दुबई से रोते हुए बेटे ने वीडियो कॉल किया:कहा- कमरे में कंपनी ने बंद किया, घर आना चाहता हूं; पूर्णिया के 10 लोग फंसे
“बाबा मैं घर आना चाहता हूं। कंपनी में काम करने दुबई आया था। लेकिन, जहां मैं रहता था। वहां बमबारी हुई। कंपनी ने हमें अब सुरक्षित रखने के लिए एक कमरे में बंद कर दिया है।” ये कहना है पूर्णिया के रहने वाले महजूद आलम का। ईरान-इजरायल वार में पूर्णिया के 10 लोग दुबई में फंसे हैं। एक पासपोर्ट खो जाने की वजह से 6 महीने पहले अरेस्ट हुआ है। जिसके पिता आज भी उसका इंतजार कर रहे हैं। एक को छोड़ कर सभी फंसे लोग मुस्लिम बिरादरी से आते हैं। किसी ने बेटे के लिए रोजा रखा है। कोई पति और पिता के लिए रोजे रखकर सलामती की दुआएं कर रहा है। बेहतर काम और आमदनी की आश में दुबई गए लोग बमबारी के बाद वहां फंसे हैं। कमरों में कैद हैं। सरकार ने बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी है। दैनिक भास्कर की टीम को के.नगर थाना क्षेत्र इलाके में आने वाले वनभाग गांव पहुंची। वनभाग और आसपास के गांव से 10 से अधिक लोग दुबई में फंसे हैं। इस गांव के पिता को बेटा का इंतजार है। पत्नी पति के लौटने की राह तक रही है। घर लौट आएं सजदे और सलामती की दुआएं की जा रही है। 40 हजार रुपए घर भेजते थे महजूद बनभाग के वार्ड 5 के रहने वाले महजूद आलम (26) आज से 6 महीने पहले ही दुबई गए थे। वे वहां एक कंपनी में पैकेजिंग का काम करते थे। पिछले 5 महीने से 40 हजार तक घर भेजते थे। मगर ईरान की ओर से दुबई पर हुई बमबारी और ईरान इजरायल के बीच बिगड़ते हालात से वे डर और दहशत के साए में जी रहे हैं। बातचीत में बनभाग के वार्ड 5 के रहने वाले 47 साल के मो मुद्दिन आलम कहते हैं कि 7 सदस्यीय परिवार में 3 बेटी और 2 बेटे हैं। दो बेटियों की शादी करने में जमापूंजी खत्म हो गई। घर की माली हालत इतनी खराब हो गई कि घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया। दोनों बेटे ने इधर उधर काम ढूंढा। मगर शादी के कर्ज का बोझ बड़ा था। एजेंट के जरिए दुबई में मिली नौकरी इसी बीच एक एजेंट ने बेटे को दुबई में बेहतर काम दिलाने का अवसर दिया। कुछ पैसे ले देकर बेटा 6 महीना पहले दुबई चला गया। वहां एक कंपनी में वो पैकेजिंग का काम कर रहा था। पिछले 5 महीने से वो 30 हजार रुपए तक भेज रहा था। मुद्दिन आलम आगे कहते हैं। कर्ज लगभग खत्म होने पर था। मगर इसी बीच दुबई पर हमले की खबर आई। इसी शाम बेटे का व्हाट्सएप कॉल आया। बेटे ने कॉल पर बताया कि दुबई में वो जहां रह रहा था। वहां बमबारी हुई। हमले के बाद उसे सरकार के निर्देश पर कंपनी ने दूसरी स्थान पर शिफ्ट किया है। कामकाज पूरी तरह से बंद है। वो और उसके जैसे कई लोग एक कमरे में बंद हैं। बाहर निकलने की साफ मनाही है। दुबई के लोकल लोग कह रहे हैं। आगे हालात असमान्य हो सकते हैं। उन्हें घर वालों की याद सता रही है। वे घर आना चाहते हैं। पिता मो मुद्दिन आलम से वीडियो कॉल पर बेटे की बातचीत हुई। पिता को देखते ही बेटे को घर की याद आ गई। आंखों में आंसू भरे होने के बावजूद महजूद ने कहा कि बाबा वापस गांव आना चाहता हूं। यहां उसे अब कुछ भी ठीक नहीं लग रहा। उसके घर की बेहद याद आ रही है। पिता मो मुद्दिन आलम ने कहा बेटे के लिए परिवार वालों ने रोजे रखा है। हम उसकी सलामती की दुआएं कर रहे हैं। सरकार से हमारी मांग है कि बेटे महजूद आलम को सकुशल वतन पहुंचा दे। सरकार का ये एहसान वे कभी नहीं भूलेंगे। पड़ोसी भी बेटे के बारे में आकर पूछते पत्नी मीना खातून कहती हैं कि जब से बेटे ने बताया है कि वो जहां रह रहा था, वहां बमबारी हुई। ऊपर वाले का लाख-लाख शुक्र अदा करते है कि वो बच गया। मगर जहन में हमेशा बुरे ख्याल आते रहते हैं। बेटे को लेकर चिंता सताती रहती है। बहन, पड़ोसी , रिश्तेदार भी अक्सर बेटे के बारे में पूछते रहते हैं। बेटे की चिंता में ठीक से खा पी नहीं रहे। उसकी सलामती के लिए सभी ने रोजा रखा है। बेटा जल्द से जल्द घर आ जाए, इससे ज्यादा एक मां को और कुछ नहीं चाहिए। सरकार से मांग हैं कि बेटे और उन जैसे मां के सैकड़ो बेटों को सरकार सुरक्षित वतन वापस ले आए। हर मां पर बहुत बड़ा कर्ज होगा। बमबारी के बाद से कामकाज बंद महजूद आलम की तरह ही वनभाग के रहने वाले मो. अंजार, मो. अफताब, मो. महताब, मो. फैजान, मो. असफर आलम भी दुबई में फंसे है। वहां रहकर कंपनी के लिए क्रेन चलाने और ऐसे ही स्किल्ड काम करते हैं। इसके बदले उन्हें 50 हजार तक मिलते हैं। मगर बमबारी के बाद से कामकाज बंद है। घर वालों को इनकी फिक्र है। चिंता में परिवार सुकून से सांस तक नहीं ले पा रहा। परिवार के लोगों की धड़कनें तेज हैं। पासपोर्ट खोने के बाद पुलिस ने किया अरेस्ट चंपानगर के सौराहा गांव के रहने वाले 26 साल के मिथुन पासवान बेहतर भविष्य की तलाश में 17 महीने पहले दुबई गए थे। परिवार ने सपने देखे थे कि बेटा कमाकर घर की हालत सुधारेगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 6 महीने पहले उसका आईडी और पासपोर्ट खो गया, जिसके बाद दुबई पुलिस ने उसे अरेस्ट में ले लिया। तब से वह सलाखों के पीछे है। पिता ने एंजेट पर लगाया लापरवाही का आरोप गांव में बूढ़े पिता कुमुद पासवान और मां बुलबुल देवी बेटे की वापसी के लिए दर-दर भटक रहे थे। दुबई पर हुए हमले के बाद बूढ़े दंपति की रातों की नींद गायब है। इससे पहले बेटे को न्याय दिलाने दंपति ने स्थानीय थाना से लेकर एसपी कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली। पिता कुमुद पासवान का आरोप है कि जिस एजेंट ने मिथुन को विदेश भेजा, उसी की लापरवाही से आज वो मुसीबत में है। एजेंट राजेश कुमार इन आरोपों से इनकार करते हुए कहता है कि आईडी खोने या बेचने की वजह से गिरफ्तारी हुई है और वह कानूनी प्रक्रिया के जरिए मिथुन को वापस लाने की कोशिश कर रहा है। इधर गांव में मायूस माता-पिता की आंखें हर दिन एक ही उम्मीद में दरवाजे पर टिकी रहती हैं। पिता की निगाहें अब सरकार और विदेश मंत्रालय की पहल पर टिकी हैं।
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