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Jitendra Kumar: 👉👉 मोदी जी - बांध सुरक्षा अधिनियम की आवश्यकता
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बांध मालिक देश है , जिसके पास 6628 निर्दिष्ट बांध हैं, जिनमें से 6,545 चालू हैं और 83 निर्माणाधीन हैं।
इन बांधों की कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 330 अरब घन मीटर है। ये बांध राष्ट्रीय खाद्य, ऊर्जा और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
भारत के 26% से अधिक बांध 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं । इनमें 291 बांध 100 वर्ष से अधिक पुराने हैं। लगभग 42% बांध 25-50 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं। यह व्यवस्थित पुनर्वास, संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण और सुरक्षा उन्नयन की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।
जलवायु परिवर्तन ने अत्यधिक वर्षा और बाढ़ की घटनाओं को तीव्र कर दिया है, जिससे बांध के बुनियादी ढांचे और जलाशय प्रबंधन प्रणालियों पर अभूतपूर्व दबाव पड़ रहा है।
इस अधिनियम से पहले, बांध सुरक्षा मुख्य रूप से प्रशासनिक दिशानिर्देशों के माध्यम से नियंत्रित होती थी, जिसमें कोई समर्पित वैधानिक ढांचा या समान राष्ट्रीय मानक नहीं थे।
बांध टूटने से जानमाल का भारी नुकसान, संपत्ति का विनाश, पर्यावरणीय क्षति और निचले इलाकों में दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक व्यवधान हो सकता है।बांधों की निगरानी, निरीक्षण, विनियमन और आपदा निवारण के लिए एक मजबूत, बहुस्तरीय संस्थागत ढांचा स्थापित करने के लिए, बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर समर्पित निकायों का निर्माण करता है।
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (एनसीडीएस) : एनसीडीएस सर्वोच्च नीति-निर्माण निकाय के रूप में कार्य करती है जो राष्ट्रीय बांध सुरक्षा नीतियों को विकसित करने, नियमों की सिफारिश करने, बांध विफलताओं का विश्लेषण करने और बांध इंजीनियरिंग और सुरक्षा प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार है।
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) : एनडीएसए केंद्रीय नियामक प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है जो राष्ट्रीय बांध सुरक्षा नीतियों को लागू करने, राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के बीच विवादों को सुलझाने, पेशेवरों को मान्यता देने और सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।
राज्य बांध सुरक्षा संगठन (एसडीएसओ) : प्रत्येक राज्य को बांध इंजीनियरिंग, जल विज्ञान, भूविज्ञान और उपकरण के विशेषज्ञों से युक्त एक एसडीएसओ स्थापित करना आवश्यक है, जो राज्य के भीतर बांधों की निगरानी, निरीक्षण और सुरक्षा मूल्यांकन करने के लिए जिम्मेदार होगा।
राज्य बांध सुरक्षा समिति (एससीडीएस) : एससीडीएस राज्य स्तर पर बांध सुरक्षा गतिविधियों की निगरानी और समन्वय प्रदान करती है, साथ ही राज्य बांध सुरक्षा संगठन के कामकाज की समीक्षा भी करती है। बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 निर्दिष्ट बांधों की निगरानी, निरीक्षण, संचालन, रखरखाव और विनियमन के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा पेश करता है ताकि बांध विफलताओं के जोखिम को कम किया जा सके और जीवन, संपत्ति और पर्यावरण की रक्षा की जा सके।
अनिवार्य आवधिक निरीक्षण : प्रत्येक निर्दिष्ट बांध का मानसून से पहले और बाद में, साथ ही भूकंप , बाढ़ या अन्य चरम घटनाओं जैसी आपदाओं के बाद नियमित निरीक्षण किया जाना चाहिए जो बांध की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
बांध सुरक्षा इकाइयाँ : बांध मालिकों को निरंतर निगरानी, रखरखाव और सुरक्षा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए योग्य कर्मियों से सुसज्जित समर्पित बांध सुरक्षा इकाइयाँ स्थापित करना आवश्यक है।
आपातकालीन कार्य योजनाएँ (ईएपी) : प्रत्येक बांध में एक विस्तृत आपातकालीन कार्य योजना होनी चाहिए जिसमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, निकासी प्रक्रियाएँ, संचार प्रोटोकॉल और निचले इलाकों में रहने वाले समुदायों के लिए प्रतिक्रिया तंत्र का विवरण हो।
व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन : सभी निर्दिष्ट बांधों को संरचनात्मक अखंडता, परिचालन सुरक्षा और जलवैज्ञानिक पर्याप्तता का आकलन करने के लिए नियमित अंतराल पर एक स्वतंत्र और व्यापक सुरक्षा समीक्षा से गुजरना होगा।
जोखिम एवं खतरे का वर्गीकरण : बांधों को खतरे की संभावना और संवेदनशीलता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है ताकि प्राथमिकता के आधार पर निगरानी, रखरखाव और संसाधन आवंटन किया जा सके।
उपकरण एवं निगरानी प्रणाली : बांध मालिकों को संरचनात्मक व्यवहार, रिसाव, विरूपण और अन्य सुरक्षा मापदंडों की निरंतर निगरानी के लिए उपयुक्त उपकरण स्थापित और बनाए रखना चाहिए।
संचालन एवं रखरखाव नियमावली : सुरक्षित और मानकीकृत संचालन सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बांध को अद्यतन संचालन, रखरखाव और आपातकालीन नियमावली बनाए रखना आवश्यक है।
बांध सुरक्षा समीक्षा और उपचारात्मक उपाय : सुरक्षा संबंधी चिंताओं की पहचान होने पर अधिकारी बांध मालिकों को मरम्मत, पुनर्वास, सुदृढ़ीकरण या अन्य उपचारात्मक उपाय करने का निर्देश दे सकते हैं।
बांध संबंधी घटनाओं की अनिवार्य रिपोर्टिंग : बांध मालिकों को असामान्य रिसाव, संरचनात्मक खराबी, फाटकों की खराबी, अत्यधिक बाढ़, या किसी भी अन्य घटना की तुरंत रिपोर्ट करनी चाहिए जिससे सुरक्षा जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
सुरक्षा संबंधी दस्तावेज़ों का रखरखाव : बांध के पूरे जीवनचक्र के दौरान डिजाइन, निर्माण, संचालन, निरीक्षण, मरम्मत, उपकरण संबंधी डेटा और सुरक्षा समीक्षा से संबंधित व्यापक रिकॉर्ड बनाए रखना आवश्यक है।
विवाद समाधान तंत्र : राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण को राज्य बांध सुरक्षा संगठनों और अन्य हितधारकों के बीच बांध सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को हल करने का अधिकार है।
दंड प्रावधान : अधिनियम में अनुपालन न करने, निरीक्षण में बाधा डालने या अधिनियम के तहत जारी निर्देशों का पालन न करने पर जुर्माना और कारावास सहित दंड निर्धारित किए गए हैं।
चिंताएँ और चुनौतियाँ
संघवाद संबंधी मुद्दे : कई राज्यों ने चिंता व्यक्त की है कि यह अधिनियम जल पर राज्य की शक्तियों का अतिक्रमण कर सकता है, जो राज्य सूची की प्रविष्टि 17 के अंतर्गत आता है।
क्षमता संबंधी बाधाएं : कई राज्यों को प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक प्रशिक्षित बांध इंजीनियरों, जल विज्ञानियों और तकनीकी विशेषज्ञों की कमी का सामना करना पड़ता है।
कार्यान्वयन की कमी : पूर्णतः कार्यशील एसडीएसओ की स्थापना और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण प्रशासनिक चुनौतियां बनी हुई हैं।
अंतरराज्यीय बांध विवाद : बांध सुरक्षा विनियमन और मौजूदा अंतरराज्यीय जल विवादों के बीच ओवरलैप से क्षेत्राधिकार संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
स्वामित्व संबंधी अस्पष्टताएँ : कुछ बांधों में स्वामित्व और परिचालन संबंधी जिम्मेदारियों के अस्पष्ट होने से सुरक्षा दायित्वों के प्रवर्तन में जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
जलवायु परिवर्तन के जोखिम : मौजूदा सुरक्षा आकलन वर्षा के बदलते पैटर्न, हिमनदी झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ और चरम जलवैज्ञानिक घटनाओं को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रख सकते हैं।
आगे बढ़ने का रास्ता
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की क्षमता को सुदृढ़ करें : राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण को पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता, वित्तीय संसाधन और परिचालन स्वायत्तता से लैस किया जाना चाहिए।
सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना : प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्यों को परामर्श, क्षमता निर्माण और सूचना साझाकरण के माध्यम से सहयोग करना चाहिए।
तकनीकी विशेषज्ञता का विकास : बांध इंजीनियरिंग, जल विज्ञान, भू-तकनीक और जोखिम मूल्यांकन में समर्पित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का राज्यों भर में विस्तार किया जाना चाहिए।
जलवायु अनुकूलन को एकीकृत करें : बांध डिजाइन मानकों और सुरक्षा आकलन में जलवायु-समायोजित बाढ़ अनुमानों और चरम मौसम पूर्वानुमानों को शामिल किया जाना चाहिए।
सामुदायिक तैयारियों को बढ़ाना : नियमित मॉक ड्रिल, जन जागरूकता अभियान और सामुदायिक भागीदारी को आपातकालीन कार्य योजनाओं में एकीकृत किया जाना चाहिए।
ड्रिप योजना का दायरा बढ़ाएं : पुनर्वास और आधुनिकीकरण के प्रयासों को देश भर के सभी वृद्ध और असुरक्षित बांधों तक विस्तारित किया जाना चाहिए।
प्रौद्योगिकी का लाभ उठाएं : बांधों की सुरक्षा के लिए सक्रिय प्रबंधन हेतु रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, वास्तविक समय निगरानी प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल ट्विन का उपयोग किया जाना चाहिए।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ब्लॉकचेन, ड्रोन और LiDAR तकनीक का उपयोग राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) की क्षमता को मजबूत करने के लिए अत्यधिक प्रभावी है। भारत में 6,600 से अधिक निर्दिष्ट बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए इन तकनीकों का एकीकृत उपयोग इस प्रकार किया जा सकता है:
ड्रोन और LiDAR द्वारा सटीक मैपिंग और निरीक्षणडेटा संकलन: दुर्गम क्षेत्रों, जलाशयों और बांध की दीवारों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें और वीडियो डोन (Drones) के जरिए तेजी से लिए जा सकते हैं। LiDAR सिस्टम: लाइट डिटेक्शन एंड रेंगिंग (LiDAR) तकनीक से बांध के ढांचे, मिट्टी के कटाव (seepage), और सतह के सूक्ष्म बदलावों का 3D मॉडल तैयार किया जा सकता है, जो पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है।AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा जोखिम विश्लेषणNETRA प्लेटफॉर्म: NDSA पहले से ही नेवी के सहयोग से NETRA (NDSA Engine for Tracking and Review using AI) का उपयोग कर रहा है, जो DHARMA डेटाबेस से जुड़कर निरीक्षण रिपोर्टों का विश्लेषण करता है भविष्यवाणी: AI एल्गोरिदम दरारों, रिसाव, और भूकंपीय प्रभावों का अध्ययन करके संभावित खतरों (जैसे बांध टूटना या बाढ़) की भविष्यवाणी कई घंटे या दिन पहले कर सकते हैं। ब्लॉकचेन तकनीक से डेटा सुरक्षा और पारदर्शिताअपरिवर्तनीय रिकॉर्ड: ड्रोन, LiDAR और सेंसर से प्राप्त महत्वपूर्ण डेटा ब्लॉकचेन (Blockchain) पर एन्क्रिप्ट किया जा सकता है।
विश्वसनीयता: ब्लॉकचेन के विकेंद्रीकृत (decentralized) लेज़र सिस्टम से डेटा में छेड़छाड़ या हेरफेर की संभावना खत्म हो जाती है, जिससे विभिन्न राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच एक 'सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ' (विश्वसनीय स्रोत) बनता है। इन तकनीकों के उपयोग से बांध सुरक्षा के पारंपरिक तौर-तरीकों को पूरी तरह से सक्रिय (Proactive) और डिजिटल बनाया जा सकता है, जिससे आपदाओं को समय रहते रोका जा सकता है।
पारदर्शिता सुनिश्चित करें : बांध सुरक्षा आकलन और अनुपालन रिपोर्टों का सार्वजनिक प्रकटीकरण जवाबदेही और जनता के विश्वास को बढ़ा सकता है।
Jitendra Kumar: नेहरू ने इतना सशक्त भारत बनाया कि 𝟏𝟗𝟖𝟒 में जब इंदिरा की मृत्यु हुई और बेटा राजीव प्रधानमंत्री बना, तो देश मे आम नागरिक को दो बोरी सीमेन्ट लेने के लिये भी तहसीलदार से परमिट लेना पड़ता था। ऐसा लम्बे समय तक चला रहा, ताकि लोग जरूरत के सामान के लिए भी सरकार के गुलाम बने रहे।
01 एक किलो चीनी, पॉम ऑयल खरीदने तक के लिये भी परमिट लगता था। शादी विवाह में एक क्विंटल चीनी लेने के लिये,तो लोग महीनों पहले से सोर्स सिफारिश खोजते फिरते थे। ऐसा वृद्ध लोगों ने देखा है!
तब भारत में एलपीजी के कनेक्शन के लिये तीन साल से लेकर 05/10 साल तक का समय लगता था। यकीन मानिए, देश में एलपीजी होते हुए, भी गृहणियां मिट्टी के तेल का स्टोव जलाती थीं, क्योंकि उन्हें डर रहता था कि, अगर गैस खत्म हो गयी, तो ब्लैक और लम्बी लम्बी लाइनों में रात भर लगने के बाद अगला पूरा दिन खड़े रह, गैस सिलेंडर भरवाना बहुत बड़ा काम था। एजेंसी के सामने बहुत लम्बी लाइन होती थी!
ये वो ज़माना था, जब देश मे बजाज स्कूटर प्रीमियम पर बिकते थे, मतलब 𝟓𝟎𝟎𝟎 का स्कूटर और 𝟔𝟎𝟎𝟎 ब्लैक! तब 𝟏𝟏,𝟎𝟎𝟎 में स्कूटर मिलेगा। तब टेलीफोन के कनेक्शन मिलने में 0𝟕 से 𝟏𝟎 साल लग जाते थे और बहुत जबरदस्त ब्लैक होती थी।
इसी तरह सन 1970 के आसपास ट्रैक्टर खरीदना के लिए नंबर लगाना पडता था और उस समय में मैसी फर्ग्यूसन ट्रैक्टर की कीमत लगभग 18 हजार रुपए थी और उसका नंबर आने में 10 से 15 साल लगते थे, तथा तत्काल लेने पर करीब 15 हजार के अधिक देना पडता था! यह राशि उस वक्त बहुत अधिक थी!
उस नेहरु खानदान के शासनकाल के जमाने में हर किसी वस्तु का ब्लैक मार्केटिंग होता था। साथ ही हर तरह के खाद्य पदार्थ और सीमेंट जैसी अनेक प्रकार की वस्तुओं में बहुत मिलावट होती थीं। रेडियो, साइकल खरीदने के लिए लाइसेंस लेना पड़ता था।
आधुनिक भारत के निर्माता नेहरू कितना बड़ा युगद्रष्टा था, इसका एक और क़िस्सा सुनिये। नेहरू ने 𝟏𝟗𝟓𝟕 में राजधानी दिल्ली के विकास के लिए 𝐃𝐃𝐀 की स्थापना की।
ऐसी एजेंसी जो मास्टर प्लान बनाती थी,उसमें अगले 𝟓𝟎 वर्षों की ही प्लानिंग करती थी कि, 𝟓𝟎 साल बाद ये शहर कैसा होगा। इसकी प्लानिंग करके ही शहर बसाया जाता है। उसकी सड़कें, पुल, सार्वजनिक परिवहन, रेलवे स्टेशन, बिजली पानी की व्यवस्था सब 𝟓𝟎 साल का सोच कर की जाती है।
नेहरू कहता था, "मेरे सपनों का भारत" और चमचों के चाचा ने सपने में भी कभी नही सोचा था कि, दिल्ली वाले जिंदगी में कभी कार तो क्या, स्कूटर भी खरीद पाएंगे इसलिये 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में बनाये गए, दिल्ली के 𝐃𝐃𝐀 फ्लैट्स देख लीजिये। किसी फ्लैट में कार, तो छोड़ो स्कूटर खड़ा करने तक की जगह नहीं है।
नेहरू कितना बड़ा युगद्रष्टा था, इसकी एक और मिसाल '𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐔𝐧𝐛𝐨𝐮𝐧𝐝𝐬' नामक किताब के लेखक गुरुचरण दास ने दी है। आप 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में 𝐏&𝐆 के 𝐂𝐄𝐎 रहे हैं। नेहरू जी एवं इंदिरा के भारत में किसी कंपनी को टूथपेस्ट की ज़्यादा ट्यूब बनाने के लिए भी भारत सरकार से आज्ञा लेनी पड़ती थी और वो आज्ञा बहुत देरी में मिलती थी!
𝟕𝟎 के दशक में एक बार तमिलनाडु में फ्लू फैल गया 𝐏&𝐆 का मशहूर विक्स इन्हेलर और विक्स वेपोरब तब भी बनता था। फ्लू फैला, तो विक्स बाजार से गायब हो गई। कंपनी ने भारत सरकार से 0𝟓 लाख अतिरिक्त विक्स इन्हेलर बनाने की इजाजत मांगी। वो इजाजत डेढ़ महीने में आयी, तब तक फ्लू ठीक हो चुका था। हमेशा ऐसा ही होता था!
बजाज के पास तब भी यह क्षमता थी कि, वे लाखों स्कूटर बना देते, पर नेहरू जी और इंदिरा ने उनको कभी भी बड़ी संख्या में स्कूटर बनाने नहीं दिए, जिससे ब्लैक मार्केटिंग बंद हो सके।
गुरुचरण दास लिखते हैं कि, बिड़ला जी के एक बेटे आदित्य बिड़ला ने भारत मे जब हिंडाल्को खड़ी की, तो नेहरू इंदिरा ने उनको इतना परेशान किया कि, उन्होंने फिर कभी देश में लम्बे समय तक कोई फैक्ट्री नहीं लगाई। जबकि उन्होंने अपने जीवन मे देश के बाहर 𝟑𝟐 बहुत बड़ी बड़ी फैक्टरी लगाई। 🤔😳😢
इसलिये आज के बाद यदि आपके मित्र कांग्रेसी ये कहे कि, नेहरू जी ने 𝐈𝐈𝐓, 𝐀𝐈𝐈𝐌𝐒, 𝐈𝐒𝐑𝐎 बनाए, तो उसके मुंह पर यह पोस्ट दे मारना और बताना कि पहला एम्स राजकुमारी अमृत कौर ने बनवाया, पहला IIT आजादी से पहले डिटेंशन कैंप था, जिसे ब्रिटिश ने बनाया था, ISRO नेहरू की मौत के बाद बना था। देशद्रोही कांग्रेस ने किसी ओर के बनवाए संस्थानो पर नेहरू की पर्ची चिपका दी और गुलाम चमचे नाचने लगे।🫣
नेहरू ने अपने जीवनकाल केवल एक चीज बनवाई और वो है पाकिस्तान।
नेहरू गद्दार था और अगले 200 वर्षो तक गद्दार ही कहलाएगा।
🇮🇳🙇♂️
Jitendra Kumar: *डिग्री पर 'इंडिया' की जगह देश का नाम 'भारत' लिख रहीं यूनिवर्सिटीज*
* विश्वविद्यालयों की डिग्री, मार्कशीट्स, कॉरेस्पॉन्डेंस, माइग्रेशन और यहां तक की साइनबोर्ड्स पर भी इंडिया शब्द हट गया है. इसकी जगह अब भारत शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है.
*"इंडिया" से "भारत" — अपनी सभ्यता की ओर एक वापसी।*
* देशभर के कई विश्वविद्यालय अब डिग्री, मार्कशीट और आधिकारिक दस्तावेज़ों पर "इंडिया" की जगह "भारत" मुद्रित करना शुरू कर रहे हैं।
* "भारत" केवल एक नाम नहीं है। यह एक ऐसी विरासत का प्रतीक है जिसकी जड़ें हजारों वर्ष पुरानी भारतवर्ष की अवधारणा में हैं, जो विश्व की सबसे प्राचीन सतत सभ्यताओं में से एक मानी जाती है।
*जब राष्ट्र अपने भविष्य का निर्माण करते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को अपनाते हैं, तो वे और अधिक सशक्त बनते हैं।*
* आर्थिक विकास से लेकर तकनीकी नवाचार तक, और अब अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति नए आत्मविश्वास के साथ, भारत वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत कर रहा है।
* डिग्री पर नाम भले ही अलग दिखाई दे, लेकिन इसका संदेश स्पष्ट और प्रेरणादायक है: अपनी जड़ों को जानिए। अपनी सभ्यता पर गर्व कीजिए। आत्मविश्वास के साथ भविष्य का निर्माण कीजिए।
*राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 21 जून को मध्य प्रदेश के जबलपुर में रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह (Convocation) में शामिल होना है. दिलचस्प बात ये है कि इस समारोह में दी जाने वाली सभी डिग्रियों पर देश का नाम 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा होगा.*
Jitendra Kumar: *देश में 1 जुलाई 2026 से ट्रेन में बिना टिकट यात्रा पर दोगुना जुर्माना लगेगा.*
* रेल मंत्रालय ने न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये किया.
*"देशभक्ति की शुरुआत रेलवे टिकट खिड़की से भी होती है। 'भारत माता की जय' के साथ 'टिकट भी है भाई' होना चाहिए।" 🇮🇳🚆*
"जो देश से प्यार करता है, वह बिना टिकट सफर नहीं करता।"
*🚆 बिना टिकट यात्रा पर रेलवे का बड़ा फैसला*
* भारतीय रेलवे ने बिना टिकट यात्रा करने पर न्यूनतम जुर्माना ₹250 से बढ़ाकर ₹500 करने का फैसला किया है।
* नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होने की संभावना है।
* यह जुर्माने में करीब 13 साल बाद की गई बड़ी बढ़ोतरी है।
* जुर्माने के अलावा यात्री को यात्रा का पूरा किराया भी चुकाना होगा।
* रेलवे का उद्देश्य टिकट चोरी रोकना, राजस्व बढ़ाना और यात्रियों में अनुशासन लाना है।
* अन्य नियम उल्लंघनों पर भी जुर्माना बढ़ाया जा सकता है।
*🇮🇳 देशभक्ति बिना टिकट नहीं आती*
* देशभक्ति केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट करने या झंडा लहराने से नहीं होती।
* सच्ची देशभक्ति सार्वजनिक सुविधाओं का ईमानदारी से उपयोग करने में है।
* बिना टिकट यात्रा करना रेलवे और देश के राजस्व को नुकसान पहुंचाना है।
* हर खरीदा गया टिकट रेलवे के विकास, सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं में योगदान देता है।
*"देशभक्ति की शुरुआत रेलवे टिकट खिड़की से भी होती है। 'भारत माता की जय' के साथ 'टिकट भी है भाई' होना चाहिए।" 🇮🇳🚆*
*"जो देश से प्यार करता है, वह बिना टिकट सफर नहीं करता।"*
Jitendra Kumar: *मोदी पर फिल्म बनी तो हीरो कहां से लाएगा हॉलीवुड? डोनाल्ड ट्रंप का दिलचस्प बयान*
* ट्रंप की पीएम मोदी पर की गई टिप्पणी सिर्फ एक तारीफ नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करती है।
*2014 से 2026 के बीच दुनिया ने देखा:*
• अमेरिका में 4 राष्ट्रपति
• जापान में 4 प्रधानमंत्री
• ब्रिटेन में 6 प्रधानमंत्री
• जर्मनी में 3 चांसलर
• फ्रांस में 2 राष्ट्रपति
• पाकिस्तान में 6 प्रधानमंत्री
• कनाडा में 3 प्रधानमंत्री
• ऑस्ट्रेलिया में 4 प्रधानमंत्री
• इटली में 5 प्रधानमंत्री
* इन देशों की कुल आबादी: 106 करोड़+
* वहीं 140 करोड़ आबादी वाले भारत में सिर्फ एक प्रधानमंत्री — नरेंद्र मोदी।
यह केवल राजनीतिक निरंतरता नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के विश्वास और जनादेश की कहानी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को दुनिया के महान नेताओं में गिनते हुए कहा कि उन्होंने भारत में स्थिरता लाई, मजबूत नेतृत्व दिया और लंबे समय तक जनता का भरोसा बनाए रखा।
*जब दुनिया के कई देशों में नेतृत्व बदलता रहा, तब भारत ने एक दशक से अधिक समय तक स्थिर नेतृत्व का अनुभव किया।*
*ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर मोदी या शी पर फिल्म बनाई जाए, तो हॉलीवुड में उनकी भूमिका निभाने के लिए कोई सही एक्टर नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि मोदी का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग है और दुनिया भर में उनका काफी सम्मान किया जाता है. ट्रंप ने बताया कि वह मोदी को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और उन्हें बेहद सख्त व मजबूत नेता मानते हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि मोदी के व्यक्तित्व के कई ऐसे पहलू हैं, जिन्हें उन्होंने करीब से जानकर समझा है.*
Jeetu dehati: बिलाल मोहम्मद चीन में रह रहा उइगर मुस्लिम था। चीन वहाँ उइगर मुस्लिमों की तशरीफ़ पर फट्टे बजा रहा था। तो कौओम पर अत्याचार होते देख बिलाल वहाँ से थाईलैंड भाग निकला।
थाईलैंड वालों ने बिलाल पर दया दिखाई। शरण दी। रोटी-कपड़ा मकान दिया। बिलाल चुपचाप मौज में दिन काटने लगा।
पर भीतर कहीं मज़हब वाला खुराफ़ाती सुलेमानी कीड़ा कुलबुला रहा है। मुफ़्ती और मौलवी के संपर्क में आ कर ज़िहाद जन्नत और हूर की लालसा जागने लगी।
17 अगस्त 2015 को बैंकॉक के एरावन मंदिर में, जहाँ हिंदू तीर्थयात्री और पर्यटक आते थे, बिलाल ने एक बैग रखा। एक धमाका हुआ ...और मंदि₹ उड़ गया। आसपास बीस निर्दोष हिंदुओं की लाशें बिखर गईं। डेढ़ सौ से अधिक लोग खून से लथपथ हो गए।
आज ग्यारह साल बाद, थाई अदालत ने फाँसी का हुक्म सुनाया है। बिलाल गिड़गिड़ा कर ₹हम की भीख माँग रहा है। फैसला आते ही बेहोश हो कर गिर पड़ा है।
मनुष्य जब मज़हब के पीछे पागल हो जाता है, तो नफ₹त में अपने बचाव का ठिकाना भी जला देता है। बिलाल ने पनाह देने वाले हाथों को ही काट डाला।
कभी कभी तो लगता है कि ये ससुर चीनवा कितना सही देश है ना। भविष्य पढ़ लिया है जुलमी ने।
Jeetu dehati: 🎯 _महाराष्ट्र के जलना जिले के पार्टूर में Kids World English School के वार्षिक दिवस समारोह में स्कूली बच्चों ने गाना_
_*‘गुस्ताख-ए- नबी की एक ही सजा,*_
_*सर तन से जुदा’, सर तन सन जुदा।*_
_*पर डांस किया।*_
🎯 _वीडियो में बच्चे डमी तलवारें लेकर परफॉर्म करते दिख रहे हैं और ,_
_*"बैकड्रॉप पर पाकिस्तानी कातिल मुमताज कादरी की तस्वीर लगी हुई बताई जा रही है। "*_
_स्कूल CBSE से संबद्ध बताया जाता है।_
_*स्कूल के मालिक और डायरेक्टर तारिक सिद्दीकी, कांग्रेस से जुड़ा है।*_
_बचपन से ही मानसिक रूप से तैयारी करा दी जाती है।_
_*डेमोग्राफी बदलने भर की देर है, फिर क्या होगा, आसानी से समझा जा सकता है।*_
_मुख्य सवाल यही है कि,_
_*आप काफिरों की क्या तैयारी है ?*_
Tej: *डोनाल्ड ट्रंप के मोदी के लिए कहे गए शब्दों ने कांग्रेस का नरेटिव ध्वस्त कर दिया -*
राहुल गांधी और उसकी ब्रिगेड ने बहुत दिनों से एक fake Narrative चलाया हुआ था - मोदी ट्रंप से डरता है, मोदी ट्रंप के आगे Compromise हो गया है और मोदी ने डर कर रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया - ऑपरेशन -सिंदूर युद्ध रुकने के बाद राहुल गांधी ने तुर्रा छेड़ा था “नरेंदर सरेंडर” और हर कोई ऐरा गैरा नत्थू गैरा यही राग अलाप रहा था -
नरेंद्र मोदी 5 देशों की यात्रा से 40 बिलियन डॉलर का व्यापार लेकर आए लेकिन राहुल गांधी को केवल मेलोडी दिखाई दी - उसने कहा कि देश में पेट्रोल और गैस की समस्या हैं और मोदी इटली में मेलोडी खा रहे हैं -
कल ट्रंप से साथ मोदी की मुलाकात के बाद कांग्रेस ब्रिगेड ने नरेटिव चलाया कि ट्रंप ने मोदी को नज़रअंदाज किया और फिर शोर मचाया कि मोदी ने भारतीय नाविकों का मुद्दा G7 में क्यों नहीं उठाया - दिमाग से पैदल हो गए हैं राहुल के चमचे - मोदी ने नाविकों का मुद्दा ट्रम्प्के सामने दृढ़ता से उठाया क्योंकि अमेरिकी सेना की कार्रवाई में ही भारतीय नाविक मारे गए थे - G7 प्लेटफार्म नहीं था उस मुद्दे को उठाने के लिए -
जिस मोदी ने ट्रंप के चार फ़ोन नहीं उठाए उसके लिए राहुल और उसकी ब्रिगेड कहती है मोदी compromise हो गए, मोदी ट्रंप से डरते हैं - क्या मज़ाक है -
लेकिन कल डोनाल्ड ट्रंप के मोदी और भारत के लिए गए शब्दों ने कांग्रेस के नरेटिव को ध्वस्त कर दिया - ट्रंप का एक एक शब्द राहुल गांधी के मुंह पर पड़ने वाला थप्पड़ था - ट्रंप ने कहा- "Narendra Modi is a very tough negotiator, a total killer at the negotiating table. He's calm, he's cool, and he thinks a lot
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