ता का अर्थ है—

नियमित साधना करते रहना।

मन के उतार-चढ़ाव से प्रभावित न होना।

सुख-दुःख में समान रहना।

भगवान, गुरु और शास्त्रों में विश्वास बनाए रखना।

बाधाओं के कारण मार्ग न छोड़ना।

आज तक किसी भी साधक ने केवल इच्छा करने से आत्मज्ञान प्राप्त नहीं किया। सभी महापुरुषों ने दीर्घकाल तक दृढ़ पुरुषार्थ किया है।

भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—

"व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन।"

 *अर्थात् जिसकी बुद्धि लक्ष्य के प्रति दृढ़ और निश्चयात्मक होती है, वही साधना में आगे बढ़ता है।* 

🙏 दृढ़ता साधना की रीढ़ है। बिना दृढ़ता के ज्ञान अधूरा रह जाता है, और दृढ़ता के साथ साधक धीरे-धीरे अपने लक्ष्य तक अवश्य पहुँचता है। 

दृढ़ता के लक्षण क्या होते हैं इसे देखते हैं.....

1. लक्ष्य की स्पष्टता

दृढ़ व्यक्ति जानता है कि उसे कहाँ पहुँचना है।

2. निरंतरता

वह थोड़े उत्साह से नहीं, बल्कि नियमितता से कार्य करता है।

3. बाधाओं में धैर्य

समस्याएँ आने पर भी विचलित नहीं होता।

4. आत्मविश्वास

उसे अपने पुरुषार्थ और ईश्वर की कृपा पर विश्वास रहता है।

5. निर्णय पर स्थिरता

विवेकपूर्वक लिया गया निर्णय बार-बार नहीं बदलता।

 *साधना में दृढ़ता का महत्व* 

कई लोग साधना प्रारंभ तो करते हैं, पर थोड़ी कठिनाई आते ही छोड़ देते हैं।

कभी मन नहीं लगता।

कभी किसी के व्यवहार से दुःख हो जाता है।

कभी आलस्य आ जाता है।

कभी परिणाम जल्दी नहीं मिलते।

 *ऐसी स्थिति में जो साधक साधना जारी रखता है, वही आगे बढ़ता है, यही दृढ़ता है।* 

जैसे एक किसान बीज बोने के बाद प्रतिदिन उसे खोदकर नहीं देखता कि अंकुर निकला या नहीं। वह धैर्य और दृढ़ता से सिंचाई करता रहता है। उसी प्रकार साधक को भी निरंतर साधना करनी चाहिए।

 *दृढ़ता कैसे विकसित करें?* 

1. *लक्ष्य निश्चित करें बिना लक्ष्य के दृढ़ता विकसित नहीं होती।* 

2. छोटे-छोटे संकल्प लें

छोटे संकल्प पूरे करने से मन में स्थिरता आती है।

3. नियमित साधना करें

प्रतिदिन निश्चित समय पर जप, ध्यान या स्वाध्याय करें।

4. संगति उत्तम रखें

दृढ़ लोगों की संगति दृढ़ता बढ़ाती है।

5. असफलताओं से सीखें

असफलता को अंत नहीं, शिक्षा समझें।

6. गुरु और भगवान पर श्रद्धा रखें यही हमे दृढ़ता दिलाती है 

 *श्रद्धा दृढ़ता को शक्ति प्रदान करती है।दृढ़ता का फल आत्मविश्वास बढ़ता है। मन स्थिर होता है। साधना में प्रगति होती है। लक्ष्य की प्राप्ति होती है। चरित्र शक्तिशाली बनता है।* 

अंततः आत्मिक शांति और आत्मबोध की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

सार

दृढ़ता वह शक्ति है जो साधक को लक्ष्य तक पहुँचाती है।

 *ज्ञान दिशा देता है, श्रद्धा प्रेरणा देती है, परंतु दृढ़ता मंज़िल तक पहुँचाती है।* 

 *"हजार बार गिरने पर भी जो साधक पुनः उठकर साधना में लग जाता है, वही दृढ़ है।"* 

 *दृढ़ता का अर्थ है – परिस्थिति कैसी भी हो, सत्य और साधना का हाथ कभी न छोड़ना।* 

 *सदगुरु नाथ महाराज की जय।*

TRN LIVE : अध्याय ९

नवम अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण जो बताते है वह सोचने लायक है कि क्या हम अज्ञान वश और देवता की पूजा करते हैं???

सच्ची पूजा क्या होती है??

( भगवान श्रीकृष्ण कहते है,जो भक्त मेरे अलावा अन्य देव को पूजता है वह अज्ञान वश मुझे ही पूजता है और मै उन देवता बन उनको इच्छित फल देता हूं। )

येऽप्यन्यदेवता भक्ता यजन्ते श्रद्धयान्विताः।

 तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूर्वकम्‌॥

हे अर्जुन! यद्यपि श्रद्धा से युक्त जो सकाम भक्त दूसरे देवताओं को पूजते हैं, वे भी मुझको ही पूजते हैं, किंतु उनका वह पूजन अविधिपूर्वक अर्थात्‌ अज्ञानपूर्वक है

 ॥23॥

अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च।

 न तु मामभिजानन्ति तत्त्वेनातश्च्यवन्ति ते॥

क्योंकि संपूर्ण यज्ञों का भोक्ता और स्वामी भी मैं ही हूँ, परंतु वे मुझ परमेश्वर को तत्त्व से नहीं जानते, इसी से गिरते हैं अर्थात्‌ पुनर्जन्म को प्राप्त होते हैं

 ॥24॥

यान्ति देवव्रता देवान्पितृन्यान्ति पितृव्रताः।

 भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम्‌॥

देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं, भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं और मेरा पूजन करने वाले भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं। इसीलिए मेरे भक्तों का पुनर्जन्म नहीं होता 

 ॥25॥

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।

 तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः॥

जो कोई भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्धबुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुणरूप से प्रकट होकर प्रीतिसहित खाता हूँ

 ॥26॥

यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्‌।

 यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम्‌॥

हे अर्जुन! तू जो कर्म करता है, जो खाता है, जो हवन करता है, जो दान देता है और जो तप करता है, वह सब मेरे अर्पण कर

 ॥27॥

शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्य से कर्मबंधनैः।

 सन्न्यासयोगमुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि॥

इस प्रकार, जिसमें समस्त कर्म मुझ भगवान के अर्पण होते हैं- ऐसे संन्यासयोग से युक्त चित्तवाला तू शुभाशुभ फलरूप कर्मबंधन से मुक्त हो जाएगा और उनसे मुक्त होकर मुझको ही प्राप्त होगा।

 ॥28॥

समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः।

 ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्‌॥

मैं सब भूतों में समभाव से व्यापक हूँ, न कोई मेरा अप्रिय है और न प्रिय है, परंतु जो भक्त मुझको प्रेम से भजते हैं, वे मुझमें हैं और मैं भी उनमें प्रत्यक्ष प्रकट (जैसे सूक्ष्म रूप से सब जगह व्यापक हुआ भी अग्नि साधनों द्वारा प्रकट करने से ही प्रत्यक्ष होता है, वैसे ही सब जगह स्थित हुआ भी परमेश्वर भक्ति से भजने वाले के ही अंतःकरण में प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होता है) हूँ

 ॥29॥

अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्‌।

 साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः॥

यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है, क्योंकि वह यथार्थ निश्चय वाला है। अर्थात्‌ उसने भली भाँति निश्चय कर लिया है कि परमेश्वर के भजन के समान अन्य कुछ भी नहीं है

 ॥30॥

क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति।

 कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति॥

वह शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है और सदा रहने वाली परम शान्ति को प्राप्त होता है। हे अर्जुन! तू निश्चयपूर्वक सत्य जान कि मेरा भक्त नष्ट नहीं होता

 ॥31॥

मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य येऽपि स्यु पापयोनयः।

 स्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम्‌॥

हे अर्जुन! स्त्री, वैश्य, शूद्र तथा पापयोनि चाण्डालादि जो कोई भी हों, वे भी मेरे शरण होकर परमगति को ही प्राप्त होते हैं

 ॥32॥

किं पुनर्ब्राह्मणाः पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा।

 अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम्‌॥

फिर इसमें कहना ही क्या है, जो पुण्यशील ब्राह्मण था राजर्षि भक्तजन मेरी शरण होकर परम गति को प्राप्त होते हैं। इसलिए तू सुखरहित और क्षणभंगुर इस मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर निरंतर मेरा ही भजन कर

 ॥33॥

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।

 मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायण:॥

मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो, मुझको प्रणाम कर। इस प्रकार आत्मा को मुझमें नियुक्त करके मेरे परायण होकर तू मुझको ही प्राप्त होगा

 ॥34॥ 

 

 ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्री कृष्णार्जुनसंवादे राजविद्याराजगुह्ययोगो नाम नवमोऽध्यायः

 ॥9॥

इस समस्त ब्रह्मांड में परमात्मा एक ही है हम अज्ञान वस किसी की भी पूजा करे वह हमारे अज्ञान के कारण हम इस जनम मरण के चक्कर में घूम ते है।

अस्तु।

सद्गुरु नाथ महाराज की जय। 

🌹🌷🙏🙏🙏🌷🌹

TRN LIVE : मैं सब भूतों में समभाव से व्यापक हूँ, न कोई मेरा अप्रिय है और न प्रिय है, परंतु जो भक्त मुझको प्रेम से भजते हैं, वे मुझमें हैं और मैं भी उनमें प्रत्यक्ष प्रकट हूँ ॥29॥

यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है, क्योंकि वह यथार्थ निश्चय वाला है। अर्थात्‌ उसने भली भाँति निश्चय कर लिया है कि परमेश्वर के भजन के समान अन्य कुछ भी नहीं है ॥30॥

वह शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है और सदा रहने वाली परम शान्ति को प्राप्त होता है। हे अर्जुन! तू निश्चयपूर्वक सत्य जान कि मेरा भक्त नष्ट नहीं होता॥31॥

शुभ प्रभात, 

आप सभी का परम मंगल हो 🤗

TRN LIVE : आइए समझते हैं कि दरगाह क्या होती है" 🥺

अगर हम यह पोस्ट नहीं पढ़ेंगे, तो हम हमेशा धोखा खाते रहेंगे।

"भगवान कमज़ोर और विनाशकारी है"

तब तो भगवान भी हमें नहीं बचा पाएगा।

👉 दरगाह में "हज़रत" कौन होता है?

उन राक्षसों की कब्रें, जिन्होंने हमारे हिंदू पूर्वजों को मारा, महिलाओं का बलात्कार किया, और हिंदू मंदिरों को तोड़ा...

आज, जिन लोगों ने PHD, MBBS, M-TECH किया है, उन्हें उनकी पढ़ाई के हिसाब से "डिग्रियाँ" दी जाती हैं।

👉 इसी तरह, मुस्लिम हमलावरों के राज में,

अगर किसी मुस्लिम सैनिक या अफ़सर ने 100 से ज़्यादा हिंदुओं को मारा होता था, तो वे मुस्लिम राजा उसे "हज़रत" का ख़िताब देकर सम्मानित करते थे और उसे किसी इलाके का "मैजिस्ट्रेट" बना देते थे, उसे टैक्स वसूलने और राज करने की ताक़त देते थे।

तो अगर आपको कहीं कोई दरगाह दिखे,

ज़रा देखिए, नाम के आगे "हज़रत" लिखा होगा।

उदाहरण के लिए:

हज़रत सय्यद, हज़रत हुसैनी आलम, हज़रत अली ख़ान वगैरह।

ये "हज़रत" लोग वहाँ की हिंदू लड़कियों का बलात्कार करते थे। वे छोटी-छोटी बच्चियों को भी उनके घरों से उठा ले जाते थे। वे कुंवारी लड़कियों और विधवाओं को उनके परिवारों के सामने ही उठा ले जाते थे।

इसी वजह से, हिंदुओं में बाल-विवाह शुरू हुआ और विधवाओं ने सती होना शुरू कर दिया।

लेकिन इतिहास की किताबें सिर्फ़ बाल-विवाह और सती को ही बुरी प्रथाएँ बताती हैं; वे यह नहीं बतातीं कि ऐसी हालत क्यों पैदा हुई।

तो फिर बुर्का पहनना एक धार्मिक प्रथा कैसे बन गई?

इसे एक बुरी प्रथा क्यों नहीं कहा गया?

चार शादियाँ करना और बहुत सारे बच्चे पैदा करना एक बुरी प्रथा क्यों नहीं माना गया?

क्या हमारी इतिहास की किताबें लिखने वाले भी मुसलमान हैं?

अगर आप चाहें, तो Google पर सर्च करें "भारत के पहले शिक्षा मंत्री कौन थे?" खोजें।

यहाँ मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का नाम आता है। उनका जन्म मक्का में हुआ था और उनकी शिक्षा एक मदरसे में हुई थी। वे 10 साल और 160 दिनों तक भारत के शिक्षा मंत्री रहे। यह जानकारी Google पर भी मिल सकती है।

उन्होंने लिखा कि मुगल और अंग्रेज महान थे; लेकिन उन्होंने असली भारतीय संस्कृति, इतिहास और भारतीय राजाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी।

अगर उनकी नज़र किसी पर पड़ जाती,

अगर वे किसी लड़की को बुलाते, तो उसे जाना ही पड़ता,

वरना इसके परिणाम बहुत बुरे होते।

इसके अलावा, वे जब चाहते लूटपाट करते और पैसे ऐंठते थे। हिंदू अपनी मेहनत की कमाई मंदिरों में रखते थे; वे मंदिरों को भी नहीं छोड़ते थे और उन्हें लूट लेते थे। जो भी उनके रास्ते में आता, वे उसे मार डालते थे।

उदाहरण:

वेमुलवाड़ा राजन्ना मंदिर।

हज़रत सैयद काज़ा—कहा जाता है कि उन्होंने शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर पेशाब कर दिया था। जिन भक्तों ने उन्हें ऐसा करते देखा, उन्होंने उन्हें मार डाला। तब मुस्लिम राजा ने वहाँ उनकी कब्र बनवा दी और आदेश दिया कि पहले दरगाह के दर्शन किए जाएं और उसके बाद मंदिर जाया जाए। इस तरह, वहाँ एक सूफी दरगाह का निर्माण हुआ। लोग तलवार के डर से सहम गए और उन्हें गुलामी करने पर मजबूर किया गया।

इस तरह, ये "मुस्लिम दरगाहें" बनाई गईं।

लोग वहाँ "दीना" (त्योहार) के दिन पैसे चढ़ाते थे, पूजा करते थे, और अपना डर ​​तथा भक्ति प्रदर्शित करते थे।

👉 आज भी, देश के कई हिस्सों में नए शादीशुदा जोड़े और जिनकी कोई गहरी मनोकामना होती है, वे दरगाह जाते हैं और मन्नत मांगते हैं; इस विश्वास के साथ कि उनकी इच्छाएं पूरी होंगी।

👉 आप "निज़ामुद्दीन दरगाह" और उसके नाम पर चलने वाली "निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस" के बारे में तो जानते ही होंगे।

इन दरगाहों पर जाना "हिंदू गुलामी का प्रतीक" जैसा है।

अब जब हमें दरगाहों के बारे में सच्चाई पता चल गई है, तो हमें अब से दरगाहों पर जाना बंद कर देना चाहिए। चलिए, इसे रोकते हैं।

आइए, सभी हिंदुओं को इस बारे में जानकारी दें। 😳🤔

TRN LIVE : .. *जय श्री राम*

*मंगलवार, 23 जून 2026 के मुख्य समाचार*

🔶ब्रिटिश राजनीति में फिर बड़ा भूचाल: प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने किया इस्तीफे का एलान; लेबर पार्टी में बगावत के आगे झुके

🔶स्विट्जरलैंड में 80 मिनट चली Iran-US वार्ताः हिजबुल्ला-इजराइल संघर्ष पर नया फार्मूला तैयार, अंतिम समझौते के रोडमैप पर भी सहति

🔶कतर के प्रमुख गैस एक्सपोर्ट टर्मिनल में भीषण विस्फोट, 54 लोग घायल और 18 लापता

🔶कतर धमाके में मारे गए 13 लोगों में 12 भारतीय शामिल, 66 अन्य घायल

🔶झारखंड में आकाशीय बिजली का कहर, 24 घंटे में 11 लोगों की मौ'त; मृतकों में 10 साल का बच्चा भी शामिल 

🔶जेडी वेंस का दावाः शांति समझौते की मजबूत नींव तैयार, ईरान की फ्रीज संपत्तियां जारी कर सकता है अमेरिका 

🔶लखनऊ की कोचिंग में आग, 15 मौतें: इनमें ज्यादा स्टूडेंट्स, बचने के लिए बाथरूम में छिपे, दम घुटा; 4 अफसर सस्पेंड, 4 आरोपी अरेस्ट

🔶पंजाब में बदलाव की लड़ाई के लिए भाजपा तैयार, युवा निभाएं अग्रणी भूमिका: नितिन नबीन 

 🔶टीएमसी अध्यक्ष पद से हटाई गईं ममता बनर्जी, अरूप रॉय को मिली कुर्सी!

🔶अब 60 दिनों तक पूरी दुनिया को तेल बेच सकेगा ईरान, अमेरिका ने हटाया प्रतिबंध

🔶भारत में 6 साल में 1.8 लाख पैदल यात्रियों की मौत, सुप्रीम कोर्ट सख्त; सुरक्षित फुटपाथ बनाने के निर्देश

🔶बिहार में NEET री-एग्जाम में सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश, असली की जगह नकली परीक्षार्थियों ने लिखे पेपर; 30 गिरफ्तार

🔶राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय समेत 14 लोग जिम्मेदार, ट्रस्ट ने की है बड़ी सिफारिश

🔶भाजपा सरकार का पहला बजट: ‘विकसित बंगाल’ की नींव, रोजगार से महिला सशक्तीकरण तक बड़ी सौगात

🔶दावा- राहुल की स्कूबा डाइविंग पर 26 करोड़ खर्च: कांग्रेस बोली- रिजिजू बदनामी फैलाने वाले मंत्री बने; ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से ध्यान भटकाना चाहते हैं

🔶ईरान ने जेडी वेंस के दावे को किया खारिज, कहा- तेहरान ने परमाणु निरीक्षण की नहीं दी अनुमति

🔶'सरेंडर के बाद गोली मारने' के आरोप पर मानवाधिकार आयोग सख्त, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार से मांगा जवाब

🔶बीकानेर-अहमदाबाद नई रेल सेवा: राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मिली नई रफ्तार

🔶जयशंकर की कूटनीतिक दौड़ शुरू: मंगोलिया-दक्षिण कोरिया दौरे पर करेंगे अहम वार्ता, जेजू फोरम में देंगे संबोधन

         *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात..!!*

                          जय हो🙏

TRN LIVE : *सुबह की देश-राज्यों से बड़ी खबरें..*

       *23 - जून - मंगलवार*

                        👇

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*अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने पर प्रतिबंध हटाया: अगले 60 दिन भारत भी खरीद सकता है, ईरान में फिर तैनात होंगे UN के न्यूक्लियर इंस्पेक्टर*

*1* पीएम मोदी ने कहा कि आज का भारत न केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि वैश्विक मंच पर एक बेहद विश्वसनीय और भरोसेमंद ताकत बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि आज भारत अगले 1,000 वर्षों के भविष्य की पटकथा लिख रहा है और यही नए भारत का दुनिया के लिए सबसे बड़ा भरोसा यानी गारंटी है

*2* प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश की सोच में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव आया है। पहले जहां लोग सोचते थे कि 'यह काम कभी नहीं हो सकता', वहीं आज हर देशवासी का भरोसा है कि 'यह काम होकर रहेगा'। सोच में आया यह बदलाव ही नए भारत की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है

*3* मोदी बोले- देश में नक्सलवाद आखिरी सांसें गिन रहा है, आज जो संविधान हाथ में हिलाते हैं; नक्सली हिंसा के चरम पर उनके हाथ कांपते थे

*4* केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मंगलवाार को नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में NAFED के ऑक्शन पोर्टल ‘NAFEX.in’ का शुभारंभ करेंगे। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे

*5* भारत की अध्यक्षता में हो रही ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक का आज दूसरा और आखिरी दिन है। इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कर रहे हैं। यह बैठक सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर केंद्रित है।

*6* अमेरिका ने भारत की M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के रखरखाव के लिए 23 करोड़ डॉलर के पैकेज की घोषणा की है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि यह सौदा भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा। इस पैकेज में स्पेयर पार्ट्स, तकनीकी सहायता और अन्य जरूरी उपकरण शामिल हैं

*7* होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़े उर्वरक से लदे चार जहाज, सरकार ने कहा- खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद

*8* उद्धव के 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल, 4 साल में दूसरी टूट, शिंदे बोले- छक्का लगाया; आदित्य ने पाला बदलने वालों को बिकाऊ कहा

*9* 'एकनाथ शिंदे ने सिजेरियन प्रक्रिया के जरिए 6 गद्दारों को दिया जन्म', महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' हुआ सफल तो फूटा संजय राउत का गुस्सा

*10* महाराष्ट्र: अन्ना हजारे का सरकार को अल्टीमेटम, बोले- RTI नियमों बदलाव वापस नहीं लिए तो करूंगा अनशन

*11* लखनऊ अग्निकांड: सीएम योगी का ताबड़तोड़ एक्शन, चार अफसरों को किया सस्पेंड, चार गिरफ्तार, एसआईटी करेगी जांच

*12* कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट में धमाका, 12 भारतीयों समेत 13 की मौत, 60 से ज्यादा घायल; दो दिन पहले प्रोडक्शन शुरू हुआ था

*13* 'अगर ईरान समझौते से मुकरा, तो जो करना पड़ेगा वो करूंगा', राष्ट्रपति ट्रंप की खुली चेतावनी

*14* मेसी के फुटबॉल वर्ल्डकप में सबसे ज्यादा 18 गोल, जर्मनी के क्लोजे का रिकॉर्ड तोड़ा; अर्जेंटीना ने ऑस्ट्रिया को 2-0 से हराया, नॉकआउट में पहुंची

*15* विमेंस टी-20 वर्ल्डकप में आज तीन मैच, न्यूजीलैंड Vs स्कॉटलैंड, ऑस्ट्रेलिया के सामने पाकिस्तान; श्रीलंका-आयरलैंड के लिए करो या मरो मुकाबला

*16* मानसून ने पकड़ी रफ्तार, उत्तर से दक्षिण तक आंधी-तूफान के आसार; मौसम विभाग का अलर्ट जारी

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TRN LIVE : ✍️

विषय: भोजपुर कांड संख्या-73/25 पर तथ्य, कानून और सामाजिक जिम्मेदारी

साथियों,

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना कांड संख्या-73/25 को लेकर पूरे बिहार में व्यापक चर्चा चल रही है। सोशल मीडिया, टीवी चैनलों और विभिन्न राजनीतिक मंचों पर इस मामले को लेकर अनेक प्रकार के दावे और प्रतिदावे किए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में हमारा दायित्व है कि भावनाओं से पहले उपलब्ध तथ्यों और अभिलेखों को देखा जाए।

सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि 24 मार्च 2025 को शाहपुर थाना में कांड संख्या-73/25 दर्ज किया गया। FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार सरकारी भूमि मापी की प्रक्रिया चल रही थी। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि सरकारी कार्य के दौरान विवाद उत्पन्न हुआ, सरकारी कर्मियों एवं पुलिस बल के साथ दुर्व्यवहार किया गया तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई।

उपलब्ध FIR के अनुसार भरत भूषण तिवारी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गईं। FIR में धारा 126(2), 115(2), 132, 352, 351(2) BNS तथा SC/ST Act की धारा 3(1)(r), 3(1)(s) और 3(2)(va) का उल्लेख दिखाई देता है।

FIR के अनुसार मामले के अनुसंधान का दायित्व पुलिस उपनिरीक्षक (SI) ज्योति कुमारी को सौंपा गया। यह भी दस्तावेज़ में दर्ज है कि मामले को नियमित अनुसंधान हेतु पंजीकृत कर जांच प्रारंभ की गई।

यहां दो बातें स्पष्ट रूप से समझनी होंगी।

पहली बात — FIR किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं होती। FIR केवल आरोपों का प्रारंभिक अभिलेख होती है, जिसकी सत्यता की जांच पुलिस, न्यायालय और संबंधित संस्थाएं करती हैं।

दूसरी बात — किसी भी मुठभेड़, पुलिस कार्रवाई या विवादित घटना की निष्पक्ष जांच होना लोकतंत्र की आवश्यकता है। यदि किसी नागरिक, परिवार या सामाजिक संगठन को जांच पर संदेह है, तो उसका समाधान न्यायिक प्रक्रिया से होना चाहिए।

दुर्भाग्य से इस पूरे प्रकरण को कुछ लोग राजनीतिक और जातीय चश्मे से देखने लगे हैं। इससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा हो रहा है। बिहार की राजनीति में पहले से ही सामाजिक समीकरणों को लेकर संवेदनशील माहौल रहता है। ऐसे समय में जिम्मेदार राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को संयम बरतना चाहिए।

हम मानते हैं कि मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के नेतृत्व में सरकार की जिम्मेदारी है कि इस मामले की जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हो। साथ ही सरकार के सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों और नेताओं को भी अपनी भाषा और सार्वजनिक वक्तव्यों में संयम रखना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में शब्द भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं जितने निर्णय।

हम विपक्षी दलों से भी आग्रह करते हैं कि वे किसी घटना को राजनीतिक लाभ के अवसर के रूप में न देखें। यदि किसी के पास तथ्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। केवल भावनात्मक प्रचार या आधी-अधूरी जानकारी से समाज में भ्रम और अविश्वास बढ़ता है।

इसी प्रकार सत्ता पक्ष के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी निवेदन है कि वे किसी भी मामले को जातीय संघर्ष में बदलने से बचें। बिहार की सामाजिक एकता और राजनीतिक स्थिरता हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री नागमणि कुशवाहा जी का यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि—

"अपराधी का कोई धर्म, जाति या समाज नहीं होता; उसकी पहचान उसके कृत्य से होती है। अपराध को जाति के चश्मे से नहीं, कानून और न्याय के चश्मे से देखा जाना चाहिए।"

हमारी स्पष्ट मांग है:

भोजपुर कांड संख्या-73/25 तथा उससे जुड़े सभी घटनाक्रमों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो।

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि अफवाहों और भ्रम की स्थिति समाप्त हो।

दोषी चाहे कोई भी हो, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो।

किसी भी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या मीडिया मंच द्वारा समाज को जातीय आधार पर विभाजित करने का प्रयास न किया जाए।

बिहार में सामाजिक सद्भाव, न्याय और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

आज बिहार को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि सत्य और न्याय की आवश्यकता है। हमें भावनाओं से नहीं, तथ्यों और संविधान के मार्गदर्शन में आगे बढ़ना चाहिए।

— निखिलेश कुमार

जिला प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी

अखिल भारतीय युवा कुशवाहा समाज भारत, भागलपुर

संस्थापक:- सर्वजन अर्जक मिशन भागलपुर

JITENDRA kumar : ✍️😆😂🤣

हास्य-व्यंग्य लेख की कड़ी – 7

व्हाट्सएप विश्वविद्यालय का स्वर्ण पदक

कहते हैं कि शिक्षा मनुष्य को ज्ञानवान बनाती है। लेकिन आधुनिक युग में कुछ लोगों ने शिक्षा व्यवस्था को इतना सरल बना दिया है कि अब न किताब की ज़रूरत है, न परीक्षा की, न शिक्षक की और न ही तर्क की।

बस सुबह-सुबह एक "फ़ॉरवर्डेड मेसेज" आ जाना चाहिए और आदमी सीधे विशेषज्ञ बन जाता है।

व्हाट्सएप विश्वविद्यालय देश का ऐसा महान संस्थान है जहाँ प्रवेश लेने के लिए किसी योग्यता की आवश्यकता नहीं होती। केवल दो चीज़ें चाहिए—सस्ता इंटरनेट और महँगा आत्मविश्वास।

यहाँ इतिहास का पाठ पढ़ाने वाले वही लोग होते हैं जिन्होंने इतिहास की किताब आख़िरी बार स्कूल छोड़ते समय देखी थी।

विज्ञान विभाग में ऐसे-ऐसे शोध होते हैं कि न्यूटन, आइंस्टीन और एपीजे अब्दुल कलाम भी पढ़ लें तो दोबारा परीक्षा देने बैठ जाएँ।

यहाँ हर दूसरे दिन कोई नया शोध आता है—

"अमेरिका ने मान लिया..."

"नासा ने स्वीकार कर लिया..."

"संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा कर दी..."

और जब पूछा जाए कि भाई, स्रोत क्या है?

तो जवाब मिलता है—

"मेरे चाचा के दोस्त के जीजा के बहनोई ने भेजा है, बिल्कुल पक्का है!"

व्हाट्सएप विश्वविद्यालय का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है—"स्वर्ण पदक"।

यह पदक उसे दिया जाता है जो बिना पढ़े किसी भी खबर पर तुरंत विश्वास कर ले, बिना सोचे उसे दस ग्रुप में भेज दे और फिर टिप्पणी करे—

"सच्चाई मीडिया आपको कभी नहीं बताएगा!"

इस विश्वविद्यालय में शोध का स्तर इतना ऊँचा है कि निष्कर्ष पहले तय कर लिया जाता है और तथ्य बाद में खोजे जाते हैं।

यहाँ तर्क करना अपराध है और सवाल पूछना राष्ट्र-विरोधी गतिविधि माना जाता है।

सबसे प्रतिभाशाली छात्र वह माना जाता है जो हर विषय पर विशेषज्ञ हो—सुबह डॉक्टर, दोपहर में इतिहासकार, शाम को अर्थशास्त्री और रात होते-होते अंतरराष्ट्रीय मामलों का विश्लेषक।

डिग्री वितरण समारोह भी बड़ा अनोखा होता है।

कुलपति महोदय घोषणा करते हैं—

"फ़ॉरवर्ड कुमार को लगातार 5000 अपुष्ट संदेश प्रसारित करने, 200 अफवाहों को जीवित रखने और बिना तथ्य के 100 बहस जीतने पर व्हाट्सएप विश्वविद्यालय का स्वर्ण पदक प्रदान किया जाता है।"

पूरा सभागार तालियों से गूँज उठता है और अगले ही मिनट यह खबर भी व्हाट्सएप पर फ़ॉरवर्ड कर दी जाती है कि इस पदक को हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने विश्व का सर्वोच्च सम्मान घोषित कर दिया है।

अंत में व्हाट्सएप विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों से विनम्र निवेदन है—

ज्ञान बाँटिए, लेकिन पहले उसकी जाँच भी कर लीजिए।

क्योंकि हर फ़ॉरवर्ड सत्य नहीं होता और हर वायरल संदेश इतिहास नहीं बन जाता।

वरना एक दिन ऐसा आएगा कि सच प्रमाण खोजता रह जाएगा और अफवाह स्वर्ण पदक लेकर मंच से उतर जाएगी!

😂😂😂

TRN LIVE u: ✍️

हास्य-व्यंग्य श्रृंखला

"मंत्री जी का विभाग: बयान मंत्रालय"

देश में एक समय ऐसा था जब मंत्री अपने विभाग के काम से पहचाने जाते थे।

रेल मंत्री रेल से, शिक्षा मंत्री शिक्षा से, कृषि मंत्री खेती से और स्वास्थ्य मंत्री अस्पतालों से।

लेकिन अब नया भारत है।

अब मंत्री जी अपने विभाग से कम और अपने बयान से ज्यादा पहचाने जाते हैं।

जनता पूछती है—"मंत्री जी, आपके विभाग ने क्या काम किया?"

मंत्री जी मुस्कुराकर कहते हैं—"काम बाद में बताएँगे, पहले बताइए मेरा कल वाला बयान वायरल हुआ कि नहीं?"

आजकल कैबिनेट की बैठक में शायद विकास योजनाओं से ज्यादा यह चर्चा होती होगी कि अगले सप्ताह कौन-सा बयान टीवी चैनलों पर चलना चाहिए।

किसी मंत्री को पाकिस्तान याद आ जाता है।

किसी को मुगल काल याद आ जाता है।

किसी को हिंदू-मुस्लिम याद आ जाता है।

किसी को चीन का बहिष्कार याद आ जाता है।

और किसी को विपक्ष का डीएनए याद आ जाता है।

लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि किसी को बेरोजगारी की फाइल नहीं याद आती।

किसी को सरकारी स्कूलों की टूटी छत याद नहीं आती।

किसी को अस्पताल की खाली दवा अलमारी याद नहीं आती।

किसी को किसानों की लागत और आमदनी का हिसाब याद नहीं आता।

लगता है सरकार में एक नया मंत्रालय बन चुका है—"बयान मंत्रालय"।

इस मंत्रालय का काम है कि जनता यदि रोजगार पूछे तो उसे राष्ट्रवाद का भाषण दे दिया जाए।

यदि शिक्षा पूछे तो इतिहास का विवाद दे दिया जाए।

यदि महँगाई पूछे तो पड़ोसी देशों की स्थिति समझा दी जाए।

यदि पेपर लीक पूछे तो देशभक्ति का प्रमाणपत्र बाँट दिया जाए।

टीवी चैनलों की भी अपनी मजबूरी है।

यदि कोई मंत्री बोले—"इस वर्ष शिक्षा बजट बढ़ा है।"

तो यह खबर दो मिनट चलेगी।

लेकिन यदि कोई बोले—"हम उन्हें उसी भाषा में जवाब देंगे।"

तो पूरी रात बहस चलेगी।

एंकर चिल्लाएँगे।

पैनलिस्ट लड़ेंगे।

दर्शक भ्रमित होंगे।

और असली मुद्दे अगले दिन तक गायब हो जाएँगे।

जनता भी कमाल है।

सड़क टूटी हो तो चुप।

अस्पताल खाली हो तो चुप।

स्कूल में शिक्षक न हों तो चुप।

लेकिन किसी नेता ने टीवी पर एक नया नारा बोल दिया तो पूरा देश उसी पर चर्चा करने लगता है।

अब हालत यह है कि कुछ नेताओं के भाषण सुनकर लगता है कि वे मंत्री कम और स्थायी टीवी पैनलिस्ट ज्यादा हैं।

उनके विभाग में क्या हुआ, इसकी जानकारी शायद विभागीय सचिव के पास भी न हो।

लेकिन किस दिन कौन-सा बयान देना है, इसकी तैयारी पूरी रहती है।

उधर विकास जी बेचारे फिर लापता हैं।

रोजगार जी अब भी खोजे जा रहे हैं।

शिक्षा बहन अभी भी बजट की प्रतीक्षा में बैठी हैं।

स्वास्थ्य बाबू अस्पताल के बाहर लाइन में खड़े हैं।

और टीवी स्क्रीन पर बहस चल रही है—

"देश का सबसे बड़ा मुद्दा आखिर है क्या?"

जनता धीरे से जवाब देती है—

"मुद्दे तो बहुत हैं साहब,बस उन्हें बोलने वाला कोई मंत्री नहीं मिलता।"

— व्यंग्यकार की कलम से

JITENDRA kumar : ✍️

हास्य-व्यंग्य श्रृंखला

"चुनाव आते ही पाकिस्तान क्यों याद आता है?" (विस्तारित संस्करण)

चुनाव का मौसम आते ही देश में एक अद्भुत परिवर्तन दिखाई देता है। जिस प्रकार बरसात में मेंढक, गर्मी में आम और सर्दी में धुंध दिखाई देने लगती है, उसी प्रकार चुनाव आते ही नेताओं को पाकिस्तान दिखाई देने लगता है।

पांच साल तक बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की आय, युवाओं की नौकरी और उद्योगों की स्थिति चाहे फाइलों में सोती रहे, लेकिन जैसे ही चुनाव की तारीख नजदीक आती है, पाकिस्तान अचानक राष्ट्रीय चिंता का सबसे बड़ा विषय बन जाता है।

ऐसा लगता है मानो देश के चुनाव आयोग ने नहीं, बल्कि पाकिस्तान चुनाव कार्यक्रम जारी किया हो।

चुनावी मंचों पर प्रश्न पूछा जाए कि कितने स्कूल बने, कितने अस्पताल खुले, कितने युवाओं को रोजगार मिला, तो जवाब थोड़ा कठिन हो जाता है। लेकिन यदि पूछा जाए कि पाकिस्तान को कितनी बार चेतावनी दी गई, तो उत्तर पूरे आत्मविश्वास के साथ मिलता है।

चुनाव आते ही केवल पाकिस्तान ही नहीं, जाति भी याद आ जाती है, धर्म भी याद आ जाता है, इतिहास भी जाग जाता है और सदियों पुराने विवाद भी अचानक राष्ट्रहित का विषय बन जाते हैं।

जो नेता पांच वर्षों तक समाज को "सबका साथ-सबका विकास" का संदेश देते हैं, वही चुनाव आते ही समाज को जातियों और धार्मिक खांचों में बांटकर वोटों का गणित समझाने लगते हैं।

चुनाव आते ही कुछ लोगों को यह भी याद आने लगता है कि कौन सा राजा किस जाति का था, कौन सा योद्धा किस समुदाय का था और किस सड़क, विश्वविद्यालय या योजना का नाम बदलना है।

इतिहास की किताब अचानक इतनी महत्वपूर्ण हो जाती है कि लगता है मानो चुनाव आयोग नहीं, इतिहास विभाग चुनाव लड़ रहा हो।

कभी किसी को राजा सुहेलदेव याद आ जाते हैं, कभी किसी को मुगल शासक याद आ जाते हैं, कभी किसी को मंदिर याद आता है तो कभी किसी को मस्जिद।

लेकिन आश्चर्य यह है कि इसी दौरान शायद भूगोल छुट्टी पर चला जाता है, अर्थशास्त्र बीमार पड़ जाता है, समाजशास्त्र लापता हो जाता है और विज्ञान किसी कोने में बैठकर रोने लगता है।

किसी नेता को यह याद नहीं आता कि कितने विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं, कितने अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, कितने विश्वविद्यालयों में शोध ठप है और कितने युवा प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

"रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम" का संदेश प्रेम, करुणा और सद्भाव का था, लेकिन चुनाव आते ही प्रेम का अध्याय बंद हो जाता है और नारेबाजी का अध्याय खुल जाता है।

राम के आदर्शों पर चर्चा कम होती है, राम के नाम पर बहस अधिक होती है।

मंदिर-मस्जिद फिर सुर्खियों में आ जाते हैं, पाकिस्तान फिर टीवी स्टूडियो में बुला लिया जाता है, चीन का सामान फिर अचानक देशभक्ति की कसौटी बन जाता है, और जनता फिर सोचती रह जाती है कि आखिर उसकी नौकरी, उसकी पढ़ाई और उसकी रोजी-रोटी का क्या हुआ।

टीवी चैनलों पर बहस भी कमाल की होती है।

विषय चाहे बेरोजगारी हो, पांच मिनट बाद बहस पाकिस्तान पर पहुंच जाती है।

विषय चाहे शिक्षा बजट हो, दस मिनट बाद चर्चा मंदिर-मस्जिद पर पहुंच जाती है।

विषय चाहे किसानों की आय हो, थोड़ी देर बाद एंकर घोषणा कर देता है—

"लेकिन असली सवाल यह है कि पाकिस्तान क्या सोच रहा होगा?"

जनता बेचैन होकर पूछती है—

"भाई साहब, हम तो यह जानना चाहते थे कि हमारा भविष्य क्या होगा!"

चुनाव आते ही राष्ट्रवाद का तापमान भी अचानक बढ़ जाता है।

ऐसा प्रतीत होता है मानो देश के सामने केवल दो ही विकल्प हों—

पहला पाकिस्तान को हराना और दूसरा अगला चुनाव जीतना।

बाकी विषय अगले पांच वर्षों तक प्रतीक्षा सूची में डाल दिए जाते हैं।

अब जनता भी धीरे-धीरे समझदार हो रही है।

वह पूछने लगी है कि यदि पाकिस्तान चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है, तो फिर चुनाव भारत में क्यों हो रहा है?

यदि हर समस्या का समाधान पाकिस्तान को कोसना है, तो फिर बेरोजगारी कार्यालय की जगह विदेश मंत्रालय ही खोल देना चाहिए।

और यदि हर चुनाव में वही मुद्दे लौटकर आने हैं, तो फिर विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान और रोजगार को भी कम से कम चुनावी मंच पर एक बार बोलने का अवसर मिलना चाहिए।

अंततः लोकतंत्र में चुनाव जनता के भविष्य का उत्सव होना चाहिए, न कि भय, विभाजन और पुरानी दुश्मनियों की पुनरावृत्ति का महोत्सव।

इसलिए जनता का विनम्र प्रश्न है—

"चुनाव आते ही पाकिस्तान क्यों याद आता है?

और चुनाव खत्म होते ही बेरोजगार युवा क्यों भूल जाता है?"

यही वह प्रश्न है जिसका उत्तर शायद किसी टीवी डिबेट, किसी व्हाट्सएप विश्वविद्यालय, किसी चुनावी रैली या किसी भाषण में नहीं मिलेगा।

लेकिन एक दिन मतपेटी अवश्य पूछेगी।

— जारी है...

Jeetu dehati : अगर कोई पूछे भारत क्या है तो सिर्फ ताजमहल संस्कृति और इतिहास मत बताना उसे ये भी बताना ये वो देश है जहाँ हर साल हजारों बेटियों की चीखें system तक पहुँचने से पहले दब जाती है जहाँ कई रेपिस्टों को बाहर छोड़ दे हज दिया जाता है शिक्षा और रोजगार की बात करने वालों को जेल में डाल दिया जाता है उसे बताना ये वो देश है जहाँ करोड़ों युवा degree लेकर नौकरी के लिए line में खड़े हैं लेकिन टीवी की बहसों में उनके सपनों से ज्यादा धर्म और नफरत बिकती है जहाँ स्कूल और अस्पताल से ज्यादा बहस इस बात पर होती है कि कौन किस धर्म का है जहाँ सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना लोकतंत्र का हिस्सा होना चाहिए, लेकिन कई बार सवाल पूछने वालों को ही दुश्मन बना दिया जाता है, लेकिन याद रखना भारत सिर्फ ये नहीं है, भारत वो किसान भी है जो सबका पेट भरता है, वो जवान भी है, जो सीमा पर खड़ा है, वो युवा भी है, जो इस देश को बदलने का सपना देखता है, क्योंकि असली भारत किसी नफरत से नहीं, न्याय शिक्षा और इंसानियत से बनेगा..

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TRN LIVE : सोचिए क्या भगत सिंह आजाद भारत में होते तो उनका भी एनकाउंटर कर दिया जाता..रुको ये कोई कहानी नहीं है, ये आज की सच्चाई है। भरत तिवारी एक ऐसा नाम जिसने अपने गाँव की हर समस्या को सामने लाने की हिम्मत दिखाई, वह बाढ़ पीड़ितों, विस्थापित परिवारों और स्थानीय लोगों के हक की लड़ाई लड़ते हैं। लेकिन जब उनकी आवाज नहीं सुनी जाती तो मजबूरी में हथियार का सहारा लेते हैं और सिस्टम के सामने अपनी बात रखकर सरेंडर भी कर देते हैं और बदले में उनको देशद्रोही बोलकर एनकाउंटर कर दिया जाता है। वही दूसरी तरफ जो लोग रेप कर रहे और धर्म के नाम पर लोगों को आपस में लड़वा रहे हैं, उनको देशभक्त कहा जा रहा है। भरत तिवारी सही थे या गलत, इसका फैसला इतिहास करेगा। लेकिन एक सवाल हमेशा जिंदा रहेगा, क्या इस देश में हर आवाज को बराबर सुना जाता है या कुछ आवाजें हमेशा के लिए खामोश कर दी जाती हैं..

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Jeetu dehati

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