जदयू से बागी नेता मनोज उपाध्याय ने भरा नामांकन:भोजपुर-बक्सर उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला, बोले–हम पार्टी से नहीं, मिट्टी से जुड़े हैं
भोजपुर सह बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जदयू से बागी होकर चुनावी मैदान में उतरे प्रदेश महासचिव मनोज कुमार उपाध्याय ने आज आरा में अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया। साथ ही कहा है कि हम पार्टी से नहीं मिट्टी से जुड़े हैं। बता दें कि आरा में त्रिकोणीय मुकाबला होने वाला है। नामांकन से पहले उन्होंने मां आरण्य देवी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद लिया। इसके बाद समर्थकों के साथ जुलूस के रूप में नामांकन स्थल पहुंचे, जहां उनके समर्थकों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। क्षेत्र के विकास का दिलाया भरोसा नामांकन के बाद आरा के रामलीला मैदान में आयोजित एक विशाल जनसभा में मनोज उपाध्याय ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। सभा में आरा-बक्सर क्षेत्र के सैकड़ों जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पूरे मैदान में मनोज उपाध्याय जिंदाबाद के नारों से माहौल गूंजता रहा। अपने संबोधन में उन्होंने स्थानीय समस्याओं, विकास के मुद्दों और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को प्रमुखता से उठाया और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का भरोसा दिलाया। भोजपुर सह बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव में नामांकन के बाद प्रत्याशी मनोज कुमार उपाध्याय ने भावनात्मक और राजनीतिक दोनों ही स्वर में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नामांकन दाखिल करना उनकी जिम्मेदारी थी और वे पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरे हैं। कहा- ये जनप्रतिनिधियों के सम्मान की लड़ाई साथ ही उन्होंने जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि यह चुनाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान और उनके अधिकारों की लड़ाई है। मनोज उपाध्याय ने कहा कि हम पार्टी से नहीं, मिट्टी से जुड़े हैं। जनप्रतिनिधियों का सम्मान करना, उनसे किए गए वादों को धरातल पर उतारना और उनकी आवाज को सदन तक मजबूती से पहुंचाना ही मेरा लक्ष्य है। हर जनप्रतिनिधि का सिर हमेशा सम्मान के साथ ऊंचा रहे, इसके लिए मैं चुनाव लड़ रहा हूं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके सामने भले ही दो बड़े गठबंधनों के उम्मीदवार हैं, लेकिन उनकी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। पार्टी उनके लिए परिवार के समान उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वे कई साल तक जदयू से जुड़े रहे हैं और पार्टी उनके लिए परिवार के समान है। “पार्टी मेरे लिए मां-बाप की तरह है, लेकिन इस चुनाव में मुझ पर लगातार बैठने का दबाव बनाया जा रहा था। मनोज ने कहा अगर मैं पीछे हट जाता, तो मेरी राजनीतिक हत्या हो जाती । अपने निर्णय को व्यक्तिगत भावनाओं से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता का सपना था कि वे उनके जीवनकाल में एक बार चुनाव जरूर लड़ें। आज मैं उनके आशीर्वाद से मैदान में हूं और उनकी इच्छा को पूरा करने के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के विकास के लिए चुनाव लड़ रहा हूं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाने का काम किया गया है। मेरे पास न धनबल है, न बाहुबल, लेकिन मेरे पास जनबल है। जनता के समर्थन से चुनाव लड़ रहे टिकट नहीं मिलने पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें गहरा आघात पहुंचा है, लेकिन इसके बावजूद वे जनता के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं और जनप्रतिनिधियों के भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। इस उपचुनाव में मुकाबला अब त्रिकोणीय हो गया है। एनडीए की ओर से जदयू उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद मैदान में हैं, जबकि महागठबंधन की तरफ से राजद के सोनू राय चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में मनोज उपाध्याय के बागी तेवर ने चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है।
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