हिमाचल से राज्यसभा के लिए अनुराग शर्मा ने भरा नामांकन:इंदू की जगह लेंगे, ‌BJP ने नहीं उतारा प्रत्याशी, CM ने खड़गे-राहुल का आभार जताया

Mar 5, 2026 - 17:17
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हिमाचल से राज्यसभा के लिए अनुराग शर्मा ने भरा नामांकन:इंदू की जगह लेंगे, ‌BJP ने नहीं उतारा प्रत्याशी, CM ने खड़गे-राहुल का आभार जताया
हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा ने आज (गुरुवार को) नामांकन भरा। उन्होंने सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की मौजूदगी में नॉमिनेशन फाइल किया। इससे पहले विधानसभा में ही सीएम ने कांग्रेस विधायक दल की मीटिंग ली। इसमें राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर हाईकमान के फैसले से विधायकों को अवगत कराया। कांग्रेस ने आज सुबह ही अनुराग शर्मा को हिमाचल से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया है। हाईकमान ने 5 राज्यों में 6 उम्मीदवारों के साथ अनुराग के नाम की भी घोषणा की। वह, वर्तमान में कांगड़ा जिला कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। पार्टी ने कांगड़ा के युवा नेता अनुराग को टिकट देकर सबको चौंकाया है, क्योंकि दूर दूर तक उनका नाम चर्चा में नहीं था। वहीं बीजेपी ने इस बार चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारा। ऐसे में अनुराग शर्मा का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय है। आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा 16 मार्च को की जाएगी। हाईकमान ने जमीन से जुड़े कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजा: CM नामांकन के बाद सीएम सुक्खू ने कहा कि अनुराग 30 सालों से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। यह फैसला सभी से चर्चा के बाद लिया गया है। उन्होंने जमीन से जुड़े आम कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी का आभार जताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले राज्यसभा चुनाव में कुछ कांग्रेस विधायक बिक गए थे। लेकिन इस बार अगर भाजपा चाहे तो अपना प्रत्याशी खड़ा कर देती, कांग्रेस को कोई डर नहीं था। उन्होंने कहा बीजेपी यदि प्रत्याशी दे भी देती तो भी उन्हें हार का सामना करना पड़ता। सीएम सुक्खू के करीबी रहे अनुराग अनुराग शर्मा, मुख्यमंत्री सुक्खू के करीबी रहे हैं। पूर्व में कांग्रेस विधायक रहे सुधीर शर्मा के भी वह खास है। इसी तरह, अनुराग के पिता प्यारे लाल भी स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के भी करीबी रहे हैं। अनुराग शर्मा अभी इंटरनेशनल बीड़ बिलिंग पैरा ग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, जो कि इंटरनेशनल लेवल की पैरा ग्लाइडिंग चैम्पियनशिप का आयोजन कराती रही है। कांग्रेस का ‘कांगड़ा कार्ड’ हिमाचल की सत्ता की चाबी कांगड़ा जिला तय करता है। कांगड़ा जिला में 15 विधानसभा सीटें है। बीजेपी की मौजूदा सांसद इंदू गोस्वामी भी कांगड़ा जिला के बैजनाथ से संबंध रखती है और कांग्रेस ने भी बैजनाथ के ही नेता को प्रत्याशी बनाकर कांगड़ा जिला को साधने का प्रयास किया है। इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के अलावा कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रपक्ता सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल का नाम भी चर्चा में रहा। मगर कांग्रेस हाईकमान और सीएम सुक्खू ने इन दिग्गजों के दर किनार कर युवा नेता पर भरोसा जताया है। इंदू गोस्वामी का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा BJP की मौजूदा राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी का 6 साल का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को पूरा हो रहा है। लिहाजा इससे पहले नए सांसद का चुनाव होना है। आज नामांकन भरे जा चुके है। कल छंटनी होगी। 16 मार्च को अधिकारिक तौर पर राज्यसभा सांसद का सर्टिफिकेट मिलेगा। वहीं हिमाचल बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत नहीं है। सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास 68 विधायकों वाली विधानसभा में 40 विधायक हैं जो कि पूर्ण बहुमत से 5 विधायक ज्यादा है। वहीं, विपक्षी भाजपा के पास 28 विधायक हैं। इस वजह से बीजेपी ने इस बार प्रत्याशी नहीं दिया। ये नेता मौजूद रहे अनुराग शर्मा के नामांकन के दौरान सीएम सुक्खू के अलावा डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री, विधानसभा स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया, कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, ज्यादातर मंत्री-कांग्रेस विधायक भी मौजूद रहे। कैंडिडेट की लिस्ट… पिछले चुनाव में हुआ था उलटफेर राज्य में फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस बहुमत के बावजूद चुनाव हार गई थी। उस दौरान कांग्रेस के पास 40 विधायक थे, जबकि 3 निर्दलीय MLA भी कांग्रेस के साथ एसोसिएट थे। वहीं बीजेपी के पास बहुमत से 10 विधायक कम थे। फिर भी 25 विधायकों वाली BJP ने अपना प्रत्याशी उतारा और राज्यसभा चुनाव जीता। पिछले चुनाव में कांग्रेस के 6 विधायकों समेत 3 निर्दलीय ने भी BJP प्रत्याशी हर्ष महाजन को वोट दिया। इससे हर्ष महाजन और कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी को 34-34 वोट मिले। लॉटरी सिस्टम से हर्ष महाजन चुनाव जीत गए। इसके बाद सरकार गिरने की नौबत आई। मगर स्पीकर की सूझबूझ ने सरकार को बचा लिया। स्पीकर ने दल बदल कानून के तहत क्रॉस वोट करने वाले कांग्रेस के विधायकों को अयोग्य ठहराया। बाद में 3 निर्दलीय ने भी इस्तीफा दिया और फिर 9 सीटों पर उप चुनाव हुए। इन उप चुनाव में कांग्रेस के फिर से 40 विधायक हो गए, जबकि बीजेपी के 25 से बढ़कर 28 विधायक हुए।

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला