हिमाचल प्रदेश में 8 महीने से CIC-IC पद खाली:1300 से ज्यादा अपीलें लंबित, पूर्व सूचना आयुक्त बोले- RTI को कमजोर कर रही कांग्रेस

Mar 5, 2026 - 17:17
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हिमाचल प्रदेश में 8 महीने से CIC-IC पद खाली:1300 से ज्यादा अपीलें लंबित, पूर्व सूचना आयुक्त बोले- RTI को कमजोर कर रही कांग्रेस
हिमाचल सरकार 8 महीने से चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) और इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (IC) की तैनाती नहीं कर पाई है। इससे सूचना का अधिकार कानून (RTI) एक्ट के तहत इन्फॉर्मेशन कमीशन ऑफिस में अपीलों के ढेर लग गए हैं। CIC और IC की तैनाती नहीं होने से अपीलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। कमीशन ऑफिस इससे सफेद हाथी साबित हो रहा है। राज्य सरकार बार-बार CIC और IC के लिए आवेदन आमंत्रित कर रही है। एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म डिपार्टमेंट ने तीसरी बार इच्छुक दावेदारों से फ्रेश आवेदन आमंत्रित किए हैं। इसकी अंतिम तिथि 20 मार्च रखी गई है। इससे पहले सरकार जून 2025 और दिसंबर 2025 में भी CIC और IC के लिए आवेदन मांग चुकी है। एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म डिपार्टमेंट की सेक्रेटरी ए. शेनामोल ने बताया कि CIC और IC के लिए फ्रेश आवेदन मांगे गए हैं। जिन्होंने पहले आवेदन कर रखा है, उन्हें भी दोबारा एप्लिकेशन देनी होगी। सूचना के अनुसार, इन्फॉर्मेशन कमीशन ऑफिस में RTI के तहत जानकारी नहीं देने की 1300 से ज्यादा नई शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। पुरानी शिकायतें भी सुनवाई नहीं होने की वजह से लंबित पड़ी हैं। इससे लोगों को RTI के तहत सूचनाएं नहीं मिल पा रही हैं। RTI को कमजोर कर रही सरकार: बातिश प्रदेश के पूर्व सूचना आयुक्त केडी बातिश ने बताया कि CIC और IC की नियुक्ति न कर सरकार RTI को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का RTI में कोई विश्वास नहीं है। UPA सरकार ने कानून तो जरूर बना दिया, लेकिन कांग्रेस को पारदर्शिता पर विश्वास नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य में अमूमन रिटायर IAS ही CIC और IC लगाए जाते रहे हैं, जबकि एक्ट में एडवोकेट, प्रोफेसर, साइंटिस्ट आदि को भी नियुक्त किए जाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि रिटायर व थके अधिकारी नियुक्ति के बाद काम नहीं करते। ऐसे में एक्ट के प्रावधान के मुताबिक अन्य लोगों को भी अवसर मिलना चाहिए। क्यों जरूरी है CIC-IC? सरकारी विभाग से जब कोई व्यक्ति RTI के तहत सूचना मांगता है और संबंधित विभाग के जन सूचना अधिकारी (PIO) जानकारी देने से इनकार करते हैं, तो उस स्थिति में लोग संबंधित विभाग की फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी के पास पहली अपील करते हैं। फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी से भी जब सूचना नहीं मिलती, तब सूचना मांगने वाला व्यक्ति इन्फॉर्मेशन कमीशन के पास पहुंचता है। इसके बाद सूचना आयोग अपीलकर्ता और संबंधित विभाग, दोनों को सुनता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग RTI के तहत मांगी गई जानकारी देने को लेकर फैसला सुनाता है। हिमाचल में कब से और क्यों खाली पड़े CIC-IC के पद पूर्व IAS एसएस गुलेरिया IC थे और आरडी धीमान CIC थे। एसएस गुलेरिया 3 जुलाई 2025 को रिटायर हुए। जून 2025 में ही पूर्व CIC आरडी धीमान को रेरा (रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण) में चेयरमैन लगाया गया। तब से CIC का पद भी खाली पड़ा है। CIC-IC के पास अपीलों की सुनवाई का अधिकार सूचना आयोग में अपील की सुनवाई का अधिकार CIC और IC के पास है। प्रदेश में अभी तक सूचना आयोग का मुख्यालय शिमला में है। सूचना आयोग शिमला के अलावा धर्मशाला और मंडी में भी बीच-बीच में अपनी कोर्ट लगाता रहा है। इन जिलों में जाकर आयोग अपीलों का निपटारा करता रहा है। हालांकि, अब दफ्तर को कांगड़ा शिफ्ट करने की तैयारी है। इन्फॉर्मेशन कमीशन ऑफिस में स्टाफ अभी भी मौजूद है, लेकिन CIC और IC के बिना उनके होने का कोई फायदा नहीं है। कमीशन ऑफिस की कोर्ट CIC और IC की तैनाती के बाद ही संभव है। कौन बन सकता है CIC और IC? CIC और IC बनने के लिए व्यक्ति को सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित होना चाहिए, जिसके पास लॉ, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंचार माध्यम या प्रशासन और शासन जैसे क्षेत्रों में व्यापक ज्ञान और अनुभव हो। ऐसे व्यक्ति CIC और IC बन सकते हैं। संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य इसके लिए आवेदन नहीं कर सकता।

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला