आम आदमी पार्टी में आने से पहले क्या करते थे संदीप पाठक, कितनी मिलती थी सैलरी?

Apr 27, 2026 - 06:47
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आम आदमी पार्टी में आने से पहले क्या करते थे संदीप पाठक, कितनी मिलती थी सैलरी?

राजनीति की बिसात पर कब कौन सा मोहरा अपनी जगह बदल ले, यह कहना मुश्किल होता है. आम आदमी पार्टी के दिग्गज रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने अब नई सियासी राह चुनते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नेता बनने से पहले संदीप पाठक का जीवन कितना अलग था? आइए जानें कि आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने से पहले संदीप पाठक क्या करते थे और उनकी सैलरी कितनी थी.

छत्तीसगढ़ के गांव से ऑक्सफोर्ड-MIT तक का शैक्षणिक सफर

संदीप पाठक का शुरुआती जीवन किसी आम छात्र जैसा रहा है. उनका जन्म 4 अक्टूबर 1947 को छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के बेटाहा गांव में हुआ था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव की मिट्टी में ही हुई और बाद में उच्च शिक्षा के लिए वे बिलासपुर चले गए. संदीप पाठक का करियर किसी साधारण राजनेता का नहीं, बल्कि एक प्रखर शिक्षाविद का रहा है. उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (UK) से अपनी पीएचडी पूरी की और उसके बाद दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों- ऑक्सफोर्ड और MIT (USA) में बतौर रिसर्चर अपनी छाप छोड़ी. एक मेधावी छात्र और रिसर्चर के रूप में उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रही है।.

आप ज्वाइन करने से पहले क्या थे संदीप पाठक और उनकी सैलरी

राजनीति में कदम रखने से पहले संदीप पाठक IIT दिल्ली में बतौर प्रोफेसर कार्यरत थे. यदि उस दौर की बात करें, तो 7वें वेतन आयोग के नियमों के अनुसार IIT के प्रोफेसरों की सैलरी काफी आकर्षक होती है. उस दौर में एक प्रोफेसर का मूल वेतन लेवल 14A के अंतर्गत लगभग 1.59 लाख रुपये से 2.20 लाख रुपये के बीच होता था. इसमें महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य सुविधाएं जोड़ दी जाएं, तो वरिष्ठ प्रोफेसर का कुल वेतन प्रति माह 3 लाख रुपये के आंकड़े को भी पार कर जाता था. साथ ही उन्हें CPDA, शानदार आवास और चिकित्सा सुविधाएं भी मिलती थीं.

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आम आदमी पार्टी के रणनीतिकार की भूमिका

संदीप पाठक का राजनीति में आना किसी इत्तेफाक से कम नहीं था. वे अरविंद केजरीवाल के विजन और आम आदमी पार्टी की कार्यशैली से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने अपनी प्रोफेसर की कुर्सी छोड़कर पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की बागडोर थामी. साल 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां उन्होंने पर्दे के पीछे से पूरी रणनीति तैयार की और पार्टी को प्रचंड जीत दिलाई. इसके बाद उन्हें पार्टी में महासचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी गई. उन्होंने गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों में पार्टी के विस्तार के लिए प्रभारी के रूप में काम किया. साल 2022 में ही पार्टी ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें राज्यसभा भेजा था.

भाजपा में नए अध्याय की शुरुआत

अब संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम लिया है. इस बदलाव के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है. उनके माता-पिता ने खुलकर कहा है कि जनता भी यही चाहती थी. संदीप पाठक का यह सफर एक सामान्य गांव के लड़के से शुरू होकर दुनिया के बड़े शैक्षणिक संस्थानों और फिर देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा तक पहुंचा.

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