बागपत में 10 हजार आयरन गोलियां जलाई गईं:स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल, वीडियो वायरल
उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के लिए वितरित की जाने वाली लगभग दस हजार आयरन की गोलियों को आग के हवाले कर दिया गया। यह घटना टटीरी-दुडभा संपर्क मार्ग के पास स्थित एक खेत में हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन आयरन की गोलियों को नष्ट किया गया, वे पूरी तरह उपयोगी थीं और उनकी एक्सपायरी अवधि में अभी करीब दो महीने का समय शेष था। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बड़ी मात्रा में गोलियों को खुले मैदान में डालकर आग लगाई जा रही है। यह गोलियां विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में खून की कमी (एनीमिया) दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा वितरित की जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम बेहद गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील है। ग्रामीणों के अनुसार, इन गोलियों से सैकड़ों जरूरतमंद महिलाओं और किशोरियों को लाभ मिल सकता था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते उन्हें बर्बाद कर दिया गया। लोगों ने सवाल उठाया कि जब गोलियां एक्सपायर भी नहीं हुई थीं, तो उन्हें जलाने की जरूरत क्यों पड़ी। इससे न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी हुई है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद वर्ग के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया गया है। मामले को लेकर जब बागपत के सीएचसी प्रभारी विभाग राजपूत से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें अभी तक इस घटना की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में उपयोगी आयरन की गोलियों को नष्ट किया गया है, तो इसकी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सीएचसी प्रभारी ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग दवाइयों के वितरण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देता है। इस तरह की घटनाएं विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और इन्हें किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, वायरल वीडियो के आधार पर स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि आयरन की गोलियों को जलाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है। यह मामला न सिर्फ लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को भी उजागर करता है।
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