मणिपुर और मिजोरम के 'बनी मेनाशे' समुदाय को क्यों बसा रहा इजरायल, क्या है इसका इतिहास?

Apr 27, 2026 - 06:47
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मणिपुर और मिजोरम के 'बनी मेनाशे' समुदाय को क्यों बसा रहा इजरायल, क्या है इसका इतिहास?

Israel Migration: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच इजरायल चुपचाप अपनी सीमाओं से दूर भारत के उत्तर पूर्व में एक अनोखा ऑपरेशन चला रहा है. ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन नाम के एक मिशन के तहत मणिपुर और मिजोरम के 'बनी मेनाशे' समुदाय के सदस्यों को इजरायल में फिर से बसाया जा रहा है. हाल ही में ढाई सौ लोगों को पहले ही वहां पहुंचा दिया गया है और आने वाले सालों में और भी कई लोगों को लाने की योजना बनाई जा रही है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इसके पीछे की क्या वजह है और बेनी मेनाशे समुदाय का क्या इतिहास है. 

ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन क्या है?

यह एक कोऑर्डिनेटिड पहल है जिसका मकसद बनी मेनाशे समुदाय के सदस्यों को इजरायल लाना है. यह कार्यक्रम ज्यूइश एजेंसी फॉर इजरायल जैसे संगठनों के सहयोग से चलाया जा रहा है. यह एजेंसी यहूदी प्रवासन में मदद करती है. इसका लक्ष्य हजारों लोगों को फिर से बसाना है. 

बनी मेनाशे कौन हैं?

हिब्रू भाषा में बनी मेनाशे शब्द का मतलब है मेनाशे की संतानें. इस समुदाय का मानना है कि वह इजरायल की 10 खोई हुई जनजातियों में से एक के वंशज हैं. खासकर बाइबल में वर्णित मेनाशे जनजाति. इन जनजातियों को लगभग 722 ईसा पूर्व असीरियाई आक्रमण के बाद निर्वासित कर दिया गया था.

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 महाद्वीपों के पार एक लंबी यात्रा

अपनी मौखिक परंपराओं के मुताबिक इस समुदाय के पूर्वज सदियों तक फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन जैसे क्षेत्रों से होते हुए यात्रा करते रहे और लगभग 400 साल पहले भारत के उत्तर पूर्व में आकर बस गए. इस लंबी यात्रा के बावजूद उन्होंने कई यहूदी रीति रिवाजों का पालन करना जारी रखा. साथ ही इजरायल से दूर रहते हुए भी अपनी पहचान को बनाए रखा.

इजरायल द्वारा मान्यता 

2005 में एक बड़ा मोड़ आया. दरअसल इजरायल के तत्कालीन मुख्य रब्बी श्लोमो अमर ने बनी मेनाशे को इजरायल के बीज का हिस्सा मान लिया. इस मान्यता ने उनके प्रवासन के लिए कानूनी रास्ता खोल दिया. हालांकि इजरायल के कानून के तहत पूर्ण नागरिकता अधिकार पाने के लिए उन्हें वहां पहुंचने पर अभी भी औपचारिक धार्मिक धर्मांतरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. 

उन्हें क्यों बसाया जा रहा है?

इस पुनर्वास प्रयास के पीछे कई वजह हैं. धार्मिक पहचान इसमें एक बड़ी भूमिका निभाती है. क्योंकि समुदाय के कई लोग इस कदम को अपने पैतृक वतन की तरफ वापसी के रूप में देखते हैं. इसके साथ ही इजरायल को अतिरिक्त मैनपॉवर से फायदा होता है. आर्थिक अवसर भी प्रवासियों को आकर्षित करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इजरायल में मजदूरी भारत की तुलना में काफी ज्यादा है.

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला