लोक अदालत ने दिया दखल,मगध विश्वविद्यालय ने जारी किया रिजल्ट:गयाजी में 5 साल बाद छात्र को मिला न्याय; स्टूडेंट ने की 50 हजार की मांग
गया में एक छात्र को पांच साल के लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गया की पहल पर उसका लंबित रिजल्ट जारी कर दिया गया। इस संबंध में स्थायी लोक अदालत, गया के अध्यक्ष लोलार्क दूबे ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता में जानकारी दी। अध्यक्ष लोलार्क दूबे ने बताया कि औरंगाबाद के सत्येंद्र नगर मोहल्ला निवासी सुमित कुमार (वाद संख्या 62/26) पिछले पांच साल से अपने रिजल्ट को लेकर परेशान थे। सुमित ने साल 2021 में अपनी सब्सिडियरी (पूरक) परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन मगध विश्वविद्यालय ने उसका परिणाम मुख्य अंकपत्र में नहीं जोड़ा था, जिससे उसका रिजल्ट लंबित था। छात्र ने कई बार विश्वविद्यालय के चक्कर लगाए और 31 जनवरी 2024 को परीक्षा नियंत्रक को आवेदन भी दिया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने स्थायी लोक अदालत, गया में आवेदन दिया। लोक अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई शुरू की। विश्वविद्यालय ने लंबित प्रक्रिया को पूरी की लोक अदालत के हस्तक्षेप के बाद मगध विश्वविद्यालय ने लंबित प्रक्रिया को पूरी की। विश्वविद्यालय ने सब्सिडियरी परीक्षा का परिणाम मुख्य अंकपत्र में जोड़कर छात्र का अंतिम रिजल्ट और अंकपत्र जारी कर दिया। विश्वविद्यालय की ओर से प्रमाण पत्र लोक अदालत में भेजा गया, जिसे बाद में सुमित कुमार को सौंप दिया गया। साल 2024 में उन्होंने परीक्षा नियंत्रक को आवेदन देकर रिजल्ट जारी करने की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अपने वकील पिता के निर्देश पर उन्होंने 30 मार्च 2026 को स्थायी लोक अदालत में केस (संख्या 62/2026) दर्ज कराया। लोक अदालत में सुनवाई के बाद मामले ने तेजी पकड़ी और 8 अप्रैल 2026 को विश्वविद्यालय ने सुमित का रिजल्ट जारी कर प्रमाण पत्र स्थायी लोक अदालत कार्यालय में जमा कर दिया। सुमित को प्रथम श्रेणी से उतीर्णता हासिल हुई है। सुमित कुमार ने पांच साल तक रिजल्ट नहीं मिलने से हुई मानसिक व शैक्षणिक क्षति के लिए 50 लाख रुपये हर्जाने की मांग भी की है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक रिजल्ट नहीं मिलने के कारण वे निराश होकर पढ़ाई छोड़ चुके थे और छोटे-मोटे व्यवसाय में लग गए थे। हालांकि अब रिजल्ट मिलने के बाद एक बार फिर उनके भीतर पढ़ाई जारी रखने का जज्बा जाग उठा है। कोर्ट के कारण मिला न्याय अध्यक्ष लोलार्क दूबे ने इसे स्थाई लोक अदालत की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई नहीं होने से छात्र का करियर प्रभावित हुआ, लेकिन अदालत के हस्तक्षेप से उसे न्याय मिल सका।
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