Iran Attacks Middle East: सऊदी अरब से यूएई तक 8 मुस्लिम देशों को ईरान ने क्यों बनाया निशाना? जानें हमले की वजह

Mar 5, 2026 - 17:16
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Iran Attacks Middle East: सऊदी अरब से यूएई तक 8 मुस्लिम देशों को ईरान ने क्यों बनाया निशाना? जानें हमले की वजह

Iran Attacks Middle East: अमेरिका और इजरायल के ईरान पर मिलिट्री हमले करने के बाद  मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ चुका है. हमले के कुछ घंटे के अंदर ईरान ने इलाके के कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. जिन देशों को निशाना बनाया गया उनमें से कई खुद मुस्लिम बहुल देश थे. इनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत शामिल हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर ईरान ने इन मुस्लिम देशों को निशाना क्यों बनाया? आइए जानते हैं.

ईरान ने मुस्लिम देशों को निशाना क्यों बनाया?

ईरानी बयानों और इलाके के सुरक्षा जानकारों के मुताबिक हमले उन देशों में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस और स्ट्रैटेजिक एसेट्स पर किए गए थे. ईरान के हमलों के पीछे की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों की मौजूदगी थी. कई खाड़ी देशों में अमेरिकी एयर बेस, नेवल फैसिलिटी और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर है. ये इस इलाके में अमेरिकी ऑपरेशन को सपोर्ट करते हैं.

ईरान लंबे वक्त से इन बेस को अपनी नेशनल सिक्योरिटी के लिए एक सीधा खतरा मान रहा है. यूनाइटेड स्टेट्स-इजरायल हमले के जवाब में तेहरान ने अमेरिकी मिलिट्री क्षमताओं को कमजोर करने और वाशिंगटन को चेतावनी देने के लिए इन जगहों को निशाना बनाने की कोशिश की. जिन देशों में यूनाइटेड स्टेट्स सेना तैनात है और जिन्हें कथित तौर पर निशाना बनाया गया उनमें बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान शामिल हैं.

एक क्षेत्रीय दबाव बनाना 

हमले के पीछे की एक और वजह इलाके के अंदर राजनीतिक दबाव को बढ़ाना था.  यूनाइटेड स्टेट्स सेना की मेजबानी करने वाले देशों में हमला करके ईरान क्षेत्रीय सरकारों पर  यूनाइटेड स्टेट्स के साथ अपने मिलिट्री सहयोग पर फिर से सोचने के लिए दबाव डालना चाहता है. तेहरान का ऐसा मानना है कि अगर खाड़ी देशों को युद्ध में घसीटा जाने का डर है तो वह ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन रोकने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल पर दबाव डाल सकते हैं.

सुप्रीम लीडर की हत्या का बदला

ईरान ने हमलों को यूनाइटेड स्टेट्स-इजरायली हमले के दौरान  सुप्रीम लीडर की मौत का बदला बताया है. दरअसल पहले हुए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े मिलिट्री कमांडर मारे गए थे. इस वजह से ईरानी अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई की. 

यूएस मिलट्री अलायंस को चुनौती देना 

ईरान का मकसद खाड़ी में यूनाइटेड स्टेट्स अलायंस के आसपास बने सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को भी चुनौती देना है. सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देश डिफेंस के लिए अमेरिकी मिलिट्री पार्टनरशिप पर काफी ज्यादा निर्भर हैं. जिन इलाकों में यूनाइटेड स्टेट्स फोर्स काम करती है, वहां पर हमला करके ईरान ने यह दिखाना चाहा कि यह अलायंस असल में होस्ट देशों को लड़ाई से बचाने के बजाय उन्हें लड़ाई में डाल सकते हैं.

कथित तौर पर प्रभावित देश 

तनाव बढ़ने के दौरान इस क्षेत्र के कई देशों में मिसाइल या फिर  ड्रोन हमले हुए हैं. यूनाइटेड अरब अमीरात में बड़े शहरों में कई जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर में रुकावट आई है. सऊदी अरब में कथित तौर पर रियाद और उसके पूर्वी इलाकों के आसपास मिलिट्री एक्टिविटी देखने को मिली. इसी के साथ कुवैत का इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी हमले की चपेट में आया. वहीं बहरीन की स्ट्रैटेजिक लोकेशन जहां पर यूनाइटेड स्टेट्स नेवी का पांचवें फ्लीट का हेड क्वार्टर है एक बड़ा टारगेट बना. इसी के साथ कतर के अल उदीद एयर बेस पर भी कथित तौर पर असर पड़ा है. ओमान में स्ट्रैटेजिक पोर्ट के पास ड्रोन एक्टिविटी हुई है और जॉर्डन और इराक में यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री एसेट्स को भी हमलों के दौरान निशाना बनाया गया.

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