आज के 100 मुख्य समाचार पत्र ✉ *विशेष रूप से सूचित किया जाता है कि दिनांक 22/07/2025 को रात्रि 11 बजे से दिनांक 23/07/2025 शाम तक चमेरा- ।। डैम पर फ्लशिंग की जाएगी जिसके तहत डैम से पानी छोड़ा जाना है जिससे रावी नदी के जल स्तर में अचानक वृद्धि होगी, अतः नदी के किनारे न तो स्वयं जाएं, न ही नदी के किनारे सामान रखें और न ही मवेशियों को जाने दें।* *एनएचपीसी लिमिटेड चमेरा- ।। पावर स्टेशन द्वारा जनहित में जारी*

Jul 22, 2025 - 21:12
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आज के 100 मुख्य समाचार पत्र ✉ *विशेष रूप से सूचित किया जाता है कि दिनांक 22/07/2025 को रात्रि 11 बजे से दिनांक 23/07/2025 शाम तक चमेरा- ।। डैम पर फ्लशिंग की जाएगी जिसके तहत डैम से पानी छोड़ा जाना है जिससे रावी नदी के जल स्तर में अचानक वृद्धि होगी, अतः नदी के किनारे न तो स्वयं जाएं, न ही  नदी के किनारे सामान रखें और न ही मवेशियों को जाने दें।* *एनएचपीसी लिमिटेड चमेरा- ।। पावर स्टेशन द्वारा जनहित में जारी*

: *चंबा तीसा मुख्य मार्ग मधुवाड़़ के समीप शुक्रवार रात कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिसमें पति-पत्नी घायल हो गए। उपचार के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।*

*घायलों की पहचान इस प्रकार है।*

*1, हेमराज पुत्र हीरालाल गाँव चिल्ली डाकघर थल्ली, तहसील चुराह,*

*2, ललिता, पत्नी हेमराज, गाँव चिल्ली डाकघर थल्ली, तहसील चुराह,*

: चंबा में हवा भरते समय जोरदार धमाके के साथ टायर फट गया। इसकी चपेट में आने से एक व्यक्ति की माैत हो गई है। यह दर्दनाक हादसा शहर के साथ लगते सुल्तानपुर के परेल में हुआ। हादसे के बाद घायल व्यक्ति को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा पहुंचाया गया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान राकेश कुमार(34) पुत्र प्रकाश चंद गांव छमैरी (चमीनू) डाकघर बरौर तहसील, व जिला चंबा, के रूप में हुई है। पुलिस देखरेख में पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

: *हिमाचल में अब जॉब ट्रेनी के रूप में होंगी भर्तियां* 

हिमाचल सरकार ने कांट्रेक्ट पॉलिसी की जगह अब जॉब ट्रेनी स्कीम नोटिफाई कर दी है। कार्मिक विभाग की ओर से शनिवार को यह अधिसूचना जारी की गई। इसके अनुसार अब सरकारी विभागों में कर्मचारी दो साल जॉब ट्रेनिंग पर रहेंगे और इस दौरान इन्हें फिक्स्ड अमाउंट की सैलरी मिलेगी *। दो साल के बाद इन्हें रेगुलराइजेशन के लिए कंसीडर किया जाएगा।* हालांकि रेगुलर होने के लिए एक और टेस्ट पास करना होगा। जॉब ट्रेनी रखने के लिए इन नियमों में भर्ती एजेंसी का जिक्र नहीं है और इसे सरकार बाद में तय करेगी। दो साल सेवा के बाद रेगुलर होने के लिए लिए जाने वाले टेस्ट की एजेंसी भी बाद में तय होगी। इस भर्ती के बहुत से प्रावधान कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी की तरह ही हैं। अधिसूचना में राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि सरकारी विभागों में ग्रुप ए, बी और सी के लिए नई भर्तियां अब जॉब ट्रेनी में ही होंगी। जॉब ट्रेनी नियुक्ति से पहले राज्य सरकार की विभागों के साथ एक गारंटी या हलफनामा साइन करेगा और कभी भी रेगुलर सर्विस के लाभ के लिए दावा नहीं करेगा। इन्हें दिया जाने वाला फिक्स वेतन वित्त विभाग की ओर से तय किया जाएगा, जिसे भर्ती विज्ञापन में भी सार्वजनिक किया जाएगा। भविष्य में कमीशन भर्ती के अलावा बैच वाइज भर्तियां भी अब इसी पॉलिसी के तहत होंगी। इससे पहले राज्य सरकार ने कर्मचारी एक्ट लागू करने के बाद अनुबंध के प्रावधानों को भर्ती नियमों से हटा दिया था। इसकी जगह अब जॉब ट्रेनी स्कीम लाई गई है।

इन पदों पर लागू नहीं होगी नई योजना

लोक सेवा आयोग की तरफ से कंबाइंड कंपटीशन एग्जाम के

माध्यम से भरे जाने वाले पद इसके दायरे में नहीं आएंगे। इसके अलावा सिविल जज, मेडिकल कालेज के असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर, आयुर्वेद विभाग के प्रोफेसर, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट,

नायब तहसीलदार, फाइनांस एंड अकाउंट्स में सेक्शन ऑफिसर, असिस्टेंट स्टेट टैक्स एंड एक्साइज ऑफिसर और पुलिस में कांस्टेबल पर यह पॉलिसी लागू नहीं होगी। इन्हें पहले भी अनुबंध नीति में नहीं लिया जाता था।

: *इंडिया’ गठबंधन की ऑनलाइन बैठक, जानें संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति* 

पहलगाम हमला-परिसीमन जैसे कई मुद्दे संसद में उठाएगा विपक्ष

विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने शनिवार को संसद के आगामी मानसून सत्र के लिए प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में 24 राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य शामिल थे। यह गठबंधन की कई हफ्तों बाद पहली समन्वित बैठक थी, जिसका उद्देश्य सोमवार से शुरू होने वाले सत्र के लिए एकजुटता का संदेश देना था।

इस ऑनलाइन मीटिंग में कांग्रेस, डीएमके, राजद, सपा, एनसीपी-एसपी, शिवसेना (यूबीटी), झामुमो, माकपा, भाकपा, भाकपा-माले, फॉरवर्ड ब्लॉक, आईयूएमएल और केरल कांग्रेस समेत 24 पार्टियों ने हिस्सा लिया। बैठक में कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई जिनमें बिहार में चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन, पहलगाम में हालिया आतंकी हमला और विवादास्पद ऑपरेशन सिंदूर शामिल हैं। इसके अलावा, विपक्षी नेता ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के दावे और जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की मांग संग कई मुद्दे उठाएंगे। कांग्रेस ने संसद में जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य बनाने, महिलाओं पर अत्याचार, बेरोजगारी, किसानों की परेशानी, देश की सुरक्षा और अहमदाबाद एयर प्लेन क्रैश जैसे मुद्दे भी रखने की बात कही है।

: *हिमाचल में अब जॉब ट्रेनी के रूप में होंगी ग्रुप-ए से सी तक भर्तियां, सरकार ने जारी की नई स्कीम* 

दो साल बाद रेगुलर के लिए पात्रता, फिक्स्ड अमाउंट की मिलेगी सैलरी

रेगुलर होने के लिए पास करना होगा एक और टेस्ट

सरकार बाद में तय करेगी भर्ती एजेंसी

अनुबंध भर्ती की जगह नई स्कीम लाई हिमाचल सरकार, अधिसूचना जारी

हिमाचल सरकार ने कांट्रेक्ट पॉलिसी की जगह अब जॉब ट्रेनी स्कीम नोटिफाई कर दी है। कार्मिक विभाग की ओर से शनिवार को यह अधिसूचना जारी की गई। इसके अनुसार अब सरकारी विभागों में कर्मचारी दो साल जॉब ट्रेनिंग पर रहेंगे और इस दौरान इन्हें फिक्स्ड अमाउंट की सैलरी मिलेगी। दो साल के बाद इन्हें रेगुलराइजेशन के लिए कंसीडर किया जाएगा। हालांकि रेगुलर होने के लिए एक और टेस्ट पास करना होगा। जॉब ट्रेनी रखने के लिए इन नियमों में भर्ती एजेंसी का जिक्र नहीं है और इसे सरकार बाद में तय करेगी। दो साल सेवा के बाद रेगुलर होने के लिए लिए जाने वाले टेस्ट की एजेंसी भी बाद में तय होगी। इस भर्ती के बहुत से प्रावधान कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी की तरह ही हैं। अधिसूचना में राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि सरकारी विभागों में ग्रुप ए, बी और सी के लिए नई भर्तियां अब जॉब ट्रेनी में ही होंगी। जॉब ट्रेनी नियुक्ति से पहले राज्य सरकार की विभागों के साथ एक गारंटी या हलफनामा साइन करेगा और कभी भी रेगुलर सर्विस के लाभ के लिए दावा नहीं करेगा। इन्हें दिया जाने वाला फिक्स वेतन वित्त विभाग की ओर से तय किया जाएगा, जिसे भर्ती विज्ञापन में भी सार्वजनिक किया जाएगा। भविष्य में कमीशन भर्ती के अलावा बैच वाइज भर्तियां भी अब इसी पॉलिसी के तहत होंगी। इससे पहले राज्य सरकार ने कर्मचारी एक्ट लागू करने के बाद अनुबंध के प्रावधानों को भर्ती नियमों से हटा दिया था। इसकी जगह अब जॉब ट्रेनी स्कीम लाई गई है।

इन पदों पर लागू नहीं होगी नई योजना

लोक सेवा आयोग की तरफ से कंबाइंड कंपटीशन एग्जाम के

माध्यम से भरे जाने वाले पद इसके दायरे में नहीं आएंगे। इसके अलावा सिविल जज, मेडिकल कालेज के असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर, आयुर्वेद विभाग के प्रोफेसर, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट,

नायब तहसीलदार, फाइनांस एंड अकाउंट्स में सेक्शन ऑफिसर, असिस्टेंट स्टेट टैक्स एंड एक्साइज ऑफिसर और पुलिस में कांस्टेबल पर यह पॉलिसी लागू नहीं होगी। इन्हें पहले भी अनुबंध नीति में नहीं लिया जाता था।

: *भारत-PAK की लड़ाई में गिरे थे 5 फाइटर जेट्स…, डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दोहराया जंग रुकवाने का दावा* 

ट्रंप ने फिर दोहराया युद्ध रुकवाने का दावा; कहा, ट्रेड के जरिए सुलझाया विवाद

अमरीकी राष्ट्रपति के दावे

पर गरमाई सियासत

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से की संसद में स्पष्टीकरण की मांग

राहुल गांधी का सवाल, मोदी जी, बताइए क्या है पांच जहाजों का सच

भाजपा का पलटवार, कांग्रेस नेता की मानसिकता देशद्रोही

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उनके हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को रोका जा सका था।

ट्रंप ने कहा कि भारत की ओर से पहलगाम हमले के जवाब में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के बीच हालात बेहद गंभीर हो गए थे, लेकिन उनके दखल से टकराव टल गया। ट्रंप ने बयान दिया कि हमने कई युद्ध रोके और ये कोई मामूली युद्ध नहीं थे। भारत और पाकिस्तान के बीच हालात बहुत गंभीर हो चुके थे। विमान मार गिराए जा रहे थे। मुझे लगता है कि करीब पांच लड़ाकू विमान गिरा दिए गए थे। ये दोनों परमाणु हथियारों से लैस देश हैं और एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह एक ‘नई किस्म की जंग’ जैसी स्थिति बन गई थी, जैसा कि अमरीका ने ईरान के साथ किया था। ट्रंप ने दावा किया कि ‘हमने ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया’। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि ये विमान किस देश के गिरे थे। भारत और पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे और हमने इसे ट्रेड के जरिए सुलझाया। हमने कहा कि अगर तुम लोग हथियारों (और शायद परमाणु हथियारों) का इस्तेमाल करते रहोगे, तो हम कोई व्यापार समझौता नहीं करेंगे। ट्रंप ने यह बात व्हाइट हाउस में रिपब्लिकन सांसदों के साथ डिनर के दौरान कही। बता दें कि ट्रंप अब तक 24 बार भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने की बात कह चुके हैं। पहली बार ऐसा दावा उन्होंने 10 मई को सोशल मीडिया पर किया था। उधर, ट्रंप के दावे के बाद अब भारत में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस बारे में पीएम मोदी से संसद के मानसून सत्र में स्पष्टीकरण की मांग की है। ट्रंप के दावे के बाद कांग्रेस ने सवाल किया गया कि व्यापार के लिए राष्ट्र के सम्मान के साथ क्यों समझौता किया गया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया कि संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक दो दिन पहले, ‘ट्रंप मिसाइल’ 24वीं बार दागी गई और हर बार की तरह इस बार भी वही दो बातें दोहराई गईं। उन्होंने ट्रंप के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अमरीका ने भारत और पाकिस्तान, दो परमाणु संपन्न देशों के बीच युद्ध रोक दिया। अगर युद्ध जारी रहता, तो कोई व्यापार समझौता नहीं होता यानी भारत और पाकिस्तान को अमरीका के साथ व्यापारिक समझौते के लिए तत्काल संघर्षविराम को मानना पड़ा।

कांग्रेस नेता ने मांग की मोदी को संसद में स्वयं खड़े होकर अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पिछले 70 दिनों से किए जा रहे दावों पर स्पष्ट एवं ठोस स्पष्टीकरण देना चाहिए। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा है। राहुल ने पूछा कि मोदी जी, पांच जहाजों का सच क्या है? देश को जानने का हक है! उधर भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री मोदी से लड़ाकू विमान को नुकसान पहुंचने के सवाल पर हमला बोला है। मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया कि राहुल गांधी की मानसिकता एक देशद्रोही की है। ट्रंप ने अपने बयान में न तो भारत का नाम लिया, न ही यह कहा कि वे पांच जहाज भारत के थे। फिर कांग्रेस के युवराज ने उन्हें भारत के ही क्यों मान लिया? पाकिस्तान के क्यों नहीं माने? क्या उन्हें अपने देश से ज़्यादा हमदर्दी पाकिस्तान से है? सच्चाई यह है कि ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान अब तक उबरा नहीं है, लेकिन दर्द राहुल गांधी को हो रहा है! जब भी देश की सेना दुश्मन को सबक सिखाती है, तब कांग्रेस को मिर्ची लगती है। भारत विरोध अब कांग्रेस की आदत नहीं, पहचान बन चुका है। राहुल गांधी बताएं — क्या वह भारतीय हैं या पाकिस्तान के प्रवक्ता?

ब्रिक्स देशों को चेतावनी, अमरीका के साथ खेल मत खेलो

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को फिर से चेतावनी दी है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वे अमरीका के खिलाफ काम करेंगे, तो उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने खास तौर पर ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों से होने वाले आयात पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की बात दोहराई। ट्रंप ने ब्रिक्स समूह में शामिल देशों का नाम लिए बगैर कहा कि जब मैंने पहली बार ब्रिक्स ग्रुप के बारे में सुना तो इस पर सख्त कार्रवाई की। अगर यह समूह कभी भी मजबूत तरीके से सामने आता है, तो यह बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। ट्रंप ने कहा कि हम कभी भी किसी को हमारे साथ खेलने की इजाजत नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वह विश्व की आरक्षित मुद्रा के रूप में अमरीकी डॉलर की भूमिका की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

TRNDKB: *Divya Himachal Relief Fund : आपदा प्रभावितों का दर्द बांट रहे प्रदेश के दानवीर, इस पते पर भेजें मदद* 

मंडी बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए आगे आ रहे दानवीर

मंडी जिला में बाढ़ प्रभावितों के जख्म को भरने के लिए प्रदेश के दानी सज्जन आगे आ रहे है। दानी अपनी नेक कमाई से कुछ ना कुछ अंश दान कर रहे हैं। इससे बाढ़ प्रभावितों को फिर से जीवन की मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे और करोड़ों रुपए की संपत्ति बाढ़ की भेंट चढ़ गई।

‘दिव्य हिमाचल’ ने बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए छोटी सी पहल की है। उसके बाद दानी भी बढ़चढ़ कर मदद के हाथ बढ़ा रहे हैं। इससे मंडी बाढ़ प्रभावितों को भी आस बंधनी शुरू हो गई है। बाढ़ प्रभावितों के दुख दर्द और सरकार की मजबूरियों को समझते हुए ‘दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप’ ने भी मदद के हाथ बढ़ाते हुए ‘दिव्य हिमाचल सहायता कोष’ से दो लाख रुपए की प्रथम किस्त आपदा पीडि़तों को जारी करने की घोषणा की है। मीडिया गु्रप ने देश-परदेश के आमजन से आग्रह किया है कि वे भी इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग देें और आपदा प्रभावितों की मदद के लिए आगे आएं। दानी सज्जन ‘दिव्य हिमाचल सहायता कोष’ में अपने सामथ्र्य अनुसार दान दे सकते हैं।

इस पते पर भेजें मदद

प्रभावितों की मदद के लिए कैश, चेक या डिमांड ड्राफ्ट ‘दिव्य हिमाचल सहायता कोष’ के नाम पर भेजें

दिव्य हिमाचल सहायता कोष, दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप, पुराना मटौर, कांगड़ा,

हि. प्र.-176001 या क्यूआर कोड स्कैन करें

हेल्पलाइन

सभी दानियों के नाम ‘दिव्य हिमाचल’ में प्रकाशित किए जाएंगे। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें- 70181-97293, 94184-07889, , 78078-44144

नोट: दान की गई राशि को आयकर की धारा 80 जी के तहत छूट प्राप्त है।

: *अब हिमाचल में सस्ता होगा सेब स्टोरेज, शिमला के पराला में तैयार हो गया सीए स्टोर* 

मंडी में 67 करोड़ से बना 5600 मीट्रिक टन क्षमता का सीए स्टोर, निजी एजेंसी करेगी संचालन

टेंडर फाइनल, इसी सीजन से शिमला के बागबानों को मिलेगी सुविधा

सालाना चार करोड़ रुपए कमाएगी एपीएमसी शिमला

हिमाचल में सरकारी क्षेत्र का सबसे बड़ा कंट्रोल्ड एटमॉस्फेयर यानी सीए स्टोर शिमला के पराला फल मंडी में तैयार हो गया है। 67 करोड़ की लागत से इसे एपीएमसी शिमला, मार्केटिंग बोर्ड और भारत सरकार के फंड से बनाया गया है। यह 5600 मीट्रिक टन क्षमता का है, जो पूरे शिमला जिला को सेवाएं देगा। इस सीए स्टोर को ओएमटी यानी ऑपरेट, मेंटेन और ट्रांसफर आधार पर निजी एजेंसी को दिया जा रहा है। टेंडर फाइनल हो गए हैं और एजेंसी को इस ऑफर कर दिया है। टेंडर के जरिए एपीएमसी शिमला को हर साल चार करोड़ रुपए स्टोर से आएंगे।

एजेंसी को 7.50 करोड़ की गारंटी जमा करवाने को कहा गया है। इस सीए स्टोर के दो चैंबर खड़ा पत्थर में भी हैं। वहां से पराला के लिए एसी वैन की सुविधा उपलब्ध है। इस का स्टोर को बनाने के लिए नाबार्ड से कंसल्टेंसी ली गई थी। मार्केटिंग बोर्ड ने इसके उद्घाटन के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से समय मांगा है। जल्दी ही इसका शुभारंभ होगा और वर्तमान सेब सीजन से ही शिमला जिला के बागबानों को इस सीए स्टोर का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

स्टोर बन जाने से नहीं गिरेंगे फसल के दाम

5600 मीट्रिक टन क्षमता के सीए स्टोर का फायदा यह है कि अब ज्यादा फसल अचानक मंडी में आ जाने की वजह से रेट नहीं गिरेंगे। अच्छा रेट लेने के लिए बागबान इस स्टोर में अपनी फसल को रख सकते हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल बाजार के संतुलन को बनाने के लिए भी होगा। शिमला जिला में निजी क्षेत्र में इससे बड़ी क्षमता का सीए स्टोर पहले से मौजूद है, लेकिन सरकारी सेक्टर में इतना बड़ा स्टोर पहली बार शुरू हो रहा है।

सीए स्टोर में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

इस सीए स्टोर में कई तरह की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसमें प्लास्टिक क्रेट और वुडन बिन का इस्तेमाल हुआ है। यानी सेब को गत्ते की पेटियों में डालने के बजाय लकड़ी के बिन में रखा जाएगा। ये बिन इंपोर्टेड लकड़ी से बने हैं। इस सीए स्टोर के साथ छह एसी गाडिय़ां परमानेंट रहेगी, ताकि फसल को इधर से उधर ले जाया जा सके। बाजार भेजने से पहले वुडन बिन से निकलकर पेटियों में पैक करना होगा।

: *HP WEATHER : आज मौसम साफ, 21 से इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट* 

प्रदेश के नौ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में रविवार को मौसम खुला रहेगा। इस दिन दो-तीन जिलों को छोडक़र शेष में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। 21 व 22 जुलाई को राज्य के अधिकांश स्थानों पर बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

रविवार को ऊना, हमीरपुर व मंडी जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। 21 जुलाई के लिए मौसम विभाग ने ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन व सिरमौर जिलों में ऑरेंज अलर्ट है। 22 जुलाई की बात करें तो कांगड़ा, कुल्लू, मंडी व सिरमौर जिलों में ऑरेंज अलर्ट रहेगा। 23 जुलाई को कई जिलों में फिर से मौसम साफ हो जाएगा। पिछले 24 घंटों की बात करें, तो हमीरपुर में 13.5 एमएम, करसोग में 8.1, कसौली में 5, जुब्बड़ हट्टी में 4.8, कोठी में चार ,स्लापड़ में 3.9 व शिमला में 3.6 एमएम बारिश हुई है। हालांकि मंडी के कई स्थानों पर मौसम विभाग ने 20 जुलाई को भी तेज बारिश का अनुमान लगाया है।

: *कोटखाई में खाई में गिरी कार, पिता-बेटी समेत तीन की मौत* 

कोटखाई क्षेत्र के रावला क्यार में पेश आया दर्दनाक हादसा

पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शुरू की आगामी कार्रवाई

शिमला में कोटखाई क्षेत्र के रावला क्यार में एक तेज रफ्तार कार गहरी खाई में गिर गई। दर्दनाक सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। हादसा शनिवार देर शाम कोटखाई में रावला क्यार लिंक रोड पर बधैडी के पास हुआ। मौके पहुंचे स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। जानकारी के अनुसार कार में तीन लोग सवार थे। बघेड़ी के पास चालक ने अचानक गाड़ी से नियंत्रण खो दिया और गाड़ी गहरी खाई में जा गिरी। जिसमें सवार तीनों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतकों की पहचान प्रमोद कुमार पुत्र हीरु राम निवासी गांव बड़ोन, डाकघर रावला क्यार, तहसील कोटखाई, कृष्ण पुत्र बालकू निवासी गांव कोटला, डाकघर हिमरी, तहसील कोटखाई और शालू पुत्री प्रमोद निवासी डाकघर रावला क्यार, तहसील कोटखाई की सिविल अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मृत्यु हुई। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस की टीम हादसे की जांच में जुटी गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। दुर्घटना के कारणों जांच शुरू कर दी है।

: *श्रीखंड महादेव यात्रा में 16 साल में 46 श्रद्धालुओं की मौ*त, ये रहे मृ*त्यु के कारण* 

ऑक्सीजन की कमी से हर साल हादसे, फिसलन से जान गंवा रहे शिव भक्त

भारत की सबसे कठिनतम धार्मिक यात्राओं में शुमार श्रीखंड महादेव यात्रा के दौरान हर वर्ष श्रद्धालु अपनी जान गवां रहे हैं। हालांकि श्रद्धालुओं को शारीरिक फिटनेस के बावजूद ही श्रीखंड यात्रा पर भेजा जाता है, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं की मौत हर वर्ष हो रही है। धािर्मक यात्रा के दौरान हो रही मौतों से लोग चिंतित हैं। धार्मिक यात्रा में कैसे मौतें रुकेंगी, अब तक कोई उचित व्यवस्था शासन-प्रशासन द्वारा नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा आक्सीजन की कमी से इस यात्रा के दौरान पर मौतें हो गईं। ऐसे में तबीयत खराब होने पर यहां पर श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन कैसे दी जाएगी, यह व्यवस्था नहीं हो पाई है। वहीं, श्रीखंड महादेव के कठिन रास्तों को भी शासन-प्रशासन सुरिक्षत नहीं कर पाए हैं। श्रीखंड महादेव यात्रा में अब तक करीब 16 सालों में 46 लोगों ने अपनी जान गवां दी है। 2010 से लेकर 2024 तक इस यात्रा में लगभग 45 यात्रियों की मौत हो गई थी।

वहीं, 2025 श्रीखंड महादेव की यात्रा के दौरान तीन दिन पहले एक श्रद्धालु की मौत हो गई। आक्सीजन की कमी होने के कारण श्रद्धालु की मौत बताई जा रही है। श्रीखंड महादेव की 32 किलोमीटर की जोखिम भरी पैदल यात्रा के दौरान हर साल कोई न कोई हादसे होते रहते हैं। श्रीखंड महादेव यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा मौतें पार्वती बाग से ऊपर ही हुई है। यहां से आगे ही आक्सीजन की कमी होती हैं। वहीं, रास्ता भी ज्यादा खतरनाक है। सबसे ज्यादा मौतें बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं की हुई हैं। कालीघाट के आसपास घटनाएं घटती हैं। लोगों ने सरकार से मांग की है कि आक्सीजन की कमी होने पर यहां पर श्रद्धालु को आक्सीजन देने के लिए कोई स्वास्थ्य व्यवस्था की जाए। एसडीएम निरमंड मनमोहन सिंह ने कहा कि इस बार 2025 की श्रीखंड महादेव यात्रा के लिए 10 जुलाई से लेकर 18 जुलाई तक 5639 गए। इनमें 234 महिला और युवतियों ने भी श्रीखंड महादेव के दर्शन किए हैं। इनमें से इस बार एक श्रद्धालु की मौत हो गई है।

जांच के बाद ही इजाजत

श्रीखंड महादेव की यात्रा सबसे कठिन यात्राओं में से एक है। यही कारण है कि शारीरिक और मानसिक रूप से फिट लोगों को ही इस यात्रा पर भेजा जाता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति शुगर, बीपी, सांस लेने जैसी किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है, तो वह इस यात्रा पर बिलकुल भी नहीं भेजा जाता है। मेडिकल कैंप में पहले सभी श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की जांच होती है और फिट पाए जाने के बाद ही उन्हें आगे जाने की इजाजत दी जाती हैं, लेकिन आगे आक्सीजन की कमी और कठिन रास्ते मौत का कारण बन रहे हैं।

: *खाने के लिए लाइनों में खड़े थे फिलिस्तीनी; इजरायली सेना ने बरसाईं गोलियां, 50 की मौत* 

गाजा में इजरायली सेना ने खाद्य वितरण केंद्रों को बनाया निशाना

गाजा पट्टी के दक्षिणी हिस्से में शनिवार को 50 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार ये सभी खाने के पैकेट लेने जा रहे थे। वहीं अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, इजरायली सेना ने भीड़ पर गोलियां चलाई, जिसमें कई लोग घायल भी हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, ये सभी फिलिस्तीनी गाजा मानवतावादी फाउंडेशन (जीएचएफ) नाम की संस्था की तरफ से चलाए जा रहे खाद्य वितरण केंद्रों की ओर जा रहे थे। यह संस्था अमरीका की मदद से मई महीने से गाजा में खाना बांट रही है। जीएचएफ ने मई महीने में गाजा में काम शुरू किया था। इसका मकसद भूखे लोगों को खाना पहुंचाना है। जीएचएफ दावा करता है कि उसने लाखों खाने के पैकेट बांटे हैं, लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सैकड़ों लोग इन केंद्रों पर गोलीबारी में मारे जा चुके हैं।

दो जगहों पर गोलीबारी, 70 से ज्यादा लोग जख्मी

जानकारी के अनुसार, गोलीबारी की घटना मुख्य रूप से दो जगहों पर हुई, जिसमें पहली घटना तेइना इलाका, खान यूनिस शहर के पास हुई। इस दौरान लगभग तीन किलोमीटर दूर जीएचएफ के एक केंद्र की ओर सैकड़ों लोग पैदल चल रहे थे। गवाहों के अनुसार, पहले इजरायली सेना ने चेतावनी में हवाई फायरिंग की, लेकिन बाद में सीधे लोगों पर गोलियां बरसा दीं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि यह एक नरसंहार था, सैनिकों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। एक अन्य गवाह ने बताया कि टैंकों और ड्रोन से भी गोलियां चलाई गईं। इसके बाद घायल लोगों को उठाकर नासर अस्पताल, खान यूनिस लाया गया, जहां 25 शव और 70 घायलों की पुष्टि हुई है। दूसरी घटना शकूश इलाका, रफा शहर के पास हुई। यहां भी जीएचएफ केंद्र के पास भीड़ पर गोलियां चलीं, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक महिला भी थी। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

: *हिमाचल के दो ड्रोन पायलटों ने रचा इतिहास, आपदाग्रस्त थुनाग में लोगों को पहुंचाईं मेडिसन* 

मंडी के थुनाग में स्पेशल चेंज करके कठिन समय में बांटी दवाएं, 750 ग्राम तक की मेडिसिन लोगों तक पहुंचाई

थुनाग में एसडीआरएफ ने नया कारनामा कर दिखाया है। एसडीआरएफ के जिस सर्विलांस ड्रोन का इस्तेमाल संवेदनशील मामलों में नजर रखने के लिए किया जाता था, आज उसी ड्रोन से थुनाग में दवाइयां बांट रहा है। मंडी में जब आपदा आई, तो राहत एवं बचाव कार्यों के लिए टीमें सराज पहुंची। टीमों के लिए सबसे चुनौतीपुर्ण कार्य प्रभावितों के लिए राशन और दवाइयां पहुंचाना था।

इस चुनौती का सामना करते हुए एसडीआरएफ ने सर्विलांस ड्रोन में ही एक्सपेरिमेंट कर डाला। एसडीआरएफ के दो ड्रोन पायलट ने ऐसा कारनामा किया है, जिसकी कल्पना एसडीआरएफ के आला अधिकारियों ने भी नहीं की थी। ड्रोन से निगरानी रखने में मास्टर नवीन और राजेश ने संर्विलांस ड्रोन में कुछ ऐसे बदलाव किए कि हिमाचल में इतिहास ही रच दिया गया। एसडीआरएफ ने सर्विलांस ड्रोन के माध्यम से सर्विलांस के साथ-साथ लगभग 750 ग्राम तक के वजन की दवाइयां एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाई जाने लगी। थुनाग के विभिन्न आपदा प्रभावित क्षेत्रों में इसी ड्रोन के सहारे से दवाइयां प्रभावितों तक पंहुचाई गई। इस अभियान में एसडीआरएफ के आला अधिकारी एसपी एसडीआरएफ अर्जित सेन और डीएसपी चमन के निर्देशों पर कार्य किया गया।

11 एसडीआरएफ जवान मोर्चे पर

थुनाग में वर्तमान समय में 11 सदस्यों की टीम मोर्चा संभाले हुए है। एसडीआरएफ थुनाग और आसपास के इलाकों में राशन व दवाइयों इत्याादि आवश्यक सामान पहुंचाने में मददगार साबित हो रहा है। टीम पहली जुलाई से लेकर अब तक थुनाग में ही राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है।

जवानों की मेहनत रंग लाई

एसडीआरएफ मंडी के डीएसपी चमन ने बताया कि हिमाचल में यह पहला एक्सपेरिमेंट है, जो आपदा के दौरान किया गया और सफल भी हुआ। ड्रोन पायलेट नवीन और राजेश के माध्यम से ड्रोन में कुछ बदलाव किए गए। जिस कारण अब सर्विलांस ड्रोन में 750 ग्राम तक के वजन का सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।

: *आपदा से हुए नुकसान का आकलन करने मंडी पहुंची केंद्रीय टीम, धर्मपुर क्षेत्र का लिया जायजा* 

बरसात के मौसम में भारी बारिश व भूस्खलन इत्यादि के कारण मंडी जिला में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए आज केंद्र की एक टीम मंडी पहुंची। सात सदस्यीय इस केंद्रीय दल ने शुक्रवार को धर्मपुर क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया। केंद्रीय दल के सदस्यों ने स्याठी गांव, धर्मपुर कॉलेज के पास क्षतिग्रस्त सड़क, काण्डापतन में क्षतिग्रस्त पेयजल योजना, क्षतिग्रस्त 33 केवी पावर प्लांट सहित अन्य प्रभावित स्थलों का दौरा किया। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने केंद्रीय दल को धर्मपुर क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में अब तक किए गए राहत एवं पुनर्वास कार्यों के बारे में भी अवगत करवाया। स्थानीय विधायक चंद्रशेखर ने ध्वाली किसान भवन में केंद्रीय दल से क्षेत्र में हुए नुकसान पर चर्चा की।

इस केंद्रीय दल में गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (सीएस एवं पब्लिक, न्यायिक) जी. पार्थसारथी, वित्त मंत्रालय के अधीन व्यय विभाग के उप सचिव (एफसीडी) कंदर्प वी. पटेल, जल शक्ति मंत्रालय के तहत सीडब्लूसी शिमला के निदेशक वसीम अशरफ, ऊर्जा मंत्रालय के तहत सीईए के उप निदेशक करन सरीन, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय शिमला के मुख्य अभियंता ए.के. कुशवाहा, ग्रामीण विकास मंत्रालय से अवर सचिव दीप शेखर सिंघल तथा कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय के तहत गेहूं विकास निदेशालय में संयुक्त निदेशक डॉ. विक्रांत सिंह शामिल हैं।

यह केंद्रीय दल 20 जुलाई को थुनाग, जंजैहली व करसोग इत्यादि आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर वहां हुए नुकसान का आकलन करेगा। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ. मदन कुमार, एसडीएम धर्मपुर जोगिंद्र पटियाल, एसडीएम सरकाघाट स्वाति डोगरा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे।

: *200 मीटर गहरी खाई में गिरी गाड़ी, एक की मौत* 

 किन्नौर में सांगला रोड पर एक दर्दनाक हादसा पेश आया है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार सांगला रोड पर पलिंगचे नामक स्थान पर एक वाहन एचपी 06-0732 सडक़ से करीब 200 मीटर गहरी खाई में जा गिरा।

घटना के वक्त वाहन में दो लोग सवार थे। इस दुर्घटना में चरन सिंह पुत्र इंद्र लाल गांव व डाकघर सांगला जिला किन्नौर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ज्ञान कुमारी वाइफ ऑफ जोगिंद्र सिंह गांव रंगारी पोस्ट आफिस सराहन जिला शिमला उम्र 43 घायल हुई हंै। ज्ञान कुमारी का स्वास्थ्य उपचार सीएचसी सांगला में चल रहा है। किन्नौर पुलिस द्वारा मृतक चरन सिंह को पोस्टमार्टम के लिए सीएचसी सांगला ले जाया गया है।

TRNDKB: *Kangra News: पिता ने दिहाड़ी लगाकर बेटे के लिए खरीदी थी बाइक, उसी से दुर्घटनाग्रस्त होकर दोनों की मौत* 

Kangra News जिला कांगड़ा के खैरियां में एक दर्दनाक हादसे में पिता-पुत्र की मौत हो गई। 70 वर्षीय प्यारचंद और उनके 22 वर्षीय बेटे साहिल कुमार की बाइक दुर्घटना में जान चली गई। यह हादसा घर से कुछ ही दूरी पर हुआ जब उनकी बाइक के आगे एक बेसहारा पशु आ गया।

खैरियां में बाइक दुर्घटना में पिता पुत्र की मौत हो गई। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

जिला कांगड़ा के खैरियां में पेश आया हादसा

घर से कुछ कर दूरी पर बाइक के आगे पशु आने से हादसा

परिवार में अकेली रह गई मां, छोटे बेटे की पहली हो गई है मौत

संवाद सूत्र, बिलासपुर (कांगड़ा)। Kangra News, जिला कांगड़ा के विधानसभा क्षेत्र देहरा की ग्राम पंचायत खैरियां के सपड़ू गांव में शनिवार को बाइक दुर्घटना में पिता-पुत्र की मौत हो गई। हादसे में 70 वर्षीय प्यारचंद और उनके बेटे 22 वर्षीय साहिल कुमार निवासी सपडू की मौत हो गई। यह हादसा घर से कुछ ही दूरी पर बाइक के आगे एक बेसहारा पशु आने से हुआ।

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जानकारी के मुताबिक पिता-पुत्र बाइक पर सुबह लगभग नौ बजे घर से देहरा की तरफ़ जा रहे थे। घर से निकलते ही 200 मीटर आगे उनकी बाइक के आगे एक बेसहारा पशु आ गया, जिसे बचाते हुए बाइक असंतुलित होकर सड़क पर पुलिया से टकरा गई। दोनों बाइक सवार पिता व पुत्र बुरी तरह ज़ख़्मी होकर सड़क पर गिर पड़े।

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स्थानीय लाेगों द्वारा उन्हें नज़दीकी अस्पताल हरिपुर में ले जाया गया। वहां से उनकी गंभीर हालात को देखते हुए उन्हें वहां टांडा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस दौरान प्यारचंद ने रास्ते में दम तोड़ दिया और उनके बेटे साहिल कुमार ने टांडा में दम तोड़ा।

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छोटे बेटे की पहले हो गई थी मौत, दो बेटियां शादीशुदा

बाइक को प्यार चंद का बेटा साहिल चला रहा था। बाइक अभी बिलकुल नई थी। प्यार चंद की दो लड़कियां शादीशुदा हैं और एक बेटे की छोटी आयु में ही मृत्यु हो गई थी। प्यार चंद दिहाड़ी मजदूरी करते थे। प्यार चंद अपने काम को लेकर बेटे साहिल के साथ बाइक पर देहरा जा रहे थे। इस दुर्घटना में पिता पुत्र की मौत के बाद अब घर में अकेली उनकी पत्नी यशोधा रह गई है

TRNDKB: *चंबा: युवती के साथ दुष्कर्म कर बनाया वीडियो...फिर कर दिया वायरल, 2 आराेपी गिरफ्तार*

हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिला में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। *एक 18 वर्षीय युवती के साथ जबरन दुष्कर्म किया गया और इस घिनौनी वारदात का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।*

जानकारी के अनुसार मामला 6 जुलाई का है। युवती रोज की तरह काॅलेज से घर लौट रही थी। रास्ते में जब वह एक सुनसान स्थान पर पहुंची, तो वहां उसे 2 युवक दीपक (21) और चमन (27) मिले। इन युवकों ने युवती को अकेला पाकर पहले डराया-धमकाया और फिर दीपक ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया, जबकि चमन ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया। इस अमानवीय हरकत के बाद युवती डर और सदमे की स्थिति में अपने घर पहुंची, लेकिन शर्म और भय के चलते उसने किसी को कुछ नहीं बताया।

कुछ दिन बाद चमन ने इस वीडियो को किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल फोन पर शेयर कर दिया, जिससे यह वीडियो वायरल हो गया। जब यह वीडियो पीड़िता के परिजनों तक पहुंचा, तो उन्हें इस अमानवीय कृत्य की जानकारी मिली। इसके बाद पीड़िता की मां ने थाने में इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज करवाई। 

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और पीड़िता के बयान बीएनएस की धारा 183 के तहत ज्यूडिशयल मैजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज करवाए गए। इसके साथ ही पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया। 

*डीएसपी योग राज चंदेल ने बताया* कि पीड़िता की मां की शिकायत के आधार दोनों आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मुकद्दमा दर्ज करके आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।

TRNDKB: चंबा खो-खो संघ के अध्यक्ष पद के लिए अनिल भारद्वाज को चुना गया है। सर्वसम्मति से हुए इस चयन में सदस्यों ने उनके अनुभव और खेल के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी। सभी ने उनके नेतृत्व में संघ की प्रगति की आशा जताई है।

JITENDRAKUMAR: चंबा के मैहला में भूस्खलन से दर्दनाक हादसा। मायके आई बेटी और दामाद की मौत, करीब 5 महीने पहले हुई थी

मैहला की ग्राम पंचायत चडी के गांव सूताह में भारी बारिश के चलते पहाड़ी से भारी भरकम चट्टान वह अचानक आए पानी की चपेट में आकर अपने मायके के घर में रहने आए बेटी और दामाद की मौके पर मौत हो गई है। घटना सुबह तड़के 3 से 4:00 बजे की बताई जा रही है। इस घटना में मकान भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम चंबा भी मौके पर पहुंच गई है। 

जानकारी के मुताबिक

बेटी पल्लू अपने मायके 5 दिन पहले ही रहने आई थी। दामाद सनी पिछले कल ही अपने ससुराल अपनी पत्नी को वापस ले जाने के लिए आया था। 

 सुबह से हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी से भारी भरकम चट्टान पानी का भारी बहाव घर के ऊपर आगे के कारण अंदर घर में सोए बेटी और दामाद की मौके पर ही मौत हुई है। यह मकान संजू का बताया जा रहा है।

दामाद का घर चंबा के कियानी में बताया गया है जहां पर करीब 5 दिन पहले ही बेटी पल्लू अपने मायके रहने के लिए आई थी इन दोनों की शादी करीब 5 महीने पहले ही हुई थी।

     

ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान कर

JEETUDR: चंबा जिला के चडी पंचायत के सुतांह गांव में बीती रात एक बड़ा हादसा हुआ है। संजू नामक व्यक्ति के घर पर कहर बनकर बरपी कुदरत ।इस हादसे में संजू की बेटी और दामाद की मौके पर ही मौ*त हो गई है और परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूटा है 

ओम शांति ओम 😓🙏🏻

TRNDKB: आज दिनांक 21 . 07 .2025 को बस स्टैंड भंजराडू में एक बैग जिसमे एक छाता कुछ कागज ,आधार कार्ड बगैरा थे गलती से किसी सूमों या ब्लैरो में रखा गया । नीले रंग का बैग किसी को यदि मिला हो तो कृपया 94189 78300 या 7807365051 पर सम्पर्क कर के बैग लौटाने की महरबानी करें ।

: *हिमाचल में फिर मानसूनी कहर, चार की मौत, अब तक 1246 करोड़ का नुकसान, 132 की गई जान* 

चंबा में बादल फटा; कुल्लू-मंडी-किन्नौर में भूस्खलन, अब तक 1246 करोड़ का नुकसान, 132 लोगों की मौत, 223 घायल, 34 लापता

हिमाचल प्रदेश में सोमवार को ऑरेंज अलर्ट के बीच भारी बारिश ने फिर कहर मचाया और चार लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही बरसात से हुए नुकसान का आंकड़ा भी बढ़ गया। रविवार रात से लगातार जारी बारिश से कई क्षेत्रों में बड़ा नुकसान हुआ है। चंबा जिला में बादल फटने की घटना घटी, वहीं मैहला में एक मकान में सो रहे पति-पत्नी की दुखद मौत हो गई है। पांवटा साहिब की बाता नदी में झुग्गी क्षेत्र का रहने वाला 40 वर्षीय छत्रपाल बह गया है, जिसकी तलाश की जा रही है, वहीं सुंदरनगर की जडोली खड्ड में बह जाने से एक युवक की मौत हो गई है। प्रदेश में बरसाती सीजन में अब तक 132 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें सडक़ दुर्घटना में 58 लोगों की मौत हुई है। प्रदेश की 398 सडक़ें यातायात के लिए पूरी तरह से बाधित हो चुकी हैं, वहीं तीन नेशनल हाइवे भी बंद पड़े हुए हैं। जो रिपोर्ट अभी तक आपदा प्रबंधन विंग के पास पहुंची है, जिसके मुताबिक प्रदेश को 1246 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। उधर, डेहर पावर हाउस में सिल्ट की मात्रा 80 हजार पीसीएम हो जाने के कारण बिजली उत्पादन बंद कर दिया गया है। चंबा के तीसा में बादल फटने का समाचार है। इससे पांच घरों को नुकसान हुआ है, जबकि एक पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ है। वहीं किन्नौर के टापरी में फ्लैश फ्लड की वजह से नेशनल हाइवे नंबर-5 भू-स्खलन के कारण बाधित हो गया है। कुल्लू जिला में भी भू-स्खलन की सूचना है, कुल्लू के लागनी गांव में भू-स्खलन हुआ बताया जा रहा है। यह आनी तहसील के तहत आता है। गनीमत रही कि यहां पर कोई जानी नुकसान नहीं है। यहां कुछ बागीचे जरूर तबाह हो गए हैं। लाहुल-स्पीति की बात करें तो यहां पर कॉमिक गांव में भारी बारिश हुई। यहां ओलावृष्टि होने की भी सूचना है।

काजा के तहत आने वाले इस गांव में 90 फीसदी फसल तबाह हो गई है। इसके अलावा भी प्रदेश में कई स्थानों पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। सिरमौर जिला में भी बड़ा नुकसान हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग 707 पर उतरी के पास दोबारा पहाड़ टूटा है। इससे यहां पर भारी लैंड स्लाइड हुआ। 15 दिनों में चौथी बार इस तरह की घटना पेश आई है। इससे दोनों तरफ में आवाजाही पूरी तरह से प्रभावित हुई है। उधर, सतलुज नदी के उफान पर आने से उसके आसपास के क्षेत्रों में नुकसान है। सुन्नी उपमंडल में सतलुज का जलस्तर बढ़ जाने की वजह से काली माता मंदिर, आईटीआई परिसर तक में पानी घुस गया है। वहीं सुन्नी थली पुल को यह पानी छूने वाला है। पहले भी इस पुल को नुकसान हो चुका है, जिससे मंडी जिला के लिए आवाजाही ठप हो सकती है। यहां पर मस्जिद व रिहायशी मकान खाली करवा दिए गए हैं। शिमला करसोग मार्ग पर पलयाड़ के समीप जल भराव के कारण प्रभावित हो गया है और ऐसी ही स्थिति रही, तो मार्ग बंद हो सकता है। ब्यास नदी का जलस्तर बढऩे से पंडोह में भी पानी छोड़ा गया, जिससे मंडी के लोगों के सामने खतरा मंडरा रहा है। वहीं, नाथपा झाखड़ी पावर हाउस में भी उत्पादन बंद किया गया है। सुंदरनगर की जडोल खड्ड में बहा युवक : सुंदरनगर उपमंडल के अंतर्गत आने वाली जडोल खड्ड को पार करते हुए सोमवार को एक 20 वर्षीय युवक की पानी के तेज बहने से मौत हो गई। उसका शव रतोग पुल के पास बरामद हुआ है। युवक की पहचान रोहित पुत्र मंगत राम, निवासी गांव जंदरेहडू, डाकघर बायला, तहसील सुंदरनगर के रूप में हुई है। मृतक अपनी बुआ के घर आया था और वापस अपने घर जा रहा था कि खड्ड पार करते वक्त पानी की चपेट में आने से मृत्यु का ग्रास बन गया।

मुख्यमंत्री ने अलर्ट किए डीसी, फोन पर ली रिपोर्ट

शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को सभी उपायुक्तों से दूरभाष के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण उत्पन्न स्थिति की जानकारी हासिल की। उन्होंने मौजूदा मौसम की स्थिति के दृष्टिगत अधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने लोगों से बरसात के मौसम में नदी-नालों के निकट न जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है

: *अब सारी ही सीमाएं लांघ रही ईडी, मात्र कानूनी सलाह लेने पर वकीलों को सम्मन जारी करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त* 

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ईडी तो सभी सीमाएं लांघ रही हैं। कुछ वकीलों को आर्थिक अपराधों के मामले में आरोपियों को सलाह देने के चलते ईडी ने सम्मन जारी किया था। इसी मामले पर टिप्पणी करते हुए बैंच ने कहा कि ईडी ने सीमा पार कर दी है। यही नहीं बैंच का कहना है कि ईडी के लिए कुछ गाइडलाइंस तय होनी चाहिए। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बैंच ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए यह बात कही। अदालत ने इस बात पर चिंता जाहिर की कि इससे कानून के पेशे की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। जांच एजेंसी ने वरिष्ठ वकील अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को सम्मन जारी किया था।

चीफ जस्टिस ने ईडी के सम्मन पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक वकील और उसके क्लाइंट के बीच क्या संवाद हुआ। इस पर नोटिस कैसे जारी हो सकता है। ईडी सारी सीमाएं पार कर रही है। जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि जांच एजेंसी के लिए कुछ गाइडलाइंस तय होनी चाहिए। इस तरह के नोटिस जारी करने से सीनियर वकीलों की प्रैक्टिस पर भी असर पड़ सकता है।

राजनीतिक लड़ाई चुनाव तक ठीक इसमें एजेंसियों का इस्तेमाल गलत

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने सोमवार केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से दो टूक कहा कि राजनेताओं को राजनीतिक लड़ाई जनता के बीच लडऩे दीजिए और इस लड़ाई में ईडी जैसी एजेंसी का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनकी पत्नी से जुड़े मनी लांड्रिंग के एक मामले में की। दरअसल, ईडी ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध भूमि आबंटन से संबंधित कथित अनियमितताओं के संबंध में सिद्धारमैया की पत्नी बीएम पार्वती के खिलाफ जांच को रद्द करने का आदेश दिया गया था। इस मामले की सुनवाई सीजेआई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ कर रही थी।

इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए सीजेआई ने मौखिक तौर पर कहा कि नेताओं को मतदाताओं के बीच राजनीतिक लड़ाई लडऩे दी जाए, इसके लिए आपका (ईडी) क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है? इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी बीएम पार्वती को राहत देते हुए उनके खिलाफ दायर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका खारिज कर दी।

: *Jagdeep Dhankhar : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा* 

 *उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक दिया इस्तीफा* 

त्यागपत्र में लिखा, स्वास्थ्य कारणों से डाक्टर्स की सलाह पर पद छोड़ रहा

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार देर शाम अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया है। राष्ट्रपति को भेजे त्यागपत्र में उन्होंने लिखा कि स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति को उनके सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को भी सहयोग के लिए आभार जताया। 74 साल के जगदीप धनखड़ ने कुछ दिन पहले 2027 में राजनीति से रिटायर होने की बात कही थी, लेकिन सोमवार शाम को अचानक इस्तीफा देकर उन्होंने सबको चौंका दिया है।

श्री धनखड़ कृषि सहित कई मसलों पर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना कर चुके थे और सूत्रों का कहना है कि उनके इस्तीफे की वजह भी सरकार से नाराजगी हो सकती है। बता दें कि 2022 में जगदीप धनखड़ ने 14वें उप राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी।

पिछले महीने कार्यक्रम के बाद सीने में उठा था दर्द

25 जून को उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के बाद जगदीप धनखड़ की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें तुरंत नैनीताल राजभवन ले जाया गया, जहां डाक्टर ने उनका चेकअप किया। धनखड़ नैनीताल में कुमाऊं यूनिवर्सिटी के गोल्डन जुबली समारोह में बतौर चीफ गेस्ट पहुंचे थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद धनखड़ पूर्व सांसद महेंद्र सिंह पाल के कंधे पर हाथ रखकर बाहर निकले। फिर महेंद्र पाल से गले लगकर रोने लगे। करीब 10 कदम चलने पर धनखड़ के सीने में अचानक दर्द उठा। पूर्व सांसद महेंद्र पाल और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें संभाला था।

: *राशन डिपुओं में जल्द पहुंचेगी चीनी की सप्लाई, खाद्य आपूर्ति निगम ने जारी किया 35 हजार क्विंटल का ऑर्डर* 

खाद्य आपूर्ति निगम ने जारी किया 35 हजार क्विंटल चीनी का ऑर्डर

एक सप्ताह में पहुंच जाएगी प्रदेश के राशन डिपो में चीनी की सप्लाई

राशन डिपो में उपभोक्ताओं को वितरित की है 23 हजार कविंटल चीनी

प्रदेश के राशन डिपो में रिफाइंड तेल के बाद अब चीनी की सप्लाई भी जल्द पहुंच जाएगी। खाद्य आपूर्ति निगम ने 35 हजार कविंटल चीनी का ऑर्डर जारी किया है। एक सप्ताह तक चीनी की सप्लाई खाद्य आपूर्ति निगम के गोदामों में पहुंच गई है। खाद्य आपूर्ति निगम के प्रयासों से प्रदेश के लाखों उभोक्ताओं को राशन डिपो में सस्ते दामों पर राशन उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश के राशन डिपुओं में उपभोक्ताओं को 500 ग्राम प्रति सदस्य के हिसाब से चीनी दी जा रही है। वर्तमान में प्रदेश के राशन कार्ड धारकों को उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से बीपील परिवारों चीनी 13 रुपये प्रति किलो ग्राम और एपीएल परिवारों को 33 रुपये और आयकर उपभोक्ताओं को 46 रुपये प्रति किलो ग्राम के हिसाब से चीनी उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश भर में पांच हजार से अधिक राशन डिपो और साढ़े 19 लाख के करीब राशन कार्ड उपभोक्ता हैं, जिन्हें डिपुओं में सस्ता राशन मिलता है। प्रदेश के साढ़े 19 लाख राशन कार्ड उपभोक्ताओं को प्रति परिवार के हिसाब से 500 ग्राम अतिरिक्त चीनी दी जा रही है।

राशन डिपुओं में सरकार की ओर से उपभोक्ताओं को मलका, माश, चने की दाल और सरसों का तेल और रिफाइंड तेल एवं चीनी दी जाती है। इसके अलावा आटा और चावल केंद्र सरकार मुहैया करवाती है। उधर, खाद्य आपूर्ति निगम के एमडी राजेश्वर गोयल का कहना है कि प्रदेश के राशन कार्ड उपभोक्ताओं को उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से खुले बाजार की तुलना में सस्ती दरों पर चीनी उपलब्ध करवाई जा रही है। राजेश्वर गोयल ने बताया कि राशन डिपुओं में 23 हजार कविंटल चीनी उपभोक्ताओं को वितरित की गई है। उन्होंने बताया कि खाद्य आपूर्ति निगम ने 35 हजार कविंटल चीनी का ऑर्डर जारी किया है। एक सप्ताह तक चीनी की सप्लाई खाद्य आपूर्ति निगम के गोदामों में पहुंच गई है।

: *आपदा प्रभावितों का दर्द बांटने आगे आ रहे दानी, खूब भेज रहे नेक कमाई* 

मंडी बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए खूब भेज रहे नेक कमाई

मंडी जिला में बाढ़ प्रभावितों के जख्म को भरने के लिए प्रदेश के दानी सज्जन आगे आ रहे है। दानी अपनी नेक कमाई से कुछ ना कुछ अंश दान कर रहे हैं। इससे बाढ़ प्रभावितों को फिर से जीवन की मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे और करोड़ों रुपए की संपत्ति बाढ़ की भेंट चढ़ गई। ‘दिव्य हिमाचल’ ने बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए छोटी सी पहल की है। उसके बाद दानी भी बढ़चढ़ कर मदद के हाथ बढ़ा रहे हैं। इससे मंडी बाढ़ प्रभावितों को भी आस बंधनी शुरू हो गई है।

बाढ़ प्रभावितों के दुख दर्द और सरकार की मजबूरियों को समझते हुए ‘दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप’ ने भी मदद के हाथ बढ़ाते हुए ‘दिव्य हिमाचल सहायता कोष’ से दो लाख रुपए की प्रथम किस्त आपदा पीडि़तों को जारी करने की घोषणा की है। मीडिया गु्रप ने देश-परदेश के आमजन से आग्रह किया है कि वे भी इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग देें और आपदा प्रभावितों की मदद के लिए आगे आएं। दानी सज्जन ‘दिव्य हिमाचल सहायता कोष’ में अपने सामथ्र्य अनुसार दान दे सकते हैं।

इस पते पर भेजें मदद

प्रभावितों की मदद के लिए कैश, चेक या डिमांड ड्राफ्ट ‘दिव्य हिमाचल सहायता कोष’ के नाम पर भेजें

दिव्य हिमाचल सहायता कोष, दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप, पुराना मटौर, कांगड़ा, हि. प्र.-176001 या क्यूआर कोड स्कैन करें

हेल्पलाइन

सभी दानियों के नाम ‘दिव्य हिमाचल’ में प्रकाशित किए जाएंगे। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें- 70181-97293, 94184-07889, 94182-55757, 98163-24264, 78078-44144

नोट: दान की गई राशि को आयकर की धारा 80 जी के तहत छूट प्राप्त है।

: *संसद में राहत पैकेज मांगें हिमाचल के सांसद* 

मुख्यमंत्री सुक्खू ने मानसून सत्र के पहले दिन भाजपा के सभी सांसदों से मांगा सहयोग

संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को एक संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से लिखा है कि आज से संसद का मानसून सत्र शुरू हो चुका है। देश की सबसे बड़ी पंचायत में जनता के मुद्दों पर सार्थक बहस होगी। अत: सभी सांसदों को इस बात की जानकारी होगी कि हिमाचल प्रदेश भीषण प्राकृतिक आपदा से गुजऱ रहा है। इस आपदा में लोगों के आशियाने उजड़ गए, जानें चली गईं, जीवन भर की पूंजी और उम्मीदें मलबे में दबने से लोग पीड़ा में हैं। सीएम ने कहा कि मेरा देश के सभी सम्मानित जनप्रतिनिधियों और लोकसभा एवं राज्यसभा में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसदों से आग्रह है कि वे इस सत्र में हिमाचल की आवाज़ बनें।

हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष आपदा राहत पैकेज की मांग करें। साथ ही बार-बार आने वाली आपदाओं के कारण जानने और उसे रोकने के लिए एक ठोस पहल पर भी चर्चा की जाए। एक राज्य के दु:ख और पीड़ा में होने पर पूरे देश का उसके साथ खड़ा होना ही हमारे लोकतंत्र और मानवता की पहचान है। गौर हो कि वर्तमान में राज्य से चार लोकसभा और तीन राज्यसभा के सांसद हैं और सभी भाजपा के हैं।

हिमाचल को चाहिए बिना शर्तों वाला राहत पैकेज

केंद्र सरकार ने 2023 में आई प्राकृतिक आपदा के बदले पोस्ट डिजास्टर नीड असेस्मेंट के तहत 2006 करोड़ मंजूर किए हैं, लेकिन इस धनराशि को लेने के लिए कई शर्र्तंे लगाई गई हैं। पहले राज्य सरकार को उस वक्त हुए नुकसान का प्रोजेक्ट प्रोपोजल भेजना होगा। मुख्यमंत्री का तर्क है कि आपदा प्रभावित लोगों की एकदम मदद करने के लिए राज्य सरकार को ऐसे राहत पैकेज की जरूरत है, जिस पर शर्तें न लगी हों। उन्होंने यह भी ऑफर किया था कि इस पैकेज के लिए यदि भाजपा नेताओं के साथ उन्हें दिल्ली भी जाना पड़े, तो वह जाने को तैयार हैं।

नदी-नालों, जोखि़म वाली जगहों से दूर ही रहें लोग

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में रविवार रात से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें पूरी तरह सक्रिय हैं और हालात पर लगातार नजऱ रखी जा रही है। लोगों से सीएम ने आग्रह किया है कि सतर्कता एवं सावधानी बरतें। नदी, नालों या जोखि़म वाली जगहों पर न जाएं। मौसम विभाग तथा प्रशासन द्वारा अन्य सभी निर्देशों का पालन अवश्य करें।

: *बाल की खाल निकालने की आदत है जयराम ठाकुर को, नेता प्रतिपक्ष के बयान पर जगत सिंह नेगी का पलटवार* 

मेरे जनजातीय होने के प्रति हीन भावना रखते हैं जयराम

विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर द्वारा आपदा के मामले में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की घेराबंदी करने पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी पलटवार किया है। उन्होंने अपने पलटवार में एक बड़ा आरोप विपक्ष के नेता पर लगा दिया है। यहां पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए जगत सिंह नेगी ने कहा कि न जाने क्यों जयराम ठाकुर उनके प्रति हीन भावना रखते हैं। उन्होंने कहा कि उनके जनजातीय होने की वजह से जयराम ठाकुर उनके प्रति इस तरह की भावना रखते हैं और कोई पहली बार नहीं, बल्कि विधानसभा में भी वह उन पर निशाना साधते रहे हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि जयराम ठाकुर बाल की खाल निकालने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए भी वह मुझ पर निशाना साधते थे।

जयराम ठाकुर उन्हें जनजातीय होने की वजह से निशाना बनाते हैं और उनके लिए हीन भावना रखते हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ बात कर रेस्क्यू का काम करवाया। मंडी में आई आपदा के समय में सबसे पहले उन्होंने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। खुद दूरवर्ती इलाके में होने के बावजूद वह फीडबैक लेते रहे। उन्हेांने कहा कि भाजपा की तरह इस राहत को गिनाया नहीं जा रहा। राजस्व मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पीडि़तों को सात लाख रुपए तक की राशि प्रदान की है और आगे भी करेगी।

: *मंडी त्रासदी में एसडीआरएफ जवान बने देवदूत, 30 किलोमीटर पैदल सफर कर लोगों तक पहुंचाया राशन-दवाइयां* 

सूट-बूट में नजर आने वाले अधिकारियों के लिए विपरीत परिस्थितियों में साहबगिरी आसान नहीं होती है। सराज त्रासदी में जब लोगों पर विपत्ति आई, तो मंडी से लेकर शिमला तक के साहबों को पगडंडियां नापनी पड़ गई। सराज त्रासदी में अग्रणी भूमिका निभाने वाले एसडीआरएफ के एसपी अर्जित सेन भी इसका एक उदाहरण हैं। एसपी अर्जित सेन को 30 जून की रात त्रासदी की सूचना मिली। तुरंत प्रभाव से एसडीआरएफ की अलग-अलग टीमें गठित की गई। इन टीमों को प्रभावित स्थलों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए रवाना किया। थुनाग में असल हालातों और भयावह परिस्थितियों का पता चला, तो दो जुलाई को टीम लेकर वह खुद ही शिमला से थुनाग चल दिए। थुनाग से आगे कुछ क्षेत्रों में सडक़ की सुविधा नहीं थी। सडक़ें बंद थीं और प्रभावितों के लिए राहत पहुंचाई जानी थी। लोग एक दिन से बिना खाने और दवाइयों के रह रहे थे।

अर्जित सेन ने टीम को आदेश दिए, ‘राशन और दवाइयां पीठ पर उठाओ और चलो…।’ टीम की एक टुकड़ी थुनाग से भराड़ा तक 30 किलामीटर का पैदल सफर कर, पीठ पर राशन, दवाइयां और कुछ आवश्यक वस्तुएं लेकर चल पड़ी। एसपी के साथ होने से एसडीआरएफ जवानों का जोश बढ़ गया। 30 से 35 किलोमीटर का सफर तय कर जब भराड़ा पहुंचे, तो यह एसडीआरएफ की टीम प्रभावितों के लिए देवदूतों से कम नहीं थी। 30 जून की रात को ही सूचना मिलने के बाद मंडी डीसी और एसपी थुनाग के लिए रवाना हो गए। एसपी और डीसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सडक़ों को खुलवाना था। सडक़ें खुलवाते हुए डीसी और एसपी प्रभावित क्षेत्रों की ओर बढ़ते गए। इस बीच कई पगडंडियां नापीं और कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। डीसी अपूर्व देवगन और एसपी साक्षी वर्मा बताते हैं कि उनके लिए प्रभावितों तक राहत पंहुचाना और अब पुनर्वास ही लक्ष्य है। -एचडीएम

तहसीलदार जेसीबी पर सवार

रविवार रात से हो रही तेज बारिश से नदी-नाले थुनाग में एक बार फिर उफान पर थे। इस दौरान तहसीलदार रजत सेठी जेसीबी के पंजे में सवार होकर खड्ड पार करते हुए अपने कार्यालय पंहुचे। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। कार्यालय पहुंचकर काम को निपटाया।

: *प्रदेश में जल जीवन मिशन के दूसरे चरण की तैयारियां शुरू, कैबिनेट में जाएगा पहले चरण के काम का मसौदा* 

शर्तें पूरी करने पर मिलेगा दूसरा प्रोजेक्ट, अभी 1100 करोड़ रुपए फंसे

पंचायतों को पेयजल योजनाएं देन के लिए बन गई योजना

राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) के दूसरे चरण के प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। केंद्र सरकार ने अपने बजट में दूसरे चरण की घोषणा कर रखी है, जिस पर केंद्रीय मंत्रालय ने अपनी स्कीम बना ली है और राज्यों को भी इस संबंध में कुछ जानकारियां दी गई हैं। केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि पहले चरण के प्रोजेक्ट में जिन शर्तों को रखा गया था उनको पूरा करना होगा। ऐसे में जल्दी ही पहले चरण का पूरा ड्राफ्ट यहां कैबिनेट में लाया जाएगा और बताएंगे कि कितना काम हुआ है। यहां कैबिनेट को निर्णय लेना है।

उनके फैसला लेते ही पंचायतों को पेयजल स्कीमों का काम सौंप दिया जाएगा और दूसरे चरण की परियोजना हासिल करने को प्रदेश सरकार की तरफ से जरूरी कागजात केंद्रीय मंत्रालय को भेज दिए जाएंगे। अभी पहले चरण का मिशन यहां पर चल रहा है, जिसमें 1100 करोड़ रुपए की राशि ली जानी है। केंद्र सरकार हिमाचल को यह पैसा नहीं दे रही है। ठेकेदारों की पेमेंट करने के लिए बार-बार पैसे की डिमांड की जा रही है। इस मिशन पर खर्च करने के लिए प्रदेश सरकार के पास पैसा नहीं है और क्योंकि पैसा आना ही केंद्र से है, तो राज्य सरकार भी क्यों खर्चे, परंतु उस पर दवाब बन रहा है।

दूसरे राज्यों का पैसा भी फंसा

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जेजेएम के दूसरे चरण के मिशन की घोषणा करने के साथ ही पिछली देनदारियों को भी चुकता कर देगी। वैसे केवल हिमाचल प्रदेश ही नहीं बल्कि कई दूसरे राज्यों का पैसा भी केंद्र सरकार के पास अटका हुआ है। दूसरे चरण का प्रोजेक्ट हासिल करने से पहले हिमाचल प्रदेश को ग्रामीण क्षेत्रों की सभी पेयजल योजनाएं पंचायतों के हवाले करनी होगी। पंचायतें इन योजनाओं को चलाएंगी और जो फंड केंद्र सरकार से पंचायती राज विभाग को दिए जाते हैं उसमें से पैसा खर्च किया जाएगा। पानी की डिस्ट्रिब्यूशन से संबंधित पूरा मामला फिर पंचायतें ही देखेंगी, लेकिन इस योजना को पूरा करने के लिए यहां पर कैबिनेट से मंजूरी जरूरी चाहिए।

डाटा एंट्री ऑपरेटरों को पगार नहीं

सभी शर्तों को पूरा के बाद ही प्रदेश को जेजेएम का दूसरे चरण का प्रोजेक्ट मिलेगा। पहले चरण में 6200 करोड़ की योजना थी, जिसमें से 1100 करोड़ अभी लिए जाने हैं। यहां पर 300 से ज्यादा डाटा एंट्री ऑपरेटर इस योजना में लगाए गए थे जो मिशन का काम कर रहे थे और तीन महीने से वेतन की अदायगी नहीं हो सकी है।

: *Himachal : ग्राहकों की जेब पर कैंची; और कड़वा हुआ सरसों का तेल, गरी-किशमिश ने भी बनाई रेल* 

अचानक रेट बढऩे से ग्राहकों की जेब पर कैंची; मस्टर्ड ऑयल 40 रुपए, ड्राई फ्रूट के 500 से 600 रुपए तक पहुंचे दाम

हिमाचल प्रदेश में बरसात की मार के बीच अब रसोई में सरसों के तेल का तडक़ा अचानक महंगा होने की मार पड़ गई है। बाजार में सरसों के विभिन्न तेल के ब्रांडों में पिछले एक से दो सप्ताह में ही अचानक 35-40 रुपए प्रति किलो तक बढ़ोतरी हो गई है। अब तक 175-180 रुपए में मिलने वाले तेल के दाम 200 से 215 रुपए तक पहुंच गए हैं, जबकि उचित मूल्य की दुकानों में पुरानी सप्लाई के तहत 147-150 रुपए तक सरसों तेल मिल रहा था, जिसमें भी अब नए टेंडर होने पर बढ़ोतरी हो सकती है। इतना ही नहीं दाख (किशमिश) व गरी के दामों में भी दोगुना बढ़ोतरी हुई है। इसमें दाख 250 से सीधे 500 से 600 तक पहुंच गई है। साथ ही गरी प्रति किलो रेट की अगर बात की जाए, तो 150 से 200 से सीधे 400 रुपए दाम हो गए हैं। बरसात के बीच एक सप्ताह में ही दामों में बड़े उछाल आने से कारोबारियों संग उपभोक्ताओं को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही है।

सरसों के घटते उत्पादन से महंगाई का झटका

खाद्य तेल की कीमतों में 35 से 40 रुपए प्रति लीटर उछाल आया है। आगामी समय में यह बढ़ोतरी 45 से 50 रुपए प्रति लीटर या इससे अधिक भी पहुंच सकती है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। वहीं, दाख व गरी भी महंगी हो गई है। देश में सरसों के घटते उत्पादन का सीधा असर सरसों तेल की कीमतों पर दिखने लगा है।

मंडियों में घटी सरसों की आवक

कांगड़ा के कारोबारियों में व्यापार मंडल दाड़ी के अध्यक्ष हर्ष ओबराय, होशियार व शुभम से बात करने पर उन्होंने बताया कि सरसों के दामों में अचानक तेजी आई है। सरसों तेल की घरेलू मांग में वृद्धि हो रही है, प्रमुख मंडियों में सरसों की आवक घटकर सीमित बोरी पर आ गई है। सरसों तेल उत्पादक कंपनियां भारी मात्रा में कच्चा माल खरीद रही हैं।

: *चंबा पर मानसून का ‘हमला’, जिला में पहली बार हुई जोरदार बारिश ने खूब बरपाया कहर* 

जिला चंबा में मानसून की पहली जोरदार बारिश ने कहर बरपा दिया है। बारिश से भटियात व चुराह में खासा नुकसान हुआ है। अभी तक चंबा जिला मानसून की मार से बचा हुआ था। सोमवार को बारिश के कारण चंबा जिला की लाइफलाइन पठानकोट एनएच, चंबा-तीसा, सिहुंता-लाहडू, नूरपुर-लाहडू सहित 75 सडक़ें जगह-जगह भूस्खलन के चलते बंद हो गई। बारिश के कारण बिजली बोर्ड के 214 ट्रांसफार्मर बंद होने से कई गांव अंधेरे में डूब गए हैं। इसके साथ ही जलशक्ति विभाग की 88 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई है। बारिश के कारण तीसा व सलूणी में दस गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुई है। साथ ही कच्चे मकान भी दरक गए हैं। साहो के परोथा में गोशाला के ढहने से 22 मवेशी जिंदा दफन हो गए।

बारिश के कारण सडक़, पेयजल व बिजली व्यवस्था लडख़ड़ाने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हंै। बारिश के कारण सोमवार को चुराह उपमंडल के शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित करना पड़ा। उपायुक्त ने बारिश के बिगड़े हालातों के चलते सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। जानकारी के अनुसार सोमवार को चंबा जिला में बारिश से बरपे कहर के चलते चंबा मंडल की 15, डलहौजी की दो, तीसा की 18, भरमौर की दो और भटियात की 38 सडक़ों पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। चंबा-पठानकोट एनएच पर भी सोमवार को सात घंटे वाहनों की आवाजाही ठप रही। बारिश के कारण बिजली बोर्ड को तीसा, सलूणी व भटियात में खासा नुकसान उठाना पड़ा है। बारिश के कारण बिजली बोर्ड के तीसा में 59, सलूणी के 74, चंबा में छह और भटियात के 75 ट्रांसफार्मर बंद हो गए।

: *फ्री वाई-फाई से डाटा चोरी होने का खतरा, साइबर ठग फ्री नेटवर्क का फायदा उठाकर लोगों को लगा रहे चपत* 

फ्री वाई-फाई के चक्कर में आपका पर्सनल डाटा लीक हो सकता है। फ्री ओपन वाईफाई नेटवर्क का खामियाजा आपको अपनी मेहनत की कमाई को या पर्सनल डाटा को गंवाकर चुकाना पड़ता है। बड़े शहरों में फाइबर कनेक्टिविटी अच्छी होने के चलते इंटरनेट की स्पीड में पहले की तुलना में काफी इजाफा हुआ है, जिसके चलते ओपन वाईफाई नेटवर्क की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे यूजर अपनी डिवाइस को कनेक्ट कर काफी तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी प्राप्त कर सकता है। ऐसे में साइबर क्रिमिनल्स विभिन्न शहरों के पॉश एरिया में जाकर फ्री ओपन वाईफाई नेटवर्क यूजर को उपलब्ध करवाते हैं और जैसे ही यूजर अपनी डिवाइस को उस ओपन नेटवर्क से कनेक्ट करता है, वैसे ही उसका तमाम पर्सनल डाटा साइबर क्रिमिनल के पास अपने आप पहुंचने लगता है, जिसका साइबर क्रिमिनल किसी भी तरीके से गलत इस्तेमाल कर सकता है।

ओपन वाईफाई नेटवर्क को लेकर साइबर सैल शिमला ने एडवाइजरी जारी की है। साइबर क्रिमिनल यूजर की विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर ट्रोजन भेजते हैं जो यूजर की डिवाइस में एक बोट का काम करता है। इस प्रकार से साइबर क्रिमिनल सैकड़ों की तादाद में विभिन्न डिवाइस पर बोट भेजते हैं, जिसका प्रयोग किसी भी वेबसाइट की बैंडविथ फुल कर उस वेबसाइट को स्लो डाउन करने में किया जाता है, जिसके चलते कोई भी व्यक्ति जब उस संबंधित वेबसाइट पर जाकर महत्त्वपूर्ण काम करना चाहता है तो वह नहीं कर पाता।

फ्री वाई-फाई से न करें वित्तीय ट्रांजेक्शन

डीआईजी साइबर क्राइम मोहित चावला का कहना है कि किसी भी तरह की वित्तीय ट्रांजेक्शन करने में फ्री ओपन वाई-फाई नेटवर्क का प्रयोग न करें। साइबर क्रिमिनल्स यूजर को फ्री ओपन वाईफाई नेटवर्क उपलब्ध कराने के बाद यूजर की डिवाइस को पूरी तरह से अपने हाथ का खिलौना बना लेते हैं, जिसके बाद साइबर क्रिमिनल यूजर की डिवाइस में कीलॉगर के जरिए पैकेट कैपचरिंग करता है।

: *स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च होंगे 606.70 करोड़* 

प्रदेश में 207.50 करोड़ रुपए से और बेहतर होंगी डायग्नोस्टिक सेवाएं, मरीजों को मिलेगी सुविधा

राज्य सरकार व्यवस्था परिवर्तन के तहत केंद्रित पहलों से प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्रों को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। इस पहल के तहत प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में आशातीत सुधारों के लिए 606.70 करोड़ रुपए व्यय करेगी, जिनमें से 207.50 करोड़ रुपए प्रदेश भर में डायग्नोस्टिक सेवाओं को सुदृढ़ करने पर खर्च होंगे। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग ने डायग्नोस्टिक सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया है। यह कदम इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सटीक डायग्नोसिस करवाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रदेश के अधिकतम चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों में डायग्नोस्टिक मशीनें 15 से 20 वर्ष पुरानी हैं। ये पुरानी मशीनें चिकित्सकों को मरीजों में बीमारियों को सटीक तरह से जांचने के लिए बाधित करती हैं। चिकित्सा प्रौद्योगिकी में हुए आधुनिकीकरण के चलते वर्तमान में और अधिक प्रभावी मशीनें उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से मरीजों को सटीक एवं शीघ्र उपचार सुविधा प्रदान की जा सकती है।

इन चुनौतियों पर पार पाने के लिए मुख्यमंत्री ने अस्पतलों में पुरानी मशीनों को नए आधुनिक उपकरणों से बदलने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार के प्रस्ताव के तहत आईजीएमसी शिमला, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय मंडी, डा. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नाहन, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चंबा तथा एआईएमएसएस चमियाना, शिमला में हाई-रेजोल्यूशन 1.5 टेसला और 3 टेसला एमआरआई मशीनें स्थापित की जाएंगी। अत्याधुनिक उपकरणों से स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार होगा और इन संस्थानों में मरीजों को शीघ्र, सटीक व विश्वसनीय स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं सुनिश्चित होंगी।

सीएम ने 14 प्रमुख क्षेत्रों पर दिया बल

प्रदेश के अधिकतम स्वास्थ्य संस्थान डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सुविधाओं में उपयुक्त उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रस्ताव में 14 प्रमुख क्षेत्रों पर बल दिया है, जिनमें सिम्यूलेशन-आधारित प्रशिक्षण, कैंसर देखभाल, डिजिटल स्वास्थ्य और क्रिटिकल देखभाल आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के भीतर ही रोगियों को बेहतर देखभाल प्रदान करना है, ताकि उन्हें अब राज्य के बाहर विशेष उपचार की तलाश न करनी पड़े।

: *गांवों में निर्माण कार्यों पर नजर रखेंगी पंचायतें, खड्डों-नालों सहित अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए बनाया प्लान* 

ग्रामीण क्षेत्रों में खड्डों-नालों सहित अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए बनाया प्लान

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अब निर्माण कार्यों पर पंचायतों की सीधी और कड़ी निगरानी होगी, जिस तरह शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय निर्माण गतिविधियों पर नजर रखते हैं, उसी तर्ज पर आने वाले समय में पंचायतों को भी यह अधिकार और जिम्मेदारी देने की योजना पर काम चल रहा है। इस नई व्यवस्था का रोडमैप सरकारी स्तर पर तैयार किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य अनियंत्रित निर्माण, विशेषकर खड्डों और नालों के करीब हो रहे निर्माण पर अंकुश लगाना है। यह कदम हिमाचल में बदले हालत के कारण बरसातों में होने वाले नुकसान को देखते हुए उठाया जा रहा है।

इसके अलावा अवैध निर्माण और अतिक्रमण के बढ़ते मामलों को भी ध्यान में रखते हुए प्लान बनाना आवश्यक है। इस योजना के तहत पंचायतों को निर्माण कार्यों के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित करने और अनाधिकृत निर्माण पर रिपोर्ट करने का अधिकार दिया जाएगा। खड्डों और नालों के किनारे निर्माण पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

पानी की निकासी पर करेंगे काम

पहल का ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्वागत हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम अवैध कब्जों और अनियोजित निर्माण पर लगाम कसने में मददगार होगा, जिससे उनके गांवों में बेहतर व्यवस्था स्थापित हो सकेगी। खड्डों व नालों के निकट निर्माण रोकना अनिवार्य है। पानी की निकासी को उचित रोडमैप बनना चाहिए।

स्थानीय स्तर पर दूर होंगी समस्याएं

धर्मशाला के एक शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने बताया कि यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि हम ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी नियोजन के सिद्धांतों को धीरे-धीरे लागू करें। पंचायतों की भागीदारी से स्थानीय स्तर पर समस्याओं को बेहतर ढंग से समझा और सुलझाया जा सकेगा। कुछ लोगों का मानना है कि इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पंचायतों को पर्याप्त अधिकार, संसाधन और तकनीकी सहायता प्रदान करना अनिवार्य होगा। आने वाले समय में यह देखना होगा कि हिमाचल सरकार इस रोडमैप को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करती है।

: *खेतों में काम कर रहे थे मां-बाप, नहाने के लिए पानी की टंकी में उतर गए तीन बच्चे, दो की मौत* 

 हिमाचल प्रदेश के लाहौल के दालंग में सेना शिविर के पास रविवार को पानी की टंकी में नहाते समय दो बच्चों की डूबने से मौत हो गई। ये बच्चे एक प्रवासी दंपत्ति के थे। पुलिस के अनुसार, बच्चों के माता-पिता पास के खेतों में काम कर रहे थे तभी तीन बच्चे नहाने के लिए पानी की टंकी में उतरे जिनमें से दो डूब गए जबकि तीसरा बच गया। सूचना प्राप्त होने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शवों को अपने कब्जे में लिया। केलांग की पुलिस उपाधीक्षक रश्मि शर्मा ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव परिजनों को सौंप दिए गए।

: *हिमाचल के साथ खड़ा दिखता है केंद्र* 

सांसद अनुराग ठाकुर बोले, आपदा पर अध्यनन समिति तय करने का अमित शाह का फैसला सही

पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हिमाचल में प्राकृतिक आपदाओं की पुनरावृत्ति को देखते हुए बहुक्षेत्रीय केंद्रीय टीम के गठन के निर्णय को अभिनंदनीय बताते हुए इससे आपदा नियंत्रण की दिशा में बल मिलने की बात कही है। श्री ठाकुर ने कहा कि सदन में बहानेबाज़ी कर चर्चा से भागना विपक्ष की आदत बन चुकी है। केंद्र की मोदी सरकार का हिमाचल के प्रति विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल के हर सुख-दुख में साथ खड़ी मिलती है। प्रदेश में गत कुछ दिनों से बाढ़, बारिश व बादल फटने की घटना से प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है। प्राकृतिक आपदा के चलते हिमाचल में बड़े पैमाने पर जान व माल का नुक़सान हो रहा है।

इसी के दृष्टिगत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देवभूमि में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता को देखते हुए एक बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय टीम के गठन का निर्देश दिया है। इस केंद्रीय टीम में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुडक़ी, भारतीय उष्ण कटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे, एक भूविज्ञानी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के विशेषज्ञ हिमाचल में बार-बार हो रही बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और मूसलाधार वर्षा की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि की घटनाओं का अध्यनन करेगी। इससे हिमाचल में बार-बार आपदा आने के सटीक कारणों का पता चलेगा। साथ ही इसके नियंत्रण की कोशिशों में बल मिलेगा। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि पछले 11 वर्षों के भाजपा सदन को गरिमापूर्ण तरीक़े से चलाने व हर विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार दिखी।

: *उफान पर सतलुज, नाथपा गेट से छोड़ा पानी, नदी किनारे न जाएं लोग* 

रविवार रात से हो रही बारिश से सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ गया है। ऐसे में सतलुज नदी के किनारे जाने में खतरा है। रामपुर के नाथपा-झाकड़ी बांध में जल प्रवाह बढऩे के चलते प्रशासन ने लोगों को नदी से उचित दूरी बनाए रखने का आह्वान किया है। साथ ही विकास खंड कार्यालय, पुलिस, राजस्व और एनएचएआई के अधिकारियों से जागरूकता फैलाने और लोगों को सतर्क करने की अपील की है। रात भर से अभी तक बारिश हो रही है। इससे नाथपा बांध के दो गेट खोलने की नौबत आ रही है। हालांकि आज सुबह रेडियल गेट के माध्यम से लगभग 60 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है।

सुबह से रेडियल गेट के माध्यम से लगभग 50 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। नाथपा बांध से बहाव में कुल संभावित डिस्चार्ज करीब 124 क्यूमेक्स तक पहुंच गया है। यदि जल प्रवाह और बढ़ाए तो अतिरिक्त पानी और भी छोड़ा जा सकता है। बांध के पास लगातार सायरन बजाया जा रहा है, ताकि लोग सतर्क रहें और सतलुज नदी के किनारों से भी दूर रहें। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे स्वयं भी सतर्क रहें और दूसरों को भी सतलुज नदी से दूर रहने की सलाह दें। किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए सतर्कता बरतना आवश्यक है। लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता वाहन के माध्यम से लाउड स्पीकर से लोगों को सतलुज नदी से दूरी बनाए रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

: *हिमाचल प्रदेश: आपदा प्रभावितों के पुनर्वास के लिए विधायक कर सकेंगे दस लाख तक की मदद, नए दिशा-निर्देश जारी*

*हिमाचल प्रदेश में अब विधायक आपदा प्रभावितों के लिए प्रति व्यक्ति 75 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद कर पाएंगे। प्रत्येक विधायक एक वित्तीय वर्ष में इस तरह के कार्यों के लिए 10 लाख रुपये जारी कर सकेंगे।*

प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए विधायक प्रति व्यक्ति 75 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद जारी कर सकेंगे। *राज्य सरकार के योजना विभाग ने विधायक क्षेत्र विकास निधि खर्च करने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक विधायक एक वित्तीय वर्ष में इस तरह के कार्यों के लिए 10 लाख रुपये जारी कर सकेंगे*। पिछले दिनों प्राकृतिक आपदा की वजह से बड़ी संख्या में लोग उजड़े हैं।

प्रधान सचिव योजना देवेश कुमार ने सभी उपायुक्तों को पत्र लिखकर नए मापदंडों की अनुपालना करने के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों की प्रति सभी विधायकों को भी भेजी गई है। यह प्रावधान प्राकृतिक आपदा के दृष्टिगत जारी किए गए हैं। हालांकि, विधायक किसी भी कारण से उजड़े पात्र लोगों को यह लाभ दे सकेंगे। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि आवासों की मरम्मत या पुनर्स्थापना के लिए लाभार्थियों का चयन मुख्यमंत्री आवास योजना के मापदंडों में निहित प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में विधायक क्षेत्र विकास निधि के तहत विधायक को 2.20 करोड़ रुपये सालाना बजट दिया जाता है। यह निधि उपायुक्तों के माध्यम से आवंटित की जाती है।

*रिटेनिंग वाल और नालों के चैनलाइजेशन के लिए भी मदद करेंगे विधायक*

हिमाचल प्रदेश में विधायक रिटेनिंग वाल और नालों के चैनलाइजेशन के लिए भी विधायक क्षेत्र विकास निधि के तहत मदद कर पाएंगे। राज्य सरकार इस प्रावधान को इस वित्त वर्ष में भी 31 मार्च 2026 तक लागू रखेगी। पिछले वर्ष यह व्यवस्था सितंबर महीने के बाद की गई थी। इस बार भारी बारिश से नुकसान होने के बाद इसे जारी रखा जाएगा।

: *हिमाचल बदलेगा प्रश्नपत्रों का पैटर्न, बढ़ेंगे एमसीक्यू, रट्टा संस्कृति रुकेगी; 2026 में लागू होंगे नए बदलाव*

*हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड प्रश्नपत्र में बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्यू) की संख्या 20 से बढ़ाकर 25 से 30 तक की जाएगी।*

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड एक बार फिर प्रश्नपत्रों के पैटर्न में बदलाव करने जा रहा है। मार्च 2026 में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं से नया पैटर्न लागू होगा। *प्रश्नपत्र में बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्यू) की संख्या 20 से बढ़ाकर 25 से 30 तक की जाएगी। रट्टा मारने की प्रवृत्ति को कम करने के उद्देश्य से ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे जो विद्यार्थियों की तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच को परखेंगे।*

शिक्षा बोर्ड का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी स्कूली स्तर से ही शुरू होनी चाहिए। इसी दिशा में बहुविकल्पीय प्रश्नों को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है, ताकि विद्यार्थियों की समझ, तर्क क्षमता और विषय पर पकड़ को परखा जा सके। नए पैटर्न में ऐसे सवालों को प्राथमिकता दी जाएगी जो पाठ्यपुस्तक के किसी भी हिस्से से पूछे जा सकते हैं। इसका उद्देश्य छात्रों में गहराई से पढ़ने की आदत डालना और रट्टा मारने की परंपरा को समाप्त करना है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष लगभग एक दशक बाद स्कूल शिक्षा बोर्ड ने प्रश्नपत्र के पैटर्न में बदलाव किया था। मार्च 2025 की परीक्षाओं में 40 प्रतिशत आसान, 35 प्रतिशत सामान्य और 25 प्रतिशत कठिन प्रश्न पूछे गए। नए पैटर्न में खासकर बहुविकल्पीय प्रश्नों को ज्यादा महत्व दिए जाने के लिए विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी।

स्कूल शिक्षा बोर्ड मार्च 2026 में होने वाली परीक्षाओं के दौरान प्रश्नपत्रों में बदलाव करेगा। बहुविकल्पीय प्रश्नों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि स्कूली बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सक्षम बनाया जा सके। इसके अलावा नए पैटर्न में किताब से कहीं से भी प्रश्न पूछे जाएंगे, ताकि रट्टा मारने की प्रथा को कम किया जा सके। *-डॉ. मेजर विशाल, सचिव, स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला*

: *हिमाचल कॉलेज के प्रवक्ताओं को अनुबंध सेवा के आधार पर ओपीएस का नहीं मिलेगा लाभ, जानें विस्तार से*

*हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा निदेशालय ने असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों की अनुबंध सेवा अवधि को लाभ देने के लिए अमान्य करार दे दिया है।*

हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में कार्यरत प्रवक्ताओं को अनुबंध सेवा के आधार पर पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलेगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों की अनुबंध सेवा अवधि को लाभ देने के लिए अमान्य करार दे दिया है। इस फैसले के लिए प्रदेश में लागू हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम 2024 का हवाला दिया गया है। कॉलेज प्रवक्ताओं को नियमितीकरण की तारीख से ही लाभ देने को कहा है। सोमवार को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा की ओर से सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को नए निर्देशों के तहत ही ओपीएस का लाभ लेने वालों को सूचीबद्ध करने को कहा गया है।

उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया कि प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम 2024 के लागू होने के बाद पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन लाभों के लिए अनुबंध सेवा अवधि की गणना नहीं की जाएगी। अब केवल नियमितीकरण की तिथि से ही सेवा-संबंधी लाभ दिए जाएंगे। पेंशन गणना में अनुबंध सेवा अवधि की गणना करने की अनुमति देने वाले सभी पूर्व प्रावधान या कार्यालय ज्ञापन प्रभावी रूप से निरस्त भी कर दिए गए हैं।

प्रदेश सरकार ने पहले पात्र कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना चुनने का अवसर दिया था। इस अवधि के दौरान वित्त (पेंशन) विभाग के मई 2023 और जून 2024 के कार्यालय आदेश के तहत कई असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों ने अपनी अनुबंध सेवा अवधि को ओपीएस पात्रता में शामिल करने का विकल्प चुना था। इससे पेंशन लाभों के लिए ऐसी सेवा की गणना को हरी झंडी मिल गई थी। अब भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम 2024 के 20 फरवरी 2025 से लागू होने के बाद सभी नियम बदल गए हैं। अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार सरकारी कर्मचारी नियमितीकरण की तिथि से ही सेवा लाभों का हकदार होगा।

पहले से दिए गए सभी सेवा लाभ वापस लिए जाएंगे

इसके अलावा तीसरे प्रावधान में कहा गया है कि गैर-नियमित (अनुबंध) सेवा के लिए पहले से दिए गए सभी सेवा लाभ वापस ले लिए जाएंगे। सरकार के इस फैसले से कॉलेज प्रवक्ताओं के वित्तीय लाभ प्रभावित होंगे। जिन प्रवक्ताओं की अनुबंध सेवा को पेंशन पात्रता के लिए मान्य माना गया था, उनको अब अपने सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा। इससे उन्हें वित्तीय नुकसान या पेंशन श्रेणी में पूरी तरह से बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।

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*चंबा के साहो में गिरी गौशाला 22 मबेशियों के डबने से मौत हो गई*

साहो के परोथा में मानसून से टूटी मुसीबत, दोमंजिला गोशाला ने टेके घुटने, नुकसान का आकलन

उपतहसील साहो की ग्राम पंचायत परोथा में सोमवार सवेरे बारिश के कारण दो मंजिला गोशाला ढहने से 22 मवेशियों की मलबे में दबने से मौत हो गई। पंचायत प्रधान की सूचना पर हल्का पटवारी ने मौके का दौरा कर नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर ली है। आरंभिक अनुमान में प्रभावित को करीब चार लाख रुपए का नुकसान हुआ है। हलका पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर उपमंडलीय प्रशासन की ओर से सरकारी मेनुअल के मुताबिक राहत राशि प्रदान की जाएगी। जानकारी के अनुसार परोथा पंचायत के डिमा गांव के निवासी मान सिंह की दोमंजिला गोशाला भारी बारिश के कारण ध्वस्त हो गई।

इसके चलते गोशाला में बंधी पंद्रह बकरियां, तीन भेड़ें, एक गाय व एक बछड़ा मलबे में दब गए। गोशाला गिरने की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने राहत व बचाव कार्य आरंभ किया, लेकिन तब तक मलबे में दबे मवेशियों की मौत हो चुकी है। पंचायत प्रधान की ओर से घटना की सूचना उपमंडलीय प्रशासन को दी गई। इस पर हलका पटवारी को मौके पर भेजकर गोशाल के ढहने से हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए। हलका पटवारी ने मौके का दौरा कर नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है।

: *विशेष रूप से सूचित किया जाता है कि दिनांक 22/07/2025 को रात्रि 11 बजे से दिनांक 23/07/2025 शाम तक चमेरा- ।। डैम पर फ्लशिंग की जाएगी जिसके तहत डैम से पानी छोड़ा जाना है जिससे रावी नदी के जल स्तर में अचानक वृद्धि होगी, अतः नदी के किनारे न तो स्वयं जाएं, न ही नदी के किनारे सामान रखें और न ही मवेशियों को जाने दें।*

*एनएचपीसी लिमिटेड चमेरा- ।। पावर स्टेशन द्वारा जनहित में जारी*

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला