पहलगाम आतंकी हमले का एक साल, सेना ने सुरक्षा बढ़ाई:एकजुटता मार्च निकाला गया; मोदी ने कहा- भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा

Apr 23, 2026 - 16:04
 0  0
पहलगाम आतंकी हमले का एक साल, सेना ने सुरक्षा बढ़ाई:एकजुटता मार्च निकाला गया; मोदी ने कहा- भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा
पहलगाम आतंकी हमले को आज एक साल हो गया। इस मौके पर कश्मीर के सभी टूरिस्ट स्पॉट्स पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। घाटी में काम करने वाले हर पोनी, सर्विस प्रोवाइडर, लोकल गाइड के लिए QR कोड बेस्ड स्पेशल चेकिंग सिस्टम बनाया गया है। इधर, आतंकी हमले को याद करते हुए पीएम मोदी ने लिखा है- पिछले साल आज ही के दिन पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को याद कर रहा हूं। उन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा। एक राष्ट्र के तौर पर, हम दुख और संकल्प में एकजुट हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा। आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे। हमले में मारे गए लोगों की याद में देश के कई हिस्सों में एकजुटता मार्च निकाला जा रहा है। 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने बैसरन घाटी में घूमने आए सैलानियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। पहलगाम हमले का एक साल, 10 तस्वीरें… आतंकी हमले की बरसी पर भारतीय सेना के 2 बयान… दुनियाभर के देशों ने श्रद्धांजलि दी: अब पढ़िए उन 4 घरों की दास्तान, जहां आज भी सन्नाटा है… 1. लेफ्टिनेंट विनय नरवाल वक्त गुजरा है, पर मानो दर्द वहीं ठहरा है पहलगाम में जान गंवाने वाले हरियाणा के 26 साल के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी थे। उनके पिता राजेश नरवाल बेटे का जिक्र करते हैं, तो गला रुंध जाता है और शब्द आंसुओं में ढलने लगते हैं। कहते हैं, ‘बेटा देवदूत की तरह आया और चला गया…अब तो बस उसकी यादों का अंतहीन सफर बाकी है।’ लेफ्टिनेंट विनय करनाल के रहने वाले थे। पहलगाम हमले के 6 दिन पहले शादी हुई थी। वे पत्नी हिमांशी के सा​थ कश्मीर गए थे। माता-पिता के इकलौते बेटे थे। तीन साल पहले ही नौसेना में भर्ती हुए थे। पिता बताते हैं- शादी की तैयारियों के बीच विनय, उनके मामा और मैं शॉपिंग के लिए दिल्ली जा रहे थे। तब विनय ने रास्ते में फ्यूचर प्लान बताया था। उसने कहा था कि उसने तय किया हुआ है कि बच्चों के नाम क्या होंगे। इन्वेस्टमेंट का क्या प्लान है। 50 साल की उम्र के बाद जिंदगी कैसी होगी...। उसने घर को भी दोबारा से बनाने की बात कही थी। हमारा दर्द तो मानो उसी मंजर में ठहर गया है, रह-रहकर दिल रो उठता है। इस गहरे दुख के बीच श्रीमद्भागवत गीता का पाठ ही हमारा एकमात्र संबल है। पिता को गर्व है कि सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया, पर उनकी एक टीस बाकी है। वे चाहते हैं, विनय की स्मृति में किसी मेडिकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी का नाम रखा जाए, ताकि उसकी सेवा भावना अमर रहे। 1 मई को विनय के जन्मदिन पर परिवार रक्तदान शिविर लगाकर अपने ‘देवदूत’ को याद करेगा। 2. बितान अधिकारी के घर में अब मिठाइयां नहीं बनाई जातीं कोलकाता के रहने वाले 40 साल के बितान अधिकारी सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। वे अमेरिका के फ्लोरिडा में टीसीएस में कार्यरत थे। पत्नी और 3 साल के बेटे के साथ छुट्टियां मनाने कश्मीर गए थे। पत्नी व बच्चे के सामने उन्हें गोली मारी गई। दक्षिण कोलकाता के सूने घर में 75 वर्षीय माया अधिकारी कहती हैं, '‘अब किसके लिए बनाऊं? जो खाने का शौकीन था, वही चला गया…। ये शब्द उनके दर्द को बयां करते हैं। 22 अप्रैल 2025 को बेटे बितान अधिकारी की मौत की खबर ने परिवार को तोड़ दिया। अमेरिका से लौटे बितान ने 15 अप्रैल को ‘पोइला बैसाख’ पर मां से मिलकर आने का वादा किया था, लेकिन घर लौटा उसका शव। एक साल बाद भी मां का दुख कम नहीं हुआ है। वे कहती हैं कि अब न दूध पीती हैं, न मिठाई बनाती हैं—क्योंकि खाने वाला ही नहीं रहा। 2016 में अमेरिका गए बितान ने 2018 में यह घर बनवाया था और घर की हर चीज उसी ने खरीदी थी। उनकी कोई तस्वीर घर में नहीं रखी गई, क्योंकि उसे देखना मां के लिए असहनीय है। माया अधिकारी बहू से फोन पर बात करती हैं, जो पति को खोने के बाद छोटे बच्चे की जिम्मेदारी संभाल रही है। वे अपने गुरुदेव की पूजा कर इस दुख से उबरने की कोशिश कर रही हैं और 22 अप्रैल को बेटे की याद में घर पर पूजा करेंगी। 3. संतोष जगदाले ने बेटी को बचाया, लेकिन खुद मारे गए पहलगाम में पुणे के 50 साल के इंटीरियर डिजाइनर संतोष जगदाले परिवार और दोस्त के साथ घूमने गए थे। उन्होंने आतंकियों का बहादुरी से सामना कर बेटी की जान बचाई, लेकिन उनकी और उनके दोस्त की मौत हो गई। उनका बलिदान परिवार के लिए प्रेरणा बन गया। पिता को खोने वाली आसावरी बताती हैं- ‘पापा ने आखिरी पल में भी हिम्मत दी… ‘डरो मत, मैं हूं’ कहते हुए वे हमारे लिए खड़े रहे।’ हमले में परिवार का सहारा छिन गया, मां और दादी टूट गईं। ‘एक बेटी के लिए पिता ही उसका हीरो होता है, हमारे लिए वही सब कुछ थे,’ यह कहते हुए आसावरी की आवाज भर आती है। शुरुआत में आर्थिक तंगी रही, बाद में सरकारी मदद और पुणे नगर निगम में नौकरी मिली। आसावरी अब पिता की सीख पर चलकर घर संभाल रही हैं और जरूरतमंदों की मदद करने का संकल्प ले चुकी हैं। आसावरी कहती हैं, ‘पापा आज साथ नहीं हैं, लेकिन उनके शब्द हमेशा मेरे साथ हैं। अब घर की जिम्मेदारी मेरी है और देशसेवा ही मेरा पहला लक्ष्य है।’ 4. शुभम द्विवेदी का परिवार हर महीने 22 तारीख को भोज कराता है कानपुर के रहने वाले 30 साल के कारोबारी शुभम द्विवेदी और उनकी पत्नी ऐशन्या परिवार के 11 लोगों के साथ वे पहलगाम गए ​थे। आतंकियों ने पहले उनका नाम पूछा, फिर सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के दो महीने ही उनकी शादी हुई थी। ऐशन्या कहती हैं, ‘लाइफ पार्टनर के सामने उसके हसबैंड को मार दिया जाए, तो उसे कोई कभी नहीं भूल सकता। ये जिंदगीभर का दुख है। मुझे नहीं लगता कि मैं कोई एक पल आपको बता पाऊंगी, क्योंकि जब आप किसी को खो देते हो तो हर दिन मुश्किल हो जाता है। चाहे त्योहार हो या एनिवर्सरी। हमारी शादी के दो महीने ही हुए थे। मैंने उसके साथ कोई एनिवर्सरी नहीं मनाई, न ही कोई त्योहार। जब कभी कुछ अच्छा काम करती हूं, तो बताने का मन होता है, फिर लगता है किससे बताऊं। सबसे ज्यादा 26 फरवरी को शुभम के जन्मदिन और 12 फरवरी को जिस दिन हमारी शादी हुई थी, उस दिन उसकी बहुत ज्यादा याद आई। वहीं, पिता संजय द्विवेदी ऑफिस में बेटे की तस्वीर निहारने के बाद ही काम शुरू करते हैं। वे हर महीने की 22 तारीख को शुभम की याद में गांव में भोज कराते हैं। वे कहते हैं- 22 अप्रैल को कानपुर में शुभम को श्रद्धांजलि देने के लिए एक कार्यक्रम किया जा रहा है। कानपुर के लोगों ने जो साहस, सहयोग और ताकत हमें दी है, उससे हम उस दुख को झेल पाए हैं। हमने शुभम को शहीद का दर्जा देने की मांग की थी और अब भी कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने शुभम के पैतृक गांव में एक गेट भी बनवाया है। --------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… पहलगाम हमले की पहली बरसी- बैसरन आज भी बंद, सेना बोली- जो हदें लांघेगा उसे मुंहतोड़ जवाब मिलेगा श्रीनगर से करीब 95 किमी दूर बैसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को 26 लोगों को आतंकियों ने गोलियों से भून दिया था। तब से यह घाटी बंद है। बैसरन घाटी में किसी को भी एक तय सीमा से आगे जाने की इजाजत नहीं है। भारतीय सेना ने X हैंडल पर आतंकियों और उनके रहनुमाओं को चेतावनी दी और लिखा- भारत कुछ नहीं भूला है। पढ़ें पूरी खबर…

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला