Prediabetes: कितनी खतरनाक कंडीशन है प्री-डायबिटिक होना, इससे बचने के क्या हैं तरीके?

Mar 5, 2026 - 17:15
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Prediabetes: कितनी खतरनाक कंडीशन है प्री-डायबिटिक होना, इससे बचने के क्या हैं तरीके?

What Is Prediabetes And Why Is It Dangerous: प्रीडायबिटीज वह स्थिति होती है जब किसी व्यक्ति का ब्लड शुगर स्तर सामान्य से ज्यादा होता है, लेकिन इतना अधिक नहीं होता कि उसे टाइप-2 डायबिटीज कहा जाए. कई लोग इसे सिर्फ एक चेतावनी या शुरुआती संकेत मानते हैं, लेकिन डॉक्टर इसे काफी गंभीरता से लेते हैं. दरअसल, यह शरीर का वह चरण है जब मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी शुरू हो चुकी होती है और अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो आगे चलकर यह डायबिटीज में बदल सकती है.

दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे हैं मामले

दुनियाभर में प्रीडायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में लोग इस स्थिति से जूझ रहे हैं, लेकिन उन्हें इसका पता तक नहीं होता. लंबे समय तक ब्लड शुगर सामान्य से ऊपर रहने पर शरीर के अंदर धीरे-धीरे नुकसान शुरू हो सकता है. इससे ब्लड वेसल्स, दिल और मेटाबॉलिक सिस्टम पर असर पड़ता है. यही वजह है कि डॉक्टर इसे एक शुरुआती चेतावनी मानते हैं, ताकि समय रहते स्थिति को संभाला जा सके.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. शिवानी चौहान ने  TOI को बताया कि प्रीडायबिटीज उन लोगों में पाई जाती है जिनका ग्लूकोज या HbA1c स्तर डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचता, लेकिन कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म सामान्य नहीं रहता. ऐसे लोगों में फास्टिंग ब्लड शुगर बढ़ा हुआ हो सकता है या फिर ग्लूकोज टॉलरेंस कम हो सकता है. आमतौर पर HbA1c का स्तर 5.7 से 6.4 प्रतिशत के बीच होने पर इसे प्रीडायबिटीज की कैटेगरी में रखा जाता है. 

क्यों बढ़ रही है चिंता?

डॉक्टरों की चिंता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह स्थिति अक्सर चुपचाप आगे बढ़ती रहती है. कई बार शरीर में छोटे-छोटे बदलाव शुरू हो जाते हैं, जैसे ब्लड वेसल्स और नसों को नुकसान, जो लंबे समय बाद गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं. अगर इस चरण में ध्यान न दिया जाए तो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.

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आज की लाइफस्टाइल भी इसके पीछे एक बड़ा कारण बन रही है. ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय पदार्थ, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, लंबे समय तक बैठकर काम करना और बढ़ता मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देते हैं. इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और शारीरिक गतिविधियां कम होने लगती हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है.

क्या इसको कंट्रोल किया जा सकता है?

अच्छी बात यह है कि प्रीडायबिटीज को सही समय पर पहचाना जाए तो इसे कंट्रोल किया जा सकता है. डॉक्टर सबसे पहले लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह देते हैं. संतुलित आहार लेना, नियमित एक्सरसाइज करना और वजन को कंट्रोल रखना काफी मददगार साबित होता है. एक्सपर्ट के अनुसार सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद कर सकती है. कई लोगों में सिर्फ इन बदलावों से ही ब्लड शुगर सामान्य स्तर पर वापस आ जाता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला